कक्षा 6 (हिंदी माध्यम) की NCERT गणित पाठ्यपुस्तक गणित प्रकाश के सभी 10 अध्यायों के “आइए, पता लगाएँ” (Figure it Out) और पाठ के बीच के प्रश्नों के हल नीचे दिए गए हैं। सभी प्रश्न NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक (पुनर्मुद्रण 2026-27) से लिए गए हैं और हर गणना दोबारा जाँची गई है। जिन प्रश्नों का उत्तर पुस्तक के चित्र या आलेख पर निर्भर है, वहाँ NCERT द्वारा जारी आधिकारिक हल के मान दिए गए हैं और हल करने का तरीका भी समझाया गया है।
अध्यायों की सूची
अध्याय 1: गणित में पैटर्न — हल एवं व्याख्या
इस अध्याय में संख्याओं और आकृतियों के पैटर्न (अनुक्रम), उन्हें चित्रों से समझना और अलग-अलग अनुक्रमों के बीच के संबंध सिखाए गए हैं। पुस्तक के अनुसार गणित मुख्य रूप से पैटर्नों की खोज और यह समझने का प्रयास है कि वे पैटर्न क्यों बनते हैं।
खंड 1.1 – आइए, पता लगाएँ
- दैनिक जीवन में गणित के अन्य उदाहरण?
उ. फल-सब्ज़ी और राशन का भुगतान, वाहन की चाल का हिसाब, इमारतों के डिज़ाइन और पैटर्न, अपने घर या भूखंड का क्षेत्रफल निकालना, समय सारणी बनाना आदि। ऐसे अनेक उदाहरण हो सकते हैं। - गणित ने मानव को आगे बढ़ाने में कैसे मदद की?
उ. यह चर्चा का प्रश्न है। वैज्ञानिक प्रयोग, अर्थव्यवस्था और चुनाव चलाना, पुल और इमारतें बनाना, मोबाइल, कंप्यूटर, रेल, हवाई जहाज़, कैलेंडर और घड़ियाँ बनाना — सब में गणना और माप की ज़रूरत पड़ती है। पुस्तक के अनुसार तारों और ग्रहों की गति के पैटर्न समझकर गुरुत्वाकर्षण का सिद्धांत बना, जिससे उपग्रह और रॉकेट भेजे जा सके।
खंड 1.2 – संख्याओं में पैटर्न (सारणी 1)
प्र. 1 और 2: हर अनुक्रम का नियम और अगली तीन संख्याएँ
| अनुक्रम | नियम | अगली तीन संख्याएँ |
|---|---|---|
| सभी 1 (1, 1, 1, …) | हर पद 1 | 1, 1, 1 |
| गिनती संख्याएँ (1 … 7) | हर बार 1 जोड़ें | 8, 9, 10 |
| विषम संख्याएँ (1 … 13) | हर बार 2 जोड़ें | 15, 17, 19 |
| सम संख्याएँ (2 … 14) | हर बार 2 जोड़ें | 16, 18, 20 |
| त्रिभुजाकार संख्याएँ (1, 3, 6 … 28) | क्रम से 2, 3, 4, 5 … जोड़ें | 36, 45, 55 |
| वर्ग संख्याएँ (1, 4, 9 … 49) | 1×1, 2×2, 3×3 … | 64, 81, 100 |
| घन संख्याएँ (1, 8, 27 … 216) | 1×1×1, 2×2×2 … | 343, 512, 729 |
| विरहांक संख्याएँ (1, 2, 3, 5, 8, 13, 21) | पिछली दो संख्याओं का योग | 34, 55, 89 |
| 2 की घातें (1, 2, 4 … 64) | हर बार 2 से गुणा | 128, 256, 512 |
| 3 की घातें (1, 3, 9 … 729) | हर बार 3 से गुणा | 2187, 6561, 19683 |
खंड 1.3 – संख्या अनुक्रमों का चित्रण
- सारणी 2 के चित्र और अगला चित्र: हर चित्र में पिछले चित्र में एक नई पंक्ति या परत जोड़ें। जैसे वर्ग संख्या 25 के बाद 6×6 = 36 बिंदुओं का वर्ग, त्रिभुजाकार 15 के बाद 6 बिंदुओं की नई पंक्ति जोड़कर 21।
- नाम क्यों? 1, 3, 6, 10, 15 बिंदुओं को त्रिभुज के आकार में सजाया जा सकता है, इसलिए त्रिभुजाकार संख्याएँ; 1, 4, 9, 16, 25 बिंदु वर्ग बनाते हैं, इसलिए वर्ग संख्याएँ; 1, 8, 27, 64, 125 छोटे घनों से बड़ा घन बनता है, इसलिए घन संख्याएँ।
- 36 त्रिभुजाकार और वर्ग दोनों: 36 = 1 + 2 + 3 + 4 + 5 + 6 + 7 + 8, यानी 8 पंक्तियों का त्रिभुज; और 36 = 6 × 6, यानी 6 पंक्ति-6 स्तंभ का वर्ग। दोनों चित्र कॉपी में बनाएँ।
- 1, 7, 19, 37 का अगला पद: ये षट्भुजाकार संख्याएँ हैं। अंतर 6, 12, 18 हैं, अगला अंतर 24 → अगली संख्या 61 (पुस्तक का उत्तर भी 61)।
- 2 और 3 की घातों का चित्र: 2 की घातों के लिए हर बार आकृति को दोगुना करें (पुस्तक पृष्ठ 6 का चित्र)। 3 की घातों के लिए एक बिंदु से 3 शाखाएँ, हर शाखा से फिर 3 शाखाएँ — 1, 3, 9, 27 …।
खंड 1.4 – अनुक्रमों के बीच संबंध
पाठ के बीच के प्रश्न: विषम संख्याओं को क्रम से जोड़ने पर वर्ग संख्याएँ मिलती हैं। पहली 10 विषम संख्याओं का योग = 10 × 10 = 100; पहली 100 विषम संख्याओं का योग = 100 × 100 = 10,000।
- ऊपर-नीचे जोड़ने से वर्ग संख्याएँ क्यों? वर्ग ग्रिड के बिंदुओं को तिरछी (विकर्ण) पंक्तियों में गिनें: 1, 2, 3 … बीच में सबसे लंबी पंक्ति … फिर 3, 2, 1। जैसे 4×4 वर्ग में 1+2+3+4+3+2+1 = 16।
- 1 + 2 + … + 99 + 100 + 99 + … + 2 + 1 = ? उ. यह 100 × 100 वर्ग है, इसलिए 10,000।
- सभी 1 को ऊपर जोड़ने पर 1, 2, 3, 4 … (गिनती संख्याएँ) मिलती हैं। ऊपर-नीचे जोड़ने पर 1, 1+1+1 = 3, 1+1+1+1+1 = 5 … यानी विषम संख्याएँ मिलती हैं।
- गिनती संख्याओं को ऊपर जोड़ने पर 1, 3, 6, 10, 15 … यानी त्रिभुजाकार संख्याएँ मिलती हैं।
- क्रमागत त्रिभुजाकार संख्याओं के जोड़े: 1+3 = 4, 3+6 = 9, 6+10 = 16, 10+15 = 25 → वर्ग संख्याएँ। कारण: दो क्रमागत त्रिभुजों को उलटकर मिलाने पर एक पूरा वर्ग बन जाता है।
- 2 की घातों का योग: 1, 3, 7, 15, 31 …; हर एक में 1 जोड़ने पर 2, 4, 8, 16, 32 … यानी फिर से 2 की घातें। कारण: 1 + 1 = 2, 2 + 2 = 4, 4 + 4 = 8 — हर बार संख्या दोगुनी होती जाती है।
- त्रिभुजाकार संख्या × 6 + 1: 7, 19, 37, 61, 91 … → षट्भुजाकार संख्याएँ। चित्र: षट्भुज के बीच का एक बिंदु और उसके चारों ओर 6 बराबर त्रिभुज।
- षट्भुजाकार संख्याओं का योग: 1, 1+7 = 8, 8+19 = 27, 27+37 = 64 → घन संख्याएँ। घन को एक कोने से देखने पर हर नई परत एक षट्भुज जैसी दिखती है।
- अपने पैटर्न खोजें: उदाहरण — दो क्रमागत सम संख्याओं का अंतर 2; 1 + 2 + 4 + … + घात = अगली घात − 1; किसी विषम संख्या में 1 जोड़ने पर सम संख्या।
खंड 1.5 – आकृतियों में पैटर्न (सारणी 3)
- पैटर्न पहचानें: सम बहुभुज — हर बार एक भुजा बढ़ती है (3, 4, 5 … 10); पूर्ण आलेख (K2 से K6) — हर बिंदु बाकी सभी बिंदुओं से जुड़ा है; स्टैक्ड वर्ग — 1×1, 2×2, 3×3 … वर्ग; स्टैक्ड त्रिभुज — हर बार नीचे एक नई पंक्ति; कोच स्नोफ़्लेक — हर रेखाखंड पर एक “स्पीड ब्रेकर” जैसा उभार।
- अगली आकृति: ऊपर दिए नियम से हर अनुक्रम की अगली आकृति बनाई जा सकती है; कोच स्नोफ़्लेक में रेखाखंड बहुत छोटे होते जाते हैं, इसलिए उसे हाथ से बनाना कठिन होता जाता है।
खंड 1.6 – संख्या अनुक्रमों से संबंध
- सम बहुभुजों की भुजाएँ: 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 … (3 से शुरू होने वाली गिनती संख्याएँ)। कोनों की संख्या भी यही है, क्योंकि किसी भी बंद बहुभुज में भुजाओं और कोनों (शीर्षों) की संख्या बराबर होती है।
- पूर्ण आलेखों की रेखाएँ: K2 = 1, K3 = 3, K4 = 6, K5 = 10, K6 = 15 → त्रिभुजाकार संख्याएँ। कारण: नया बिंदु पिछले सभी बिंदुओं से जुड़ता है, इसलिए हर बार 2, 3, 4, 5 … रेखाएँ जुड़ती हैं।
- स्टैक्ड वर्ग: 1, 4, 9, 16, 25 छोटे वर्ग → वर्ग संख्याएँ (n पंक्ति × n स्तंभ)।
- स्टैक्ड त्रिभुज: पंक्तियों में 1, 3, 5, 7 … त्रिभुज होते हैं, इसलिए कुल 1, 4, 9, 16, 25 → वर्ग संख्याएँ (विषम संख्याओं का योग)।
- कोच स्नोफ़्लेक के रेखाखंड: हर रेखाखंड 4 रेखाखंडों में बदलता है: 3, 12, 48, 192, 768 … यानी 3 × 4 की घातें।
अध्याय 2: रेखाएँ और कोण — हल एवं व्याख्या
इस अध्याय में बिंदु, रेखाखंड, रेखा, किरण और कोण की मूल अवधारणाएँ, कोणों की तुलना, कोणों के प्रकार और चाँदे (प्रोट्रैक्टर) से कोण मापना व बनाना सिखाया गया है। चित्र-आधारित मापों के उत्तर NCERT द्वारा जारी आधिकारिक हल के अनुसार दिए गए हैं; अपनी पुस्तक के चित्र पर चाँदा रखकर इन्हें स्वयं जाँचें।
खंड 2.4 – आइए, पता लगाएँ (पृष्ठ 15–17)
- रिहान और शीतल: एक बिंदु से होकर अनगिनत (असंख्य) रेखाएँ खींची जा सकती हैं; दो बिंदुओं से होकर केवल एक रेखा खींची जा सकती है।
- आकृति 2.4: रेखाखंड LM, MP, PQ, QR। बिंदु L और R ठीक एक रेखाखंड पर हैं; बिंदु M, P और Q दो-दो रेखाखंडों पर हैं।
- आकृति 2.5 की किरणें: TA, TB, TN और NB। T किरण TA, TB और TN का प्रारंभिक बिंदु है, पर किरण NB का प्रारंभिक बिंदु N है।
- कच्ची आकृतियाँ: (a) O से निकलती दो किरणें OP और OQ; (b) दो रेखाएँ XY और PQ जो M पर काटती हैं; (c) रेखा l पर बिंदु E और F, बिंदु D रेखा से बाहर; (d) रेखा AB पर कोई बिंदु P।
- आकृति 2.6: (a) पाँच बिंदु D, E, O, B, C; (b) एक रेखा — DB (या DE, EO आदि नाम); (c) चार किरणें — OC, OB, OE, OD; (d) पाँच रेखाखंड — DE, DO, DB, EO, EB (OB, OC भी संभव)।
- किरण OA: (a) हाँ, इसे OB भी कह सकते हैं, क्योंकि प्रारंभिक बिंदु O वही है और B उसी दिशा में किरण पर स्थित है। (b) नहीं, OA का प्रारंभिक बिंदु O है जबकि AO का प्रारंभिक बिंदु A होगा, इसलिए दोनों अलग किरणें हैं।
खंड 2.5 – कोण (पृष्ठ 19–21)
- चित्रों में कोण: उदाहरण — ∠BDC, जिसका शीर्ष D और भुजाएँ DB व DC हैं। बाकी चित्रों में भी इसी तरह शीर्ष और भुजाएँ पहचानें।
- भुजाएँ ST और SR वाला कोण: शीर्ष S पर दो किरणें ST और SR खींचें; कोण ∠TSR (या ∠RST) बनेगा।
- ∠APB को ∠P क्यों नहीं लिख सकते? क्योंकि शीर्ष P पर एक से अधिक कोण बनते हैं (∠APB, ∠BPC, ∠APC)। केवल ∠P लिखने से पता नहीं चलेगा कि कौन-सा कोण है।
- चिह्नित कोण: ∠RTQ और ∠RTP।
- तीन बिंदु A, B, C (एक रेखा पर नहीं): तीन रेखाएँ AB, BC, CA; तीन कोण ∠ABC, ∠BCA, ∠CAB।
- चार बिंदु (कोई तीन एक रेखा पर नहीं): छह रेखाएँ AB, BC, CD, DA, AC, BD। बारह कोण — ∠BAC, ∠CAD, ∠BAD, ∠ADB, ∠BDC, ∠ADC, ∠DCA, ∠ACB, ∠DCB, ∠CBD, ∠DBA, ∠CBA।
खंड 2.6 – कोणों की तुलना (पृष्ठ 23)
क्या दो कोणों की तुलना हमेशा आसान है? नहीं, जैसे 89° और 91° के कोण बिना मापे या एक-दूसरे पर रखे पहचानना कठिन है। अध्यारोपण से तुलना रेखाखंडों, वर्गों और वृत्तों में भी की जाती है।
- कागज़ मोड़कर कोण: मोड़-रेखा EF और कागज़ की भुजाओं के बीच ∠AEF, ∠BEF, ∠DFE, ∠CFE बनते हैं; यहाँ ∠AEF और ∠CFE बड़े तथा ∠BEF और ∠DFE छोटे हैं। अलग-अलग मोड़ बनाकर तुलना करें।
- (a) ∠AOB बड़ा है, क्योंकि ∠XOY उसके भीतर का एक भाग है; (b) ∠AOB बड़ा है; (c) ∠XOB और ∠XOC बराबर हैं।
- ∠XOY या ∠AOB? केवल देखकर नहीं कहा जा सकता; अध्यारोपण या माप आवश्यक है।
खंड 2.8 – विशेष प्रकार के कोण (पृष्ठ 28–32)
मोड़कर OB को OA पर रखने से बनी मोड़-रेखा OC ऋजु कोण को दो बराबर भागों (दो समकोण) में बाँटती है। समकोण एक पूरे घुमाव का 1/4 होता है।
- खिड़कियों में समकोण: आयताकार खिड़की के चारों कोने समकोण होते हैं; दरवाज़े, ब्लैकबोर्ड, मेज़ के कोनों में भी समकोण मिलते हैं।
- ऋजु कोण: A से होकर ऐसी सीधी रेखा खींचें जो AB की सीध में आगे बढ़े (A के दूसरी ओर के ग्रिड बिंदु से)।
- समकोण: A से ऐसी रेखा खींचें जो ऋजु कोण CAB को दो बराबर भागों में बाँटे, यानी AB पर लंब हो।
- तिरछी मोड़-रेखा पर लंब मोड़: (a) चार समकोण बनते हैं; हर कोण पूरे घुमाव का 1/4 है, क्योंकि मोड़ते समय तिरछी रेखा का एक भाग दूसरे पर ठीक बैठता है। (b) तिरछी मोड़-रेखा को उसी पर इस तरह मोड़ें कि उसके दोनों भाग एक-दूसरे पर आ जाएँ; नई मोड़-रेखा लंब होगी।
कोणों का वर्गीकरण (पृष्ठ 31–32):
- पिछले चित्रों में समकोण से छोटे कोण न्यून, समकोण से बड़े पर ऋजु से छोटे कोण अधिक कोण हैं।
- अलग-अलग दिशाओं में कुछ न्यून और अधिक कोण बनाएँ।
- Acute = नुकीला, Obtuse = कुंद: न्यून कोण की भुजाओं के बीच कम खुलाव होता है, इसलिए वह नुकीला दिखता है; अधिक कोण का खुलाव ज़्यादा होता है, इसलिए वह कुंद (भोथरा) दिखता है।
- न्यून कोणों की गिनती: 3, 12, 21 — हर बार 9 बढ़ते हैं, इसलिए अगली आकृति में 30 न्यून कोण होंगे।
खंड 2.9 – कोण मापना (पृष्ठ 35–43)
पूरा घुमाव = 360°, ऋजु कोण = 180°, समकोण = 90°। 360 को 7 छोड़कर 1 से 10 तक की हर संख्या से पूरा-पूरा भाग दिया जा सकता है, इसलिए यह सुविधाजनक है।
- (पृष्ठ 35): ∠KAL = 30°, ∠WAL = 50°, ∠TAK = 120°।
पृष्ठ 36 की आकृति के कोण (आधिकारिक हल): ∠POQ = 35°, ∠POR = 95°, ∠POS = 125°, ∠POT = 160°, ∠QOR = 60°, ∠QOS = 90°, ∠QOT = 125°, ∠QOU = 145°, ∠ROS = 30°, ∠ROT = 65°, ∠ROU = 85°, ∠SOT = 35°, ∠SOU = 55°, ∠TOU = 20°। ∠TOS के लिए 55 − 20 = 35° (घटाकर)।
सोचिए (पृष्ठ 40): कागज़ के चाँदे में 180° को 8 बराबर भागों में बाँटा गया है, इसलिए हर कोण = 180° ÷ 8 = 22.5°। आधे-आधे मोड़ से कोण को दो बराबर भागों में बाँटना कोण समद्विभाजन कहलाता है।
- चाँदे से माप: 47°, 23° और 108° (पुस्तक के तीन चित्र)।
- कक्षा की वस्तुओं के कोण स्वयं मापें (किताब, दरवाज़े, खिड़की के कोने 90°)।
- 42° और 116°; यहाँ कागज़ का चाँदा काम नहीं आएगा, क्योंकि उस पर केवल 22.5° के अंतराल वाले निशान हैं।
- प्रतिवर्ती कोण कैसे मापें? बिना चिह्न वाला छोटा भाग मापें और 360° में से घटाएँ: 360° − 100° = 260°।
- (a) 80°, (b) 120°, (c) 60°, (d) 130°, (e) 130°, (f) 60°।
- ∠BXE = 115°, ∠CXE = 85°, ∠AXB = 65°, ∠BXC = 30°।
- ∠PQR = 45°, ∠PQS = 100°, ∠PQT = 150°।
- कागज़-शिल्प बनाकर मोड़-रेखाओं पर बने कोण स्वयं मापें।
- त्रिभुज के कोणों का योग: हर त्रिभुज में तीनों कोणों का योग 180° आता है — यही अनुमान (conjecture) है।
गलती पहचानें, सुधारें (पृष्ठ 44): चाँदे का केंद्र शीर्ष पर न होना, भुजा का 0° रेखा से न मिलना या गलत (भीतरी/बाहरी) पैमाना पढ़ना — यही आम गलतियाँ हैं।
कोण कहाँ हैं? (पृष्ठ 45–46)
- घड़ी: (a) 360° को 12 बराबर भागों में बाँटा गया है, इसलिए दो क्रमागत अंकों के बीच 360 ÷ 12 = 30°; (b) 2 बजे 60°, 4 बजे 120°, 6 बजे 180°; (c) 3 बजे 90°।
- दरवाज़ा: हाँ; शीर्ष वह बिंदु है जहाँ दरवाज़ा दीवार से (कब्ज़े पर) जुड़ता है, भुजाएँ दरवाज़े और दीवार के किनारे हैं।
- झूला: कोण झूले की शुरुआती स्थिति और एक ओर की सबसे ऊँची स्थिति के बीच बनता है।
- ढलान वाला खिलौना: हाँ, कोण जितना बड़ा, ढलान उतनी अधिक। एक भुजा ढलान का किनारा (दिखाई देती है), दूसरी क्षैतिज/ऊर्ध्वाधर रेखा (दिखाई नहीं देती)।
- घूमा हुआ कीड़ा: हाँ, घुमाव को कोण से बताया जा सकता है; क्षैतिज रेखा और कीड़े की नई दिशा भुजाएँ हैं।
खंड 2.10 – कोण बनाना (पृष्ठ 49–50)
- आकृति 2.23 के कोण: ∠CAP, ∠ACD, ∠APL, ∠DLP, ∠RPL, ∠SLP, ∠PRS, ∠LSR, ∠BRS, ∠CLP आदि। पहले अनुमान लगाएँ, फिर मापकर तालिका बनाएँ।
- 110°, 40°, 75°, 112°, 134° — चाँदे का केंद्र शीर्ष पर, आधार भुजा 0° पर रखकर निशान लगाएँ और जोड़ें।
- दिए गए ∠IHJ को मापें, फिर उसी माप का कोण बनाएँ और चरण लिखें।
खंड 2.11 – कोणों के प्रकार और माप (पृष्ठ 51–54)
न्यून: 0° से अधिक, 90° से कम; अधिक कोण: 90° से 180° के बीच; प्रतिवर्ती: 180° से 360° के बीच।
- ग्रिड पर A को उपयुक्त बिंदु से जोड़कर न्यून, अधिक और प्रतिवर्ती कोण बनाएँ और वक्र से चिह्नित करें।
- ∠PTR = 30° (न्यून), ∠PTQ = 60° (न्यून), ∠PTW = 102° (अधिक), ∠WTP = 258° (प्रतिवर्ती) — आधिकारिक हल के अनुसार।
आइए खोजें: ∠REB ऋजु कोण है, इसलिए ∠BET = 180° − 80° = 100°; ∠SET = 90° − 80° = 10°।
- 140°, 82°, 195°, 70°, 35° के कोण बनाएँ (195° के लिए 360° − 195° = 165° का कोण बनाकर बाहर वाला भाग चिह्नित करें)।
- पहले अनुमान, फिर माप लें और न्यून/समकोण/अधिक/प्रतिवर्ती में वर्गीकृत करें।
- तीन न्यून, एक समकोण और दो अधिक कोणों वाली आकृति बनाएँ (जैसे एक अनियमित षट्भुज)।
- अक्षर M: दोनों किनारों के कोण 40°-40° और बीच का कोण 60°।
- अक्षर Y: तीन कोण 150°, 60°, 150° (योग 360°)।
- अशोक चक्र (24 तीलियाँ): पास-पास की दो तीलियों के बीच 360° ÷ 24 = 15°; सबसे बड़ा न्यून कोण 5 अंतराल = 75° (6 अंतराल पर 90° हो जाता है, जो न्यून नहीं)।
- पहेली: 4 गुना 90° से कम और 5 गुना 90° से अधिक होना चाहिए, यानी कोण 18° से बड़ा और 22.5° से छोटा। पूर्ण संख्या में संभावित माप: 19°, 20°, 21°, 22°।
अध्याय 3: संख्याओं का खेल — हल एवं व्याख्या
इस अध्याय में संख्याओं से जुड़े खेल, सुपरसेल, संख्या रेखा, अंकों का योग, विलोम (पैलिंड्रोम) संख्याएँ, कापरेकर स्थिरांक, मानसिक गणित, कोलात्ज़ अनुमान, आकलन और जीतने की रणनीतियाँ सिखाई गई हैं। जहाँ उत्तर एक से अधिक हो सकते हैं, वहाँ उदाहरण दिए गए हैं।
खंड 3.1 – संख्याएँ हमें कुछ बताती हैं (पृष्ठ 56)
हर बच्चा बताता है कि उसके बगल में खड़े कितने बच्चे उससे लंबे हैं।
- क्या किनारे वाले बच्चे ‘2’ कह सकते हैं? नहीं, किनारे वाले बच्चे का केवल एक ही पड़ोसी होता है।
- क्या सभी ‘0’ कह सकते हैं? हाँ, यदि सभी बच्चों की लंबाई बराबर हो (तब कोई किसी से लंबा नहीं)।
- क्या पास खड़े दो बच्चे एक ही संख्या कह सकते हैं? हाँ, जैसे पुस्तक के पृष्ठ 55 के चित्र में।
- 5 बच्चों में चार ‘1’ और आखिरी ‘0’? हाँ, यदि वे लंबाई के बढ़ते क्रम में खड़े हों — सबसे लंबा बच्चा आखिर में ‘0’ कहेगा।
- 1, 1, 1, 1, 1 संभव? नहीं, सबसे लंबा बच्चा कहीं भी खड़ा हो, वह ‘0’ ही कहेगा।
- 0, 1, 2, 1, 0 संभव? हाँ, जैसे लंबाई के क्रम 5, 3, 1, 2, 4 में खड़े बच्चे।
- अधिकतम कितने ‘2’? 5 बच्चों में अधिकतम 2 बच्चे (दूसरे और चौथे स्थान पर, जो अपने दोनों पड़ोसियों से छोटे हों)।
खंड 3.2 – सुपरसेल (पृष्ठ 57–59)
जिस खाने की संख्या अपने सभी सटे हुए खानों से बड़ी हो, वह सुपरसेल है।
- सुपरसेल पहचानें: पंक्ति 6828, 670, 9435, 3780, 3708, 7308, 8000, 5583, 52 में हर संख्या की तुलना उसके दोनों पड़ोसियों से करें: 6828 > 670 ✓, 9435 > 670 और 3780 ✓, 8000 > 7308 और 5583 ✓; बाकी (जैसे 7308 < 8000) सुपरसेल नहीं हैं। अतः सुपरसेल हैं 6828, 9435 और 8000।
- केवल रंगे खाने सुपरसेल बनें: रंगे खानों में पड़ोसियों से बड़ी संख्या रखें, उदाहरण: 5346, 5347, 1000, 1258, 1100, 1200, 1300, 9635, 9636 (एक संभव हल)।
- और 4. 100 से 1000 के बीच बिना दोहराए 9 खानों में अधिकतम 5 सुपरसेल बन सकते हैं — पहले खाने से शुरू करके एक-एक छोड़कर बड़ी संख्याएँ रखें।
- पैटर्न: सम संख्या (n) के खानों में अधिकतम n ÷ 2 और विषम संख्या के खानों में (n + 1) ÷ 2 सुपरसेल बनते हैं। तरीका: पहला खाना सुपरसेल बनाएँ, फिर बारी-बारी से।
- बिना सुपरसेल की तालिका? नहीं, सबसे बड़ी संख्या वाला खाना हमेशा सुपरसेल होगा।
- सबसे बड़ी/सबसे छोटी संख्या: सबसे बड़ी संख्या वाला खाना हमेशा सुपरसेल होगा; सबसे छोटी संख्या वाला खाना कभी सुपरसेल नहीं हो सकता, क्योंकि उसके सभी पड़ोसी उससे बड़े होंगे।
- दूसरी सबसे बड़ी संख्या सुपरसेल न हो: उसे सबसे बड़ी संख्या के ठीक बगल में रखें, जैसे 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 9, 8 (यहाँ 8, 9 के बगल में है)।
- दूसरी सबसे बड़ी सुपरसेल न हो पर दूसरी सबसे छोटी हो: संभव है, जैसे 2, 1, 3, 4, 5, 6, 7, 9, 8 — यहाँ 2 (दूसरी सबसे छोटी) किनारे पर 1 से बड़ी होने के कारण सुपरसेल है और 8 सुपरसेल नहीं।
- अपनी पहेलियाँ बनाएँ, जैसे “9 खानों में ठीक 4 सुपरसेल बनाइए”।
तालिका 2 (अंक 1, 0, 6, 3, 9 से 5-अंकीय संख्याएँ): आधिकारिक हल के अनुसार एक संभव भराव में सबसे बड़ी संख्या 96,310, सबसे छोटी सम संख्या 10,396 और 50,000 से बड़ी सबसे छोटी संख्या 60,193 है।
खंड 3.3 – संख्या रेखा पर पैटर्न (पृष्ठ 59)
संख्याएँ क्रम से: 1050, 1500, 2180, 2754, 3050, 3600, 5030, 5300, 8400, 9590, 9950। संख्या रेखाओं पर पहले दो दिए गए निशानों का अंतर निकालें, वही अंतर आगे-पीछे जोड़ें-घटाएँ: (a) 5 का अंतर — 1990, 1995, 2000, 2005, 2010 …; (b) 1 का अंतर — 9993 … 10,002; (c) 1 का अंतर — 15,077 … 15,086; (d) 1000 का अंतर — 83,705 … 92,705। हर क्रम में सबसे छोटी संख्या पर गोला और सबसे बड़ी पर डिब्बा बनाएँ।
खंड 3.4 – अंकों से खेल (पृष्ठ 60–61)
कितनी संख्याएँ: 1-अंकीय 9, 2-अंकीय 90, 3-अंकीय 900, 4-अंकीय 9,000, 5-अंकीय 90,000।
- अंकों का योग 14: (a) 59, 68, 77, 248, 356, 653, 815, 12,335 आदि; (b) सबसे छोटी संख्या 59; (c) सबसे बड़ी 5-अंकीय संख्या 95,000; (d) बीच में शून्य जोड़ते जाएँ — 95, 9005, 9,00,005 … जितनी चाहें उतनी बड़ी संख्या बन सकती है।
- 40 से 70 तक अंकों का योग: हर दहाई में योग 1-1 बढ़ता है (40 → 4 से 49 → 13), फिर अगली दहाई पर 8 घट जाता है (49 का 13, 50 का 5)।
- क्रमागत अंकों वाली 3-अंकीय संख्याएँ: 123 → 6, 234 → 9, 345 → 12, 456 → 15, 567 → 18, 678 → 21, 789 → 24 — सभी 3 के गुणज और हर बार 3 बढ़ते हैं। 789 के बाद यह पैटर्न नहीं चलेगा, क्योंकि 9 के बाद कोई एक-अंकीय अंक नहीं।
अंक जासूस: 1 से 100 तक अंक 7 20 बार और 1 से 1000 तक 300 बार आता है।
खंड 3.5 – विलोम (पैलिंड्रोम) संख्याएँ (पृष्ठ 61–62)
1, 2, 3 से बनी सभी 3-अंकीय विलोम संख्याएँ (9): 111, 121, 131, 212, 222, 232, 313, 323, 333। उलटकर जोड़ना: 12 + 21 = 33; 47 + 74 = 121 — दो अंकों की संख्या से शुरू करने पर अंत में विलोम संख्या मिल जाती है।
पहेली: इकाई अंक विषम (1), दहाई = 2 × 1 = 2, सैकड़ा = 2 × 2 = 4, विलोम होने से संख्या 12,421 (बारह हज़ार चार सौ इक्कीस)।
खंड 3.6 – कापरेकर का जादुई अंक (पृष्ठ 62–63)
किसी भी 4-अंकीय संख्या (कम से कम दो अलग अंक) पर “सबसे बड़ी − सबसे छोटी” की प्रक्रिया दोहराने से अंत में 6174 (कापरेकर स्थिरांक) मिलता है। 3-अंकीय संख्याओं में 495 बार-बार आता है, जैसे 321 → 198 → 792 → 693 → 594 → 495 → 495।
खंड 3.7 – घड़ी और कैलेंडर की संख्याएँ (पृष्ठ 64–65)
घड़ी के समय: एक जैसे अंक — 1:11, 2:22, 3:33, 4:44, 5:55, 11:11; जोड़ी दोहराने वाले — 10:10, 12:12; विलोम — 1:01, 10:01, 12:21 आदि। तारीखें: 20/04/2004, 20/06/2006 (2-0-…-…); विलोम तारीखें: 01/02/2010, 02/02/2020 आदि। कैलेंडर दोहराना: हाँ, कुछ वर्षों बाद पूरा कैलेंडर दोहराता है — जैसे 2026 का कैलेंडर 2037 में फिर से वैसा ही होगा; अधिवर्ष (जैसे 2028) का कैलेंडर अधिक वर्षों बाद (2056 में) दोहराता है।
- प्रतिभा के अंक: (a) अंतर 5085 से अधिक — 1, 3, 4, 7: 7431 − 1347 = 6084; (b) कम — 3, 3, 4, 7: 7433 − 3347 = 4086; (c) योग 9779 से अधिक — 7433 + 3347 = 10,780; (d) कम — 7431 + 1347 = 8778।
- 5-अंकीय विलोम: सबसे छोटी 10,001, सबसे बड़ी 99,999; योग = 1,10,000; अंतर = 89,998।
- 10:01 के बाद: अगला विलोम समय 11:11, यानी 70 मिनट बाद; उसके बाद 12:21, यानी 10:01 से 140 मिनट (11:11 से 70 मिनट) बाद।
- 5683 से 6174 तक: NCERT के आधिकारिक हल में हर बार “सबसे छोटी 4-अंकीय संख्या” (शून्य शुरू में नहीं) ली गई है: 5085 → 3492 → 7083 → 5652 → 3996 → 6264 → 4176 → 6174, यानी 8 चक्कर। यदि शून्य को शुरू में रखने की अनुमति हो (0558), तो 5085 → 7992 → 7173 → 6354 → 3087 → 8352 → 6174, यानी 7 चक्कर।
खंड 3.8 – मानसिक गणित (पृष्ठ 65–67)
बीच की संख्याओं (25,000, 400, 13,000, 1,500, 60,000 आदि) से 1,000 नहीं बन सकता, क्योंकि 1000 से छोटी केवल 400 है और 1000, 400 का गुणज नहीं। 14,000 = 1500 × 8 + 400 × 5; 15,000 = 13,000 + 400 × 5; 16,000 = 1500 × 8 + 400 × 10।
- उदाहरण: 5-अंकीय + 5-अंकीय > 90,250 — 45,000 + 45,400 = 90,400; 5-अंकीय − 5-अंकीय < 56,503 — 80,000 − 50,000 = 30,000; 4-अंकीय + 4-अंकीय = 6-अंकीय — संभव नहीं (9999 + 9999 = 19,998); 5-अंकीय − 4-अंकीय = 4-अंकीय — 12,000 − 2,500 = 9,500; 5-अंकीय + 3-अंकीय = 6-अंकीय — 99,999 + 999 = 1,00,998; 5-अंकीय − 3-अंकीय = 4-अंकीय — 10,000 − 999 = 9,001; 5-अंकीय + 5-अंकीय = 6-अंकीय — 60,000 + 40,000 = 1,00,000; 5-अंकीय − 5-अंकीय = 3-अंकीय — 50,999 − 50,000 = 999; 5-अंकीय + 5-अंकीय = 18,500 — संभव नहीं (सबसे छोटा योग 20,000); 5-अंकीय − 5-अंकीय = 91,500 — संभव नहीं (सबसे बड़ा अंतर 89,999)।
- हमेशा, कभी-कभी, कभी नहीं: (a) कभी-कभी सत्य (20,000 + 80,000 = 1,00,000); (b) कभी-कभी (9,999 + 99 = 10,098); (c) कभी नहीं (अधिकतम योग 10,098 पाँच अंकों का); (d) कभी-कभी (12,000 − 10,000 = 2,000); (e) कभी नहीं (10,000 − 99 = 9,901 भी चार अंकों की)।
खंड 3.9 और 3.10 – संख्या पैटर्न और कोलात्ज़ अनुमान
चित्रों में बार-बार आने वाली संख्याओं का योग एक-एक जोड़ने के बजाय गुणा से निकालें (जैसे 40 कितनी बार आया × 40)। कोलात्ज़ नियम: सम संख्या को आधा करें, विषम को 3 से गुणा करके 1 जोड़ें। उदाहरण: 28 → 14 → 7 → 22 → 11 → … → 1; 19 → 58 → 29 → … → 1। यह अनुमान आज तक न सिद्ध हुआ है, न गलत।
खंड 3.11 – सरल आकलन (पृष्ठ 69–71)
ये उत्तर हर विद्यार्थी के लिए अलग होंगे; तरीका महत्वपूर्ण है। रोशन का ₹100 का अनुमान कम मात्रा और सस्ते फलों में संभव है, महँगे फलों में नहीं। गांधीनगर से कोहिमा की दूरी लगभग 2,500 किमी (आधिकारिक हल का अनुमान)। शीतल का 13,000 घंटे का दावा सही नहीं — रोज़ लगभग 6 घंटे और साल में लगभग 200 दिन मानें तो एक साल में लगभग 1,200 घंटे होते हैं, यानी 13,000 घंटे के लिए लगभग 11 साल चाहिए।
खंड 3.12 – खेल और जीतने की रणनीति (पृष्ठ 71–73)
खेल 21 (1, 2 या 3 जोड़ें): पहला खिलाड़ी हमेशा जीत सकता है — 1 बोले, फिर हर बार 5, 9, 13, 17, 21 (4 से विभाजित करने पर शेष 1) तक पहुँचे। खेल 99 (1 से 10 जोड़ें): जीतने वाली संख्याएँ 11, 22, 33 … 99 (11 के गुणज) हैं; पहला खिलाड़ी 11 नहीं बोल सकता, इसलिए दूसरा खिलाड़ी हर बार 11 का अगला गुणज बोलकर जीत सकता है।
- 4 सुपरसेल: 62,871 के अंक 6 और 1 बदलकर 12,876 करें।
- जन्म वर्ष से कापरेकर: जैसे 1980 → 8721 → 7443 → 3996 → 6264 → 4176 → 6174, यानी 6 चक्कर।
- 35,000 और 75,000 के बीच सभी अंक विषम: सबसे बड़ी 73,999, सबसे छोटी 35,111, 50,000 के सबसे निकट 51,111 (अंक न दोहराएँ तो 73,951; 35,179; 51,379)।
- छुट्टियों का पहले अनुमान, फिर कैलेंडर से सही गिनती।
- मग लगभग 1 लीटर से कम, बाल्टी लगभग 15–20 लीटर, टंकी सैकड़ों लीटर (अपने घर से जाँचें)।
- योग 18,670: 18,000 + 300 + 370 = 18,670।
- उदाहरण: 250 = 25 + 25 + 50 + 50 + 50 + 25 + 25।
- 2 की घातें: इन्हें बार-बार आधा करने पर हर बार सम संख्या ही मिलती है, अंत में 2 → 1।
- 100 से शुरू: 100, 50, 25, 76, 38, 19, 58, 29, 88, 44, 22, 11, 34, 17, 52, 26, 13, 40, 20, 10, 5, 16, 8, 4, 2, 1 — 25 चरणों में 1 मिल जाता है, अनुमान सही है।
- 22 तक (1 से 3 जोड़ें): जीतने वाली संख्याएँ 2, 6, 10, 14, 18, 22 हैं; पहला खिलाड़ी 2 बोलकर और फिर इन्हीं पर पहुँचकर हमेशा जीत सकता है।
अध्याय 4: आँकड़ों का प्रबंधन और प्रस्तुतीकरण — हल एवं व्याख्या
इस अध्याय में आँकड़े इकट्ठा करना, मिलान चिह्न (टैली) से बारंबारता सारणी बनाना, चित्रालेख (पिक्टोग्राफ) और दंड आलेख (बार ग्राफ) बनाना-पढ़ना तथा आँकड़ों को सुंदर पर सही ढंग से प्रस्तुत करना सिखाया गया है। जिन प्रश्नों में पुस्तक के चित्रालेख या आलेख से संख्या पढ़नी है, वहाँ NCERT के आधिकारिक हल वाले उत्तर दिए गए हैं।
खंड 4.1 – आँकड़ों का संग्रह और संगठन (पृष्ठ 75–79)
- सबसे लोकप्रिय खेल कैसे पता करें? सूची के आँकड़ों को खेलों के नाम और मिलान चिह्नों वाली सारणी में व्यवस्थित करें, फिर हर खेल की गिनती देखें।
- सबसे लोकप्रिय खेल: हॉकी (8 विद्यार्थी)। बाकी — क्रिकेट 6, कबड्डी 6, सतोलिया (पिट्ठू) 5, फ़ुटबॉल 4, बैडमिंटन 2।
- अपनी कक्षा में यही तरीका अपनाएँ।
- पारी के प्रश्न: (a) सबसे लोकप्रिय टीवी शो — ✓ (आँकड़े चाहिए); (b) भारत को स्वतंत्रता कब मिली — ✗; (c) मोहल्ले में कितना पानी बर्बाद होता है — ✓; (d) भारत की राजधानी — ✗।
श्री नीलेश की मिठाइयाँ (पृष्ठ 76–77):
- जलेबी 6, बर्फ़ी 3, गुझिया 13, रसगुल्ला 7, गुलाब जामुन 9 विद्यार्थी।
- क्या सारणी बाँटने के लिए पर्याप्त है? नहीं, सारणी केवल यह बताती है कि कितने विद्यार्थियों ने कौन-सी मिठाई चुनी, यह नहीं कि किस विद्यार्थी ने कौन-सी। इसके लिए विद्यार्थियों के नाम उनकी पसंद के साथ लिखने होंगे।
जूतों के माप (पृष्ठ 77):
- (a) सबसे बड़ा माप 7; (b) सबसे छोटा 3; (c) माप 5 पहनने वाले 10; (d) 4 से बड़ा माप पहनने वाले 15 (5 के 10 + 6 के 4 + 7 का 1)।
- बढ़ते क्रम में लिखने से हर माप की गिनती करना और सबसे छोटा-बड़ा देखना आसान हो जाता है।
- हाँ, आँकड़ों को बारंबारता सारणी (माप — मिलान चिह्न — संख्या) में भी रखा जा सकता है: 3 → 3, 4 → 9, 5 → 10, 6 → 4, 7 → 1।
- पेड़ों का सर्वेक्षण स्वयं करें और सारणी से सबसे अधिक/कम पेड़ पहचानें।
- अख़बार के लेख में अक्षरों की गिनती: अधिकतर विद्यार्थियों को क्रम x, c, r, i, e मिलता है, क्योंकि अंग्रेज़ी में e बहुत अधिक और x बहुत कम प्रयोग होता है।
खंड 4.2 – चित्रालेख (पृष्ठ 79–85)
उदाहरण (1 चित्र = 10 बच्चे): हमेशा 9 घंटे सोने वाले 5 × 10 = 50; कभी-कभी 2 × 10 + 5 = 25; कभी नहीं 4 × 10 = 40 बच्चे। 33 या 27 को दिखाने में समस्या: 1 चित्र = 10 और आधा चित्र = 5 हो, तो 3 या 7 विद्यार्थियों को चित्र के टुकड़ों से सही-सही दिखाना कठिन है।
- पुस्तकालय की पुस्तकें: (a) सबसे कम — गुरुवार; (b) सप्ताह में कुल 24 पुस्तकें; (c) सबसे अधिक — शनिवार, संभवतः इसलिए कि अगले दिन रविवार की छुट्टी में पढ़ा जा सके।
- मगन भाई की पतंगें (1 चिह्न = 100 पतंगें): चमन 2½, रानी 3, रुख़साना 1, जसमीत 4½, जेठालाल 2½, पूनम बेन 7 चिह्न। (a) रानी — 3 चिह्न; (b) सबसे अधिक — पूनम बेन (700); (c) जसमीत (450 > 250); (d) हाँ, रुख़साना सही है: 700 > 2 × 300 = 600।
खंड 4.3 – दंड आलेख (पृष्ठ 85–89)
अनुपस्थित विद्यार्थी: कक्षा 2 में 5, सबसे अधिक कक्षा 8 में (7), पूरी उपस्थिति कक्षा 5 में।
- सुबह 6 से दोपहर 12 तक कुल वाहन: आधिकारिक हल के अनुसार लगभग 4,450 (6–7 में लगभग 150, 7–8 में 1200, 8–9 में 1000, 9–10 में 800 …)।
- 6–7 बजे बहुत कम लोग घर से निकलते हैं, क्योंकि स्कूल-दफ़्तर का समय शुरू नहीं हुआ होता।
- 7–8 बजे स्कूल और दफ़्तर जाने वालों की भीड़ सबसे अधिक होती है।
- 8 बजे के बाद अधिकतर लोग पहुँच चुके होते हैं, इसलिए यातायात घटता जाता है।
भारत की जनसंख्या (उदाहरण): 1951 में 36 करोड़ से 2001 में 102 करोड़, यानी 50 वर्षों में 66 करोड़ की वृद्धि; हर दशक में वृद्धि 8, 10, 14, 16 और 18 करोड़।
खंड 4.4 – दंड आलेख बनाना (पृष्ठ 89–100)
इमरान के परिवार का ख़र्च (1 इकाई = ₹200): सबसे अधिक भोजन (₹3400) और दूसरे स्थान पर मकान किराया (₹3000)। बिजली (₹400) शिक्षा (₹800) की आधी है — हाँ। शिक्षा (₹800) भोजन के एक-चौथाई (₹850) से कम है — हाँ।
- सामंथा के कीड़े: 1 इकाई = 1 कीड़ा लेकर माइट 6, कैटरपिलर 10, भृंग 5, तितली 3, टिड्डा 2 इकाई ऊँचे दंड बनाएँ।
- पूजा का टिकट आलेख: (a) विदिशा 24; (b) जबलपुर 20; (c) 6 इकाई = 24 और 5 इकाई = 20, इसलिए पैमाना 1 इकाई = 4 टिकट; (d) सागर का दंड 16 ÷ 4 = 4 इकाई; (e) ऊर्ध्व अक्ष पर 0, 4, 8, 12 … लिखें; (f) सिवनी (16 → 4 इकाई) का दंड सही है, इंदौर का गलत — इंदौर का दंड 28 ÷ 4 = 7 इकाई होना चाहिए।
- चीनू के वाहन: बाइक 13, स्कूटर 9, ऑटो रिक्शा 8, साइकिल 8, कार 6, बस 4, बैलगाड़ी 2 (कुल 50)। सबसे अधिक — बाइक। आँकड़े इकट्ठा करने के लिए दो स्तंभों वाली सारणी बनाकर हर वाहन गुज़रते ही उसके आगे मिलान चिह्न लगाएँ।
- पासा 30 बार फेंककर मिलान चिह्नों से सारणी बनाएँ (उत्तर हर विद्यार्थी के अलग होंगे)।
- बुमराह के विकेट: (a) अलग-अलग मैचों में लिए गए विकेटों की संख्या; (b) शीर्षक — “पिछले 30 मैचों में जसप्रीत बुमराह के विकेट”; (c) उदाहरण: केवल 1 मैच में 7 विकेट; (d) 3 मैचों में 4 विकेट; (e) नहीं, क्योंकि हर विकेट-संख्या कई मैचों में आई है (जैसे 3 विकेट 8 मैचों में = 24 विकेट); (f) विकेट × मैच का गुणनफल जोड़ें: 0×2 + 1×4 + 2×6 + 3×8 + 4×3 + 5×5 + 6×1 + 7×1 = 90 विकेट।
- ट्रैक्टर चित्रालेख: (a) सबसे कम — गाँव D; (b) सबसे अधिक — गाँव C; (c) गाँव C में गाँव B से 3 अधिक; (d) हाँ, कोमल सही है।
- लड़कियों का चित्रालेख (1 चिह्न = 4 लड़कियाँ): (a) सबसे कम — कक्षा 8; (b) कक्षा 5 और 6 में अंतर 6; (c) कक्षा 2 का अंतिम आधा चिह्न पूरा चिह्न बन जाएगा; (d) कक्षा 7 में 12 लड़कियाँ।
- मुधोल हाउंड: (a) सभी संख्याएँ 6 के गुणज हैं, इसलिए 1 चिह्न = 6 कुत्ते; (b) गाँव B के लिए 36 ÷ 6 = 6 चिह्न; (c) हाँ, कामिनी सही है — B + D = 36 + 48 = 84, जबकि बाकी चार गाँव 18 + 12 + 18 + 24 = 72।
- 120 विद्यार्थियों का सर्वेक्षण (1 इकाई = 5): खेलना 9, कहानी पढ़ना 6, टीवी 4, संगीत 2, चित्रकारी 3 इकाई। खेलने के बाद सबसे पसंदीदा — कहानी की किताबें पढ़ना।
- पौधारोपण (आधिकारिक हल): (a) बुधवार + गुरुवार = 70; (b) पूरे सप्ताह में 310; (c) सबसे अधिक शनिवार, सबसे कम बुधवार। कारण: वर्षा, उपस्थित विद्यार्थियों की संख्या या छुट्टी जैसे कारण हो सकते हैं।
- बाघों का आलेख: सारणी के अनुसार 2006 में 1400, 2010 में 1700, 2014 में 2200, 2018 में 3000 और 2022 में 3700 बाघ। आलेख में 2006, 2010, 2014 और 2018 के दंड गलत ऊँचाई के हैं; पैमाने के अनुसार इन्हें सारणी के मान तक ठीक करें।
खंड 4.5 – कलात्मक और सौंदर्य संबंधी पहलू (पृष्ठ 101–105)
एवरेस्ट (8848 मी) कोस्यूस्को (2228 मी) से 6620 मी ऊँचा है; देनाली और किलिमंजारो में केवल 299 मी का अंतर है। 5642 × 2 = 11,284 मी, इसलिए एवरेस्ट एल्ब्रुस का दोगुना नहीं है — इन्फ़ोग्राफ़िक भ्रामक हो सकता है।
- सबसे लंबे विद्यार्थियों की ऊँचाई: ऊर्ध्वाधर दंड, क्योंकि ऊँचाई ज़मीन से ऊपर की ओर नापी जाती है।
- सबसे लंबी नदियाँ: क्षैतिज दंड, क्योंकि नदी की लंबाई ज़मीन के समानांतर होती है।
अध्याय 5: अभाज्य समय — हल एवं व्याख्या
इस अध्याय में उभयनिष्ठ (साझा) गुणज और गुणनखंड, अभाज्य और भाज्य संख्याएँ, सहअभाज्य संख्याएँ, अभाज्य गुणनखंडन और 2, 4, 5, 8, 10 से विभाज्यता के नियम सिखाए गए हैं। सभी उत्तर गणना करके जाँचे गए हैं।
खंड 5.1 – उभयनिष्ठ गुणज और उभयनिष्ठ गुणनखंड (पृष्ठ 107–111)
3 और 5 दोनों के गुणज (15, 30, 45 …) उभयनिष्ठ गुणज कहलाते हैं।
- 10वीं बार ‘इडली-वड़ा’: 15 का 10वाँ गुणज = 15 × 10 = 150।
- 1 से 90 तक: (a) ‘इडली’ (3 के गुणज) 90 ÷ 3 = 30 बार; (b) ‘वड़ा’ (5 के गुणज) 90 ÷ 5 = 18 बार; (c) ‘इडली-वड़ा’ (15 के गुणज) 90 ÷ 15 = 6 बार।
- 900 तक: ‘इडली’ 300, ‘वड़ा’ 180 और ‘इडली-वड़ा’ 60 बार (सभी उत्तर 10 गुना)।
- आकृति 5.1: हाँ, यह वेन आरेख है — बाएँ घेरे में केवल 3 के गुणज, दाएँ में केवल 5 के गुणज और बीच के साझा भाग में उभयनिष्ठ गुणज (‘इडली-वड़ा’ वाली संख्याएँ)। 60 तक बीच में 15, 30, 45, 60 आएँगे।
केवल ‘इडली’ या ‘इडली-वड़ा’, एक संख्या 4: दूसरी संख्या 8 है, क्योंकि 8 का हर गुणज 4 का भी गुणज है। 15 और 30 दोनों पर पहुँचने वाली छलाँगें: 1, 3, 5, 15 (15 के गुणनखंड)। सारणी में छायांकित संख्याएँ 3 के गुणज, घेरे गए 4 के गुणज और दोनों — 36, 48, 60 — 3 और 4 के उभयनिष्ठ गुणज हैं।
- 310 और 410 के बीच 40 के गुणज: 320, 360, 400।
- मैं कौन हूँ? (a) 40 से कम, 7 गुणनखंड, अंकों का योग 8 → 35; (b) 100 से कम, 3 और 5 गुणनखंड (यानी 15 का गुणज), एक अंक दूसरे से 1 अधिक → 45।
- 1 से 10 के बीच पूर्ण संख्या: 6 (1 + 2 + 3 + 6 = 12 = 2 × 6)।
- उभयनिष्ठ गुणनखंड: (a) 20, 28 → 1, 2, 4; (b) 35, 50 → 1, 5; (c) 4, 8, 12 → 1, 2, 4; (d) 5, 15, 25 → 1, 5।
- 25 के गुणज पर 50 के नहीं: 25, 75, 125 (या 175)।
- 10 से छोटी दो संख्याएँ, पहला ‘इडली-वड़ा’ 50 के बाद: 7 और 8 (56), 7 और 9 (63), 8 और 9 (72)।
- 28 और 70 दोनों पर पहुँचने वाली छलाँगें: 1, 2, 7, 14।
- उभयनिष्ठ गुणज 24, 48, 72: जिन दो संख्याओं का सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज 24 हो, जैसे 3 और 8, 6 और 8, या 8 और 12। उदाहरण (3 और 8): केवल 3 के गुणज — 3, 6, 9, 12 …; केवल 8 के — 8, 16, 32, 40 …।
- 7 को छोड़कर 1–10 सभी का सबसे छोटा गुणज: 360।
- 1–10 सभी का सबसे छोटा गुणज: 360 × 7 = 2520।
खंड 5.2 – अभाज्य संख्याएँ (पृष्ठ 112–115)
जिन संख्याओं के केवल दो गुणनखंड (1 और स्वयं) हों, वे अभाज्य; दो से अधिक गुणनखंड वाली भाज्य; 1 न अभाज्य है, न भाज्य। 21 से 30 तक अभाज्य 2 (23, 29) और भाज्य 8।
- क्या 2 के अलावा कोई सम अभाज्य है? नहीं, हर अन्य सम संख्या 2 से विभाज्य होती है।
- क्रमागत अभाज्यों का अंतर: सबसे कम 1 (2 और 3), सबसे अधिक 8 (89 और 97)।
- हर दशक में बराबर अभाज्य? नहीं। सबसे कम 91–100 में (केवल 97); सबसे अधिक 1–10 और 11–20 में (4-4)।
- अभाज्य: 23 और 37 (51 = 3 × 17, 26 = 2 × 13)।
- 20 से कम अभाज्य जोड़े, योग 5 का गुणज: (2, 3), (3, 7), (2, 13) — अन्य: (7, 13), (3, 17)।
- अंक उलटने पर भी अभाज्य: 13–31, 17–71, 37–73, 79–97।
- सात क्रमागत भाज्य: 90, 91, 92, 93, 94, 95, 96।
- जुड़वाँ अभाज्य: (3, 5), (5, 7), (11, 13), (17, 19), (29, 31), (41, 43), (59, 61), (71, 73)।
- सत्य/असत्य: (a) सत्य — इकाई अंक 4 वाली संख्या सम होती है और 2 ही एकमात्र सम अभाज्य है; (b) असत्य — अभाज्यों का गुणनफल भाज्य होता है; (c) असत्य — अभाज्य के ठीक दो गुणनखंड होते हैं; (d) असत्य — 2 सम होकर भी अभाज्य है; (e) सत्य — 2 के बाद हर अभाज्य विषम है, इसलिए उसके बाद की संख्या सम (2 से बड़ी) यानी भाज्य होती है।
- तीन भिन्न अभाज्यों का गुणनफल: केवल 105 = 3 × 5 × 7 (45 = 3×3×5, 60 = 2×2×3×5, 91 = 7×13, 330 = 2×3×5×11)।
- 2, 4, 5 से 3-अंकीय अभाज्य: एक भी नहीं — अंत में 2 या 4 हो तो संख्या सम, और 5 हो तो 5 से विभाज्य।
- दोगुना + 1 भी अभाज्य: 2 → 5, 5 → 11, 11 → 23, 23 → 47, 29 → 59, 41 → 83।
खंड 5.3 – सहअभाज्य संख्याएँ (पृष्ठ 115–117)
सुरक्षित जोड़े: 4 और 15, 18 और 29 (15 और 39 में 3 साझा, 20 और 55 में 5 साझा)। सहअभाज्य जोड़े: 18 और 35, 15 और 37, 17 और 69 (30 और 415 में 5 तथा 81 और 18 में 9 साझा)।
अंशु का अवलोकन: सहअभाज्य जोड़ों (3, 5; 3, 7; 4, 9) में पहला उभयनिष्ठ गुणज गुणनफल के बराबर होता है; साझा गुणनखंड वाले जोड़ों (3, 6; 6, 15) में गुणनफल से कम। धागा कला: खूँटियों की संख्या और धागा-अंतराल सहअभाज्य हों तो धागा हर खूँटी से गुज़रता है — (b) 10 और 7 तथा (d) 8 और 3 में सभी खूँटियाँ; (a) 15 और 10 में केवल 3 और (c) 14 और 6 में केवल 7 खूँटियाँ।
खंड 5.4 – अभाज्य गुणनखंडन (पृष्ठ 117–122)
- 64 = 2×2×2×2×2×2; 104 = 2×2×2×13; 105 = 3×5×7; 243 = 3×3×3×3×3; 320 = 2×2×2×2×2×2×5; 141 = 3×47; 1728 = 2×2×2×2×2×2×3×3×3; 729 = 3×3×3×3×3×3; 1024 = 2 का 10 बार गुणनफल; 1331 = 11×11×11; 1000 = 2×2×2×5×5×5।
- 2 × 3 × 3 × 11 = 198।
- 1955 = 5 × 17 × 23।
- (a) 56 × 25 = 2×2×2×5×5×7; (b) 108 × 75 = 2×2×3×3×3×3×5×5; (c) 1000 × 81 = 2×2×2×3×3×3×3×5×5×5।
- (a) तीन भिन्न अभाज्य: 2 × 3 × 5 = 30; (b) चार: 2 × 3 × 5 × 7 = 210।
सहअभाज्यता और विभाज्यता (पृष्ठ 122):
- (a) 30, 45 — नहीं (3 और 5 साझा); (b) 57 = 3×19, 85 = 5×17 — हाँ; (c) 121, 1331 — नहीं (11 साझा); (d) 343 = 7×7×7, 216 = 2×2×2×3×3×3 — हाँ।
- (a) 225 = 3×3×5×5, 27 = 3×3×3 — नहीं; (b) 96 = 2×2×2×2×2×3, 24 = 2×2×2×3 — हाँ; (c) 343, 17 — नहीं; (d) 999 = 3×3×3×37, 99 = 3×3×11 — नहीं।
- नहीं, सहअभाज्य नहीं (3 और 7 साझा); और कोई दूसरे को विभाजित भी नहीं करती (पहली में 11 नहीं, दूसरी में 2 नहीं)।
- हाँ, गुना सही है — दो अलग अभाज्य संख्याओं का 1 के अलावा कोई साझा गुणनखंड नहीं होता।
खंड 5.5 – विभाज्यता के नियम (पृष्ठ 122–126)
10 से: अंतिम अंक 0; 5 से: 0 या 5; 2 से: 0, 2, 4, 6, 8; 4 से: अंतिम दो अंकों से बनी संख्या 4 से विभाज्य; 8 से: अंतिम तीन अंकों से बनी संख्या 8 से विभाज्य। 399 से कम 5 का सबसे बड़ा गुणज 395; 399–411 के बीच 2 के गुणज 400, 402 … 410; 8536 का 36 विभाज्य है, इसलिए 8536 भी 4 से विभाज्य; 120–140 के बीच 8 के गुणज 128, 136 (इसी तरह 1128, 1136 और 3128, 3136)। तीनों कथनों (4 और 8 दोनों के लिए) से हम सहमत हैं, क्योंकि 100 संख्या 4 से और 1000 संख्या 8 से विभाज्य है।
- अधिवर्ष: (a) अपने जन्म वर्ष से अब तक 4 से विभाज्य वर्ष लिखें; (b) 2024 से 2099 तक 2024, 2028 … 2096 — कुल 19।
- 4 से विभाज्य 4-अंकीय विलोम: इकाई अंक सम होना चाहिए, इसलिए पहला अंक भी सम होगा। सबसे बड़ी 8888 (88 ÷ 4 = 22), सबसे छोटी 2112 (12 ÷ 4 = 3)। (ध्यान दें: 9999 और 1001 विषम हैं, इसलिए 4 से विभाज्य नहीं।)
- (a) कभी-कभी सत्य — 2 + 6 = 8 (हाँ), 2 + 4 = 6 (नहीं); (b) कभी-कभी सत्य — 1 + 3 = 4 (हाँ), 1 + 5 = 6 (नहीं)।
- शेषफल (78, 99, 173, 572, 980, 1111, 2345): 10 से — 8, 9, 3, 2, 0, 1, 5; 5 से — 3, 4, 3, 2, 0, 1, 0; 2 से — 0, 1, 1, 0, 0, 1, 1।
- 14560: गुना ने 5 और 8 से जाँचा होगा — 8 से विभाज्य हो तो 2 और 4 से भी, और 5 व 2 दोनों से विभाज्य हो तो 10 से भी (8 और 10 की जोड़ी भी काम करती है)।
- 2, 4, 5, 8, 10 सभी से विभाज्य: 5600, 6000 और 77622160 (572 और 2352 का अंतिम अंक 0 नहीं)।
- गुणनफल 10000, इकाई अंक 0 नहीं: 16 × 625 = 10,000।
खंड 5.6 – संख्याओं के साथ मज़ा
“विशेष संख्या” वाले बॉक्स में कई सही उत्तर हो सकते हैं (जैसे अकेली अभाज्य, अकेली सम, अकेली वर्ग संख्या)। अभाज्य पहेली: हर खाने में केवल अभाज्य संख्या रखें ताकि हर पंक्ति और स्तंभ का गुणनफल दी गई संख्या के बराबर हो — इसके लिए पहले हर पंक्ति/स्तंभ की संख्या का अभाज्य गुणनखंडन करें (जैसे 105 = 3×5×7, 28 = 2×2×7)।
अध्याय 6: परिमाप और क्षेत्रफल — हल एवं व्याख्या
आयत का परिमाप = 2 × (लंबाई + चौड़ाई), वर्ग का परिमाप = 4 × भुजा, सम बहुभुज का परिमाप = भुजाओं की संख्या × एक भुजा; आयत का क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई, वर्ग का = भुजा × भुजा। आयत के विकर्ण से बना त्रिभुज आयत का आधा होता है। ग्रिड-चित्रों वाले उत्तर NCERT के आधिकारिक हल के अनुसार हैं।
खंड 6.1 – परिमाप (पृष्ठ 132)
- (a) 14 = 2 × (l + 2) ⇒ l + 2 = 7 ⇒ लंबाई = 5 सेमी; (b) 20 ÷ 4 = 5 सेमी; (c) 12 = 2 × (3 + b) ⇒ चौड़ाई = 3 मी।
- तार की लंबाई = 2 × (5 + 3) = 16 सेमी; वर्ग की भुजा = 16 ÷ 4 = 4 सेमी।
- तीसरी भुजा = 55 − (20 + 14) = 21 सेमी।
- परिमाप = 2 × (150 + 120) = 540 मी; ख़र्च = 540 × 40 = ₹21,600।
- (a) वर्ग: 36 ÷ 4 = 9 सेमी; (b) समबाहु त्रिभुज: 36 ÷ 3 = 12 सेमी; (c) सम षट्भुज: 36 ÷ 6 = 6 सेमी।
- परिमाप = 2 × (230 + 160) = 780 मी; 3 चक्कर के लिए 3 × 780 = 2,340 मी रस्सी।
अक्षी और तोशी की दौड़ (पृष्ठ 133–134)
- अक्षी का एक चक्कर = 2 × (70 + 40) = 220 मी; 5 चक्कर = 1,100 मी।
- तोशी का एक चक्कर = 2 × (60 + 30) = 180 मी; 7 चक्कर = 1,260 मी। तोशी ने अधिक दूरी तय की।
- अक्षी: 250 मी पर A — दूसरे चक्कर में शुरुआती बिंदु से 30 मी आगे; 500 मी पर B — तीसरे चक्कर में 60 मी आगे; 1000 मी पर C — 4 पूरे चक्कर (880 मी) के बाद 120 मी आगे। तोशी: 250 मी पर X — 70 मी आगे; 500 मी पर Y — तीसरे चक्कर में 140 मी आगे; 1000 मी पर Z — 5 पूरे चक्कर (900 मी) के बाद 100 मी आगे।
गहराई से (साझा फिनिश लाइन): भीतरी ट्रैक (परिमाप 400 मी) पर A से झंडे तक 100 + 100 + 100 + 50 = 350 मी; बाहरी ट्रैक (परिमाप 600 मी) पर B से झंडे तक 125 + 150 + 75 = 350 मी। अक्षी-तोशी का त्रिभुज: तोशी सही है — वर्ग का विकर्ण उसकी भुजा से लंबा होता है, इसलिए परिमाप 9 इकाई से अधिक (6s + 3d) है। अन्य आकृतियों के परिमाप: 8s + 2d, 4s + 6d, 12s + 6d, 18s + 6d।
काटो और जोड़ो: 6 सेमी × 2 सेमी के दो टुकड़े सिरे से जोड़ने पर 12 × 2 का आयत (परिमाप 28 सेमी) बनता है। हर व्यवस्था में केवल बाहरी सीमा की भुजाएँ जोड़ें; साझा (जुड़ी हुई) भुजा न गिनें। 22 सेमी के लिए टुकड़ों को लंबी भुजा के सहारे थोड़ा खिसकाकर जोड़ें (पूरा 6 × 4 आयत 20 सेमी देता है; 1 सेमी खिसकाने पर सीमा 2 सेमी बढ़कर 22 सेमी हो जाती है)।
खंड 6.2 – क्षेत्रफल (पृष्ठ 137–142)
- चौड़ाई = 300 ÷ 25 = 12 मी।
- क्षेत्रफल = 500 × 200 = 1,00,000 वर्ग मी; ख़र्च = (1,00,000 ÷ 100) × 8 = ₹8,000।
- क्षेत्रफल = 100 × 50 = 5,000 वर्ग मी; पेड़ = 5,000 ÷ 25 = 200।
- आकृतियों को आयतों में बाँटकर: (a) 28 वर्ग मी, (b) 9 वर्ग मी।
टैंग्राम (पृष्ठ 139): बड़े त्रिभुज A और B बराबर; छोटे त्रिभुज C और E बराबर; D, F, G तीनों बराबर (हर एक C का दोगुना)।
- बराबर क्षेत्रफल वाले टुकड़े: A = B; C = E; D = F = G।
- D, C का 2 गुना है; C और E बराबर हैं और दोनों मिलकर D को ढक लेते हैं।
- D और F — बराबर (दोनों को C और E से ढका जा सकता है)।
- F और G — बराबर।
- A, G का दोगुना है (A = 4C, G = 2C)।
- बड़ा वर्ग = 4 + 4 + 1 + 1 + 2 + 2 + 2 = 16 × C।
- आयत का क्षेत्रफल भी 16 × C, क्योंकि वही सात टुकड़े हैं।
- परिमाप अलग होंगे — बराबर क्षेत्रफल की आकृतियों का परिमाप अलग हो सकता है।
ग्रिड पर क्षेत्रफल (पृष्ठ 140): 4, 9, 10 और 11 वर्ग इकाई (आधे से कम वर्ग छोड़ें, आधे से अधिक को 1 गिनें)। क्षेत्रफल वर्गों से इसलिए मापा जाता है कि वर्ग बिना खाली जगह और बिना एक-दूसरे पर चढ़े पूरी सतह ढक लेते हैं, वृत्त नहीं।
24 वर्ग इकाई के आयत: 1×24 (परिमाप 50), 2×12 (28), 3×8 (22), 4×6 (20) — सबसे अधिक परिमाप 1×24, सबसे कम 4×6। 32 वर्ग सेमी के लिए: 1×32 (66 सेमी) सबसे अधिक, 4×8 (24 सेमी) सबसे कम। नियम: जितना लंबा-पतला आयत, उतना अधिक परिमाप; वर्ग के जितना निकट, उतना कम।
खंड 6.3 – त्रिभुज का क्षेत्रफल (पृष्ठ 142–149)
आयत को विकर्ण से काटने पर दोनों त्रिभुज पूरी तरह एक-दूसरे पर आते हैं, इसलिए हर त्रिभुज आयत का आधा है। निष्कर्ष: त्रिभुज BAD और ABE दोनों का क्षेत्रफल आयत ABCD का आधा है — एक ही आधार और ऊँचाई वाले त्रिभुज अलग दिखकर भी बराबर क्षेत्रफल के होते हैं।
- आकृतियों का क्षेत्रफल (आधिकारिक हल): (a) 24, (b) 30, (c) 48, (d) 16, (e) 12 वर्ग इकाई।
अधिक या कम (9 इकाई वर्ग): (1) सबसे कम परिमाप 12 इकाई (3×3 वर्ग); (2) सबसे अधिक 20 इकाई (9×1 पंक्ति); (3) 18 इकाई के लिए कई आकृतियाँ बनती हैं; (4) 12 इकाई वाली केवल एक आकृति (3×3) है, बाकी के लिए अनेक आकृतियाँ संभव। नया वर्ग जोड़ने पर परिमाप इस पर निर्भर है कि वह कितनी भुजाएँ साझा करता है — 1 भुजा साझा करे तो +2, 2 करे तो 0, 3 करे तो −2।
चरण का घर (आधिकारिक हल): छोटा शयनकक्ष 15×12 फीट (180 वर्ग फीट), यूटिलिटी 15×3 (45), हॉल 20×12 (240), पार्किंग 15×3 (45), बगीचा 20×3 (60); कुल क्षेत्रफल 35 × 30 = 1,050 वर्ग फीट। शरण का घर: यूटिलिटी 7×10 (70), हॉल 23×15 (345), प्रवेश 7×15 (105), छोटा शयनकक्ष 12×10 (120), शौचालय 5×10 (50); कुल 42 × 25 = 1,050 वर्ग फीट। दोनों का क्षेत्रफल बराबर, पर परिमाप अलग — चरण 130 फीट, शरण 134 फीट।
क्षेत्रफल भूलभुलैया पहेलियाँ: (a) 30 वर्ग सेमी, (b) 9 वर्ग सेमी, (c) 16 वर्ग सेमी, (d) 5 सेमी।
आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 149):
- कुल क्षेत्रफल = 50 + 14 = 64 वर्ग मी; आयत 8 मी × 8 मी, 16 मी × 4 मी या 32 मी × 2 मी।
- चौड़ाई = 1000 ÷ 50 = 20 मी।
- 20 − 9 = 11 वर्ग मी (कमरा 5×4 = 20, कालीन 3×3 = 9)।
- बगीचा 15 × 12 = 180 वर्ग मी, क्यारियाँ 4 × (2 × 1) = 8 वर्ग मी; लॉन = 172 वर्ग मी।
- उदाहरण: A = 9 × 2 आयत (क्षेत्रफल 18, परिमाप 22) और B = 5 × 4 आयत (क्षेत्रफल 20, परिमाप 18)।
- यह आपकी किताब के पृष्ठ के माप पर निर्भर है: यदि पृष्ठ L सेमी लंबा और W सेमी चौड़ा है, तो बॉर्डर (L − 2) × (W − 3) होगा और परिमाप = 2 × [(L − 2) + (W − 3)]। पहले अपना पृष्ठ नापें।
- बड़ा आयत 12 × 8 = 96 वर्ग इकाई; आधा = 48, जैसे भीतर 8 × 6 का आयत (चारों ओर खाली जगह छोड़कर)।
- केवल (c) सत्य है — भुजा s के वर्ग का परिमाप 4s; हर आयत s × s/2 का परिमाप 3s, दोनों का 6s = 1½ × 4s।
अध्याय 7: भिन्न — हल एवं व्याख्या
इस अध्याय में भिन्न को बराबर हिस्से के रूप में, भिन्नात्मक इकाइयाँ (1/2, 1/3, 1/4 …), संख्या रेखा पर भिन्न, मिश्रित भिन्न, तुल्य भिन्न, भिन्नों की तुलना और ब्रह्मगुप्त की विधि से जोड़-घटाव सिखाया गया है। यहाँ भिन्न a/b के रूप में लिखे गए हैं (a अंश, b हर)।
खंड 7.1 – भिन्नात्मक इकाइयाँ और बराबर हिस्से (पृष्ठ 152–153)
जितने अधिक लोगों में बाँटें, हिस्सा उतना छोटा: 1/9 < 1/5, 1/200 < 1/100।
- हर अमरूद लगभग 1/3 किग्रा।
- हर पैकेट 1/4 किग्रा।
- हर मित्र ने 3/4 गिलास रस पिया।
- दोनों मछलियाँ मिलकर 1/2 + 1/4 = 3/4 किग्रा।
- छोटे से बड़े क्रम में: चौथाई (1/4), आधा (1/2), तीन-चौथाई (3/4), सवा (1¼), डेढ़ (1½), ढाई (2½)। पुस्तक के अनुसार ऋग्वेद में 3/4 को ‘त्रि-पाद’ कहा गया है — हिंदी के ‘तीन पाव’ जैसा।
खंड 7.2 – पूरे के भाग (पृष्ठ 154–155)
एक चिक्की के 6 बराबर टुकड़े अलग-अलग आकार के होकर भी बराबर आकार (माप) के हैं। आइए पता लगाएँ (आधिकारिक हल): (a) 1/12, (b) 1/4, (c) 1/8, (d) 1/6, (e) 1/8, (f) 1/6, (g) 1/24, (h) 1/24।
खंड 7.3 – भिन्नात्मक इकाइयों से मापना (पृष्ठ 156–158)
2 गुना 1/8 = 2/8, 4 गुना 1/8 = 4/8, 6 गुना 1/8 = 6/8, 8 गुना 1/8 = 8/8 = 1।
- 1/2 + 1/2 + 1/2 + 1/2 + 1/2 + 1/2 = 6 गुना 1/2 (= 3); सात बार जोड़ने पर 7 गुना 1/2 (= 3½)।
- 1/4 = 1 गुना चौथाई; 1/4 + 1/4 = 2 गुना चौथाई; 1/4 + 1/4 + 1/4 = 3 गुना; चार बार = 4/4 = 1।
- पट्टी को तीन बराबर भागों में मोड़कर 1/3 बनता है; हर भाग को फिर आधा मोड़ने पर 1/6 मिलता है।
- (a) 1/4 + 1/4 + 1/4 + 1/4 + 1/4 = 5/4 रोटी; (b) 9 बार 1/4 = 9/4 = 2 + 1/4 रोटी।
- हर चित्र में पूरे के कितने बराबर भाग हैं, गिनकर 1/3, 1/5, 1/6, 1/8 मिलाएँ।
खंड 7.4 – संख्या रेखा पर भिन्न (पृष्ठ 159–160)
- 0 से 1 को 10 बराबर भागों में बाँटकर 1/10 और 3/10 तक रेखाएँ खींचें; 4/5 = 8/10।
- अपनी पसंद के पाँच भिन्न इसी तरह अंकित करें।
- 0 और 1 के बीच कितने भिन्न? अनगिनत (असंख्य) — इकाई को जितने चाहें उतने भागों में बाँट सकते हैं।
- काली रेखा की लंबाई 3/2।
- काली रेखाओं की लंबाइयाँ: 6/5, 7/5, 8/5, 9/5।
खंड 7.5 – मिश्रित भिन्न (पृष्ठ 161–163)
7/2 में 3 पूरी इकाइयाँ; 4/3 में 1 और 7/3 में 2। 8/3, 11/5, 9/4 — तीनों में 2-2 पूरी इकाइयाँ। क्या हर 1 से बड़ा भिन्न मिश्रित संख्या बनेगा? नहीं — जैसे 8/4 = 2 पूर्ण संख्या है, उसमें भिन्नात्मक भाग नहीं बचता।
- मिश्रित भिन्न में: 9/2 = 4½; 9/5 = 1 4/5; 21/19 = 1 2/19; 47/9 = 5 2/9; 12/11 = 1 1/11; 19/6 = 3 1/6।
- साधारण भिन्न में: 3¼ = 13/4; 7 2/3 = 23/3; 9 4/9 = 85/9; 3 1/6 = 19/6; 2 3/11 = 25/11; 3 9/10 = 39/10 (पूर्ण संख्या × हर + अंश)।
खंड 7.6 – तुल्य भिन्न (पृष्ठ 163–173)
भिन्न दीवार से: 1/2 = 3/6 (हाँ); 2/3 = 4/6 (हाँ, लंबाई बराबर); 1/2 में 1/6 के 3 टुकड़े; 1/3 में 1/6 के 2 टुकड़े।
- 3/6, 4/8, 5/10 — हाँ, तीनों 1/2 के बराबर हैं।
- 2/6 के तुल्य: 1/3, 3/9 (या 4/12)।
- 4/6 = 2/3 = 6/9 = 8/12 = 10/15 = 12/18 …
बराबर बाँटना (पृष्ठ 166):
- 3 रोटियाँ, 4 बच्चे: हर बच्चे को 3/4। भाग तथ्य 3 ÷ 4 = 3/4; जोड़ तथ्य 3 = 3/4 + 3/4 + 3/4 + 3/4; गुणा तथ्य 3 = 4 × 3/4।
- 2 रोटियाँ, 4 बच्चे: हर बच्चे को 1/2। 2 ÷ 4 = 2/4 = 1/2; 2 = 1/2 + 1/2 + 1/2 + 1/2; 2 = 4 × 1/2।
- अनिल को 2/5 केक; 10 बच्चों को उतना ही हिस्सा देने के लिए 4 केक चाहिए (2/5 = 4/10)।
लुप्त संख्याएँ (पृष्ठ 168): (a) 10 गिलास, 5/4 = 10/8; (b) 9 थैले, 4/3 = 12/9; (c) जैसे 14 रोटियाँ और 10 बच्चे, 7/5 = 14/10। अंश और हर दोनों को एक ही संख्या से गुणा करने पर तुल्य भिन्न मिलती है।
किस समूह में अधिक (पृष्ठ 170): बच्चे उतने ही रहें और चीज़ें बढ़ें तो हर हिस्सा बड़ा होता है (1/5 < 2/5, 3/7 < 4/7)। (1) 3/4 = 15/20 और 7/10 = 14/20, इसलिए समूह 1 में अधिक; (2) 5/7 > 4/7, समूह 2 में अधिक — यह तुलना आसान थी क्योंकि बच्चे बराबर थे।
समान भिन्नात्मक इकाई वाले तुल्य भिन्न (पृष्ठ 172): (a) 35/10, 6/10; (b) 16/6, 5/6; (c) 15/20, 12/20; (d) 30/35, 56/35; (e) 9/4, 10/4; (f) 9/90, 20/90; (g) 32/12, 33/12; (h) 39/18, 2/18।
न्यूनतम पदों में (पृष्ठ 173): 17/51 = 1/3; 64/144 = 4/9; 126/147 = 6/7; 525/112 = 75/16 (अंश और हर को सबसे बड़े साझा गुणनखंड से भाग दें — 17, 16, 21, 7)।
खंड 7.7 – भिन्नों की तुलना (पृष्ठ 174)
- (a) 8/3 = 16/6 > 5/2 = 15/6; (b) 4/9 = 28/63 > 3/7 = 27/63; (c) 7/10 = 49/70 > 9/14 = 45/70; (d) 12/5 > 8/5; (e) 9/4 < 5/2 = 10/4।
- आरोही क्रम: (a) 2/5 < 7/10 < 11/15 (12/30, 21/30, 22/30); (b) 7/12 < 19/24 < 5/6 (14/24, 19/24, 20/24)।
- अवरोही क्रम: (a) 13/4 > 25/16 > 7/8 > 17/32; (b) 12/5 > 5/4 > 3/4 > 7/12।
खंड 7.8 – भिन्नों का जोड़ और घटाव (पृष्ठ 175–182)
मीना और भाई ने 1/2 + 1/4 = 3/4 चिक्की खाई, बची 1/4। 4/7 + 6/7 = 10/7 = 1 3/7 (संख्या रेखा पर भी यही)। ब्रह्मगुप्त की विधि (628 ई.): हरों को समान बनाएँ, अंश जोड़ें/घटाएँ, फिर न्यूनतम पदों में लिखें।
- जोड़: (a) 13/7; (b) 13/12; (c) 9/6 = 3/2; (d) 20/21; (e) 77/60; (f) 22/15; (g) 22/15; (h) 49/40; (i) 23/4; (j) 62/21; (k) 77/60; (l) 199/105; (m) 83/12।
- रहीम का हरा रंग = 2/3 + 3/4 = 17/12 = 1 5/12 लीटर।
- कुल लेस = 2/5 + 3/4 = 23/20 = 1 3/20 मी, जो 1 मी से अधिक है — हाँ, पर्याप्त है।
समान हर वाला घटाव (पृष्ठ 181): 5/8 − 3/8 = 2/8 = 1/4; 7/9 − 5/9 = 2/9; 10/27 − 1/27 = 9/27 = 1/3।
- (a) 8/15 − 3/15 = 5/15 = 1/3; (b) 2/5 − 4/15 = 6/15 − 4/15 = 2/15; (c) 5/6 − 4/9 = 15/18 − 8/18 = 7/18; (d) 2/3 − 1/2 = 1/6।
- (a) 10/3 − 13/4 = 40/12 − 39/12 = 1/12; (b) 23/3 − 18/5 = 115/15 − 54/15 = 61/15; (c) 45/7 − 29/7 = 16/7।
- (a) जया पैदल 7/10 − 1/2 = 7/10 − 5/10 = 1/5 किमी चलती है; (b) 13/4 < 10/3, इसलिए नमित 1/12 मिनट कम समय लेता है।
खंड 7.9 – इतिहास और पहेली
पुस्तक के अनुसार प्राचीन भारत में भिन्न को ‘भिन्न’ (टूटा हुआ) या ‘भाग’/‘अंश’ कहा जाता था। पहेली 1: तीन अलग इकाई भिन्न जिनका योग 1 हो — केवल एक हल: 1/2 + 1/3 + 1/6 = 1। पहेली 2: चार अलग इकाई भिन्न — छह हल: 1/2 + 1/3 + 1/7 + 1/42; 1/2 + 1/3 + 1/8 + 1/24; 1/2 + 1/3 + 1/9 + 1/18; 1/2 + 1/3 + 1/10 + 1/15; 1/2 + 1/4 + 1/5 + 1/20; 1/2 + 1/4 + 1/6 + 1/12।
अध्याय 8: रचनाओं के साथ खेलना — हल एवं व्याख्या
इस अध्याय में परकार (कंपास) और रूलर से वृत्त, अर्धवृत्त, वर्ग, आयत और सुंदर आकृतियाँ बनाना सिखाया गया है। यहाँ हर रचना के चरण और जाँच के तरीके दिए गए हैं; अंतिम आकृति कॉपी में स्वयं बनाएँ।
खंड 8.1 – कलाकृति (पृष्ठ 187–192)
P से 4 सेमी दूरी पर सभी बिंदु मिलकर वृत्त बनाते हैं; P केंद्र और 4 सेमी त्रिज्या है। परकार को रूलर पर 4 सेमी खोलकर, नोक P पर स्थिर रखकर केवल पेंसिल घुमाएँ।
- लहरदार रेखा (AB = 8 सेमी, दो अर्धवृत्त): हर अर्धवृत्त का व्यास 4 सेमी, इसलिए त्रिज्या 2 सेमी और AX = 4 सेमी। केंद्र AX के मध्य बिंदु पर रखें।
- केंद्रीय रेखा की लंबाई L लें तो त्रिज्या = L ÷ 4 रखें (दो लहरों के लिए)।
- अर्धवृत्त से छोटी लहरों के लिए केंद्र को रेखा से थोड़ा नीचे/ऊपर रखें और बड़ी त्रिज्या लें; दोनों लहरों के लिए एक ही त्रिज्या और रेखा से बराबर दूरी रखें।
खंड 8.2 – वर्ग और आयत (पृष्ठ 192–194)
आयत: (R1) सम्मुख भुजाएँ बराबर, (R2) सभी कोण 90°। वर्ग: (S1) सभी भुजाएँ बराबर, (S2) सभी कोण 90°। नाम में कोने घूमने के क्रम में होने चाहिए, इसलिए वर्ग का नाम PQSR नहीं हो सकता। घुमाया हुआ वर्ग/आयत भी वर्ग/आयत ही रहता है, क्योंकि लंबाइयाँ और कोण नहीं बदलते।
- बिंदु कागज़ पर आयत बनाकर चारों ओर एक बिंदु की तिरछी दूरी छोड़कर चार छोटे वर्ग सममित रूप से रखें।
- आधिकारिक हल के अनुसार आकृति A वर्ग है। बिंदु ग्रिड पर कोनों की स्थिति (जैसे हर भुजा के लिए “2 दाएँ, 1 ऊपर” जैसा एक ही कदम) देखकर बिना मापे भी भुजाओं की बराबरी और समकोण पहचाने जा सकते हैं।
- बिंदु ग्रिड पर 3 घुमाए हुए वर्ग और आयत बनाकर R1, R2 / S1, S2 जाँचें।
खंड 8.3 – वर्ग और आयत की रचना (पृष्ठ 195–197)
6 सेमी भुजा का वर्ग PQRS: PQ = 6 सेमी खींचें → P पर लंब खींचकर PS = 6 सेमी → Q पर लंब खींचकर QR = 6 सेमी (परकार से) → R और S जोड़ें; RS = 6 सेमी और ∠R = ∠S = 90° जाँचें।
- 4 सेमी × 6 सेमी आयत: सभी कोण 90°, AB = CD = 4 सेमी, AD = BC = 6 सेमी।
- 2 सेमी × 10 सेमी आयत: सभी कोण 90°, सम्मुख भुजाएँ 10-10 और 2-2 सेमी।
- सभी कोण 90° पर सम्मुख भुजाएँ असमान? नहीं — चारों कोण समकोण हों तो सम्मुख भुजाएँ अपने आप बराबर हो जाती हैं।
खंड 8.4 – आयतों की खोज (पृष्ठ 197–203)
आयत ABCD (AB = 7 सेमी, BC = 4 सेमी) में X भुजा AD पर और Y भुजा BC पर: X और Y की न्यूनतम दूरी AB = 7 सेमी है (जब A से X और B से Y बराबर दूरी पर हों — तब ABYX आयत होता है); अधिकतम दूरी विकर्ण AC (या BD) के बराबर है। अवलोकन तालिका के रूप में लिखें: “A से X की दूरी | B से Y की दूरी | XY”।
आयत को समान वर्गों में तोड़ना: दो समान वर्गों के लिए लंबाई = 2 × चौड़ाई (जैसे AF = 4 सेमी तो AC = 8 सेमी); तीन के लिए लंबाई = 3 × चौड़ाई। परकार से AF की लंबाई उठाकर B और C अंकित करें। जो आयत नहीं टूट सकते: जैसे 4 सेमी × 2.5 सेमी (दो वर्गों में नहीं) और 7 सेमी × 2 सेमी (तीन वर्गों में नहीं)।
- आयत के भीतर वर्ग (8 × 4): आयत के विकर्णों का कटाव बिंदु केंद्र है। यदि वर्ग की भुजा s हो, तो उसकी बाएँ-दाएँ भुजाएँ आयत के सिरों से (8 − s) ÷ 2 और ऊपर-नीचे की भुजाएँ (4 − s) ÷ 2 दूर होंगी; उदाहरण — 4 सेमी भुजा का वर्ग दोनों सिरों से 2-2 सेमी दूर।
- गिरते वर्ग: 7, 5, 3 सेमी के वर्ग क्रम से आधार रेखा पर लंब खींचकर बनाएँ।
- छायांकन: 4 सेमी के छोटे वर्ग बड़े वर्ग के कोनों से मापकर सीध में रखें।
- छेद वाला वर्ग: वृत्त का केंद्र वर्ग के दोनों विकर्णों का कटाव बिंदु है।
- कई छेद: वर्ग को छोटे वर्गों में बाँटकर हर छोटे वर्ग के विकर्णों के कटाव पर केंद्र रखें।
- वक्र वाला वर्ग (8 सेमी): हर चाप के लिए परकार की नोक उस भुजा के मध्य बिंदु से गुज़रने वाली लंब रेखा पर समान दूरी पर रखें, ताकि चारों चाप बराबर उभरें।
खंड 8.5 – आयत और वर्ग के विकर्ण (पृष्ठ 203–211)
आयत के दोनों विकर्ण बराबर होते हैं। विकर्ण सम्मुख कोणों को बराबर भागों में तभी बाँटता है जब आसन्न भुजाएँ बराबर हों, यानी आयत वर्ग हो।
- विकर्ण कोणों को 50° और 40° में बाँटे: AB किसी भी लंबाई का खींचें, B पर लंब, A पर AB से 50° (या 40°) का कोण बनाकर लंब को C पर काटें, फिर A पर लंब और AD = BC लेकर आयत पूरा करें (60°-30° वाले हल किए गए उदाहरण की तरह)।
- 45° और 45°: इसी विधि से बनाने पर सभी भुजाएँ बराबर आती हैं — आयत वर्ग बन जाता है।
- भुजा 4 सेमी, विकर्ण 8 सेमी: DC = 4 सेमी → C पर लंब l → D को केंद्र मानकर 8 सेमी का चाप l को B पर काटे → D और B पर लंब खींचकर A। जाँच: दूसरी भुजा लगभग 6.9 सेमी आएगी।
- भुजा 3 सेमी, विकर्ण 7 सेमी: ऊपर वाली विधि से; दूसरी भुजा लगभग 6.3 सेमी आएगी।
खंड 8.6 – दो बिंदुओं से समान दूरी वाले बिंदु (पृष्ठ 211–215)
घर की रचना: B और C को केंद्र मानकर 5 सेमी के चाप खींचें; उनका कटाव बिंदु A है, जो B और C दोनों से 5 सेमी दूर है। फिर A को केंद्र मानकर 5 सेमी का चाप B से C तक खींचें।
- 7 सेमी वाला बड़ा घर: सभी माप 7 सेमी लेकर यही चरण दोहराएँ।
- ‘एक व्यक्ति’, ‘लहरदार रेखा’ और ‘आँखें’ में चाप का केंद्र वह बिंदु लें जो चाप के दोनों सिरों से समान दूरी पर हो (दोनों सिरों से समान त्रिज्या के चाप काटकर)।
- सभी भुजाएँ बराबर पर वर्ग नहीं? हाँ, ऐसी आकृति (समचतुर्भुज) संभव है। AB = AC = 5 सेमी किसी भी (90° के अलावा) कोण पर खींचें, फिर B और C से 5-5 सेमी के चाप काटकर चौथा बिंदु D पाएँ।
अध्याय 9: सममिति — हल एवं व्याख्या
जिस रेखा पर मोड़ने से आकृति के दोनों भाग पूरी तरह एक-दूसरे पर आ जाएँ, वह सममिति रेखा है (परावर्तन सममिति)। जिस कोण से घुमाने पर आकृति वैसी ही दिखे, वह सममिति कोण है (घूर्णन सममिति)। चित्र-आधारित उत्तर NCERT के आधिकारिक हल के अनुसार हैं।
खंड 9.1 – सममिति रेखा (पृष्ठ 219–230)
- अध्याय की शुरुआती आकृतियाँ: फूल में 6, रंगोली में 4 और तितली में 1 सममिति रेखा; फिरकी और बादल में कोई नहीं।
- हर आकृति को कागज़ पर उतारकर मोड़ें और जाँचें कि दोनों भाग ढकते हैं या नहीं।
वर्ग और आयत: वर्ग में 4 सममिति रेखाएँ (ऊर्ध्वाधर, क्षैतिज और दोनों विकर्ण); इसके अलावा कोई मोड़ नहीं। जो आयत वर्ग नहीं है, उसका विकर्ण सममिति रेखा नहीं है। विकर्ण AC पर परावर्तन से A और C वहीं रहते हैं, B और D आपस में जगह बदलते हैं; क्षैतिज रेखा पर D, A की जगह और C, B की जगह (और इसका उलटा) चले जाते हैं।
- छेद वाला खेल: छेदों के जोड़े के बीचों-बीच की रेखा मोड़ रेखा है। (d) में एक ही छेद से चार छेद बने, इसलिए कागज़ पहले ऊर्ध्वाधर और फिर क्षैतिज (या इसका उलटा) मोड़ा गया था।
- हर छेद का प्रतिबिंब सममिति रेखा से उतनी ही दूरी पर दूसरी ओर बनाएँ; दो रेखाएँ हों तो दोनों के सापेक्ष प्रतिबिंब बनाएँ।
- और 4. मोड़ के अनुसार कटाव का प्रतिबिंब सोचकर अनुमान लगाएँ, फिर काटकर जाँचें।
- एक सीधे कटाव से वर्गाकार छेद: (a) कागज़ को क्षैतिज फिर ऊर्ध्वाधर मोड़ें और बंद कोने पर छोटा वर्ग काटें; (b) इसी तरह मोड़कर बंद कोने पर तिरछा कटाव लगाएँ (इससे घूमा हुआ वर्ग बनता है)।
- सममिति रेखाएँ: समबाहु त्रिभुज में 3, सम षट्भुज में 6 (किसी सम बहुभुज में जितनी भुजाएँ, उतनी सममिति रेखाएँ)।
- और 8. आकृतियों और कोलम को उतारकर हर संभव मोड़ की जाँच करें।
- त्रिभुज: (a) एक सममिति रेखा — समद्विबाहु त्रिभुज; (b) तीन — समबाहु त्रिभुज; (c) कोई नहीं — विषमबाहु त्रिभुज। ठीक दो सममिति रेखाओं वाला त्रिभुज संभव नहीं — दो रेखाएँ हों तो तीनों भुजाएँ बराबर हो जाती हैं और तीसरी रेखा भी बन जाती है।
- वक्र सीमा वाली आकृतियाँ: (a) एक रेखा — अर्धवृत्त; (b) दो रेखाएँ — अंडाकार (दीर्घवृत्त) आकृति; (c) चार रेखाएँ — वर्ग की हर भुजा पर बराबर अर्धवृत्त लगाकर।
- और 12, 13. नीली रेखा(ओं) से हर बिंदु की दूरी गिनकर दूसरी ओर उतनी ही दूरी पर प्रतिबिंब बिंदु लगाकर आकृति पूरी करें।
खंड 9.2 – घूर्णन सममिति (पृष्ठ 230–239)
कागज़ की फिरकी के सममिति कोण 90°, 180°, 270°, 360° (4 कोण) हैं; वर्ग के भी यही। 360° हर आकृति का सममिति कोण है; जिसका कोई कोण 0° और 360° के बीच हो, उसी में घूर्णन सममिति है। 3 भुजाओं (रेडियल आर्म्स) वाली आकृति में घूर्णन सममिति तभी है जब हर कोण 360° ÷ 3 = 120° हो। 5 कोणों के लिए 72°, 144°, 216°, 288°, 360°; 6 के लिए 60°, 120° … 360°; 7 के लिए सबसे छोटा कोण 360° ÷ 7 = 51 3/7° (पूर्ण संख्या नहीं)।
- (a) 90°, 180°, 270°, 360°; (b) केवल 360°; (c) 180°, 360°।
- जिन आकृतियों को 360° से कम घुमाने पर वे वैसी ही दिखें, उनके एक से अधिक सममिति कोण हैं।
- क्रम (ऑर्डर) = 360° में से सममिति कोणों की संख्या (= 360° ÷ सबसे छोटा कोण)।
सत्य/असत्य: दोनों कथन सत्य हैं — हर आकृति का 360° सममिति कोण है, और सबसे छोटा कोण प्राकृत संख्या हो तो वह 360 का गुणनखंड होता है (बाकी कोण उसके गुणज होते हैं)। वृत्त के लिए हर कोण सममिति कोण है और हर व्यास सममिति रेखा।
- वृत्त के खंड रंगना: 3 सममिति कोणों के लिए रंग का पैटर्न हर 120° पर और 4 के लिए हर 90° पर दोहराएँ। संभव संख्या हमेशा खंडों की संख्या का गुणनखंड होगी — जैसे 12 खंड हों तो 1, 2, 3, 4, 6 या 12।
- दोनों सममितियों वाली आकृतियाँ: समबाहु त्रिभुज, सम षट्भुज, आयत, अधिक (+) का चिह्न।
- (a) समबाहु त्रिभुज (3 रेखाएँ, 3 कोण); (b) समद्विबाहु त्रिभुज; (c) समांतर चतुर्भुज (180°, 360°, कोई रेखा नहीं); (d) पतंग (kite) आकार या समद्विबाहु समलंब चतुर्भुज।
- सबसे छोटा 60° तो बाकी: 120°, 180°, 240°, 300°, 360°।
- 60° से कम ठीक दो कोण और 60° भी सममिति कोण → सबसे छोटा 20° (20°, 40°, 60° …)।
- (a) 45° — हाँ, 360 ÷ 45 = 8; (b) 17° — नहीं, 17 संख्या 360 का गुणनखंड नहीं।
- नया संसद भवन (आधिकारिक हल): (a) हाँ, 3 सममिति रेखाएँ; (b) हाँ, 120°, 240°, 360°।
- सम बहुभुजों की सममिति रेखाएँ: 3, 4, 5, 6 … (3 से शुरू गिनती संख्याएँ)।
- सम बहुभुजों के सममिति कोणों की संख्या भी 3, 4, 5, 6 …।
- कोच स्नोफ़्लेक: पहली आकृति (त्रिभुज) में 3 रेखाएँ और 3 कोण, आगे की आकृतियों में 6 रेखाएँ और 6 कोण।
- अशोक चक्र: 24 सममिति रेखाएँ और 24 सममिति कोण (सबसे छोटा 15°)।
खेल (6 × 6 ग्रिड): दूसरा खिलाड़ी हमेशा जीत सकता है — हर बार पहले खिलाड़ी की चाल की ग्रिड के केंद्र के सापेक्ष 180° घूमी हुई (सममित) चाल चले। 6 × 6 ग्रिड का केंद्र खानों के कोने पर है, इसलिए सममित चाल हमेशा खाली रहती है।
अध्याय 10: शून्य के दूसरी ओर — हल एवं व्याख्या
इस अध्याय में पूर्णांक (… −3, −2, −1, 0, 1, 2, 3 …), उनकी तुलना, योग (प्रारंभिक स्थिति + गति = लक्ष्य), व्यवकलन (लक्ष्य − प्रारंभिक = आवश्यक गति) और टोकन मॉडल सिखाया गया है। ऋणात्मक संख्या घटाना = उसके धनात्मक रूप को जोड़ना।
खंड 10.1 – बेला की मज़ेदार इमारत (पृष्ठ 243–255)
4 तल ऊपर के लिए +4 (यानी + + + +), 3 तल नीचे के लिए −3। तल: +3 पुस्तक भंडार, +2 कला केंद्र, +1 फ़ूड कोर्ट, 0 स्वागत कक्ष, −1 खिलौने की दुकान, −2 वीडियो गेम्स। शून्य न धनात्मक है, न ऋणात्मक।
- (+2) + (−3) = −1 (खिलौने की दुकान)।
- (a) +5; (b) +5; (c) +1; (d) +1; (e) 0; (f) +2; (g) −2।
- −5 तक पहुँचना: (+1) + (−6) = −5; (−2) + (−3) = −5; 0 + (−5) = −5; (+3) + (−8) = −5।
बटन दबाना जोड़ना: (a) +5; (b) +5; (c) (+4) + (−3) + (−2) = −1; (d) (−1) + (+2) + (−3) = −2। प्रतिलोम: +4 → −4, −4 → +4, −3 → +3, 0 → 0, +2 → −2, −1 → +1; जोड़े: +9 ↔ −9, +7 ↔ −7, −8 ↔ +8, −5 ↔ +5। सबसे नीचे कौन? जय +2, आसिन +5, बिन्नू −3, अमन −1 — सबसे नीचे बिन्नू।
- (a) −2 < +5; (b) −5 < +4; (c) −5 < −3; (d) +6 > −6; (e) 0 > −4; (f) 0 < +4।
- (a) −10 > −12; (b) +17 > −10; (c) 0 > −20; (d) +9 > −9; (e) −25 < −7; (f) +15 > −17।
- आधिकारिक हल के अनुसार: B = −9, C = −6, F = +2, G = +6, H = +11।
- रेखा पर 0 से गिनकर −7, −4, +3 और −10 अंकित करें।
व्यवकलन = कितना जोड़ना है: 15 − 5 → 5 + ? = 15, ? = 10; 100 − 10 = 90; 74 − 34 = 40।
- (a) −3; (b) −2; (c) +3; (d) +2; (e) +7; (f) −1; (g) −3; (h) 0; (i) −2; (j) +6।
खान (माइन): (a) +160; (b) −240; (c) +250; (d) −150; (e) −160; (f) +160; (g) −240। अनंत लिफ़्ट: (a) −125 + (−30) = −155; (b) 105 − (−55) = 160; (c) 105 + 55 = 160; (d) 80 − (−150) = 230; (e) 80 + 150 = 230; (f) −99 − (−200) = 101; (g) −99 + 200 = 101; (h) 1500 − (−1500) = 3000। हाँ, ऋणात्मक संख्या घटाना धनात्मक जोड़ने जैसा है और अनंत लिफ़्ट संख्या रेखा जैसी है।
संख्या रेखा: 5 से 9 तक +4; 9 से 3 तक −6; 3 से −2 तक −5।
- और 2. उदाहरण: 2, 5, 8 और −1, −3, −7; क्रम से −7 < −3 < −1।
- हाँ, 2 > −3 और −2 < 3, क्योंकि संख्या रेखा पर बड़ी संख्या दाईं ओर होती है।
- (a) −5; (b) 0; (c) 10; (d) −10; (e) 14; (f) 2।
अचिह्नित संख्या रेखा: (a) −155; (b) 160; (c) 230; (d) 101। घटाव को जोड़ में बदलना: (+7) − (+5) = (+7) + (−5); (−3) − (+8) = (−3) + (−8); (+8) − (−2) = (+8) + (+2)।
खंड 10.2 – टोकन मॉडल (पृष्ठ 256–259)
एक धनात्मक और एक ऋणात्मक टोकन मिलकर ‘शून्य युग्म’ बनाते हैं और हटाए जा सकते हैं। घटाने के लिए टोकन कम पड़ें तो शून्य युग्म जोड़ दें।
- जोड़: (a) +10; (b) −5; (c) −2; (d) +4।
- (a) (+3) + (−5) = −2, लिफ़्ट चालक तल −2 पर; (b) (+6) + (−3) = +3, तल +3 पर।
घटाव: (+5) − (+4) = +1; (−7) − (−5) = −2 (हाँ, (−7) + (+5) के बराबर); (+5) − (+6) = −1 (एक शून्य युग्म जोड़कर); +4 − (−6) = +10।
- (a) +3; (b) −4; (c) −5; (d) −3; (e) +2; (f) +4।
- (a) +2; (b) −3; (c) +2; (d) −5; (e) +5; (f) −12।
- −3 − (+5): 5 शून्य युग्म जोड़ने होंगे; परिणाम −8।
- (a) −13; (b) +15; (c) −14; (d) −19; (e) +10; (f) −9।
खंड 10.3 – अन्य स्थानों पर पूर्णांक (पृष्ठ 259–263)
बैंक खाता: ₹100 + ₹60 = ₹160; − ₹30 = ₹130; − ₹150 = −₹20 (कुछ बैंक अस्थायी रूप से ऐसा होने देते हैं); + ₹200 = ₹180।
- 30 + 40 + 50 − 40 − 50 − 60 = −₹30।
- −(1 + 2 + 4 + 8 + 16 + 32 + 64 + 128) + 256 = −255 + 256 = ₹1।
- धनात्मक शेष में बैंक का अतिरिक्त शुल्क/ब्याज नहीं लगता; अस्थायी ऋणात्मक शेष तब उपयोगी हो सकता है जब कोई ज़रूरी ख़रीद आगे कमाई लाए (जैसे पुस्तक का व्यापारिक उदाहरण)।
भौगोलिक अनुप्रस्थ काट (आधिकारिक हल के अनुमानित मान): A +1500 मी, B −500 मी, C +300 मी, D −1200 मी, E +1200 मी, F −200 मी, G +100 मी। सबसे ऊँचा A, सबसे नीचा D; घटता क्रम A, E, C, G, F, B, D और बढ़ता क्रम इसका उलटा। पृथ्वी का सबसे ऊँचा बिंदु माउंट एवरेस्ट (लगभग +8,849 मी; पुस्तक के अध्याय 4 में 8848 मी दिया गया है) और सबसे गहरा बिंदु प्रशांत महासागर की मारियाना खाई का चैलेंजर डीप (लगभग −10,900 मी से अधिक गहरा)।
तापमान: भारत में लेह, द्रास, सियाचिन जैसे ऊँचे पहाड़ी स्थानों पर तापमान 0°C से नीचे जाता है — अधिक ऊँचाई पर ठंड अधिक होती है। लेह का मिलान: 14°C — दोपहर 2:00, 8°C — सुबह 11:00, −2°C — रात 11:00, −4°C — रात 2:00।
खंड 10.4 – पूर्णांकों के साथ खोज (पृष्ठ 263–266)
खोखला पूर्णांक ग्रिड: दूसरे ग्रिड का सीमा योग −3 है (5 + (−3) + (−5) = −3 आदि)। खाली खाने भरने के लिए पहले कोने की संख्याएँ तय करें, फिर हर पंक्ति/स्तंभ में ‘सीमा योग − ज्ञात संख्याओं का योग’ से बाकी संख्या निकालें। जिन ग्रिडों में कम संख्याएँ दी गई हों, उन्हें कई तरह से भरा जा सकता है।
अद्भुत ग्रिड: किसी भी क्रम में संख्याएँ चुनें, योग हमेशा एक ही आता है — पहले ग्रिड में −1, अगले दो ग्रिडों में −8 और −14। कारण: हर पंक्ति और स्तंभ नियमित अंतर से बढ़ता है, इसलिए जादू संख्याओं के विन्यास में है।
- (a) −6, −5, −4, −3, −2, −1; (b) −3, −2, −1, 0, 1, 2, 3; (c) −14, −13, −12, −11, −10, −9; (d) −29, −28, −27, −26, −25, −24।
- योग −8: जैसे (−5) + 7 + (−10) या (−2) + (−3) + (−3)।
- पासों से असंभव योग: −9, −7, −5, 0, 2, 7, 9, 11।
- 8 − 13 = −5; (−8) − 13 = −21; (−13) − (−8) = −5; (−13) + (−8) = −21; 8 + (−13) = −5; (−8) − (−13) = 5; 13 − 8 = 5; 13 − (−8) = 21।
- (a) 2026 से 150 वर्ष पहले 1876; (b) 2200 वर्ष पहले 175 ईसा पूर्व (वर्ष 0 नहीं था, इसलिए 2200 − 2026 + 1); (c) 680 ईसा पूर्व के 320 वर्ष बाद 360 ईसा पूर्व।
- (a) −16, −10, −4; (b) −1, 8, −2; (c) 27, 19, 12, 6, 1, −3, −6, −8, −9, −9 (अंतर −8, −7, −6 … 0)।
- (−2) + (−9) − (+18) − (+1) = −30।
- (a) धनात्मक − ऋणात्मक = हमेशा धनात्मक; (b) धनात्मक + ऋणात्मक = धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य; (c) ऋणात्मक + ऋणात्मक = हमेशा ऋणात्मक; (d) ऋणात्मक − ऋणात्मक = कुछ भी; (e) ऋणात्मक − धनात्मक = हमेशा ऋणात्मक; (f) ऋणात्मक + धनात्मक = कुछ भी।
- 100 टोकन वाली डोरी का मान (आधिकारिक हल): 20 — पैटर्न के एक खंड का मान निकालकर खंडों की संख्या से गुणा करें।
खंड 10.5 – इतिहास
पुस्तक के अनुसार ब्रह्मगुप्त ने 628 ई. में ब्राह्मस्फुटसिद्धांत में धनात्मक, ऋणात्मक संख्याओं और शून्य के जोड़-घटाव के नियम स्पष्ट रूप से दिए। उदाहरण: दो ऋणात्मकों का योग ऋणात्मक [(−2) + (−3) = −5]; धनात्मक और ऋणात्मक के योग में बड़ी संख्या का चिह्न [−5 + 3 = −2]; ऋणात्मक घटाना = धनात्मक जोड़ना [2 − (−3) = 5]; 0 − (−2) = 2।
इस गाइड का उपयोग कैसे करें
पहले अध्याय को पुस्तक में पढ़ें और “आइए, पता लगाएँ” के प्रश्न स्वयं हल करने की कोशिश करें। उसके बाद यहाँ दिए उत्तर से मिलान करें और जहाँ उत्तर अलग हो, वहाँ दिया गया तरीका ध्यान से पढ़ें। कोण, रचना और सममिति वाले अध्यायों में चाँदा, परकार और कागज़ मोड़कर स्वयं करके देखना सबसे अधिक उपयोगी है।
यह किताब क्यों महत्वपूर्ण है
गणित प्रकाश NCERT की नई पाठ्यपुस्तक है, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (NCF-SE 2023) के अनुसार तैयार की गई है। इसमें पुराने क्रमांकित अभ्यासों (जैसे Exercise 1.1) की जगह हर विषय के बाद “आइए, पता लगाएँ” दिए गए हैं और पैटर्न, खेल व पहेलियों से सोचने की क्षमता विकसित की जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. कक्षा 6 गणित प्रकाश में कितने अध्याय हैं?
उ. कुल 10 अध्याय हैं — “गणित में पैटर्न” से “शून्य के दूसरी ओर” तक।
प्र. क्या इस किताब में Exercise 1.1, 1.2 जैसे अभ्यास हैं?
उ. नहीं, हर विषय के बाद “आइए, पता लगाएँ” के प्रश्न हैं; यहाँ उन्हीं को खंडवार हल किया गया है।
प्र. क्या यह पुस्तक निःशुल्क डाउनलोड की जा सकती है?
उ. हाँ, NCERT की सभी पाठ्यपुस्तकें आधिकारिक रूप से निःशुल्क हैं; लिंक नीचे दिए गए पेज पर मिलेंगे।
पूरी पुस्तक डाउनलोड करें
कक्षा 6 (हिंदी माध्यम) की पूरी गणित पुस्तक आधिकारिक NCERT स्रोत से डाउनलोड करने के लिए हमारे कक्षा 6 (हिंदी माध्यम) गणित प्रकाश पेज पर जाएँ, जहाँ हर अध्याय का सीधा लिंक दिया गया है।
Class 6 Maths – Notes and Extra Questions
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