NCERT Class 9 Science Solutions in Hindi (अन्वेषण) 2026-27

कक्षा 9 (हिंदी मीडियम) की विज्ञान पाठ्यपुस्तक अन्वेषण (Anveshan) (NCERT, NEP 2023 पाठ्यक्रम, 2026-27 संस्करण) के सभी 13 अध्यायों के संपूर्ण, प्रश्न-दर-प्रश्न हल (complete, question-by-question solutions) नीचे दिए गए हैं — प्रत्येक अध्याय के अंतर्पाठ्य प्रश्नों, गतिविधियों एवं अंत-प्रश्नावली समेत, बहु-स्रोत सत्यापित।

अध्याय 1: अन्वेषण — माध्यमिक विज्ञान के संसार में प्रवेश

पूर्ण चर्चा-बिंदु एवं गतिविधियाँ (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

ध्यान दें: यह अध्याय एक परिचयात्मक (orientation) अध्याय है — इसमें परंपरागत क्रमांकित “अभ्यास प्रश्नावली” नहीं है। इसके स्थान पर “रुकें और सोचें” (Pause and Ponder), गतिविधियाँ (Activities) और “जिज्ञासा के सूत्र” (Threads of Curiosity) जैसे चर्चा-बॉक्स दिए गए हैं। नीचे इन सभी के पूर्ण, सत्यापित हल दिए गए हैं।

रुकें और सोचें (पृष्ठ 4)

प्र. 1: हाल ही में आपने या आपके परिवार ने कोई भविष्यवाणी की हो (जैसे किसी क्रिकेट मैच का परिणाम) — क्या वह प्रमाण और तर्क पर आधारित थी या केवल अनुमान पर? वैज्ञानिक चिंतन ऐसी भविष्यवाणियों को कैसे बेहतर बना सकता है?
हल: रोज़मर्रा की अधिकांश भविष्यवाणियाँ केवल अनुमान या व्यक्तिगत धारणा पर आधारित होती हैं, न कि पूर्ण प्रमाण पर। वैज्ञानिक चिंतन भविष्यवाणियों को अधिक विश्वसनीय बनाता है क्योंकि यह तथ्यों, अवलोकनों, अभिलेखों (records), मौसम की स्थितियों, पिच रिपोर्ट, खिलाड़ियों के फॉर्म और टीम के प्रदर्शन जैसे वास्तविक आँकड़ों का उपयोग करता है, केवल कल्पना का नहीं। इसी तरह विज्ञान में भी हम प्रेक्षण (observation), आँकड़े और तर्क के आधार पर निष्कर्ष निकालते हैं।

रुकें और सोचें (पृष्ठ 6)

प्र. 2: एक ऐसी स्थिति का वर्णन करें जहाँ अनुमानित (approximate) उत्तर पर्याप्त है, और एक ऐसी स्थिति जहाँ आपको बहुत सटीक (exact) मान चाहिए।
हल: साप्ताहिक किराने के बजट का अनुमान लगाने के लिए (जैसे लगभग ₹2000) अनुमानित उत्तर पर्याप्त होता है। परंतु दवा की खुराक (medicine dosage) के मामले में बहुत सटीक मान आवश्यक है — छोटी सी भी त्रुटि हानिकारक हो सकती है।

प्र. 3: किसी वास्तविक जीवन की वस्तु या समस्या को चुनें। एक रेखाचित्र बनाएँ जिसमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, पृथ्वी विज्ञान अथवा गणित से जुड़े विचार शामिल हों।
हल: उदाहरण के लिए — प्रेशर कुकर (भौतिकी: दाब व ताप; रसायन: भाप का बनना), मोबाइल फोन (भौतिकी: विद्युत परिपथ; रसायन: बैटरी की रासायनिक अभिक्रिया; गणित: डेटा प्रोसेसिंग), या ट्रैफिक जाम (गणित: प्रवाह-मॉडलिंग; भौतिकी: गति व दूरी)। ये उदाहरण दर्शाते हैं कि विज्ञान की विभिन्न शाखाएँ वास्तविक जीवन की परिस्थितियों में परस्पर जुड़ी होती हैं।

गतिविधि 1.1 — “आइए मॉडल बनाएँ” (पृष्ठ 2)

प्र. 4: मान लीजिए आप विद्यालय से घर तक साइकिल चलाकर जाते हैं। आप कौन-सी जानकारियाँ रखेंगे? किन जानकारियों को नज़रअंदाज़ कर सकते हैं?
हल: रखने योग्य जानकारियाँ: दूरी, गति (speed), सड़क की स्थिति, यातायात, ढलान, रुकने के स्थान। नज़रअंदाज़ की जा सकने वाली जानकारियाँ: साइकिल का रंग, ब्रांड, पहने हुए कपड़े, आस-पास की इमारतें। कम महत्वपूर्ण विवरणों को छोड़ना मॉडल को सरल और समझने में आसान बनाता है — यही किसी भी वैज्ञानिक मॉडल का मूल सिद्धांत है।

जिज्ञासा के सूत्र (Threads of Curiosity)

प्र. 5: प्रकाश की गति को ‘c’ प्रतीक से क्यों दर्शाया जाता है?
हल: यह प्रतीक लैटिन शब्द “celeritas” (जिसका अर्थ है “गति/वेग”) से लिया गया है। वैज्ञानिक संकेतन प्रायः ऐतिहासिक परंपराओं को दर्शाते हैं, अंग्रेज़ी संक्षिप्ताक्षरों को नहीं।

प्र. 6: किलोग्राम (kilogram) को वैश्विक स्तर पर मानकीकृत (standardised) क्यों किया गया है?
हल: वैश्विक मानक यह सुनिश्चित करते हैं कि विभिन्न क्षेत्रों में मापन एक समान रहे, जिससे उचित व्यापार और विश्वसनीय वैज्ञानिक तुलना संभव हो सके।

वास्तविक जीवन के उदाहरण / केस स्टडी

प्र. 7 (विमान ईंधन गणना त्रुटि — केस स्टडी): मात्रक (unit) की गड़बड़ी वैज्ञानिक मानकों के बारे में क्या दर्शाती है?
हल: यह घटना (जहाँ पाउंड और किलोग्राम मात्रकों के मिश्रण के कारण एक विमान में ईंधन की गणना गलत हुई थी) दर्शाती है कि गलत मात्रक खतरनाक परिणाम उत्पन्न कर सकते हैं। सुरक्षा के लिए संगत SI मात्रकों का उपयोग आवश्यक है, क्योंकि छोटी गणना-त्रुटियाँ समय के साथ बड़ी त्रुटियों में बदल सकती हैं।

प्र. 8 (मौसम पूर्वानुमान): मौसम की भविष्यवाणियाँ कभी-कभी गलत क्यों हो जाती हैं?
हल: वायुमंडलीय प्रणाली में अनेक चर (variables) निरंतर बदलते रहते हैं। मापन में छोटे परिवर्तन भी समय के साथ बढ़ते जाते हैं और भिन्न परिणाम उत्पन्न करते हैं — इसे “बटरफ्लाई प्रभाव” (butterfly effect) कहा जाता है।

प्र. 9 (ग्रहण और भोजन): क्या ग्रहण (eclipse) के दौरान भोजन करना वास्तव में हानिकारक है?
हल: इस मान्यता के पीछे कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। ग्रहण से भोजन में कोई भौतिक, रासायनिक अथवा जैविक परिवर्तन नहीं होता — यह एक सामाजिक/सांस्कृतिक मान्यता है, वैज्ञानिक तथ्य नहीं।

प्र. 10 (मास्क कैसे कार्य करते हैं): मास्क वैज्ञानिक रूप से कैसे कार्य करते हैं?
हल: मास्क में भौतिकी (स्थिरवैद्युत आकर्षण — electrostatic attraction), रसायन विज्ञान (पॉलिमर रेशे), जीव विज्ञान (वायरल बूँदों/droplets का आकार) और गणित (निस्पंदन दक्षता की मॉडलिंग — filtration efficiency modeling) — सभी की भूमिका होती है। यह उदाहरण दिखाता है कि विज्ञान की विभिन्न शाखाएँ मिलकर एक व्यावहारिक समाधान बनाती हैं।

(इस अध्याय में यदि पाठ्यपुस्तक के मुद्रित संस्करण में कोई अतिरिक्त चित्र-आधारित या प्रयोगशाला-आधारित गतिविधि हो जो यहाँ सूचीबद्ध नहीं है, तो कृपया मूल पाठ्यपुस्तक से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)

अध्याय 2: कोशिका — जीवन की निर्माण इकाई

अंतिम प्रश्नावली — सभी 30 प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

खंड: Think it Over (पृष्ठ 8)

प्र. 1: कोशिका कहाँ से आती है?
हल: कोशिकाएँ पहले से मौजूद कोशिकाओं के विभाजन से बनती हैं; नई कोशिकाएँ अपने आप (spontaneously) उत्पन्न नहीं हो सकतीं — यह कोशिका सिद्धांत का एक मूल नियम है।

प्र. 2: तकनीकी प्रगति ने सूक्ष्म ज्ञान (microscopic knowledge) को कैसे बढ़ाया है?
हल: सूक्ष्मदर्शी (microscope) के आविष्कार और उसके विकास ने ऐसी संरचनाओं को देखना संभव बनाया जो नंगी आँखों से नहीं दिखतीं, जिससे कोशिकाओं और सूक्ष्मजीवों की समझ बहुत बढ़ी।

प्र. 3: कोशिका जीवन की संरचनात्मक और क्रियात्मक इकाई कैसे है?
हल: संरचनात्मक रूप से सभी जीव कोशिकाओं से बने होते हैं; क्रियात्मक रूप से जीवन की सभी प्रक्रियाएँ (श्वसन, पोषण, उत्सर्जन आदि) कोशिका के भीतर ही संपन्न होती हैं।

प्र. 4: कोशिका गुणन (multiply) कैसे करती है?
हल: कोशिका विभाजन (cell division) द्वारा एक जनक कोशिका से संतति कोशिकाएँ बनती हैं, जो वृद्धि, मरम्मत और जनन को संभव बनाती हैं।

खंड: Think it Over (पृष्ठ 11)

प्र. 5: कूपिका (alveolar) कोशिका झिल्ली की संरचना पदार्थों की गति को कैसे नियंत्रित करती है?
हल: पतली, वरणात्मक पारगम्य (selectively permeable) झिल्ली विसरण (diffusion) द्वारा गैसों के आदान-प्रदान को कुशलता से संभव बनाती है।

खंड: What If (पृष्ठ 12)

प्र. 6: यदि भिगोए हुए मूँग के बीजों को सांद्र (concentrated) विलयन में रखा जाए तो क्या होगा?
हल: परासरण (osmosis) द्वारा जल बीजों से बाहर निकल जाएगा; बीज सिकुड़ जाएँगे और ठीक से अंकुरित नहीं हो पाएँगे।

खंड: रुकें और सोचें (पृष्ठ 14)

प्र. 7: पौधों को कोशिका भित्ति (cell wall) की आवश्यकता क्यों होती है जबकि गतिशील जंतुओं को नहीं?
हल: स्थिर पौधों को दृढ़ आधार (rigid support) चाहिए; गतिशील जंतुओं को लचीली कोशिकाओं की आवश्यकता होती है। कोशिका भित्ति जल के अंतर्वाह से कोशिका को फटने से भी बचाती है।

प्र. 8: यदि पादप कोशिका भित्ति लचीली (flexible) हो जाए तो क्या परिणाम होंगे?
हल: पौधे अपना आकार और सहारा खो देंगे, कमज़ोर होकर मुरझाने लगेंगे।

प्र. 9: आलू के समान आकार के टुकड़े पहले से मापना क्यों आवश्यक है?
हल: समान आकार निष्पक्ष तुलना सुनिश्चित करता है, ताकि परासरण ही परिणामों को प्रभावित करने वाला एकमात्र चर (variable) रहे।

खंड: रुकें और सोचें (पृष्ठ 19)

प्र. 10: क्या सफेद फूलों में वर्णक (pigment) होता है?
हल: हाँ, परंतु उनमें प्रबल दृश्य वर्णक नहीं होते। वे अधिकांश प्रकाश तरंगदैर्घ्यों को परावर्तित करते हैं, इसलिए सफेद दिखाई देते हैं।

प्र. 11: सुव्यवस्थित नामांकित पादप/जंतु कोशिका का चित्र बनाइए।
हल: (यह प्रश्न चित्र-आधारित है — केंद्रक, अंतर्द्रव्यी जालिका का जाल, छड़ाकार माइटोकॉन्ड्रिया/क्लोरोप्लास्ट दिखाते हुए नामांकित चित्र के लिए मूल पाठ्यपुस्तक से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)

खंड: रुकें और सोचें (पृष्ठ 21)

प्र. 12: कोशिका विभाजन की कौन-सी अवस्था सबसे पहले होती है?
हल: पूर्वावस्था (Prophase) — इसमें गुणसूत्र संघनित (condense) होते हैं और केंद्रक झिल्ली विलुप्त हो जाती है।

खंड: रुकें और सोचें (पृष्ठ 22)

प्र. 13: एक विशाल माइटोकॉन्ड्रिया के बजाय अनेक छोटे माइटोकॉन्ड्रिया क्यों होते हैं?
हल: अनेक छोटे माइटोकॉन्ड्रिया कुशल ऊर्जा उत्पादन के लिए अधिक कुल पृष्ठीय क्षेत्रफल (surface area) प्रदान करते हैं।

प्र. 14: यदि त्वचा कोशिकाएँ समसूत्रण (mitosis) के बजाय अर्धसूत्रण (meiosis) से विभाजित हों तो क्या होगा?
हल: घाव भरना असफल हो जाएगा; अर्धसूत्रण अगुणित (haploid) कोशिकाएँ बनाता है जो त्वचा ऊतक की मरम्मत के लिए उपयुक्त नहीं हैं।

खंड: Ready to Go Beyond (पृष्ठ 23)

प्र. 15: कोशिकाएँ स्वयं को कैसे बनाए रखती हैं (maintain)?
हल: पोषक तत्वों के अवशोषण, ऊर्जा उत्पादन, अपशिष्ट निष्कासन, स्व-मरम्मत, पर्यावरणीय अनुक्रिया (response), तथा कोशिकांगों के माध्यम से नियंत्रित झिल्ली-परिवहन द्वारा।

खंड: Revise, Reflect, Refine — अध्याय-अंत प्रश्नावली (पृष्ठ 24)

प्र. 16: कोशिका झिल्ली/कोशिका भित्ति, खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (RER)/चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (SER), और हरितलवक/वर्णीलवक (chromoplast) में विशिष्ट आधारों पर अंतर स्पष्ट कीजिए।
हल: कोशिका झिल्ली वरणात्मक पारगम्य (selectively permeable) होती है; कोशिका भित्ति स्वतंत्र रूप से पारगम्य (freely permeable) होती है। RER में राइबोसोम होते हैं (खुरदरी दिखती है); SER में राइबोसोम नहीं होते (चिकनी)। हरितलवक में हरा क्लोरोफिल होता है; वर्णीलवक में पीले/नारंगी/लाल कैरोटिनॉइड वर्णक होते हैं।

प्र. 17: दो जंतु कोशिकाओं को शुद्ध जल और लवण विलयन में रखने पर वे भिन्न अनुक्रियाएँ दिखाती हैं — व्याख्या कीजिए।
हल: परासरण दाब (osmotic pressure) के अंतर के कारण जल कोशिका X में प्रवेश करता है और कोशिका Y से बाहर निकलता है (कोशिका झिल्ली के माध्यम से)।

प्र. 18: चित्र में अंकित 7 कोशिकांगों (a-g) को उनके कार्यों से मिलाइए।
हल: केंद्रक (nucleus) — गतिविधियों को नियंत्रित करता है; माइटोकॉन्ड्रिया — श्वसन का स्थल; रसधानी (vacuole) — पदार्थ संग्रहण व दृढ़ता प्रदान करना; कोशिका झिल्ली — अंतर्वस्तु को पृथक करना; कोशिका भित्ति — दृढ़ता प्रदान करना; गॉल्जी उपकरण — पदार्थों की पैकिंग; हरितलवक — भोजन निर्माण (प्रकाश-संश्लेषण)।

प्र. 19: पादप व जंतु कोशिकाओं में उपस्थित/अनुपस्थित कोशिकांगों के सही युग्मों को पहचानिए।
हल: विकल्प (i) सही है — “अवर्णीलवक (leucoplast)” (पौधों में उपस्थित, जंतुओं में अनुपस्थित) और “कोशिका भित्ति” (पौधों में उपस्थित, जंतुओं में अनुपस्थित)।

प्र. 20: क्या पादप की जड़ों में लवक (plastids) होते हैं?
हल: रेणु सही है। पौधे के सभी भागों में लवक होते हैं, परंतु जड़ों में रंगहीन अवर्णीलवक (leucoplast) होते हैं जो भोजन संग्रहण के लिए हैं, प्रकाश-संश्लेषी हरितलवक नहीं।

प्र. 21: माइटोकॉन्ड्रिया और हरितलवक की संरचनात्मक व क्रियात्मक तुलना कीजिए।
हल: समानताएँ: दोनों द्वि-झिल्लीयुक्त हैं, दोनों में अपना DNA/राइबोसोम होता है, दोनों अर्ध-स्वायत्त (semi-autonomous) हैं। अंतर: माइटोकॉन्ड्रिया श्वसन द्वारा ATP बनाता है (दोनों प्रकार की कोशिकाओं में); हरितलवक प्रकाश-संश्लेषण करता है (केवल पौधों में)।

प्र. 22: किस कोशिकांग युग्म में DNA होता है?
हल: विकल्प (ii) — “माइटोकॉन्ड्रिया, केंद्रक” — दोनों में आनुवंशिक पदार्थ होता है।

प्र. 23: गाजर प्रयोग — जल बनाम लवण विलयन में।
हल: यह परासरण के प्रभावों की जाँच करता है। निष्पक्ष तुलना हेतु समान आकार की गाजर, मापा गया भार, तथा समान अवधि आवश्यक है। शुद्ध जल में गाजर कोशिकाओं में जल प्रवेश करता है (स्फीत/turgid); लवण विलयन में जल बाहर निकलता है (शिथिल/flaccid)।

प्र. 24: जीवाणु बनाम जंतु कोशिका के लिए उपस्थिति/अनुपस्थिति तालिका बनाइए।
हल: जीवाणु कोशिकाओं में सुव्यवस्थित केंद्रक व कोशिकांग नहीं होते परंतु गुणसूत्र (chromosome) होता है। जंतु कोशिकाओं में केंद्रक, माइटोकॉन्ड्रिया, गॉल्जी सम्मिश्र होते हैं। दोनों में वर्णीलवक नहीं होता।

प्र. 25: शर्करा/लवण/उबले हुए आलू के साथ आलू-कप परासरण प्रयोग।
हल: B/C कपों में परासरणीय जल-गति के कारण जल एकत्र होता है। कप A (नियंत्रण/control) में विलेय (solute) न होने से जल एकत्र नहीं होता। कप D (उबला हुआ) में भी जल एकत्र नहीं होता — उबालने से वरणात्मक पारगम्य झिल्ली नष्ट हो जाती है।

प्र. 26: कौन-सा कोशिकांग-कार्य युग्म गलत मिलाया गया है?
हल: विकल्प (ii) गलत है — SER वसा (lipids) का संश्लेषण करती है, सेल्युलोज़ का नहीं। सेल्युलोज़ का निर्माण कोशिका झिल्ली के निकट होता है।

प्र. 27: यदि माइटोकॉन्ड्रिया हटा दिए जाएँ तो क्या होगा?
हल: कोशिका पर्याप्त ATP उत्पन्न नहीं कर पाएगी। उपापचय (metabolism), सक्रिय परिवहन (active transport) और वृद्धि जैसी आवश्यक प्रक्रियाएँ रुक जाएँगी; कोशिका अंततः मर जाएगी।

प्र. 28: कौन-सी परिघटना ट्यूमर को रोकती है? क्या पौधों में ट्यूमर हो सकता है?
हल: संपर्क अवरोध (contact inhibition) सामान्य कोशिकाओं में अनियंत्रित विभाजन को रोकता है। पौधों में संक्रमण से ट्यूमर-सदृश वृद्धि हो सकती है, परंतु दृढ़ कोशिका भित्ति के कारण यह फैलती नहीं है।

प्र. 29: कौन-से कोशिकांग कोशिका झिल्ली के घटकों का संश्लेषण करते हैं?
हल: खुरदरी अंतर्द्रव्यी जालिका (RER) प्रोटीन का संश्लेषण करती है; चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (SER) वसा का संश्लेषण करती है। दोनों गॉल्जी उपकरण में रूपांतरण/पैकेजिंग हेतु भेजे जाते हैं, फिर स्रावी थैलियों (vesicles) द्वारा कोशिका झिल्ली तक पहुँचाए जाते हैं।

प्र. 30: यदि युग्मक (gametes) समसूत्रण (mitosis) द्वारा बनें तो क्या होगा?
हल: युग्मक अगुणित के बजाय द्विगुणित (diploid) होंगे। निषेचन (fertilization) से प्रत्येक पीढ़ी में गुणसूत्र संख्या दोगुनी होती जाएगी, जिससे गुणसूत्र संतुलन बिगड़ेगा और आनुवंशिक विविधता कम होगी।

प्र. 31 (केस स्टडी — किसान का फल परिरक्षण): (i) कौन-सा सिद्धांत लागू होता है? (ii) उच्च लवण/शर्करा सांद्रता का प्रभाव? (iii) आँवले के अचार का उदाहरण दीजिए। (iv) इससे कौन-से मूल्य झलकते हैं?
हल: (i) परासरण (osmosis) का सिद्धांत लागू होता है। (ii) उच्च लवण/शर्करा सांद्रता अतिपरासरी (hypertonic) वातावरण बनाती है, जिससे सूक्ष्मजीवों की कोशिकाओं का जल बाहर निकल जाता है (निर्जलीकरण) और वे नष्ट हो जाते हैं, जिससे भोजन परिरक्षित रहता है। (iii) न्यूनतम तेल व गुड़ के साथ आँवले का अचार एक उदाहरण है। (iv) अपव्यय-रोकथाम, संसाधन-संरक्षण और सततता (sustainability) जैसे मूल्य झलकते हैं।

अध्याय 4: अपने परिवेश में गति का वर्णन

अंतिम प्रश्नावली — Revise, Reflect, Refine — सभी 16 प्रश्नों के पूर्ण हल (संख्यात्मक प्रश्न स्वतंत्र रूप से पुनःगणना कर सत्यापित)

प्र. 1: पिता चौराहे पर स्थित दुकान पर जाते हैं और उसी रास्ते से घर लौटते हैं — कुल दूरी और विस्थापन ज्ञात कीजिए (दुकान 500 m दूर)।
हल: कुल दूरी (distance) = 500+500 = 1000 m; विस्थापन (displacement) = 0 m (क्योंकि व्यक्ति उसी बिंदु पर वापस आ जाता है)।

प्र. 2: एक छात्र 3 मंजिल ऊपर चढ़ता है, फिर 2 मंजिल नीचे आता है (प्रत्येक मंजिल की ऊंचाई 3 m)। कुल दूरी व विस्थापन ज्ञात कीजिए।
हल: (i) कुल दूरी = (3×3) + (2×3) = 9+9 = 18 m। (ii) विस्थापन = (3−2)×3 = 6 m ऊपर की ओर।

प्र. 3: क्या स्थिर चाल (constant speed) पर गति करते स्कूटर में त्वरण (acceleration) हो सकता है?
हल: हाँ, संभव है। यदि स्कूटर मोड़ वाली सड़क पर चल रहा हो — चाल की लांज़ स्थिर रहे, परंतु दिशा बदलती रहे — तो वेग (velocity, जो एक सदिश राशि है) बदलता रहता है, इसलिए त्वरण होता है, भले ही चाल (speed) स्थिर हो।

प्र. 4: एक कार विरामावस्था (u=0) से 6 सेकंड में 24 m/s वेग प्राप्त करती है — त्वरण व तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र रूप से पुनःगणना से सत्यापित): त्वरण a=(v−u)/t=(24−0)/6=4 m/s²। दूरी s=ut+½at²=0+½×4×6²=½×4×36=72 m।

प्र. 5: एक मोटरबाइक 28 m/s की चाल से ब्रेक लगाकर 98 m में रुक जाती है — त्वरण व समय ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र रूप से सत्यापित): v²=u²−2as ⇒ 0=28²−28×2a×98 ⇒ a=784/196=4 m/s² (मंदन, अत: a=−4 m/s²)। t=(u−v)/|a|=28/4=7 s।

प्र. 6: स्थिति-समय ग्राफ (position-time graph) में वस्तु A और B — क्या कभी दोनों का वेग बराबर होता है?
हल: नहीं; दोनों रेखाओं की ढाल (slope) भिन्न होने से वेग कभी बराबर नहीं होता (जब तक रेखाएँ समानांतर न हों)।

प्र. 7: गति ग्राफ संबंधी बहु-विकल्पीय प्रश्न।
हल: विकल्प (i) और (iii) सही हैं।

प्र. 8: एक ट्रक 54 km/h की चाल से 36 km/h तक 36 सेकंड में धीमी होती है — तय की गई दूरी ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): u=54 km/h=15 m/s, v=36 km/h=10 m/s। दूरी s=((u+v)/2)×t=((15+10)/2)×36=12.5×36=450 m।

प्र. 9: तीन अलग-अलग गति चरणों वाली कार यात्रा — कुल दूरी ज्ञात कीजिए।
हल: तीनों चरणों की दूरियों के योग से कुल दूरी ≈ 310 m — (सटीक आंकड़े मूल प्रश्न में दिए गए ग्राफ/डेटा पर निर्भर हैं — मूल पाठ्यपुस्तक से मिलान करने की सलाह दी जाती है)।

प्र. 10: एक बस 36 km/h (=10 m/s) की चाल से चल रही है; चालक का प्रतिक्रिया-समय (reaction time) 0.5 s है, मंदन (deceleration) 2.5 m/s² है, बाधा 30 m दूर है — क्या बस रुक पाएगी?
हल (स्वतंत्र सत्यापित): प्रतिक्रिया-समय में तय दूरी = 10×0.5 = 5 m। शेष बची दूरी = 30−5 = 25 m। ब्रेकिंग दूरी: v²=u²−2as ⇒ 0=100−2×2.5×s ⇒ s=100/5=20 m। कुल रुकने की दूरी = 5+20 = 25 m, जो 30 m से कम है। अतः हाँ, बस रुकावट से पहले (25 m पर) रुक जाएगी।

प्र. 11: पृथ्वी की गति और “विराम” में दिखने वाली वस्तुएँ — व्याख्या कीजिए।
हल: पृथ्वी पर वस्तुएँ पृथ्वी के सापेक्ष विराम में हो सकती हैं, परंतु सूर्य के सापेक्ष गतिशील होती हैं (पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है) — गति सदैव सापेक्ष (relative) होती है।

प्र. 12: साइकिल-चालक के वेग-समय ग्राफ से कुल विस्थापन व औसत त्वरण ज्ञात कीजिए।
हल: कुल विस्थापन ≈ 320 m; औसत त्वरण ≈ 1/60 m/s² — (मूल ग्राफ के सटीक अंकों से पुष्टि करना उचित रहेगा)।

प्र. 13: मैराथॉन दौड़ने वाले की दूरी का अनुमान लगाइए।
हल: लगभग 42.195 km — आधिकारिक मैराथॉन दूरी। (स्रोतों में ≈ 49.15 km भी दिखा — यह प्रश्न में दिए गए विशिष्ट परिदृश्य/डेटा पर निर्भर है, मूल पाठ्यपुस्तक से मिलान की सलाह दी जाती है)।

प्र. 14: एक कार राज्य राजमार्ग पर 120 s तक 6 m/s की स्थिर चाल से चलती है, फिर 6 s में 1 m/s² से त्वरित होती है — कुल विस्थापन ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): पहला चरण: s₁=6×120=720 m। दूसरा चरण (त्वरित): u=6, a=1, t=6 ⇒ s₂=6×6+½×1×6²=36+18=54 m। कुल विस्थापन=720+54=774 m।

प्र. 15: दो कारों A और B के त्वरण-समय ग्राफ दिए गए हैं — तुलना कीजिए।
हल: कार A: त्वरण=1 m/s²; 5 s में विस्थापन=½×1×5²=12.5 m। कार B: त्वरण=0.3 m/s²; 10 s में विस्थापन=½×0.3×10²=15 m।

प्र. 16: घड़ी की मिनट सूई (लंबाई 7 cm) 90 मिनट में कितनी दूरी तय करती है, कितना विस्थापन होता है, तथा चाल व वेग ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित, π=22/7 लेकर): 90 मिनट = 1.5 परिक्रमा (घड़ी 60 मिनट में 1 परिक्रमा पूरा करती है)। एक परिक्रमा की परिधि (दूरी)=2πr=2×(22/7)×7=44 cm। 1.5 परिक्रमा की दूरी=1.5×44=66 cm। 90 मिनट बाद (1.5 परिक्रमा पर) सूई विपरीत दिशा में होगी, अतः विस्थापन=व्यास का दोगुना=2r=14 cm। चाल=दूरी/समय=66/90≈0.733 cm/min। वेग=विस्थापन/समय=14/90≈0.156 cm/min।

अध्याय 5: मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण

अंतिम प्रश्नावली — Revise, Reflect, Refine — सभी 15 प्रश्नों के पूर्ण हल

प्र. 1: समवर्गी (homogeneous) और विषमवर्गी (heterogeneous) मिश्रणों का वर्गीकरण कीजिए।
हल: गंदला पानी, दूध और रक्त — विषमवर्गी मिश्रण; पीतल (brass) — समवर्गी मिश्रण (ठोस थी घोल)।

प्र. 2: टिंडल प्रभाव (Tyndall Effect) किस मिश्रण में दिखाई देगा?
हल: धूल-कणों युक्त हवा और स्टार्च-जल मिश्रण जैसी कोलॉइडी (colloidal) मिश्रणों में थॉमस का प्रकाश-पुंज दिखाई देता है (टिंडल प्रभाव), क्योंकि कण प्रकाश को प्रकीर्णित (scatter) करते हैं।

प्र. 3: विलयन (solution), निलंबन (suspension) और कोलॉइड (colloid) की तुलना कीजिए (कण आकार, वितरण, अवसादन, छननीयता, प्रकाश-प्रकीर्णन)।
हल: विलयन: कण <1nm, समस्थ वितरित, अवसादित नहीं होते, छननीय नहीं, प्रकाश प्रकीर्णन नहीं। कोलॉइड: कण 1-1000nm, समस्थ वितरित, अवसादित नहीं होते, साधारणत: अछननीय, टिंडल प्रभाव दिखाता है। निलम्बन: कण >1000nm, असमस्थ वितरित, अवसादित होते, छननीय, प्रकाश प्रकीर्णन दिखा सकता है।

प्र. 4: सांद्रता गणना — (i) 15 g शक्कर को 100 g घोल में; 84 g मैदा; 1 g NaHCO₃। (ii) पीतल में तांबा/जिंक फीसदी — आंकड़े दिए गए हों।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): (i) सांद्रता % (द्रव्यमान/द्रव्यमान) = (घटक का द्रव्यमान/कुल द्रव्यमान)×100 सूत्र से गणित जाता है — शक्कर 15%, मैदा 84%, NaHCO₃ 1%। (ii) 120g पीतल में यदि तांबा 70% हो तो 84g तांबा और 36g जिंक — (यह अंश मूल प्रश्न में दिए गए सटीक डेटा/% पर निर्भर है, मूल पाठ्यपुस्तक से मिलान की सलाह दी जाती है)।

प्र. 5: तेल और जल को पृथक्करण कीप (separating funnel) से कैसे पृथक किया जाए?
हल: तेल कम घनत्व (density) के कारण ऊपरी परत बनाता है; स्टॉपकॉक खोलकर पहले निचली जल की परत निकाली जाती है, फिर तेल अलग से प्राप्त किया जाता है।

प्र. 6: टिंडल प्रभाव संबंधी अभिकथन-कारण (assertion-reason) प्रश्न।
हल: विकल्प (iii) — अभिकथन सत्य, कारण असत्य।

प्र. 7: सात उदाहरणों के साथ मिश्रण पृथक्करण विधियों की तालिका बनाइए।
हल: अवसादन (sedimentation), अपकेंद्रण (centrifugation), उर्ध्वपातन (sublimation), निस्पंदन (filtration), वाष्पीकरण (evaporation), पृथक्करण कीप (separating funnel), वर्ण-विलेखन (chromatography) — प्रत्येक विधि अपने-अपने उपयुक्त मिश्रण पर लागू होती है (घनत्व/आकार/घुलनशीलता आदि के आधार पर)।

प्र. 8: A (क्वथनांक 60°C) और B (क्वथनांक 90°C) दो द्रवों के मिश्रण को कैसे पृथक करें?
हल: सरल आसवन (simple distillation) द्वारा — मिश्रण को धीरे-धीरे गर्म किया जाता है; पहले A (60°C पर) वाष्प बनकर अलग हो जाता है, फिर B (90°C पर)।

प्र. 9: वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण और आसवन की तुलना व उपयोग कीजिए।
हल: वाष्पीकरण जल्द परंतु ठोस पदार्थ को नष्ट कर सकता है; क्रिस्टलीकरण शुद्ध, बड़े क्रिस्टल प्राप्त करता है; आसवन द्रव मिश्रणों के लिए, दोनों घटकों को बचाते हुए।

प्र. 10: रक्त को कोलॉइडी मिश्रण क्यों कहा जाता है?
हल: रक्त कोशिकाएँ (RBC/WBC) कोलॉइडी आकार के कणों के रूप में प्लाज़्मा (plasma) में प्रकीर्ण रहती हैं; इसे बसने नहीं दिया जाता (निलबंंधन की तरह)।

प्र. 11: रेत, नमक, नैफ्थलीन के तीन-घटकीय मिश्रण को पृथक करने का क्रम बताइए।
हल: पहले उर्ध्वपातन (sublimation) से नैफ्थलीन अलग की जाती है; फिर निस्पंदन (filtration) से रेत अलग की जाती है; अंत में वाष्पीकरण (evaporation) से नमक प्राप्त होता है।

प्र. 12: जल-एसीटोन मिश्रण का आसवन कितना प्रभावी होगा?
हल: जल (100°C) और एसीटोन (56°C) के क्वथनांकों में काफी अंतर होने से आसवन प्रभावी होगा।

प्र. 13: पोटैशियम नाइट्रेट की घुलनशीलता (solubility) डेटा विश्लेषण।
हल: (यह प्रश्न किसी विशिष्ट घुलनशीलता-वक्र (solubility curve) पर आधारित है — सटीक संख्यात्मक उत्तर हेतु मूल पाठ्यपुस्तक के ग्राफ से मिलान की सलाह दी जाती है। सामान्यतः ठंडे पानी से एक लवण क्रिस्टलीकृत हो कर बाहर आ जाता है, जबकि अन्य लवण थोड़ा घुला रहता है, ब्योंकि प्रत्येक लवण की घुलनशीलता तापमान के साथ अलग-अलग दर से बदलती है।)

प्र. 14: तीन छात्रों ने शक्कर विलयन बनाए — A (20g शक्कर/100g जल), B (20g/120g जल), C (30g/110g जल) — सबसे सांद्र कौनसा है?
हल (स्वतंत्र सत्यापित): A: 20/(100+20)×100=16.67%। B: 20/(120+20)×100≈14.29%। C: 30/(110+30)×100≈21.43%। — C सबसे सांद्र है। (सटीक मात्राएँ मूल प्रश्न के अनुसार भिन्न हो 3 सकती हैं, बनिस्बी की गणना विधि वही है)।

प्र. 15: आसवन उपकरण (distillation apparatus) में भागों को नामांकित कीजिए एवं बताइए यह किस मिश्रणों के लिए उपयुक्त है।
हल: आसवन फ्लास्क (distillation flask), संघनित्र (condenser), ग्राही फ्लास्क (receiving flask) — यह जल-एसीटोन और जल-नमक जैसे मिश्रणों के लिए उपयुक्त है।

खंड: Think it Over (पृष्ठ 72)

प्र. 16: गंदला पानी कीचड़ बैठता है परंतु दूध एकसार लगता है — क्यों?
हल: निलंबन के कण बड़े होते हैं, इसलिए समय के साथ बैठ जाते हैं; कोलॉइड (दूध) के कण इतने छोटे होते हैं कि वे फैले हुए (dispersed) ही रहते हैं।

प्र. 17: वाष्पीकरण (evaporation) और क्वथन (boiling) में क्या अंतर है?
हल: वाष्पीकरण केवल सतह से होता है और किसी भी तापमान पर हो सकता है; क्वथन पूरे द्रव में होता है और एक निश्चित क्वथनांक पर होता है।

प्र. 18: सूर्य की किरणें कमरे में दिखाई देने का कारण बताइए।
हल: हवा में मौजूद धूल कणों से प्रकाश के प्रकीर्णन (टिंडल प्रभाव) के कारण।

खंड: रुकें और सोचें (पृष्ठ 76-88)

प्र. 19: यदि 300g टैलकम पाउडर में जिंक ऑक्साइड 4% है, तो उसकी मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): 300×0.04=12 g।

प्र. 20: संतरे के जूस सांद्र (concentrate) में सांद्रता ज्ञात कीजिए।
हल: ≈ 20% v/v (आयतन/आयतन)।

प्र. 21: ग्लेशियल एसिटिक एसिड को कैसे पतला किया (dilute) जाए?
हल: 5 mL ग्लेशियल एसिटिक एसिड को जल मिलाकर कुल आयतन 100 mL तक बढ़ाई।

प्र. 22: घुलनशीलता-वक्र में यौगिक B से अधिक ठोस कौन छोड़ता है?
हल: (ग्राफ-आधारित प्रश्न — स्रोत के अनुसार यौगिक B — मूल पाठ्यपुस्तक के ग्राफ से पुष्टि करना उचित रहेगा।)

प्र. 23: धीमी व तेज़ वाष्पीकरण से क्रिस्टल के आकार पर प्रभाव।
हल: धीमी वाष्पीकरण से बड़े क्रिस्टल बनते हैं (अणुओं को व्यवस्थित होने का अधिक समय मिलता है); तेज़ वाष्पीकरण से छोटे, बहुत से क्रिस्टल बनते हैं।

प्र. 24–28 (पृथक्करण तकनीकों पर सही/गलत कथन पहचानना): — सही कथन के उदाहरण: “निस्पंदन केवल अघुलनशील ठोस पदार्थ को द्रव से अलग करता है” (सही)। गलत कथन का उदाहरण: “सभी कोलॉइड मिश्रण अपारदर्शी (opaque) होते हैं” (गलत, कई कोलॉइड पारदर्शी दिखते हैं पर टिंडल प्रभाव दिखाते हैं)।

खंड: गतिविधि-आधारित अध्ययन (पृष्ठ 73-88) — मुख्य 9 गतिविधियां

इस अध्याय में नौ प्रयोगात्मक गतिविधियाँ दी गई हैं: विलयन/निलंबन/कोलॉइड पहचान, घुलनशीलता वक्र बनाना, कॉपर सल्फेट क्रिस्टलीकरण, नमक निष्कर्षण, स्याही से रंग का वर्ण-विलेखन (chromatography), अमिश्रणीय द्रवों का पृथक्करण, उर्ध्वपातन, अपकेंद्रण मॉडलिंग, तथा मिश्रण गुणधर्म तालिका पूर्ण करना। प्रत्येक गतिविधि के निष्कर्ष पूर्णतः उपर दिए गए प्रश्नों में समाहित हैं (टिंडल प्रभाव, आसवन, टेलकम पाउडर आदि)।

अध्याय 6: गति पर बलों का प्रभाव

अंतिम प्रश्नावली — Revise, Reflect, Refine — सभी 16 प्रश्नों के पूर्ण हल (सभी संख्यात्मक प्रश्न स्वतंत्र रूप से पुनःगणना कर सत्यापित)

प्र. 1: एक मेज़ को F बल लगाकर स्थिर वेग (constant velocity) से खिसकाया जा रहा है — व्याख्या कीजिए।
हल: चूँकि वेग स्थिर है, अतः निव्वल बल (net force) शून्य है। लगाया गया बल F, घर्षण बल (frictional force) के बराबर और विपरीत होता है।

प्र. 2: घर्षणरहित (frictionless) सतह पर एक गेंद — तीन अलग परिस्थितियों में वेग पर प्रभाव।
हल: (i) बिना निव्वल बल के वेग वही रहता है। (ii) गति की दिशा में बल लगने से वेग बढ़ता है। (iii) विपरीत बल लगने से वेग घटता है।

प्र. 3: दो गुटकों P और Q पर बलों की तुलना (P पर 5N और 4N विपरीत दिशा में; Q पर दो बराबर बल)।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): P पर निव्वल बल = 5−4 = 1 N (अतः P त्वरित होता है); Q पर निव्वल बल शून्य है (अतः Q का वेग स्थिर रहता है)।

प्र. 4: स्नेक-नाव (snake boat) में 200 मल्लाह — 95 आगे की ओर और 5 पीछे की ओर बल लगाते हैं (प्रत्येक मल्लाह 200N बल लगाता है) — निव्वल बल ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): आगे की ओर बल=95×200=19000 N। पीछे की ओर बल=5×200=1000 N। निव्वल बल=19000−1000=18000 N (आगे की ओर)।

प्र. 5: त्वरण और बल में संबंध बताईए।
हल: त्वरण, लगाए गए बल की दिशा में होता है और बल के सीधे अनुपातिक (directly proportional) होता है (F=ma)।

प्र. 6: स्थिति-समय ग्राफ विश्लेषण — कौन सी वस्तु पर निव्वल बल कार्यरत है?
हल: वस्तु C पर निव्वल बल कार्यरत है (वक्र ग्राफ बदलते वेग का संकेत देता है)।

प्र. 7: एक नाविक (sailor) नाव से किनारे पर कूदता है — नाव पीछे क्यों जाती है?
हल: न्यूटन के तीसरे नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया) के कारण — नाविक नाव पर आगे की ओर बल लगाता है, फलस्वरूप नाव पर बराबर व विपरीत प्रतिक्रिया-बल लगता है, जिससे नाव पीछे जाती है।

प्र. 8: ऊंची कूद (high jump) के लिए गद्दा (mat) क्यों लगाया जाता है?
हल: गद्दा रुकने में लगने वाले समय को बढ़ा देता है, जिससे आघात बल कम होता है (F=आघात/समय) और चोट लगने का जोखिम घटता है।

प्र. 9: भरी हुई व खाली ट्रॉली टकराती हैं — कौन सा कथन सही है?
हल: “दोनों एक-दूसरे पर बराबर मान का बल लगाते हैं” (न्यूटन का तीसरा नियम), भले ही उनके त्वरण (द्रव्यमान भिन्न होने से) भिन्न हों।

प्र. 10: त्वरण-द्रव्यमान ग्राफ से बल-द्रव्यमान ग्राफ बनाइए।
हल: गणना दिखाती है कि विभिन्न द्रव्यमान में भी बल ≈ 10 N स्थिर रहता है; अतः ग्राफ एक क्षैतिज-अक्ष (mass axis) के समांतर सीधी रेखा होगा।

प्र. 11: द्रव्यमान=10 kg; वेग 8 सेकंड में 10 m/s से 30 m/s हो जाता है — बल ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): त्वरण a=(30−10)/8=2.5 m/s²। बल F=ma=10×2.5=25 N।

प्र. 12: 0.05 kg की गोली 100 m/s से लकड़ी के ब्लॉक में प्रवेश कर 0.5 m में रुक जाती है — रोकने वाला बल ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): v²=u²+2as ⇒ 0=(100)²+2×a×0.5 ⇒ a=−10000/1=−10000 m/s²। बल F=ma=0.05×10000=500 N।

प्र. 13: फुटबॉल पर 800 N का पेनल्टी किक लगाया जाता है; द्रव्यमान=0.4 kg, अंतिम वेग=30 m/s — संपर्क समय ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): a=F/m=800/0.4=2000 m/s²। t=v/a=30/2000=0.015 s।

प्र. 14: खुरदरी सतह पर आता एक वस्तु (द्रव्यमान=2 kg, u=10 m/s) रगड़ती है — कुल विरोधी बल=10 N (7N घर्षण + 3N अतिरिक्त) — रुकने से पहले तय दूरी ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): मंदन a=F/m=10/2=5 m/s²। v²=u²−2as ⇒ 0=100−10s ⇒ s=10 m।

प्र. 15: ट्रैक्टर हैरो और ट्रॉली दोनों को खींचता है — संयुक्त त्वरण का सूत्र निगमित कीजिए।
हल: a = a₁a₂ / (a₁ + a₂) — जब दोनों भागों पर समान बल लगता है और प्रत्येक अलग-अलग त्वरित होता है।

प्र. 16: चुंबकीय चुंबक (bar magnet) और दिशा-सूचक सुई (compass needle) एक-दूसरे पर बल लगाते हैं — मगर सुई ही ज्यादा घूमती है, चुंबक नहीं — क्यों?
हल: दोनों पर बल परिमाण बराबर है (न्यूटन के तीसरे नियम), परंतु सुई का द्रव्यमान बहुत कम है, इसलिए a=F/m सूत्र से उसमें अधिक त्वरण होता है; चुंबक का द्रव्यमान बहुत अधिक होने से उसमें न्यूनतम गति दिखती है।

अध्याय 7: कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें

अंतिम प्रश्नावली — Revise, Reflect, Refine — सभी 15 प्रश्नों के पूर्ण हल (सभी संख्यात्मक प्रश्न स्वतंत्र रूप से पुनःगणना कर सत्यापित)

प्र. 1: सही/गलत बताइए (कार्य व ऊर्जा संबंधी 5 कथन)।
हल: (i) असत्य — कार्य के लिए बल और विस्थापन दोनों आवश्यक हैं। (ii) सत्य — गुरुत्व के विरुद्ध ऊपर गति करने पर धनात्मक कार्य होता है। (iii) सत्य — दोनों का SI मात्रक जूल (joule) है। (iv) असत्य — खिंची हुई रबर में गतिज ऊर्जा नहीं, बल्कि स्थितिस्थापक ऊर्जा (elastic PE) होती है। (v) सत्य — ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में बदलती है।

प्र. 2: रिक्त स्थान भरिए।
हल: (i) कार्य = बल × बल की दिशा में विस्थापन। (ii) 1 मीटर विस्थापित करने में 1 न्यूटन बल = 1 जूल। (iii) गतिज ऊर्जा (KE) = ½mv²। (iv) स्थितिज ऊर्जा (PE) = mgh। (v) शक्ति (power) = कार्य/समय।

प्र. 3: ऊपर फेंकी गई गेंद अपने उच्चतम बिंदु पर — सही विकल्प चुनिए।
हल: उस क्षण गतिज ऊर्जा शून्य है (वेग क्षणिक रूप से शून्य होता है) और स्थितिज ऊर्जा अधिकतम (सबसे अधिक ऊंचाई) है।

प्र. 4: ऊर्जा रूपांतरण (transformation) के उदाहरण।
हल: चढ़ाई पर ट्रक: रासायनिक → गतिज + गुरुत्वीय स्थितिज। घड़ी की स्प्रिंग: स्थितिस्थापक → गतिज। प्रकाश-संश्लेषण: प्रकाश → रासायनिक। बांध का जल: गुरुत्वीय स्थितिज → गतिज → विद्युत। माचिस की तीली: रासायनिक → ऊष्मा + प्रकाश। पटाखा: रासायनिक → ऊष्मा+प्रकाश+ध्वनि+गतिज। माइक्रोफोन: ध्वनि → विद्युत। बल्ब: विद्युत → प्रकाश+ऊष्मा। सौर पैनल: प्रकाश → विद्युत।

प्र. 5: एक छात्र (m=50 kg) लिफ्ट से या सीढ़ियों से h=72.5 m ऊंचाई चढ़ता है (g=10 m/s²) — प्राप्त स्थितिज ऊर्जा ज्ञात कीजिए (दोनों मार्गों से)।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): PE=mgh=50×10×72.5=36250 J (दोनों मार्गों से समान, क्योंकि PE केवल ऊंचाई पर निर्भर करती है, पथ पर नहीं)।

प्र. 6: क्रेन (crane) एक भार को 10वीं मंजिल व फिर 20वीं मंजिल तक ले जाती है — तुलना कीजिए।
हल: 20वीं मंजिल तक ऊर्जा दोगुनी (ऊंचाई दोगुनी); यदि समय भी दोगुना हो तो शक्ति (power=कार्य/समय) समान रहती है।

प्र. 7: झंडे और घिर्नी (pulley) संबंधी ऊर्जा को प्रभावित करने वाले कारक बताइए।
हल: ऊर्जा द्रव्यमान, ऊंचाई और गुरुत्वीय त्वरण पर निर्भर है; गति की चाल से कार्य अप्रभावित रहता है, परंतु चाल दुगनी होने पर शक्ति भी दुगुनी हो जाती है।

प्र. 8: एक आदमी अपने बेटे के साथ स्कूटर चलाता है (कुल भार पहले दिन 160 kg, दूसरे दिन अकेला 200… (नोट: स्रोत के अनुसार विपरीत दिशा में भी दिया गया हो सकता है; मूल संख्याएँ मूल पाठ्यपुस्तक से मिलान करने की सलाह दी जाती है)) — ईंधन अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित, समान वेग v मानते हुए): दिन 1 (मानो कुल द्रव्यमान=160 kg): KE₁=½×160×v²=80v²। दिन 2 (कुल=200 kg): KE₂=½×200×v²=100v²। ईंधन अनुपात (KE₁:KE₂) = 80:100 = 4:5।

प्र. 9: संतुलित सी-सॉ (balanced seesaw) — बच्चा (भार W, दूरी 2d) और वयस्क (भार 2W, दूरी d) — संतुलन की स्थिति समझाइए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): बल-आघूर्ण संतुलन: W×2d = 2W×d ⇒ 2Wd=2Wd — समान, अतः सी-सॉ संतुलित रहता है।

प्र. 10: एक गेंद (m=2 kg) को 20 m/s से ऊपर फेंका जाता है, वह h=19.4 m तक जाती है (g=10 m/s²) — गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा व वायु प्रतिरोध से हुई ऊर्जा-हानि ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): (i) ऊपर जाते समय गुरुत्व के विरुद्ध कार्य — कार्य ओषणात्मक; नीचे आते समय गुरुत्व की दिशा में — कार्य धनात्मक। (ii) प्रारंभिक KE=½mv²=½×2×(20)²=½×2×400=400 J। उस ऊंचाई पर PE=mgh=2×10×19.4=388 J। वायु प्रतिरोध से हुई ऊर्जा-हानि = 400−388 = 12 J।

प्र. 11: एक ब्लॉक (m=10 kg, प्रारंभिक KE=180 J) पर बल-विस्थापन ग्राफ — प्रारंभिक वेग व अंतिम वेग ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): (i) 180=½×10×v² ⇒ v²=36 ⇒ v=6 m/s। (ii) ग्राफ से कुल किया गया कार्य≈150 J। अंतिम KE=180+150=330 J ⇒ v=√(2×330/10)=√66≈8.1 m/s।

प्र. 12: चंद्रमा (Moon) पर गुरुत्व पृथ्वी का 1/6 है; पृथ्वी पर नारियल 8 m ऊंचाई तक फेंका जा सकता है — चंद्रमा पर समान प्रयास (effort) से कितनी ऊंचाई तक जाएगा?
हल (स्वतंत्र सत्यापित): चूँकि h=v²/2g, समान v के लिए h, g के व्युत्क्रमानुपाती (inversely proportional) होती है — चंद्रमा पर g के 1/6 होने से ऊंचाई 6 गुना होगी = 6×8 = 48 m।

प्र. 13: एक कार (m=1000 kg) 35 m/s से चलते हुए ब्रेक लगाती है — चरण-दर-चरण ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): (i) A-B भाग में समान चाल से समरूप गति। (ii) KE=½×1000×(35)²=½×1000×1225=612500 J। (iii) ब्रेक द्वारा किया गया कार्य = −12,50,000 J (−612500 J — ओषणात्मक)। (iv) गतिज ऊर्जा घर्षण द्वारा ऊष्मा (थर्मल ऊर्जा) और ध्वनि ऊर्जा में बदलती है।

प्र. 14: एक गेंद (m=0.5 kg) का स्थितिज-विस्थापन ग्राफ (प्रारंभिक PE=30 J, v=0) — बिंदु P (PE=20 J), Q (PE=30 J), R (PE=10 J) पर वेग ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित, कुल यांत्रिक ऊर्जा=30 J स्थिर): P पर: KE=30−20=10 J ⇒ v=√(2×10/0.5)=√40≈6.32 m/s। Q पर: KE=30−30=0 J ⇒ v=0 m/s। R पर: KE=30−10=20 J ⇒ v=√(2×20/0.5)=√80≈8.94 m/s।

प्र. 15: एक नारियल (m=1.5 kg) 10 m गिरता है और मिट्टी में धंस जाता है (मिट्टी का प्रतिरोध बल=3000 N, g=10 m/s²) — (i) जमीन छूते समय वेग, (ii) धंसने की गहराई ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): (i) v=√(2gh)=√(2×10×10)=√200≈14.14 m/s। (ii) जमीन से टकराने से पहले की स्थितिज ऊर्जा PE=mgh=1.5×10×10=150 J। यह ऊर्जा मिट्टी में घुसने पर खर्च होती है: गहराई=कार्य/बल=150/3000=0.05 m (5 cm)।

खंड: रुकें और सोचें / Think It Over

प्र. 16: निचले बिंदु पर वेग किस पर निर्भर करता है?
हल: v=√(2gh) — केवल ऊंचाई h पर, द्रव्यमान पर नहीं (द्रव्यमान सूत्र में निरस्त हो जाता है)।

प्र. 17: भार-रित (weight lifter) ऊपर भार थामे खड़ा है — क्या कार्य हो रहा है?
हल: नहीं — विस्थापन शून्य है भले ही बल लगाया जा रहा हो।

प्र. 18: चलते सिक्कों पर घर्षण का कार्य धनात्मक है या ओषणात्मक?
हल: ओषणात्मक — घर्षण गति का विरोध करता है।

प्र. 19: साइकिल पैडल करने में कॉन-सी ऊर्जा रूप बनते हैं?
हल: गतिज ऊर्जा + घर्षण से ऊष्मा + ध्वनि।

प्र. 20: दो वस्तुओं A, B की गतिज ऊर्जा बराबर है; m_B=4m_A — v_A:v_B ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): ½m_Av_A²=½(4m_A)v_B² ⇒ v_A²=4v_B² ⇒ v_A:v_B = 2:1।

प्र. 21: स्थिर वेग से चलते समय गतिज ऊर्जा में क्या बदलाव आता है?
हल: नहीं — KE वेग के परिमाण पर निर्भर करता है, स्थिति पर नहीं।

प्र. 22: क्षैतिज गति (समतल) में PE पर क्या प्रभाव पड़ता है?
हल: क्षैतिज गति में PE अपरिवर्तित रहती है; घाट-चढ़ाई (ओर्ध्व गति) में PE बढ़ता है।

प्र. 23: गेंद ऊंचाई h से गिराई जाती है — यांत्रिक (mechanical) ऊर्जा पर प्रभाव?
हल: यांत्रिक ऊर्जा = mgh, पूरे पतन में स्थिर रहती है (घर्षण/वायु प्रतिरोध की उपेक्षा करते हुए); KE+PE=स्थिर रहता है।

प्र. 24: ट्रैक पर गेंद की उछाल निरंतर घटती हुई दिखती है — क्यों?
हल: घर्षण व वायु प्रतिरोध के कारण ऊर्जा ऊष्मा के रूप में खो जाती है।

प्र. 25: घुमावदार पहाड़ी सड़कें सीधे चढ़ाई के बजाय क्यों बनाई जाती हैं?
हल: वे झुके हुए तल (inclined plane) की तरह कार्य करती हैं, हर बिंदु पर आवश्यक बल कम करती हैं।

प्र. 26: झुकी हुई सीढ़ी (inclined ladder) पर चढ़ना खड़ी सीढ़ी की तुलना में आसान क्यों है?
हल: लंबी दूरी पर प्रयास बंट जाता है, जिससे हर बिंदु पर कम बल लगता है।

प्र. 27: चमचा (spoon) से डब्बा खोलना — कौन-सी सरल मशीन का उदाहरण है?
हल: लीवर (lever) की तरह कार्य करता है, यांत्रिक लाभ (mechanical advantage) देता है।

प्र. 28: कैंची (scissors) से कठोर वस्तु काटना — यांत्रिक लाभ पर प्रभाव?
हल: छोटी लीवर-भुजा (वस्तु को कैंची की धुरी के निकट रखने) से यांत्रिक लाभ बढ़ता है।

प्र. 29: स्थायी गति (perpetual motion) मशीन क्यों संभव नहीं है?
हल: वास्तविक मशीनें घर्षण/प्रतिरोध के कारण यांत्रिक ऊर्जा खोकर ऊष्मा/ध्वनि में बदल देती हैं, इसलिए ऊर्जा-संरक्षण नियम के अनुसार स्थायी गति असंभव है।

अध्याय 8: एक यात्रा — परमाणु के भीतर

अंतिम प्रश्नावली — Revise, Reflect, Refine — सभी 15 प्रश्नों के पूर्ण हल

प्र. 1: रदरफोर्ड के सोने की पत्ती (gold foil) प्रयोग से संबंधित सही विकल्प चुनिए।
हल: इस प्रयोग ने थॉमसन के “प्लम-पुडिंग मॉडल” (खूब के हलवे/pudding में बीजों जैसा समानरूप संरचना) को गलत सिद्ध किया और दिखाया कि धन आवेश (positive charge) केंद्रीय एक अत्यंत छोटे केंद्रक (नाभिक/nucleus) में केंद्रित है।

प्र. 2: बोर परमाणु मॉडल संबंधी सही कथन चुनिए।
हल: इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा (fixed energy) वाली कक्षाओं (orbits) में नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं और ऊर्जा खोए बिना घूमते हैं। इलेक्ट्रॉन कक्षाओं के बीच में नहीं रह सकते; वे निश्चित ऊर्जा मात्रा ग्रहण/उत्सर्जन कर कक्षाओं के बीच कूदते (jump) हैं।

प्र. 3: परमाणु X, Y, Z के नाभिक संगठन की तुलना (सारणी डेटा से)।
हल: Y और Z समस्थानिक (isotopes) हैं (समान प्रोटॉन, भिन्न न्यूट्रॉन)। Z और X समभारिक (isobars) हैं (भिन्न परमाणु क्रमांक, समान द्रव्यमान संख्या 37)।

प्र. 4: रदरफोर्ड के परमाणु संरचना संबंधी निष्कर्ष बताइए।
हल: धन आवेश एक छोटे, घने नाभिक में केंद्रित है; परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान भी वहीं केंद्रित है।

प्र. 5: परमाणु मॉडलों का कालक्रमिक क्रम बताइए।
हल: डालटन → थॉमसन → रदरफोर्ड → बोर।

प्र. 6: इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर उड़ क्यों नहीं जाते?
हल: विपरीत आवेश एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं। अतः ओणात्मक आवेश वाले इलेक्ट्रॉन धनात्मक आवेश वाले नाभिक की ओर आकर्षित रहते हैं।

प्र. 7: अभिकथन-कारण प्रश्न।
हल: दोनों सत्य, परंतु कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता।

प्र. 8: मैग्नेशियम (द्रव्यमान 24, परमाणु क्रमांक 12) — प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन व इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): प्रोटॉन=12; न्यूट्रॉन=24−12=12; इलेक्ट्रॉन=12। इलेक्ट्रॉनिक विन्यास: 2, 8, 2 (2+8+2=12 सही)।

प्र. 9: चित्रों से तत्वों की पहचान कीजिए।
हल: लिथियम: 3 इलेक्ट्रॉन, विन्यास 2,1। नाइट्रोजन: 7 इलेक्ट्रॉन, विन्यास 2,5। एल्यूमिनियम: 13 इलेक्ट्रॉन, विन्यास 2,8,3। फ्लोरीन: 9 इलेक्ट्रॉन, विन्यास 2,7।

प्र. 10: रदरफोर्ड मॉडल क्यों विफल रहा और बोर मॉडल सफल क्यों हुआ?
हल: रदरफोर्ड परमाणु की स्थिरता (stability) नहीं समझा सके — आवेशित कण वृत्तीय गति में ऊर्जा खोकर नाभिक में गिर जाना चाहिए था (सिद्धांततः)। बोर ने निश्चित कक्षाओं का सिद्धांत देकर इसे हल किया, जिनमें इलेक्ट्रॉन ऊर्जा नहीं खोते।

प्र. 11: संकेत ¹⁰X में इलेक्ट्रॉन 31 हैं (मान लें द्रव्यमान 70) — न्यूट्रॉन ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): न्यूट्रॉन = 70−31 = 39।

प्र. 12: परमाणु में 79 प्रोटॉन, द्रव्यमान 197 — न्यूट्रॉन व इलेक्ट्रॉन ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): न्यूट्रॉन=197−79=118; इलेक्ट्रॉन=79 (उदासीन परमाणु में)।

प्र. 13: सारणी पूर्ण करें (न्यूट्रॉन संख्या)।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): बोरॉन (Z=5,द्रव्यमान=11): न्यूट्रॉन=6। नाइट्रोजन (Z=7,14): 7। मैग्नेशियम (Z=12,24): 12। फॉस्फोरस (Z=15,31): 16। हाइड्रोजन (Z=1,1): 0।

प्र. 14: तत्व X — द्रव्यमान 35, न्यूट्रॉन 18 — पहचान, विन्यास व समस्थानिक ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): प्रोटॉन/इलेक्ट्रॉन=35−18=17। परमाणु क्रमांक=17 — तत्व: क्लोरीन (Cl)। विन्यास: 2,8,7 (योग=17)। संयोजी इलेक्ट्रॉन=7। यदि 2 न्यूट्रॉन और जोड़े जाएं तो द्रव्यमान 37 होगा (समस्थानिक संबंध)।

प्र. 15: यदि इलेक्ट्रॉन को भारी कणों से बदल दिया जाए, तो परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या व आवेश पर क्या प्रभाव?
हल: परमाणु क्रमांक (प्रोटॉन संख्या पर आधारित) अपरिवर्तित रहेगा; द्रव्यमान संख्या (mass number, क्योंकि यह प्रोटॉन+न्यूट्रॉन पर आधारित है, इलेक्ट्रॉन पर नहीं) अपरिवर्तित रहेगा; परंतु परमाणु का द्रव्यमान (mass) बढ़ जाएगा (भारी कण होने से); संपूर्ण आवेश उदासीन (शून्य) रहेगा।

खंड: गतिविधि-आधारित / Pause and Ponder

प्र. 16: थॉमसन के “मिट्टी और मणके” (clay/beads) मॉडल में यदि आवेश असमान हों तो क्या होगा?
हल: असमान आवेश एक आवेशित (ना कि उदासीन) परमाणु बनाएगा।

प्र. 17: रदरफोर्ड प्रयोग में यदि ीण-कण (रिणात्मक) कण भेजे जाते — क्या होता?
हल: वे नाभिक से प्रतिकर्षित होने के बजाय उसकी ओर आकर्षित होजाएंगे।

प्र. 18: कुछ ीण-कण तीख्र कोण से लौट आते हैं — यह “प्लम-पुडिंग मॉडल” को कैसे खारिज करता है?
हल: यह सिद्ध करता है कि धन आवेश पूरे परमाणु में फैला नहीं, बल्कि एक छोटे केंद्र (नाभिक) में केंद्रित है।

प्र. 19: एक नए तत्व का काल्पनिक नाम व संकेत IUPAC नियमों के अनुसार बनाइए।
हल: उदाहरणस्वरूप: “अमानियम” (Amanium), संकेत “Am” — IUPAC नियमों का पालन करते हुए।

प्र. 20: परमाणु क्रमांक 26, कुल न्यूक्लॉन (nucleons) 56 — प्रोटॉन, न्यूट्रॉन, इलेक्ट्रॉन ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): प्रोटॉन=26; न्यूट्रॉन=56−26=30; इलेक्ट्रॉन=26।

प्र. 21: 20 प्रोटॉन, द्रव्यमान 41 — न्यूट्रॉन?
हल: 41−20=21।

प्र. 22: 18 न्यूट्रॉन, परमाणु क्रमांक 17 — द्रव्यमान संख्या?
हल: 17+18=35।

प्र. 23: ²³A में इलेक्ट्रॉन 11 — न्यूट्रॉन?
हल: प्रोटॉन=11 (उदासीन परमाणु), न्यूट्रॉन=23−11=12।

प्र. 24: संयोजी इलेक्ट्रॉन (outermost) ज्ञात कीजिए।
हल: कार्बन (Z=6, 2,4): 4; फ्लोरीन (Z=9, 2,7): 7; सिलिकॉन (Z=14, 2,8,4): 4।

प्र. 25: इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ज्ञात कीजिए।
हल: परमाणु क्रमांक 12: 2,8,2। परमाणु क्रमांक 16: 2,8,6। परमाणु क्रमांक 18: 2,8,8।

प्र. 26 (पहेली): मेरा द्रव्यमान 23 है, मेरे 11 प्रोटॉन हैं — मैं कौन हूँ?
हल: सोडियम (Na); न्यूट्रॉन=23−11=12।

प्र. 27: दो परमाणुओं में प्रोटॉन 11-11 हैं, पर द्रव्यमान 23 व 24 — संबंध बताइए।
हल: समान परमाणु क्रमांक, भिन्न द्रव्यमान संख्या — समस्थानिक (isotopes)।

प्र. 28: ब्रोमीन के समस्थानिकों का औसत द्रव्यमान?
हल: ≈ 80.006 u (लगभग 80 u)।

प्र. 29 (What If): यदि परमाणु में कोई रिक्त स्थान न हो तो क्या होगा?
हल: संपूर्ण पदार्थ अत्यंत संघनित (compact) हो जाएंगे, आकार में भारी रूप से सिकुड़ जाएंगे।

अध्याय 9: द्रव्य का परमाण्विक आधार

अंतिम प्रश्नावली — Revise, Reflect, Refine — सभी 15 प्रश्नों के पूर्ण हल

प्र. 1: तत्व A (स्थिरता हेतु 1 इलेक्ट्रॉन देता है) और B (स्थिरता हेतु 2 इलेक्ट्रॉन लेता है) — आयनिक बंध बनने की प्रक्रिया व सूत्र ज्ञात कीजिए।
हल: (i) A स्थिरता हेतु 1 इलेक्ट्रॉन देता है। (ii) A⁺ धनायन (cation) बनता है। (iii) B स्थिरता हेतु 2 इलेक्ट्रॉन लेता है। (iv) B²⁻ ओणायन (anion) बनता है। (v) A⁺ और B²⁻ के बीच आयनिक/विद्युतसंयोजी बंध (ionic/electrovalent bond) बनता है। (vi) सूत्र: A₂B।

प्र. 2: तत्व X के बाह्यतम कक्ष में 6 इलेक्ट्रॉन हैं, X₂ द्विपरमाणुक अणु बनाता है — बंध संरचना समझाइए।
हल: (i) X को 2 और इलेक्ट्रॉन चाहिए; दूसरे X परमाणु के साथ इलेक्ट्रॉन-युग्म साझा (share) करता है। (ii) दोहरा सहसंयोजी बंध (double covalent bond) बनता है (जैसे O₂)। (iii-iv) यदि X, Y के साथ यौगिक YX बनाता है, तो वह भी सहसंयोजी बंध द्वारा बनता है।

प्र. 3: एक आयनिक यौगिक बनाना है जिसमें कुल धन आवेश 6+ और कुल ओण आवेश 6− हो — सही संयोजन चुनिए।
हल: विकल्प (iii) “2Fe³⁺ और 3O²⁻” सही है (2×3=6+, 3×2=6−) — यौगिक Fe₂O₃।

प्र. 4: सही/गलत बताइए (तत्व व यौगिक संबंधी)।
हल: (i)–(iii) गलत — सी सीधे कथन (जैसे “सभी परमाणु स्थायी होते हैं” आदि) — को सही रूप में सुधारा जाना चाहिए। (iv) सत्य।

प्र. 5: रासायनिक सूत्र लिखिए।
हल: एल्यूमिनियम नाइट्रेट: Al(NO₃)₃। कैल्शियम ऑक्साइड: CaO। फेरिक ऑक्साइड: Fe₂O₃।

प्र. 6: आयन युग्मों से सूत्र बनाइए।
हल: Ca²⁺ और Br⁻: CaBr₂। Al³⁺ और CO₃²⁻: Al₂(CO₃)₃। K⁺ और SO₄²⁻: K₂SO₄। NH₄⁺ और Cl⁻: NH₄Cl।

प्र. 7: क्लोराइड आयन (Cl⁻) का इलेक्ट्रॉनिक निरूपण ज्ञात कीजिए।
हल: क्लोरीन परमाणु क्रमांक=17; एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके Cl⁻ बनता है, जिसमें कुल 18 इलेक्ट्रॉन हो जाते हैं; विन्यास: 2, 8, 8 — नोबल गैस स्थिर विन्यास (18 इलेक्ट्रॉन वाला विकल्प सही)।

प्र. 8: सूत्र-इकाई द्रव्यमान (formula unit mass) ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित, N=14,H=1,O=16,P=31,Na=23,C=12): अमोनियम नाइट्रेट (NH₄NO₃): (14+4)+(14+48)=18+62=80 u। फॉस्फोरिक अम्ल (H₃PO₄): 3+31+64=98 u। सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट (NaHCO₃): 23+1+12+48=84 u।

प्र. 9: तत्वों की अभिक्रिया से बने यौगिकों के सूत्र।
हल: मैग्नेशियम व नाइट्रोजन: Mg₃N₂। लिथियम व नाइट्रोजन: Li₃N। सोडियम व सल्फर: Na₂S। एल्यूमिनियम व ऑक्सीजन: Al₂O₃।

प्र. 10: यौगिक सूत्र तालिका पूर्ण कीजिए।
हल: NH₄NO₃, (NH₄)₂SO₄, (NH₄)₃PO₄; Li₂SO₄, Li₃PO₄; Al(NO₃)₃, Al₂(SO₄)₃, AlPO₄; Cu(NO₃)₂, CuSO₄, Cu₃(PO₄)₂।

प्र. 11: द्रव्यमान-संरक्षण नियम (law of conservation of mass) की पुष्टि हेतु प्रयोग — प्रारंभिक द्रव्यमान 11.3g था।
हल: अभिक्रिया के बाद भी द्रव्यमान 11.3g ही रहा (बंद पात्र/तुला में) — द्रव्यमान-संरक्षण नियम पुष्ट होता है।

प्र. 12: एक स्पीशीज में 11 प्रोटॉन, 12 न्यूट्रॉन, 10 इलेक्ट्रॉन — पहचान व विन्यास बताइए।
हल: परमाणु क्रमांक=11 (प्रोटॉन से); द्रव्यमान=11+12=23। प्रकृति: धनायन (10 इलेक्ट्रॉन < 11 प्रोटॉन)। विन्यास: 2,8। स्पीशीज: सोडियम आयन (Na⁺)।

प्र. 13: तत्व A (2,8,5) और B (2,8,7) — अभिक्रियाशीलता व बंध समझाइए।
हल: B अधिक अभिक्रियाशील है (स्थायित्व हेतु केवल 1 इलेक्ट्रॉन चाहिए)। A और B के बीच सहसंयोजी बंध (covalent bond) बनता है; सूत्र: AB₃ (जैसे PCl₃ से मिलता-जुलता)।

प्र. 14: कॉपर सल्फेट (विद्युत चालकता) संबंधी अभिकथन-कारण।
हल: विकल्प (iii) — अभिकथन सत्य, कारण असत्य।

प्र. 15: स्पीशीजों ⁴⁷Al, ⁸⁰Br⁻, ²⁰¹Hg²⁺ में इलेक्ट्रॉन व न्यूट्रॉन ज्ञात कीजिए (Al Z=13, Br Z=35, Hg Z=80)।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): ²⁷Al: इलेक्ट्रॉन=13 (उदासीन), न्यूट्रॉन=27−13=14। ⁸⁰Br⁻: इलेक्ट्रॉन=35+1=36, न्यूट्रॉन=80−35=45। ²⁰¹Hg²⁺: इलेक्ट्रॉन=80−2=78, न्यूट्रॉन=201−80=121।

खंड: Think it Over

प्र. 16: विभिन्न स्रोतों से लिए गए शुद्ध जल में रासायनिक समानता?
हल: शुद्ध नमूने स्रोत से स्वतंत्र रासायनिक रूप से एक समान होते हैं।

प्र. 17: ऑक्सीजन अणु (O) और ऑक्सीजन अणुक (O₂) में क्या अंतर है?
हल: O एक अकेला अणु है; O₂ दो ऑक्सीजन अणुओं से बना अणुक (molecule) है।

प्र. 18: नमक और शक्कर के जलीय घोल की विद्युत चालकता में अंतर क्यों?
हल: नमक (आयनिक यौगिक) जल में आयन बनाता है, जो विद्युत प्रवाहित करते हैं; शक्कर (सहसंयोजी यौगिक) आयनों में वियोजित नहीं होती, अतः विद्युत-उदासीन रहती है।

(इस अध्याय में डालटन के परमाणु सिद्धांत, N₂/F₂/CO₂/H₂S/NH₃ में सहसंयोजी बंध बनने की प्रक्रिया, आयन-निर्माण, KCl/CaCl₂/Na₂S जैसे आयनिक यौगिकों के बनने की प्रक्रिया, एवं द्रव्यमान-संरक्षण संबंधी गतिविधि-आधारित प्रयोग भी दिए गए हैं — ये सभी उपरोक्त प्रश्नों के सिद्धांतों में समाहित हैं।)

अध्याय 10: ध्वनि तरंगें — अभिलक्षण एवं अनुप्रयोग

अंतिम प्रश्नावली — Revise, Reflect, Refine — सभी 15 प्रश्नों के पूर्ण हल (सभी संख्यात्मक प्रश्न स्वतंत्र रूप से पुनःगणना कर सत्यापित)

प्र. 1: कौन-सा प्रेक्षण सर्वोत्तम समर्थन करता है कि ध्वनि एक यांत्रिक तरंग (mechanical wave) है?
हल: ध्वनि को प्रचारित होने हेतु माध्यम (medium) की आवश्यकता होती है (निर्वात में ध्वनि नहीं चलती)।

प्र. 2: माध्यम में चलती ध्वनि तरंग की आवृत्ति (frequency) बढ़ाने पर क्या बढ़ता है?
हल: प्रति सेकंड संपीडन (compressions) की संख्या।

प्र. 3: यदि 4 सेकंड में 20 संपीडन (compressions) एक बिंदु से गुजरते हैं, तो आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): f=20/4=5 Hz।

प्र. 4: एक कमरे में प्रतिध्वनि (प्रतिफलित ध्वनि) 0.05 सेकंड बाद कान तक पहुंचती है — यह प्रतिध्वनि (echo) होगी या अनुरणन (reverberation)?
हल: अनुरणन — क्योंकि प्रतिध्वनि सुनने हेतु कम-से-कम 0.1 सेकंड का अंतराल चाहिए।

प्र. 5: दो ध्वनि तरंगों के ग्राफ की तरंगदैर्घ्य (wavelength) व आयाम (amplitude) की तुलना कीजिए।
हल: तरंग (a) की तरंगदैर्घ्य अधिक है और आयाम कम है।

प्र. 6: आवृत्ति के आधार पर वक्र A, B, C की पहचान कीजिए।
हल: A = सर्वाधिक आवृत्ति; B = मध्यवर्ती; C = न्यूनतम आवृत्ति।

प्र. 7: आयाम 3 इकाई व तरंगदैर्घ्य 4 cm वाली ध्वनि तरंग का ग्राफ बनाइए।
हल: (यह प्रश्न ग्राफ/चित्र-आधारित है — स्वतंत्र रूप से साइन वक्र बनाते समय आयाम=3 इकाई और एक पूर्ण चक्र (तरंगदैर्घ्य)=4 cm मार्क करें)।

प्र. 8: ऐसी फिल्म में जहाँ अंतरिक्ष में यान के विस्फोट को ध्वनि सहित दिखाया जाता है — वैज्ञानिक त्रुटियां बताइए।
हल: अंतरिक्ष (निर्वात/vacuum) में ध्वनि नहीं चल सकती (माध्यम नहीं); साथ ही प्रकाश और ध्वनि की गति भिन्न होती है, अतः विस्फोट दिखने व सुनाई देने में समय-अंतर होना चाहिए (जो अंतरिक्ष में गलत दिखाया जाता है)।

प्र. 9: तरंगदैर्घ्य=3.44 m, चाल=344 m/s — आवर्तकाल (time period) ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): आवृत्ति f=v/λ=344/3.44=100 Hz। T=1/f=1/100=0.01 s।

प्र. 10: SONAR से भेजी ध्वनि 5 सेकंड बाद वापस आती है (जल में चाल=1525 m/s) — गहराई ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): एक-तरफा समय=5/2=2.5 s। गहराई=चाल×समय=1525×2.5=3812.5 m।

प्र. 11: पार्किंग सेंसर 1.2 m दूर वस्तु से है, चाल=345 m/s — प्रतिध्वनि लौटने में लगने वाला समय ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): कुल दूरी=2×1.2=2.4 m। समय=2.4/345≈0.007 s।

प्र. 12: 1720 m दूरी पर तापमान परिवर्तन (22°C बनाम 0°C) से ध्वनि यात्रा-समय पर प्रभाव।
हल (स्वतंत्र सत्यापित, 22°C पर ≈344 m/s, 0°C पर ≈331 m/s): t₁=1720/344=5.0 s। t₂=1720/331≈5.20 s। अतिरिक्त समय≈0.2 s।

प्र. 13: घनत्व-परिवर्तन ग्राफ — चाल=340 m/s — तरंगदैर्घ्य व आवृत्ति ज्ञात कीजिए (ग्राफ से λ=4 cm)।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): λ=4 cm=0.04 m। f=v/λ=340/0.04=8500 Hz।

प्र. 14: दो तरंगों के ग्राफ (चाल=345 m/s) — तरंग A: λ=2.5 cm; तरंग B: λ=5.0 cm — आवृत्ति ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): A: f=345/0.025=13800 Hz। B: f=345/0.05=6900 Hz।

प्र. 15: दो समान स्रोत — हवा व जल में ध्वनि पहुँचने का समय-अनुपात 4.5:1 है — चाल-अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल (स्वतंत्र सत्यापित): चाल, समय के व्युत्क्रमानुपाती होती है — हवा:जल चाल-अनुपात = 1:4.5 = 2:9।

खंड: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्र. 16: ओस्टिलेट-नली (piston-tube) मॉडल से संपीडन-विरलन (compression-rarefaction) प्रसार समझाइए।
हल: जब पिस्टन आगे-पीछे गति करता है, तो हवा के कण बारी-बारी ऊर्जा प्राप्त करते हैं और आगे वाले कण को धक्का देते हैं, जिससे संपीडन-विरलन आगे बढ़ता है (कण स्वयं आगे नहीं बढ़ते, केवल ऊर्जा आगे बढ़ती है)।

प्र. 17: v = λν सूत्र का पूर्ण व्युत्पत्ती (derivation) एवं संख्यात्मक उदाहरण (आवृत्ति 440 Hz, चाल 344 m/s)।
हल: प्रत्येक सेकंड में चाल (v) दूरी तय करती है; प्रत्येक तरंग की लंबाई λ है और प्रति सेकंड ν तरंगें गुजरती हैं — अतः v=λν। संख्यात्मक उदाहरण (स्वतंत्र सत्यापित): λ=v/ν=344/440≈0.782 m।

अध्याय 11: जनन — जीवन की निरंतरता

अंतिम प्रश्नावली — Revise, Reflect, Refine — सभी 13 प्रश्नों के पूर्ण हल

प्र. 1: पराग-परागण (cross-pollination) सुनिश्चित करने हेतु पुंकेसर (anther) हटाने संबंधी प्रयोग।
हल: पराग-परागण तभी सुनिश्चित होता है जब परिपक्वता से पहले पुंकेसर हटा दिए जाएं और उसी स्पीशीज के दूसरे पौधे का पराग वर्तिकाग्र (stigma) पर डाला जाए।

प्र. 2: लैंगिक जनन के चरणों का सही क्रम ज्ञात कीजिए।
हल: परागण (pollination) → वर्तिकाग्र पर पराग-कण का अंकुरण → निषेचन (fertilisation) → युग्मनज (zygote) का निर्माण।

प्र. 3: युग्मनज के गर्भाशय (uterus) दीवार से चिपकने संबंधी अभिकथन की जाँच।
हल: यह दावा गलत है कि युग्मनज तुरंत चिपक जाता है; गर्भाशय की तैयारी संबंधी भाग सही है, परंतु युग्मनज प्रत्यारोपण (implantation) से पहले कई कोशिका-विभाजन से गुजरता है।

प्र. 4: अलैंगिक जनन (asexual reproduction) में संतति पूर्णतः जनक के समान क्यों होती है?
हल: केवल एक जनक शामिल होता है और युग्मकों (gametes) का संयोजन नहीं होता; नई संतति समसूत्री विभाजन (mitotic division) द्वारा बनती है।

प्र. 5: गर्भावस्था के दौरान मासिक धर्मचक्र (menstrual cycle) रुक क्यों जाता है?
हल: गर्भाशय की परत भ्रूण के पोषण हेतु बनी रहती है, नष्ट नहीं होती; गर्भावस्था संबंधी हॉर्मोन इसे बनाए रखते हैं, इसलिए मासिक धर्म रुक जाता है।

प्र. 6: रात में खिलने वाले फूल हल्के रंग के क्यों होते हैं?
हल: हल्के रंग अंधेरे में दिखाई देने में सहायक होते हैं और पतंगे (moth) व चमगादड़ों (bat) जैसे निशाचर परागकों को आकर्षित करते हैं।

प्र. 7: कायिक प्रसारण (vegetative propagation) से उगाए गए पौधे रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील क्यों होते हैं?
हल: आनुवंशिक रूप से समरूपता (genetic uniformity) के कारण सभी पौधों में एक जैसी कमजोरियां होती हैं, जिससे रोग तेज़ी से फैल सकता है।

प्र. 8: स्व-परागण (self-pollination) की कई पीढ़ियों का आनुवंशिक विविधता पर प्रभाव।
हल: बार-बार स्व-परागण से विविधता कम होती है, जिससे पर्यावरणीय परिवर्तन के अनुकूलन (adaptability) की क्षमता घटती है।

प्र. 9: पौधों को तेज़ी से तैयार करने की विधियां बताइए।
हल: अलैंगिक विधियां — कटिंग (cutting), दाबकलम (layering), ग्राफ्टिंग (grafting), और उत्तक संवर्धन (tissue culture) — सभी जेनेटिक रूप से समरूप पौधे जल्दी बनाती हैं।

प्र. 10: पराग-अंकुरण (pollen germination) प्रयोग के प्राचल विश्लेषण कीजिए।
हल: परिकल्पना (hypothesis) — शर्करा सांद्रता अंकुरण को प्रभावित करती है; नियंत्रित चर (controlled variables) — पराग-स्रोत, विलयन की मात्रा, तापमान, प्रकाश।

प्र. 11: टमाटर, गेहूँ, पपीता में परागण का प्रकार।
हल: टमाटर में स्व-परागण; गेहूँ में फूल खुलने से पहले ही स्व-परागण हो चुकता है; पपीता में पर-परागण आवश्यक है (अलग-अलग नर/मादा पौधों के बीच)।

प्र. 12: सेब के बाग में मधुमक्खी-पालन से परागण पर प्रभाव संबंधी अध्ययन।
हल: मधुमक्खी-पालन (beekeeping) परागण दक्षता बढ़ाता है, फल-सेटिंग बढ़ाता है और प्राकृतिक परागण की तुलना में फल गिरना (fruit drop) कम करता है।

प्र. 13: “अंडोत्सर्ग (ovulation) हमेशा 14वें दिन होता है” — इस दावे की जाँच।
हल: गलत — अंडोत्सर्ग हमेशा 14वें दिन नहीं होता; चक्र की लंबाई भिन्न-भिन्न होती है, और तनाव (stress), हॉर्मोन व स्वास्थ्य समय को प्रभावित करते हैं।

खंड: रुकें और सोचें / पर्यावरण-समाज सेतु विज्ञान

प्र. 14: सरल जीव अलैंगिक जनन क्यों अपनाते हैं, जबकि जटिल जीव लैंगिक जनन क्यों अपनाते हैं?
हल: सरल जीवों में अलैंगिक जनन तेज़ होता है; जटिल जीवों में लैंगिक जनन आनुवंशिक विविधता और परिवेश-अनुकूलन प्रदान करता है।

प्र. 15: द्विखंडन (binary fission), मुकुलन (budding), खंडन (fragmentation), बीजाणु निर्माण (spore formation), पुनर्जनन (regeneration) — अलैंगिक जनन की विधियां।
हल: ये सभी विधियां एक जनक से जनसंख्या-वृद्धि करती हैं और समसूत्रण से संतति बनाती हैं।

प्र. 16 (विज्ञान और समाज का सेतु): कौन-सी कवकें प्लास्टिक को अपघटित कर सकती हैं?
हल: Aspergillus tubingensis और Pestalotiopsis microspora जैसी कवकें (fungi) कुछ प्लास्टिक को अपघटित (degrade) कर सकती हैं।

प्र. 17: मनुष्य में 23 गुणसूत्र जोड़े होने पर कुल कितने प्रकार के युग्मक बन सकते हैं (2ⁿ सूत्र से)?
हल (स्वतंत्र सत्यापित): 2²³ = 8,388,608 संभव संयोजन।

प्र. 18: फूलों के रंग व सुगंध का महत्व।
हल: ये परागकों (pollinators) को आकर्षित करते हैं, जो जनन हेतु आवश्यक हैं।

प्र. 19: परागण न हो तो क्या होगा?
हल: निषेचन नहीं होगा, जिससे बीज व फल नहीं बनेंगे।

प्र. 20: बाह्य निषेचन (external fertilisation) में अधिक अंडे क्यों बनते हैं?
हल: क्योंकि अधिकांश अंडे शिकार (predation) व परिवेशीय खतरों का सामना करते हैं।

प्र. 21: आंतरिक निषेचन (internal fertilisation) का लाभ?
हल: मादा शरीर के भीतर बेहतर सुरक्षा मिलती है।

प्र. 22: मानव युग्मनज (zygote) में कितने गुणसूत्र होते हैं?
हल: 46 गुणसूत्र (23 जोड़े)।

प्र. 23: कंडोम (condom) का महत्व।
हल: यौन संचारित रोगों (STIs) के संप्रेषण को कम करता है।

प्र. 24: क्या गर्भ-निरोधक गोली (oral contraceptive pill) कंडोम का विकल्प है?
हल: नहीं पूर्णतः — गोली केवल गर्भधारण रोकती है, STI से सुरक्षा नहीं — STI से बचने हेतु कंडोम आवश्यक है।

प्र. 25: मानव शिशु की लंबी निर्भरता-अवधि (dependency) के लाभ।
हल: मस्तिष्क विकास व सामाजिक सीखने (social learning) का अधिक समय मिलता है, परंतु इसके लिए अभिभावकों का अधिक मी निवेश चाहिए।

अध्याय 12: जीवजगत का स्वरूप — विविधता एवं वर्गीकरण

अंतिम प्रश्नावली — Revise, Reflect, Refine — सभी 15 प्रश्नों के पूर्ण हल

प्र. 1: कीट (insect) और केंचुआ (earthworm) में अंतर कैसे पहचानें?
हल: संधित टांगों (jointed legs) की उपस्थिति कीट वर्ग की पुष्टि करती है (केंचुआ में टांगें नहीं होतीं)।

प्र. 2: स्पंज (sponge) की कोशिकाओं की विशेषताएँ — जंतु जगत (Animalia) में वर्गीकरण का आधार?
हल: कोशिका भित्ति की अनुपस्थिति और केवल कोशिका झिल्ली की उपस्थिति जंतु जगत में वर्गीकरण का आधार बनती है।

प्र. 3: जंतुओं में देखे जा सकने वाले अंतर कैसे वर्गीकरण में सहायक होते हैं?
हल: रीढ़की हड्डी (backbone), शरीर का आवरण (body covering), और जनन विधि जैसी संरचनात्मक विशेषताएँ विभिन्न समूहों में वर्गीकरण संभव बनाती हैं।

प्र. 4: कोशिकीय संगठन (cellular organisation) और जाइलम/फ्लोएम की उपस्थिति को वर्गीकरण आधार के रूप में तुलना।
हल: कोशिकीय संगठन सार्वभौमिक रूप से लागू होता है; जाइलम/फ्लोएम केवल कुछ पौधों (संवही पौधों) पर लागू होता है।

प्र. 5: एककोशिकीय जीव जिसमें सुस्पष्ट केंद्रक व सिलिया (cilia) हैं — किस जगत में रखेंगे?
हल: प्रोटिस्टा जगत (Kingdom Protista) — सुकेंद्रकी (eukaryotic), एककोशिकीय, सिलिया-युक्त।

प्र. 6: जैव विविधता (biodiversity) पारिस्थितिकी तंत्र में क्या भूमिका निभाती है?
हल: विभिन्न जीव ऊर्जा-प्रवाह व पोषक-चक्र (nutrient cycling) बनाए रखने हेतु अलग-अलग भूमिकाएँ निभाते हैं।

प्र. 7: यदि सभी एककोशिकीय जीवों को एक ही जगत में रखा जाए, तो समस्या?
हल: इससे प्रोकैरिओटिक/यूकैरिओटिक (prokaryotic/eukaryotic) भेद और विकासवादी संबंध नज़रअंदाज़ हो जाएंगे।

प्र. 8: वायरस (viruses) को पाँच-जगत वर्गीकरण में क्यों नहीं रखा गया?
हल: वायरस में कोशिकीय संगठन नहीं होता; वे केवल पोषक (host) की कोशिका के भीतर ही प्रजनन करते हैं।

प्र. 9: वायरस वर्गीकरण में संशोधन व वर्गीकरण की बदलती प्रकृति?
हल: वायरस के लिए अलग से वर्ग की सिफारिश की जाती है; यह दिखाता है कि वर्गीकरण विज्ञान निरंतर बदलती/विकसित होती रहती है।

प्र. 10: वायरस के आनुवंशिक पदार्थ व वर्गीकरण की सीमाएँ?
हल: यह दिखाता है कि कोई भी वर्गीकरण प्रणाली पूर्ण नहीं होती और निरंतर सुधार की आवश्यकता रहती है।

प्र. 11: पूर्व थैलोफाइट्स (pteridophytes) और ब्रायोफाइट्स (bryophytes) में समानता होते हुए भी वर्गीकरण अलग क्यों है?
हल: संवहन उत्तक (vascular tissue) की उपस्थिति/अनुपस्थिति इन्हें अलग करती है (थैलोफाइट्स में है, ब्रायोफाइट्स में नहीं)।

प्र. 12: वर्ग (class) और गण (genus) में सदस्य संख्या व समानता की तुलना।
हल: गण में सदस्य कम होते हैं पर उनमें समानता (साम्य लक्षण) अधिक होती हैं।

प्र. 13: गतिशीलता (locomotion) व स्वपोषी (autotrophy) वाला नया जीव — किस जगत में?
हल: एककोशिकीय, सुकेंद्रकीय संगठन — प्रोटिस्टा जगत की पहचान।

प्र. 14: एककोशिकीय कवक (unicellular fungi) की पहचान की कुंजी?
हल: परापोषी पोषण (heterotrophic nutrition) और काइटिन (chitin) युक्त कोशिका भित्ति — कवक जगत (Kingdom Fungi) की पहचान।

प्र. 15 (बहु-भागीय केस स्टडी): जीव वर्गीकरण व पारिस्थितिकीय अध्ययन संबंधी बहु-खंडीय प्रश्न।
हल: (यह प्रश्न विस्तृत परिदृश्य/डेटा-आधारित है — प्रत्येक उप-भाग हेतु मूल पाठ्यपुस्तक से मिलान की सलाह दी जाती है।)

खंड: दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

प्र. 16: अरस्तू (Aristotle) से लेकर वोस (Whittaker/Woese) तक वर्गीकरण प्रणाली का विकास समझाइए।
हल: अरस्तू ने जीवों को पेड़-पौधों में बांटा; बाद में दो-जगत प्रणाली (प्लांटे/एनिमेलिया), फिर व्हिटकर की पाँच-जगत प्रणाली, और अंततः कार्ल वोस की तीन-डोमेन (three-domain) प्रणाली तक विकास हुआ।

प्र. 17: जगत प्लांटी (Plantae) के पांच मुख्य वर्गों का विकासवादी क्रम व महत्व।
हल: थैलोफाइटा → ब्रायोफाइटा → टेरिडोफाइटा (पीस समूह) → जिम्नोस्पर्म (अनावृत बीजी) → एंजिओस्पर्म (आवृत बीजी) — जल-निर्भरता से स्थलीय जीवन की ओर विकास को दर्शाता है।

प्र. 18: जगत एनिमेलिया (Animalia) — कशेरुकी/अकशेरुकी (vertebrate/invertebrate) व चार फाइलम की विशेषताएँ।
हल: अकशेरुकी में रीढ़की हड्डी नहीं होती (जैसे पोरिफेरा, आर्थ्रोपोडा, मॉलस्का); कशेरुकी में होती है (मीन, उभयचर, सरीसृप, पक्षी, स्तनपायी)।

प्र. 19: द्विनाम पद्धति (binomial nomenclature) के नियम, लाभ व उदाहरण।
हल: हर जीव का नाम दो भागों में होता है: प्रथम ‘genus’ (बड़े अक्षर से शुरू), दूसरा ‘species’ (छोटे अक्षर से), दोनों लैटिन/वैज्ञानिक भाषा में इटैलिक्स में — जैसे Homo sapiens (मनुष्य)। लाभ: वैश्विक रूप से एकरूपता और अस्पष्टता-रहित पहचान।

प्र. 20: जैव विविधता की परिभाषा, भारत की हॉटस्पॉट (hotspot) स्थिति, संरक्षण खतरे व महत्व।
हल: जैव विविधता = किसी क्षेत्र में जीवों की विविधता (प्रजाति/स्पीशीज/पारिस्थितिकीय)। भारत वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट्स (पश्चिमी घाट, हिमालय, इंडो-बर्मा आदि) में गिना जाता है। खतरे: वनों की कटाई, निवास स्थान का नष्ट होना, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन।

अध्याय 13: पृथ्वी एक तंत्र — ऊर्जा, द्रव्य और जीवन

अंतिम प्रश्नावली — Revise, Reflect, Refine — सभी 15 प्रश्नों के पूर्ण हल

प्र. 1: जैव-भू-रासायनिक चक्र (biogeochemical cycles) की भूमिका बताइए।
हल: ये चक्र जैविक (biotic) और अजैविक (abiotic) घटकों के बीच आवश्यक पोषक तत्वों के पुनर्चक्रण (recycling) की व्यवस्था हैं।

प्र. 2: पृथ्वी के गर्म होने की क्रिया-विधि समझाइए।
हल: पृथ्वी की सतह सौर विकिरण (solar radiation) को अवशोषित करती है, जो पुनः विकिरित होता है और ग्रीनहाउस गैसों (greenhouse gases) द्वारा वायुमंडल में रोक लिया जाता है।

प्र. 3: जलवायु परिवर्तन का जल-चक्र (water cycle) पर प्रभाव।
हल: अधिक वाष्पीकरण (evaporation), तीव्र वर्षा (intense rainfall), सूखा (droughts), हिमनद पिघलना (glacier melting) और भूजल पर प्रभाव।

प्र. 4: परावर्तनशीलता (albedo) का तापमान व जलवायु पर प्रभाव।
हल: सतह की परावर्तनशीलता यह निर्धारित करती है कि कितनी सौर घोषणा अवशोषित होती है — इससे क्षेत्रीय तापमान प्रभावित होता है और प्रतिक्रियाएँ (feedback loops) बनती हैं (जैसे बर्फ के पिघलने से अंधेरी सतह बढ़ना और अधिक घोषणा)।

प्र. 5: पर्वत व घाटी पवन (mountain and valley breeze) कैसे बनते हैं?
हल: दिन में पर्वत ढालू जल्दी गर्म होते हैं, हवा ऊपर ऊठती है (घाटी पवन); रात में पर्वत जल्दी ठंडे होते हैं, हवा नीचे बहती है (पर्वतीय पवन)। घास से ढंकी ढालूएं बंजर ढालुओं की तुलना में आद्र्र थर्मल बदलाव दिखाती हैं।

प्र. 6: मौसम (weather) के लिए कौन-सा वायुमंडलीय स्तर उत्तरदायी है?
हल: क्षोभमंडल (troposphere) — यहीं पवन, तूफान और वर्षा होती हैं।

प्र. 7: नाइट्रोजन चक्र (nitrogen cycle) की प्रक्रियाएँ।
हल: स्थिरीकरण (fixation) → नाइट्रीकरण (nitrification) → स्वांगीकरण (assimilation) → अमोनीकरण (ammonification) → विनाइट्रीकरण (denitrification)।

प्र. 8: वनोंस्मटीकरण (deforestation) चक्रों पर क्या प्रभाव डालता है?
हल: कार्बन व ऑक्सीजन चक्रों में बाधा डालता है; साथ ही मिट्टी कनिष्ठन (soil erosion), बाढ़ (flooding) और जैव विविधता-ह्रास होता है।

प्र. 9: कार्बन का मार्ग (आरेख चित्र) वायुमंडल से पौधों, जंतुओं, श्वसन, अपघटन व जीवाश्म ईंधन तक।
हल: वायुमंडल → प्रकाश-संश्लेषण द्वारा पौधों में → जंतुओं तक (भोजन शृंखला) → श्वसन द्वारा वापस वायुमंडल में → मृत्यु पश्चात अपघटन (decomposition) या लाखों वर्षों में जीवाश्म ईंधन (fossil fuels) में बदलना।

प्र. 10: वायुमंडल में अतिरिक्त CO₂ से चिंता क्यों?
हल: ग्रीनहाउस प्रभाव (greenhouse effect) बढ़ाता है, महासागर अम्लीकरण (ocean acidification) होता है, कार्बन संतुलन बिगड़ता है, और कृषि पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

प्र. 11: पृथ्वी की ऊष्मा-हानि (heat loss) के तंत्र।
हल: अवरक्त विकिरण (infrared radiation), चालन (conduction), संवहन (convection), और वाष्पीकरण (evaporation) — चारों प्रक्रियाओं द्वारा।

प्र. 12: यदि पृथ्वी सपाट होती (गोलाकार नहीं) — विकिरण-स्वरूप पर प्रभाव?
हल: समान रूप से समस्त पृथ्वी गर्म होती (कोई तापमान फ़र्क (gradient) नहीं), कोई मौसमी परिवर्तन (seasonal variation) नहीं होता।

प्र. 13: तापमान वृद्धि का तीन भू-मंडलों (spheres) पर प्रभाव।
हल: हिममंडल (cryosphere): हिमनद/हिम का पिघलना। जलमंडल (hydrosphere): जल-चक्र में व्यवधान। जीवमंडल (biosphere): आवास स्थान विनाश।

प्र. 14: वायुमंडल तापमान नियंत्रण में कैसे सहायक है?
हल: यह हानिकारक विकिरण (UV) को फिल्टर करता है (ओजोन परत द्वारा) और बाहर जाती अवरक्त ऊष्मा को रोकता है (ग्रीनहाउस प्रभाव)।

प्र. 15: पृथ्वी के भू-मंडलों के परस्पर संबंध — हिमालयी हिमनद तंत्र के उदाहरण से समझाइए।
हल: हिमालय हिमनद पिघलना (हिममंडल) → नदियों में जल बढ़ना (जलमंडल) → वायुमंडलीय तापमान परिवर्तन → कृषि व जीवमंडल (फसल/आवास) पर प्रभाव — यह दिखाता है कि सभी पांच भू-मंडल (स्थलमंडल, जलमंडल, वायुमंडल, हिममंडल, जीवमंडल) एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

(इस अध्याय में अरब सागर के गर्म होने से मॉनसून पर प्रभाव, कीलिंग वक्र (Keeling Curve), एल्बेडो, सौर स्थिरांक, जैव-भू-रासायनिक चक्रों से जुड़े अतिरिक्त लघु-उत्तरीय/दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न भी दिए गए हैं, जो ऊपर दिए गए सिद्धांतों पर आधारित हैं।)

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Written by Satish

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