कक्षा 3 (हिंदी मीडियम) की गणित पाठ्यपुस्तक गणित मेला (NCERT, NEP 2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी 14 पाठों की सूची और हर पाठ में सिखाई गई मुख्य अवधारणा नीचे दी गई है। यह गाइड बच्चों और अभिभावकों दोनों के लिए यह समझने में मदद करता है कि हर पाठ में क्या सीखा जाएगा, ताकि घर पर अभ्यास कराना आसान हो जाए।
पाठों की सूची और मुख्य अवधारणा
- अध्याय 1: नाम में क्या है?
- अध्याय 2: खिलौनों का आनंद
- अध्याय 3: दोहरा शतक
- अध्याय 4: नानी माँ के साथ छुट्टियाँ
- अध्याय 5: आकृतियों का आनंद
- अध्याय 6: सैकड़ों का घर-1
- अध्याय 7: रक्षाबंधन
- अध्याय 8: उचित हिस्सा
- अध्याय 9: सैकड़ों का घर-2
- अध्याय 10: कक्षा में आनंद
- अध्याय 11: भरो और उठाओ
- अध्याय 12: कुछ लेना, कुछ देना
- अध्याय 13: समय-समय की बात
- अध्याय 14: सूरजकुंड मेला
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 1: नाम में क्या है? — हल एवं व्याख्या
यह भाग “गणित मेला” (कक्षा 3, हिंदी मीडियम) के अध्याय 1 “नाम में क्या है?” की कहानी, गतिविधियों और प्रश्नों के हल एवं व्याख्या देता है। इस अध्याय में गिनती से पहले की एक-से-एक संगती (one-to-one correspondence) व चिह्न लगाकर गिनती (tally marks) की अवधारणा सिखाई जाती है। (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm101.pdf)
कहानी: देबा, दीप और गायों का हिसाब
तारकेश्वर गाँव में देबा और दीप नाम के दो बच्चे अपने गाय-परिवार की गायों को रोजाना चराने ले जाते थे। एक दिन देबा ने पूछा — हमें कैसे पता चले कि हमारी कोई गाय खोई नहीं है? वे दोनों गिनना नहीं जानते थे। उनके एक मित्र ने सुझाव दिया कि जब वे गायों को लेकर बाहर जाएं तो प्रत्येक गाय के लिए दीवार पर एक चिह्न लगा दें। जब गायें वापस लेकर आएं तो जैसे ही कोई गाय द्वार में प्रवेश करे तो प्रत्येक गाय के लिए दीवार पर एक चिह्न काट दें। अगले दिन उन्होंने अपने मित्र के सुझाव का अनुसरण किया और जब सभी गायें वापस घर आ गईं तो सबही चिह्न कट गए।
अभ्यास: चिह्नों से गिनती (तालबंदी/tally marks)
प्र. कुछ वर्षों बाद जब देबा और दीप घर से बाहर निकले तो उनकी दीवार पर बहुत सारे चिह्न थे। उनके पास कितनी गायें थीं, यह कैसे पता चलेगा?
उ. दीवार पर बने सभी चिह्नों को गिनकर पता चलता है कि उनके पास कितनी गायें थीं, क्योंकि प्रत्येक गाय के लिए पहले से ही एक चिह्न बनाया गया था — यही एक-से-एक संगति (one-to-one correspondence) का सिद्धांत है।
प्र. जब गायें लेकर वापस आएं तो देबा और दीप ने क्या किया?
उ. जैसे-जैसे हर गाय द्वार में घुसी, उन्होंने प्रत्येक गाय के लिए दीवार पर बना एक चिह्न काट दिया। अगर सभी गायें वापस आ जाएं, तो दीवार पर कोई चिह्न नहीं बचेगा; अगर कुछ चिह्न बचे रह जाएं तो इसका मतलब है कि उतनी गायें अभी बाहर ही हैं — इसी लिए कहानी में देबा और दीप चिंतित हो जाते हैं जब दीवार पर दो चिह्न बचे रह जाते हैं — बाद में उन्हें खोई हुई गायें पास के खेत में मिल जाती हैं।
प्र. उनके मित्र हेमंत के पास 36 गायें और 23 भेड़ें थीं। अगर हेमंत गायों और भेड़ों दोनों के लिए अलग-अलग चिह्न बनाए, तो उसे कुल कितने चिह्न बनाने पड़ेंगे?
उ. गायों के लिए 36 चिह्न और भेड़ों के लिए 23 चिह्न, इस तरह कुल 36 + 23 = 59 चिह्न बनाने पड़ेंगे।
प्र. पुस्तक में एक गतिविधि में दीवार पर बने चिह्नों को गिनकर खाली जगह भरने को कहा गया है कि उनके पास कितनी गायें थीं। इसे कैसे हल करें?
उ. दीवार पर बने सभी चिह्नों को एक-एक करके गिनकर कुल संख्या पता की जाती है — वही संख्या गायों की कुल संख्या बताती है।
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 2: खिलौनों का आनंद — हल एवं व्याख्या
यह भाग “गणित मेला” (कक्षा 3, हिंदी मीडियम) के अध्याय 2 “खिलौनों का आनंद” की गतिविधियों और प्रश्नों के हल एवं व्याख्या देता है। इस अध्याय में ठोस आकृतियों (3D shapes) — घन (cube), घनाभ (cuboid), बेलन (cylinder), शंकु (cone) और गोला (sphere) — की पहचान व उनके गुण (सपाट फलक, वक्र फलक, कोर) सिखाए जाते हैं। (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm102.pdf)
अभ्यास: ठोस आकृतियों पर मुखचित्र (मुखौटे) बनाना
प्र. कुछ विद्यार्थी पुराने बक्सों, डिब्बों और बोतलों पर पशु-पक्षियों के मुखचित्र बना रहे हैं। हर विद्यार्थी ने किस आकृति पर कौन-सा मुखचित्र बनाया?
उ. गोल (बेलन/cylinder — बोतल) पर पिल्ले (पप्पी) का मुखचित्र — चौड़े कानों सहित; घन (cube — बक्से) पर सूअर का मुखचित्र — छोटी आंखों सहित; शंकु (cone) पर चिड़िया (पक्षी) का मुखचित्र — नुकीली चोंच सहित; और घनाभ (cuboid — डिब्बे) पर बिल्ली (बिल्ली) का मुखचित्र — लंबी मूंछें सहित।
प्र. शिल्पकार्य में किन आकारों (ठोस आकृतियों) का उपयोग किया गया?
उ. पुराने बक्से (घन और घनाभ) और बोतलें (बेलन) — इन रोजमर्रा की चीजों को फिर से इस्तेमाल कर के नए आकार और चीजें बनाई जा सकती हैं — इसे पुनर्चक्रण (recycling) कहते हैं।
प्र. जया अपने पास उपलब्ध आकारों के साथ एक रॉकेट बना रही है। एक रॉकेट बनाने के लिए आमतौर पर कौन-से आकार जोड़े जाते हैं, और कितनी संख्या में?
उ. जया के रॉकेट मॉडल में 2 घन (cubes), 4 घनाभ (cuboids), 1 शंकु (cone) और 1 बेलन (cylinder) जोड़े गए हैं — बेलन का लंबा बीच का हिस्सा और ऊपर नोक के लिए शंकु मुख्य रूप से रॉकेट जैसी आकृति बनाते हैं, जबकि घन व घनाभ आधार और अन्य हिस्सों में उपयोग होते हैं।
देविका का खिलौना इंजन
प्र. देविका के खिलौना इंजन में कौन-सी आकृतियां और कितनी संख्या में उपयोग हुई हैं?
उ. देविका के इंजन में 1 लाल बेलन (cylinder), 2 पीले शंकु (cones), 1 धूसर घनाभ (cuboid) और 1 नीला घन (cube) का उपयोग किया गया है — इस तरह अलग-अलग ठोस आकृतियों को जोड़कर एक खिलौना इंजन बनाया गया है।
अपनी कक्षा में आकृतियों की खोज
प्र. कक्षा में मौजूद विभिन्न वस्तुओं को उनकी आकृति के अनुसार कैसे वर्गीकृत करें?
उ. बच्चों को कक्षा में मौजूद वस्तुओं (जैसे पानी की बोतल — बेलन, डस्टर — घनाभ, गेंद — गोला, आइसक्रीम कोन जैसी वस्तु — शंकु) को देखकर एक तालिका में उनकी आकृति के अनुसार सूचीबद्ध करना है, फिर यह पहचानना है कि कक्षा में कौन-सी आकृति सबसे अधिक और कौन-सी सबसे कम बार दिखाई देती है।
आकृतियों के गुण — सीधी और वक्र सतहें
प्र. निम्न में से किन आकृतियों में कोई कोर (edge) नहीं है, किनमें केवल सपाट फलक (flat faces) हैं, किनमें केवल वक्र फलक (curved faces) हैं, और किनमें सपाट व वक्र दोनों फलक हैं?
उ. कोई कोर नहीं: गोला (sphere) — क्योंकि यह पूरी तरह गोल है। केवल सपाट फलक: घन (cube) और घनाभ (cuboid) — इनके सभी फलक समतल होते हैं। केवल वक्र फलक: गोला (sphere)। सपाट और वक्र दोनों फलक: शंकु (cone) और बेलन (cylinder) — इनमें एक या दो सपाट फलक (जैसे बेलन के दोनों वृत्ताकार सिरे) और एक वक्र सतह होती है।
पासे (Die) के विपरीत फलक
प्र. एक साधारण पासे (die) में आमने-सामने (विपरीत) फलकों पर बिंदुओं की संख्या क्या होती है, और उनमें क्या पैटर्न दिखता है?
उ. एक मानक पासे में 1 के सामने 6, 2 के सामने 5, और 3 के सामने 4 होता है। ध्यान दें कि हर जोड़ी के विपरीत फलकों के अंकों का योग हमेशा 7 होता है (1+6=7, 2+5=7, 3+4=7) — यही इस पासे की खास बनावट है।
घनों से मॉडल बनाना — सीड़ीनुमा घर
प्र. एक सीड़ीनुमा (सीड़ी, आधार, फर्श, खंभे, छत और छत की सजावट वाला) मॉडल बनाने के लिए कुल कितने घनों की आवश्यकता होती है?
उ. मॉडल के अलग-अलग हिस्सों के लिए घनों की संख्या इस प्रकार है — सीड़ी और आधार के लिए 9 घन, फर्श और खंभों के लिए 7 घन, और छत व उसकी सजावट के लिए 5 घन — इस तरह कुल 9 + 7 + 5 = 21 घन प्रयोग होते हैं। मॉडल आधार से शुरू करके ऊपर की ओर परत-दर-परत जोड़ते हुए बनाया जाता है।
3 घनों को जोड़ने के तरीके
प्र. 3 घनों को आपस में कितने अलग-अलग तरीकों से जोड़ा जा सकता है?
उ. 3 घनों को जोड़ने पर कई अलग-अलग आकृतियां बन सकती हैं — जैसे तीनों घनों को एक सीधी कतार में जोड़ना, या एक घन के ऊपर दूसरा और उसके बगल में तीसरा घन जोड़ना (L-आकार जैसी आकृति), या सीड़ीनुमा क्रम में जोड़ना। बच्चों को स्वयं घनों (या क्यूब ब्लॉक्स) से प्रयोग करके अलग-अलग संभव आकृतियां बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।
छह पासों (dice) से मॉडल बनाना
प्र. छह पासों (घनों) का उपयोग करके घनाभ, मीनार (टावर) और अपनी खुद की रचनात्मक आकृति कैसे बनाई जा सकती है?
उ. छह घनों को एक कतार में जोड़कर एक घनाभ (cuboid) जैसी आकृति बनाई जा सकती है; उन्हें एक के ऊपर एक करके ऊंचाई में जोड़ने पर एक मीनार (tower) बनती है; और बच्चे अपनी पसंद से घनों को अलग-अलग क्रम में जोड़कर अपनी खुद की रचनात्मक आकृति भी बना सकते हैं। यह गतिविधि बच्चों को यह समझने में मدदद करती है कि समान आकृतियों (घनों) को अलग-अलग तरीकों से जोड़कर भिन्न-भिन्न संरचनाएं बनाई जा सकती हैं।
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 3: दोहरा शतक — हल एवं व्याख्या
यह भाग “गणित मेला” (कक्षा 3, हिंदी मीडियम) के अध्याय 3 “दोहरा शतक” की कहानी, गतिविधियों और प्रश्नों के हल एवं व्याख्या देता है। इस अध्याय में संख्या प्रणाली के इतिहास और 200 तक की संख्याओं की समझ (अनुमान, बंडल-निर्माण, संख्या रेखा) को मजबूत किया जाता है। (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm103.pdf)
संख्याओं की कहानी
हजारों वर्ष पूर्व लोगों ने अपनी वस्तुओं का रिकॉर्ड रखने के लिए गुफाओं की दीवारों और पेड़ों की छाल पर संकेत बनाना शुरू किया। समय के साथ 5, 10, 20 और 60 का समूह बनाकर वस्तुओं का अभिलेखीकरण किया जाता रहा। बाद में प्राचीन भारतीयों ने केवल दस प्रतीकों — 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8 और 9 — का उपयोग करके किसी भी संख्या (चाहे वह कितनी भी बड़ी हो) को लिखने की विधि बनाई। इसी आविष्कार ने दूरदर्शन, संगणक (कंप्यूटर), मोबाइल फोन जैसे अनेक आविष्कारों को संभव बनाया। इसका सबसे महत्वपूर्ण भाग था “कुछ नहीं” के अर्थ में ‘शून्य’ (0) का प्रतीक — इसी संख्या ने संख्याएँ लिखने की पूरी प्रणाली को संभव बनाया।
अभ्यास: आइए खेलते हैं — साँप-सीड़ी का खेल
प्र. रिक्त स्थानों में संख्याएँ भरकर साँप-सीड़ी का खेल कैसे खेलें?
उ. पुस्तक में 1 से 100 तक की संख्याओं वाला एक साँप-सीड़ी का बोर्ड दिया गया है, जिसमें कुछ खानों में संख्याओं की जगह छोटे चिन्ह (चावल/चिड़ियां) बने हैं। खिलाड़ी को चारों ओर की संख्याओं के क्रम (आगे-पीछे की संख्याओं) को देखकर सही संख्या लिखनी होती है। जैसे 91 और 92 के बीच की खाली जगह में 90 आएगा।
प्र. खेल में साँप और सीड़ी का क्या काम होता है?
उ. जब खिलाड़ी का मोहरा साँप के मुंह वाले खाने पर पहुँचता है — जैसे 84 से 79 नंबर पर जाने वाला साँप — तो वह पीछे की छोटी संख्या वाले खाने पर उतर जाता है। जब खिलाड़ी का मोहरा सीड़ी के नीचे वाले खाने पर पहुँचता है — जैसे 12 से 29 नंबर पर जाने वाली सीड़ी — तो वह आगे की बड़ी संख्या वाले खाने पर चला जाता है। इस तरह बच्चे खेल-खेल में 100 तक की संख्याओं के आगे-पीछे क्रम से परिचित होते हैं।
वस्तुओं की अनुमानित गिनती
प्र. दहाई-दहाई (समूहों) में गिनने से बड़ी संख्या में वस्तुओं (जैसे संतरे, चूड़ियाँ, लड्डू, बर्फी, बिंदी, केले) को गिनना आसान क्यों हो जाता है?
उ. जब वस्तुएँ बहुत अधिक हों, तो एक-एक करके गिनने में समय लगता है और गलती होने की संभावना रहती है। इसलिए पुस्तक में वस्तुओं को पहले 10-10 के समूहों में बाँटा जाता है, फिर पूरे समूहों को गिनकर और बचे हुए एक-एक को जोड़कर कुल संख्या पता की जाती है। (चित्र-आधारित गतिविधि होने के कारण सटीक संख्याएँ मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
अभ्यास: 100 बनाना
प्र. दो संख्याओं को जोड़कर 100 कैसे बनाया जा सकता है? उदाहरण दीजिए।
उ. पुस्तक में रिक्त स्थान भरने के उदाहरण दिए गए हैं — 80 और 20 मिलकर 100 बनाते हैं (80+20=100); 55 और 45 मिलकर 100 बनाते हैं (55+45=100)। इसी तरह अन्य जोड़े भी बनाए जा सकते हैं, जैसे 60+40=100, 75+25=100, 15+85=100, 10+90=100 — माचिस की तीलियों के बंडलों से भी इन जोड़ों को दिखाया जा सकता है।
माचिस की तीलियाँ और बीजों का अनुमान
प्र. बिना गिने माचिस की डिबिया में तीलियों की या मुट्ठी भर बीजों की संख्या का अनुमान कैसे लगाएं, और फिर उसे सत्यापित (verify) कैसे करें?
उ. पहले देखकर एक अनुमान लगाया जाता है, फिर तीलियों को वास्तव में गिनकर सही संख्या पता की जाती है और अनुमान से तुलना की जाती है। इसके बाद यह हिसाब लगाया जाता है कि लगभग 100 तीलियाँ जमा करने के लिए कितनी डिबियाँ (बॉक्स) चाहिए होंगी — यह डिबिया में तीलियों की वास्तविक संख्या पर निर्भर करता है। इसी तरह मुट्ठी में बीजों का अनुमान लगाकर, फिर गिनकर सत्यापित किया जाता है कि लगभग 100 बीज जमा करने के लिए कितनी मुट्ठियाँ चाहिए होंगी। यह गतिविधि बच्चों में अनुमान (estimation) लगाने और उसे सत्यापित करने का कौशल विकसित करती है।
100 से आगे की संख्याएँ
प्र. 103 से 109 तक की संख्याओं को शब्दों में कैसे लिखा जाता है?
उ. 103 = एक सौ तीन, 104 = एक सौ चार, 105 = एक सौ पाँच, 106 = एक सौ छह, 107 = एक सौ सात, 108 = एक सौ आठ, 109 = एक सौ नौ। इसी पैटर्न को आगे बढ़ाकर 200 तक की सभी संख्याओं को शब्दों में लिखा जा सकता है — “एक सौ” के बाद इकाई/दहाई अंक का नाम जोड़ दिया जाता है।
बंडल और छुट्टी तीलियाँ (Bundles and Loose Sticks)
प्र. किसी संख्या को दस-दस तीलियों के बंडल और बची हुई अकेली (छुट्टी) तीलियों के रूप में कैसे दिखाया जाता है?
उ. उदाहरण के लिए, यदि किसी संख्या को 12 बंडल (प्रत्येक में 10 तीलियाँ) और 5 छुट्टी तीलियों से दिखाया जाए, तो कुल संख्या = 12 × 10 + 5 = 125 होगी। इसी तरह बंडलों और छुट्टी तीलियों की गिनती करके 200 तक की किसी भी संख्या को पहचाना जा सकता है — यह सैकड़ा, दहाई और इकाई की समझ को मज़बूत करता है।
संख्या रेखा पर संख्याएँ अंकित करना
प्र. संख्या रेखा (number line) पर 125, 112, 149 और 137 जैसी संख्याओं को कैसे चिह्नित करें?
उ. संख्या रेखा पर पहले से अंकित निकटतम संख्याओं (जैसे 100, 110, 120, 130… के निशान) की सहायता से बीच की स्थिति का अनुमान लगाकर तीर/चिह्न लगाया जाता है — जैसे 125, 120 और 130 के ठीक बीच में आएगा; 112, 110 के ठीक बाद और 120 से पहले आएगा। इस तरह बच्चे संख्या रेखा पर संख्याओं का सापेक्ष स्थान पहचानना सीखते हैं।
उछल-कूद (Jumping) का खेल
प्र. यदि संख्या रेखा पर 5-5 की छलांग लगाई जाए, तो क्रम में कौन-सी संख्याएँ आएँगी? और 20-20 की छलांग में?
उ. 5-5 की छलांग में — 0, 5, 10, 15, 20, 25… इस तरह हर छलांग में पिछली संख्या में 5 जुड़ता जाता है। 20-20 की छलांग में — 0, 20, 40, 60, 80, 100… हर छलांग में पिछली संख्या में 20 जुड़ता जाता है। दोनों ही स्थितियों में, संख्या रेखा पर बराबर दूरी की छलांगें बराबर मात्रा में वृद्धि दिखाती हैं।
प्र. 125 को माचिस की तीलियों के बंडल से, 145 को गिनलड़ी (अबेकस) से, और 170 को संख्या रेखा पर — इन तीन अलग-अलग तरीकों से कैसे दिखाया जा सकता है?
उ. 125 = 12 बंडल (120) + 5 छुट्टी तीलियाँ; 145 को गिनलड़ी पर 1 सैकड़े के मनके, 4 दहाई के मनके और 5 इकाई के मनकों से दिखाया जा सकता है; 170 को संख्या रेखा पर 100 से 7 पूरी दस-दस की छलांगें लगाकर (100+70=170) चिह्नित किया जा सकता है। इस तरह एक ही संख्या को कई अलग-अलग प्रतिनिधित्व (representations) से समझा जा सकता है।
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 4: नानी माँ के साथ छुट्टियाँ — हल एवं व्याख्या
यह भाग गणित मेला (कक्षा 3, हिंदी मीडियम) के अध्याय 4 नानी माँ के साथ छुट्टियाँ की कहानी, गतिविधियों और प्रश्नों के हल एवं व्याख्या देता है। इस अध्याय में घटाने (subtraction) की समझ को एक मजेदार जादुई खेल के रूप में सिखाया जाता है। (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm104.pdf)
कहानी: नानी माँ का जादुई खेल
चिराग और नंदिनी अपनी नानी माँ से बहुत प्यार करते हैं। नानी माँ उन्हें एक जादुई खेल दिखाती हैं — वे कहती हैं, अपने रुमाल से कुछ कंचे छिपा लो और मैं आपको बता दूंगी कि आपने कितने कंचे छुपाए हैं। नानी माँ रुमाल के नीचे छिपे कंचों की संख्या सही-सही बता देती हैं, जैसे एक उदाहरण में — तुम्हारे रुमाल के नीचे 4 कंचे हैं।
अभ्यास: जादु का राज़
प्र. नानी माँ बिना कंचे गिने यह कैसे बता देती हैं कि रुमाल के नीचे कितने कंचे छिपे हैं?
उ. यह जादू नहीं, बल्कि घटाने का गणित है। नानी माँ को पहले से पता होता है कि कुल मिलाकर कितने कंचे थे। जब वह देखती हैं कि मेज पर (रुमाल के बाहर) कितने कंचे बचे हैं, तो वह कुल में से बचे कंचे घटाकर बता देती हैं कि रुमाल के नीचे कितने हैं। जैसे अगर कुल 20 कंचे थे और मेज पर 16 दिखे, तो रुमाल के नीचे 20 − 16 = 4 कंचे होंगे।
प्र. इस जादुई खेल को स्वयं खेलने के लिए क्या जानना जरूरी है?
उ. खेल शुरू करने से पहले कुल कंचों की संख्या जानना जरूरी है। फिर मेज पर दिखने वाले कंचों को गिनकर, उसे कुल संख्या में से घटा देने पर छिपे हुए कंचों की संख्या मिल जाती है।
पुस्तकों और टिकटों का हिसाब
प्र. चिराग को 9 कहानी की किताबें और नंदिनी को 7 पहेली की किताबें मिलीं। दोनों के पास मिलाकर कुल कितनी किताबें हुईं?
उ. 9 + 7 = 16 किताबें।
प्र. नंदिनी और चिराग के पास कुल 22 डाक टिकट थे। उनके भाई ने उन्हें 30 और टिकट दिए। अब उनके पास कुल कितने टिकट हो गए?
उ. 22 + 30 = 52 टिकट।
प्र. उनके पास अब 52 टिकट हैं, लेकिन उन्हें अपने संग्रह के लिए कुल 75 टिकट चाहिए। उन्हें कितने और टिकटों की आवश्यकता है?
उ. 75 − 52 = 23 और टिकट चाहिए।
प्र. उनके 52 टिकटों में से 37 टिकट प्रसिद्ध व्यक्तियों (famous persons) के हैं। बाकी कितने टिकट स्मारकों (monuments) के हैं?
उ. 52 − 37 = 15 टिकट स्मारकों के हैं।
दहाई ढाँचे (Tens Frame) से जोड़ और घटाव
प्र. दहाई ढाँचे की सहायता से 6+8, 5+10, 9−6 और 18−9 का हल कैसे निकालें?
उ. 6 + 8 = 14; 5 + 10 = 15; 9 − 6 = 3; 18 − 9 = 9। दहाई ढाँचे में मनके भरकर और हटाकर बच्चे इन क्रियाओं को दृश्य रूप में समझ सकते हैं।
गिनलड़ी (Abacus) पर जोड़-घटाव
प्र. गिनलड़ी पर 34+6, 23+12, 33−5 और 42−15 का हल क्या होगा?
उ. 34 + 6 = 40; 23 + 12 = 35; 33 − 5 = 28; 42 − 15 = 27।
मेंढक की छलांगें (Frog Jumps)
प्र. यदि एक मेंढक संख्या 7 से शुरू करके हर बार 10 मनकों की छलांग आगे लगाए, तो वह क्रमशः किन-किन संख्याओं पर पहुँचेगा?
उ. 7 से शुरू करके +10 की छलांगें — 17, 27, 37, 47, 57, 67, 77, 87, 97। हर छलांग में इकाई अंक (7) वही रहता है, केवल दहाई का अंक 1-1 बड़ता जाता है।
प्र. यदि एक टिड्डा (grasshopper) संख्या 95 से शुरू करके हर बार 10 पीछे की छलांग लगाए, तो वह किन संख्याओं से गुजरेगा?
उ. 95 से −10 की छलांगें — 85, 75, 65, 55, 45, 35, 25, 15, 5। हर छलांग में इकाई अंक (5) वही रहता है, दहाई का अंक 1-1 घटता जाता है।
पत्तों के नीचे छिपी चींटियाँ (घटाव द्वारा)
प्र. यदि कुल 25 चींटियों में से पत्ता उठाने पर 4 चींटियाँ बाहर दिखें, तो पत्ते के नीचे कितनी चींटियाँ छिपी हैं? इसी तरह 66 में से 51 दिखें, और 83 में से 73 दिखें तो?
उ. 25 − 4 = 21 चींटियाँ छिपी हैं; 66 − 51 = 15 चींटियाँ छिपी हैं; 83 − 73 = 10 चींटियाँ छिपी हैं — यह वही “नानी माँ के जादु” वाला घटाव सिद्धांत है, जिसमें कुल संख्या में से दिखने वाली संख्या घटाकर छिपी हुई संख्या पता की जाती है।
मूली और सब्ज़ियों का हिसाब
प्र. नानी माँ ने 25 लाल और 36 सफेद मूलियाँ उखाड़ीं। कुल कितनी मूलियाँ हुईं?
उ. 25 + 36 = 61 मूलियाँ।
प्र. एक टोकरी में कुल 100 सब्ज़ियाँ (टमाटर और गाजर) हैं। यदि 65 टमाटर हैं, तो गाजर कितनी हैं?
उ. 100 − 65 = 35 गाजर।
प्र. नंदिनी ने 85 सेब और चिराग ने 67 सेब इकट्ठे किए। किसने कितने ज्यादा सेब इकट्ठे किए?
उ. 85 − 67 = 18, अर्थात नंदिनी ने चिराग से 18 सेब अधिक इकट्ठे किए।
अतिरिक्त शब्द-समस्याएँ (Word Problems)
प्र. बबली ने सोमवार को 34 और मंगलवार को 45 किताबें बेचीं। कुल कितनी किताबें बिकीं, और मंगलवार को सोमवार से कितनी अधिक बिकीं?
उ. कुल = 34 + 45 = 79 किताबें; मंगलवार को सोमवार से 45 − 34 = 11 किताबें अधिक बिकीं।
प्र. रमा ने पहले दिन 39 वड़े और दूसरे दिन पहले दिन से 12 वड़े अधिक बेचे। दूसरे दिन कुल कितने वड़े बिके?
उ. 39 + 12 = 51 वड़े। (कुछ द्वितीयक स्रोतों में यह संख्या थोड़े भिन्न रूप में भी दर्ज हुई है — सटीक प्रश्न-पाठ के लिए मूल पाठ्यपुस्तक से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
प्र. गेहूँ के 56 पौधों में से अब केवल 29 पौधे बचे हैं। कितने पौधे सूख गए?
उ. 56 − 29 = 27 पौधे सूख गए।
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 5: आकृतियों का आनंद — हल एवं व्याख्या
यह भाग गणित मेला (कक्षा 3, हिंदी मीडियम) के अध्याय 5 आकृतियों के साथ आनंद की कहानी, गतिविधियों और प्रश्नों के हल एवं व्याख्या देता है। इस अध्याय में रंगोली, आयत, वर्ग, त्रिभुज और वृत्त जैसी समतल (2D) आकृतियों की पहचान और उनके गुण सिखाए जाते हैं। (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm105.pdf)
कहानी: माँ की रंगोली
दो बच्चे अपनी माँ की बनाई रंगोली जैसी रंगोली खुद बनाने की कोशिश करते हैं, पर उनकी रंगोली वैसी नहीं बन पाती। एक बच्चा कहता है — कुछ तो गड़बड़ है! हमारी रंगोली मेरी माँ की रंगोली जैसी नहीं है। माँ ने बिंदुओं और आकारों (वृत्त, वर्ग/हीरा, त्रिभुज) के साथ एक सुंदर समसामित रंगोली बनाई थी, जिसमें नीले वृत्त, नारंगी वर्ग और हरे त्रिभुज एक निश्चित क्रम में दोहराए गए थे।
अभ्यास: बिंदुओं पर रंगोली बनाना
प्र. बच्चों की रंगोली माँ की रंगोली जैसी क्यों नहीं बन पाई?
उ. माँ की रंगोली में हर आकार (वृत्त, वर्ग, त्रिभुज) एक निश्चित स्थान और संख्या में था, और पूरी रंगोली दोनों ओर से एक-समान (symmetric) थी। बच्चों ने बिंदुओं की सही संख्या या सही क्रम न जोड़े होंगे, जिससे आकार आगे-पीछे हो गए होंगे और रंगोली असमित (asymmetric) बन गई हो।
प्र. बिंदुओं वाले ग्रिड पर रंगोली बनाने से माँ की रंगोली जैसी समसामित आकृति बनाना क्यों आसान हो जाता है?
उ. बिंदु ग्रिड (बिंदुओं की पंक्ति) एक निश्चित दूरी पर एक समान रूप से फैले होते हैं, इसलिए इनपर रेखाएं/आकृतियाँ खींचते समय बच्चे आसानी से समान दूरी और समान आकार बनाए रख पाते हैं, जिससे पूरी रंगोली समसामित बनती है।
आकृतियों को पहचानना — सीधी और वक्र रेखाएँ
प्र. रंगोली में सीधी रेखाओं (straight lines) और वक्र रेखाओं (curved lines) से बनी कितनी आकृतियाँ हैं?
उ. पुस्तक के चित्र के अनुसार रंगोली में वक्र रेखाओं से बनी 4 आकृतियाँ और सीधी रेखाओं से बनी 10 आकृतियाँ हैं। (चित्र-आधारित प्रश्न होने के कारण सटीक संख्या मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
आयत (Rectangle) की पहचान और गुण
प्र. आयत की क्या पहचान होती है, और दिए गए चित्र में कितने आयत बनते हैं?
उ. आयत में 4 भुजाएँ और 4 कोने (कोण) होते हैं, जिनमें सामने वाली दोनों भुजाओं के जोड़े आपस में बराबर लंबाई के होते हैं और सभी चारों कोने समकोण (90°) होते हैं। किसी चित्र में बने आयतों की गिनती करते समय बड़े आयत के भीतर बनी छोटी रेखाओं से बनने वाले सभी संभावित आयतों (छोटे व बड़े दोनों) को ध्यान से गिनना चाहिए।
प्र. दी गई एक छोटी आयत के चारों ओर 3 और बड़ी आयतें कैसे बनाई जा सकती हैं?
उ. मूल आयत की चारों भुजाओं को समान अनुपात में बाहर की ओर बड़ाकर एक के बाद एक बड़ी आयतें खींची जा सकती हैं — जैसे नेस्टेड (एक के अंदर एक) आयतों की श्रृंखला बनती है, जहाँ हर अगली आयत पिछली से बड़ी होती है लेकिन उसी केंद्र बिंदु के इर्द-गिर्द बनी होती है।
वर्ग (Square) की गतिविधियाँ
प्र. माचिस की कितनी तीलियों से एक वर्ग बनता है, और 12 तीलियों से कितने वर्ग बनाए जा सकते हैं?
उ. एक वर्ग बनाने के लिए 4 बराबर लंबाई की तीलियाँ चाहिए (हर भुजा के लिए एक)। यदि तीलियाँ साझा (shared) की जाएं (जैसे एक बड़े वर्ग को छोटे-छोटे वर्गों में बाँटा जाए), तो 12 तीलियों से 4 बराबर छोटे वर्ग बनाए जा सकते हैं (जैसे 2×2 की ग्रिड में, जिसमें कुल 12 तीलियाँ भीतरी और बाहरी रेखाएँ बनाती हैं)।
प्र. 2, 3 या 4 वर्गों को जोड़कर कौन-सी नई आकृतियाँ बनाई जा सकती हैं?
उ. 2 वर्गों को जोड़ने पर एक आयत बनती है; 3 या 4 वर्गों को अलग-अलग क्रम में जोड़ने पर L-आकार, T-आकार, या बड़ा वर्ग/आयत जैसी कई अलग-अलग आकृतियाँ बन सकती हैं — यह इस बात पर निर्भर करता है कि वर्गों को किस क्रम और दिशा में जोड़ा जाता है।
वर्ग के कोनों (Square Corners) की पहचान
प्र. किसी आकृति में समकोण (right angle) की पहचान कैसे करें, और 12 माचिस की तीलियों से 4 वर्ग कैसे बनाए जा सकते हैं?
उ. समकोण की पहचान के लिए एक कागज़ को दो बार मोड़कर बना समकोण-परीक्षक किसी भी कोने पर रखकर देखा जाता है — यदि दोनों भुजाएँ बिना किसी अंतराल के तेस्टर की भुजाओं से बिल्कुल मेल खाती हैं, तो वह समकोण है। 12 तीलियों से 4 बराबर वर्ग एक 2×2 की ग्रिड बनाकर प्राप्त किए जा सकते हैं।
त्रिभुज (Triangle) से जुड़ी गतिविधियाँ
प्र. दी गई दो रंगोली आकृतियों में से प्रत्येक में कुल कितने त्रिभुज हैं?
उ. पुस्तक के अनुसार दोनों रंगोली आकृतियों में से प्रत्येक में 16 त्रिभुज पाए जाते हैं (छोटे और बड़े दोनों प्रकार के त्रिभुजों को मिलाकर)। (चित्र-आधारित प्रश्न होने के कारण सटीक संख्या मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
प्र. एक वृत्त पर बने बिंदुओं को मिलाकर कितने त्रिभुज बनाए जा सकते हैं?
उ. पुस्तक के अनुसार वृत्त पर दिए गए बिंदुओं को अलग-अलग तरीकों से मिलाकर कुल 8 त्रिभुज बनाए जा सकते हैं।
प्र. माचिस की तीलियों को हिलाकर 1 त्रिभुज को 2 त्रिभुजों में कैसे बदला जा सकता है?
उ. एक बड़े त्रिभुज की किसी एक भुजा के बीचोंबीच से एक नई तीली जोड़कर उसके भीतरी शीर्ष बिंदु तक खींची जाए, तो वह बड़ा त्रिभुज दो छोटे त्रिभुजों में बँट जाता है — इस तरह तीलियों को पुनः व्यवस्थित करके त्रिभुजों की संख्या बदली जा सकती है।
वृत्त (Circle) से जुड़ी गतिविधियाँ
प्र. अपने आस-पास की किन गोल (वृत्ताकार) वस्तुओं के नाम बताए जा सकते हैं, और वृत्त की तुलना आयत से कैसे की जाती है?
उ. रोज़मर्रा की गोल वस्तुओं के उदाहरण — गेंद, चूड़ी, अंगूठी, थाली, बोतल का ढक्कन, घड़ी का डायल। वृत्त और आयत की तुलना में — वृत्त की कोई सीधी भुजा या कोना नहीं होता और यह पूरी तरह वक्र रेखा से घिरा होता है, जबकि आयत की 4 सीधी भुजाएँ और 4 समकोण होते हैं। बोतल के ढक्कन, चूड़ियों जैसी वस्तुओं की रूपरेखा कागड़ पर खींचकर (tracing) भी वृत्त बनाए जा सकते हैं।
आकृतियों की तुलना और विषम को पहचानना (Odd One Out)
प्र. दी गई आकृतियों के समूह में से “विषम” (odd one out) आकृति कैसे पहचानें?
उ. समूह की अधिकांश आकृतियों में जो समान गुण (जैसे सीधी भुजाएँ, समान कोनों की संख्या, या समान आकार-प्रकार) पाया जाता है, उससे अलग गुण वाली आकृति को “विषम” कहा जाता है — जैसे यदि बाकी सभी आकृतियाँ सीधी भुजाओं वाली हों और एक वृत्त हो, तो वृत्त “विषम” होगा क्योंकि उसकी कोई सीधी भुजा नहीं है। हर बार अपने चुनाव का कारण स्पष्ट रूप से बताना ज़रूरी है।
टेंग्राम (Tangram) और सीमा-डिज़ाइन (Border Design)
प्र. टेंग्राम के टुकड़ों से कौन-सी आकृतियाँ बनाई जा सकती हैं, और सीमा-डिज़ाइन (border pattern) कैसे पूरा करें?
उ. टेंग्राम में 7 अलग-अलग ज्यामितीय टुकड़े (त्रिभुज, वर्ग, समांतर चतुर्भुज) होते हैं, जिन्हें अलग-अलग क्रम में जोड़कर पशु-पक्षी, घर, नाव जैसी अनेक आकृतियाँ बनाई जा सकती हैं। सीमा-डिज़ाइन में दिए गए पैटर्न (सीधी और वक्र रेखाओं का दोहराव) को ध्यान से देखकर उसी क्रम को आगे बड़ाया जाता है।
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 6: सैकड़ों का घर-1 — हल एवं व्याख्या
यह भाग गणित मेला (कक्षा 3, हिंदी मीडियम) के अध्याय 6 सैकड़ों का घर-1 की गतिविधियों और प्रश्नों के हल एवं व्याख्या देता है। इस अध्याय में बड़ी संख्याओं (200-300 तक) को दस के समूहों में गिनना, संख्या रेखा पर अंकित करना और संख्याओं की तुलना सिखाई जाती है। (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm106.pdf)
कहानी: मेले में अज्जी, तेजी और जोजो
अज्जी, तेजी और जोजो मेले में आए हैं। वे तोरणों (द्वार-सजावट) में लगी झंडियों और चूड़ियों जैसी वस्तुओं की संख्या का अनुमान लगाते हैं, क्योंकि वह एक सौ से भी अधिक हैं। जब गिनती बहुत बड़ी होती है, तो एक-एक करके गिनने की बजाय 10-10 और 100-100 के समूहों में गिनना ज्यादा आसान होता है।
अभ्यास: चूड़ियों और टॉफीयों की गिनती
प्र. तेजी चूड़ियों को 10-10, 100-100 के समूहों में गिनती है। कुल चूड़ियाँ कितनी हैं?
उ. पुस्तक में दिखाया गया है कि तेजी इस तरह गिनती है: “1, 2, 3… 10, 20, 30… 100, 110… 200, 210… 270, 280″। इस तरह पहले 1 से 10 तक एक-एक करके, फिर 10 के समूहों में 100 तक, फिर 100 के समूहों में आगे गिनकर कुल चूड़ियाँ = 200 और 80 अर्थात 280 पाई जाती हैं।
प्र. डिब्बों में टॉफीयाँ गिनने पर कुल 298 निकलीं। जोजो के हाथ में 2 और टॉफीयाँ थीं। कुल मिलाकर कितनी टॉफीयाँ हुईं?
उ. पुस्तक में दिखाया गया है कि संख्या को एक-एक करके आगे बड़ाते जाएं — “298 और एक मिलकर हुए 299 तथा 299 और एक मिलकर हुए 300″। इस तरह 298 + 2 = 300 टॉफीयाँ कुल मिलकर हुईं।
प्र. टॉफीयों की गिनती में 190 के बाद 190 से 199 तक एक-एक करके और फिर सीधे 200 पर क्यों छलांग लगाई?
उ. जब इकाई अंक 9 तक पहुँच जाती है (जैसे 199), तो अगली संख्या में इकाई फिर से 0 से शुरू होती है और दहाई का अंक बड़कर सैकड़े का अंक शुरू हो जाता है — इसीलिए 199 के तुरंत बाद 200 आता है।
त्रिकोणीय तोरण और चूड़ियों की गिनती में तुलना
प्र. यदि तोरण में 250 त्रिकोण हैं, तो 300 तक पहुँचने के लिए और कितने त्रिकोण चाहिए? और यदि चूड़ियाँ 280 हैं, तो 300 से कितनी कम हैं?
उ. 300 − 250 = 50 त्रिकोण और चाहिए; 300 − 280 = चूड़ियाँ 300 से 20 कम हैं। दोनों में तुलना करने पर, त्रिकोण (250) चूड़ियों (280) से कम हैं, अर्थात चूड़ियाँ अधिक हैं।
संख्या स्लाइडर — बड़ाना और घटाना
प्र. संख्या स्लाइडर पर निम्नलिखित परिवर्तन करने पर कौन-सी संख्या मिलेगी — (क) 285+1 (ख) 147+10 (ग) 367−2 (घ) 289−10 (ङ) 290+20?
उ. (क) 285 + 1 = 286; (ख) 147 + 10 = 157; (ग) 367 − 2 = 365; (घ) 289 − 10 = 279; (ङ) 290 + 20 = 310। इस गतिविधि से बच्चे यह समझते हैं कि इकाई में 1 जोड़ने/घटाने से इकाई अंक बदलता है, जबकि दहाई में 10 जोड़ने/घटाने से केवल दहाई का अंक बदलता है।
संख्या रेखा पर दूरी और तुलना
प्र. 387 से 400 तक की दूरी कितनी है? और 393 व 400 में से कौन-सी संख्या बड़ी है?
उ. 400 − 387 = 13, अर्थात 387 से 400 तक 13 की दूरी है। 393 और 400 की तुलना में 400 बड़ी संख्या है, क्योंकि 400, 393 से 7 अधिक है।
मिठाई की दुकान का हिसाब
प्र. यदि हर ट्रे में 100 मैसूर पाक हों और कुल 445 मैसूर पाक हों, तो कितनी ट्रे पूरी भरी होंगी और शेष मिठाई कितनी बचेगी? यदि लड्डू के डिब्बे में 469 लड्डू हों और एक डिब्बा भरने के लिए 500 चाहिए, तो कितने और लड्डू चाहिए?
उ. 445 मैसूर पाक में से 4 ट्रे पूरी भरी होंगी (4×100=400) और 45 मैसूर पाक शेष बचेंगे। 500 − 469 = 31 और लड्डू चाहिए ताकि कुल 500 (5 डिब्बे) पूरे हो जाएं।
अपार्टमेंट के घरों की संख्या में पैटर्न
प्र. डाकिए को घरों 209, 228, 242, 258, 267, 276, 290, 315, 346, 367, 389 और 395 पर डाक पहुँचानी है — इन घर संख्याओं में क्या तुलनात्मक पैटर्न देखा जा सकता है?
उ. ये सभी संख्याएँ पहले से ही आरोही क्रम में हैं और 200 से 400 के बीच फैली हुई हैं। बच्चों को इन्हें सैकड़ा-दहाई-इकाई की समझ के आधार पर व्यवस्थित करने का अभ्यास कराया जाता है — यह सैकड़ा-दहाई-इकाई की समझ को घर के पते जैसे वास्तविक जीवन के उदाहरण से जोड़ता है।
200 और 300 के बीच अंक 5 वाली संख्याएँ
प्र. 200 और 300 के बीच इकाई के स्थान पर अंक 5 वाली सभी संख्याएँ कौन-सी हैं?
उ. 205, 215, 225, 235, 245, 255, 265, 275, 285, 295 — कुल 10 संख्याएँ, जो 10-10 के अंतराल पर आती हैं।
संख्याओं की तुलना — छोटी और बड़ी संख्या पहचानना
प्र. 374, 473, 347 और 437 में से सबसे छोटी संख्या कौन-सी है? और 239, 123, 321, 456 में से?
उ. 374, 473, 347, 437 में सबसे छोटी संख्या 347 है (सैकड़े के अंक की तुलना करने पर 3 सबसे छोटा है)। 239, 123, 321, 456 में सबसे छोटी संख्या 123 है।
प्र. 466, 437, 439, 447, 483 में से सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है? और 464, 387, 123, 256, 348 में से?
उ. 466, 437, 439, 447, 483 में सबसे बड़ी संख्या 483 है। 464, 387, 123, 256, 348 में सबसे बड़ी संख्या 464 है।
अंकों 3, 2, 4 से 3-अंकीय संख्याएँ बनाना
प्र. अंकों 3, 2 और 4 का एक-एक बार उपयोग करके सबसे बड़ी और सबसे छोटी 3-अंकीय संख्या क्या बनेगी?
उ. सबसे बड़ी संख्या (अंकों को घटते क्रम में रखने पर) = 432; सबसे छोटी संख्या (अंकों को बड़ते क्रम में रखने पर) = 234।
प्र. यदि अंकों को दोहराने की अनुमति हो, तो सबसे बड़ी और सबसे छोटी 3-अंकीय संख्या क्या होगी?
उ. सबसे बड़ी संख्या = 444 (सबसे बड़े अंक 4 को तीन बार दोहराकर); सबसे छोटी संख्या = 222 (सबसे छोटे अंक 2 को तीन बार दोहराकर)।
संख्याओं को क्रम में सजाना
प्र. 456, 389, 207, 99 और 110 को सबसे छोटी से सबसे बड़ी संख्या के क्रम में सजाइए।
उ. 99, 110, 207, 389, 456।
प्र. 67, 376, 294, 249 और 494 को सबसे बड़ी से सबसे छोटी संख्या के क्रम में सजाइए।
उ. 494, 376, 294, 249, 67।
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 7: रक्षाबंधन — हल एवं व्याख्या
यह भाग गणित मेला (कक्षा 3, हिंदी मीडियम) के अध्याय 7 रक्षाबंधन की कहानी, गतिविधियों और प्रश्नों के हल एवं व्याख्या देता है। इस अध्याय में राखी बनाने और अन्य रोज़मर्रा की गतिविधियों के माध्यम से बार-बार जोड़ने से गुणा (multiplication) और बराबर बाँटने से भाग (division) सिखाया जाता है, साथ ही पहाड़े (multiplication tables) बनाना भी सिखाया जाता है। (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm107.pdf)
कहानी: गोपाल और धारा का रक्षाबंधन
कल गोपाल का प्रिय पर्व है। गोपाल और धारा बहुत उत्साहित हैं — उनकी प्यारी आत्या (बुआजी, पिता की बहन) आज उनसे मिलने आ रही हैं। उन्होंने घर की साफ-सफाई और सजावट कर ली है। धारा राखी बनाने की तैयारी में जुटी है।
अभ्यास: राखियां बनाने में गुणा
प्र. प्रत्येक राखी में 1 पुष्प का उपयोग होता है। धारा को 5 राखियाँ बनानी हैं। 5 राखियों के लिए उसे कितने पुष्प चाहिए?
उ. 1+1+1+1+1 = 5, या “5 बार 1” या 5 × 1 = 5 पुष्प।
प्र. प्रत्येक राखी में 2 धागों का उपयोग होता है। 5 राखियों के लिए उसे कितने धागे चाहिए?
उ. 2+2+2+2+2 = 10, या “5 बार 2” या 5 × 2 = 10 धागे।
प्र. प्रत्येक राखी में 4 मोतियों का उपयोग होता है। 5 राखियों के लिए उसे कितनी मोतियाँ चाहिए?
उ. इसी तरह — 4+4+4+4+4 = 20, या “5 बार 4” या 5 × 4 = 20 मोतियाँ। इस तरह राखियों की सामग्री निकालते समय बच्चों को बार-बार जोड़ने से गुणा करने का अभ्यास होता है।
गोपाल के घर में वस्तुओं की गिनती
प्र. गोपाल के घर के चित्र में पत्तों, गिलासों, अनारों और फूलों की गिनती कैसे की जाती है?
उ. चित्र में दी गई वस्तुओं को समूहों में गिना जाता है — पुस्तक के अनुसार पत्ते 24, गिलास 30, अनार 24 और फूल 20 हैं। (चित्र-आधारित प्रश्न होने के कारण सटीक संख्या मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
जगन्नाथ मिठाई की दुकान — बराबर बाँटना (भाग)
प्र. 18 लड्डुओं को 9 दोस्तों के बीच बराबर-बराबर बाँटा जाए, तो प्रत्येक को कितने लड्डू मिलेंगे?
उ. 18 ÷ 9 = 2 लड्डू प्रति व्यक्ति।
प्र. 15 पेड़ों को 5 व्यक्तियों में बराबर बाँटा जाए, तो प्रत्येक को कितने पेड़े मिलेंगे?
उ. 15 ÷ 5 = 3 पेड़े प्रति व्यक्ति।
आइए सोचें — भाग की समस्याएँ
प्र. एक साइकिल में 2 पहिए लगते हैं। 12 पहियों से कितनी साइकिलें बन सकती हैं?
उ. 12 ÷ 2 = 6 साइकिलें।
प्र. यदि प्रत्येक व्यक्ति को 4 जलेबी चाहिए और परिवार में 9 सदस्य हैं, तो क्या 24 जलेबियाँ पर्याप्त हैं? कुल कितनी चाहिए, और कितनी और चाहिए?
उ. कुल आवश्यकता = 9 × 4 = 36 जलेबियाँ। 24 जलेबियाँ पर्याप्त नहीं हैं; 36 − 24 = 12 और जलेबियाँ चाहिए।
बगीचे के पौधे — गुणन का क्रमविनिमेय (Commutative) गुण
प्र. धारा 8 × 6 और गोपाल 6 × 8 निकालते हैं। दोनों का उत्तर क्या है, और क्या दोनों सही हैं?
उ. 8 × 6 = 48 और 6 × 8 = 48 — दोनों का उत्तर 48 ही है, इसलिए दोनों बच्चे सही हैं। यह दिखाता है कि गुणन में संख्याओं का क्रम बदलने से गुणनफल नहीं बदलता (क्रमविनिमेय गुण / commutative property)।
उछल-कूद (Skip Jumping) का खेल
प्र. यदि 0 से शुरू करके 3-3 की छलांग लगाई जाए, तो अगली कौन-सी संख्याएँ आएंगी?
उ. 0, 3, 6, 9, 12, 15, 18… इस पैटर्न में हर संख्या पिछली संख्या से 3 अधिक है — 9 के बाद अगली संख्याएँ 12, 15, 18 होंगी।
प्र. 6-6 की छलांग से पहाड़ा (times-6 table) कैसे बनाया जाता है?
उ. 0 से शुरू करके 6-6 जोड़ते हुए — 0, 6, 12, 18, 24, 30, 36, 42, 48, 54, 60 — इस तरह 6 × 1 से 6 × 10 तक का पूरा पहाड़ा संख्या रेखा पर छलांगों से बनाया जा सकता है।
तीलियों से पहाड़े बनाने की मजेदार विधि
प्र. तीलियों (sticks) के गुच्छों से 5 का पहाड़ा कैसे बनाएँ?
उ. हर गुच्छे में 5 तीलियाँ रखकर, गुच्छों की संख्या बड़ाते हुए — 1 गुच्छा = 5, 2 गुच्छे = 10, 3 गुच्छे = 15, और इसी तरह 10 गुच्छों तक (= 50) — 5 का पूरा पहाड़ा दृश्य रूप में बनाया जा सकता है। इसी विधि से 6 से 10 तक के पहाड़े भी बनाए जा सकते हैं।
पहाड़ों में पैटर्न पहचानना
प्र. 5 के पहाड़े में गुणनफलों के इकाई अंक में क्या पैटर्न दिखता है?
उ. 5 के पहाड़े (5, 10, 15, 20, 25, 30…) में इकाई अंक हमेशा या तो 0 या 5 होता है — सम संख्या से गुणा करने पर इकाई अंक 0 आता है, और विषम संख्या से गुणा करने पर इकाई अंक 5 आता है। इसी पैटर्न से बिना गुणा किए 18×5, 23×5 जैसी संख्याओं का इकाई अंक बताया जा सकता है — 18 सम है तो 18×5 का इकाई अंक 0 होगा; 23 विषम है तो 23×5 का इकाई अंक 5 होगा।
प्र. 2 के पहाड़े और 3 के पहाड़े को जोड़ने पर कौन-सा पहाड़ा मिलता है?
उ. 2 के पहाड़े (2,4,6,8,10…) और 3 के पहाड़े (3,6,9,12,15…) के संगत पदों को जोड़ने पर 5 का पहाड़ा (5,10,15,20,25…) मिलता है — क्योंकि 2+3=5, इसलिए (2×n)+(3×n) = 5×n हमेशा सत्य होता है।
आइए करें — शब्द समस्याएँ (गुणा व भाग)
प्र. (क) 5 जार में हर जार में 4 बिस्कुट हों, तो कुल कितने बिस्कुट होंगे? (ख) 6 इडली की थालियों में हर थाली में 4 इडली हों, तो कुल कितनी इडली होगी?
उ. (क) 5 × 4 = 20 बिस्कुट। (ख) 6 × 4 = 24 इडली।
प्र. (ग) 30 बिस्कुट 5 बच्चों में बराबर बाँटे जाएं, तो प्रत्येक को कितने मिलेंगे? (घ) 18 तक पहुँचने के लिए 6 बराबर छलांगों में हर छलांग कितनी बड़ी होगी?
उ. (ग) 30 ÷ 5 = 6 बिस्कुट प्रति बच्चा। (घ) 18 ÷ 6 = 3, अर्थात हर छलांग 3 अंकों की होगी।
प्र. (ङ) प्रतिदिन ₹8 बचाकर ₹56 जमा करने में कितने दिन लगेंगे? (च) 63 सीपियों में से 5 दोस्तों को 7-7 सीपियाँ देने पर कितनी सीपियाँ शेष बचेंगी?
उ. (ङ) 56 ÷ 8 = 7 दिन। (च) 5 × 7 = 35 सीपियाँ बाँटी गईं; 63 − 35 = 28 सीपियाँ शेष बचेंगी।
तीलियों (Spokes) की समस्या
प्र. यदि एक साइकिल के पहिये में 5 तीलियाँ (spokes) हों, तो 10 पहियों में कुल कितनी तीलियाँ होंगी? और 20 पहियों में?
उ. 10 × 5 = 50 तीलियाँ; 20 × 5 = 100 तीलियाँ।
प्र. यदि कुल 45 तीलियाँ हों, तो कितने पहिये बनेंगे? और 60 तीलियों से कितने पहिये बनेंगे?
उ. 45 ÷ 5 = 9 पहिये; 60 ÷ 5 = 12 पहिये।
आइए करें — जानवरों के पैरों की गिनती
प्र. एक मकड़ी (spider) के 8 पैर होते हैं। 5, 10, 15 और 23 मकड़ियों के कुल कितने पैर होंगे?
उ. 5 मकड़ियाँ: 5×8=40 पैर; 10 मकड़ियाँ: 10×8=80 पैर; 15 मकड़ियाँ: 15×8=120 पैर; 23 मकड़ियाँ: 23×8=184 पैर।
प्र. यदि कुल 32 पैर गिने जाएं, तो कितनी मकड़ियाँ होंगी?
उ. 32 ÷ 8 = 4 मकड़ियाँ।
प्र. एक ऑटो-रिक्शा में 3 पहिये होते हैं। 18 और 34 ऑटो-रिक्शा में कुल कितने पहिये होंगे? और 36 पहियों से कितने ऑटो-रिक्शा बनेंगे?
उ. 18 ऑटो: 18×3=54 पहिये; 34 ऑटो: 34×3=102 पहिये; 36 पहियों से: 36÷3=12 ऑटो-रिक्शा।
प्र. एक चींटी (ant) के 6 पैर होते हैं। 55 चींटियों के कुल कितने पैर होंगे?
उ. 55 × 6 = 330 पैर।
प्र. यदि 48 पैर गिने जाएं (गायों के, जिनके 4 पैर होते हैं), तो कितनी गायें होंगी? और यदि 24 सींग (हर गाय के 2 सींग) दिखें, तो कुल कितने पैर होंगे?
उ. 48 ÷ 4 = 12 गायें। 24 सींगों से गायों की संख्या = 24 ÷ 2 = 12 गायें; इसलिए कुल पैर = 12 × 4 = 48 पैर।
आइए सोचें — उछल-कूद विश्लेषण
प्र. 7-7 की छलांगों से 50 से पहले पहुँचने वाली सबसे बड़ी संख्या कौन-सी है?
उ. 7 का पहाड़ा — 7,14,21,28,35,42,49,56… — 50 से पहले सबसे बड़ी संख्या 49 है (7×7=49)।
पुरी समुद्र तट — पैसों की समस्याएँ
प्र. यदि 2 दीवार-सजावट (wall-hanging) की वस्तुएँ प्रत्येक ₹42 की खरीदी जाएं, तो कुल कितने रुपये लगेंगे?
उ. 2 × 42 = ₹84।
प्र. यदि 5 रबड़ी के कप प्रत्येक ₹75 के खरीदे जाएं, तो कुल कितने रुपये लगेंगे? यदि ₹100 के नोटों से भुगतान किया जाए, तो कितने नोट लगेंगे और कितने रुपये वापस मिलेंगे?
उ. कुल राशि = 5 × 75 = ₹375। ₹100 के 4 नोट (= ₹400) देने होंगे, और वापसी में ₹400 − ₹375 = ₹25 मिलेंगे।
सीपियाँ (Sea Shells) — घटाव द्वारा भाग
प्र. 112 सीपियों से 28-28 सीपियों की कितनी मालाएँ बनाई जा सकती हैं?
उ. बार-बार 28 घटाकर — 112 − 28 = 84; 84 − 28 = 56; 56 − 28 = 28; 28 − 28 = 0। कुल 4 बार 28 घटाया गया, इसलिए 4 मालाएँ बन सकती हैं (112 ÷ 28 = 4)।
प्र. 100 सीपियों से 17-17 सीपियों की कितनी मालाएँ बनेंगी, और कितनी सीपियाँ शेष बचेंगी?
उ. 17 × 5 = 85; 100 − 85 = 15 शेष। इसलिए 5 मालाएँ बनेंगी और 15 सीपियाँ शेष बचेंगी।
प्र. 127 कंकड़ों को 3 दोस्तों में बराबर बाँटा जाए, तो प्रत्येक को कितने मिलेंगे, और कितने शेष बचेंगे?
उ. 127 ÷ 3 = 42 शेष 1 (क्योंकि 3 × 42 = 126, और 127 − 126 = 1)। इसलिए प्रत्येक को 42 कंकड़ मिलेंगे और 1 कंकड़ शेष बचेगा।
प्र. ₹500 का एक नोट बदलने पर (क) ₹50 के, (ख) ₹20 के, (ग) ₹10 के कितने नोट मिलेंगे?
उ. (क) 500 ÷ 50 = 10 नोट; (ख) 500 ÷ 20 = 25 नोट; (ग) 500 ÷ 10 = 50 नोट।
आइए खोजें — लिफाफा-कार्ड पहेली
प्र. सील किए गए लिफाफों पर लिखे गुणनफलों के आधार पर कार्डों (संख्या-जोड़ों) को सही लिफाफे से कैसे मिलाया जाए?
उ. प्रत्येक लिफाफे पर एक गुणनफल (उत्तर) लिखा होता है; बच्चों को कार्ड पर दिए गए दो संख्याओं के गुणनफल की गणना करके यह पता लगाना है कि वह किस लिफाफे के गुणनफल से मेल खाता है — इस तरह गुणा के तथ्यों (multiplication facts) का अभ्यास होता है। (विशिष्ट कार्ड-लिफाफा संयोजन पाठ्यपुस्तक के मूल चित्र पर निर्भर है — सटीक मिलान के लिए मूल पाठ्यपुस्तक से जांच की सलाह दी जाती है।)
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 8: उचित हिस्सा — हल एवं व्याख्या
यह भाग “गणित मेला” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम) की अध्याय 8 “उचित हिस्सा” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm108.pdf)।
कहानी: शबनम और मुक्ता का बँटवारा
प्र. शबनम और मुक्ता अपने दोपहर के भोजनावकाश में चॉकलेट और पराठा आपस में कैसे बाँटती हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक में दी गई कहानी के अनुसार शबनम और मुक्ता अपनी चॉकलेट और पराठा आपस में साझा करना चाहती हैं। पहले वे असमान रूप से बाँट लेती हैं जिस पर एक लड़की कहती है “यह सही नहीं है! आपने मुझे बड़ा भाग दे दिया है”, तो दूसरी जवाब देती है “ये दोनों समान नहीं हैं”। अंत में वे तय करती हैं कि “हम चॉकलेट को समान रूप से विभाजित करेंगे।” इससे बच्चों को यह समझ आता है कि उचित हिस्सा (fair share) का अर्थ है कि बँटवारा बराबर-बराबर होना चाहिए।
आधा (Half) क्या है?
प्र. जब एक पूरी वस्तु को दो व्यक्तियों के बीच बराबर-बराबर बाँटा जाता है, तो प्रत्येक भाग को क्या कहते हैं?
उ. जब एक पूरे हिस्से को दो व्यक्तियों के मध्य समान रूप से विभाजित किया जाता है तो प्रत्येक का भाग “आधा-आधा” कहलाता है। पाठ्यपुस्तक में यह “आधा-आधा” के लेबल वाले एक टिकट (पराठे जैसी वस्तु) के चित्र से दिखाया गया है, जहाँ दोनों तरफ बराबर आकार के दो हिस्से हैं। दो आधे भाग मिलकर एक पूर्ण (पूरा) बनाते हैं।
प्र. दिए गए तीन पराठों में से किस पर समान रूप से विभाजन दिखाया गया है?
उ. तीन गोल पराठों के चित्रों में से जिस पराठे में सीधी रेखा ठीक बीचोंबीच से गुज़रकर दोनों भागों को बराबर आकार का बनाती है, वही “समान रूप से विभाजित” (आधा-आधा) माना जाएगा। बच्चों को चित्र में दोनों भागों के आकार की तुलना करके सही विकल्प चुनना है।
प्र. दी गई वस्तुओं (पतंग, पिज़्ज़ा, सेब, बोतल, झंडा) में से किन पर आधा भाग छायांकित है?
उ. जिन आकृतियों में रंगा हुआ भाग शेष भाग के बिल्कुल बराबर आकार का है, वे आधा भाग दिखाती हैं — जैसे सेब और बोतल के चित्र में बीचों-बीच से बराबर बँटवारा स्पष्ट दिखता है। पिज़्ज़ा तीन भागों में बँटा है इसलिए वह आधा नहीं दिखाता। सटीक उत्तर के लिए पाठ्यपुस्तक के चित्र को ध्यान से देखकर प्रत्येक आकृति के दोनों भागों के आकार की तुलना करनी चाहिए।
आधे से कम, आधे से अधिक, या आधी?
प्र. चिक्की के चित्र में शबनम ने तीन ओर से कुछ भाग खा लिया है। शेष बची चिक्की आधे से कम है, आधे से अधिक है, या आधी है?
उ. पाठ्यपुस्तक की ग्रिड में चिक्की के कुल वर्गों में से रंगे (बचे) वर्गों की गिनती करके शेष भाग की तुलना कुल भाग के आधे से करनी होती है — यदि बचे वर्ग कुल वर्गों की आधी संख्या से कम हैं तो “आधे से कम”, बराबर हैं तो “आधी”, और अधिक हैं तो “आधे से अधिक” उत्तर होगा। यह विधि ग्रिड में वर्गों को गिनकर तुलना करने पर आधारित है।
प्र. भिन्न-भिन्न प्रकारों से आधा भाग बनाने के लिए षट्भुज (hexagon) पर रेखाएँ कैसे खींची जा सकती हैं?
उ. एक ही आकृति को आधा-आधा दिखाने के कई तरीके होते हैं — जैसे बीच से सीधी खड़ी रेखा, पड़ी रेखा, या तिरछी रेखा खींचकर, बशर्ते दोनों भाग आकार में बराबर हों। पाठ्यपुस्तक में बच्चों को कई अलग-अलग रेखाएँ खींचकर यह दिखाने को कहा गया है कि आधा बनाने के एक से अधिक तरीके हो सकते हैं।
प्र. आयताकार और वर्गाकार कागज़ को मोड़कर आधा बनाने की कितनी विधियाँ मिलती हैं?
उ. “आइए पता लगाएँ” गतिविधि में बच्चों को एक आयताकार व एक वर्गाकार कागज़ को अलग-अलग तरीकों से मोड़कर आधा बनाने का प्रयोग करने को कहा गया है (जैसे लंबाई में, चौड़ाई में, या तिरछे मोड़कर)। पाठ्यपुस्तक चित्र में कागज़ को तिरछा मोड़ने का एक उदाहरण दिखाया गया है। सटीक कुल विधियों की संख्या बच्चे के स्वयं के प्रयोग पर निर्भर करती है, इसलिए यह एक व्यावहारिक गतिविधि है।
क्या बराबर बाँटना ही उचित बँटवारा है? (अमित और बाला की कहानी)
प्र. एक बूढ़े व्यक्ति ने अपने दो बेटों अमित और बाला को आम का वृक्ष, सौर लैंप और ऊनी कंबल दिया और आपस में बाँटने को कहा। अमित ने क्या तरीका सुझाया, और क्या यह उचित बँटवारा है?
उ. अमित ने सुझाया — “मैं फल रख लूँगा और आप वृक्ष रख लेना। मैं रात में सौर लैंप रख लूँगा और आप दिन में रख लेना। मैं शीतकाल में कंबल रखूँगा और आप ग्रीष्मकाल में रखना।” पाठ्यपुस्तक स्वयं बच्चों से पूछती है: “क्या यह वितरण की सही विधि है? क्या इन्हें सही तरह से वितरित करने का कोई और उपाय है?” यह इस बात को उजागर करने के लिए है कि अमित का बँटवारा असल में उचित (fair) नहीं है — सौर लैंप रात में काम नहीं करता (धूप न होने से चार्ज नहीं होगा), इसलिए “रात में लैंप” वाला हिस्सा व्यावहारिक रूप से बेकार है; और वृक्ष व फल एक ही वस्तु से जुड़े हैं, इसलिए इन्हें अलग-अलग व्यक्तियों में बाँटना तर्कसंगत नहीं है। यह गतिविधि बच्चों को यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि उचित बँटवारे के लिए केवल वस्तुओं को बाँट देना काफी नहीं, बल्कि यह भी देखना ज़रूरी है कि बँटवारा वास्तव में बराबर व उपयोगी है या नहीं।
आधा और दोगुना (Half and Double)
प्र. यदि एक लड़की के पास 3 कंचे हैं और दूसरी कहती है “मेरे पास तुम्हारे से दोगुने कंचे हैं”, तो दूसरी लड़की के पास कितने कंचे हैं? और इसका उल्टा संबंध क्या कहलाता है?
उ. पाठ्यपुस्तक में स्पष्ट रूप से दिया गया है — “3, 6 का आधा है। 6, 3 का दोगुना है।” अर्थात यदि पहली लड़की के पास 3 कंचे हैं तो दोगुने कंचों वाली लड़की के पास 6 कंचे होंगे। इसी तरह रिक्त स्थान भरने के लिए दिए गए उदाहरणों में — “4 कंचे 8 कंचों के आधे हैं” और “8 कंचे 4 कंचों के दोगुने हैं”; “5 कंचे 10 कंचों के आधे हैं” और “10 कंचे 5 कंचों के दोगुने हैं” — इसी आधा-दोगुना संबंध का अभ्यास कराया गया है।
एक-चौथाई (Quarter/One-Fourth) क्या है?
प्र. जब एक पूरे को 4 व्यक्तियों के बीच समान रूप से बाँटा जाता है, तो प्रत्येक का भाग क्या कहलाता है?
उ. पाठ्यपुस्तक में स्पष्ट बताया गया है — “जब एक पूरे को 4 व्यक्तियों के बीच समान रूप से विभाजित किया जाता है तो प्रत्येक का भाग एक-चौथाई कहलाता है।” इसे एक चिक्की को 4 बराबर वर्गों में बाँटकर दिखाया गया है, जिसमें प्रत्येक भाग को “एक-चौथाई” लेबल किया गया है।
प्र. दी गई वस्तुओं (चौकोर चिक्की के 4 टुकड़े, गोल पराठा, अंडाकार आकृति, चॉकलेट बार) में से कौन-सी एक-चौथाई भाग दिखाती हैं?
उ. जिन आकृतियों में पूरी वस्तु को 4 बराबर भागों में बाँटा गया है (जैसे 4 बराबर वर्गों वाली चिक्की, या 4 बराबर टुकड़ों वाली चॉकलेट बार), वे एक-चौथाई दिखाती हैं। गोल पराठे को यदि 3 या अन्य असमान भागों में बाँटा गया हो तो वह एक-चौथाई नहीं दिखाएगा — सही उत्तर के लिए पाठ्यपुस्तक के चित्र में प्रत्येक आकृति के बराबर भागों की गिनती करनी चाहिए।
प्र. लक्षण्या और पीहू के पास 16-16 पुष्प हैं। चित्रों को देखकर बताइए कि उन्होंने अपने कितने पुष्प (आधे/एक-चौथाई) धागे में पिरोए?
उ. पाठ्यपुस्तक में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि लक्षण्या और पीहू दोनों के पास 16-16 पुष्प थे। चित्रों में दिखाए गए पिरोए गए पुष्पों की संख्या के आधार पर बच्चों को यह तय करना है कि प्रत्येक ने आधे (8) या एक-चौथाई (4) पुष्प पिरोए — यह चित्र में दिखाई गई वास्तविक गिनती पर निर्भर करता है, जिसे पाठ्यपुस्तक के चित्र में मालाओं में पुष्पों की गिनती करके सत्यापित किया जा सकता है।
तीन-चौथाई (Three-Fourths)
प्र. दी गई आकृतियों में से कौन-सी तीन-चौथाई (3/4) दिखाती हैं?
उ. जिन आकृतियों में पूरे के 4 बराबर भागों में से 3 भाग रंगे/भरे हुए हैं, वे तीन-चौथाई दिखाती हैं। जैसे 4 बराबर खंडों वाली पट्टी में 3 खंड रंगे हों, या गोले को 4 बराबर भागों में बाँटकर 3 भाग रंगे हों। पाठ्यपुस्तक में दिए गए वृत्त, त्रिभुज व आयत जैसी आकृतियों में से प्रत्येक में रंगे भागों की गिनती करके यह जाँचा जाता है कि वे कुल भागों के 3/4 के बराबर हैं या नहीं।
प्र. निर्देशानुसार आकृतियों में भिन्न (जैसे 2 चौथाई, 1 चौथाई, 3 चौथाई) दिखाने के लिए रंग कैसे भरा जाता है?
उ. पहले आकृति को 4 बराबर भागों में बाँटा जाता है, फिर निर्देशानुसार उतने भागों में रंग भरा जाता है — जैसे “2 चौथाई” के लिए 4 में से 2 भाग रंगना, “1 चौथाई” के लिए 4 में से 1 भाग रंगना, और “3 चौथाई” के लिए 4 में से 3 भाग रंगना। यह गतिविधि बच्चों को भिन्नों को दृश्य रूप में समझने में मदद करती है।
अभ्यास गतिविधियाँ
प्र. एक आयत जो एक-चौथाईयों को दर्शाता है, उसमें कितने बराबर भाग होंगे और उन्हें कैसे पहचानें?
उ. पाठ्यपुस्तक में दिखाए गए रंगीन आयत में पंक्तियों व स्तंभों में बराबर वर्ग बने हैं, जिन्हें चार बराबर समूहों (एक-चौथाई भागों) में बाँटा जा सकता है। बच्चों को चर्चा करनी है कि आयत को किस प्रकार चार बराबर भागों में विभाजित माना जाए — यह प्रश्न खुली चर्चा के लिए है, इसलिए इसका कोई एक निश्चित उत्तर नहीं बल्कि तर्कसंगत व्याख्या अपेक्षित है।
प्र. एक-चौथाई और आधे को अलग-अलग तरीकों से ग्रिड तालिकाओं में कैसे दिखाया जा सकता है?
उ. किसी भी ग्रिड में कुल वर्गों को दो बराबर भागों में बाँटकर आधा दिखाया जा सकता है (जैसे ऊपर-नीचे, बाएँ-दाएँ, या तिरछा बाँटकर), और चार बराबर भागों में बाँटकर एक-चौथाई दिखाया जा सकता है। महत्वपूर्ण बात यह है कि हर बार बँटवारे में सभी भाग आकार में बराबर होने चाहिए, चाहे बँटवारे का तरीका अलग-अलग क्यों न हो।
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 9: सैकड़ों का घर-2 — हल एवं व्याख्या
यह भाग “गणित मेला” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम) की अध्याय 9 “सैकड़ों का घर-2” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm109.pdf)।
कहानी: अकबर-बीरबल और कौवों की गिनती
प्र. अकबर को शहर के कौवों की संख्या जानने की उत्सुकता क्यों हुई, और बीरबल ने क्या उत्तर दिया?
उ. पाठ्यपुस्तक में दी गई कहानी के अनुसार अकबर और बीरबल उद्यान में घूम रहे थे जब उन्होंने आकाश में बहुत सारे कौवे उड़ते देखे। अकबर को यह जानने की उत्सुकता हुई कि शहर में कुल कितने कौवे थे, इसलिए उन्होंने इसका पता लगाने वाले को पुरस्कार देने की घोषणा की। सोचने के बाद बीरबल ने कहा — “हमारे शहर में पूरे नौ सौ तिरसठ कौवे हैं” (अर्थात 963)।
प्र. जब अकबर ने पूछा कि वह इतना आश्वस्त कैसे हो सकते हैं, तो बीरबल ने क्या कहा? और अगर कम या ज्यादा कौवे निकलें तो उसका क्या समाधान था?
उ. बीरबल ने कहा — “आप उन्हें गिनवा सकते हैं।” जब अकबर ने पूछा कि “यदि कम हुए, तो?” तो बीरबल ने चतुराई से जवाब दिया — “शेष कौवे छुट्टी पर चले गए होंगे।” और अगर संख्या ज्यादा निकले, तो बीरबल ने कहा — “अन्य स्थानों से कौवे शहर में मेहमानों पर आए होंगे।” यह बुद्धिमत्ता भरा उत्तर बीरबल की चतुराई दिखाता है — वह एक ऐसी संख्या बताता है जिसे कोई गलत साबित नहीं कर सकता, क्योंकि जबभी कौवों की संख्या बदलेगी, वह उसे “मेहमानों के आने-जाने” से जोड़ देता है। यह कहानी बड़ी संख्याओं से परिचीत कराने के साथ साथ अनुमान/आकलन के बारे में भी सोचने की प्रेरणा देती है।
संख्याओं को टाइल्स से दिखाना
प्र. चावल की बोरियों वाले चालक की तरह टाइल्स का उपयोग करके 832, 947, 726, 504, 620 और 700 जैसी संख्याओं को कैसे दिखाएं?
उ. हर संख्या को सैकड़ों (बड़ी टाइल), दहाईयों (मध्यम टाइल) और इकाइयों (छोटी टाइल) के स्थानीय मान के अनुसार टाइलों में बाँटकर दिखाया जाता है। जैसे 832 को दिखाने के लिए 8 बड़ी टाइल, 3 मध्यम टाइल और 2 छोटी टाइल लगेंगी; 700 को दिखाने के लिए केवल 7 बड़ी टाइल लगेंगी, कोई मध्यम/छोटी टाइल नहीं।
समीपवर्ती सौ, पचास और दस
प्र. 468 के समीपवर्ती सौ, पचास और दस कौन-से हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक में दिया गया उदाहरण है — 468 के समीपवर्ती सौ 400 और 500 के बीच, समीपवर्ती पचास 450 और 500 के बीच, और समीपवर्ती दस 460 और 470 के बीच है। इसी विधि से तालिका में दी गई अन्य संख्याओं (183, 345, 693, 734, 899) के लिए भी समीपवर्ती सौ–पचास–दस की सीमाओं को उसी तरीके से जोड़ों में बांटकर निकाला जाता है।
तंबोला और संख्या-पहेलियाँ
प्र. 570 से 630 के बीच की संख्याओं के ग्रिड में संकेतों (जैसे “597”, “उस संख्या में 4 हो”, “595 से 605 के बीच की संख्याएँ”) के अनुसार संख्याएँ कैसे काटें?
उ. यह तंबोला (बिंगो) जैसा खेल है — पहले संकेत “597” के लिए ग्रिड में से सीधे 597 संख्या वाला खाना काटना है; दूसरे संकेत “उस संख्या में 4 हो” के लिए ग्रिड में जिस भी संख्या में अंक 4 आए (जैसे 574) उसे खोजकर काटना है; तीसरे संकेत “595 से 605 के बीच” के लिए ग्रिड में 597, 599, 600, 602 आदि सभी संख्याएँ काटनी होंगी। इसी तरह शेष संकेतों (दहाई अंक 1, 610 से दो अधिक, 625 से 5 कम) को भी इसी तर्क से ग्रिड पर लागू किया जाता है।
प्र. “3 सैकड़ें, 6 दहाई और 8 इकाई” संख्या को अलग-अलग तरीकों से कैसे बनाएं?
उ. पाठ्यपुस्तक में यह संख्या 368 है, और इसे तीन विधियों से दिखाया गया है: “300 से 68 अधिक” (300+68=368), “400 से 32 कम” (400−32=368), और “300+60+8” (स्थानीय मान विस्तार)। पाठ्यपुस्तक में 905, 555 और 736 के लिए भी इसी तरह कई विधियों से अभिव्यक्त करने का अभ्यास कराया गया है।
कूदो और बताओ (संख्या-प्रतिरूप)
प्र. सुधा और सुशील के पैटर्न में 720→730 (+10), 450→550 (+100), 880→905 (+25), और 830→860→875→845→… (+30/+15) जैसे खाने दिखते हैं। रिक्त स्थान कैसे भरें?
उ. यह छलांग-गिनती (skip counting) का अभ्यास है। प्रत्येक रिक्त स्थान को उसी पैटर्न में दिखाई गई संख्या जोड़कर भरना होता है — जैसे +10 वाले पैटर्न में 720 के बाद 730, फिर 740; +100 वाले पैटर्न में 450 के बाद 550, फिर 650; +25 वाले पैटर्न में 880 के बाद 905, फिर 930। प्रत्येक तीर (नीचे/ऊपर) में दिखाई गई +संख्या को बार-बार जोड़ने पर पूरा पैटर्न पूरा होता है।
संख्या जासूस (संख्या-प्रतिरूपों की पहचान)
प्र. 100, 200, 300 और ऐसी ही “सैकड़ों” (100 के पूरे गुणज) से मिलती-जुलती संख्याओं में क्या खास है?
उ. ये सभी संख्याएँ 100 की गुणज हैं, इनमें दहाई और इकाई के स्थान पर हमेशा शून्य (0) होता है, केवल सैकड़ों के अंक बदलते हैं (100, 200, 300, 400, 500, 600…)।
प्र. 789, 345 और 123 जैसी संख्याओं में क्या विशेष है?
उ. इन सभी संख्याओं में तीनों अंक आपस में अलग-अलग हैं, और इन्हें एक खास क्रम में रखा जा सकता है — 789 में अंक बढ़ते क्रम में हैं (7,8,9) और 123 में भी बढ़ते क्रम में हैं (1,2,3), जबकि 345 भी बढ़ते क्रम में है (3,4,5)। इसी तरह, पाठ्यपुस्तक में 876 और 321 को भी “एक जैसी” बताया गया है — दोनों में अंक घटते क्रम में हैं (876: 8,7,6 और 321: 3,2,1), यही उनका साझा प्रतिरूप है।
प्र. 11, 22, 33 के बाद आगे कौन-से प्रतिरूप (111, 222, 333 जैसे) आते हैं, और 353, 868 जैसी संख्याओं में क्या खास है?
उ. 11, 22, 33 में दोनों अंक एक जैसे हैं (जुड़वाँ अंक), इसी प्रतिरूप को आगे बढ़ाते हुए 111, 222, 333 आदि बनते हैं जिनमें तीनों अंक एक जैसे हैं। 353 और 868 ऐसी संख्याएँ हैं जो बाएँ से दाएँ और दाएँ से बाएँ पढ़ने पर एक जैसी दिखती हैं (पैलिंड्रोम प्रकार की संख्याएँ) — बच्चों को ऐसी ही अन्य संख्याएँ खोजने को कहा गया है।
दिए गए अंकों से संख्याएँ बनाना
प्र. अंक 3 और 8 से सुधा ने 38 बनाया, जबकि सुशील ने 338 और 388 बनाए। इन दो अंकों से और कौन-सी 2 या 3 अंकों वाली संख्याएँ बन सकती हैं?
उ. जब अंकों को दोहराने की अनुमति हो, तो 3 और 8 से 2 अंकों वाली संख्याएँ 33, 38, 83, 88 बनती हैं; और 3 अंकों वाली संख्याएँ 333, 338, 383, 388, 833, 838, 883, 888 बनती हैं (हर स्थान पर 3 या 8 रखकर)। इन्हें छोटी से बड़ी संख्या के क्रम में सजाने पर सबसे छोटी 33 और सबसे बड़ी 888 होगी।
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 10: कक्षा उत्सव का आनंद — हल एवं व्याख्या
यह भाग “गणित मेला” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम) की अध्याय 10 “कक्षा उत्सव का आनंद” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm110.pdf)।
कक्षा सजावट की तैयारी
प्र. कक्षा 3 के विद्यार्थी कक्षा में उत्सव मनाने की तैयारी कर रहे हैं। चित्र में कौन-कौन से क्रियाकलाप दर्शाए गए हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक के चित्र में विद्यार्थी पर्दे लगा रहे हैं, खिड़की पर रंगोली पट्टियां/लड़ियां सजा रहे हैं, गमले सजाए जा रहे हैं, पट्ट 3 की पट्टिका लगाई जा रही है, और दरवाजे को भी सजाया जा रहा है।
प्र. शैली दरवाजे की ऊंचाई किस प्रकार ज्ञात करती है?
उ. यह प्रश्न बच्चों को लंबाई/ऊंचाई मापने की विधि के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करता है। शैली किसी रस्सी, धागे या पट्टी को दरवाजे की ऊंचाई के बराबर लम्बाई में काटकर, उसे एक गैर-मानक इकाई (unit) की तरह उपयोग करके ऊंचाई ज्ञात कर सकती है।
लंबाई की तुलना और मापन
प्र. सबसे लंबी चोटी वाले विद्यार्थी पर घेरा कैसे लगाएं?
उ. सभी विद्यार्थियों की चोटियों की लंबाई की आपस में तुलना करके जो चोटी सबसे लंबी हो, उस पर घेरा लगाया जाता है।
प्र. कक्षा के कमरे में कागज़ की उन पट्टियों पर ✔ का चिह्न कैसे लगाएं जिनकी लंबाई खिड़की की ऊंचाई के बराबर है?
उ. प्रत्येक पट्टी को खिड़की के बगल खड़ी में रखकर या एक-दूसरे से सीधे तुलना करके देखा जाएगा कि उसका सिरा 0-अंक से मेल खाता है या नहीं और दूसरा सिरा खिड़की की ऊंचाई के सिरे पर मिलता है या नहीं।
प्र. अपनी कक्षा-कक्ष की दो दीवारों के बीच की दूरी ज्ञात करने की अन्य विधियां कौन-सी हो सकती हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक में दर्शाया गया है कि एक लंबी रस्सी/धागे को एक दीवार से दूसरी दीवार तक खींचकर दूरी ज्ञात की जा सकती है। इसके अलावा कदमों से चलकर गिनती करके या मीटर-फीता जैसी स्थानीय इकाईयों से मापकर भी ज्ञात किया जा सकता है।
प्र. पट्ट (बोर्ड) को रंगीन पट्टियों से सजाते समय विद्यार्थी लंबाई मापने की कौन-सी विधियों का उपयोग कर रहे हैं?
उ. चित्र में एक बच्चा पट्ट को पकड़कर उसे पट्टियों से सजा रहा है, और दूसरा बच्चा स्टूल पर खड़ा होकर ऊपर से पहुंचकर पट्ट लगा रहा है — ये दोनों लंबाई को सीधे हाथ या स्टूल/सीड़ी से मापने की विधियां हैं। बच्चों को सोचना है कि सबसे सरल/सुरक्षित विधि कौन-सी है — यह एक मुक्त चर्चा वाला प्रश्न है, इसका कोई एक स्थिर उत्तर नहीं।
लंबाई की तुलना करने की गतिविधियाँ
प्र. ऊन या सूत के एक धागे को दी गई रेखा की लंबाई के बराबर काटकर उस पर कैसे चिपकाएं?
उ. पहले धागे को रेखा के एक सिरे से दूसरे सिरे तक सीधा फैलाकर रखें, फिर वहां से धागे को काट दें — इस तरह कटा गया धागा ठीक रेखा की लंबाई के बराबर होगा, और इसे रेखा पर चिपकाया जा सकता है।
प्र. दी गई पट्टी (जिसपर तीन तारे लगे हैं) से लंबी एक पट्टी कैसे बनाएं?
उ. दी गई पट्टी की लंबाई से ज्यादा लंबी कोई भी पट्टी सही उत्तर मानी जाएगी — इसे जांचने का सबसे आसान तरीका है दोनों पट्टियों को एक सिरे पर खड़ा करके सीधे देखना कि दूसरा सिरा कहां तक आगे जाता है।
प्र. शैली और आदि के द्वारा पकड़ी हुई सजावटी डोरी से छोटी एक डोरी कैसे बनाएं?
उ. सजावटी डोरी से कम लंबी कोई भी डोरी सही उत्तर मानी जाएगी; इसे दोनों डोरियों को समान ईकाईयों से सीधा रखकर या गिनकर जांचा जा सकता है।
मेज और दरवाजा: लंबाई-चौड़ाई की समस्या-समाधान
प्र. दो विद्यार्थी यह जांचना चाहते हैं कि मेज कमरे से बाहर ले जाने के लिए दरवाजे से होकर जा पाएगी या नहीं। वे इसके लिए क्या करते हैं, और इससे क्या पता चलता है?
उ. पाठ्यपुस्तक में दिखाया गया है कि एक बच्चा धागे (सूत) का उपयोग करके मेज की लंबाई को दरवाजे की चौड़ाई से मापता है, और दूसरा बच्चा एक दूसरी तरफ से चौड़ाई मापता है। जांच करने पर पता चलता है कि मेज का एक सिरा दरवाजे की चौड़ाई से चौड़ा है (नहीं जा सकता), जबकि दूसरी तरफ से डेस्क को मोड़कर रखने पर वह चौड़ाई से कम हो जाती है और दरवाजे से होकर जा सकती है।
प्र. यदि मेज की लंबाई और चौड़ाई दोनों ही दरवाजे की चौड़ाई से अधिक हों, तो क्या मेज को दरवाजे से होकर ले जाने की कोई विधि हो सकती है?
उ. पाठ्यपुस्तक यह प्रश्न खुली चर्चा के लिए छोड़ता है। मेज को चाहे कितना ही घुमाया या तिरछा किया जाए, अगर उसकी दोनों मंझलीम दिशाओं (लंबाई और चौड़ाई) में दरवाजे की चौड़ाई से बड़ी हों, तो मेज को सीधे रूप से दरवाजे से नहीं निकाला जा सकता। बच्चों को सोचना है कि मेज को तिरछा करके कोने (angle) से ले जाने पर क्या होगा — क्योंकि तिरछी हुई वस्तु के लिए जौंड़े की दिशा में कम स्थान की जरूरत पड़ती है।
आइए खेलें: सेतु बनाएँ
प्र. डिब्बों, थैलों, किताबों और कक्षा की अन्य वस्तुओं से एक सेतु (पुल) कैसे बनाएं जो हिले नहीं?
उ. पाठ्यपुस्तक में दी गई गतिविधि के अनुसार डिब्बों/किताबों को दो सहारों पर एक-एक स्तम्भ की तरह खड़ा करके उनके बीच का खाली स्थान पुल की तरह पार किया जाता है — इसपर किताब या सपाट रखकर पुल बनाया जा सकता है। फिर यह अनुमान लगाया जाता है कि कौन-सी रोजमर्रा की वस्तुएँ (जैसे रबड़, पेंसिल) इस सेतु के नीचे से निकाली जा सकती हैं या नहीं, जो ऊंचाई समढ़ने और मापने का व्यावहारिक अभ्यास है।
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 11: भरना और उठाना — हल एवं व्याख्या
यह भाग “गणित मेला” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम) की अध्याय 11 “भरना और उठाना” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm111.pdf)। यह अध्याय धारिता (capacity/volume) से जुड़े संकल्पों पर आधारित है।
आप कितना रस पी सकते हैं? (गन्ने के रस की कहानी)
प्र. पोस्टर पर लिखा था “6 गिलास रस (जूस) पीजिए और पूरे पैसे वापस लीजिए।” चिंटू ने सोचा कि वह 6 छोटे गिलास पी सकता है, लेकिन विक्रेता ने क्या कहा?
उ. विक्रेता ने स्पष्ट किया — “अपने पैसे वापस पाने के लिए आपको 6 बड़े गिलास रस पीना होगा, छोटे गिलास नहीं।” चिंटू ने मान लिया कि वह 6 बड़े गिलास रस नहीं पी सकता। पाठ्यपुस्तक इस कहानी से बच्चों को यह महत्वपूर्ण समझ देता है — किसी बर्तन की धारिता (वह कितना तरल समा सकती है) केवल गिलासों की संख्या से नहीं, बल्कि गिलास के आकार (बड़ा/छोटा) से भी तय होती है।
किसके गिलास में अधिक है? (रीतु, मोनू, नीता की कहानी)
प्र. रीतु की माँ नीता, मोनू और रीतु को अलग-अलग आकार के गिलासों में दूध देती है। सबसे अधिक दूध किसे मिला, यह कैसे पता लगाें?
उ. जब गिलास अलग-अलग आकार के हों, तो सिर्फ देखकर बताना मुश्किल होता है कि किसमें ज्यादा दूध है। पाठ्यपुस्तक में रीतु की बड़ी बहन इसका सही तरीका दिखाती है — वह तीनों गिलासों का दूध तीन समान आकार और आकार के गिलासों (रितु का गिलास, मोनू का गिलास, नीता का गिलास) में डालती है। जिसके गिलास में भरा हुआ दूध सबसे ऊंचा स्तर तक पहुंचता है (या समान आकार के तीन गिलासों में सबसे ज्यादा भरता है), उसी ने सबसे ज्यादा दूध पिया था।
प्र. रिक्त स्थानों को ‘अधिक’ या ‘कम’ से भरने के लिए क्या करना चाहिए?
उ. “नीता के गिलास में मोनू के गिलास की तुलना में ___ दूध है” जैसे वाक्यों को पूरा करने के लिए पाठ्यपुस्तक में दिखाई गई विधि के अनुसार — तीनों गिलासों में समान मात्रा में डाले गए दूध के स्तर की ऊंचाई देखकर ही बताया जा सकता है कि किसमें अधिक है और किसमें कम। पाठ्यपुस्तक में यह स्पष्ट किया गया है कि सबसे बड़े गिलास (रितु का) में सबसे अधिक दूध था, जबकि सबसे छोटे गिलास में सबसे कम दूध था; इसी तर्क से जोड़े में दूसरे की तुलना में अधिक/कम 3निर्धारित किया जा सकता है।
अनुमान और जांच: कटोरी, गिलास और बोतल
प्र. घर से तीन अलग-अलग आकार के पात्र (जैसे कटोरी, गिलास, बोतल) लेकर यह कैसे पता करें कि कितनी कटोरियों से एक गिलास भरता है, और कितने गिलास से एक बोतल?
उ. पाठ्यपुस्तक में दी गई विधि के अनुसार पहले मौखिक अनुमान लगाना चाहिए (जैसे “4 कटोरियों से गिलास भरेगा”), फिर एक पात्र से दूसरे पात्र में बार-बार पानी डालकर और गिनकर वास्तविक संख्या जांचनी चाहिए। इस तरह अनुमान और वास्तविक जांच की तुलना करके बच्चों में मापन संबंधी अंदाजा लगाने की कुशलता विकसित होती है।
मापने वाली बोतल: लीटर (Litre) का परिचय
प्र. दूधवाले दूध देने के लिए मापने वाले पात्र (जैसे 1 लीटर का बर्तन) का उपयोग क्यों करते हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक में यह चर्चा का विषय है — मापने वाला पात्र एक स्थिर, सार्वभौमिक रूप से मान्य (standard) इकाई बताता है — जिससे हर ग्राहक को सही और बराबर मात्रा में दूध मिलता है, चाहे घर-घर में गिलास-कटोरी का आकार कुछ भी हो। यह घर-घर बदलते गैर-मानक पात्रों (जैसे छोटे-बड़े गिलास) से पैदा होने वाली गलतफहमियों को रोकता है।
प्र. नीता के पास 1 लीटर पानी वाली बोतल है। वह इस बोतल से जग, गिलास, कटोरी और करछुल (लड़लाडू) में कितना पानी आता है, यह कैसे पता लगाती है?
उ. पाठ्यपुस्तक में नीता 1 लीटर की बोतल से पानी को जग में डालती है और पाती है कि जग भी ठीक 1 लीटर का ही है — इसी तरह गिलास, कटोरी और करछुल में डालकर पता किया जाता है कि गिलास और कटोरी 1 लीटर से ‘कम’ (छोटे) होते हैं और करछुल/बड़ा बर्तन 1 लीटर से ‘अधिक’ हो सकता है। यह गतिविधि बच्चों को 1 लीटर के संदर्भ में रोजमर्रा की वस्तुओं की धारिता समझने में मदद करती है।
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 12: कुछ लेना, कुछ देना — हल एवं व्याख्या
यह भाग “गणित मेला” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम) की अध्याय 12 “कुछ लेना, कुछ देना” (पाठ्यपुस्तक में “लेन-देन”) पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm112.pdf)। यह अध्याय 3-अंकीय संख्याओं के जोड़-घटाने (पुनर्ग्रूपण सहित) पर आधारित है।
सांप-केंचुआ पैटर्न: बार-बार जोड़ना-घटाना
प्र. चित्र में सांप/केंचुआ पर “6 जोड़ो” कहकर 234 से शुरू किया गया है; आगे खानों में क्या संख्याएँ आएंगी?
उ. प्रत्येक खाने में पिछली संख्या में 6 जोड़ा जाता है — 234→240→246→252→258→264। इसी तरह “357 घटाओ” के लिए प्रत्येक खाने में 6 घटाया जाता है (357→351→345…), “288 जोड़ो” के लिए 9-9 जोड़ा जाता है (288→297→306…), और “331 घटाओ” के लिए 9-9 घटाया जाता है (331→322→313…)। यह छलांग-गिनती का अभ्यास है।
किशन की पौधशाला: जोड़ने की समस्या
प्र. किशन के पास विभिन्न प्रकार के 364 पौधे थे। वह अपने मित्र के गाँव गया और वहाँ से 52 पौधे और ले आया। अब उसके पास कुल कितने पौधे हैं?
उ. यह 364 + 52 = 416 है। पाठ्यपुस्तक में इसे बॉक्स आरेख और स्थानीय मान ब्लॉक्स दोनों से हल किया गया है — 364 को (3 सैकड़े, 6 दहाई, 4 इकाई) और 52 को (5 दहाई, 2 इकाई) के रूप में जोड़ा जाता है। इकाइयां जोड़ते ही 4+2=6 इकाई मिलती हैं, और दहाईयां जोड़ने पर 6+5=11 दहाई बनती हैं — पाठ्यपुस्तक में स्पष्ट समझाया गया है — “10 दहाई को मिलाकर बनेगा 1 सैकड़ा”, फिर “3 सैकड़ों को 1 सैकड़ा के साथ मिलाने पर प्राप्त होते हैं 4 सैकड़े” — इस तरह जवाब 4 सैकड़े, 1 दहाई, 6 इकाई = 416 बनती है। संख्या-रेखा विधि से भी पाठ्यपुस्तक 364 से पांच बार +10 के कूदे लगाकर (364→374→384→394→404→414) और फिर दो बार +1 के कूदे लगाकर (414→415→416) इसी उत्तर तक पहुंचता है, जो 50+2=52 जोड़ता है।
प्र. किशन को एक विद्यालय में 230 पौधे पहुंचाने का आदेश मिला। उसने 75 पौधों को एक खुले डिब्बे में बाँधा/व्यवस्थित किया। उसे और कितने पौधों को बाँधने/व्यवस्थित करने की आवश्यकता है?
उ. यह 230 − 75 = 155 है। पाठ्यपुस्तक में इसे बॉक्स आरेख (‘कुल 230, जिसमें से 75 डिब्बे में पहले से बंधे, शेष कितने’) से समझाया गया है, और स्थानीय मान ब्लॉक्स (2 सैकड़े, 3 दहाई, 0 इकाई = 230) से घटाने की प्रक्रिया दिखाई गई है। चूँकि 230 में इकाई अंक शून्य है और 75 मेंसे 5 इकाई घटानी हैं, इसलिए पाठ्यपुस्तक में समझाया गया है कि “5 इकाई को हटाने के लिए हमें 1 दहाई को तोड़ना होगा” — अर्थात 2 सैकड़े 3 दहाई 0 इकाई को 2 सैकड़े 2 दहाई 10 इकाई में बदलकर (ऐसा ही दशमलव पद्धति में ‘उधार’/borrow कहा जाता है) फिर 75 (7 दहाई 5 इकाई) घटाने पर शेष 155 (1 सैकड़ा, 5 दहाई, 5 इकाई) बचता है।
लेन-देन से जुड़ी समस्याओं की पहचान
प्र. इस अध्याय का नाम “कुछ लेना, कुछ देना” क्यों रखा गया होगा?
उ. पाठ्यपुस्तक में दिखाई गई दोनों कहानियों में किशन के पास चीजें (पौधे) बाहर से आती हैं (जोड़ना = लेना/प्राप्त करना) या उसके पास से बाहर जाती हैं (घटाना = देना/निकालना)। इसी लिए जोड़ने (+) और घटाने (−) दोनों क्रियाओं को रोजमर्रा की घटनाओं से जोड़कर — जैसे पौधे मंगवाना या डिब्बों में बाँधना — समझाया गया है।
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 13: समय-समय की बात — हल एवं व्याख्या
यह भाग “गणित मेला” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम) की अध्याय 13 “समय-समय की बात” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm113.pdf)। यह अध्याय कैलेंडर पड़ने से जुड़े संकल्पों पर आधारित है।
सितंबर 2024 का कैलेंडर बनाना
प्र. सितंबर 2024 माह में कुल कितने रविवार पड़ेंगे, और गुरुवार को कौन-कौन सी तारीखें पड़ेंगी?
उ. सितंबर 2024 की 1 तारीख रविवार (Sunday) को पड़ी थी। इसलिए रविवार की तारीखें 1, 8, 15, 22 और 29 होंगी — अर्थात सितंबर 2024 में कुल 5 रविवार पड़ेंगे। गुरुवार, रविवार के चार दिन बाद आता है, इसलिए गुरुवार की तारीखें 5, 12, 19 और 26 सितंबर होंगी (कुल 4 गुरुवार)। यह तथ्य कैलेंडर की गणना के सामान्य नियमों से सीधे निकाला जा सकता है (30 दिन वाले सितंबर महीने में हर वार 7-7 दिन के अंतर पर दोहराएगा)।
दो सालों के कैलेंडर की तुलना
प्र. दो अलग-अलग वर्षों के कैलेंडर में महीनों के नाम, महीने में दिनों की संख्या, सप्ताह में दिनों की संख्या और एक वर्ष में सप्ताहों की संख्या — इनमें से क्या समान रहता है और क्या बदलता है?
उ. महीनों के नाम (जनवरी-दिसंबर), हर महीने में दिनों की संख्या (28/29/30/31), एक सप्ताह में दिनों की संख्या (7), और एक वर्ष में सप्ताहों की संख्या (लगभग 52) — ये हर वर्ष समान रहते हैं। लेकिन रविवारों की संख्या हर वर्ष बदल सकती है, क्योंकि यह इस बात पर निर्भर करती है कि वर्ष का पहला दिन (1 जनवरी) सप्ताह के किस दिन पड़ रहा है, और क्या वर्ष सामान्य (365 दिन) है या लीप वर्ष (366 दिन)।
प्र. कौन-से त्यौहार — जैसे गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और क्रिसमस — हर साल एक ही तारीख को पड़ते हैं, जबकि दीपावली और ईद जैसे त्यौहारों की तारीख हर साल बदलती है? ऐसा क्यों होता है?
उ. गणतंत्र दिवस (26 जनवरी), स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) और क्रिसमस (25 दिसंबर) जैसे त्यौहार अंग्रेज़ी (सौर) कैलेंडर पर आधारित होते हैं, इसलिए इनकी तारीख (दिनांक/माह) हर साल समान रहती है — सिर्फ वह किस दिन (सोमवार/मंगलवार आदि) पड़ेगी, यह बदलता रहता है। वहीं दीपावली, ईद-उल-फितर, गणेश चतुर्थी, दशहरा, बुद्ध पूर्णिमा जैसे त्यौहार चांद्र (लूनर) कैलेंडर पर आधारित होते हैं, जिससे हर साल सौर कैलेंडर के अनुसार इनकी तारीख और महीना दोनों खिसकते रहते हैं।
पूरा सप्ताह और कैलेंडर पड़ना
प्र. सप्ताह में कितने दिन होते हैं और उनके नाम बताओं?
उ. एक सप्ताह में 7 दिन होते हैं — सोमवार, मंगलवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार, शनिवार और रविवार। पाठ्यपुस्तक में रिक्त कैलेंडर में इन्हीं सात दिनों के स्तंभ हैं, जिनमें महीने की तारीखें भरकर बच्चे कैलेंडर पड़ना और बनाना सीखते हैं।
NCERT Class 3 Maths Solutions in Hindi- Ganit Mela (गणित मेला) | अध्याय 14: सूरजकुंड मेला — हल एवं व्याख्या
यह भाग “गणित मेला” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम) की अंतिम अध्याय 14 “सूरजकुंड मेला” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chmm114.pdf)। यह अध्याय फरीदाबाद (हरियाणा) के सूरजकुंड मेले की सैर पर सोनी और अवि के साथ पूरी पुस्तक की मुख्य 3विषय-वस्तुओं (पैटर्न, सममिति, टाइलिंग) को दोहराता हुआ एक समेकित अभ्यास अध्याय है।
आइए माला बनाएँ: पैटर्न (आधा-दोगुना का पुनरावृत्ति)
प्र. सोनी और अवि सूरजकुंड मेले में आए एक स्टॉल पर मोतीयों की माला बनवाते हैं। माला बेचने वाला कहता है — “एक रंग के 4 मोतियों और दूसरे रंग के 4 मोतियों से 8 मोतियों की मालाएँ बनाइए।” इसका क्या मतलब है?
उ. यह अध्याय 11 से पहचाने “आधा और दोगुना” संबंध का प्रयोग है — माला में एक रंग की 4 मोतियां होंगी और दूसरे रंग की 8 मोतियां होंगी, जो आपस में आधे-दोगुने का संबंध रखती हैं (4 का दोगुना 8 है)। बच्चे चाहें तो दोनों रंगों की मोतियों को आपस में बदल-बदलकर भी पिरो सकते हैं (जैसे 4+8+4+8…) या समूहों में भी — यह बच्चों को चीजों को समझी-बूझी पड़ताल (patterns) में गोंथने का अभ्यास करवाता है।
सममिति (Symmetry) — मालाओं से पहचान
प्र. एक लड़की कहती है — “मेरी माला के दोनों आधे भाग पूर्णत: एक समान हैं। मेरी माला सममितीय है।” एक लड़का कहता है — “मेरी माला के दोनों भाग एक जैसे नहीं हैं। मेरी माला सममितीय नहीं है।” — इनका मतलब क्या है?
उ. बीच से सममितिय था (मेज की तरह) विभाजित किया जाए तो लड़की की माला के दोनों आधे मोतियों के रंग-क्रम में पूरी तरह मेल खाएगी (यह सममितिय है), जबकि लड़के की माला में एक तरफ से दूसरी तरफ मोतियों का रंग-क्रम मेल नहीं खाएगा — यह थामा 5 में पड़ी रंगोली-सममिति की समझ पर आधारित है — बीच से दोनों आधे में एक समान दूरी पर एक समान रंग/आकार होना चाहिए।
प्र. एक रंग के 6 मोतियों और दूसरे रंग के 2 मोतियों का उपयोग करके एक सममितीय माला कैसे बनाएं?
उ. माला में कुल 8 मोतियां हैं (6+2)। सममितीय बनाने के लिए मोतियों को इस तरह सजाना चाहिए कि बीच से दोनों ओर एक समान रंग-क्रम रहे — जैसे बीचों-बीच रंग A की 2 मोतियां, फिर दोनों ओर रंग B की 3-3 मोतियां (2+3+3=8, आधे में 3 B और आधे में 3 B, बीचमें 2 A)। पाठ्यपुस्तक में इसी तरह कई अलग-अलग सममित मालाएँ दिखाई गई हैं — बच्चों को पहचानना है कि उनमें से कौन-सी सममितीय हैं और कौन-सी नहीं।
मुखौटा बनाना: कागज़ मोड़कर सममिति
प्र. बिल्ली का मुखौटा बनाते समय पहले कागज़ को बीच से मोड़ा जाता है, फिर कागज़ के सिर्फ एक तरफ बिल्ली का आधा चित्र बनाकर काटा जाता है। फिर खोलने पर पूरा मुखौटा बन जाता है। यह विधि सममिति से कैसे जुड़ी है?
उ. जब कागज़ को बीच से मोड़ा जाता है, तो मोड़ खूंन सममिति की रेखा (line of symmetry) बन जाती है। इस रेखा के एक ओर बिल्ली के चेहरे का आधा हिस्सा बनाकर काटा जाता है, और जब कागज़ को खोला जाता है तो दूसरा आधा हिस्सा मोड़कर लाई गई रेखा की वजह से एकदम वैसा ही दिखता है, इसी से पूरा चेहरा सममित बन जाता है। यदि काटते समय काट जगह मीचा-रेखा से बराबर नहीं रखी जाए, तो मुखौटे की दोनों आंखें या कान एक समान आकार के नहीं बनेंगे — पाठ्यपुस्तक में एक बच्चा इसी गड़बड़ी की शिकायत करता है — “अरे! मैं तो केवल एक आँख से ही देख पा रहा हूं, पता नहीं क्या गड़बड़ है?” — इससे पता चलता है कि काटाई सममित न होने से चेहरे के दोनों ओर की आंखों का आकार बराबर नहीं बना।
पथ पर टाइल लगाना: रंगमिति (टेसेलेशन)
प्र. दादाजी मेले के पथ पर चलते समय टाइलों के बीच की जगह में पैर फंसा कर लड़खड़ा जाते हैं। गणितीय रूप से यह समस्या क्या दर्शाती है, और इसे सुलझाने के लिए कौन-सी गतिविधि दी गई है?
उ. यह समस्या दर्शाती है कि टाइलों के बीच खाली जगह (gaps) रहने से चलने-फिरने में दिक्कत होती है। पाठ्यपुस्तक में इसके समाधान के लिए “रंगमिति (रंगोमेट्री)” आकारों (tessellation shapes) का उपयोग करके आकृतियों को बिना किसी जगह छोड़े और बिना एक-दूसरे के ऊपर चड़े भरने की गतिविधि दी गई है। जौंड़ेदार आकार (जैसे वर्ग, समषड्भुज, आयत) कुछ आकृतियां बिना खाली छोड़े सतह को ढंक सकती हैं, जबकि कुछ (जैसे वृत्त) नहीं — यही बात टाइल बिछाने में ध्यान रखनी जरूरी बनाती है।
मेले की यात्रा से पूरी पुस्तक का सारांश
प्र. “गणित मेला” पुस्तक का यह अंतिम अध्याय “सूरजकुंड मेला” के रूप में क्यों रखा गया है, और यह पूरी किताब से कौन-कौन से विचारों को जोड़ता है?
उ. एक मेला आम तौर पर एक साथ कई चीजों का अनुभव देता है — सजावट (सममिति), मॉला बनाना (पैटर्न/आधा-दोगुना), खरीद्दारी-बिक्री (पैसे), रास्ते (लंबाई-मापन), खिलौने (आक़रितियां/टाइलिंग)। इसी लिए यह अंतिम अध्याय स्थान (place value), आकृतियों, पैटर्न और सममिति जैसे विषयों को एक मेले की मजेदार यात्रा में समेटकर पूरी पुस्तक को समेटते हुए समाप्त करता है।
इस गाइड का उपयोग कैसे करें
पहले संबंधित पाठ को किताब में पढ़ें, फिर यहाँ दी गई मुख्य अवधारणा को दोबारा पढ़कर जाँचें कि बच्चे को अवधारणा समझ आई या नहीं। शुरुआती कक्षाओं में समाधान से ज़्यादा ज़रूरी है कि बच्चा गिनती, आकृतियों और रोज़मर्रा की चीज़ों से जोड़कर सीखे — इसलिए हर पाठ के बाद घर की वस्तुओं (जैसे बर्तन, खिलौने, फल) का उपयोग करके अभ्यास कराएँ।
यह किताब क्यों महत्वपूर्ण है
गणित मेला NCERT की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार तैयार की गई पाठ्यपुस्तक है, जिसमें कहानियों, खेलों, गतिविधियों और चित्रों के माध्यम से बुनियादी अवधारणाओं को विकसित करने पर ज़ोर दिया गया है। यह रटने पर जोर देने की बजाय समझ बनाने पर जौर देती है, इसलिए स्कूल और घर — दोनों जगह पर इसी तरीके से पढ़ाना सबसे फ़ायदेमंद रहता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्र. इस किताब में कुल कितने पाठ हैं?
उ. वर्तमान NEP 2026-27 संस्करण में कुल 14 मुख्य पाठ हैं।
प्र. क्या यह पुस्तक निःशुल्क डाउनलोड की जा सकती है?
उ. हाँ, NCERT की सभी पाठ्यपुस्तकें आधिकारिक रूप से निःशुल्क हैं; लिंक नीचे दिए गए कैटलॉग पेज पर मिलेंगे।
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Class 3 Maths – Notes and Extra Questions
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