इस NCERT Class 4 EVS Solutions in Hindi Medium- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) गाइड में कक्षा 4 के EVS (NCERT, NEP 2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी 10 अध्यायों के पाठ्यपुस्तक प्रश्नों के उत्तर, अध्याय-क्रम में, नीचे दिए गए हैं।
पाठों की सूची और मुख्य अवधारणा
- अध्याय 1: मिलकर साथ रहना (Living Together)
- अध्याय 2: अपने परिवेश को जानना (Exploring Our Neighbourhood)
- अध्याय 3: प्रकृति की पाठशाला (Nature Trail)
- अध्याय 4: प्रकृति की गोद में (Growing up with Nature)
- अध्याय 5: स्वास्थ्य के लिए भोजन (Food for Health)
- अध्याय 6: स्वस्थ रहो, प्रसन्न रहो (Happy and Healthy Living)
- अध्याय 7: वस्तुएँ कैसे कार्य करती हैं? (How Things Work)
- अध्याय 8: वस्तुओं का निर्माण (How Things are Made)
- अध्याय 9: जैसा देश, वैसा भेष (Different Lands Different Lives)
- अध्याय 10: हमारा आकाश (Our Sky)
इस पेज का उपयोग कैसे करें: नीचे हर अध्याय के प्रश्न पाठ्यपुस्तक “हमारा अद्भुत संसार” (कक्षा 4, 2026-27) के क्रम में दिए गए हैं। कई प्रश्न आपके अपने अनुभव, अवलोकन या गतिविधि पर आधारित हैं — उनके लिए यहाँ नमूना उत्तर दिए गए हैं। कॉपी में अपने परिवार, पड़ोस और अवलोकन के अनुसार अपना उत्तर लिखें।
अध्याय 1: मिलकर साथ रहना (Living Together)
इस अध्याय में चंदन और उसके गाँव के लोग मिलकर वन महोत्सव मनाते हैं, पार्क को सुंदर बनाते हैं और साथ में भोजन करते हैं। अध्याय सिखाता है कि समुदाय के लोग एक-दूसरे पर निर्भर रहते हैं।
प्र. 1. आपके इलाके में पार्क, स्कूल, अस्पताल और बस स्टॉप जैसी जगहें होना क्यों ज़रूरी है?
उ. ये जगहें समुदाय की रोज़ की ज़रूरतें पूरी करती हैं — स्कूल में हम पढ़ते हैं, अस्पताल में इलाज होता है, बस स्टॉप से हम दूसरी जगह जाते हैं और पार्क में खेलते व आराम करते हैं। इनसे लोग एक-दूसरे से मिलते-जुलते भी हैं।
प्र. 2. अगर इनमें से एक या अधिक जगहें आपके इलाके में न हों, तो जीवन कैसा होगा?
उ. जीवन कठिन हो जाएगा। जैसे — अस्पताल न हो तो बीमार व्यक्ति को इलाज के लिए दूर जाना पड़ेगा; बस स्टॉप न हो तो आना-जाना मुश्किल होगा; पार्क न हो तो बच्चों के खेलने की सुरक्षित जगह नहीं रहेगी।
प्र. 3. इन जगहों को साफ़ और सुरक्षित रखने के लिए आप क्या कर सकते हैं?
उ. कूड़ा केवल कूड़ेदान में डालेंगे, दीवारों पर नहीं लिखेंगे, पौधों और झूलों को नुकसान नहीं पहुँचाएँगे, पानी बर्बाद नहीं करेंगे, और कोई टूट-फूट दिखे तो बड़ों को बताएँगे।
प्र. 4. पार्क को विकसित करने और उसकी देखभाल के लिए किन-किन कामों की ज़रूरत होती है?
उ. पेड़-पौधे लगाना, पानी देना, घास काटना, सफ़ाई करना, बेंच व झूले लगाना और उनकी मरम्मत करना, रास्ते बनाना, बिजली/रोशनी की व्यवस्था करना। इसके लिए माली, सफ़ाईकर्मी, बढ़ई, बिजली मिस्त्री आदि की मदद लगती है।
प्र. 5. “ज़रूरत के समय समुदायों का साथ आना ज़रूरी है।” इस कथन के बारे में आप क्या सोचते हैं?
उ. यह कथन सही है। मुश्किल समय — जैसे बाढ़, बीमारी या किसी दुर्घटना — में जब सब मिलकर मदद करते हैं, तो काम जल्दी और आसानी से हो जाता है और किसी को अकेलापन महसूस नहीं होता।
प्र. 6. क्या आपके इलाके के लोग एक-दूसरे का साथ देते हैं? कोई एक ऐसा अवसर याद कीजिए।
उ. (नमूना उत्तर) हाँ। जब हमारे पड़ोस में एक परिवार के घर शादी थी, तो सभी पड़ोसियों ने सजावट, खाना बनाने और मेहमानों के स्वागत में मदद की।
प्र. 7. किसी त्योहार या अवसर की तैयारी में आप परिवार या समुदाय में मिलकर एक-दूसरे की मदद कैसे करते हैं?
उ. (नमूना उत्तर) दीवाली से पहले हम सब मिलकर घर की सफ़ाई करते हैं — कोई झाड़ू लगाता है, कोई सजावट करता है और कोई मिठाई बनाने में मदद करता है। इससे काम जल्दी पूरा होता है।
प्र. 8. हम प्रकृति और अपने पड़ोस की देखभाल किन तरीकों से कर सकते हैं? कुछ लिखिए।
उ. (क) पेड़ लगाना और उन्हें पानी देना, (ख) कूड़ा इधर-उधर न फेंकना, (ग) पानी और बिजली बचाना, (घ) पत्तियों को जलाने के बजाय गड्ढे में दबाकर खाद बनाना, (ङ) प्लास्टिक का कम उपयोग करना।
प्र. 9. मदद करने और मिलकर काम करने से हमारा समुदाय बेहतर कैसे बनता है?
उ. मिलकर काम करने से बड़े काम भी आसान हो जाते हैं, आपसी भरोसा और प्रेम बढ़ता है, और हर व्यक्ति को लगता है कि वह समुदाय का हिस्सा है।
प्र. 10. स्कूल में अलग-अलग लोग क्या भूमिका निभाते हैं?
उ. शिक्षक — हमें नई बातें सिखाते हैं; स्कूल बस चालक — हमें सुरक्षित स्कूल लाते-ले जाते हैं; सफ़ाईकर्मी/देखभालकर्ता — स्कूल को साफ़ रखते हैं; चौकीदार — स्कूल की सुरक्षा करते हैं; छात्र — पढ़ाई करते हैं और कक्षा को साफ़-सुथरा रखते हैं।
प्र. 11. (क) स्कूल में सभी के लिए एक टीम की तरह काम करना क्यों ज़रूरी है? (ख) स्कूल समुदाय के सदस्य के रूप में आपकी क्या भूमिका है?
उ. (क) क्योंकि स्कूल तभी अच्छे से चलता है जब हर व्यक्ति अपना काम ठीक से करे — एक भी व्यक्ति का काम छूटे तो सबको परेशानी होती है। (ख) समय पर स्कूल आना, ध्यान से पढ़ना, कक्षा साफ़ रखना, दोस्तों की मदद करना और स्कूल की चीज़ों का ध्यान रखना।
प्र. 12. पहेलियाँ बूझिए।
उ. (क) जहाँ लोग सवारी के लिए इंतज़ार करते हैं और बसें आती-जाती हैं — बस स्टॉप। (ख) जहाँ चिट्ठियाँ, टिकट और पार्सल रहते हैं — डाकघर। (ग) रंग, रोशनी और भीड़ वाली जगह जहाँ फल-सब्ज़ियाँ मिलती हैं — बाज़ार। (घ) जहाँ झूले और फिसलपट्टी पर खेलते हैं — पार्क / खेल का मैदान।
अध्याय 2: अपने परिवेश को जानना (Exploring Our Neighbourhood)
इस अध्याय में बच्चे पड़ोस की जगहों — डाकघर, अस्पताल, बैंक — और वहाँ काम करने वाले लोगों के बारे में जानते हैं। साथ ही संचार, यातायात, बचत और दिशाओं की समझ बनती है।
प्र. 1. डाकघर लोगों को एक-दूसरे से जुड़े रहने में कैसे मदद करता है?
उ. डाकघर चिट्ठियाँ, पार्सल और मनीऑर्डर एक जगह से दूसरी जगह पहुँचाता है। इससे दूर रहने वाले लोग भी एक-दूसरे को संदेश, सामान और पैसे भेज पाते हैं।
प्र. 2. बड़ों से पता कीजिए कि आपकी उम्र में वे एक-दूसरे से कैसे संपर्क करते थे। आज के तरीके से यह कैसे अलग है?
उ. (नमूना उत्तर) दादा-दादी के समय लोग चिट्ठी, तार (टेलीग्राम) या लैंडलाइन फ़ोन से बात करते थे, जिसमें कई दिन लग जाते थे। आज मोबाइल फ़ोन, वीडियो कॉल और संदेशों से तुरंत बात हो जाती है।
प्र. 3. हम यह कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि जो खबर हम दूसरों को बताते हैं, वह सच है?
उ. खबर आगे भेजने से पहले उसे भरोसेमंद स्रोत — जैसे अख़बार, सरकारी सूचना या बड़ों/शिक्षकों — से जाँच लें। बिना जाँचे कोई संदेश आगे न भेजें।
प्र. 4. आप सबसे ज़्यादा किस यातायात के साधन का उपयोग करते हैं? चित्रों में दिखाई गई संरचनाओं (जैसे पुल, सुरंग, फ्लाईओवर) ने यात्रा को कैसे तेज़ बनाया है?
उ. (नमूना उत्तर) मैं साइकिल/बस का सबसे ज़्यादा उपयोग करता हूँ। पुल से नदी पार करना आसान हुआ, सुरंग से पहाड़ के आर-पार सीधा रास्ता बना और फ्लाईओवर से भीड़-भाड़ वाले चौराहों पर रुकना नहीं पड़ता — इससे समय बचता है और जगहें आपस में जुड़ती हैं।
प्र. 5. अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र में काम करने वाले लोगों और उनकी भूमिका की सूची बनाइए।
उ. डॉक्टर — रोग की जाँच और इलाज; नर्स — मरीज़ों की देखभाल, दवा और इंजेक्शन देना; फ़ार्मासिस्ट — दवाइयाँ देना; लैब तकनीशियन — खून आदि की जाँच; एम्बुलेंस चालक — मरीज़ को जल्दी अस्पताल पहुँचाना; सफ़ाईकर्मी — अस्पताल साफ़ रखना।
प्र. 6. पैसे बचाना क्यों ज़रूरी है? आप और ज़्यादा पैसे कैसे बचा सकते हैं?
उ. बचत से ज़रूरत या मुश्किल के समय पैसे काम आते हैं और हम अपनी पसंद की ज़रूरी चीज़ भी ख़रीद पाते हैं। ज़्यादा बचत के लिए — गुल्लक में पैसे डालें, बेवजह की चीज़ें न ख़रीदें, चीज़ों को संभालकर रखें ताकि बार-बार न ख़रीदनी पड़ें।
प्र. 7. (क) पैसे बचाने के अलावा लोग बैंक का उपयोग और किन कामों के लिए करते हैं? (ख) ATM क्या है और यह कैसे मदद करता है?
उ. (क) पैसे जमा करना और निकालना, दूसरों को पैसे भेजना, क़र्ज़ (लोन) लेना, चेक जमा करना और कीमती चीज़ें लॉकर में सुरक्षित रखना। (ख) ATM एक मशीन है जिससे बैंक कार्ड की मदद से कभी भी पैसे निकाले जा सकते हैं — इसके लिए बैंक खुलने का इंतज़ार नहीं करना पड़ता।
प्र. 8. नोट को ध्यान से देखिए — (क) उसका मूल्य क्या है? (ख) उस पर कितनी भाषाएँ दिखती हैं? (ग) उस पर कौन-से चित्र या चिह्न हैं?
उ. (क) नोट पर लिखा अंक देखें, जैसे ₹10, ₹50 या ₹100। (ख) सामने हिंदी और पीछे अंग्रेज़ी में लिखा होता है, और पीछे बने भाषा-पैनल में 15 भारतीय भाषाओं में मूल्य लिखा होता है — यानी कुल 17 भाषाएँ। (ग) महात्मा गांधी का चित्र, अशोक स्तंभ का चिह्न, रिज़र्व बैंक का नाम, स्वच्छ भारत का लोगो और पीछे किसी प्रसिद्ध स्मारक का चित्र।
प्र. 9. अपने स्कूल से किसी जगह तक का रास्ता दिशाओं (बाएँ, दाएँ, आगे, पीछे) और पहचान-चिह्नों (लैंडमार्क) की मदद से कैसे समझाएँगे?
उ. (नमूना उत्तर) स्कूल के गेट से निकलकर दाएँ मुड़ें, सीधे चलकर मंदिर तक जाएँ, फिर बाएँ मुड़ें — डाकघर पानी की टंकी के ठीक सामने है।
प्र. 10. आपातकालीन सेवाओं में काम करने वाले लोग और उनके वाहन बताइए। उन्हें धन्यवाद देना क्यों ज़रूरी है?
उ. पुलिस — पुलिस जीप/वैन; अग्निशमन कर्मी (फ़ायर ब्रिगेड) — दमकल गाड़ी; डॉक्टर व स्वास्थ्यकर्मी — एम्बुलेंस। ये लोग अपनी जान जोखिम में डालकर हमें सुरक्षित रखते हैं, इसलिए उनका सम्मान और धन्यवाद करना ज़रूरी है।
अध्याय 3: प्रकृति की पाठशाला (Nature Trail)
इस अध्याय में बच्चे आभा दीदी के साथ प्रकृति भ्रमण पर जाते हैं — पेड़, पक्षी, पानी के जीव, कीट और पत्तियों को ध्यान से देखते हैं और समझते हैं कि सभी जीव एक-दूसरे से जुड़े हैं।
प्र. 1. चिड़ियाघर या जंगल में रहते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए? ये नियम क्यों ज़रूरी हैं?
उ. जानवरों को न छेड़ें और न खाना खिलाएँ, शोर न करें, कूड़ा न फैलाएँ, तय रास्ते पर ही चलें, बड़ों/गाइड के साथ रहें और पौधे न तोड़ें। ये नियम हमारी और जानवरों दोनों की सुरक्षा के लिए ज़रूरी हैं।
प्र. 2. ज़मीन पर पैरों के निशान देखकर क्या पता चलता है?
उ. पैरों के निशान से पता चलता है कि वहाँ से कौन-सा जानवर गुज़रा है — जैसे हिरण के खुर के दो हिस्से वाले निशान, खरगोश के छोटे निशान। निशान का आकार और गहराई जानवर के आकार का संकेत देते हैं।
प्र. 3. पानी में और उसके आस-पास रहने वाले जानवरों की सूची बनाइए और बताइए वे कैसे चलते हैं।
उ. मछली — तैरती है; केकड़ा — चलता है (बगल की ओर); मेंढक — कूदता है और तैरता भी है; कछुआ — तैरता है और ज़मीन पर धीरे-धीरे चलता है; मगरमच्छ — तैरता है और ज़मीन पर रेंगकर चलता है; साँप — रेंगता है और तैर भी सकता है। अन्य जीव: बत्तख, घोंघा, सारस।
प्र. 4. आपके घर और आस-पास कौन-से कीट मिलते हैं?
उ. चींटी, मक्खी, मच्छर, तितली, मधुमक्खी, टिड्डा (ग्रासहॉपर), तिलचट्टा, जुगनू आदि।
प्र. 5. अलग-अलग पौधों की पत्तियों को देखिए। उनमें रंग, आकार और बनावट के अलावा और क्या अंतर दिखा?
उ. पत्तियों पर अलग-अलग तरह की रेखाएँ (शिराएँ) होती हैं — किसी में जाल जैसी (जैसे पीपल), किसी में सीधी समानांतर (जैसे घास, केला)। कुछ पत्तियों में गंध भी होती है (जैसे नींबू, तुलसी)।
प्र. 6. “जीवन का जाल” खेल में अगर जाल का एक हिस्सा गायब हो जाए तो क्या होगा?
उ. पूरा जाल ढीला पड़ जाता है। इसी तरह प्रकृति में अगर एक जीव या पौधा खत्म हो जाए, तो उस पर निर्भर दूसरे जीवों पर भी असर पड़ता है।
प्र. 7. आपके अनुसार अलग-अलग पौधे और जानवर एक-दूसरे पर कैसे निर्भर हैं?
उ. जानवर भोजन और रहने के लिए पौधों पर निर्भर हैं (पक्षी पेड़ों पर घोंसला बनाते हैं); पौधे भी जानवरों पर निर्भर हैं — मधुमक्खी और तितली परागण करती हैं, पक्षी बीज दूर तक फैलाते हैं और जानवरों का गोबर खाद बनता है।
प्र. 8. प्रकृति वैज्ञानिक की क्या भूमिका होती है?
उ. प्रकृति वैज्ञानिक पौधों, जानवरों और उनके रहने की जगहों को ध्यान से देखते हैं, उनके बारे में लिखते हैं और यह समझते हैं कि उन्हें कैसे बचाया जाए।
प्र. 9. पता कीजिए — आपके राज्य का राजकीय पशु, पक्षी और पेड़ कौन-सा है?
उ. यह राज्य के अनुसार अलग होगा। उदाहरण — राजस्थान: पशु ऊँट (और चिंकारा), पक्षी गोडावण, पेड़ खेजड़ी। अपने राज्य की जानकारी शिक्षक या बड़ों से पता करें।
अध्याय 4: प्रकृति की गोद में (Growing up with Nature)
यह अध्याय बताता है कि हम भोजन, दवा, उत्सव और रोज़मर्रा की ज़रूरतों के लिए प्रकृति पर कैसे निर्भर हैं, और पारंपरिक ज्ञान से प्रकृति का संरक्षण कैसे होता है।
प्र. 1. अपने यहाँ अनाज और सब्ज़ियों को सुरक्षित रखने के पारंपरिक तरीके पता कीजिए।
उ. अनाज को धूप में सुखाकर रखना, अनाज में नीम की सूखी पत्तियाँ मिलाना, मिट्टी की कोठी में भंडारण, सब्ज़ियों को सुखाना (जैसे सूखी मेथी), और आम-नींबू का अचार या मुरब्बा बनाना।
प्र. 2. घर के बड़ों से बात करके किसी उपयोगी पौधे का नाम, उसका भाग और उपयोग लिखिए।
उ. तुलसी — पत्ती — सर्दी-खाँसी में काढ़ा; नीम — पत्ती/टहनी — कीड़ों से बचाव, दातुन; एलोवेरा — पत्ती का गूदा — जलने या कटने पर लगाना; अदरक — ज़मीन के अंदर का भाग — सर्दी में चाय/काढ़ा।
प्र. 3. प्राथमिक चिकित्सा (फ़र्स्ट-एड) बॉक्स में कौन-सी चीज़ें रखनी चाहिए?
उ. रूई, पट्टी, चिपकने वाली पट्टी (बैंड-एड), एंटीसेप्टिक दवा, छोटी कैंची, थर्मामीटर, साफ़ कपड़ा और दस्ताने।
प्र. 4. किसी को चोट लगने पर प्राथमिक चिकित्सा देना क्यों ज़रूरी है?
उ. प्राथमिक चिकित्सा से घाव में संक्रमण नहीं फैलता, खून बहना रुकता है और डॉक्टर तक पहुँचने से पहले चोट और ज़्यादा नहीं बिगड़ती।
प्र. 5. हम रोज़ के जीवन में प्रकृति से कौन-कौन सी चीज़ें उपयोग करते हैं? प्राकृतिक संसाधनों के ज़्यादा उपयोग से क्या समस्याएँ आती हैं?
उ. पानी, हवा, भोजन (अनाज, फल, सब्ज़ियाँ), लकड़ी, कपास, दवाइयाँ आदि। ज़्यादा उपयोग से पानी की कमी, जंगलों का कटना, प्रदूषण और जानवरों के रहने की जगह खत्म होने जैसी समस्याएँ आती हैं।
प्र. 6. हम अपने आस-पास के प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा कैसे कर सकते हैं?
उ. पेड़ लगाकर, पानी और बिजली बचाकर, कूड़ा अलग-अलग करके, प्लास्टिक कम इस्तेमाल करके और जानवरों-पक्षियों को नुकसान न पहुँचाकर।
प्र. 7. प्रकृति से जुड़े कुछ त्योहारों के बारे में बताइए।
उ. वट पूर्णिमा पर बरगद के पेड़ की पूजा की जाती है; कई जगह फलदार पेड़ लगाने का उत्सव मनाया जाता है; असम में काज़ीरंगा हाथी महोत्सव हाथियों के संरक्षण के लिए मनाया जाता है। अपने क्षेत्र के पारंपरिक नृत्य-गीत भी बड़ों से पता करें।
अध्याय 5: स्वास्थ्य के लिए भोजन (Food for Health)
इस अध्याय में स्कूल के भोजन उत्सव के ज़रिए स्वाद, संतुलित आहार, जंक फूड, क्षेत्रीय थाली और पैकेट बंद भोजन के लेबल के बारे में बताया गया है।
प्र. 1. स्वादों के आधार पर हर स्वाद के कम-से-कम पाँच खाद्य पदार्थ लिखिए।
उ. मीठा — गुड़, शहद, केला, आम, खीर; खट्टा — नींबू, इमली, दही, कच्चा आम, आँवला; नमकीन — नमक, पापड़, नमकीन, अचार, चिप्स; कड़वा — करेला, मेथी, नीम, कॉफ़ी, कुछ पत्तेदार साग; तीखा — हरी मिर्च, अदरक, लहसुन, काली मिर्च, सरसों।
प्र. 2. हमें अलग-अलग प्रकार के खाद्य पदार्थ खाने की ज़रूरत क्यों होती है? अगर हम हर दिन एक ही समूह का भोजन खाएँ तो क्या होगा?
उ. अलग-अलग भोजन से शरीर को ऊर्जा, शरीर-निर्माण और बीमारियों से बचाव के लिए ज़रूरी सभी पोषक तत्व मिलते हैं। एक ही समूह का भोजन खाने से शरीर को सभी पोषक तत्व नहीं मिलेंगे, जिससे कमज़ोरी और बीमारियाँ हो सकती हैं।
प्र. 3. कुछ और जंक फूड के नाम बताइए। हमें जंक फूड से क्यों बचना चाहिए?
उ. चिप्स, बर्गर, कोल्ड ड्रिंक, नूडल्स, पिज़्ज़ा, कैंडी। इनमें बहुत ज़्यादा तेल, नमक और चीनी होती है और पोषण बहुत कम — इन्हें ज़्यादा खाने से मोटापा, दाँतों की खराबी और पेट की समस्याएँ हो सकती हैं।
प्र. 4. अपने क्षेत्र की एक “भोजन थाली” पता कीजिए और उसके खाद्य पदार्थ लिखिए।
उ. (नमूना उत्तर) उत्तर भारत की थाली — रोटी, चावल, दाल, हरी सब्ज़ी, दही, सलाद और अचार। (अपने क्षेत्र की थाली लिखें — जैसे दक्षिण भारत में चावल, सांभर, रसम, सब्ज़ी।)
प्र. 5. क्या परिवार के सभी सदस्यों को खाना बनाना आना चाहिए? क्यों?
उ. हाँ। खाना बनाना जीवन का ज़रूरी कौशल है। सबको आने से काम का बोझ किसी एक पर नहीं पड़ता, और ज़रूरत पड़ने पर हर व्यक्ति अपना और दूसरों का ध्यान रख सकता है।
प्र. 6. पैकेट बंद खाद्य पदार्थ ख़रीदने या खाने से पहले उसका लेबल देखना क्यों ज़रूरी है?
उ. लेबल से पता चलता है कि खाना कब बना और कब तक खाने लायक है (एक्सपायरी डेट), उसमें क्या-क्या मिला है, और वह शाकाहारी (हरा निशान) है या मांसाहारी (भूरा/लाल निशान)। ख़राब या एक्सपायर्ड खाना खाने से बीमार पड़ सकते हैं।
अध्याय 6: स्वस्थ रहो, प्रसन्न रहो (Happy and Healthy Living)
यह अध्याय खेत से थाली तक भोजन की यात्रा, ध्यान से भोजन करना (सचेत भोजन), भोजन बर्बाद न करना, खेल, नींद-आराम और अपनी सुरक्षा के बारे में है।
प्र. 1. आप जो भोजन करते हैं उसके लिए आप किस-किसको धन्यवाद देना चाहेंगे? इस यात्रा में इनकी क्या भूमिका है?
उ. (क) मिट्टी — पौधों को उगने के लिए पोषण देती है। (ख) पानी — फ़सल की सिंचाई होती है। (ग) किसान — बीज बोता, फ़सल उगाता और काटता है। (घ) पशु — बैल खेत जोतने में मदद करते हैं, गाय दूध देती है और गोबर खाद बनता है। (ङ) दुकानदार — अनाज और सब्ज़ियाँ हम तक पहुँचाता है। (च) अन्य — घर में खाना बनाने वाले सदस्य।
प्र. 2. सचेत भोजन (माइंडफ़ुल ईटिंग) में — जीभ क्या भूमिका निभाती है? दाँत भोजन के साथ क्या करते हैं? मुँह में भोजन का क्या होता है?
उ. जीभ से हमें स्वाद पता चलता है और वह भोजन को मुँह में घुमाकर चबाने में मदद करती है। दाँत भोजन को काटते और पीसकर छोटे टुकड़ों में बदलते हैं। मुँह में लार मिलने से भोजन नरम और गीला हो जाता है, जिससे उसे निगलना आसान होता है।
प्र. 3. अगर कोई आपको ज़रूरत से ज़्यादा खाना दे, या थाली में कोई ऐसी चीज़ हो जो आपको पसंद न हो, तो आप क्या करेंगे?
उ. उतना ही खाना लूँगा जितना खा सकूँ, और ज़्यादा परोसने से पहले ही विनम्रता से मना कर दूँगा। नापसंद चीज़ भी थोड़ी मात्रा में चखकर देखूँगा, ताकि खाना बर्बाद न हो।
प्र. 4. जिस दिन आप बहुत खेलते हैं, उस दिन आपको कैसा लगता है? शरीर को आराम की ज़रूरत क्यों होती है?
उ. खेलने के बाद मन खुश और शरीर हल्का-फुल्का लगता है, पर थकान भी होती है। आराम और अच्छी नींद से शरीर की थकान दूर होती है, ऊर्जा वापस आती है और अगले दिन हम ध्यान से काम कर पाते हैं। ठीक से न सोने पर चिड़चिड़ापन और कमज़ोरी महसूस होती है।
प्र. 5. अगर किसी का छूना आपको असहज लगे तो आप क्या करेंगे? किसी असुरक्षित स्थिति में आप किसे बताएँगे?
उ. ज़ोर से “नहीं” कहूँगा, तुरंत वहाँ से हट जाऊँगा और यह बात किसी भरोसेमंद बड़े — माता-पिता, शिक्षक या किसी करीबी — को ज़रूर बताऊँगा, चाहे वह व्यक्ति जान-पहचान का ही क्यों न हो।
प्र. 6. दो स्थितियाँ लिखिए जब आप दृढ़ता से “नहीं” कहेंगे।
उ. (क) जब कोई अनजान व्यक्ति मुझे टॉफ़ी देकर अपने साथ चलने को कहे। (ख) जब कोई मुझे ऐसा कुछ करने को कहे जिससे मुझे या दूसरों को नुकसान हो, या कोई बात माता-पिता से छिपाने को कहे।
प्र. 7. आप अपने शरीर को मज़बूत कैसे रख सकते हैं? कौन-सी आदतें आप रोज़ अपनाएँगे?
उ. रोज़ खेलना या व्यायाम करना (दौड़, योग, रस्सी कूदना), संतुलित भोजन करना, पर्याप्त पानी पीना, समय पर सोना, हाथ धोकर खाना और दाँत साफ़ रखना।
अध्याय 7: वस्तुएँ कैसे कार्य करती हैं? (How Things Work)
इस अध्याय में फिरकी (स्पिनर) बनाकर घूमने के बारे में और पानी में अलग-अलग चीज़ें डालकर तैरने-डूबने के बारे में प्रयोग किए जाते हैं।
प्र. 1. क्या सभी वस्तुएँ घूम सकती हैं? कुछ घूमने वाली वस्तुओं की सूची बनाइए।
उ. नहीं, सभी वस्तुएँ आसानी से नहीं घूमतीं। घूमने वाली वस्तुएँ — लट्टू, सिक्का, पंखा, फिरकी, पहिया, चकरी, गोल ढक्कन।
प्र. 2. कौन-सी फिरकी ठीक से नहीं घूमी? छेद की जगह से क्या फ़र्क पड़ा?
उ. जिस फिरकी में छेद बीच में नहीं था (किनारे की ओर था), वह डगमगाई और ठीक से नहीं घूमी। जब छेद ठीक बीच में होता है तो फिरकी संतुलित रहती है और अच्छे से घूमती है।
प्र. 3. अलग-अलग रंगों से रंगी फिरकी को घुमाने पर रंगों का क्या होता है?
उ. तेज़ घूमने पर रंग अलग-अलग नहीं दिखते, बल्कि आपस में मिले हुए दिखते हैं। कई रंगों वाली फिरकी तेज़ घुमाने पर हल्की, सफ़ेद-सी दिखाई देती है।
प्र. 4. क्या सभी हल्की चीज़ें तैरीं और सभी भारी चीज़ें डूब गईं?
उ. नहीं। लकड़ी का बड़ा टुकड़ा भारी होने पर भी तैरता है, जबकि छोटी पिन या कंकड़ हल्के होने पर भी डूब जाते हैं। किसी चीज़ का तैरना या डूबना केवल उसके भार पर नहीं, बल्कि उसके पदार्थ और आकार पर भी निर्भर करता है।
प्र. 5. एल्युमिनियम फ़ॉयल को अलग-अलग आकार में पानी में डालने पर क्या हुआ?
उ. फ़ॉयल की चपटी शीट या नाव का आकार पानी पर तैरता है, लेकिन उसी फ़ॉयल को कसकर गोली (गेंद) बना देने पर वह डूब जाती है — यानी आकार बदलने से तैरना-डूबना बदल सकता है।
प्र. 6. आप तैरने वाली चीज़ को कैसे डुबाएँगे और डूबने वाली चीज़ को कैसे तैराएँगे?
उ. तैरने वाली चीज़ पर कोई भारी चीज़ (जैसे पत्थर) बाँधकर उसे डुबाया जा सकता है। डूबने वाली चीज़ को नाव जैसे चौड़े आकार में बदलकर या किसी तैरने वाली चीज़ (जैसे लकड़ी, ख़ाली बोतल) पर रखकर तैराया जा सकता है।
अध्याय 8: वस्तुओं का निर्माण (How Things are Made)
इस अध्याय में कागज़ कैसे बनता है, पुराने कागज़ से नया (पुनर्चक्रित) कागज़ कैसे बनाएँ, प्राकृतिक रंगों से रंगना और कागज़ की बर्बादी रोकने के बारे में बताया गया है।
प्र. 1. पेड़ और कागज़ का आपस में क्या संबंध है?
उ. कागज़ पेड़ों की लकड़ी के गूदे (लुगदी) से बनता है। इसलिए जितना ज़्यादा कागज़ बर्बाद होगा, उतने ज़्यादा पेड़ काटने पड़ेंगे।
प्र. 2. घर पर पुराने कागज़ से नया (पुनर्चक्रित) कागज़ कैसे बनाया जाता है?
उ. पाठ्यपुस्तक में दिए गए चरण: (1) सामग्री इकट्ठा करें — पुराने अख़बार, थोड़े मेथी के दाने और पानी। (2) अख़बार को छोटे टुकड़ों में फाड़कर पानी में भिगोएँ, उसमें थोड़े मेथी के दाने डालकर रात भर छोड़ दें — मेथी के दाने लुगदी को जोड़ने (बाइंडिंग) का काम करते हैं। (3) भीगे कागज़ और मेथी को मिक्सर या हाथों से मसलकर गीली लुगदी बनाएँ। (4) लुगदी को समतल जगह पर फैलाकर पतली शीट के रूप में बेल लें। (5) शीट को सूखने दें — पुनर्चक्रित कागज़ तैयार है। (मिक्सर का उपयोग बड़ों की मदद से करें।)
प्र. 3. पुनर्चक्रित कागज़ के टुकड़ों को हल्दी, पालक, चुकंदर और मेंहदी से रंगने पर क्या रंग आए? (प्राकृतिक रंग प्रयोग)
उ. (अपने अवलोकन के अनुसार लिखें; नमूना) हल्दी — पीला, हल्का (धुंधला) — यह उदाहरण पाठ्यपुस्तक में दिया गया है; पालक — हरा; चुकंदर — गुलाबी-लाल, चमकीला; मेंहदी — हरा-भूरा/नारंगी-भूरा। प्राकृतिक रंग पौधों के भागों (पत्ती, फूल, जड़, बीज, तना) से बनते हैं, इसलिए इनका उपयोग सुरक्षित है।
प्र. 4. क्या हम कागज़ बर्बाद करते हैं? हम कागज़ की बर्बादी कैसे कम कर सकते हैं?
उ. हाँ, अक्सर हम कॉपी के ख़ाली पन्ने फाड़कर फेंक देते हैं। बर्बादी कम करने के लिए — कागज़ के दोनों ओर लिखें, ख़ाली पन्नों से रफ़ कॉपी बनाएँ, पुरानी किताबें दूसरों को दें, कागज़ की थैलियाँ दोबारा इस्तेमाल करें और रद्दी कागज़ को पुनर्चक्रण के लिए दें।
प्र. 5. कागज़ की लुगदी से कौन-सी चीज़ें बनाई जा सकती हैं?
उ. मुखौटे, कटोरियाँ, खिलौने, फूलदान, पेन-स्टैंड, सजावटी सामान और ग्रीटिंग कार्ड।
प्र. 6. कचरा प्रबंधन के 5R कौन-से हैं? हर R का एक उदाहरण दीजिए।
उ. पाठ्यपुस्तक के अनुसार 5R हैं — (1) मना करना (Refuse): कचरा पैदा करने वाली चीज़ों को “नहीं” कहना, जैसे एक बार इस्तेमाल होने वाले कागज़ के कप न लेना। (2) कम करना (Reduce): चीज़ों का संभलकर उपयोग ताकि कचरा कम बने, जैसे नोट्स के लिए कागज़ के दोनों ओर लिखना। (3) दोबारा उपयोग (Reuse): किसी चीज़ को फेंकने से पहले कई बार उपयोग करना, जैसे गिफ़्ट बैग को अगले अवसर पर फिर से इस्तेमाल करना। (4) नए तरीके से उपयोग (Repurpose): किसी चीज़ को नए और अनोखे तरीके से काम में लेना, जैसे पुराने अख़बारों से खिलौने या सजावटी सामान बनाना। (5) पुनर्चक्रण (Recycle): कुछ चरणों की प्रक्रिया जिससे कोई चीज़ कुछ नया बन जाती है, जैसे पुराने अख़बारों से नया कागज़ बनाना।
प्र. 7. नीचे दी गई स्थितियाँ 5R में से किससे जुड़ी हैं?
उ. (क) परिवार प्लास्टिक की जगह अपने कपड़े के थैले लेकर दुकान जाता है — Reuse (दोबारा उपयोग; यह उदाहरण पाठ्यपुस्तक में हल किया गया है)। (ख) माया नारियल पानी पीने के लिए प्लास्टिक स्ट्रॉ नहीं लेती — Refuse (मना करना)। (ग) रोहन कागज़ बर्बाद न हो, इसलिए पुरानी कॉपियों के ख़ाली पन्ने इस्तेमाल करता है — Reduce (कम करना)। (घ) सारा अपनी पुरानी किताबें छोटे बच्चों को देती है — Reuse (दोबारा उपयोग)। (ङ) कबीर पुरानी बोतल को रंगकर फूलदान बनाता है — Repurpose। (च) प्रिया पुराने कपड़ों से किताबों के लिए थैला बनाती है — Repurpose। (छ) दुकानदार पुराने अख़बारों से लिफ़ाफ़े बनाता है — Repurpose (नए तरीके से उपयोग)।
अध्याय 9: जैसा देश, वैसा भेष (Different Lands Different Lives)
इस अध्याय में मैदान, रेगिस्तान, समुद्र तट और पहाड़ — अलग-अलग भू-भागों में लोगों के भोजन, कपड़े, घर, काम, पेड़-पौधों और जानवरों की तुलना की गई है।
प्र. 1. रेगिस्तान में पानी की कमी क्यों होती है? लोग रेगिस्तान में यात्रा कैसे करते हैं?
उ. रेगिस्तान में बारिश बहुत कम होती है, तेज़ गर्मी से पानी जल्दी सूख जाता है और रेत पानी को रोककर नहीं रखती। वहाँ यात्रा के लिए ऊँट का उपयोग होता है, जिसे “रेगिस्तान का जहाज़” कहते हैं; आजकल जीप और बसें भी चलती हैं।
प्र. 2. समुद्र के पास कौन-से पेड़ मिलते हैं? वे रेगिस्तान और मैदान के पेड़ों से कैसे अलग हैं?
उ. समुद्र तट पर नारियल और ताड़ के ऊँचे पेड़ मिलते हैं, जिन्हें नमी और रेतीली मिट्टी पसंद है। रेगिस्तान में कम पानी में उगने वाले कैक्टस और खेजड़ी जैसे पौधे होते हैं, और मैदानों में आम, नीम, पीपल जैसे घने पेड़।
प्र. 3. तटीय क्षेत्रों में लोग कैसे कपड़े पहनते हैं? तटीय जीवन रेगिस्तान के जीवन से कैसे अलग है?
उ. तटीय क्षेत्रों में मौसम गर्म और नम (उमस भरा) होता है, इसलिए लोग हल्के सूती कपड़े पहनते हैं। तट पर लोग मछली पकड़ते हैं, नाव चलाते हैं और खाने में मछली व नारियल ज़्यादा होता है; जबकि रेगिस्तान में पानी की कमी है, लोग पशुपालन करते हैं और ऊँट का उपयोग करते हैं।
प्र. 4. समुद्र तट को साफ़ रखना क्यों ज़रूरी है?
उ. तट पर फैला कूड़ा, ख़ासकर प्लास्टिक, समुद्र में जाकर मछलियों, कछुओं और दूसरे जीवों को नुकसान पहुँचाता है। साफ़ तट लोगों के घूमने और रोज़गार (जैसे पर्यटन, मछली पकड़ना) के लिए भी ज़रूरी है।
प्र. 5. चक्रवात के क्या बुरे प्रभाव होते हैं? समुदाय इसके लिए कैसे तैयार रह सकते हैं?
उ. चक्रवात में तेज़ हवा और भारी बारिश से घर टूटते हैं, पेड़ गिरते हैं, बाढ़ आती है और बिजली व रास्ते बंद हो जाते हैं। तैयारी के लिए — मौसम की चेतावनी सुनें, सुरक्षित आश्रय (शेल्टर) में जाएँ, पानी, सूखा खाना, टॉर्च और दवाइयाँ पहले से रखें।
प्र. 6. ठंडी जलवायु पहाड़ों पर रहने वाले लोगों के रहन-सहन और पहनावे को कैसे प्रभावित करती है?
उ. ठंड के कारण लोग मोटे ऊनी कपड़े, टोपी और जूते पहनते हैं। घर लकड़ी के बने होते हैं जो अंदर गर्मी बनाए रखते हैं, और लोग गर्म भोजन व पेय (जैसे थुकपा, चाय) पसंद करते हैं।
प्र. 7. चीड़ और बलूत (ओक) जैसे पेड़ पहाड़ों में बेहतर क्यों उगते हैं? सिक्किम की ठंडी जलवायु में याक कैसे रह पाता है?
उ. ये पेड़ ठंडी जलवायु और ढलान वाली ज़मीन में उगने के लिए अनुकूल होते हैं — चीड़ की नुकीली पत्तियों पर बर्फ़ नहीं टिकती। याक के शरीर पर लंबे घने बाल और मोटी चमड़ी होती है, जो उसे ठंड से बचाती है।
प्र. 8. सिक्किम के पारंपरिक घर लकड़ी के और ढलवाँ छत वाले क्यों बनाए जाते हैं?
उ. पहाड़ों में लकड़ी आसानी से मिलती है और लकड़ी के घर अंदर से गर्म रहते हैं। ढलवाँ छत से बारिश का पानी और बर्फ़ फिसलकर नीचे गिर जाती है, छत पर जमा नहीं होती।
प्र. 9. बरसात में पहाड़ों पर भूस्खलन क्यों होते हैं? लोगों को सुरक्षित रखने के लिए क्या किया जा सकता है?
उ. भारी बारिश से ढलानों की मिट्टी गीली और ढीली होकर नीचे खिसकने लगती है; पेड़ कटने से मिट्टी को पकड़कर रखने वाली जड़ें भी नहीं रहतीं। सुरक्षा के लिए — ढलानों पर पेड़ लगाना, बरसात में ख़तरनाक रास्तों पर यात्रा न करना, चेतावनी मानना और कमज़ोर ढलानों पर घर न बनाना।
प्र. 10. प्राकृतिक आपदा से प्रभावित लोगों की समुदाय कैसे मदद कर सकता है?
उ. भोजन, पानी, कपड़े और दवाइयाँ देकर, रहने के लिए अस्थायी जगह देकर, घर दोबारा बनाने में हाथ बँटाकर और राहत कोष में दान देकर।
अध्याय 10: हमारा आकाश (Our Sky)
इस अध्याय में सुबह, दोपहर और रात के आकाश में बदलाव, परछाईं कैसे बनती और बदलती है, चंद्रमा के आकार में बदलाव और सूर्य-चंद्रमा से जुड़े त्योहारों के बारे में बताया गया है।
प्र. 1. आकाश में सबसे चमकीली वस्तु कौन-सी है? सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आकाश कैसा दिखता है?
उ. दिन में आकाश की सबसे चमकीली वस्तु सूर्य है (रात में चंद्रमा सबसे चमकीला दिखता है)। सूर्योदय और सूर्यास्त के समय आकाश नारंगी-लाल रंग का दिखता है; सुबह पक्षी चहचहाने लगते हैं और शाम को अपने घोंसलों में लौटते हैं।
प्र. 2. सुबह, दोपहर और शाम की परछाईं में क्या अंतर है?
उ. सुबह और शाम को सूर्य नीचे होता है, इसलिए परछाईं लंबी बनती है। दोपहर में सूर्य लगभग सिर के ऊपर होता है, इसलिए परछाईं सबसे छोटी होती है। परछाईं हमेशा प्रकाश स्रोत की उलटी दिशा में बनती है।
प्र. 3. क्या परछाईं केवल धूप में ही बनती है?
उ. नहीं। परछाईं किसी भी प्रकाश स्रोत — टॉर्च, बल्ब, मोमबत्ती — से बन सकती है, जब प्रकाश के रास्ते में कोई अपारदर्शी वस्तु आ जाए।
प्र. 4. टॉर्च और छड़ी वाले प्रयोग में — टॉर्च की दूरी या दिशा बदलने पर परछाईं कैसे बदलती है?
उ. टॉर्च को छड़ी के पास लाने पर परछाईं बड़ी हो जाती है और दूर ले जाने पर छोटी। टॉर्च की दिशा बदलने पर परछाईं की दिशा भी बदल जाती है — वह हमेशा टॉर्च की उलटी तरफ़ बनती है।
प्र. 5. क्या चंद्रमा के आकार के बदलने में कोई पैटर्न है? क्या ऐसे दिन भी होते हैं जब चंद्रमा दिखाई नहीं देता?
उ. हाँ। पूर्णिमा पर चंद्रमा पूरा गोल दिखता है, फिर रोज़ थोड़ा-थोड़ा घटता है और अमावस्या को बिल्कुल दिखाई नहीं देता; फिर दोबारा बढ़ने लगता है। यह क्रम लगभग एक महीने में पूरा होता है। चंद्रमा के इन बदलते रूपों को चंद्रमा की कलाएँ कहते हैं।
प्र. 6. क्या आपके परिवार या समुदाय में सूर्य या चंद्रमा से जुड़े त्योहार मनाए जाते हैं?
उ. (नमूना उत्तर) हाँ — सूर्य से जुड़े: मकर संक्रांति/पोंगल और छठ पूजा; चंद्रमा से जुड़े: करवा चौथ, ईद (नया चाँद देखकर) और दीवाली (अमावस्या की रात)।
प्र. 7. पहेली — “एक ही रंग, पर एक आकार नहीं; रोशनी के साथ दिखती है…” — यह क्या है?
उ. परछाईं — परछाईं हमेशा काली/गहरे रंग की होती है, पर उसका आकार बदलता रहता है और वह केवल रोशनी होने पर ही बनती है।
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यह सॉल्यूशन गाइड हमारा अद्भुत संसार पुस्तक के सभी अध्यायों को कवर करती है और सरल हिंदी में लिखी गई है ताकि माता-पिता व शिक्षक भी घर पर बच्चों की मदद कर सकें। संपूर्ण किताब का PDF और अध्याय-वार आधिकारिक डाउनलोड लिंक यहाँ NCERT Class 4 EVS Hindi Medium बुक पेज पर उपलब्ध हैं।
NCERT Class 4 EVS Solutions in Hindi Medium- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. यह सॉल्यूशन पेज किसके लिए उपयोगी है?
उ. यह कक्षा 4 के छात्रों के लिए है, जो पाठ्यपुस्तक के सवालों के सीधे और सस्वर जवाब चाहते हैं।
प्र. क्या यह सवाल-जवाब NCERT पाठ्यपुस्तक पर आधारित हैं?
उ. हां, सभी उत्तर कक्षा 4 EVS “हमारा अद्भुत संसार” पाठ्यपुस्तक के सभी 10 अध्यायों के विषयों पर आधारित हैं।
प्र. यह पेज अतिरिक्त प्रश्नों वाले पेज से कैसे अलग है?
उ. यह पेज पाठ्यपुस्तक के मूल सवाल-जवाबों पर केंद्रित है, जबकि अतिरिक्त प्रश्न वाला पेज सोचने-समझने वाले HOTS प्रश्नों पर केंद्रित है।
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