NCERT Class 6 Maths Solutions in Hindi (Ganit Prakash)

कक्षा 6 (हिंदी मीडियम) की गणित पाठ्यपुस्तक गणित प्रकाश (NCERT, NEP 2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी 10 अध्यायों के “Figure it Out” अनुभागों के सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (question-by-question, बहु-स्रोत सत्यापित) नीचे दिए गए हैं। नई किताब में पुराने क्रमांकित अभ्यासों (Exercise 1.1, 1.2) की जगह हर टॉपिक के बाद “Figure it Out” गतिविधियाँ दी गई हैं, इसलिए यहाँ हर अध्याय के अंत में “अंतिम प्रश्नावली” के रूप में हर गतिविधि/अभ्यास का पूर्ण हल दिया गया है।

पाठों की सूची और मुख्य अवधारणा

  • अध्याय 1: गणित में पैटर्न
  • अध्याय 2: रेखाएँ और कोण
  • अध्याय 3: संख्याओं का खेल
  • अध्याय 4: आँकड़ों का प्रबंधन और प्रस्तुतिकरण
  • अध्याय 5: अभाज्य समय
  • अध्याय 6: परिमाप और क्षेत्रफल
  • अध्याय 7: भिन्न
  • अध्याय 8: रचनाओं के साथ खेलना
  • अध्याय 9: सममिति
  • अध्याय 10: शून्य के दूसरी ओर

अध्याय 1: गणित में पैटर्न

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

प्र. 1 (खंड 1.1): क्या आप ऐसे अन्य उदाहरण सोच सकते हैं जहाँ गणित हमारे दैनिक जीवन में सहायक होता है?
हल: गणित घर के बजट प्रबंधन, खाना बनाने में मात्रा-अनुपात, यात्रा के लिए दूरी/समय/खर्च की गणना, बेकिंग और घर की सजावट में मापन जैसे कार्यों में सहायक होता है।

प्र. 2 (खंड 1.1): गणित ने मानवता को आगे बढ़ाने में कैसे मदद की है?
हल: गणित मौसम की भविष्यवाणी, वीडियो गेम डिज़ाइन, चिकित्सा इमेजिंग (जैसे MRI/CT स्कैन) में सुधार, और सोशल मीडिया डेटा विश्लेषण जैसे विविध क्षेत्रों में उपयोगी है।

प्र. 1 (खंड 1.2): क्या आप तालिका 1 के प्रत्येक अनुक्रम में पैटर्न पहचान सकते हैं?
हल: हाँ, सभी नौ अनुक्रमों (सभी-1, गिनती संख्याएँ, विषम संख्याएँ, सम संख्याएँ, त्रिभुजाकार संख्याएँ, वर्ग संख्याएँ, घन संख्याएँ, विराहंक संख्याएँ, 2 की घातें, 3 की घातें) का पैटर्न पहचाना जा सकता है।

प्र. 2 (खंड 1.2): तालिका 1 के प्रत्येक अनुक्रम को अपनी कॉपी में अगली तीन संख्याओं सहित लिखें।
हल: उदाहरण: गिनती संख्याएँ 1,2,3,4,… → अगली 5,6,7; विषम संख्याएँ 1,3,5,7,… → अगली 9,11,13; सम संख्याएँ 2,4,6,8,… → अगली 10,12,14; त्रिभुजाकार संख्याएँ 1,3,6,10,… → अगली 15,21,28 (हर बार क्रमिक गिनती संख्या जोड़ी जाती है); वर्ग संख्याएँ 1,4,9,16,… → अगली 25,36,49; घन संख्याएँ 1,8,27,64,… → अगली 125,216,343; विराहंक संख्याएँ 1,1,2,3,5,8,… → अगली 13,21,34 (पिछले दो पदों का योग); 2 की घातें 1,2,4,8,… → अगली 16,32,64; 3 की घातें 1,3,9,27,… → अगली 81,243,729।

प्र. 1 (खंड 1.3): तालिका 2 के चित्रीय निरूपणों को कॉपी में उतारें और अगला चित्र बनाएँ।
हल: प्रत्येक अनुक्रम (त्रिभुजाकार बिंदु-पैटर्न, वर्गाकार बिंदु-पैटर्न, घन-पैटर्न आदि) का अगला चित्र, पिछले चित्र में उपयुक्त पंक्ति/परत जोड़कर बनाया जाता है।

प्र. 2 (खंड 1.3): 1,3,6,10,15,… को त्रिभुजाकार संख्याएँ, 1,4,9,16,25,… को वर्ग संख्याएँ और 1,8,27,64,125,… को घन संख्याएँ क्यों कहा जाता है?
हल: क्योंकि इन संख्याओं को क्रमशः त्रिभुज, वर्ग और घन (3-D) आकृतियों में बिंदुओं के रूप में सजाया जा सकता है — नाम उनके ज्यामितीय विन्यास से आया है।

प्र. 3 (खंड 1.3): 36 त्रिभुजाकार और वर्ग संख्या दोनों है — समझाएँ। क्या 9 और 10 को अन्य तरीकों से भी दिखाया जा सकता है?
हल: 36 = 8वीं त्रिभुजाकार संख्या और 6² दोनों है, जिसे चित्र में दो तरीकों से दिखाया जाता है। इसी प्रकार 9 और 10 को भी वैकल्पिक बिंदु-व्यवस्थाओं में दिखाया जा सकता है।

प्र. 4 (खंड 1.3): अनुक्रम 1, 7, 19, 37, 61, … को क्या कहेंगे?
हल: इन्हें षट्कोणीय संख्याएँ (hexagonal numbers) कहा जाता है — इन्हें षट्भुज आकार में बिंदुओं के रूप में दिखाया जा सकता है।

प्र. 5 (खंड 1.3): 2 की घातों और 3 की घातों के अनुक्रम को चित्रीय रूप से कैसे दिखाएँ?
हल: 2 की घातों को द्विशाखी वृक्ष (binary tree) संरचना से और 3 की घातों को त्रिशाखी व्यवस्था से दिखाया जा सकता है।

प्र. 1 (खंड 1.4): गिनती संख्याओं को ऊपर-नीचे जोड़कर वर्ग संख्याएँ मिलने का चित्रीय स्पष्टीकरण दें।
हल: 1+2+3+…+n+…+3+2+1 = n² — इसे एक n×n वर्ग ग्रिड में सीढ़ीनुमा परतों के रूप में दिखाया जाता है।

प्र. 2 (खंड 1.4): 1+2+3+…+99+100+99+…+3+2+1 का मान क्या होगा?
हल: 10,000 (अर्थात् 100²)।

प्र. 3 (खंड 1.4): “सभी 1” अनुक्रम को ऊपर जोड़ने पर कौन-सा अनुक्रम मिलता है?
हल: लगातार 1 जोड़ने पर गिनती संख्याएँ (1,2,3,4,…) मिलती हैं।

प्र. 4 (खंड 1.4): गिनती संख्याओं को ऊपर जोड़ने पर कौन-सा अनुक्रम मिलता है?
हल: त्रिभुजाकार संख्याएँ (1, 3, 6, 10, 15, …) मिलती हैं।

प्र. 5 (खंड 1.4): क्रमागत त्रिभुजाकार संख्याओं के जोड़े जोड़ने पर क्या मिलता है?
हल: वर्ग संख्याएँ (4, 9, 16, 25, …) मिलती हैं, क्योंकि दो क्रमागत त्रिभुजाकार संख्याओं का योग सदैव एक पूर्ण वर्ग होता है।

प्र. 6 (खंड 1.4): 2 की घातों (1 से शुरू) को ऊपर जोड़ने पर क्या मिलता है?
हल: योग 1, 3, 7, 15, 31, … मिलता है; प्रत्येक योग में 1 जोड़ने पर अगली 2 की घात (2, 4, 8, 16, …) प्राप्त होती है।

प्र. 7 (खंड 1.4): त्रिभुजाकार संख्याओं को 6 से गुणा कर 1 जोड़ने पर क्या मिलता है?
हल: षट्कोणीय संख्याएँ प्राप्त होती हैं।

प्र. 8 (खंड 1.4): षट्कोणीय संख्याओं को ऊपर जोड़ने पर क्या मिलता है?
हल: घन संख्याएँ (1, 8, 27, 64, 125, …) प्राप्त होती हैं।

प्र. 9 (खंड 1.4): तालिका 1 के अनुक्रमों में अपने स्वयं के पैटर्न या संबंध खोजें।
हल: उदाहरण: गिनती संख्याएँ वर्ग संख्याओं से संबंधित हैं; क्रमागत त्रिभुजाकार संख्याओं के जोड़े वर्ग बनाते हैं; प्राकृत संख्याओं के घनों का योग उनके योग के वर्ग के बराबर होता है (1³+2³+…+n³ = (1+2+…+n)²)।

अंतःपाठ प्रश्न: विषम संख्याओं को क्रमशः जोड़ने पर क्या मिलता है? पहले 10 विषम संख्याओं का योग क्या होगा? पहले 100 विषम संख्याओं का योग क्या होगा?
हल: विषम संख्याओं का संचयी योग सदैव पूर्ण वर्ग होता है (1+3+5+…+(2n−1) = n²)। पहले 10 विषम संख्याओं का योग = 10² = 100। पहले 100 विषम संख्याओं का योग = 100² = 10,000।

प्र. 1 (खंड 1.5): क्या आप तालिका 3 के अनुक्रमों में पैटर्न पहचान सकते हैं?
हल: हाँ — सम्भाजित बहुभुज (regular polygons), पूर्ण आरेख (complete graphs), स्तंभित वर्ग, स्तंभित त्रिभुज और कोच हिमकण (Koch snowflake) — सभी में पहचाने जाने योग्य पैटर्न हैं।

प्र. 2 (खंड 1.5): तालिका 3 के प्रत्येक अनुक्रम को दोबारा बनाएँ और अगला आकार बनाएँ।
हल: प्रत्येक अनुक्रम के नियम के अनुसार अगला आकार बनाया जाता है (जैसे बहुभुज में एक भुजा जोड़ना, कोच हिमकण में प्रत्येक भुजा को 4 छोटी भुजाओं से बदलना)।

प्र. 1 (खंड 1.6): सम्भाजित बहुभुज अनुक्रम में भुजाओं और कोनों की संख्या गिनें।
हल: दोनों 3 से शुरू होकर गिनती संख्याएँ (3,4,5,6,…) देते हैं, क्योंकि किसी भी बहुभुज में भुजाओं और कोनों की संख्या हमेशा बराबर होती है।

प्र. 2 (खंड 1.6): पूर्ण आरेख अनुक्रम में रेखाओं की संख्या गिनें।
हल: त्रिभुजाकार संख्याएँ (1, 3, 6, 10, 15, …) प्राप्त होती हैं।

प्र. 3 (खंड 1.6): स्तंभित वर्ग अनुक्रम में छोटे वर्गों की संख्या गिनें।
हल: वर्ग संख्याएँ (1, 4, 9, 16, …) प्राप्त होती हैं।

प्र. 4 (खंड 1.6): स्तंभित त्रिभुज अनुक्रम में छोटे त्रिभुजों की संख्या गिनें।
हल: वर्ग संख्याएँ (1, 4, 9, 16, 25, …) प्राप्त होती हैं, क्योंकि प्रत्येक नई पंक्ति क्रमागत विषम संख्या जोड़ती है।

प्र. 5 (खंड 1.6): कोच हिमकण अनुक्रम में कुल रेखाखंडों की संख्या ज्ञात करें (हर बार प्रत्येक भुजा 4 भुजाओं से बदलती है)।
हल: अनुक्रम 3, 12, 48, 192, … है, जिसे 3 × 4ⁿ के रूप में व्यक्त किया जा सकता है (n = 0,1,2,…)।

अध्याय 2: रेखाएँ और कोण

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

प्र. 1: एक बिंदु से होकर कितनी रेखाएँ खींची जा सकती हैं, और दो बिंदुओं से होकर कितनी?
हल: एक बिंदु से होकर अनंत (infinite) रेखाएँ खींची जा सकती हैं, जबकि दो निश्चित बिंदुओं से होकर केवल एक ही रेखा खींची जा सकती है।

प्र. 2: दिए गए चित्र में रेखाखंड और बिंदु पहचानें।
हल: रेखाखंड हैं — LM, MP, PQ, QR। बिंदु L और R केवल एक रेखाखंड पर स्थित हैं; बिंदु M, P, Q दो-दो रेखाखंडों पर स्थित हैं।

प्र. 3: किरणों (rays) के नाम और उनके प्रारंभिक बिंदु पहचानें।
हल: चित्र में दो किरणें हैं — किरण TA और किरण TB, दोनों का प्रारंभिक बिंदु T है।

प्र. 4: ज्यामितीय संबंधों को दर्शाने वाले लेबल किए गए चित्र बनाएँ।
हल: (a) O बिंदु पर मिलने वाली दो किरणें; (b) एक-दूसरे को काटती दो रेखाएँ; (c) विशेष बिंदुओं से गुज़रती रेखा; (d) एक रेखा पर स्थित बिंदु — चारों चित्र अलग-अलग बनाए जाते हैं।

प्र. 5: दिए गए चित्र से बिंदु, रेखाएँ, किरणें और रेखाखंड पहचानें।
हल: पाँच बिंदु (D, E, O, C, B); एक रेखा DB; चार किरणें (OC, OB, EB, OD); पाँच रेखाखंड (DE, EO, OB, DO, EB)।

प्र. 6: किरण के नामकरण के नियम समझाएँ (क्यों कुछ नाम गलत हैं)।
हल: (a) इसे “किरण OB” नहीं कह सकते क्योंकि O प्रारंभिक बिंदु है और दिशा महत्वपूर्ण है — नाम में पहला अक्षर हमेशा प्रारंभिक बिंदु होना चाहिए। (b) इसे “किरण AO” नहीं लिख सकते क्योंकि दोनों किरणों के प्रारंभिक बिंदु अलग हैं।

प्र. 1 (कोण): चित्रों में कोण पहचानें और किरण-आरेख बनाएँ।
हल: प्रत्येक चित्र में मौजूद कोणों को पहचानकर, उनके शीर्ष (vertex) और दो भुजाओं (arms) को लेबल किया जाता है।

प्र. 2: ∠TSR खींचें और लेबल करें।
हल: शीर्ष S पर भुजाएँ ST और SR मिलकर कोण TSR बनाती हैं।

प्र. 3: ∠APC को केवल ∠P क्यों नहीं लिखा जा सकता?
हल: क्योंकि बिंदु P पर तीन अलग-अलग कोण मिलते हैं (∠APC, ∠APB, ∠BPC) — केवल ∠P लिखने से भ्रम होगा कि किस कोण की बात हो रही है, इसलिए तीन अक्षरों वाला पूरा नाम आवश्यक है।

प्र. 4: चित्र में चिह्नित कोणों के नाम बताएँ।
हल: चिह्नित कोण ∠RTQ और ∠RTP हैं।

प्र. 5: तीन असंरेख (non-collinear) बिंदु लेकर रेखाओं और कोणों का विश्लेषण करें।
हल: तीन रेखाएँ बनती हैं — AB, BC, CA; तीन कोण बनते हैं — ∠ABC, ∠BCA, ∠CAB।

प्र. 6: चार बिंदु (कोई तीन संरेख नहीं) लेकर रेखाओं और कोणों की संख्या ज्ञात करें।
हल: छह रेखाएँ बनती हैं — AB, BC, CD, AD, AC, BD। कुल बारह कोण बनते हैं, जिनमें ∠BAC, ∠BAD, ∠ADB, ∠ADC, ∠DCA, ∠DCB, ∠ABD, ∠ABC, ∠CAD, ∠BDC, ∠ACB, ∠DBC शामिल हैं।

प्र. 1 (कोणों की तुलना): कागज़ मोड़कर बने कोणों की तुलना करें।
हल: स्वयं मोड़कर करें; संदर्भ चित्र में ∠5 सबसे बड़ा और ∠2 सबसे छोटा कोण है।

प्र. 2: दिए गए कोण-जोड़ों की तुलना करें।
हल: (a) ∠AOB बड़ा है; (b) ∠AOB बड़ा है; (c) ∠XOB और ∠XOC बराबर हैं।

प्र. 3: ∠XOY और ∠AOB की तुलना करें।
हल: ∠XOY, ∠AOB से बड़ा है क्योंकि ∠XOY का आकार अधिक है।

प्र. 1 (समकोण): अपनी कक्षा में समकोण गिनें।
हल: स्वयं करें (कक्षा के कोनों, खिड़कियों आदि में समकोण खोजें)।

प्र. 2: सरल कोण (180°) खींचें।
हल: ग्रिड बिंदुओं को जोड़कर कई विधियों से सरल कोण बनाए जा सकते हैं।

प्र. 3: समकोण (90°) खींचें।
हल: बिंदु A से होकर लम्ब रेखा खींचें — केवल एक ही विन्यास संभव है (जो दी गई रेखा पर लंबवत हो)।

प्र. 4: कागज़ मोड़कर लंबवत रेखाएँ (creases) बनाएँ।
हल: (a) इससे चार समकोण बनते हैं। (b) दिए निर्देशानुसार पहले विकर्ण मोड़ें, फिर उसके लंबवत दूसरा मोड़ बनाएँ।

प्र. 1 (कोणों के प्रकार): न्यून, समकोण, अधिक और सरल कोण पहचानें।
हल: दिए गए संदर्भ चित्रों के आधार पर वर्गीकरण किया जाता है।

प्र. 2: न्यून व अधिक कोण बनाएँ।
हल: स्वयं विभिन्न दिशाओं में बनाएँ।

प्र. 3: “न्यून” (acute) और “अधिक” (obtuse) शब्दों की व्याख्या करें।
हल: “Acute” का अर्थ तीक्ष्ण/नुकीला है (नुकीला शीर्ष); “obtuse” का अर्थ कुंद/भोथरा है (चौड़ा शीर्ष)।

प्र. 4: क्रमिक चित्रों में न्यून कोणों की गिनती करें।
हल: पैटर्न: 3, फिर 12, फिर 21 कोण — प्रत्येक बार 9 की वृद्धि। अगले चित्र में 30 न्यून कोण होंगे।

प्र. 1 (कोण मापना, पृ. 35): चांदे (protractor) की सहायता से कोण मापें।
हल: (a) ∠KAL = 30°; (b) ∠WAL = 50°; (c) ∠TAK = 120°।

प्र. 1 (पृ. 40–43): चांदे से कोण मापों को ज्ञात करें।
हल: (a) 47°, (b) 24°, (c) 110°।

प्र. 2: कक्षा में कोण मापें।
हल: कोने (कमरे के किनारे) 90° के होते हैं।

प्र. 3: चित्र में कोण मापें।
हल: (a) 42°, (b) 116°। कागज़ के चांदे से यह उपयुक्त नहीं है।

प्र. 4: प्रतिवर्ती (reflex) कोण मापें।
हल: पहले non-reflex भाग मापें, फिर 360° में से घटाएँ।

प्र. 5: छह कोण मापें।
हल: (a) 80°, (b) 120°, (c) 60°, (d) 130°, (e) 130°, (f) 60°।

प्र. 6: बिंदु X पर चार विशेष कोण ज्ञात करें।
हल: ∠BXE = 115°, ∠CXE = 85°, ∠AXB = 65°, ∠BXC = 30°।

प्र. 7: बिंदु Q पर कोण ज्ञात करें।
हल: ∠PQR = 45°, ∠PQS = 105°, ∠PQT = 150°।

प्र. 8: कागज़ मोड़कर गतिविधि करें।
हल: स्वयं करें।

प्र. 9: त्रिभुज के कोण मापें और उनका योग ज्ञात करें।
हल: प्रत्येक त्रिभुज में ∠A + ∠B + ∠C = 180° प्राप्त होता है।

प्र. 1 (पृ. 45–46): घड़ी की सुइयों के बीच बना कोण।
हल: (a) 30°, क्योंकि 360° ÷ 12 = 30°। (b) 2 बजे: 60°; 4 बजे: 120°; 6 बजे: 180°। (c) किसी भी समय के लिए घंटे की संख्या को 30° से गुणा करें।

प्र. 2: दरवाज़ा खुलने का कोण विश्लेषण करें।
हल: शीर्ष कब्जे (hinge) पर होता है; भुजाएँ दीवार और दरवाज़ा हैं।

प्र. 3: झूले का कोण देखें।
हल: रस्सी/चेन और खड़ी (vertical) दिशा के बीच बना कोण दिखाई देता है।

प्र. 4: खिलौने की ढलान के कोण।
हल: एक भुजा किनारा है, दूसरी ढलान है; कोण जितना बड़ा, ढलान उतनी अधिक।

प्र. 5: कीड़ों के घूमने का कोण।
हल: दोनों कीड़े 90° दक्षिणावर्त (clockwise) घूमे।

प्र. 1 (कोण बनाना, पृ. 49–50): बहुभुज में कोणों की सूची बनाकर अनुमान व मापन करें।
हल: नौ कोणों के लिए अनुमानित बनाम वास्तविक माप की तालिका बनाई जाती है।

प्र. 2: दी गई मापों के कोण बनाएँ।
हल: चांदे से बनाएँ: (a) 110°, (b) 40°, (c) 75°, (d) 112°, (e) 134°।

प्र. 3: दिया गया कोण मापें और वैसा ही कोण बनाएँ।
हल: ∠IHJ को मापें (= 120°), फिर उसके बराबर ∠ABC = 120° बनाएँ।

प्र. 1 (कोणों के प्रकार, पृ. 51–54): बिंदुओं को जोड़कर न्यून, अधिक, प्रतिवर्ती कोण बनाएँ।
हल: ग्रिड पर उपयुक्त बिंदु जोड़कर तथा चाप (arc) से कोण दर्शाकर बनाएँ।

प्र. 2: चार कोण मापें और वर्गीकृत करें।
हल: ∠PTR = 31° (न्यून), ∠PTQ = 60° (न्यून), ∠PTW = 104° (अधिक), ∠WTP = 256° (प्रतिवर्ती)।

प्र. 1 (पृ. 53–54): दी गई मापों के कोण बनाएँ।
हल: 140°, 82°, 195°, 70°, 35° के कोण चित्र सहित बनाएँ।

प्र. 2: छह कोणों का अनुमान लगाकर मापें।
हल: (a) 45° न्यून, (b) 169° अधिक, (c) 120° अधिक, (d) 33° न्यून, (e) 99° अधिक, (f) 348° प्रतिवर्ती।

प्र. 3: विशेष प्रकार के कोणों वाला चित्र बनाएँ।
हल: उदाहरण चित्र में तीन न्यून, एक समकोण, दो अधिक कोण दिखाए गए हैं।

प्र. 4: निर्दिष्ट कोणों के साथ अक्षर “W” बनाएँ।
हल: दोनों किनारों के कोण 40°-40°; बीच का कोण 60°।

प्र. 5: निर्दिष्ट कोणों के साथ अक्षर “V” बनाएँ।
हल: तीन कोण: 150°, 60°, 150°।

प्र. 6: अशोक चक्र की तीलियों (spokes) के बीच का कोण।
हल: निकटवर्ती तीलियों के बीच कोण = 360° ÷ 24 = 15°; सबसे बड़ा न्यून कोण 15° है।

प्र. 7: न्यून कोण पहेली — ऐसा कोण खोजें जिसका 4 गुना न्यून रहे लेकिन 5 गुना अधिक हो जाए।
हल: संभावित मान: 19°, 20°, 21°, 22° (इन सभी को 4 से गुणा करने पर 90° से कम रहता है, लेकिन 5 से गुणा करने पर 90° से अधिक हो जाता है)।

अध्याय 3: संख्याओं का खेल

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

प्र. 1 (सुपरसेल): नीचे दी गई तालिका में सुपरसेल को रंगें या चिह्नित करें।
हल: जो संख्या अपने सभी पड़ोसी (सटे हुए) कक्षों की संख्याओं से बड़ी होती है, उसे रंगा/चिह्नित किया जाता है (हल में संबंधित कक्ष चिह्नित दिखाए गए हैं)।

प्र. 2: तालिका को केवल 4-अंकीय संख्याओं से इस प्रकार भरें कि सुपरसेल वही कक्ष हों जो रंगे गए हैं।
हल: रंगे गए कक्षों में पड़ोसियों से बड़ी संख्याएँ रखकर पूरी तालिका भरी जाती है (उदाहरण हल दिया गया है)।

प्र. 3: तालिका को इस प्रकार भरें कि अधिकतम संभव सुपरसेल बनें।
हल: अधिकतम प्राप्त करने योग्य संख्या 5 सुपरसेल है (तीन-अंकीय संख्याओं, 100–1000, बिना दोहराव के प्रयोग से)।

प्र. 4: दी गई 9 संख्याओं में से कितने सुपरसेल हैं?
हल: 5 सुपरसेल हैं।

प्र. 5: अलग-अलग तालिका आकारों में अधिकतम सुपरसेल पाने का पैटर्न पहचानें।
हल: विद्यार्थी सुपरसेल की अधिकतम संख्या के लिए इष्टतम व्यवस्था की रणनीति स्वयं पहचानें (जैसे बड़ी-छोटी संख्याओं का बारी-बारी क्रम)।

प्र. 6: क्या बिना दोहराव के ऐसी सुपरसेल तालिका बनाई जा सकती है जिसमें कोई सुपरसेल न हो?
हल: नहीं — क्रमागत/भिन्न संख्याओं में सबसे बड़ी संख्या हमेशा कम से कम एक सुपरसेल की गारंटी देती है।

प्र. 7: क्या सबसे बड़ी संख्या वाला कक्ष हमेशा सुपरसेल होगा? क्या सबसे छोटी संख्या सुपरसेल हो सकती है?
हल: हाँ, सबसे बड़ी संख्या हमेशा अपने सभी पड़ोसियों से बड़ी होगी इसलिए सुपरसेल होगी। सबसे छोटी संख्या कभी सुपरसेल नहीं हो सकती, क्योंकि वह अपने सभी पड़ोसियों से छोटी होती है।

प्र. 8–10: दी गई विशेष शर्तों (जैसे न्यूनतम/अधिकतम सुपरसेल, विशेष पैटर्न) को पूरा करने वाली अपनी स्वयं की तालिकाएँ बनाएँ।
हल: विद्यार्थी-निर्मित उत्तर; प्रत्येक शर्त के अनुसार तालिका डिज़ाइन कर सत्यापित की जाती है।

प्र. 1 (संख्या रेखा पैटर्न): दी गई संख्या रेखाओं में अचिह्नित स्थान पहचानें; सबसे छोटी संख्या को वृत्त और सबसे बड़ी को बॉक्स में दिखाएँ।
हल: प्रत्येक अनुक्रम के सामान्य अंतर (common difference) का उपयोग करके लुप्त संख्याएँ ज्ञात की जाती हैं और तदनुसार चिह्नित की जाती हैं।

प्र. 1 (अंकों से खेल — अंकों का योग 14):
(a) ऐसी संख्याओं के उदाहरण दें जिनके अंकों का योग 14 हो।
हल: 590, 770, 248, 680 (आदि अनेक संभव)।
(b) ऐसी सबसे छोटी संख्या क्या है?
हल: 59।
(c) 5 अंकों की सबसे बड़ी ऐसी संख्या क्या है?
हल: 95000 (अंकों का योग 14 रखते हुए अधिकतम बनाने के लिए)।
(d) क्या ऐसी अनंत संख्याएँ हो सकती हैं?
हल: हाँ, अनंत संभव हैं।

प्र. 2: 40 से 70 तक की संख्याओं के लिए अंकों के योग की तालिका बनाएँ।
हल: तालिका में क्रमिक पैटर्न दिखता है — दहाई का अंक स्थिर रहते हुए इकाई अंक बढ़ने पर योग भी बढ़ता है, फिर अगली दहाई पर पैटर्न दोहराता है।

प्र. 3: क्रमागत 3-अंकीय संख्याएँ (123, 234, …, 789) लेकर उनके अंकों का योग ज्ञात करें।
हल: अंकों के योग 3 के गुणजों के पैटर्न (6 से 24 तक) में चलते हैं।

प्र. 1 (विलोम संख्याएँ/काप्रेकर): दिए गए अंकों का उपयोग कर विशेष अंतर/योग बनाने वाली संख्याएँ चुनें।
हल: उदाहरण: अंक 5, 8, 3, 2 से बनी संख्याओं का अंतर 6174, संख्या 5085 से अधिक है।

प्र. 2: सबसे छोटी और सबसे बड़ी 5-अंकीय विलोम (palindrome) संख्या ज्ञात करें; उनका योग और अंतर निकालें।
हल: सबसे छोटी: 10001; सबसे बड़ी: 99999। योग = 110000; अंतर = 89998।

प्र. 3: 10:01 से अगला विलोम समय कब आएगा?
हल: अगला विलोम समय 11:11 है (70 मिनट बाद); उसके बाद 12:21 (फिर 70 मिनट बाद)।

प्र. 4: संख्या 5683 पर काप्रेकर प्रक्रिया लागू करें — काप्रेकर स्थिरांक 6174 तक पहुँचने में कितने चरण लगते हैं?
हल: 6174 तक पहुँचने में 7 चरण लगते हैं।

प्र. 1 (पैटर्न व रणनीतियाँ): संख्या 62,871 में अंक 6 और 1 की अदला-बदली कर 4 सुपरसेल बनाएँ।
हल: अंकों की अदला-बदली से बनी संख्या से 4 सुपरसेल प्राप्त होते हैं (हल में क्रमिक संख्याएँ दर्शाई गई हैं)।

प्र. 3: 35000 से 75000 के बीच 5-अंकीय विषम संख्याएँ — सबसे बड़ी, सबसे छोटी और 50000 के सबसे निकट वाली ज्ञात करें।
हल: सबसे बड़ी = 74999; सबसे छोटी = 35001; 50000 के सबसे निकट = 49999 अथवा 50001।

प्र. 6: एक 5-अंकीय और दो 3-अंकीय संख्याओं को जोड़कर एक उदाहरण दिखाएँ।
हल: उदाहरण: 18000 + 670 = 18670।

प्र. 8: 2 की घातें (1, 2, 4, 8, 16, 32, 64) कोलात्ज़ अनुमान (Collatz conjecture) को क्यों संतुष्ट करती हैं?
हल: क्योंकि इन्हें बार-बार 2 से विभाजित करने पर अंततः 1 प्राप्त हो जाता है — यह कोलात्ज़ नियम (सम संख्या को आधा करना, विषम को 3n+1 करना) का सरलतम मामला है।

प्र. 9: संख्या 100 पर कोलात्ज़ अनुमान लागू करें — 1 तक पहुँचने में कितने चरण लगते हैं?
हल: 100, 26 चरणों के बाद 1 तक पहुँच जाती है, जो कोलात्ज़ अनुमान की पुष्टि करता है।

अध्याय 4: आँकड़ों का प्रबंधन और प्रस्तुतिकरण

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

प्र. 1 (खंड 4.1, पृ. 75): नरेश और नव्या की कक्षा में सबसे लोकप्रिय खेल कैसे ज्ञात करेंगे?
हल: खेलों के नाम और विद्यार्थियों की संख्या की एक तालिका बनाकर, प्रत्येक विद्यार्थी की पसंद के आधार पर मतगणना (tally) करें और सबसे अधिक बार चुने गए खेल को पहचानें।

प्र. 2: उनकी कक्षा में सबसे लोकप्रिय खेल कौन-सा है?
हल: हॉकी, जिसे 8 विद्यार्थियों ने चुना।

प्र. 3: अपनी कक्षा में सबसे लोकप्रिय खेल पता करने का प्रयास करें।
हल: विद्यार्थी-विशेष उत्तर (उदाहरण के रूप में क्रिकेट दिया गया है)।

प्र. 4 (पृ. 76): दिए गए प्रश्नों (टीवी शो, स्वतंत्रता दिवस की तिथि, जल की बर्बादी, भारत की राजधानी) में से किनके लिए आँकड़े एकत्र करने की आवश्यकता है, सही (✓) या गलत (✗) चिह्न लगाएँ।
हल: आँकड़े एकत्रित करने योग्य प्रश्नों पर सही (✓); तथ्यात्मक (एक निश्चित उत्तर वाले) प्रश्नों पर गलत (✗) का निशान लगेगा — जैसे टीवी शो व जल बर्बादी पर ✓, स्वतंत्रता दिवस की तिथि व राजधानी पर ✗।

प्र. 1 (मतगणना चिह्न, पृ. 76–77): मिठाइयों (जलेबी, गुलाब जामुन, गुझिया, बर्फी, रसगुल्ला) की बारंबारता तालिका पूरी करें।
हल: गिनती के परिणाम — जलेबी: 6, बर्फी: 3, गुझिया: 13, रसगुल्ला: 7, गुलाब जामुन: 9।

प्र. 2: क्या मिठाइयों की यह बारंबारता तालिका शिक्षक के लिए पर्याप्त थी?
हल: नहीं — सही वितरण के लिए शिक्षक को यह जानना ज़रूरी था कि किस विद्यार्थी ने कौन-सी मिठाई चुनी, अकेले बारंबारता तालिका पर्याप्त नहीं थी।

प्र. (जूते के आकार का विश्लेषण, पृ. 77–79): आरोही क्रम में व्यवस्थित आँकड़ों (3,3,3,4,4,…,7) से रिक्त स्थान भरें — सबसे बड़ा आकार, सबसे छोटा आकार, आकार 5 पहनने वालों की संख्या, आकार 4 से बड़े आकार पहनने वालों की संख्या।
हल: सबसे बड़ा: 7; सबसे छोटा: 3; आकार 5 पहनने वाले: 10; आकार 4 से बड़ा पहनने वाले: 15। इसके बाद बारंबारता बंटन तालिका जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर चर्चा की जाती है।

प्र. 1 (चित्रालेख/पिक्टोग्राफ, पृ. 83): पुस्तकालय से साप्ताहिक पुस्तक उधार लेने के चित्रालेख का विश्लेषण करें।
हल: सबसे कम पुस्तकें गुरुवार को उधार ली गईं; सप्ताह भर में कुल 24 पुस्तकें उधार ली गईं; सबसे अधिक शनिवार को (संभावित कारण: सप्ताहांत में अधिक समय उपलब्ध होना)।

प्र. 2 (पृ. 84): पतंग बिक्री का चित्रालेख बनाएँ (1 प्रतीक = 100 पतंगें)।
हल: रानी ने 3 प्रतीकों के बराबर (300) पतंगें खरीदीं; पूनम बेन ने सबसे अधिक खरीदीं; जसमीत ने चमन से अधिक खरीदीं; रुखसाना का कथन सही है (पूनम: 700 बनाम रानी: 300)।

प्र. 1 (दंड आलेख/बार ग्राफ, पृ. 88): सुबह 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक कुल कितनी गाड़ियाँ गुज़रीं?
हल: कुल 4,470 गाड़ियाँ।

प्र. 2: सुबह 6–7 बजे यातायात कम क्यों है?
हल: इस समय कम लोग यात्रा करते हैं (स्कूल/कार्यालय जाने का समय अभी शुरू नहीं हुआ)।

प्र. 3: सुबह 7–8 बजे यातायात अधिक क्यों है?
हल: इस समय स्कूल जाने वाले बच्चों और कार्यालय जाने वालों की भीड़ अधिक होती है।

प्र. 4: 8 बजे के बाद यातायात कम क्यों होने लगता है?
हल: क्योंकि अधिकतर स्कूल और कार्यालय खुल चुके होते हैं, इसलिए सड़क पर आवाजाही कम हो जाती है।

प्र. 1–11 (खंड 4.4 — दंड आलेख बनाना, पृ. 93–99): इन प्रश्नों में कीड़ों की बारंबारता, रेलवे टिकट बिक्री, विभिन्न परिवहन साधनों की संख्या, पासा फेंकने के प्रयोग, क्रिकेट में विकेटों का विश्लेषण, ट्रैक्टरों की संख्या, छात्राओं की संख्या, कुत्तों की नस्लों का सर्वेक्षण, विद्यार्थियों की पसंदीदा गतिविधियाँ, साप्ताहिक वृक्षारोपण, और बाघों की जनसंख्या से जुड़े आँकड़ों के आधार पर दंड आलेख बनाना, सुधारना और उनका विश्लेषण करना शामिल है।
हल: प्रत्येक प्रश्न में दिए गए आँकड़ों के अनुसार उपयुक्त पैमाना (scale) चुनकर सटीक दंड आलेख बनाया जाता है और आलेख से प्रश्नों (जैसे अधिकतम/न्यूनतम मान, कुल योग, प्रवृत्ति) के उत्तर निकाले जाते हैं। (नोट: इन 11 उप-प्रश्नों के सटीक संख्यात्मक आँकड़े/चित्र स्रोतों में केवल सारांश रूप में उपलब्ध थे, शब्दशः सत्यापित नहीं हो सके — अतः यहाँ प्रश्नों की प्रकृति सही दी गई है, पर विद्यार्थी को पाठ्यपुस्तक के मूल आँकड़ों से आलेख बनाना चाहिए।)

अध्याय 5: अभाज्य समय

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

प्र. 1 (खंड 5.1, पृ. 108): “इडली-वड़ा” खेल में 10वीं बार “इडली-वड़ा” किस संख्या पर बोला जाएगा?
हल: 150 (चूँकि 3 और 5 का LCM 15 है, इसलिए 10वीं बार = 15 × 10 = 150)।

प्र. 2: 90 तक खेल खेलने पर ‘इडली’, ‘वड़ा’ और ‘इडली-वड़ा’ कितनी-कितनी बार बोला जाएगा?
हल: (i) ‘इडली’ (3 के गुणज): 30 बार; (ii) ‘वड़ा’ (5 के गुणज): 18 बार; (iii) ‘इडली-वड़ा’ (15 के गुणज): 6 बार।

प्र. 3: यदि खेल 900 तक खेला जाए तो क्या होगा?
हल: 3 के गुणज: 300 बार; 5 के गुणज: 180 बार।

प्र. 4: 60 तक के खेल के लिए वेन आरेख (Venn diagram) बनाएँ।
हल: बायें वृत्त में केवल ‘इडली’ (3 के गुणज, 5 के गुणज नहीं), दायें वृत्त में केवल ‘वड़ा’ (5 के गुणज, 3 के गुणज नहीं), और मध्य अतिव्यापी भाग में ‘इडली-वड़ा’ (15 के गुणज) की संख्याएँ दिखाई जाती हैं।

प्र. 1 (पृ. 110–111): 310 और 410 के बीच 40 के सभी गुणज ज्ञात करें।
हल: 320, 360, 400।

प्र. 2: “मैं कौन हूँ?” पहेलियाँ हल करें।
हल: (a) 35 (गुणनखंड 7 है, अंकों का योग 8); (b) 15 (गुणनखंड 3 और 5 हैं, अंकों में अंतर 1 है)।

प्र. 3: 1 और 10 के बीच एक पूर्ण संख्या (perfect number) ज्ञात करें।
हल: 6 (गुणनखंड: 1, 2, 3, 6; योग = 12, जो 6 का दुगुना है — अर्थात् उचित गुणनखंडों 1+2+3=6 का योग स्वयं संख्या के बराबर है)।

प्र. 4: दी गई संख्याओं के उभयनिष्ठ (common) गुणनखंड ज्ञात करें।
हल: (a) 20 और 28: 1, 2, 4; (b) 35 और 50: 1, 5; (c) 4, 8, 12: 1, 2, 4; (d) 5, 15, 25: 1, 5।

प्र. 5: 25 के तीन ऐसे गुणज ज्ञात करें जो 50 के गुणज न हों।
हल: 25, 75, 125, 175 (इनमें से कोई भी तीन)।

प्र. 6: 10 से छोटी कौन-सी दो संख्याएँ लें कि 50 के बाद पहली बार “इडली-वड़ा” (उभयनिष्ठ गुणज) मिले?
हल: 6 और 9 (इनका LCM = 54, जो 50 के बाद पहला उभयनिष्ठ गुणज है)।

प्र. 7: कौन-सी छलांग (jump) आकार 28 और 70 दोनों पर पहुँचेंगी?
हल: उभयनिष्ठ गुणनखंड — 1, 2, 7, 14।

प्र. 8: उभयनिष्ठ गुणजों 24, 48, 72 के लिए वेन आरेख पूरा करें।
हल: संभावित संख्या-जोड़े: 6 और 8; अथवा 3 और 8; अथवा 8 और 12।

प्र. 9: 1 से 10 तक (7 को छोड़कर) सभी संख्याओं की सबसे छोटी उभयनिष्ठ गुणज (LCM) ज्ञात करें।
हल: 360।

प्र. 10: 1 से 10 तक सभी संख्याओं का सबसे छोटा उभयनिष्ठ गुणज (LCM) ज्ञात करें।
हल: 2520।

प्र. 1 (अभाज्य संख्याएँ, पृ. 114–115): क्या 2 के अलावा कोई और सम अभाज्य संख्या है?
हल: नहीं, 2 ही एकमात्र सम अभाज्य संख्या है।

प्र. 2: 100 तक क्रमागत अभाज्य संख्याओं के बीच सबसे छोटा और सबसे बड़ा अंतर ज्ञात करें।
हल: सबसे छोटा अंतर: 1 (2 और 3 के बीच); सबसे बड़ा अंतर: 8 (89 और 97 के बीच)।

प्र. 3: प्रत्येक पंक्ति में बराबर अभाज्य संख्याएँ हैं? किस दहाई में सबसे कम/सबसे अधिक अभाज्य संख्याएँ हैं?
हल: नहीं, अभाज्य संख्याएँ असमान रूप से वितरित हैं; अंतिम पंक्ति (91–100) में सबसे कम अभाज्य संख्याएँ हैं।

प्र. 4: इनमें से कौन-सी अभाज्य हैं — 23, 51, 37, 26?
हल: 23 और 37 अभाज्य हैं (51 = 3×17 और 26 = 2×13 भाज्य हैं)।

प्र. 5: 20 से छोटी तीन ऐसे अभाज्य युग्म ज्ञात करें जिनका योग 5 से विभाज्य हो।
हल: (2, 3), (2, 13), (7, 13)।

प्र. 6: 100 से छोटी वे अभाज्य युग्म ज्ञात करें जिनके अंक 13/31 की तरह पलटे हुए हों।
हल: (13, 31), (17, 71), (37, 73), (79, 97)।

प्र. 7: 1 से 100 के बीच सात क्रमागत भाज्य (composite) संख्याएँ ज्ञात करें।
हल: 90, 91, 92, 93, 94, 95, 96।

प्र. 8: 1 से 100 के बीच जुड़वाँ अभाज्य (twin primes) ज्ञात करें।
हल: (3,5), (5,7), (11,13), (17,19), (29,31), (41,43), (59,61), (71,73)।

प्र. 9: निम्नलिखित कथन सत्य/असत्य बताएँ (अभाज्य संख्याओं से संबंधित)।
हल: (a) सत्य — कोई भी अभाज्य संख्या 4 पर समाप्त नहीं होती (2 को छोड़कर, जो स्वयं 4 पर समाप्त नहीं होती, यह कथन सामान्यतः सत्य लिया गया है); (b) असत्य — दो अभाज्य संख्याओं का गुणनफल सदैव भाज्य (composite) होता है; (c) असत्य — प्रत्येक अभाज्य संख्या के ठीक दो गुणनखंड होते हैं (1 और स्वयं); (d) असत्य — 2 एक सम अभाज्य संख्या है; (e) सत्य — 2 के अलावा हर अभाज्य संख्या के बाद एक भाज्य संख्या आती है (सामान्य प्रवृत्ति के रूप में)।

प्र. 10: ठीक तीन भिन्न अभाज्य संख्याओं का गुणनफल हो, ऐसी एक संख्या ज्ञात करें।
हल: 105 (= 3 × 5 × 7)।

प्र. 11: अंक 2, 4, 5 का प्रत्येक एक बार उपयोग कर 3-अंकीय अभाज्य संख्या बनाएँ।
हल: संभव नहीं — इन तीन अंकों से बनने वाला हर संयोजन भाज्य संख्या ही निकलता है (क्योंकि हर संयोजन सम अंक पर समाप्त होता है या 3 से विभाज्य होता है)।

प्र. 12: ऐसी अभाज्य संख्याएँ ज्ञात करें जिन्हें दुगुना कर 1 जोड़ने पर फिर से अभाज्य संख्या प्राप्त हो।
हल: 2, 3, 5, 11, 23।

प्र. 1 (सहअभाज्य संख्याएँ, पृ. 120): 64, 104, 105, 243, 320, 141, 1728, 729, 1024, 1331, 1000 के अभाज्य गुणनखंडन कीजिए।
हल: गुणनखंड वृक्ष (factor tree) की सहायता से विस्तृत अभाज्य गुणनखंडन दिए गए हैं — उदाहरणस्वरूप 1728 = 2⁶ × 3³, 1000 = 2³ × 5³, आदि।

प्र. 2: ऐसी संख्या ज्ञात करें जिसके अभाज्य गुणनखंडन में एक बार 2, दो बार 3 और एक बार 11 आए।
हल: 2 × 3 × 3 × 11 = 198।

प्र. 3: 30 से छोटी तीन अभाज्य संख्याएँ ज्ञात करें जिनका गुणनफल 1955 हो।
हल: 5, 17, 23 (5 × 17 × 23 = 1955)।

प्र. 4: बिना गुणा किए अभाज्य गुणनखंडन ज्ञात करें।
हल: (a) 56 × 25 = 2³ × 5²× 7; (b) 108 × 75 = 2² × 3⁴ × 5²; (c) 1000 × 81 = 2³ × 3⁴ × 5³।

प्र. 5: निर्दिष्ट संख्या में भिन्न अभाज्य गुणनखंडों की संख्या रखने वाली सबसे छोटी संख्या ज्ञात करें।
हल: (a) तीन भिन्न अभाज्य गुणनखंड: 30 (= 2×3×5); (b) चार भिन्न अभाज्य गुणनखंड: 210 (= 2×3×5×7)।

प्र. 1 (प्रा. गुणनखंडन द्वारा सहअभाज्य जाँच, पृ. 122): सहअभाज्य युग्मों की जाँच करें।
हल: (a) 30, 45: सहअभाज्य नहीं (उभयनिष्ठ गुणनखंड 3, 5); (b) 57, 85: सहअभाज्य हैं; (c) 121, 1331: सहअभाज्य नहीं (उभयनिष्ठ गुणनखंड 11); (d) 343, 216: सहअभाज्य हैं।

प्र. 2: अभाज्य गुणनखंडन के माध्यम से विभाज्यता जाँचें।
हल: (a) 225 ÷ 27: नहीं; (b) 96 ÷ 24: हाँ; (c) 343 ÷ 17: नहीं; (d) 999 ÷ 99: नहीं।

प्र. 3: 2×3×7 और 3×7×11 के सहअभाज्य होने और एक-दूसरे को विभाजित करने की जाँच करें।
हल: सहअभाज्य नहीं (उभयनिष्ठ गुणनखंड 3, 7 हैं); न ही एक-दूसरे को विभाजित करती है।

प्र. 4: गुणा का कथन: “कोई भी दो अभाज्य संख्याएँ सहअभाज्य होती हैं” — सत्य/असत्य बताएँ।
हल: सत्य — क्योंकि दो भिन्न अभाज्य संख्याओं का 1 के अलावा कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं होता।

प्र. 1 (विभाज्यता परीक्षण, पृ. 125–126): 2024 से 2099 तक अधिवर्ष (leap years) ज्ञात करें।
हल: कुल 19 अधिवर्ष (2028 से 2096 तक, 4 के गुणज वर्ष — शताब्दी-वर्ष अपवाद इस सीमा में लागू नहीं होता)।

प्र. 2: 4 से विभाज्य 4-अंकीय विलोम (palindrome) संख्याओं में सबसे छोटी और सबसे बड़ी ज्ञात करें।
हल: सबसे छोटी: 2112; सबसे बड़ी: 8888।

प्र. 3: “सत्य/कभी-कभी/कभी नहीं” कथन जाँचें (योगों की विभाज्यता पर)।
हल: दो सम संख्याओं का योग 4 से विभाज्य होना: कभी-कभी सत्य; दो विषम संख्याओं का योग 4 से विभाज्य होना: कभी-कभी सत्य (यह अंकों के विशिष्ट मान पर निर्भर करता है)।

प्र. 4: 78, 99, 173, 572, 980, 1111, 2345 को विभाजित करने पर शेषफल ज्ञात करें।
हल: (i) 10 से भाग देने पर: 8, 9, 3, 2, 0, 1, 5; (ii) 5 से भाग देने पर: 3, 4, 3, 2, 0, 1, 0; (iii) 2 से भाग देने पर: 0, 1, 1, 0, 0, 1, 1।

प्र. 5: 14560 की विभाज्यता जाँचने के लिए किन दो संख्याओं का उपयोग करेंगे?
हल: 8 और 10 (इनसे 40 से विभाज्यता आसानी से जाँची जा सकती है)।

प्र. 6: 2, 4, 5, 8, 10 सभी से विभाज्य संख्याओं के उदाहरण दें।
हल: 5600, 6000, 77622160 (इन सभी का अंतिम अंक 0 है और ये 8 से भी विभाज्य हैं)।

प्र. 7: ऐसी दो संख्याएँ (जिनके इकाई अंक शून्य न हों) ज्ञात करें जिनका गुणनफल 10000 हो।
हल: 16 और 625 (16 × 625 = 10000)।

नोट: पाठ्यपुस्तक में खंड 5.5 के अंतर्गत आगे 3, 6 और 9 से विभाज्यता (अंकों के योग पर आधारित) से संबंधित अतिरिक्त “Figure it Out” प्रश्न भी हो सकते हैं, परंतु उपलब्ध स्रोतों में इनका सटीक शब्दशः प्रश्न-उत्तर सत्यापित नहीं हो सका — अतः यहाँ इन्हें शामिल नहीं किया गया है ताकि कोई गलत/काल्पनिक हल न दिया जाए। विद्यार्थियों को इसके लिए मूल NCERT पाठ्यपुस्तक देखने की सलाह दी जाती है।

अध्याय 6: परिमाप और क्षेत्रफल

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

6.1 परिमाप — आइए पता लगाएँ (पृ. 132)

प्र. 1: लुप्त पद ज्ञात करें — (a) आयत का परिमाप = 14 सेमी, चौड़ाई = 2 सेमी, लंबाई = ?; (b) वर्ग का परिमाप = 20 सेमी, भुजा = ?; (c) आयत का परिमाप = 12 मी, लंबाई = 3 मी, चौड़ाई = ?
हल: (a) परिमाप = 2×(लंबाई+चौड़ाई) ⇒ 14 = 2×(l+2) ⇒ l = 5 सेमी। (b) परिमाप = 4×भुजा ⇒ 20 = 4a ⇒ a = 5 सेमी। (c) 12 = 2×(3+b) ⇒ b = 3 मी

प्र. 2: 5 सेमी और 3 सेमी भुजाओं वाला एक आयत तार से बनाया गया है। यदि तार को सीधा करके वर्ग बनाया जाए, तो वर्ग की भुजा कितनी होगी?
हल: आयत का परिमाप = 2×(5+3) = 16 सेमी। यही तार अब वर्ग बनाएगा: 16 = 4a ⇒ a = 4 सेमी

प्र. 3: 55 सेमी परिमाप वाले त्रिभुज की दो भुजाएँ 20 सेमी और 14 सेमी हैं। तीसरी भुजा ज्ञात करें।
हल: तीसरी भुजा = 55 − (20+14) = 21 सेमी

प्र. 4: 150 मी लंबे और 120 मी चौड़े आयताकार पार्क की बाड़ लगाने की लागत ज्ञात करें, यदि बाड़ ₹40 प्रति मीटर की दर से लगती है।
हल: परिमाप = 2×(150+120) = 540 मी। लागत = 540 × 40 = ₹21,600

प्र. 5: 36 सेमी लंबी डोरी से बनाएँ: (a) वर्ग, (b) समबाहु त्रिभुज, (c) समषट्भुज — हर भुजा की लंबाई ज्ञात करें।
हल: (a) 36÷4 = 9 सेमी। (b) 36÷3 = 12 सेमी। (c) 36÷6 = 6 सेमी

प्र. 6: एक किसान के 230 मी × 160 मी आयताकार खेत को 3 चक्कर रस्सी से घेरना है। कुल कितनी रस्सी चाहिए?
हल: परिमाप = 2×(230+160) = 780 मी। कुल रस्सी = 3 × 780 = 2,340 मी

6.1 परिमाप — आइए पता लगाएँ (पृ. 133–134, दौड़ का ट्रैक)

प्र. 1: अक्षी ने बाहरी ट्रैक (70 मी × 40 मी) पर 5 चक्कर लगाए। कुल दूरी ज्ञात करें।
हल: एक चक्कर = 2×(70+40) = 220 मी। 5 चक्कर = 220 × 5 = 1,100 मी

प्र. 2: तोशी ने भीतरी ट्रैक (60 मी × 30 मी) पर 7 चक्कर लगाए। कुल दूरी ज्ञात करें और बताएँ किसने अधिक दूरी तय की।
हल: एक चक्कर = 2×(60+30) = 180 मी। 7 चक्कर = 180 × 7 = 1,260 मी। चूँकि 1,260 > 1,100, इसलिए तोशी ने अधिक दूरी तय की

प्र. 3: दी गई दूरियों (250 मी, 500 मी, 1000 मी) के बाद अक्षी और तोशी ट्रैक पर कहाँ पहुँचेंगे, चिह्नित करें।
हल: अक्षी (220 मी/चक्कर के हिसाब से): 250 मी पर दूसरे चक्कर में 30 मी दूर; 500 मी पर तीसरे चक्कर में 60 मी दूर; 1000 मी पर 4 पूरे चक्कर (880 मी) के बाद 5वें चक्कर में 120 मी दूर। तोशी (180 मी/चक्कर के हिसाब से): 250 मी पर दूसरे चक्कर में 70 मी दूर; 500 मी पर तीसरे चक्कर में 140 मी दूर; 1000 मी पर 5 पूरे चक्कर (900 मी) के बाद छठे चक्कर में 100 मी दूर।

अंतःपाठ प्रश्न (पृ. 134–137, विकर्ण मापन)

प्र.: दी गई आकृतियों का परिमाप सीधी (s) और तिरछी/विकर्ण (d) इकाइयों में लिखें।
हल: प्रथम आकृति = 8s + 2d; द्वितीय आकृति = 4s + 6d; तृतीय आकृति = 12s + 6d; चतुर्थ आकृति = 18s + 6d। (नोट: यह विकर्ण-दूरी की एक विशेष इकाई पद्धति है, जो पाठ्यपुस्तक के विशिष्ट ग्रिड-चित्रों पर आधारित है — मूल आकृतियों के बिना प्रत्येक अंक को दृष्टिगत रूप से पुनः सत्यापित करना कठिन है, अतः विद्यार्थियों को अपनी पाठ्यपुस्तक के चित्रों से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)

प्र.: अपने आस-पास नियमित आकृतियों वाली वस्तुएँ खोजें और उनका परिमाप ज्ञात करने का सामान्य नियम लिखें।
हल: किसी नियमित बहुभुज (जिसकी सभी भुजाएँ बराबर हों) का परिमाप = (भुजाओं की संख्या) × (एक भुजा की लंबाई) — जैसे वर्गाकार कोस्टर के लिए परिमाप = 4 × भुजा, अष्टभुजाकार घड़ी के लिए परिमाप = 8 × भुजा।

6.2 क्षेत्रफल — आइए पता लगाएँ (पृ. 138)

प्र. 1: 25 मी लंबे एक आयताकार बगीचे का क्षेत्रफल 300 वर्ग मी है। बगीचे की चौड़ाई ज्ञात करें।
हल: क्षेत्रफल = लंबाई × चौड़ाई ⇒ 300 = 25 × b ⇒ b = 12 मी

प्र. 2: 500 मी × 200 मी के एक आयताकार भूखंड पर टाइलिंग की लागत ज्ञात करें, यदि दर ₹8 प्रति 100 वर्ग मी है।
हल: क्षेत्रफल = 500 × 200 = 1,00,000 वर्ग मी। लागत = (1,00,000 ÷ 100) × 8 = ₹8,000

प्र. 3: 100 मी × 50 मी के नारियल के बाग में यदि हर पेड़ को 25 वर्ग मी की आवश्यकता हो, तो अधिकतम कितने पेड़ लगाए जा सकते हैं?
हल: क्षेत्रफल = 100 × 50 = 5,000 वर्ग मी। पेड़ों की संख्या = 5,000 ÷ 25 = 200 पेड़

प्र. 4: दी गई आकृतियों को आयतों में बाँटकर उनका क्षेत्रफल ज्ञात करें।
हल: प्रत्येक आकृति को दो या अधिक आयतों में बाँटकर, हर आयत का क्षेत्रफल अलग-अलग निकालकर जोड़ा जाता है। (नमूना आकृतियों के लिए क्रमशः लगभग 28 वर्ग मी और 9 वर्ग मी — सटीक विभाजन मूल चित्र पर निर्भर है, अतः विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक के ग्रिड से मिलान करें।)

6.2 क्षेत्रफल — टेंग्राम (पृ. 139)

प्र. 1: पता लगाएँ कि कौन-से टुकड़ों का क्षेत्रफल बराबर है।
हल: मानक टेंग्राम में — दो बड़े त्रिभुज A और B बराबर हैं; मध्यम त्रिभुज D, वर्ग F और समांतर चतुर्भुज G — तीनों बराबर हैं; दो छोटे त्रिभुज C और E बराबर हैं। (यह मानक ज्यामितीय अनुपात से स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया गया है: बड़े त्रिभुज = कुल क्षेत्रफल का 1/4, मध्यम त्रिभुज/वर्ग/समांतर चतुर्भुज = कुल का 1/8, छोटे त्रिभुज = कुल का 1/16।)

प्र. 2: आकृति D, आकृति C से कितनी गुना बड़ी है? E के बारे में क्या कहा जा सकता है?
हल: D का क्षेत्रफल C का 2 गुना है (D = 1/8, C = 1/16)। E का क्षेत्रफल C के बराबर है (दोनों छोटे त्रिभुज)।

प्र. 3: किसकी क्षेत्रफल अधिक है — D या F?
हल: दोनों का क्षेत्रफल बराबर है (दोनों कुल क्षेत्रफल के 1/8 भाग के बराबर हैं)।

प्र. 4: किसका क्षेत्रफल अधिक है — F या G?
हल: दोनों का क्षेत्रफल बराबर है (दोनों 1/8 भाग)।

प्र. 5: आकृति A का क्षेत्रफल आकृति G की तुलना में कितना है — दुगुना या चौगुना?
हल: A, G का दुगुना है (A = 1/4, G = 1/8)।

प्र. 6: सातों टुकड़ों से बने बड़े वर्ग का क्षेत्रफल आकृति C के पदों में ज्ञात करें।
हल: बड़े वर्ग का कुल क्षेत्रफल = 1 (पूर्ण); चूँकि C = 1/16, इसलिए बड़ा वर्ग = 16 × (C का क्षेत्रफल)

प्र. 7: इन्हीं सात टुकड़ों को एक आयत के रूप में व्यवस्थित करें। इसका क्षेत्रफल C के पदों में क्या होगा?
हल: क्षेत्रफल वही रहेगा (टुकड़े नहीं बदले), अर्थात् 16 × (C का क्षेत्रफल) — क्योंकि पुनर्व्यवस्था से कुल क्षेत्रफल नहीं बदलता।

प्र. 8: क्या सात टुकड़ों से बने वर्ग और आयत के परिमाप अलग-अलग हैं या समान?
हल: परिमाप अलग-अलग होते हैं — यह दर्शाता है कि समान क्षेत्रफल वाली आकृतियों के परिमाप ज़रूरी नहीं कि बराबर हों।

अंतःपाठ प्रश्न — ग्रिड क्षेत्रफल (पृ. 140–142)

प्र. 1: दी गई ग्रिड-आकृतियों का क्षेत्रफल वर्ग इकाइयों में ज्ञात करें।
हल: (a) 4 वर्ग इकाई; (b) 9 वर्ग इकाई; (c) 10 वर्ग इकाई; (d) 11 वर्ग इकाई।

प्र. 3: 24 वर्ग इकाई क्षेत्रफल वाले आयत बनाएँ — अधिकतम और न्यूनतम परिमाप ज्ञात करें। इसी प्रकार 32 वर्ग सेमी के लिए भी ज्ञात करें।
हल: 24 वर्ग इकाई के लिए — अधिकतम परिमाप: 1×24 आयत ⇒ परिमाप = 2×(1+24) = 50 इकाई; न्यूनतम परिमाप: 4×6 आयत ⇒ परिमाप = 2×(4+6) = 20 इकाई। 32 वर्ग सेमी के लिए — अधिकतम: 1×32 ⇒ परिमाप = 66 सेमी; न्यूनतम: 4×8 ⇒ परिमाप = 24 सेमी।

प्र. 4: क्या दिए गए दो त्रिभुज एक-दूसरे पर पूरी तरह अध्यारोपित (overlap) होते हैं? क्या उनका क्षेत्रफल बराबर है?
हल: हाँ, वे पूरी तरह अध्यारोपित होते हैं; दोनों का क्षेत्रफल बराबर है, क्योंकि प्रत्येक त्रिभुज उसी आयत के आधे क्षेत्रफल के बराबर है जिसमें वह समाया है।

प्र. 7: आयतों की सहायता से त्रिभुजों BAD और ABE के क्षेत्रफल ज्ञात करें।
हल: दोनों त्रिभुजों का क्षेत्रफल 10 वर्ग इकाई प्रत्येक है (प्रत्येक अपने घेरने वाले आयत के आधे क्षेत्रफल के बराबर)।

6.3 त्रिभुज का क्षेत्रफल — आइए पता लगाएँ (पृ. 144)

प्र. 1: दी गई आकृतियों को आयतों और त्रिभुजों में बाँटकर उनका क्षेत्रफल ज्ञात करें।
हल: (b) 30 वर्ग इकाई; (d) 16 वर्ग इकाई; (e) 11 वर्ग इकाई। (नोट: (a) और (c) के लिए स्रोतों में परस्पर विरोधाभासी मान मिले — कुछ स्रोत (a)=24 तो कुछ 26 वर्ग इकाई बताते हैं, और (c) के लिए 30 और 48 वर्ग इकाई दोनों दिखे। चूँकि यह मूल पाठ्यपुस्तक के विशिष्ट ग्रिड-चित्र पर निर्भर करता है और स्रोत असहमत हैं, इन दो उप-भागों के सटीक उत्तर की पुष्टि यहाँ नहीं की जा सकी — विद्यार्थी मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र से गिनकर स्वयं सत्यापित करें।)

अंतःपाठ प्रश्न (पृ. 145–149)

प्र. 1: 9 इकाई वर्गों का प्रयोग कर न्यूनतम और अधिकतम परिमाप वाली आकृतियाँ बनाएँ; 12 इकाई परिमाप वाली आकृति भी बनाएँ।
हल: न्यूनतम परिमाप: 3×3 वर्ग व्यवस्था ⇒ परिमाप = 12 इकाई। अधिकतम परिमाप: 1×9 सीधी पंक्ति व्यवस्था ⇒ परिमाप = 20 इकाई। 18 इकाई परिमाप के लिए कई मध्यवर्ती आकृतियाँ संभव हैं (जैसे 2×4 के साथ एक अतिरिक्त वर्ग)।

प्र. 2: 24 इकाई परिमाप वाली एक आकृति में वर्ग जोड़ने पर परिमाप पर क्या प्रभाव पड़ता है?
हल: यह इस पर निर्भर करता है कि वर्ग कहाँ जोड़ा गया — परिमाप बढ़ भी सकता है (जैसे 26 तक), घट भी सकता है (22 तक), या वही (24) भी रह सकता है, इस पर निर्भर करते हुए कि नया वर्ग कितनी भुजाओं को साझा करता है।

प्र. 3–4: चरण और शरण के घर की योजना में लुप्त माप ज्ञात कर कुल क्षेत्रफल और परिमाप निकालें।
हल: दोनों घरों का कुल क्षेत्रफल 1,050 वर्ग फुट बराबर है (चूँकि समान कुल स्थान अलग-अलग आंतरिक विभाजन में दिखाया गया है)। परिमाप भिन्न-भिन्न है: चरण के घर का परिमाप 130 फुट, शरण के घर का परिमाप 134 फुट — यह पुनः दिखाता है कि समान क्षेत्रफल की आकृतियों के परिमाप भिन्न हो सकते हैं।

प्र. 5: क्षेत्रफल भूलभुलैया (area maze) पहेली हल करें — लुप्त मान ज्ञात करें।
हल: दिए गए आयताकार खंडों के ज्ञात क्षेत्रफल और एक भुजा से शेष भुजाओं और अज्ञात क्षेत्रफलों को क्रमिक रूप से निकाला जाता है (उदाहरण हल में मान 30, 9, 16 वर्ग सेमी और एक भुजा 5 सेमी प्राप्त होती है)।

6.3 त्रिभुज का क्षेत्रफल — आइए पता लगाएँ (पृ. 149)

प्र. 1: एक ऐसे आयत के आयाम बताएँ जिसका क्षेत्रफल इन दो आयतों — 5 मी × 10 मी और 2 मी × 7 मी — के क्षेत्रफलों के योग के बराबर हो।
हल: योग = 50 + 14 = 64 वर्ग मी। संभावित आयाम: 1×64, 2×32, 4×16, या 8×8 (कोई भी जोड़ी जिसका गुणनफल 64 हो)।

प्र. 2: 50 मी लंबे एक आयताकार बगीचे का क्षेत्रफल 1,000 वर्ग मी है। चौड़ाई ज्ञात करें।
हल: 1000 = 50 × b ⇒ b = 20 मी

प्र. 3: 5 मी × 4 मी के कमरे में 3 मी भुजा वाला वर्गाकार कालीन बिछाया गया है। बिना कालीन वाला क्षेत्रफल ज्ञात करें।
हल: कमरे का क्षेत्रफल = 5×4 = 20 वर्ग मी; कालीन का क्षेत्रफल = 3×3 = 9 वर्ग मी। बिना कालीन क्षेत्रफल = 20 − 9 = 11 वर्ग मी

प्र. 4: 15 मी × 12 मी के बगीचे के चारों कोनों पर 2 मी × 1 मी की चार क्यारियाँ बनी हैं। लॉन के लिए कितना क्षेत्रफल शेष है?
हल: बगीचे का क्षेत्रफल = 15×12 = 180 वर्ग मी; चार क्यारियों का कुल क्षेत्रफल = 4×(2×1) = 8 वर्ग मी। लॉन क्षेत्रफल = 180 − 8 = 172 वर्ग मी

प्र. 5: आकृति A का क्षेत्रफल 18 वर्ग इकाई और आकृति B का 20 वर्ग इकाई है, फिर भी A का परिमाप B से अधिक है — ऐसी दो आकृतियाँ बनाएँ।
हल: उदाहरण: A = 9×2 आयत (क्षेत्रफल=18, परिमाप = 2×(9+2)=22 इकाई); B = 5×4 आयत (क्षेत्रफल=20, परिमाप = 2×(5+4)=18 इकाई)। यहाँ A का परिमाप (22) > B के परिमाप (18) है, जबकि A का क्षेत्रफल B से कम है — यह दर्शाता है कि क्षेत्रफल और परिमाप स्वतंत्र गुण हैं।

प्र. 6: अपनी पुस्तक के एक पृष्ठ पर ऊपर-नीचे से 1 सेमी और दाएँ-बाएँ से 1.5 सेमी की दूरी पर एक आयताकार हाशिया (border) खींचें। इसका परिमाप ज्ञात करें।
हल: (यह प्रश्न मूल पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ के वास्तविक आकार पर निर्भर करता है, जो यहाँ उपलब्ध स्रोतों में स्पष्ट रूप से नहीं दिया गया — इसलिए 74 सेमी जैसा कोई विशिष्ट अंकीय उत्तर बिना पृष्ठ के मूल आयाम जाने पुष्ट नहीं किया जा सकता। विद्यार्थी अपनी वास्तविक कॉपी/पुस्तक के पृष्ठ आकार से माप घटाकर परिमाप स्वयं निकालें: भीतरी आयत की लंबाई = पृष्ठ की लंबाई − 2, चौड़ाई = पृष्ठ की चौड़ाई − 3, फिर परिमाप = 2×(लंबाई+चौड़ाई)।)

प्र. 7: 12 इकाई × 8 इकाई का एक आयत बनाएँ। इसके अंदर एक और आयत बनाएँ जिसका क्षेत्रफल ठीक आधा हो।
हल: बड़े आयत का क्षेत्रफल = 12×8 = 96 वर्ग इकाई; आधा = 48 वर्ग इकाई। भीतरी आयत के आयाम: 8 इकाई × 6 इकाई (क्षेत्रफल = 48 वर्ग इकाई)।

प्र. 8: एक वर्गाकार कागज़ को आधा मोड़कर मोड़-रेखा पर काटा जाता है, जिससे दो आयत बनते हैं। इनमें से हमेशा सत्य कौन-सा कथन है?
हल: यह कथन सत्य है कि दोनों बने आयतों के परिमापों का योग, मूल वर्ग के परिमाप का डेढ़ (1½) गुना होता है — क्योंकि मोड़-रेखा एक नई भुजा जोड़ती है जो दो बार गिनी जाती है, जबकि वर्ग की मूल भुजाओं का आधा भाग बाहरी सीमा में शेष रहता है।

अध्याय 7: भिन्न

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

7.1 भिन्नात्मक इकाइयाँ और बराबर हिस्से — आइए पता लगाएँ (पृ. 152–153)

प्र. 1: तीन अमरूदों का कुल भार 1 किग्रा है (यदि सभी लगभग बराबर आकार के हों)। प्रत्येक अमरूद का भार लगभग कितना है?
हल: 1/3 किग्रा

प्र. 2: एक थोक विक्रेता ने 1 किग्रा चावल को 4 बराबर पैकेटों में बाँटा। प्रत्येक पैकेट का भार कितना है?
हल: 1/4 किग्रा

प्र. 3: चार दोस्तों ने 3 गिलास गन्ने का रस मँगाया और बराबर-बराबर बाँटा। हर व्यक्ति ने कितना पिया?
हल: 3/4 गिलास

प्र. 4: एक बड़ी मछली का भार 1/2 किग्रा और छोटी मछली का भार 1/4 किग्रा है। दोनों का कुल भार कितना है?
हल: 1/2 + 1/4 = 2/4 + 1/4 = 3/4 किग्रा

प्र. 5: इन भिन्नों को छोटे से बड़े क्रम में लिखें — एक चौथाई, आधा, तीन चौथाई, सवा एक, डेढ़, ढाई।
हल: 1/4 < 1/2 < 3/4 < 5/4 < 3/2 < 5/2, यानी एक चौथाई < आधा < तीन चौथाई < सवा एक < डेढ़ < ढाई

7.2 भिन्नात्मक इकाइयाँ बतौर हिस्से (पृ. 155)

प्र.: चिक्की के दिए गए टुकड़ों में से प्रत्येक कौन-सी भिन्नात्मक इकाई दर्शाता है?
हल: (इस प्रश्न के प्रत्येक उप-भाग (a)–(h) का सटीक उत्तर मूल चित्र में टुकड़ों की वास्तविक संख्या पर निर्भर करता है; परामर्श किए गए स्रोत आपस में असहमत पाए गए (जैसे कुछ में (b)=1/3 तो कुछ में 1/4, (g)/(h) में भी भिन्नता) — अतः बिना मूल चित्र देखे यहाँ सटीक उत्तर देना उचित नहीं समझा गया। विद्यार्थी पाठ्यपुस्तक के चित्र में टुकड़ों की गिनती स्वयं करें।)

7.3 भिन्नात्मक इकाइयों से मापना (पृ. 158)

प्र. 1: 1/2 की तालिका को दो और चरणों तक बढ़ाएँ।
हल: 1/2, 2/2(=1), 3/2, 4/2(=2), 5/2, 6/2(=3) — प्रत्येक चरण में 1/2 जोड़ा जाता है।

प्र. 2: इसी प्रकार 1/4 के लिए तालिका बनाएँ।
हल: 1/4, 2/4, 3/4, 4/4(=1), 5/4, 6/4, 7/4, 8/4(=2) — प्रत्येक चरण में 1/4 जोड़ा जाता है।

प्र. 3: कागज़ की पट्टी से 1/3 बनाएँ। क्या इसका उपयोग 1/6 बनाने में हो सकता है?
हल: हाँ — 1/3 पट्टी को पुनः आधा मोड़ने पर 1/3 × 1/2 = 1/6 प्राप्त होता है।

प्र. 4: रोटी के 1/4 भाग को (a) 5 बार और (b) 9 बार दर्शाने वाला चित्र बनाएँ।
हल: (a) 5 × 1/4 = 5/4 (सवा एक रोटी); (b) 9 × 1/4 = 9/4 (सवा दो रोटी) — प्रत्येक को चित्र में 1/4 के उतने खंड दिखाकर व्यक्त किया जाता है।

प्र. 5: भिन्नात्मक इकाइयों को उनके संगत चित्रों से मिलाएँ।
हल: प्रत्येक भिन्न (जैसे 1/2, 1/3, 1/4, 1/6) को उसके बराबर बराबर बँटे भाग दिखाने वाले चित्र से मिलाया जाता है।

7.4 संख्या रेखा पर भिन्न अंकित करना (पृ. 159–160)

प्र. 1: 1/10, 3/10 और 4/5 को संख्या रेखा पर दर्शाएँ।
हल: 0 और 1 के बीच की दूरी को 10 बराबर भागों में बाँटकर 1/10 पहला भाग, 3/10 तीसरा भाग, और 4/5(=8/10) आठवाँ भाग होगा।

प्र. 2: पाँच भिन्न लिखकर संख्या रेखा पर अंकित करें।
हल: विद्यार्थी-विशेष उत्तर (जैसे 1/2, 1/3, 2/3, 1/4, 3/4 आदि किसी भी पाँच भिन्नों को उपयुक्त बिंदुओं पर दर्शाया जा सकता है)।

प्र. 3: 0 और 1 के बीच कितनी भिन्नें होती हैं?
हल: अनंत (infinite) भिन्नें होती हैं — किन्हीं भी दो भिन्नों के बीच सदैव एक और भिन्न खोजी जा सकती है।

प्र. 4–5: दी गई नीली/काली रेखाओं की लंबाई भिन्न के रूप में लिखें।
हल: संख्या रेखा पर दर्शाई गई रेखा की लंबाई को उस रेखा द्वारा ढके गए बराबर भागों की गिनती के आधार पर भिन्न रूप में लिखा जाता है (उदाहरणार्थ नीली रेखा = 1/2 इकाई, काली रेखा = 3/2 इकाई — यह चित्र-विशिष्ट है)।

7.5 मिश्र भिन्न (पृ. 162–163)

प्र. 1–3: 7/2, 4/3, 7/3, 8/3, 11/5, 9/4 में कितनी पूर्ण इकाइयाँ हैं?
हल: 7/2 में 3 पूर्ण इकाइयाँ (7÷2=3 शेष 1)। 4/3 में 1 पूर्ण इकाई। 7/3 में 2 पूर्ण इकाइयाँ। 8/3 में 2 पूर्ण इकाइयाँ। 11/5 में 2 पूर्ण इकाइयाँ। 9/4 में 2 पूर्ण इकाइयाँ।

प्र. 4: इन्हें मिश्र भिन्न के रूप में लिखें: (a) 9/2, (b) 9/5, (c) 21/19, (d) 47/9, (e) 12/11, (f) 19/6।
हल: (a) 9/2 = । (b) 9/5 = 1⅘। (c) 21/19 = 1 2/19। (d) 47/9 = 5 2/9 (9×5=45, शेष 2)। (e) 12/11 = 1 1/11। (f) 19/6 = 3⅙ (6×3=18, शेष 1)।

प्र. 5: इन मिश्र भिन्नों को भिन्न (improper fraction) के रूप में लिखें: (a) 3¼, (b) 7⅔, (c) 9 4/9, (d) 3⅙, (e) 2 3/11, (f) 3 9/10।
हल: (a) 3¼ = (3×4+1)/4 = 13/4। (b) 7⅔ = (7×3+2)/3 = 23/3। (c) 9 4/9 = (9×9+4)/9 = 85/9। (d) 3⅙ = (3×6+1)/6 = 19/6। (e) 2 3/11 = (2×11+3)/11 = 25/11। (f) 3 9/10 = (3×10+9)/10 = 39/10

7.6–7.7 तुल्य भिन्न और सरलतम रूप (पृ. 164–174)

प्र. 1: क्या 1/2 और 3/6 बराबर हैं? क्या 3/6, 4/8, 5/10 तीनों तुल्य भिन्न हैं?
हल: हाँ, 1/2 = 3/6 (दोनों को सरल करने पर 1/2 मिलता है)। इसी प्रकार 3/6, 4/8, 5/10 — तीनों को सरल करने पर 1/2 मिलता है, अतः तीनों तुल्य भिन्न हैं।

प्र. 2: 2/6 के दो तुल्य भिन्न लिखें।
हल: 2/6 = 1/3; अतः तुल्य भिन्न: 4/12 और 6/18 (अंश-हर को समान संख्या से गुणा करके)।

प्र. 3: 4/6 के तुल्य भिन्न लिखें।
हल: 4/6 = 2/3; तुल्य भिन्न: 2/3, 6/9, 8/12, 10/15, 12/18 आदि।

प्र. 4: तीन रोटियाँ चार बच्चों में बराबर बाँटी जाती हैं — हर बच्चे को कितना मिलेगा?
हल: हर बच्चे को 3/4 रोटी मिलेगी।

प्र. 5: दो रोटियाँ चार बच्चों में बाँटी जाती हैं — हर बच्चे को कितना मिलेगा?
हल: 2/4 = 1/2 रोटी प्रत्येक बच्चे को मिलेगी।

प्र. 6: इन्हें सरलतम रूप में लिखें: (a) 17/51, (b) 64/144, (c) 126/147, (d) 525/112।
हल: (a) HCF(17,51)=17 ⇒ 1/3। (b) HCF(64,144)=16 ⇒ 4/9। (c) HCF(126,147)=21 ⇒ 6/7। (d) HCF(525,112)=7 ⇒ 75/16

7.8 भिन्नों की तुलना (पृ. 174)

प्र. 1: दी गई भिन्नों की तुलना करें और अपना कारण बताएँ।
हल: भिन्नों को समान हर पर लाकर (LCD की सहायता से) तुलना की जाती है — जिस भिन्न का हर समान करने पर अंश बड़ा हो, वह भिन्न बड़ी होती है।

प्र. 2: इन्हें आरोही क्रम में लिखें: (a) 7/10, 11/15, 2/5; (b) 19/24, 5/6, 7/12।
हल: (a) LCD=30: 7/10=21/30, 11/15=22/30, 2/5=12/30 ⇒ आरोही क्रम: 2/5 < 7/10 < 11/15। (b) LCD=24: 19/24=19/24, 5/6=20/24, 7/12=14/24 ⇒ आरोही क्रम: 7/12 < 19/24 < 5/6

प्र. 3: उपरोक्त भिन्नों को अवरोही क्रम में लिखें।
हल: (a) 11/15 > 7/10 > 2/5। (b) 5/6 > 19/24 > 7/12 (उपरोक्त तुलनाओं को उल्टा क्रम में लिखने पर)।

7.9 भिन्नों का जोड़ और घटाव (पृ. 179–182)

प्र. 1: जोड़ें (ब्रह्मगुप्त की विधि से): 2/7+5/7+6/7, 3/4+1/3, आदि।
हल: 2/7+5/7+6/7 = 13/7 (= 1 6/7)। 3/4+1/3: LCD=12 ⇒ 9/12+4/12 = 13/12 (= 1 1/12)।

प्र. 2: रहीम 2/3 लीटर पीला रंग और 3/4 लीटर नीला रंग मिलाकर हरा रंग बनाता है। कुल कितना रंग बना?
हल: LCD=12: 2/3=8/12, 3/4=9/12। योग = 8/12+9/12 = 17/12 लीटर (= 1 5/12 लीटर)।

प्र. 3: गीता (2/5 मी) और शमीम (3/4 मी) लेस खरीदती हैं ताकि 1 मी लंबी बॉर्डर बन सके — क्या यह पर्याप्त है?
हल: LCD=20: 2/5=8/20, 3/4=15/20। योग = 8/20+15/20 = 23/20 मी (=1 3/20 मी), जो 1 मी से अधिक है, अतः पर्याप्त है

प्र. 4: घटाएँ: (a) 5/8−3/8, (b) 7/9−5/9, (c) 10/27−1/27।
हल: (a) 2/8 = 1/4। (b) 2/9। (c) 9/27 = 1/3

प्र. 5: ब्रह्मगुप्त की विधि से घटाव करें, तथा जया के 7/10 किमी चलने और 1/2 किमी चलने वाले उदाहरण को हल करें।
हल: जया: 7/10 − 1/2 = 7/10 − 5/10 = 1/5 किमी (शेष दूरी)।

पहेली — इकाई भिन्नों का योग 1 (पृ. 184–185)

प्र. 1: तीन भिन्न भिन्नात्मक इकाइयाँ खोजें जिनका योग 1 हो।
हल: 1/2 + 1/3 + 1/6 = 3/6+2/6+1/6 = 6/6 = 1 (सत्यापित)।

प्र. 2: चार भिन्न भिन्नात्मक इकाइयाँ खोजें जिनका योग 1 हो (कुल 6 हल संभव हैं)।
हल: एक उदाहरण: 1/2 + 1/3 + 1/8 + 1/24 = 12/24+8/24+3/24+1/24 = 24/24 = 1 (स्वतंत्र रूप से सत्यापित)। शेष पाँच हल विद्यार्थी स्वयं खोज सकते हैं।

अध्याय 8: रचनाओं के साथ खेलना

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

8.1 वृत्त और उसके गुण — आइए पता लगाएँ (पृ. 191)

प्र. 1: अर्धवृत्त (semi-circle) बनाने के लिए कंपास में कितनी त्रिज्या सेट करनी चाहिए? AX की लंबाई कितनी होनी चाहिए?
हल: यदि पूरे वृत्त का व्यास (AX) 4 सेमी रखना है, तो त्रिज्या = 2 सेमी सेट करें, और AX = 4 सेमी (व्यास = 2 × त्रिज्या)।

प्र. 2: किसी भिन्न लंबाई के रेखाखंड पर तरंगें (waves) बनाने का प्रयास करें।
हल: रेखाखंड को बराबर भागों में बाँटकर, प्रत्येक भाग को व्यास मानकर बारी-बारी ऊपर-नीचे अर्धवृत्त बनाए जाते हैं ताकि तरंग-पैटर्न बने।

प्र. 3: ऐसी आकृतियाँ बनाएँ जहाँ तरंगें अर्धवृत्त से छोटी हों, पर दोनों तरंगें आपस में बराबर हों।
हल: रेखाखंड को बराबर भागों में बाँटकर प्रत्येक भाग पर समान त्रिज्या की छोटी चापें (अर्धवृत्त से छोटा कोण) क्रमशः ऊपर-नीचे खींचकर बनाई जाती हैं, जिससे दोनों तरंगें सर्वांगसम रहें।

वृत्त-आधारित रचनाएँ (पृ. 192–193)

प्र.: कंपास की सहायता से “आँख” (eye) जैसी आकृति बनाएँ, जिसमें दो चाप एक-दूसरे को काटती हों।
हल: बिंदु A और B को रेखाखंड के लंब समद्विभाजक पर इस प्रकार रखें कि A और B से समान त्रिज्या की दो चापें खींचने पर वे एक-दूसरे को दो बिंदुओं पर काटें, जिससे “आँख” जैसी आकृति (लेंस/वेसिका आकार) बनती है।

प्र.: दिए गए वर्ग के लिए कौन-सा नामकरण अमान्य है और क्यों?
हल: “PQSR” अमान्य नामकरण है, क्योंकि वर्ग के शीर्षों के नाम क्रमवार (या तो घड़ी की दिशा में या इसके विपरीत) लिखने चाहिए; PQSR में क्रम बिगड़ जाता है जिससे यह भुजाओं और विकर्णों को गलत दर्शाता है।

8.2 वर्ग और आयत — आइए पता लगाएँ (पृ. 194)

प्र. 1: डॉट पेपर पर एक आयत और उसके चारों ओर सममित रूप से रखे 4 वर्गों वाली आकृति बनाएँ। यह कैसे सुनिश्चित किया कि चारों वर्ग सममित रूप से रखे हैं?
हल: केंद्रीय आयत को डॉट-ग्रिड पर संरेखित करके बनाया जाता है, फिर चारों कोनों पर बराबर दूरी और बराबर आकार के वर्ग जोड़े जाते हैं ताकि आयत के केंद्र-बिंदु से हर वर्ग समान दूरी और सममित स्थिति में रहे — इसकी जाँच रूलर से भुजाओं की बराबर लंबाई मापकर की जाती है।

प्र. 2: दिए गए संग्रह में से पहचानें कि कौन-सी आकृतियाँ वर्ग हैं (आवश्यकता होने पर माप का प्रयोग करें)।
हल: जिस आकृति की सभी चार भुजाएँ बराबर लंबाई की हों और सभी कोण 90° हों, वही सही वर्ग है — रूलर और चाँदे से जाँचने पर आमतौर पर संग्रह में से केवल एक आकृति (मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र में चिह्नित) यह शर्तें पूरी करती है; शेष या तो आयत हैं (कोण 90° पर भुजाएँ असमान) या समचतुर्भुज (भुजाएँ बराबर पर कोण 90° नहीं)। (सटीक कौन-सी लेबल वाली आकृति वर्ग है, यह मूल चित्र पर निर्भर करता है — विद्यार्थी अपनी पाठ्यपुस्तक में माप करके पुष्टि करें।)

प्र. 3: डॉट ग्रिड पर कम से कम 3 घुमाए हुए (rotated) वर्ग और आयत बनाएँ जिनके कोने डॉट पर हों। जाँचें कि वे अपने-अपने गुण पूरे करते हैं या नहीं।
हल: चाँदे से जाँचें कि सभी कोण 90° हैं; रूलर से जाँचें कि वर्ग की सभी भुजाएँ बराबर हैं और आयत की सम्मुख भुजाएँ बराबर हैं — इस प्रकार डॉट-ग्रिड पर तिरछे (कोणीय दिशा में) बने वर्ग/आयत भी अपनी परिभाषा को संतुष्ट करते हैं, बशर्ते कोने डॉट पर सही ढंग से चुने गए हों।

रचना विधियाँ — आयत, वर्ग व उनके विभाजन (पृ. 197–211)

प्र.: 6 सेमी × 4 सेमी का आयत रूलर, कंपास और चाँदे की सहायता से बनाएँ।
हल: 1) 6 सेमी की एक भुजा AB खींचें। 2) A और B पर चाँदे से 90° के कोण बनाएँ। 3) दोनों लंबवत रेखाओं पर कंपास/रूलर से 4 सेमी नाप कर बिंदु C और D अंकित करें। 4) C और D को मिलाकर आयत ABCD पूर्ण करें। 5) रूलर से सभी भुजाएँ और चाँदे से सभी कोण (90°) नापकर सत्यापित करें।

प्र.: एक आयत को (a) दो सर्वांगसम वर्गों में और (b) तीन सर्वांगसम वर्गों में बाँटने के लिए आयत का अनुपात क्या होना चाहिए?
हल: (a) दो सर्वांगसम वर्गों के लिए आयत की लंबाई : चौड़ाई = 2 : 1 होना चाहिए (जैसे 8 सेमी × 4 सेमी, जिसे बीच में बाँटने पर दो 4×4 वर्ग बनते हैं)। (b) तीन सर्वांगसम वर्गों के लिए अनुपात 3 : 1 होना चाहिए (जैसे 12 सेमी × 4 सेमी, तीन बराबर भागों में बाँटने पर तीन 4×4 वर्ग बनते हैं)।

प्र.: एक आयत बनाएँ जिसकी एक भुजा 4 सेमी और विकर्ण 8 सेमी है।
हल: 1) 4 सेमी की भुजा AB खींचें। 2) बिंदु B पर 90° का कोण बनाकर एक लंब रेखा खींचें। 3) A से कंपास द्वारा 8 सेमी त्रिज्या की चाप खींचकर इस लंब रेखा को बिंदु C पर काटें (यह विकर्ण AC = 8 सेमी सुनिश्चित करता है)। 4) पाइथागोरस प्रमेय से भुजा BC = √(8²−4²) = √48 ≈ 6.93 सेमी प्राप्त होगी। 5) D बिंदु को इसी प्रकार पूरा कर आयत ABCD बनाएँ, फिर मापकर सत्यापित करें।

8.3 अन्य चतुर्भुज (पृ. 215)

प्र. 3: क्या ऐसी कोई आकृति है जिसकी चारों भुजाएँ बराबर हों, पर वह वर्ग न हो?
हल: हाँ — इसे समचतुर्भुज (rhombus) कहते हैं, जिसमें AB = BC = CD = DA (चारों भुजाएँ बराबर) होती हैं, परंतु इसके कोण 90° के नहीं होते (जब तक वह वर्ग न हो) — अतः यह वर्ग नहीं होता।

अध्याय 9: सममिति

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

9.1 सममिति रेखा — आइए पता लगाएँ (पृ. 219)

प्र. 1: क्या इस अध्याय के आरंभ में दी गई आकृतियों में सममिति रेखा दिखाई देती है?
हल: फूल में 6 सममिति रेखाएँ, तितली में 1 सममिति रेखा, रंगोली में 4 सममिति रेखाएँ हैं; पिनव्हील (spinning top जैसी आकृति) में कोई सममिति रेखा नहीं है; बादल जैसी अनियमित आकृति में सामान्यतः कोई निश्चित सममिति रेखा नहीं होती।

प्र. 2: निम्न आकृतियों में यदि सममिति की रेखाएँ हैं, तो उन्हें पहचानें।
हल: प्रत्येक नियमित/सममित आकृति में उसकी केंद्रीय अक्ष या विकर्ण पर सममिति रेखा चिह्नित की जाती है; अनियमित आकृतियों में कोई सममिति रेखा नहीं होती।

9.1 सममिति रेखा — आइए पता लगाएँ (पृ. 221–222)

प्र.: एक वर्गाकार आकृति में कितनी सममिति रेखाएँ होती हैं?
हल: वर्ग में 4 सममिति रेखाएँ होती हैं (2 विकर्ण + 2 भुजाओं के मध्यबिंदुओं से गुजरने वाली रेखाएँ)।

प्र.: क्या किसी (गैर-वर्ग) आयत का विकर्ण उसकी सममिति रेखा होता है?
हल: नहीं — आयत का विकर्ण उसे दो सर्वांगसम त्रिभुजों में बाँटता तो है, लेकिन वे एक-दूसरे के दर्पण-प्रतिबिंब (mirror image) नहीं होते, इसलिए विकर्ण सममिति रेखा नहीं है।

प्र.: विकर्ण AC पर परावर्तन करने पर बिंदु A, B, C, D कहाँ जाते हैं?
हल: विकर्ण AC पर परावर्तन में: A→A, C→C (क्योंकि ये अक्ष पर ही स्थित हैं), D→B और B→D (एक-दूसरे की जगह अदल-बदल होती है)। क्षैतिज अक्ष पर परावर्तन में: D→A, A→D, C→B, B→C।

अंतःपाठ प्रश्न — कागज़ मोड़ना और काटना (पृ. 223–230)

प्र. 1: मुड़े हुए कागज़ में छेद करने पर बनी आकृतियों से मोड़-रेखा (fold line) पहचानें।
हल: मोड़-रेखा वही रेखा होती है जिसके दोनों ओर छेद एक-दूसरे के ठीक दर्पण-प्रतिबिंब के रूप में सममित रूप से स्थित हों — यह पाठ्यपुस्तक के प्रत्येक चित्र में सीधे या तिरछे रूप में हो सकती है।

प्र. 2: दी गई सममिति-रेखा(ओं) के आधार पर शेष छेद ज्ञात करें।
हल: दी गई सममिति रेखा के दूसरी ओर, प्रत्येक मौजूदा छेद से बराबर दूरी पर उसका दर्पण-प्रतिबिंब बिंदु अंकित कर शेष छेद खोजे जाते हैं।

प्र. 4: प्रत्येक कटान के बाद कागज़ खोलने पर बने छेद के आकार का अनुमान लगाएँ।
हल: मोड़ों की संख्या और कटान के स्थान के अनुसार छेद का आकार सममित बहुभुज (जैसे हीरा, तारा, या बहुभुज आकार) बनता है — प्रत्येक मोड़ छेद को दुगुना सममित रूप से दोहराता है।

प्र. 5: मोड़ और एक सीधी कटान से विशेष आकार (जैसे केंद्र में वर्गाकार छेद) कैसे प्राप्त करें?
हल: कागज़ को दो बार तिरछा (विकर्णों के अनुदिश) मोड़कर एक कोने पर सीधी कटान लगाने से खोलने पर केंद्र में वर्गाकार छेद प्राप्त होता है; वैकल्पिक विधि में कागज़ को चार बराबर भागों में मोड़कर भी यही आकार पाया जा सकता है।

प्र. 6: इन आकृतियों में कितनी सममिति रेखाएँ हैं?
हल: (i) दी गई दो आकृतियों में क्रमशः 4 और 8 सममिति रेखाएँ; (ii) समबाहु त्रिभुज में 3 सममिति रेखाएँ; (iii) समषट्भुज (regular hexagon) में 6 सममिति रेखाएँ (सामान्य नियम: नियमित n-भुजी बहुभुज में n सममिति रेखाएँ होती हैं)।

प्र. 7–8: दी गई आकृतियों और कोलम (kolam) पैटर्न में सममिति रेखाएँ खींचें।
हल: प्रत्येक आकृति के केंद्र से गुजरने वाली उन सभी रेखाओं को चिह्नित किया जाता है जो आकृति को दो बराबर दर्पण-प्रतिबिंबी भागों में बाँटती हैं; पारंपरिक कोलम पैटर्न प्रायः 2, 4 या अधिक सममिति रेखाएँ दर्शाते हैं (उनकी डिज़ाइन के अनुसार)।

प्र. 9: ऐसे त्रिभुज बनाएँ जिनमें (a) ठीक एक सममिति रेखा हो, (b) ठीक तीन सममिति रेखाएँ हों, (c) कोई सममिति रेखा न हो। क्या ठीक दो सममिति रेखाओं वाला त्रिभुज बनाना संभव है?
हल: (a) समद्विबाहु त्रिभुज (isosceles) — ठीक एक सममिति रेखा। (b) समबाहु त्रिभुज (equilateral) — ठीक तीन सममिति रेखाएँ। (c) विषमबाहु त्रिभुज (scalene) — कोई सममिति रेखा नहीं। नहीं, ठीक दो सममिति रेखाओं वाला त्रिभुज बनाना संभव नहीं है, क्योंकि यदि किसी त्रिभुज में दो सममिति रेखाएँ हों तो ज्यामितीय रूप से तीसरी रेखा भी अनिवार्यतः बन जाती है (त्रिभुज समबाहु बन जाता है)।

प्र. 10: वक्र सीमाओं वाली ऐसी आकृतियाँ बनाएँ जिनमें (a) एक, (b) दो, (c) चार सममिति रेखाएँ हों।
हल: (a) अर्धवृत्त जैसी आकृति — 1 सममिति रेखा। (b) अंडाकार (ellipse) जैसी आकृति — 2 सममिति रेखाएँ (लंबवत व क्षैतिज अक्ष)। (c) वृत्ताकार आधार वाली फूल/पंखुड़ी जैसी आकृति (चार दिशाओं में सममित वक्र) — 4 सममिति रेखाएँ।

प्र. 11–13: दी गई नीली रेखा(ओं) को सममिति रेखा मानकर आकृति पूर्ण करें; एक शक्ल में दो और रेखाएँ जोड़कर सममित आकृति बनाएँ।
हल: दिए गए आधे भाग को नीली रेखा के अनुदिश दर्पण-प्रतिबिंबित करके शेष आधा भाग खींचा जाता है, ताकि पूरी आकृति नीली रेखा के दोनों ओर बराबर दिखे।

9.2 घूर्णी सममिति (rotational symmetry) — आइए पता लगाएँ (पृ. 235–236)

प्र. 1: दी गई आकृतियों के लिए सममिति कोण (angle of symmetry) ज्ञात करें।
हल: प्रत्येक आकृति के लिए वह न्यूनतम कोण ज्ञात किया जाता है जिस पर घुमाने से आकृति स्वयं पर पुनः आ जाए (उदाहरण: वर्ग के लिए 90°, वृत्त जैसी पूर्ण-सममित आकृति के लिए 360° तक कोई भी कोण, अर्धवृत्त-सदृश आकृति के लिए 180°) — यह प्रत्येक आकृति के आकार पर निर्भर करता है।

प्र. 3: दी गई आकृतियों के लिए घूर्णी सममिति की कोटि (order) बताएँ।
हल: (इस प्रश्न के छह उप-भागों के सटीक अंकीय उत्तर के लिए परामर्श किए गए स्रोत आपस में असहमत पाए गए — एक स्रोत क्रम 2,1,6,3,4,5 बताता है तो दूसरा 2,4,6,3,4,5; चूँकि उत्तर सीधे मूल पाठ्यपुस्तक के विशिष्ट चित्रों पर निर्भर है, यहाँ अनुमानित/असत्यापित अंक न देकर विद्यार्थियों को सामान्य नियम बताया जा रहा है: घूर्णी सममिति की कोटि = 360° ÷ सममिति कोण, जिसे प्रत्येक आकृति के लिए पाठ्यपुस्तक के चित्र से स्वयं निकालें।)

9.2 घूर्णी सममिति — आइए पता लगाएँ (पृ. 238)

प्र. 4: यदि किसी आकृति का न्यूनतम सममिति कोण 60° है, तो उसके अन्य सभी सममिति कोण क्या होंगे?
हल: 60° के गुणज: 60°, 120°, 180°, 240°, 300°, 360°

प्र. 5: यदि 60° किसी आकृति के सममिति कोणों में से एक है, परंतु उससे छोटे कोण भी मौजूद हैं, तो सबसे छोटा संभावित कोण क्या हो सकता है?
हल: चूँकि सममिति कोण सदैव 360° के भाजक होने चाहिए, और 60° से छोटे 360° के भाजक 30° व 15° हैं — यदि 60° स्वयं भी 15° का गुणज बनना है, तो सबसे छोटा संभावित कोण 15° हो सकता है (क्योंकि 360 और 60 दोनों 15 से पूर्णतः विभाज्य हैं)।

प्र. 6: क्या किसी आकृति का न्यूनतम सममिति कोण (a) 45° और (b) 17° हो सकता है?
हल: (a) हाँ, संभव है, क्योंकि 360 ÷ 45 = 8 (पूर्ण संख्या)। (b) नहीं, संभव नहीं, क्योंकि 360 ÷ 17 पूर्ण संख्या नहीं देता (17, 360 का भाजक नहीं है)।

प्र. 7: संसद भवन (Parliament Building) के चित्र में सममिति का विश्लेषण करें।
हल: (a) परावर्तन सममिति: भवन की वृत्ताकार/त्रिकोणीय संरचना में 3 सममिति रेखाएँ पाई जाती हैं (भवन की तीन-भुजी सममित बनावट के कारण)। (b) घूर्णी सममिति: कोटि 3 के साथ कोण 120°, 240°, 360° पर सममिति पाई जाती है।

प्र. 8–9: नियमित बहुभुजों में सममिति रेखाओं और सममिति कोणों की संख्या के बीच सामान्य नियम बताएँ।
हल: एक नियमित n-भुजी बहुभुज में n सममिति रेखाएँ और n सममिति कोण (प्रत्येक = 360°/n के गुणज) होते हैं — जैसे समबाहु त्रिभुज (n=3): 3 रेखाएँ, कोण 120°,240°,360°; वर्ग (n=4): 4 रेखाएँ, कोण 90°,180°,270°,360°; इसी क्रम में आगे बढ़ते हुए यह पैटर्न n=3,4,5,6,7,8,9,10… तक चलता रहता है।

प्र. 10: कोच हिमकण (Koch Snowflake) के क्रमिक चरणों में सममिति के गुणों पर विचार करें।
हल: (यह एक खुला/स्वयं-अन्वेषण वाला प्रश्न है, जिसका पाठ्यपुस्तक में कोई निश्चित एकल उत्तर नहीं दिया गया — सामान्यतः यह देखा जाता है कि कोच हिमकण की प्रत्येक अवस्था में मूल त्रिभुज जैसी ही 3 सममिति रेखाएँ और घूर्णी सममिति कोटि 3 बनी रहती है, चूँकि निर्माण प्रक्रिया हर भुजा पर समान रूप से लागू होती है।)

प्र. 11: अशोक चक्र में कितनी सममिति रेखाएँ और सममिति कोण हैं?
हल: अशोक चक्र में 24 तीलियाँ (spokes) हैं, अतः इसमें 24 सममिति रेखाएँ हैं। घूर्णी सममिति कोण = 360° ÷ 24 = 15°, और कुल 24 सममिति कोण (15° के गुणज: 15°, 30°, …, 360°) होते हैं।

अध्याय 10: शून्य के दूसरी ओर

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

10.1 परिचय — आइए पता लगाएँ (पृ. 243–245)

प्र.: क्या शून्य से छोटी कोई संख्या होती है? ऐसा कैसे हो सकता है कि कोई चीज़ 0 से कम हो?
हल: हाँ, ऐसी संख्याओं को ऋणात्मक संख्याएँ (negative numbers) कहा जाता है। उदाहरण: 0°C से कम तापमान (जैसे −5°C), समुद्र तल से नीचे की गहराई, या किसी खाते में उधार (debt) राशि।

प्र.: लिफ्ट में 4 मंज़िल ऊपर जाने और 3 मंज़िल नीचे जाने के लिए कौन-सा बटन दबाएँगे?
हल: ऊपर 4 मंज़िल के लिए +4; नीचे 3 मंज़िल के लिए −3

प्र. 1: मंज़िल +2 से शुरू करके 3 मंज़िल नीचे (बटन −3) दबाने पर कौन-सी मंज़िल पर पहुँचेंगे?
हल: (+2) + (−3) = −1 (अर्थात् भूतल से एक मंज़िल नीचे)।

प्र. 2: रिक्त स्थान भरें: (a) (+1)+(+4)=?; (b) (+4)+(+1)=?; (c) (+4)+(−3)=?; (d) (−1)+(+2)=?; (e) (−1)+(+1)=?; (f) (0)+(+2)=?; (g) (0)+(−2)=?
हल: (a) +5; (b) +5; (c) +1; (d) +1; (e) 0; (f) +2; (g) −2

10.2 योज्य प्रतिलोम (additive inverse) और तुलना (पृ. 246–247)

प्र.: +4, −3, 0, +2, −1 का योज्य प्रतिलोम (जो जोड़ने पर 0 दे) ज्ञात करें।
हल: +4 का योज्य प्रतिलोम −4; −3 का +3; 0 का 0; +2 का −2; −1 का +1

प्र. 1: इन जोड़ों की तुलना करें (<, >, या = लगाएँ): (a) −2 और +5; (b) −5 और +4; (c) −5 और −3; (d) +6 और −6; (e) 0 और −4; (f) 0 और +4।
हल: (a) −2 < +5; (b) −5 < +4; (c) −5 < −3; (d) +6 > −6; (e) 0 > −4; (f) 0 < +4।

10.3 पूर्णांकों का घटाव — आइए पता लगाएँ (पृ. 249–251)

प्र.: हल करें: (a) (+1)−(+4); (b) (0)−(+2); (c) (+4)−(+1); (d) (0)−(−2); (e) (+4)−(−3); (f) (−4)−(−3); (g) (−1)−(+2); (h) (−2)−(−2); (i) (−1)−(+1); (j) (+3)−(−3)।
हल: (a) −3; (b) −2; (c) +3; (d) +2; (e) +7; (f) −1; (g) −3; (h) 0; (i) −2; (j) +6

प्र.: रिक्त स्थान भरें: (a) (+40)+(+160)=?; (b) (+40)+(−240)=?; (c) (−50)+(+250)=?; (d) (−50)+(−150)=?; (e) (−200)−(−40)=?; (f) (+200)−(+40)=?; (g) (−200)−(+40)=?
हल: (a) +200; (b) −200; (c) +200; (d) −200; (e) −160; (f) +160; (g) −240

10.4 संख्या रेखा पर संक्रियाएँ (पृ. 253–254)

प्र. 4: संख्या रेखा पर हल करें: (a) −5+0; (b) 7+(−7); (c) −10+20; (d) 10−20; (e) 7−(−7); (f) −8−(−10)।
हल: (a) −5; (b) 0; (c) +10; (d) −10; (e) +14; (f) +2

10.5 टोकन/चिह्न विधि से जोड़-घटाव (पृ. 257–258)

प्र.: टोकन विधि से जोड़ें: (a) (+6)+(+4); (b) (−3)+(−2); (c) (+5)+(−7); (d) (−2)+(+6)।
हल: (a) +10; (b) −5; (c) −2; (d) +4

प्र.: टोकन विधि से घटाएँ: (a) (+10)−(+7); (b) (−8)−(−4); (c) (−9)−(−4); (d) (+9)−(+12); (e) (−5)−(−7); (f) (−2)−(−6)।
हल: (a) +3; (b) −4; (c) −5; (d) −3; (e) +2; (f) +4

अंतिम अभ्यास प्रश्न (पृ. 265–268)

प्र. 1: दी गई सीमाओं के बीच के सभी पूर्णांक आरोही क्रम में लिखें: (a) 0 से −7; (b) −4 से 4; (c) −8 से −15; (d) −30 से −23।
हल: (a) −6, −5, −4, −3, −2, −1। (b) −3, −2, −1, 0, 1, 2, 3। (c) −14, −13, −12, −11, −10, −9। (d) −29, −28, −27, −26, −25, −24

प्र. 2: ऐसे तीन पूर्णांक ज्ञात करें जिनका योग −8 हो।
हल: उदाहरण: −12, +8, −4 (जोड़ पर: −12+8−4 = −8, सत्यापित)। इसके अतिरिक्त भी अनेक हल संभव हैं (जैसे −3, −3, −2, आदि विभिन्न संयोजन)।

प्र.: ब्रह्मगुप्त के नियमों (धन+धन, ऋण+ऋण, धन+ऋण की संक्रियाओं) को पूर्णांकों के व्यावहारिक उदाहरणों (जैसे लाभ-हानि, ऊँचाई-गहराई, तापमान परिवर्तन) पर लागू करें।
हल: दो धनात्मक संख्याओं का योग सदैव धनात्मक होता है; दो ऋणात्मक संख्याओं का योग सदैव ऋणात्मक होता है (और उनके निरपेक्ष मानों को जोड़ा जाता है); एक धनात्मक और एक ऋणात्मक संख्या के योग में बड़े निरपेक्ष मान वाली संख्या का चिह्न परिणाम में आता है, तथा छोटे को बड़े में से घटाया जाता है — यही नियम व्यावहारिक उदाहरणों (जैसे ₹200 लाभ के बाद ₹40 हानि = शुद्ध ₹160 लाभ) पर सुसंगत रूप से लागू होता है।

इस किताब के अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न, रिवीजन नोट्स और फॉर्मूला हैंडबुक भी देखें, या मूल किताब पेज पर वापस जाएँ।

Written by Satish

NCERTBooks.org is an independent educational resource run by a small team focused on making official NCERT textbooks easy to find, read, and download for students, parents, and teachers across India. We are not affiliated with NCERT or the Ministry of Education -- we organise publicly available NCERT content by class and subject, verify links against official sources, and build tools (like our in-browser reader) that make studying more convenient. Every guide we publish is written and reviewed by our team based on the actual NCERT curriculum and syllabus.

📄 Want this offline? Download the free PDF of this page.Download PDF

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top