NCERT Class 3 EVS Solutions in Hindi (Hamara Adbhut Sansar)

कक्षा 3 (हिंदी मीडियम) की पर्यावरण अध्ययन (EVS) पाठ्यपुस्तक हमारा अद्भुत संसार (NCERT, NEP 2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी 12 पाठों की सूची और हर पाठ में सिखाई गई मुख्य अवधारणा नीचे दी गई है। यह गाइड बच्चों और अभिभावकों दोनों के लिए यह समझने में मदद करता है कि हर पाठ में क्या सीखा जाएगा, ताकि घर पर अभ्यास कराना आसान हो जाए।

पाठों की सूची और मुख्य अवधारणा

  • अध्याय 1: मेरा परिवार और मित्र
  • अध्याय 2: मेले में हम
  • अध्याय 3: त्योहार मनाएँ एक साथ
  • अध्याय 4: कुछ खोज पेड़-पौधों की
  • अध्याय 5: पेड़-पौधे और पशु-पक्षी हैं साथ
  • अध्याय 6: निर्भरता एक-दूसरे पर
  • अध्याय 7: पानी है अनमोल
  • अध्याय 8: हमारा भोजन
  • अध्याय 9: स्वस्थ रहो, प्रसन्न रहो
  • अध्याय 10: वस्तुओं की दुनिया
  • अध्याय 11: कैसे बनीं ये वस्तुएँ
  • अध्याय 12: क्या और कैसे करें इसका

NCERT Class 3 EVS Solutions in Hindi- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) | अध्याय 1: मेरा परिवार और मित्र — हल एवं व्याख्या

यह भाग “हमारा अद्भुत संसार” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम EVS) की अध्याय 1 “मेरा परिवार और मित्र” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chev101.pdf)।

कहानी: बेला का परिवार

प्र. बेला अपने परिवार के बारे में क्या बताती है, और उसे कौन-सा खेल सबसे ज्यादा पसंद है?
उ. पाठ्यपुस्तक में बेला खुद बताती है — “मेरे घर में आपका स्वागत है। मैं बेला हूँ। मेरे दो भाई हैं — बंकू भैया और छोटा बिशु।” उसे आपने परिवार के साथ घर के बाहर छुपन-छुपाई खेलना बहुत पसंद है। बेला यह भी बताती है कि घर में सभी को छोटे भाई बिशु के साथ ‘पीका-बू’ (लुका-छिपी) खेलना बहुत अच्छा लगता है — इस खेल में पहले छिपते हैं, फिर अचानक से ‘पीका-बू’ कहते हुए सामने आ जाते हैं।

प्र. बेला का परिवार घर के बाहर खुली जगह में क्या गतिविधियां करता है?
उ. पाठ्यपुस्तक में बताया गया है कि बेला का परिवार घर के बाहर खुली जगह में खेलता है, और उन्होंने घर के बाहर फूलों का बगीचा भी लगाया है। रिश्तेदार, मित्र और पड़ोसी भी वहाँ आते हैं, सब बैठते हैं, बातचीत करते हैं, चुटकुले सुनाते हैं और सब मिलकर हंसते हैं। दिन-भर काम करने के बाद जब माता-पिता थक जाते हैं, तो वे भी यहीं बैठकर आराम करते हैं। शाम के समय सबही मिलकर झूला झूलते हैं।

परिवार के सदस्यों की पहचान और रिश्ते

प्र. परिवार में कौन-कौन लोग हो सकते हैं, और परिवार में जानवर-पौधे किस तरह शामिल होते हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक में स्पष्ट बताया गया है — परिवार में माता-पिता, दादाजी-दादीजी, भाई-बहन (जैसे बंकू और बेला) और कुछ अन्य बड़े लोग हो सकते हैं। परिवार में सभी एक-दूसरे से स्नेह करते हैं और एक-दूसरे का ध्यान रखते हैं। गंड़े-खहो: पाठ्यपुस्तक में आपने परिवार के सदस्यों के नाम और रिश्ते लिखने की एक तालिका दी गई है — उदाहरण स्वरूप: उर्मिला = माँ की बहन = मौसी। बच्चा इसी तरह अपने परिवार में चाचा, मामा, बुआ, नाना जैसे रिश्तों को खुद भरकर सीखता है।

परिवार में पालतू जानवर

प्र. बेला और बंकू के पालतू कुत्ते का नाम क्या है, और किन-किन जानवर परिवार का हिस्सा हो सकते हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक में बताया गया है कि बेला और बंकू अपने पालतू कुत्ते शेरू को बहुत प्यार करते हैं और उसका ध्यान रखते हैं। गाय, भैंस, कुत्ते, तोते, बिल्लियों और बकरियों जैसे पशु-पक्षी भी कई परिवारों का हिस्सा होते हैं। पाठ्यपुस्तक यह सिखाती है कि हमें पशुओं के साथ भी प्यार से पेश आना चाहिए और उनका ध्यान रखना चाहिए।

प्र. “एक-दूसरे की सहायता करना” संबंधी गतिविधि में बच्चों को क्या करने को कहा गया है?
उ. पाठ्यपुस्तक में बच्चों से अपने घर में होने वाली गतिविधियों (जैसे कपड़े धोना, खाना बनाना, सऐा करना) को देखकर उनपर ✔ का चिह्न लगाने और रंग भरने को कहा गया है। इससे बच्चों को यह समझने में मदद मिलती है कि परिवार में हर काम (जैसे कपड़े धोना, खाना बनाना) मिलकर और एक-दूसरे की सहायता से होता है।

NCERT Class 3 EVS Solutions in Hindi- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) | अध्याय 2: मेले में हम — हल एवं व्याख्या

यह भाग “हमारा अद्भुत संसार” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम EVS) की अध्याय 2 “मेले में हम” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chev102.pdf)।

कहानी: मेले में जाने की तैयारी

प्र. नीता और राधा कहां जाने की तैयारी कर रही थीं, और दादीजी ने पहले जाने से मना क्यों किया, और अंततः वे कैसे मानीं?
उ. पाठ्यपुस्तक के अनुसार शहर में मेला लग गया था और नीता-राधा बहुत उत्साहित थीं। दादीजी ने पहले मना किया क्योंकि उनकी टाँगें दुखती थीं। लेकिन जब नीता के पिताजी ने बताया कि पड़ोसी, मित्र (स्नेहा और रोहित) और मोहन चाचा का परिवार भी साथ चलेंगे और सभी मिलकर दादीजी का ध्यान रखेंगे, तो दादीजी मुस्कुराते हुए चलने को राजी हो गईं। यह कहानी सिखाती है कि बड़ों और बुजुर्गों की चिंताओं को समझकर ओर परिवार आश्वस्त करना जरूरी है।

बस में यात्रा: सड़क सुरक्षा और गिनती

प्र. मेले जाते समय बच्चे सड़क पर क्या सावधानी रखते हैं, और बस में चड़ते समय दादीजी की क्या मदद की गई?
उ. पाठ्यपुस्तक में स्पष्ट लिखा है — सभी सड़क पर दोनों दिशाओं से आते हुए वाहनों पर ध्यान देते हुए चल रहे थे। जब 401 नंबर की बस रुकी, तो बस कंडक्टर और नीता के पिता ने दादीजी को बस में चड़ने में सहायता की। बस में वृद्ध लोगों के लिए सीटें आरक्षित (रिज़र्व्ड) थीं, इसलिए दादीजी आराम से बैठ गईं।

प्र. रोहित के पिता ने कंडक्टर से कितनी टिकटें मांगीं (बड़ों और बच्चों की), और कुल मिलाकर सफर पर कितने लोग जा रहे थे?
उ. पाठ्यपुस्तक में रोहित के पिता ने कंडक्टर से स्पष्ट कहा — “कृपया पाँच बड़ों की और चार बच्चों की टिकट दें।” इस तरह कुल 5+4=9 लोग सफर पर जा रहे थे। सभी बच्चों को अपनी-अपनी सीट पर बैठने और इधर-उधर न कूदने को कहा गया था।

मेले के प्रवेश द्वार: सुरक्षा प्रबंध

प्र. मेले के प्रवेश द्वार पर क्या-क्या सुविधाएँ और सुरक्षा व्यवस्थाएँ देखी गईं?
उ. पाठ्यपुस्तक में विस्तार से बताया गया है — प्रवेश द्वार पर मेले के मैदान का एक नक्शा लगा था जिसमें सभी स्टॉलों की जगह दिखाई गई थी। इसी के पास एंबुलेंस, पुलिस जीप और आग बुझाने वाली गाड़ी (फायर ट्रक) खड़ी थी, और वहाँ ‘खोया और पाया’ बूथ भी बना हुआ था, जिसमें अपनी इच्छा से काम करने वाले लोग (स्वयंसेवी) बैठे थे। मोहन चाचा और रोहित जल्दी से दादीजी के लिए पहिया कुर्सी (व्हीलचेयर) लेने गए। यह दिखाता है कि बड़े आयोजनों में बच्चों के खो जाने से लेकर बीमार या वृद्ध लोगों की सहायता तक — हर तरह की सुरक्षा का प्रबंध पहले से होता है।

मेले में घुसते ही क्या देखा?

प्र. मेले में घुसते ही बच्चों ने कैसे-कैसे स्टॉल देखे, और वे क्यों खुशी से झूम रहे थे?
उ. पाठ्यपुस्तक में मेले के मैदान में खेल-खिलौने, नारियल पानी, माँ की थाली (दाल-भात, पूरी-छोले), चाँदियां/पटाखे, लल्लू हलवाई (मिठाई), खाने-पीने के स्टॉल — इन सब के साथ सहायता केंद्र और प्राथमिक चिकित्सा कौन्टर भी थे, और जगह-जगह कूड़ादान (‘use me’ लिखा) रखे थे। इतनी रंग-बिरंगी और भीड़ देखकर बच्चे स्वाभाविक रूप से उत्साहित थे। पाठ्यपुस्तक यह भी सिखाती है कि मेले में कूड़ा सही जगह पर फेंकना चाहिए, जो स्वच्छता की एक सीधी आदत है।

NCERT Class 3 EVS Solutions in Hindi- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) | अध्याय 3: त्योहार मनाएँ एक साथ — हल एवं व्याख्या

यह भाग “हमारा अद्भुत संसार” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम EVS) की अध्याय 3 “त्योहार मनाएँ एक साथ” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chev103.pdf)।

कहानी: रुषि की पहाड़ी यात्रा

प्र. रुषि कहां का रहने वाला है और वह किसके साथ कहाँ जा रहा था?
उ. पाठ्यपुस्तक में रुषि खुद बताता है — “मेरा नाम रुषि है। मैं जम्मू का रहने वाला हूँ।” वह अपने माता-पिता के साथ हिमालय के पहाड़ों पर घूमने जा रहा था, वह भी अपने मामा-मामी और ममेरी बहनों — चिया और नोनिका — के घर जा रहा था, जो पहाड़ों के पास ही एक छोटे से गाँव में रहती थीं।

बस में सुरक्षा: रोड साइन पहचानना

प्र. बस में यात्रा के दौरान एक चेतावनी संकेत पर लिखा था — “अपने सिर, हाथ और बाजू हमेशा बस के अंदर रखिए।” इस चेतावनी का क्या मतलब है?
उ. यह संकेत यात्रियों की सुरक्षा के लिए है — चलती हुई बस में यदि सिर, हाथ या बाजू खिड़की या दरवाजे/खिड़की से बाहर निकले, तो चोट लगने का खतरा रहता है। इसीलिए यात्रियों को हमेशा अपने अंगों को वाहन के अंदर ही रखना चाहिए।

प्र. सड़क पर दिखने वाले चिन्हों जैसे — पीले रंग का उभरा हुआ टीला चिह्न, बच्चों के चिन्ह वाला तिकोन, हॉर्न काटे चिन्ह वाला गोल चिह्न, और U-turn काटा चिह्न — इनका क्या अर्थ है?
उ. पाठ्यपुस्तक में बच्चों को सड़क चिन्हों को उनके अर्थ से मिलाने का अभ्यास दिया गया है। भारत में प्रचलित मानक सड़क चिन्हों के अनुसार — पीला हीरा ऊभरा हुआ चिह्न ‘गति अवरोधक’ (speed breaker) का संकेत है; जिसमें बच्चों की आकृति हो, वह ‘आगे विद्यालय है’ का संकेत है; हॉर्न काटे चिह्न ‘कृपया हॉर्न मत बजाएँ’ का संकेत है, और U-turn काटा चिन्ह ‘यू-टर्न मना है’ का संकेत है। इसी तरह गोल में गाड़ी काटा चिन्ह ‘यहाँ वाहन खड़ा न करें’ और मिट्टी खोदते आदमी वाला चिह्न ‘व्यक्ति काम पर हैं’ का संकेत है। बच्चों को इन छह चिन्हों को सही अर्थ से जोड़ना सीखना चाहिए।

मामा-मामी के गाँव में: नए फूलों की पहचान

प्र. रुषि अपने मामा के गाँव पहुंचकर कौन-से फूल पहचान पाया, और कौन-से नए थे?
उ. पाठ्यपुस्तक में रुषि बताता है — “मैंने उनमें से कुछ फूलों को पहचाना, जैसे गुलाब, गेंदा और गुड़हल। जो भी हो, मैं इन फूलों की सुंदरता से चकित था।” उसने पहले भी बहुत से फूल देखे थे, पर एेसे सुंदर फूल पहले कभी नहीं देखे थे, इसलिए उसने अपनी चचेरी बहन नोनिका से उन नए फूलों के नाम पूछे। यह कहानी बच्चों को सिखाती है कि हिमालय के आस-पास के गाँवों में ऐसे स्थानीय फूल भी मिलते हैं जो मैदानों में नहीं पाए जाते, और वहीं से फूलों से जुड़े स्थानीय त्यौहार मनाए जाते हैं।

प्र. रुषि को मामा के घर तक पहुंचने में कैसी सड़कों से गुजरना पड़ा?
उ. पाठ्यपुस्तक में बताया गया है — बस स्टॉप से उतरकर पहले वे चौड़ी पक्की सड़क पर चले, फिर मामा के घर तक जाने वाली संकरी कच्ची सड़क पकड़ी। यह बच्चों को गाँव और शहर की सड़कों में अंतर समझाता है — शहर की चौड़ी सड़कें आमतौर पक्की होती हैं और छोटे गाँवों तक जाने वाली सड़कें अक्सर संकरी (कच्ची) होती हैं।

NCERT Class 3 EVS Solutions in Hindi- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) | अध्याय 4: कुछ खोज पेड़-पौधों की — हल एवं व्याख्या

यह भाग “हमारा अद्भुत संसार” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम EVS) की अध्याय 4 “कुछ खोज पेड़-पौधों की” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chev104.pdf)।

तरह-तरह के पेड़-पौधे: आकार-प्रकार में विविधता

प्र. गोपू, सिम्मी और राज स्कूल जाते समय रास्ते में क्या-क्या देखते हैं, और पौधों के बारे में वे क्या बातें करते हैं?
उ. गोपू, सिम्मी और राज पैदल स्कूल जाते हुए सुंदर-सुंदर फूल, पहाड़ और जल-धाराएँ देखते हैं। सिम्मी बताती है कि पौधे तरह-तरह के आकार और आकृतियों वाले होते हैं — बहुत छोटे, छोटे, बड़े, झाड़ीदार; जबकि राज कहता है कि कुछ पतले और मुड़े हुए होते हैं, तो कुछ सीधे और लंबे होते हैं।

प्र. पत्तों की सतह (खुरदरी/चिकनी) में क्या फर्क होता है?
उ. पाठ्यपुस्तक के अनुसार गोपू बताता है कि कुछ पेड़-पौधों की पत्तियाँ खुरदरी होती हैं, तो कुछ की एकदम चिकनी (समतल)। सिम्मी बताती है कि जामुन के पेड़ की पत्तियाँ थोड़ी मोटी और चमकदार होती हैं।

प्र. राज के जामुन के पेड़ के फूल और फल कैसे बदलते हैं?
उ. राज बताता है कि जामुन के पेड़ पर छोटे-छोटे सफेद फूल आए, फिर फल छोटे हरे रंग के थे जो बाद में गहरे लाल और जामुनी रंग के हो गए। बच्चों ने पके हुए जामुनी-रंग के फल तोड़ने का आनंद लिया था। पेड़ की ठंडी छाँव में घूमना भी अच्छा लगता है।

प्र. पाठ्यपुस्तक के अनुसार पेड़ का स्वरूप कैसा होता है?
उ. पेड़ों में लकड़ी का एक बड़ा तना होता है और उस पर फैली हुई कई शाखाएँ होती हैं। इन शाखाओं पर पत्तियाँ होती हैं, और इनकी जड़ें धरती में बहुत गहराई तक जाती हैं। पेड़ की तस्वीरें (आम, नारियल, खेजड़ी, कटहल) पुस्तक में दिखाई गई हैं।

झाड़ी (Shrub)

प्र. गोपू और राज ने झाड़ी के बारे में क्या देखा/समझाया?
उ. लाल फूलों वाले एक सुंदर पौधे को देखकर गोपू ने कहा कि इसका पेड़ की तरह बड़ा-सा तना नहीं है; राज ने बताया कि इसमें भूरे रंग के कई तने होते हैं। पाठ्यपुस्तक के अनुसार भूरे दाढ़ीदार दिखते वाले पौधों को झाड़ियाँ कहते हैं; तुलसी का पौधा भी एक झाड़ी है। पाठ्यपुस्तक की परिभाषा स्पष्ट करती है — झाड़ियाँ मध्यम आकार के वे पौधे हैं जिनमें कई तने होते हैं और इनकी शाखाएँ धरती के पास ही फैली होती हैं।

प्र. अरहर, मसूर, मूंग और उड़द जैसी दालें किस तरह के पौधों से आती हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक में बताया गया है कि अरहर, मसूर, मूंग और उड़द जैसी दालें झाड़ियों के ही बीज होते हैं।

जड़ी-बूटियाँ और घास (Herbs and Grass)

प्र. जड़ी-बूटियाँ क्या होती हैं और घास की खासियत क्या है?
उ. पाठ्यपुस्तक के अनुसार जड़ी-बूटियाँ बहुत ही छोटे पौधे होते हैं जिनके तने बहुत ही मुलायम होते हैं और कभी भी लकड़ी जैसे सख्त नहीं बनते। घास भी जड़ी-बूटियों का ही एक प्रकार है — घास के पत्ते पतले और चपटे होते हैं और इनके तने खोखले होते हैं। पुदीना, टमाटर, धनिया, सरसो जड़ी-बूटियों के उदाहरण हैं।

प्र. चावल, गेहूँ, बाजरा, ज्वार, रागी जैसे अनाज किस के बीज हैं? गन्ना और बाँस को घास क्यों कहा गया है?
उ. ये सभी बड़ी-बड़ी घास के बीज हैं। गन्ना और बाँस भी एक तरह की घास हैं — बाँस एक विशेष प्रकार की घास है जो एक वर्ष से भी अधिक समय तक सूखती नहीं है।

लताएँ और बेलें (Creepers and Vines)

प्र. सिम्मी ने मनी प्लांट और कद्दू के पौधे के बारे में क्या बताया?
उ. मनी प्लांट का तना बहुत ही लंबा और पतला होता है और यह खुद खड़ा नहीं हो सकता — अगर ऐसे सहारे के लिए कोई सहारा नहीं मिलता, तो यह धरती पर ही फैलकर बढ़ने लगता है। कद्दू का पौधा भी एक बेल ही है तथा धरती पर फैलता है। पाठ्यपुस्तक में स्पष्ट किया गया है — लताओं और बेलों के तने पतले और लचीले होते हैं; लताएँ दूसरे पौधों का सहारा लेकर ऊपर चढ़ती हैं और बढ़ती हैं, जबकि बेलें धरती पर ही बढ़ती हैं। कुछ लताएँ सहारा देने वाले पौधे से अपना भोजन भी लेती हैं। उदाहरण: मनी प्लांट, चमेली (लताएँ); कद्दू, लौकी, चिचिंडा (बेलें)।

प्र. गेंदा, नीम, बेर जैसे पौधे क्या हैं — पेड़, झाड़ी, लता या बेल?
उ. यह उनके आकार पर निर्भर करता है — गेंदा और नीम आम तथा जामुन जैसे पेड़ हैं (बड़ा तना, शाखाएँ), जबकि बेर एक झाड़ी है (मध्यम आकार, कई तने)। बच्चों को स्वयं इन्हें अपने आस-पास खोजकर पहचानना चाहिए।

गतिविधि 2, 4, 6: पौधे से मित्रता, पत्तों की पहचान, छाल का अध्ययन

प्र. “पौधे से मित्रता” गतिविधि में बच्चों से क्या करने को कहा गया है?
उ. इस गतिविधि में बच्चों से कहा गया है कि वे कोई एक झाड़ी या मोटे तने वाला पेड़ चुनें जिससे वे मित्रता करना चाहते हैं, उसे एक नाम दें (जैसे अपने पालतू जानवर का), रोज पानी देकर देखभाल करें, और उसके पत्तों/फूलों/फलों की संख्या को एक तालिका में दर्ज करें।

प्र. गोपू ने पत्तों की गंध के बारे में क्या कहा, और राज का भाई फलों को कैसे पहचानता था?
उ. गोपू ने बताया कि तुलसी, धनिया, मीठा नीम, पुदीना और लेमन घास जैसी सभी पत्तियों की गंध अलग-अलग होती है। पाठ्यपुस्तक के अनुसार राज का भाई देख नहीं सकता, लेकिन वह आम, अनानास, कटहल, अमरूद और जामुन जैसे फलों को सूँघकर जल्दी पहचान लेता है — यह पाठ्यपुस्तक दृष्टिबाधित बच्चों को समावेशिता के बारे में संवेदनशील बनाती है।

प्र. “छाल के बारे में जानना” गतिविधि में क्या किया जाता है?
उ. बच्चों से कहा जाता है कि वे किसी पेड़ की छाल को ध्यान से देखें और स्पर्श करें, फिर कागज रखकर उसी छाल पर पेंसिल/रंग से बार-बार रगड़ें, जिससे छाल का नमूना (छाप) उस कागज पर उभर आए। इससे पेड़ों की पहचान हो सकती है, और बच्चे रास्ते में पेड़ की छाल पर रहते कीट, पक्षियों और छोटे जीवों को भी देख सकते हैं।

पौधों के भाग (Parts of a Plant)

प्र. संदर्भ चित्र में टमाटर के पौधे के कौन-कौन से भाग दिखाए गए थे?
उ. टमाटर के पौधे के चित्र में जड़ (धरती के अंदर), तना, पत्ती, फूल और फल — ये पाँच भाग दिखाए गए थे। पाठ्यपुस्तक में बताया गया है कि पौधों के बारे में जानते समय हम इन्हीं भागों — जड़, तना, पत्ती, फूल, फल और बीज — का प्रयोग करते हैं।

आइए, मंथन करें! (अध्याय-अंत प्रश्न)

प्र. यदि पेड़-पौधे न होते, तो क्या होता?
उ. यह एक खुला चर्चा-प्रश्न है जिसपर कक्षा में खुलकर बात की जाती है; सोचने लायक बिंदु: बिना पेड़-पौधों के न तो हमें साँस लेने के लिए ऑक्सीजन मिलता, न भोजन (अनाज, फल, सब्जियाँ), न छाया/लकड़ी, और न पशु-पक्षियों के लिए घर/भोजन।

प्र. पेड़-पौधों के बढ़ने में जड़ किस तरह सहायता करती है?
उ. जड़ पेड़ को धरती से पकड़कर रखने में मदद करती है और धरती से पानी और पोषक तत्त्व खींचकर लेती है, जिससे पौधा बढ़ता है।

प्र. पेड़ के लिए तना क्या कार्य करता है?
उ. तना पेड़ को खड़ा रखता है और पत्तियों, फूलों और फलों को सहारा देता है, साथ ही जड़ से ली गई पानी-पोषक तत्त्वों को पूरे पेड़ तक पहुँचाता है।

NCERT Class 3 EVS Solutions in Hindi- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) | अध्याय 5: पेड़-पौधे और पशु-पक्षी हैं साथ — हल एवं व्याख्या

यह भाग “हमारा अद्भुत संसार” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम EVS) की अध्याय 5 “पेड़-पौधे और पशु-पक्षी हैं साथ” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chev105.pdf)।

पेड़-पौधों के आस-पास पशु-पक्षी

प्र. जहाँ पेड़-पौधे होते हैं, वहाँ और क्या पाया जाता है?
उ. पाठ्यपुस्तक के अनुसार जहाँ पेड़-पौधे होते हैं, वहाँ पशु-पक्षी भी होते हैं। कुछ पशु-पक्षी पेड़ों पर रहते हैं, कुछ उनके आस-पास रहते हैं और कुछ तो उनके नीचे (मिट्टी में) भी रहते हैं। उदाहरण: घास चरता हुआ हाथियों का झुंड, पत्ते पर आराम करता पतंगा, पत्ती खाती हुई इल्ली, पेड़ के तने पर बैठा कठफोड़वा, और मिट्टी में रेंगता केंचुआ।

पशु-पक्षी पेड़-पौधों के पास क्यों रहना चाहते हैं

प्र. पशु-पक्षी और कीट अपने भोजन, आवास और आराम के लिए पेड़-पौधों का उपयोग कैसे करते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उ. पाठ्यपुस्तक के पृष्ठ 63 पर दिए गए चित्रों के अनुसार पशु-पक्षी और कीट पेड़-पौधों का इस तरह उपयोग करते हैं:

  • हाथियों का झुंड घास चरता है (भोजन के लिए)।
  • पतंगा (moth) पत्ते पर आराम करता है (आराम के लिए)।
  • इल्ली (caterpillar) पत्ती खाती है (भोजन के लिए)।
  • केंचुआ सूखी पत्तियों और मिट्टी में रेंगता है (आवास के लिए)।
  • दर्जिन चिड़िया (tailorbird) पेड़ पर बैठकर गाना गाती है (आवास के लिए)।
  • कठफोड़वा (woodpecker) पेड़ के तने पर बैठता है (भोजन व आवास के लिए)।
  • चींटियाँ पत्तियों से अपना घर बनाती हैं (आवास के लिए)।
  • एक रंगीन कीड़ा पत्ती पर रहता है (आवास व आराम के लिए)।
  • मेंढक पत्ते पर आराम करता है (आराम के लिए)।
  • तितली पत्ती पर मँडराती है (आराम व भोजन के लिए)।
  • गिलहरी पेड़ के तने के कोटर (खोखले हिस्से) में छिपकर आराम करती है (आवास के लिए)।
  • एक चिड़िया पेड़ के कोटर को अपना घोंसला बनाकर रहती है (आवास के लिए)।

मिट्टी में जीवन

प्र. मिट्टी में कौन-कौन से जीव पाए जा सकते हैं, और मिट्टी किस चीज से मिलकर बनती है?
उ. पाठ्यपुस्तक में बताया गया है कि वर्षा के दिनों में मिट्टी गीली होने पर सबसे अधिक कीट — जैसे केंचुआ और कनखजूरा — देखने को मिलते हैं। मिट्टी पृथ्वी की सतह की सबसे ऊपरी परत है, जो उन चट्टानों से बनती है जो बहुत धीरे-धीरे छोटे-छोटे टुकड़ों में टूटती रहती हैं। इसमें पेड़-पौधों की सूखी पत्तियाँ, जड़ें, तने तथा मृत जानवर, कीट आदि भी होते हैं।

प्र. वर्षा के समय जब मिट्टी गीली होती है, तब कौन-कौन से बदलाव दिखाई देते हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक के अनुसार वर्षा के समय आपको और भी अधिक कीट (जैसे केंचुआ और कनखजूरा) दिखाई देते हैं, मिट्टी में घास भी अधिक दिखती है और तरह-तरह के पौधे भी उगे हुए दिखाई देते हैं।

पशु-पक्षी पेड़-पौधों के विभिन्न भागों का उपयोग

प्र. इल्ली और तितली का पेड़-पौधों से क्या संबंध है, और गिलहरी तथा चिड़िया पेड़ के कोटर का उपयोग किस तरह करती हैं?
उ. इल्ली को भोजन के लिए पेड़-पौधों की पत्तियाँ चाहिए — पाठ्यपुस्तक के चित्र में इल्ली पत्ती खाती हुई दिखाई गई है, वहीं तितली पत्ती पर मँडराती हुई दिखाई गई है। गिलहरी पेड़ के तने के कोटर (खोखले हिस्से) में छिपकर आराम करती है, और एक चिड़िया उसी तरह के कोटर को अपना घोंसला बनाकर उसमें रहती है — दोनों के लिए पेड़ का कोटर आवास का काम करता है।

पक्षियों की बोली

प्र. आंखें बंद करके पक्षियों की बोली सुनने से क्या फायदा होता है?
उ. आंखें बंद करके सुनने से हमारा ध्यान पूरी तरह सुनने पर केंद्रित हो जाता है और हम बिना देखे पक्षियों की अलग-अलग बोलियाँ अधिक स्पष्टता से पहचान पाते हैं। चित्र में दिखाए गए अनुसार आवाज की दिशा में मुंह करके ध्यान से सुनने पर बोलियाँ और स्पष्ट सुनाई देती हैं। उदाहरण: कबूतर की बोली “गुटर-गूँ” है।

आइए, मंथन करें! (अध्याय-अंत प्रश्न)

प्र. मिट्टी किस-किस चीज से मिलकर बनती है?
उ. मिट्टी चट्टानों के छोटे-छोटे टूटे हुए टुकड़ों से, पेड़-पौधों की सूखी पत्तियों-जड़ों-तनों से तथा मृत जीव-जंतुओं से मिलकर बनती है।

प्र. पेड़ के लिए जड़ किस तरह सहायता करती है, और तना क्या कार्य करता है?
उ. जड़ पेड़ को धरती से पकड़कर रखती है और मिट्टी से पानी-पोषक तत्त्व खींचकर लेती है; तना पूरे पेड़ में पानी-पोषक तत्त्वों को पत्तियों, फूलों और फलों तक पहुँचाता है।

प्र. सुमा और इल्ली की कहानी के अनुसार, इल्ली से तितली बनने का सही क्रम क्या है?
उ. सुमा ने तगर के एक पौधे पर पत्तियाँ खाती हुई एक इल्ली देखी थी। पाठ्यपुस्तक में दिखाए गए अनुसार सही क्रम यह है — पहले इल्ली पत्तियाँ खाकर बड़ी होती है, फिर वह एक कोकून बनाती है, और अंत में उसी कोकून से एक सुंदर तितली बनकर निकलती है। यही इल्ली-से-तितली बनने का चक्र (कायांतरण/मेटामॉर्फसिस) इस कहानी का मूल संदेश है।

NCERT Class 3 EVS Solutions in Hindi- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) | अध्याय 6: निर्भरता एक-दूसरे पर — हल एवं व्याख्या

यह भाग “हमारा अद्भुत संसार” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम EVS) की अध्याय 6 “निर्भरता एक-दूसरे पर” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chev106.pdf)।

आम के पेड़ की कहानी: एक-दूसरे पर निर्भरता

प्र. “आम का पेड़” कहानी हमें क्या सिखाती है?
उ. यह कहानी बताती है कि पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य एक-दूसरे पर निर्भर हैं। आम का पेड़ पक्षियों को घोंसला बनाने के लिए जगह देता है, मधुमक्खियों व अन्य कीटों को फूलों से भोजन मिलता है, बच्चे उसकी छाया में खेलते हैं और उसके फल खाते हैं। बदले में पक्षी और कीट पेड़ के परागमन (pollination) में मदद करते हैं और बीज दूर-दूर तक फैलाते हैं, जिससे नए पेड़ उगते हैं। इस तरह पेड़, पशु-पक्षी और मनुष्य सब एक-दूसरे की मदद से जीवित रहते हैं।

पेड़-पौधों के उपयोग

प्र. हमारे जीवन में पेड़-पौधों के क्या-क्या उपयोग हैं?
उ. पेड़-पौधे हमें कई तरह से उपयोगी हैं:

  • भोजन के लिए फल, सब्जियां, अनाज और मसाले।
  • छाया और ठंडक।
  • लकड़ी – घर, फर्नीचर व ईंधन बनाने के लिए।
  • औषधि (दवाइयाँ) बनाने के लिए।
  • साँस लेने के लिए ऑक्सीजन।
  • पशु-पक्षियों को रहने का घर (आवास) और भोजन।
  • कपड़े बनाने के लिए रेशे (जैसे कपास)।

हमें एक-दूसरे की जरूरत है

प्र. मनुष्य, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे एक-दूसरे पर किस तरह निर्भर हैं?
उ. मनुष्य पेड़-पौधों से भोजन, ऑक्सीजन, लकड़ी और दवाइयाँ प्राप्त करते हैं तथा पशु-पक्षियों से दूध, ऊन और अन्य वस्तुएं पाते हैं। पेड़-पौधे पशु-पक्षियों को भोजन और आवास देते हैं, और पशु-पक्षी पेड़-पौधों के बीज फैलाने तथा परागमन में सहायता करते हैं। इस तरह तीनों – मनुष्य, पशु-पक्षी और पेड़-पौधे – एक साथ मिलकर एक संतुलित प्राकृतिक चक्र बनाते हैं, और एक की भी अनुपस्थिति में यह संतुलन बिगड़ सकता है।

गतिविधियाँ: पशु-पक्षियों को समझना

प्र. पाठ में दी गई गतिविधियों से हमें क्या सीख मिलती है?
उ. पाठ में तीन गतिविधियाँ दी गई हैं:

  • किसी एक पशु या पक्षी को ध्यान से देखकर उसकी आदतों, भोजन और रहन-सहन के बारे में जानकारी इकट्ठा करना, ताकि हम समझ सकें कि वह अपने आस-पास के वातावरण पर कैसे निर्भर है।
  • चींटियों की चतुराई (Clever Ants) से जुड़ा एक भोजन प्रयोग, जिसमें यह देखा जाता है कि चींटियाँ मिलकर भोजन खोजने और उसे अपने बिल तक ले जाने में एक-दूसरे की कैसे मददद करती हैं – यह सहयोग (टीमवर्क) का उदाहरण है।
  • “मित्र वृक्ष” (Friend Tree) गतिविधि, जिसमें बच्चे किसी पेड़ को अपना मित्र मानकर उससे जुड़ी भावनाएं और अनुभव साझा करते हैं, और “मैं कौन हूं?” (Guess Who Am I) खेल, जिसमें बच्चे अभिनय करके किसी पशु-पक्षी का अनुमान लगवाते हैं।

ये गतिविधियाँ बच्चों में प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता और अवलोकन क्षमता बढ़ाती हैं।

आइए, मंथन करें! (क) चर्चा कीजिए

प्र. 1. हम पेड़-पौधों तथा पशु-पक्षियों पर किस तरह से निर्भर हैं?
उ. हम पेड़-पौधों से भोजन (फल, सब्जियाँ, अनाज), ऑक्सीजन, लकड़ी, दवाइयाँ और छाया प्राप्त करते हैं। पशु-पक्षियों से हमें दूध, ऊन, अंडे जैसी वस्तुएं मिलती हैं, और कुछ पशु (जैसे बैल, घोड़े) खेती व सामान ढोने में हमारी मददद करते हैं।

प्र. 2. हमें अपने परिवेश में मौजूद पेड़-पौधों व पशु-पक्षियों की देखभाल किस प्रकार से करनी चाहिए?
उ. हमें पेड़-पौधों को नियमित पानी देना चाहिए, उन्हें बिना कारण नहीं काटना चाहिए, नए पौधे लगाने चाहिए। पशु-पक्षियों के लिए पानी और दाना रखना चाहिए, उन्हें परेशान या घायल नहीं करना चाहिए, और उनके प्राकृतिक आवास (घोंसले, बिल) को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहिए।

प्र. 3. पेड़-पौधे और पशु-पक्षी हम पर किस तरह निर्भर हैं?
उ. पालतू पशु-पक्षी भोजन, पानी और सुरक्षा के लिए हम पर निर्भर हैं। हमारे द्वारा लगाए और सींचे गए पेड़-पौधे भी अपनी वृद्धि के लिए हमारी देखभाल पर निर्भर करते हैं। साथ ही, यदि हम पेड़ों की कटाई रोकें और वातावरण स्वच्छ रखें, तो जंगली पशु-पक्षियों का प्राकृतिक आवास भी सुरक्षित रहता है।

(ख) लिखिए – अपने अनुभव साझा करें

इस भाग में विद्यार्थियों को अपने पसंदीदा पेड़-पौधे, पशु-पक्षी या कीट के बारे में अपने शब्दों में लिखना है – जैसे कौन सा पशु-पक्षी देखना अच्छा लगता है और क्यों, किससे मिलकर हंसी आती है, और किसका ध्यान रखना चाहेंगे। यह एक व्यक्तिगत (personal) उत्तर वाला भाग है, जिसका कोई एक निश्चित उत्तर नहीं है – विद्यार्थी अपने आस-पास देखे गए पशु-पक्षियों के आधार पर उत्तर लिख सकते हैं। उदाहरण के लिए: “मुझे गौरैया को देखना अच्छा लगता है, क्योंकि वह छोटी और फुर्तीली होती है” या “मुझे तितली से मिलकर खुशी होती है, क्योंकि उसके रंग-बिरंगे पंख सुंदर लगते हैं।”

(ग) चित्र बनाइए – पैरों की संख्या के अनुसार पशु-पक्षी

प्र. दो, चार, छह और आठ पैरों वाले पशु-पक्षियों के नाम लिखिए।
उ.

  • दो पैर: मुर्गी, कौआ, गौरैया, बत्तख, मोर (सभी पक्षी और मनुष्य)।
  • चार पैर: गाय, बकरी, कुत्ता, बिल्ली, हाथी, घोड़ा।
  • छह पैर: चींटी, तितली, मक्खी, मच्छर, टिड्डा (सभी कीट/insects)।
  • आठ पैर: मकड़ी (spider), बिछ्छू (scorpion)।

क्या आप जानते हैं? – ग्रे वैगटेल पक्षियों की सच्ची कहानी

प्र. वल्पराई (तमिलनाडु) की ग्रे वैगटेल पक्षियों की कहानी क्या है?
उ. तमिलनाडु के वल्पराई नामक छोटे नगर में हर साल सर्दियों के मौसम में “ग्रे वैगटेल” (स्थानीय भाषा में “वालट्टी कुरुवी”) नामक पक्षी पहाड़ी क्षेत्रों से आकर कुछ महीनों के लिए वहाँ रुकते हैं। वल्पराई के स्कूलों के बच्चे और शिक्षक साल भर इन पक्षियों की तलाश करते हैं और उनके आँकड़े जुटाते हैं। जब पहली ग्रे वैगटेल पक्षी वल्पराई पहुंचती है, तो बच्चे और शिक्षक बड़े-बड़े पोस्टर लगाकर उसका स्वागत करते हैं और एक-दूसरे को मिठाई बाँटकर उत्सव मनाते हैं।

प्र. यह कहानी हमें क्या सिखाती है?
उ. यह सच्ची कहानी दिखाती है कि प्रकृति और पक्षियों के प्रति प्रेम व जागरूकता से पूरा समुदाय कैसे जुड़ सकता है। यह हमें सिखाती है कि प्रवासी पक्षियों (migratory birds) का स्वागत और संरक्षण करना चाहिए, क्योंकि वे भी हमारे पर्यावरण का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

NCERT Class 3 EVS Solutions in Hindi- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) | अध्याय 7: पानी है अनमोल — हल एवं व्याख्या

यह भाग “हमारा अद्भुत संसार” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम EVS) की अध्याय 7 “पानी है अनमोल” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chev107.pdf)।

बारिश का पानी: कहाँ से आता है, कहाँ जाता है?

प्र. बारिश का पानी धरती पर गिरने के बाद कहाँ जाता है?
उ. जब बारिश होती है, तो पानी अलग-अलग सतहों पर गिरता है। कुछ पानी मिट्टी में सोख लिया जाता है और धीरे-धीरे भूमि के अंदर रिसकर भूमिगत जल (groundwater) बन जाता है, जो आगे चलकर किसी धारा या तालाब में मिल जाता है। कुछ पानी सड़कों और ढलानों पर बहकर नालियों, नदियों या तालाबों में चला जाता है। कुछ पानी धूप निकलने पर वाष्पित (evaporate) हो जाता है। इस तरह बारिश का पानी अलग-अलग प्राकृतिक स्रोतों – जल-धाराओं, नदियों, तालाबों, झीलों, कुओं और भूमिगत जल – को भरता है।

पानी हमारे घर तक कैसे पहुँचता है?

प्र. हमें पानी कहाँ-कहाँ से मिलता है?
उ. हमें पानी कई तरीकों से मिलता है:

  • घर के नल से, जो पाइपों के जरिए छत पर रखी टंकी से जुड़ा होता है।
  • कुएँ या हैंडपंप से, जहाँ पानी घिरनी, हैंडपंप या बिजली के पंप की सहायता से निकाला जाता है।
  • पानी के टैंकर से, जो पास की किसी नदी, झील या जल-स्रोत से पानी लाकर देते हैं।
  • सीधे नदी, झील या तालाब से।

पाठ में सूर्या और बरखा नाम के दो बच्चे अपने घर के नल का पानी कहाँ से आता है, यह पता लगाते हैं। वे पाइपों का रास्ता देखते हुए छत पर रखी टंकी तक पहुँचते हैं और सोचते हैं कि टंकी में पानी सबसे पहले कैसे आया।

घर में पानी का उपयोग और उसकी बचत

प्र. हमारे दैनिक जीवन में पानी का उपयोग किन-किन कार्यों के लिए होता है?
उ. हमें पीने, खाना बनाने, नहाने, दाँत साफ करने, कपड़े व बर्तन धोने, सफाई करने और पेड़-पौधों को सींचने के लिए पानी की जरूरत होती है। पाठ में सूर्या और बरखा के परिवार में एक दिन नल में पानी नहीं आता, लेकिन परिवार परेशान नहीं होता क्योंकि उन्होंने पहले से दो बाल्टी पानी बचाकर रखा था। इससे यह सीख मिलती है कि पानी की उपलब्धता हमेशा एक जैसी नहीं रहती, इसलिए हमें पानी का सोच-समझकर उपयोग करना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर उपयोग के लिए पहले से थोड़ा पानी बचाकर रखना चाहिए।

पानी जमा करने के पारंपरिक और आधुनिक बर्तन

प्र. लोग पानी को जमा करके रखने के लिए किन-किन बर्तनों का उपयोग करते हैं?
उ. बहुत वर्ष पहले, जब घरों में नल और पाइप नहीं होते थे, तब लोगों ने पानी जमा करने के लिए तरह-तरह के बर्तन बनाना सीखा। इनमें मिट्टी का घड़ा, मिट्टी की सुराही, ताँबे का बर्तन और पीतल का घड़ा शामिल हैं। आज के समय में लोग पानी जमा करने के लिए स्टील का घड़ा, एल्यूमीनियम का बर्तन, प्लास्टिक की बोतल और बाल्टी जैसे बर्तनों का भी उपयोग करते हैं। ये सभी बर्तन अलग-अलग सामग्री से बने होते हैं और अलग-अलग क्षेत्रों में इनके अलग-अलग नाम भी होते हैं।

एक पल रुकिए और सोचिए! – जल चक्र का सार

प्र. पानी हमारे घर तक पहुँचने से लेकर उपयोग होने तक किन-किन चरणों से गुजरता है?
उ. सबसे पहले धरती पर पानी बारिश के रूप में आता है। यह पानी नदियों, तालाबों, झीलों, कुओं और भूमिगत जल जैसे प्राकृतिक स्रोतों को धीरे-धीरे भर देता है। हम इन स्रोतों से अनेक तरीकों से (नल, टंकी, कुआँ, हैंडपंप, टैंकर आदि के जरिए) पानी अपने घरों में लाते हैं और अलग-अलग बर्तनों में इसका संग्रह करते हैं। फिर हम इस पानी का पीने, खाना बनाने, नहाने और सफाई जैसे कई कामों में उपयोग करते हैं। उपयोग के बाद यह पानी गंदा हो जाता है – इस गंदे पानी को हम पीने या खाना पकाने के लिए दोबारा उपयोग नहीं कर सकते, लेकिन इसे पौधों को सींचने या शौचालय में फिर से उपयोग किया जा सकता है। इसलिए हमें पानी का सोच-समझकर उपयोग करना चाहिए और जितना संभव हो, इसका पुनः उपयोग (reuse) करना चाहिए।

हर बूँद है अनमोल

प्र. “हर बूँद है अनमोल” – इस कथन का क्या अर्थ है?
उ. पानी हमारे जीवित रहने के लिए अत्यंत आवश्यक है – हम पानी के बिना तीन दिन से अधिक जीवित नहीं रह सकते। कुछ स्थानों पर बारिश बहुत कम होती है और पानी के बड़े स्रोत भी नहीं होते, जिसके कारण वहाँ के लोगों को पानी लाने के लिए दूर-दूर तक पैदल जाना पड़ता है। इसलिए हमें पानी की एक-एक बूँद का महत्व समझना चाहिए और उसे बर्बाद नहीं करना चाहिए।

प्र. हम प्यासे लोगों और पशु-पक्षियों की मदद कैसे कर सकते हैं?
उ. हम घर आने वाले हर व्यक्ति (जैसे डाकिया, सामान पहुँचाने वाला या सफाईकर्मी) को पीने के लिए साफ पानी दे सकते हैं। कई जगहों पर घरों के बाहर पानी से भरे बर्तन रखने की परंपरा है, विशेष रूप से गर्मी के मौसम में, ताकि किसी भी प्यासे व्यक्ति को पानी मिल सके – इसे “नि:शुल्क पीने का पानी” या प्याऊ कहा जाता है। पक्षियों और कीटों की मदद के लिए हम गर्मी के महीनों में “बर्डबाथ” (birdbath) बना सकते हैं – एक कम गहरे, चौड़े बर्तन में साफ पानी भरकर बालकनी या छत पर रखकर, ताकि पक्षी उसमें पानी पी सकें और ठंडक पा सकें। बर्तन के किनारों पर कंकड़-पत्थर रखने से पक्षियों को बैठने में और कीटों को पानी तक पहुँचने में मदद मिलती है, और पानी को समय-समय पर बदलते रहना चाहिए।

आइए, मंथन करें! (क) लिखिए

प्र. 1. आपने बरसात का पानी इकट्ठा करके देखा कि यह साफ है या गंदा। अलग-अलग जगहों पर गिरने वाले बरसात के पानी का क्या हुआ?
उ. जो पानी छत, सड़क या पक्की जमीन पर गिरा, वह बहकर नालियों या गड्ढों में चला गया या फिर किसी नदी-नाले में जा मिला। जो पानी मिट्टी या घास वाली जगह पर गिरा, वह धीरे-धीरे धरती में सोख लिया गया और भूमिगत जल का हिस्सा बन गया। बर्तन में इकट्ठा किया गया पानी आमतौर पर साफ होता है, लेकिन यदि हवा में धूल हो तो यह हल्का गंदा भी हो सकता है।

प्र. 2. अपने आस-पास की किसी जल-धारा, नदी, कुएँ, तालाब या झील के बारे में कुछ पंक्तियाँ लिखिए। क्या इसका पानी पीने के लिए उपयोग किया जाता है?
उ. यह एक व्यक्तिगत उत्तर वाला प्रश्न है, जिसका उत्तर विद्यार्थी अपने आस-पास मौजूद वास्तविक जल-स्रोत को देखकर लिख सकते हैं। उदाहरण के लिए: “हमारे गाँव के पास एक तालाब है। इसका पानी सीधे पीने के लिए उपयोग नहीं किया जाता क्योंकि यह साफ नहीं है, लेकिन इसका उपयोग कपड़े धोने और पशुओं को पानी पिलाने के लिए किया जाता है। पीने का पानी हमें नल से मिलता है, जो एक टंकी से पाइपों के जरिए घर तक पहुँचता है।”

(ख) चित्र बनाइए

प्र. आपके द्वारा बनाए गए बर्डबाथ का चित्र बनाइए और उन पक्षियों व कीटों के नाम लिखिए जो उसमें पानी पीने आते हैं।
उ. यह एक रचनात्मक (creative) गतिविधि है। विद्यार्थी अपने घर की बालकनी या छत पर रखे बर्डबाथ का चित्र बना सकते हैं, जिसमें एक चौड़ा-कम गहरा बर्तन, कुछ कंकड़ और साफ पानी दिखाया जाए। इसमें पानी पीने आने वाले पक्षियों (जैसे गौरैया, कबूतर, कौआ, बुलबुल) और कीटों (जैसे मधुमक्खी, तितली) के नाम लिखे जा सकते हैं।

(ग) चर्चा कीजिए

प्र. पानी की बर्बादी को हम कैसे रोक सकते हैं?
उ. पानी बहुत अनमोल है और हमें इसकी एक बूँद भी बर्बाद नहीं करनी चाहिए। पानी की बर्बादी रोकने के कुछ तरीके इस प्रकार हैं:

  • नल का उपयोग करते समय, जैसे दाँत साफ करते या हाथ धोते समय, जरूरत न होने पर नल बंद रखना चाहिए।
  • पानी की टंकी या बाल्टी को भरते समय ध्यान रखना चाहिए कि वह बहकर बर्बाद न हो।
  • नहाने में बाल्टी और मग का उपयोग करना चाहिए, जिससे शावर की तुलना में कम पानी खर्च होता है।
  • घर या नल में पानी के रिसाव (leakage) को तुरंत ठीक करवाना चाहिए।
  • कपड़े व बर्तन धोने के बाद बचे पानी का उपयोग पौधों को सींचने के लिए किया जा सकता है।

NCERT Class 3 EVS Solutions in Hindi- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) | अध्याय 8: हमारा भोजन — हल एवं व्याख्या

यह भाग “हमारा अद्भुत संसार” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम EVS) की अध्याय 8 “हमारा भोजन” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chev108.pdf)।

शीरीन की कहानी: संतुलित भोजन का महत्व

प्र. शीरीन की कहानी से हमें संतुलित भोजन के बारे में क्या सीख मिलती है?
उ. शीरीन कक्षा 3 की तेज दौड़ने वाली थी, लेकिन वह अक्सर बीमार पड़ जाती थी क्योंकि वह केवल चावल और आलू खाती थी। एक चैंपियन धावक ने उसे बताया कि स्वस्थ व ताकतवर शरीर के लिए उसे अलग-अलग फल, सब्जियाँ, अलग-अलग अनाज (चावल, रागी, ज्वार, गेहूं, बाजरा), दालें और सूखे मेवे भी खाने चाहिए। शीरीन ने यह सलाह मानी, अलग-अलग तरह का भोजन खाना शुरू किया, और जल्द ही वह पहले से ज्यादा ताकतवर महसूस करने लगी और एक दौड़ प्रतियोगिता में अपने विद्यालय के लिए पदक जीता। इस कहानी से यह सीख मिलती है कि स्वस्थ व ताकतवर रहने के लिए संतुलित भोजन – यानी विविध प्रकार के फल, सब्जियाँ, अनाज, दालें और घर का बना हुआ भोजन – बहुत जरूरी है।

हम खाने-पीने की चीजें क्यों पसंद करते हैं?

प्र. हमें खाने और पीने की आवश्यकता क्यों होती है?
उ. हमें जीने और स्वस्थ व ताकतवर रहने के लिए खाने-पीने की जरूरत होती है। भोजन से हमें शरीर को ताकत और ऊर्जा मिलती है, जो हमें बढ़ने, खेलने और पड़ने-लिखने में मदद करती है। हम अलग-अलग मीठी, खट्टी, मसालेदार और कड़वी चीजें पसंद करते हैं।

एक पल रुकिए और सोचिए! – छप्पन भोग

प्र. “छप्पन भोग” क्या है और इसमें कौन-कौन से रस होते हैं?
उ. छप्पन भोग एक विशेष प्रकार का भोजन है, जिसे त्योहारों और शुभ अवसरों पर परिवार, रिश्तेदारों, मित्रों व अतिथियों की आवभगत के लिए बनाया जाता है। इस भोग में 56 प्रकार के व्यंजन होते हैं तथा भोजन के 6 रसों का मिश्रण होता है – मीठा, तीखा, कसैला, खट्टा, नमकीन और कड़वा।

हम तरह-तरह की चीजें खाते हैं – मौसम के अनुसार भोजन

प्र. गर्मी और सर्दियों में हमारे खाने-पीने में क्या बदलाव आता है?
उ. गर्मियों में हमें आइसक्रीम, कुल्फी, नारियल पानी, छाछ, नींबू पानी, आम पन्ना, गन्ने का रस या नारियल पानी जैसी ठंडी चीजें पीना अच्छा लगता है, क्योंकि पसीना आने से शरीर से पानी निकलता है। सर्दियों में हम गरमागरम भोजन, सूप या अन्य गरम पेय पीना पसंद करते हैं। अलग-अलग मौसम में हमें अलग-अलग सब्जियाँ और फल मिलते हैं – गर्मियों में आम व तरबूज तथा सर्दियों में सेब खूब मिलते हैं। हमारे देश के विभिन्न भागों में तरह-तरह का स्वादिष्ट भोजन खाया जाता है, और कई बार हमें कुछ खाने की चीजों के बारे में केवल सुना होता है, लेकिन अब तक चखा नहीं होता।

गर्मियों में पानी की आवश्यकता

प्र. गर्मियों में हमें बार-बार पानी क्यों पीना चाहिए?
उ. गर्मियों में मौसम गरम होता है और हमें बहुत पसीना आता है। पसीना आने से हमारे शरीर से पानी निकलता है, इसीलिए हमें गर्मियों में खूब पानी, छाछ, नींबू पानी, आम पन्ना, गन्ने का रस या नारियल पानी पीना चाहिए। जब हम खेलते हैं या कोई मेहनत वाला काम करते हैं, तो भी हमें पसीना आता है, इसलिए हमें बार-बार पानी पीते रहना चाहिए। हमारे शरीर को बहुत पानी की आवश्यकता होती है और हम पानी के बिना जीवित नहीं रह सकते – इसीलिए हम अक्सर कहते हैं, ‘जल ही जीवन है।’

हमारा भोजन कहाँ से आता है?

प्र. हम पेड़-पौधों के किन-किन भागों को भोजन के रूप में खाते हैं?
उ. हम पेड़-पौधों के अलग-अलग भागों को खाते हैं:

  • पत्तियाँ: पालक, मेथी, पत्ता गोभी, सरसो, धनिया।
  • फल: अमरूद, चीकू, सेब, आम।
  • जड़ें: गाजर, मूली, चुकंदर।
  • तने: आलू, हरे बाँस का तना, अदरक, प्याज।
  • बीज: अनाज (चावल, गेहूं आदि), दालें, सूखे मेवे (काजू, बादाम, पिस्ता)।

इनके अतिरिक्त, कुछ लोग जानवरों से मिलने वाली चीजें, जैसे शहद, अंडे, माँस, दूध और दूध से बनने वाले घी, पनीर, दही आदि चीजें भी खाते हैं। इस तरह हमारा भोजन पेड़-पौधों और जानवरों – दोनों स्रोतों से मिलकर बनता है।

आइए, मंथन करें! (क) चर्चा कीजिए

प्र. 1. हमें तरह-तरह के भोजन की आवश्यकता क्यों होती है?
उ. अलग-अलग प्रकार का भोजन खाने से हमें अलग-अलग पोषक तत्व (प्रोटीन, विटामिन, खनिज लवण आदि) मिलते हैं, जो स्वस्थ व ताकतवर रहने के लिए जरूरी हैं। अगर हम सिर्फ़ एक ही चीज बार-बार खाएं, तो हमें जरूरी सभी पोषक तत्व नहीं मिल पाएंगे।

प्र. 2. हम मौसम के अनुसार भोजन क्यों करते हैं?
उ. हर मौसम में हमारे शरीर की जरूरतें बदलती हैं – गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने वाले भोजन की जरूरत होती है, जबकि सर्दियों में शरीर को गर्म रखने वाले भोजन की। साथ ही, अलग-अलग मौसम में अलग-अलग फल-सब्जियाँ ही खेतों में उगती हैं, इसलिए मौसम के अनुसार उपलब्ध ताजा भोजन खाना स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।

प्र. 3. हम यह कैसे बता सकते हैं कि भोजन संतुलित है या असंतुलित?
उ. यदि हमारी थाली/प्लेट में अनाज, दालें, सब्जियाँ, फल और दूध/दही जैसी अलग-अलग चीजें संतुलित मात्रा में शामिल हों, तो भोजन संतुलित कहलाता है। अगर हम रोज केवल एक या दो चीजें (जैसे केवल चावल और आलू) बार-बार खाते हैं, तो वह भोजन असंतुलित कहलाता है।

प्र. 4. भोजन की बर्बादी को रोकना क्यों आवश्यक है?
उ. भोजन बनाने में किसानों की मेहनत और प्राकृतिक संसाधन लगते हैं, इसलिए भोजन को बर्बाद करना सही नहीं है। जो लोग भूखे हैं, उनके लिए बर्बाद होा हुआ भोजन अन्याय भी है।

प्र. 5. घर में भोजन को बर्बाद होने से रोकने के कुछ तरीके बताइए।
उ. जरूरत से थोड़ा ही भोजन बनाएं, बचे हुए खाने को संभालकर रखें और अगले दिन उपयोग करें, परोसने के आकार के अनुसार भोजन निकालें, और बचे हुए सब्जी-फल के छिलकों का उपयोग (जैसे सब्जी के छिलकों से पराठा) करें।

(ख) लिखिए

प्र. एक ऐसे भोजन का नाम लिखिए जिसमें पौधों और जानवरों, दोनों से मिलने वाली चीजें हों।
उ. लस्सी एक ऐसा ही उदाहरण है – यह दही (जो दूध से, यानी जानवरों से मिलने वाली सामग्री से बनती है) और शक्कर (जो गन्ने से मिलती है, यानी पौधे से मिलने वाली सामग्री) दोनों से मिलकर बनती है।

(ग) चित्र बनाइए और (घ) मिलकर खाइए

प्र. चित्र बनाने वाली गतिविधि में क्या करना होता है?
उ. अपनी कॉपी में तीन प्लेटों या थालियों का चित्र बनाकर उनमें वह भोजन दिखाना चाहिए जो आप सुबह, दोपहर और रात के भोजन में खाते हैं। इसके बाद कक्षा में कोई एक फल लाकर शिक्षक की सहायता से चाट या सलाद बनाकर सभी मिलकर खाया जाता है।

(ङ) सोचिए

प्र. यदि आपके घर में अचानक ही कोई मेहमान आ जाए, तो आप उन्हें उस समय क्या खिलाएंगे और क्यों?
उ. यह एक व्यक्तिगत उत्तर वाला प्रश्न है। साधारणतः घर में पहले से कुछ नहीं फल, नमकीन, बिस्कुट या चाय-नाश्ते रखे जाते हैं ताकि अचानक आए मेहमान का स्वागत सम्मान से किया जा सके – यह हमारी संस्कृति में अतिथि सत्कार (घर आए हुए लोगों का स्वागत करना) का भी एक भाग है।

NCERT Class 3 EVS Solutions in Hindi- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) | अध्याय 9: स्वस्थ रहो, प्रसन्न रहो — हल एवं व्याख्या

यह भाग “हमारा अद्भुत संसार” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम EVS) की अध्याय 9 “स्वस्थ रहो, प्रसन्न रहो” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chev109.pdf)।

स्वच्छ एवं प्रसन्नचित्त रहने की आदतें

प्र. हमें स्वस्थ और प्रसन्न रहने के लिए किन-किन सरल आदतें अपनानी चाहिए?
उ. स्वस्थ रहने से हमारा शरीर और मन सही तरह से काम करता है। कुछ सरल व अच्छी आदतें इस प्रकार हैं: रोजाना दाँत साफ करना, स्नान करना, बालों में कंघी करना, साबुन से अच्छी तरह हाथ धोना, नाखून साफ-सुथरे और कटे हुए रखना, दिन में दो बार दाँत साफ करना (एक बार सुबह और एक बार रात सोने से पहले), 6-8 गिलास पानी पीना, समय पर भोजन करना, कम से कम 8 घंटों की नींद लेना और बाहर खेलना।

हम अपने दाँत कैसे साफ करते हैं? – दातून की परंपरा

प्र. मोयना के दादाजी दातून से दाँत साफ करने की कहानी क्या सिखाती है?
उ. मोयना के दादाजी बबूल या नीम की दातून से अपने दाँत साफ करते थे। मोयना के पूछने पर उन्होंने बताया कि वे रोज पास के पेड़ से ताजा दातून तोड़ते हैं, उसके सिरे को चबाकर ब्रश जैसा बनाते हैं और उससे दाँतों में फंसे भोजन के कण साफ करते हैं, जिससे मसूड़ों की मालिश भी हो जाती है। यह दांत साफ करने का भारतीय परंपरागत तरीका है, जिससे नीम, बबूल और करंज जैसे पेड़ों की टहनी से दातून बनाकर उपयोग में लाते हैं। आधुनिक टूथब्रश से दाँत साफ करने का तरीका इसी पुरानी भारतीय दातून परंपरा से ही विकसित हुआ है।

पर्यावरण-अनुकूल सफाई का घोल बनाना

प्र. संतरों और नींबू के छिलकों से घरेलू सफाई का घोल (क्लीनर) कैसे बनाया जा सकता है?
उ. 8-12 संतरे या नींबू के छिलके, 10 साबुत लौंग या 2-3 तेज पत्ते और 2 प्याले सफेद सिरके को आधा लीटर के पारदर्शी डिब्बे में भरकर ढक्कन बंद करें और कम से कम दो सप्ताह धूप वाली जगह पर रखें, बीच-बीच में हिलाते रहें। दो सप्ताह बाद छानकर इसे फर्श, फर्नीचर और बाथरूम जैसी सतहों की सफाई के लिए उपयोग में लाया जा सकता है। यह प्राकृतिक आधारित घोल पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुँचाता।

पशु-पक्षी भी स्वयं को स्वच्छ रखते हैं

प्र. पशु-पक्षी स्वयं को कैसे स्वच्छ रखते हैं?
उ. बंदर एक-दूसरे के शरीर के बालों से छोटे-छोटे कीड़े निकालकर साफ करते रहते हैं। पक्षी अपनी चोंच से अपने पंखों को साफ करते हैं। इसी तरह कई जीव अपने आस-पास के परिवेश में खुद को स्वच्छ रखने के अपने-अपने तरीके अपनाते हैं।

खेलने से शरीर में होने वाले बदलाव

प्र. खेलते समय हमारे शरीर में क्या-क्या बदलाव आते हैं?
उ. पकड़म-पकड़ाई जैसे खेल में तेज दौड़ने से हम तेज-तेज साँस लेने लगते हैं, गाल हल्के से लाल भी हो जाते हैं, शरीर में गर्माहट महसूस होती है और पसीना भी आता है। ये सभी संकेत बताते हैं कि शारीरिक गतिविधि से हमारा शरीर सक्रिय हो रहा है।

खेल-कूद और मनोरंजन की भूमिका

प्र. अच्छे स्वास्थ्य के लिए खेल-कूद और मनोरंजन क्यों जरूरी है?
उ. हरप्रीत की दादी की कहानी से पता चलता है कि भले ही घुटनों में दर्द रहने से चलने-फिरने में कठिनाई हो, फिर भी थोड़ा-बहुत चलना और शतरंज जैसे मस्तिष्क वाले खेल खेलना लाभदायक होता है, क्योंकि इससे शरीर और मस्तिष्क दोनों सक्रिय रहते हैं। लट्टू घुमाना, चाल्से, सांप-सीड़ी, कैरम और शतरंज जैसे घर के खेल भी मनोरंजन के साथ-साथ सोचने-समझने की क्षमता बढ़ाते हैं।

खेलते समय सुरक्षा

प्र. खेलने के लिए कौन-से स्थान सुरक्षित होते हैं और खेलते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
उ. पार्क, विद्यालय का मैदान जैसे स्थान खेलने के लिए सुरक्षित होते हैं, जबकि भीड़-भाड़ वाली सड़क, रेलिंग रहित छत या निर्माण स्थल जैसी जगहें खेलने के लिए असुरक्षित होती हैं। साथ ही, सार्वजनिक स्थानों पर अपरिचित लोगों से सावधान रहना चाहिए – लोगों से तभी बातचीत करें जब साथ में माता-पिता या कोई भरोसेमंद बड़ा व्यक्ति हो। अगर कोई अपरिचित व्यक्ति टॉफी देने, घर छोड़ने, या किसी भी बहाने पर गाड़ी में ले जाने की बात कहे, तो हमें साफ मना कर देना चाहिए और तुरंत किसी भरोसेमंद बड़े को इसकी जानकारी देनी चाहिए।

आइए, मंथन करें! (क) लिखिए

प्र. साप्ताहिक स्वास्थ्य तालिका में क्या-क्या दर्ज किया जाता है और इससे क्या समझ मिलती है?
उ. साप्ताहिक स्वास्थ्य तालिका में हर दिन के लिए यह दर्ज किया जाता है कि क्या दो बार दाँत साफ किए, क्या शौचालय गए/गई, क्या स्नान किया, नाश्ते में क्या खाया, कितनी देर टी.वी. देखा या फोन चलाया, और घर से बाहर कितनी देर खेल खेले। इससे यह पता चलता है कि हमारी दिनचर्या कितनी स्वस्थ है और हमें किस आदत में सुधार की जरूरत है।

(ख) चित्र बनाइए

प्र. अपने पूरे दिन के 24 घंटों को गोले के रूप में कैसे दर्शाते हैं?
उ. एक बड़ा गोला बनाकर उसे 24 बराबर हिस्सों में बाँटा जाता है, और प्रत्येक हिस्से को उस गतिविधि के अनुसार रंग दिया जाता है जिसमें वह समय बिताया जाता है। उदाहरण के लिए: सोने में 8 घंटे, भोजन में 2 घंटे, पड़ाई/स्कूल में 6 घंटे, बाहर खेलने में 2 घंटे, माता-पिता की सहायता में 2 घंटे, टी.वी./फोन में 1 घंटा, स्नान-शौचालय में 1 घंटा और अन्य कामों में 2 घंटे इस तरह बाँटे जा सकते हैं।

(ग) चर्चा कीजिए

प्र. शरीर की ताकत और ऊर्जा बढ़ाने वाली कौन-सी गतिविधियाँ हो सकती हैं, और इन्हें सप्ताह में कितनी बार करना चाहिए?
उ. दौड़ना, कूदना, सीड़्हियों पर चढ़ना जैसी गतिविधियाँ शरीर की ताकत और ऊर्जा बढ़ाने में सहायक होती हैं। इस तरह की गतिविधि सप्ताह में कम से कम दो बार करनी चाहिए। अपने मित्रों के साथ मिलकर इस पर चर्चा करके ऐसी गतिविधियाँ साथ मिलकर करना चाहिए, जिससे यह आदत मजेदार और नियमित बनी रहे।

NCERT Class 3 EVS Solutions in Hindi- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) | अध्याय 10: वस्तुओं की दुनिया — हल एवं व्याख्या

यह भाग “हमारा अद्भुत संसार” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम EVS) की अध्याय 10 “वस्तुओं की दुनिया” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chev110.pdf)।

अपने चारों ओर की वस्तुओं का अवलोकन

प्र. खुशी के बनाए चित्र में दिखने वाली वस्तुएँ कहाँ से आती हैं, और उन्हें किसने बनाया है?
उ. पाठ्यपुस्तक में खुशी अपनी कक्षा का चित्र बनाकर उसमें डेस्क, किताबें, घड़ी, पेंसिलें, ग्लोब और खिड़की जैसी वस्तुओं के नाम लिखती है। ये सभी वस्तुएँ हमारे आस-पास मौजूद सामग्रियों से बनती हैं और अलग-अलग व्यक्तियों (कारीगरों) द्वारा बनाई जाती हैं। पाठ्यपुस्तक बताती है कि खिड़की का काँच पारदर्शी होने के कारण चित्र में सीधे नहीं दिखता, बल्कि उसमें से आर-पार देखा जा सकता है।

वस्तुएँ किन पदार्थों से बनती हैं

प्र. हमारे आस-पास की वस्तुएँ किन-किन पदार्थों से बनी होती हैं, और लकड़ी हमें कहाँ से मिलती है?
उ. पाठ्यपुस्तक के अनुसार हमारे आस-पास की वस्तुएँ प्लास्टिक, धातु, लकड़ी, रेशों और ईंटों जैसी सामग्रियों से बनी होती हैं। कक्षा की चटाई कपड़े से, बिजली का बल्ब काँच और धातु से, तथा बिजली का स्विच प्लास्टिक और धातु से बनता है। लकड़ी हमें पेड़ों से प्राप्त होती है।

पारदर्शी, पारभासी और अपारदर्शी वस्तुएँ

प्र. बोतल, कागज, कपड़े और बर्तन जैसी वस्तुओं को जलती हुई मोमबत्ती के सामने रखकर देखने पर क्या पता चलता है?
उ. पाठ्यपुस्तक में बताया गया है कि कुछ वस्तुओं के आर-पार पूरी तरह देखा जा सकता है (जैसे काँच), कुछ के आर-पार धुँधला-सा (आंशिक रूप से) दिखता है, और कुछ वस्तुओं के आर-पार बिल्कुल नहीं देखा जा सकता। इसी आधार पर वस्तुओं को पारदर्शी, पारभासी और अपारदर्शी नाम की तीन श्रेणियों में बाँटा गया है। घर की खिड़की के शीशे से बाहर पेड़, चट्टानें, पक्षी और हर चीज़ साफ-साफ दिखाई देती है, क्योंकि काँच पारदर्शी होता है।

रंगीन वस्तुओं से देखने पर क्या बदलता है

प्र. रंगीन पारदर्शी थैली, बोतल या कपड़े के सामने सफेद कागज रखकर देखने पर क्या बदलाव दिखता है?
उ. पाठ्यपुस्तक के प्रयोग के अनुसार, नीले रंग के पतले प्लास्टिक या काँच के सामने सफेद कागज रखने पर कागज नीला दिखने लगता है, और पीले रंग के पतले प्लास्टिक से देखने पर वह पीला दिखता है। इसी तरह पीले रंग के पतले प्लास्टिक के आर-पार किसी नीली वस्तु को देखने पर वह हरे रंग की दिखाई देती है। लाल सेलोफेन आवरण से देखने पर घास लाल-हरी, नीले सेलोफेन से पेड़ नीले-हरे, और हरे सेलोफेन से कमरे की हर चीज़ हरी दिखाई देती है। इससे पता चलता है कि रंगीन पारदर्शी वस्तुओं से आर-पार देखने पर असली रंग बदला हुआ महसूस होता है।

वस्तुओं का समूहीकरण और पदार्थों के स्रोत

प्र. वस्तुओं को उनके पदार्थ के आधार पर कैसे समूहों में बाँटा जाता है, और ये पदार्थ आखिर आते कहाँ से हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक में एक तालिका दी गई है जिसमें वस्तुओं को धातु, लकड़ी, काँच, प्लास्टिक और कपड़े जैसे पदार्थों के आधार पर समूहों में बाँटा जाता है; मिट्टी और रबड़ जैसे अन्य पदार्थों की वस्तुओं के लिए तालिका में नई पंक्ति जोड़ी जा सकती है। धातुएँ पृथ्वी से खोदी गई चट्टानों और खनिजों (अयस्क) से प्राप्त होती हैं, जबकि कपड़ा सूती, ऊनी या मानव-निर्मित रेशों से बनता है।

समय के साथ बदलते पदार्थ

प्र. दादा-दादी/नाना-नानी के बचपन में क्या वस्तुएँ आज जैसे ही पदार्थों से बनती थीं?
उ. पाठ्यपुस्तक बच्चों को अपने दादा-दादी से पूछने के लिए प्रेरित करती है कि उनके बचपन में वस्तुएँ किन पदार्थों से बनती थीं, और क्या अब कुछ नए पदार्थ (जैसे आधुनिक प्लास्टिक) आ गए हैं जो पहले नहीं थे। कई परिवारों में पहले दाँत साफ करने के लिए नीम की टहनी (दातून) का उपयोग होता था, जबकि आज टूथब्रश का प्रचलन है — इससे पता चलता है कि समय के साथ पदार्थ और आदतें दोनों बदलती रहती हैं।

सही पदार्थ का चुनाव क्यों जरूरी है

प्र. किसी चमकीली चम्मच के बारे में यह कैसे पता लगाया जा सकता है कि वह असली धातु से बनी है या किसी और पदार्थ पर चमकदार रंग से रंगी गई है?
उ. पाठ्यपुस्तक बताती है कि चम्मच को किसी धातु या पत्थर से बनी वस्तु पर धीरे से थपथपाकर परखा जा सकता है — अगर टिंग-टिंग जैसी आवाज़ आए तो वह धातु से बनी है, और अगर ठक-ठक जैसी भारी आवाज़ आए तो वह किसी और पदार्थ (जैसे प्लास्टिक या लकड़ी) से बनी हो सकती है। इसी तरह मेज़ कपड़े या रबड़ से नहीं बनाई जा सकती, क्योंकि मेज़ के लिए मज़बूत, सख्त और कठोर सामग्री चाहिए, जबकि कपड़ा और रबड़ इतने कठोर नहीं होते।

प्राकृतिक और कृत्रिम वस्तुएँ

प्र. प्राकृतिक और कृत्रिम (मानव-निर्मित) वस्तुओं में क्या अंतर है, और आम का चित्र देखकर वर्ष के किस महीने का अनुमान लगाया जा सकता है?
उ. झील, नदी, पहाड़, समुद्र, इंद्रधनुष और सूर्योदय-सूर्यास्त जैसी चीज़ें प्राकृतिक होती हैं, जबकि मेज़, किताब, टीवी, कार, घर और सड़कें जैसी चीज़ें मनुष्य द्वारा बनाई गई कृत्रिम वस्तुएँ हैं। पाठ्यपुस्तक में यह भी सिखाया गया है कि कुछ पेड़-पौधों पर वर्ष के खास समय ही फल-फूल लगते हैं — जैसे आम मुख्यतः मई-जून के महीनों में ही उपलब्ध होते हैं, इसलिए आम के पके फलों वाला चित्र देखकर अनुमान लगाया जा सकता है कि वह मई या जून के आस-पास का समय होगा।

आइए, मंथन करें! (क) लिखिए

प्र. हमारे आस-पास मिलने वाली वस्तुएँ किन-किन पदार्थों से बनी होती हैं — ऐसे तीन पदार्थों के नाम लिखिए।
उ. धातु, प्लास्टिक, लकड़ी और रेशा — ये हमारे आस-पास आमतौर पर पाए जाने वाले पदार्थ हैं, जिनसे रोज़मर्रा की अधिकतर वस्तुएँ बनाई जाती हैं।

(ख) चर्चा कीजिए

प्र. किसी वस्तु के असली पदार्थ की पहचान कैसे की जा सकती है?
उ. वस्तु को किसी धातु या पत्थर की सतह पर हल्के से थपथपाकर उसकी आवाज़ सुनी जा सकती है — तेज़ और साफ़ (टिंग-टिंग) आवाज़ धातु का संकेत देती है, जबकि भारी और दबी हुई (ठक-ठक) आवाज़ किसी अन्य पदार्थ की ओर इशारा करती है। इसके अलावा वस्तु को छूकर उसकी बनावट (चिकनी/खुरदरी), ठंडक और चमक से भी अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

(ग) चित्र बनाइए एवं (घ) मिलान कीजिए

प्र. तीन प्राकृतिक और तीन कृत्रिम वस्तुओं के चित्र किस तरह बनाए जा सकते हैं, और पारदर्शी-पारभासी-अपारदर्शी वस्तुओं का सही मिलान कैसे किया जाता है?
उ. प्राकृतिक वस्तुओं में पहाड़, नदी और सूरज, और कृत्रिम वस्तुओं में घर, कुर्सी और साइकिल जैसे उदाहरण चुनकर उनके रंगीन चित्र बनाए जा सकते हैं। मिलान करते समय पारदर्शी की श्रेणी में चश्मे में लगा काँच, पारभासी की श्रेणी में कागज़ से बना लैंप शेड, और अपारदर्शी की श्रेणी में थाली को रखा जाता है — क्योंकि इनके आर-पार क्रमशः पूरी तरह, आंशिक रूप से और बिल्कुल भी नहीं देखा जा सकता।

NCERT Class 3 EVS Solutions in Hindi- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) | अध्याय 11: कैसे बनीं ये वस्तुएँ — हल एवं व्याख्या

यह भाग “हमारा अद्भुत संसार” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम EVS) की अध्याय 11 “कैसे बनीं ये वस्तुएँ” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chev111.pdf)।

कुम्हार और मिट्टी के बर्तन

प्र. मिट्टी से बनी तरह-तरह की वस्तुओं को किसने और कैसे बनाया है?
उ. पाठ्यपुस्तक बताती है कि सुराही, दीया, मटका और हांडी जैसी अनेक सुंदर वस्तुएँ मिट्टी से बनी होती हैं, और इन्हें कुम्हारों द्वारा मिट्टी को आकार देकर बनाया जाता है। मिट्टी के चाक पर घूमते हुए मिट्टी धीरे-धीरे अलग-अलग सुंदर आकार लेती जाती है, जो देखने में बड़ा ही रोचक होता है।

बर्तनों का उपयोग और भट्ठी में पकाना

प्र. मिट्टी के बर्तनों का उपयोग किसलिए होता है, और उन्हें भट्ठी में क्यों पकाया जाता है?
उ. मिट्टी के बर्तनों का उपयोग मुख्यतः खाने-पीने के पदार्थों को भंडारित (स्टोर) करने के लिए किया जाता है। कुम्हार इनके अलावा गुल्लक, दीये और कई तरह के सजावटी सामान भी बनाते हैं। कच्चे बर्तनों को सख्त और मज़बूत बनाने के लिए भट्ठी (एक बड़े ओवन) में पकाया जाता है, जिसके बिना बर्तन आसानी से टूट सकते हैं।

बर्तन बनाने की पूरी प्रक्रिया

प्र. मिट्टी से बर्तन बनाने की पूरी प्रक्रिया क्या है?
उ. पाठ्यपुस्तक के अनुसार सबसे पहले कुम्हार मिट्टी लेकर उसे गीला करता है और उसमें पानी मिलाता है। फिर वह मिट्टी को अच्छी तरह कूटता है और आटे की तरह गूँथता है। इसके बाद मिट्टी को पत्थर के घूमते हुए चाक पर रखकर हाथों से आकार दिया जाता है। आकार मिलने के बाद बर्तनों को धूप में सुखाया जाता है, और अंत में उन्हें पकाने के लिए भट्ठी में ले जाया जाता है, जिसके बाद बर्तन उपयोग के लिए तैयार हो जाता है। कभी-कभी कुम्हार बर्तनों को और सुंदर दिखाने के लिए उन पर विशेष नमूने (डिज़ाइन) भी बनाते हैं।

नमूने और डिज़ाइन कला

प्र. कुम्हार और कलाकार अपनी कला के लिए विचार कहाँ से लेते हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक बताती है कि कलाकारों को अपनी कला के अधिकतर विचार प्रकृति से ही मिलते हैं — जैसे पत्तियों की बनावट, या पशु-पक्षियों की त्वचा और पंखों पर दिखने वाले नमूने। इन्हीं प्राकृतिक नमूनों से प्रेरित होकर कुम्हार और कलाकार मिट्टी के बर्तनों तथा अन्य वस्तुओं पर सुंदर डिज़ाइन उकेरते हैं।

ईंट और घर बनाने की सामग्री

प्र. क्या सभी घर सिर्फ ईंटों से ही बनते हैं, और घर बनाने में और किन सामग्रियों का उपयोग होता है?
उ. नहीं, सभी घर केवल ईंटों से नहीं बनते। पाठ्यपुस्तक के अनुसार घर मिट्टी, ईंट, पत्थर, घास, लकड़ी, सीमेंट और स्टील जैसी विभिन्न सामग्रियों से बनते हैं। किसी इलाके में उपलब्ध सामग्री और वहाँ की जलवायु के अनुसार घर बनाने की सामग्री बदलती रहती है।

मिट्टी के घर पर्यावरण के लिए बेहतर क्यों

प्र. मिट्टी से बने घर पर्यावरण के लिए बेहतर क्यों माने जाते हैं?
उ. मिट्टी के घरों को ठंडा या गर्म रखने के लिए अतिरिक्त ऊर्जा (जैसे पंखा, हीटर) की ज़्यादा ज़रूरत नहीं पड़ती, क्योंकि ये स्वाभाविक रूप से गर्मियों में ठंडे और सर्दियों में गर्म बने रहते हैं। इस तरह मिट्टी के घर ऊर्जा की बचत करते हैं और पर्यावरण के अनुकूल माने जाते हैं। ज़्यादातर आस-पड़ोस के घर आजकल ईंट, पत्थर और सीमेंट से बने मिलते हैं।

दीवार की मजबूती की जांच

प्र. ईंटों की अलग-अलग व्यवस्था से बनी दो दीवारों में से कौन-सी अधिक मज़बूत होती है, और घर-विद्यालय में सुरक्षा नियमों की क्या भूमिका है?
उ. पाठ्यपुस्तक की गतिविधि में बताया गया है कि जिस दीवार में ईंटें एक-दूसरे में जुड़कर (क्रम बदलकर) रखी जाती हैं, वह ज़्यादा मज़बूत होती है, जबकि सीधी सीध में रखी ईंटों वाली दीवार धकेलने पर आसानी से गिर सकती है। इसी तरह घर और विद्यालय — दोनों जगह सुरक्षा से जुड़े नियम बनाए जाते हैं, ताकि दुर्घटनाओं से बचा जा सके।

घर अलग-अलग प्रकार के क्यों होते हैं

प्र. अलग-अलग तरह के घर क्यों बनाए जाते हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक के अनुसार घर कई कारणों से अलग-अलग प्रकार के होते हैं — परिवार के आकार और ज़रूरतों के अनुसार, परिवार के पास उपलब्ध धन के अनुसार, और स्कूल, कार्यालय, अस्पताल, निवास तथा धार्मिक स्थानों जैसे अलग-अलग उद्देश्यों के लिए अलग-अलग तरह की इमारतें बनाई जाती हैं।

आइए, मंथन करें! (क) लिखिए

प्र. बर्तन बनाने की प्रक्रिया, भट्ठी और घर बनाने की सामग्री के बारे में संक्षेप में बताइए।
उ. बर्तन बनाने में मिट्टी को गीला कर, गूँथकर, चाक पर आकार देकर, धूप में सुखाकर भट्ठी में पकाया जाता है। भट्ठी एक बड़ा ओवन है जो सूखे कच्चे बर्तनों को पकाकर सख्त और मज़बूत बनाता है। घर मिट्टी, ईंट, पत्थर, घास, लकड़ी, सीमेंट और स्टील जैसी सामग्रियों से बनते हैं।

(ख) चित्र बनाइए एवं (ग) चर्चा कीजिए

प्र. अलग-अलग प्रकार के घरों के चित्र किस तरह बनाए जा सकते हैं, और घर अलग-अलग क्यों होते हैं इस पर चर्चा कैसे करें?
उ. कच्ची मिट्टी की झोपड़ी, ईंट-सीमेंट का पक्का घर और लकड़ी की छत वाला पहाड़ी घर — इन तीन तरह के घरों के चित्र बनाकर रंग भरे जा सकते हैं। चर्चा में यह समझाया जा सकता है कि परिवार के आकार, उपलब्ध धन और घर के उद्देश्य (रहने, पढ़ने, इलाज या पूजा के लिए) के अनुसार ही घरों की बनावट अलग-अलग होती है।

NCERT Class 3 EVS Solutions in Hindi- Hamara Adbhut Sansar (हमारा अद्भुत संसार) | अध्याय 12: क्या और कैसे करें इसका — हल एवं व्याख्या

यह भाग “हमारा अद्भुत संसार” (कक्षा 3, हिंदी माध्यम EVS) की अध्याय 12 “क्या और कैसे करें इसका” पर आधारित है। सामग्री NCERT की आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से ली गई है (स्रोत: NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक, chev112.pdf)।

कचरा कहाँ से आता है

प्र. बच्चे और शिक्षक पार्क में क्या कर रहे हैं, और यह कचरा आखिर कहाँ से आता है?
उ. पाठ्यपुस्तक में एक चित्र दिखाया गया है जिसमें बच्चे और शिक्षक राष्ट्रीय स्वच्छता दिवस (स्वच्छ भारत अभियान) में भाग लेते हुए अपने आस-पास की सफाई कर रहे हैं। कचरा हमारे दैनिक कार्यों में की गई लापरवाही से इकट्ठा होता जाता है — जब हम प्लास्टिक बैग, रैपर या पुराने खिलौने जैसी चीज़ों का उपयोग करते हैं, तो वे बेकार होकर कचरा बन जाती हैं और पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकती हैं।

स्कूल और आस-पास की स्वच्छता

प्र. कचरे के ढेर देखकर कैसा महसूस होता है, और क्या हम इस बारे में कुछ कर सकते हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक के अनुसार कचरे के ढेर से बहुत बुरी गंध आती है और यह देखने में भी अच्छा नहीं लगता। इसे सुधारने के लिए हमें कूड़ा इधर-उधर फेंकने की आदत बदलनी होगी और हमेशा कूड़ेदान का ही उपयोग करना चाहिए। एक स्वच्छ विद्यालय में कक्षाओं के अंदर-बाहर और मैदान में कहीं भी कचरा पड़ा नहीं मिलना चाहिए।

कचरा कम करने के उपाय

प्र. कचरा कम करने के लिए हम अपनी आदतों में क्या बदलाव ला सकते हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक बताती है कि प्लास्टिक की थैलियों की जगह कपड़े के थैले का उपयोग करना, रैपर में पैक भोजन और प्लास्टिक की बोतलों से बचना — ये कचरा कम करने के आसान तरीके हैं। इसके अलावा पुराने खिलौने और किताबें दूसरे बच्चों को देना, कागज़ के दोनों तरफ लिखना, टूटी वस्तुओं की मरम्मत करना, और पीने के पानी के लिए प्लास्टिक की जगह स्टील की बोतल का उपयोग करना भी कचरा कम करने (पुनः उपयोग) के अच्छे उदाहरण हैं।

स्वच्छ भारत अभियान

प्र. स्वच्छ भारत अभियान क्या है, और गाँव-शहरों ने अपने परिवेश को कैसे बदला है?
उ. स्वच्छ भारत अभियान भारत को स्वच्छ और स्वस्थ बनाने का एक बड़ा राष्ट्रीय अभियान है, जो हर व्यक्ति को अपनी सड़कों, गाँवों और कस्बों को साफ-सुथरा रखने के लिए प्रोत्साहित करता है। पाठ्यपुस्तक में बताया गया है कि जो गाँव या शहर पहले हर जगह कचरे से भरे रहते थे, वे अब साफ-सुथरी सड़कों, ताज़े पानी के लिए नल-हैंडपंप, गंदा पानी निकालने के लिए सीवेज सिस्टम और कचरे के सही निपटान की व्यवस्था अपनाकर देश के सबसे स्वच्छ स्थानों में गिने जाने लगे हैं।

हरा और नीला कूड़ेदान

प्र. हरे और नीले रंग के दो अलग-अलग कूड़ेदान क्यों उपयोग किए जाते हैं?
उ. नीला कूड़ेदान उन चीज़ों के लिए होता है जिन्हें पुनर्चक्रित (रिसाइकिल) किया जा सकता है, जैसे कागज़, प्लास्टिक की बोतलें, बिजली के बल्ब और इस्तेमाल की हुई प्लास्टिक की थैलियाँ। हरा कूड़ेदान रसोई के कचरे के लिए होता है, जैसे बचा हुआ भोजन, पत्तियाँ और फल-सब्ज़ियों के छिलके। इन दोनों में सही तरह से कचरा अलग-अलग डालने से कचरे का प्रबंधन आसान हो जाता है।

घर और विद्यालय को स्वच्छ रखने के उपाय

प्र. घर और कक्षा को साफ रखने के लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं, और सफाई के लिए कौन-से उपकरण उपयोग होते हैं?
उ. पाठ्यपुस्तक के अनुसार अपने कमरे को साफ-सुथरा रखना, खेलने के बाद खिलौनों को उनकी जगह पर रखना, रैपर और कागज़ के लिए कूड़ेदान का उपयोग करना, और फर्श साफ करने-मेज़ पोंछने में मदद करना — ये सभी घर और कक्षा को साफ रखने के आसान तरीके हैं। घर और विद्यालय में आमतौर पर पोंछा, झाड़ू, डस्ट-पैन, डस्टर, टॉयलेट ब्रश, कूड़ेदान और बैग जैसे सफाई के उपकरण देखे जा सकते हैं।

आइए, मंथन करें! (क) चर्चा कीजिए

प्र. कचरा कैसे इकट्ठा होता है, और हमें इसका प्रबंधन कैसे करना चाहिए?
उ. जब हम प्लास्टिक, कागज़ या भोजन जैसी चीज़ों का उपयोग करके उन्हें फेंक देते हैं, तब कचरा बनता है। इसका प्रबंधन पुरानी चीज़ों के इस्तेमाल के नए तरीके ढूँढ़कर और अपशिष्ट को दोबारा किसी उपयोगी वस्तु में बदलकर (पुनर्चक्रण करके) किया जा सकता है।

(ख) लिखिए

प्र. प्लास्टिक की वस्तुओं की जगह किन सुरक्षित सामग्रियों का उपयोग किया जा सकता है, और हरे-नीले कूड़ेदान में कौन-सी वस्तुएँ डाली जाती हैं?
उ. प्लास्टिक की पानी की बोतलों की जगह स्टेनलेस स्टील या काँच की पुनः उपयोग वाली बोतलें, और प्लास्टिक बैग की जगह सूती, ऊनी या जूट जैसी सामग्री से बने कपड़े के थैले उपयोग किए जा सकते हैं। नीले कूड़ेदान में टूटे प्लास्टिक के सामान, गत्ते और इस्तेमाल की हुई प्लास्टिक की थैलियाँ डाली जाती हैं, जबकि हरे कूड़ेदान में पत्तियाँ, फल-सब्ज़ियों के छिलके और पेंसिल की छीलन जैसी चीज़ें डाली जाती हैं।

(ग) चित्र बनाइए, (घ) अभिनय कीजिए, और (ङ) सोचिए-साझा कीजिए

प्र. एक स्वच्छ शहर का पोस्टर कैसे बनाया जा सकता है, जन्मदिन की पार्टी को कचरा-रहित कैसे बनाएँ, और प्रकृति में जानवरों के अपशिष्ट व सूखी पत्तियों का क्या होता है?
उ. स्वच्छ शहर या गाँव का पोस्टर बनाते समय साफ सड़कें, हरे-भरे पार्क और सही जगह रखे कूड़ेदान दिखाए जा सकते हैं, साथ ही एक अच्छा-सा शीर्षक भी दिया जा सकता है। जन्मदिन की पार्टी को कचरा-रहित बनाने के लिए पेपर नैपकिन की जगह धोने योग्य कपड़े के नैपकिन, डिस्पोज़ेबल प्लास्टिक बर्तनों की जगह दोबारा उपयोग होने वाले बर्तन, और उपहारों के लिए चमकदार प्लास्टिक रैपर की जगह कपड़े या कागज़ के थैले उपयोग किए जा सकते हैं। प्रकृति में कचरा जमा नहीं होता — समय के साथ बारिश और मिट्टी में मौजूद बेहद छोटे जीवों की मदद से पशु-पक्षियों का अपशिष्ट और सूखी पत्तियाँ उपयोगी पोषक तत्वों में बदल जाती हैं, जो मिट्टी को स्वस्थ बनाकर पौधों की वृद्धि में मदद करते हैं।

इस गाइड का उपयोग कैसे करें

पहले संबंधित पाठ को किताब में पढ़ें, फिर यहाँ दी गई मुख्य अवधारणा को दोबारा पढ़कर जाँचें कि बच्चे को अवधारणा समझ आई या नहीं। शुरुआती कक्षाओं में समाधान से ज़्यादा ज़रूरी है कि बच्चा गिनती, आकृतियों और रोज़मर्रा की चीज़ों से जोड़कर सीखे — इसलिए हर पाठ के बाद घर की वस्तुओं (जैसे बर्तन, खिलौने, फल) का उपयोग करके अभ्यास कराएँ।

यह किताब क्यों महत्वपूर्ण है

हमारा अद्भुत संसार NCERT की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुसार तैयार की गई पाठ्यपुस्तक है, जिसमें कहानियों, खेलों, गतिविधियों और चित्रों के माध्यम से बुनियादी अवधारणाओं को विकसित करने पर ज़ोर दिया गया है। यह रटने पर जोर देने की बजाय समझ बनाने पर जौर देती है, इसलिए स्कूल और घर — दोनों जगह पर इसी तरीके से पढ़ाना सबसे फ़ायदेमंद रहता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्र. इस किताब में कुल कितने पाठ हैं?
उ. वर्तमान NEP 2026-27 संस्करण में कुल 12 मुख्य पाठ हैं।

प्र. क्या यह पुस्तक निःशुल्क डाउनलोड की जा सकती है?
उ. हाँ, NCERT की सभी पाठ्यपुस्तकें आधिकारिक रूप से निःशुल्क हैं; लिंक नीचे दिए गए कैटलॉग पेज पर मिलेंगे।

पूरी पुस्तक डाउनलोड करें

कक्षा 3 (हिंदी मीडियम) की पूरी पर्यावरण अध्ययन (EVS) पुस्तक (सभी पाठों के PDF सहित) आधिकारिक NCERT स्रोत से डाउनलोड करने के लिए हमारे कक्षा 3 (हिंदी मीडियम) कैटलॉग पेज पर जाएँ, जहाँ हर अध्याय का सीधा लिंक दिया गया है।

Written by Satish

NCERTBooks.org is an independent educational resource run by a small team focused on making official NCERT textbooks easy to find, read, and download for students, parents, and teachers across India. We are not affiliated with NCERT or the Ministry of Education -- we organise publicly available NCERT content by class and subject, verify links against official sources, and build tools (like our in-browser reader) that make studying more convenient. Every guide we publish is written and reviewed by our team based on the actual NCERT curriculum and syllabus.

📄 Want this offline? Download the free PDF of this page.Download PDF

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top