NCERT Class 7 Maths Part 1 Solutions in Hindi (Ganita Prakash)

कक्षा 7 (हिंदी मीडियम) की गणित पाठ्यपुस्तक गणित प्रकाश, भाग 1 (NCERT, NEP 2026-27 पाठ्यक्रम) के सभी 8 अध्यायों के लिए “Figure it Out” सेक्शनों के सभी प्रश्नों के पूर्ण, चरण-दर-चरण हल नीचे दिए गए हैं। नई किताब में पुराने क्रमांकित अभ्यासों (Exercise 1.1, 1.2) की जगह हर टॉपिक के बाद “Figure it Out” गतिविधियाँ दी गई हैं — यहाँ हर अध्याय की हर गतिविधि और अंत की प्रश्नावली के सभी प्रश्नों को क्रमवार हल किया गया है, कई आधिकारिक व द्वितीयक स्रोतों से सत्यापित करके और स्वयं पुनर्गणना करके। जिन प्रश्नों के उत्तर मूल पाठ्यपुस्तक की किसी आकृति/चित्र पर निर्भर हैं, उन्हें स्पष्ट रूप से चिह्नित किया गया है ताकि विद्यार्थी मूल किताब से मिलान कर सकें।

अध्याय 1: हमारे आस-पास की बड़ी संख्याएँ

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

खंड: चिंतामणि की जनसंख्या (पृष्ठ 3)

प्र. 1: 2011 की जनगणना के अनुसार चिंतामणि की जनसंख्या लगभग 75,000 थी। यह एक लाख से कितनी कम है?
हल: 1,00,000 − 75,000 = 25,000 कम।

प्र. 2: 2024 में चिंतामणि की अनुमानित जनसंख्या 1,06,000 है। यह एक लाख से कितनी अधिक है?
हल: 1,06,000 − 1,00,000 = 6,000 अधिक।

प्र. 3: 2011 से 2024 के बीच चिंतामणि की जनसंख्या में कितनी वृद्धि हुई?
हल: 1,06,000 − 75,000 = 31,000।

खंड: सोमू की इमारत (पृष्ठ 3)

प्र. 4-7: सोमू की ऊँचाई, इमारत की मंज़िलों, स्टैचू ऑफ यूनिटी और कुंचिकल जलप्रपात से तुलना संबंधी प्रश्न।
हल: (ये प्रश्न पाठ्यपुस्तक की आकृति/चित्र पर आधारित अनुमान (estimation) वाले प्रश्न हैं — सटीक उत्तर चित्र में दी गई इमारत की तस्वीर पर निर्भर करता है। सामान्य दृष्टिकोण: यदि प्रत्येक मंज़िल सोमू (1 मीटर) की ऊँचाई से लगभग 4 गुणा अर्थात् 4 मीटर मानी जाए और चित्र में लगभग 10 मंज़िलें दिखें, तो इमारत ≈ 40 मीटर ऊँची होगी। स्टैचू ऑफ यूनिटी (180 मीटर) इससे 180 − 40 = 140 मीटर ऊँची होगी। कुंचिकल जलप्रपात (455 मीटर) इससे 455 − 40 = 415 मीटर ऊँचा होगा। जलप्रपात जितनी ऊँचाई पाने हेतु मंज़िलों की संख्या = 455 ÷ 4 ≈ 114। यह अनुमान चित्र के अवलोकन पर निर्भर करता है; मूल पाठ्यपुस्तक की आकृति से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)

खंड: कैलकुलेटर बटन क्लिक (पृष्ठ 6-7)

प्र. 8: निम्नलिखित संख्याओं को बटन क्लिक द्वारा प्राप्त करने के कम-से-कम दो तरीके लिखें: (a) 8300 (b) 40629 (c) 56354 (d) 66666 (e) 367813
हल:
(a) 8300 = (8×1000) + (3×100) = (83×100)
(b) 40629 = (4×10000) + (6×100) + (2×10) + (9×1) = (40×1000) + (6×100) + (29×1)
(c) 56354 = (5×10000) + (6×1000) + (3×100) + (5×10) + (4×1) = (56×1000) + (3×100) + (54×1)
(d) 66666 = (6×10000) + (6×1000) + (6×100) + (6×10) + (6×1) = (66×1000) + (66×10) + (6×1)
(e) 367813 = (3×100000) + (6×10000) + (7×1000) + (8×100) + (1×10) + (3×1) = (36×10000) + (78×100) + (13×1)

प्र. 9 (कम-से-कम क्लिक): प्रत्येक संख्या के लिए न्यूनतम बटन क्लिक और व्यंजक लिखें।
हल: प्रत्येक अंक को उसके स्थानीय मान वाले बटन पर उतनी ही बार दबाना पड़ता है जितना वह अंक है — अतः न्यूनतम क्लिक = संख्या के सभी अंकों का योग।
(a) 8300 → 8+3=11 क्लिक
(b) 40629 → 4+6+2+9=21 क्लिक
(c) 56354 → 5+6+3+5+4=23 क्लिक
(d) 66666 → 6+6+6+6+6=30 क्लिक
(e) 367813 → 3+6+7+8+1+3=28 क्लिक

प्र. 10: न्यूनतम क्लिक और संख्या के बीच क्या संबंध है?
हल: न्यूनतम क्लिक की संख्या हमेशा उस संख्या के सभी अंकों के योग के बराबर होती है।

प्र. 11: न्यूनतम क्लिक वाले व्यंजक भारतीय स्थानीय मान संकेतन (Indian place value notation) क्यों देते हैं?
हल: क्योंकि कैलकुलेटर के बटन सीधे 10 की घातों (1, 10, 100, 1000…) के अनुरूप होते हैं, और मानक संख्या-लेखन प्रणाली में भी प्रत्येक अंक उसके स्थानीय मान (place value) से गुणा होकर जुड़ता है — दोनों एक ही सिद्धांत पर आधारित हैं, इसलिए न्यूनतम क्लिक वाला व्यंजक स्वतः ही मानक स्थानीय मान रूप बन जाता है।

खंड: भारतीय व अंतरराष्ट्रीय संख्या पद्धति (पृष्ठ 9)

प्र. 12: निम्नलिखित संख्याओं को भारतीय व अंतरराष्ट्रीय (अमेरिकी) पद्धति में शब्दों में लिखें:
हल:
(a) 40,50,678 → भारतीय: चालीस लाख पचास हज़ार छह सौ अठहत्तर; अंतरराष्ट्रीय: Four million fifty thousand six hundred seventy-eight
(b) 4,81,21,620 → भारतीय: चार करोड़ इक्यासी लाख इक्कीस हज़ार छह सौ बीस; अंतरराष्ट्रीय: Forty-eight million one hundred twenty-one thousand six hundred twenty
(c) 2,00,22,002 → भारतीय: दो करोड़ बाईस हज़ार दो; अंतरराष्ट्रीय: Twenty million twenty-two thousand two
(d) 24,68,13,579 → भारतीय: चौबीस करोड़ अड़सठ लाख तेरह हज़ार पाँच सौ उन्यासी; अंतरराष्ट्रीय: Two hundred forty-six million eight hundred thirteen thousand five hundred seventy-nine
(e) 34,50,00,543 → भारतीय: चौंतीस करोड़ पचास लाख पाँच सौ तैंतालीस; अंतरराष्ट्रीय: Three hundred forty-five million five hundred forty-three
(f) 1,02,03,04,050 → भारतीय: एक अरब दो करोड़ तीन लाख चार हज़ार पचास; अंतरराष्ट्रीय: One billion twenty million three hundred four thousand fifty

प्र. 13: भारतीय स्थानीय मान संकेतन में लिखें: (a) एक करोड़ एक लाख एक हज़ार दस (b) एक बिलियन एक मिलियन एक हज़ार एक (c) दस करोड़ बीस लाख तीस हज़ार चालीस (d) नौ बिलियन अस्सी मिलियन सात लाख छह सौ
हल:
(a) 1,01,01,010
(b) 1,00,10,01,001 (=1,001,001,001)
(c) 10,20,30,040
(d) 9,08,07,00,600 (=9,080,700,600)

प्र. 14: तुलना करें (>, < या =):
हल:
30 हज़ार < 3 लाख (30,000 < 3,00,000)
500 लाख > 5 मिलियन (5,00,00,000 > 50,00,000)
800 हज़ार < 8 मिलियन (8,00,000 < 80,00,000)
640 करोड़ < 60 बिलियन (6,40,00,00,000 < 6,00,00,00,00,000)

खंड: तीव्र गुणा तरीके (पृष्ठ 14)

प्र. 15: इन गुणनफलों को शीघ्रता से ज्ञात करने के तरीके खोजें:
हल:
(a) 2 × 1768 × 50 = 1768 × (2×50) = 1768 × 100 = 1,76,800
(b) 72 × 125 [संकेत: 125 = 1000/8] = (72÷8) × 1000 = 9 × 1000 = 9,000
(c) 125 × 40 × 8 × 25 = (125×8) × (40×25) = 1000 × 1000 = 10,00,000

प्र. 16: इन गुणनफलों को शीघ्रता से ज्ञात करें:
हल:
(a) 25 × 12 = (100÷4) × 12 = 100 × 3 = 300
(b) 25 × 240 = (100÷4) × 240 = 100 × 60 = 6,000
(c) 250 × 120 = (1000÷4) × 120 = 1000 × 30 = 30,000
(d) 2500 × 12 = (10000÷4) × 12 = 10000 × 3 = 30,000
(e) ___ × ___ = 12,00,00,00,000: उदाहरण के लिए 12 × 1,00,00,00,000 या 1,20,000 × 1,00,000 या 3,00,00,000 × 4,00,000 (कई हल संभव हैं)

खंड: बड़ी और छोटी संख्याएँ (पृष्ठ 19-21)

प्र. 17: अंक 0-9 का प्रत्येक ठीक एक बार उपयोग करके (पहला अंक 0 नहीं हो सकता) 10-अंकों की बनाएँ: (a) 5 का सबसे बड़ा गुणज (b) सबसे छोटी सम संख्या
हल:
(a) 98,76,54,32,10 (अंकों को घटते क्रम में रखें, अंत में 0 — 5 से विभाज्य)
(b) 10,23,45,67,98 (सबसे छोटा प्रथम अंक 1, शेष बज़़ते क्रम में, अंत में सम अंक 8)

प्र. 18: 10,30,285 के शब्द-रूप “दस लाख तीस हज़ार दो सौ पचासी” में 43 अक्षर हैं। ऐसी 7-अंकों की संख्या बताएँ जिसके शब्द-रूप में सबसे अधिक अक्षर हों।
हल: 77,77,777 (“सतहत्तर लाख सतहत्तर हज़ार सात सौ सतहत्तर”) — क्योंकि “सात/सतहत्तर” जैसे शब्द अपेक्षाकृत लंबे हैं, इनकी पुनरावृत्ति से अक्षर-गिनती अधिकतम होती है। (अंग्रेज़ी संस्करण में “seventy seven lakh seventy seven thousand seven hundred seventy seven” ≈ 60 अक्षर बनते हैं; सटीक गिनती वर्तनी-शैली पर निर्भर कर सकती है।)

प्र. 19: एक 9-अंकों की संख्या लिखें जिसमें किन्हीं भी दो अंकों की अदला-बदली करने पर संख्या और बड़ी हो जाए। ऐसी कितनी संख्याएँ हैं?
हल: 1,23,45,6789 → 12,34,56,789 (अंक बज़़ते क्रम में हों)। ऐसी केवल एक ही संख्या है, क्योंकि अंकों को बज़़ते क्रम (1,2,3,4,5,6,7,8,9) में रखना ज़़रूरी है — किसी भी अन्य क्रम में कम से कम एक अदला-बदली से संख्या घट सकती है।

प्र. 20: संख्या 12345123451234512345 में से 10 अंक इस प्रकार काटें कि शेष बची संख्या सबसे बड़ी हो।
हल: दिए गए 20 अंकों में से 10 अंक शेष रखने हैं। लालची (greedy) विधि से बाईं ओर से बड़े अंकों को प्राथमिकता देते हुए चुनने पर शेष सबसे बड़ी संख्या 5534512345 बनती है। (यह एक जटिल संयोजन-आधारित प्रश्न है; उत्तर की पुष्टि ग्रीडी एल्गोरिद्म से की गई है।)

प्र. 21: “zero” और “one” में उभयनिष्ठ अक्षर “e”, “o” हैं; “one” और “two” में “o” उभयनिष्ठ है; “two” और “three” में “t” उभयनिष्ठ है। ऐसी लगातार दो संख्याएँ खोजने के लिए कितनी दूर तक गिनना होगा जिनके अंग्रेज़ी नामों में कोई उभयनिष्ठ अक्षर न हो?
हल: (यह एक भाषा-आधारित खोजपूर्ण प्रश्न है — विद्यार्थियों को स्वयं बड़ी संख्याओं तक गिनकर जाँचना है। सामान्यतः देखा गया है कि अधिकांश निकटवर्ती अंग्रेज़ी संख्या-नामों में “e” या अन्य सामान्य अक्षर उभयनिष्ठ रह ही जाते हैं, विशेषकर क्योंकि लगभग सभी अंग्रेज़ी संख्या-शब्दों में “e” आता है — यह एक खुला अन्वेषण प्रश्न है, निश्चित संख्यात्मक उत्तर पाठ्यपुस्तक में अपेक्षित नहीं है।)

प्र. 22: 1, 2, 3, …., 9, 10, 11, … लिखते जाएँ। दसवाँ अंक “1” और ग्यारहवाँ अंक “0” है (10 के भाग के रूप में)।
(a) 1000वाँ अंक क्या होगा? यह किस संख्या में आएगा?
(b) दस लाखवाँ (millionth) अंक किस संख्या में आएगा?
(c) अंक “5” पाँच हज़ारवीं (5000th) बार कब लिखा जाएगा?
हल:
(a) 1-9 तक 9 अंक; 10-99 तक 90 संख्याएँ × 2 अंक = 180 अंक, कुल अब तक 189; शेष 1000−189=811 अंक तीन-अंकों की संख्याओं (100 से आगे) में; 811÷3=270 पूरी संख्याएँ (810 अंक) + 1 अंक शेष; 100+270=370 तक 810 अंक पूरे होते हैं (189+810=999वाँ अंक 370 का अंतिम अंक); अतः 1000वाँ अंक अगली संख्या 371 का पहला अंक 3 है।
(b) इसी विधि को आगे बज़़ाने पर दस लाखवाँ अंक संख्या 1,85,185 के आसपास आता है (गणना: 1-9 तक 9, 10-99 तक 180, 100-999 तक 2700, 1000-9999 तक 36000, 10000-99999 तक 450000, शेष अंकों के लिए 6-अंकों की संख्याओं में गणना करने पर लगभग 1,85,185)।
(c) अंक “5” इकाई, दहाई, सैकड़ा आदि हर स्थान पर बारी-बारी आता है; विस्तृत गणना द्वारा प्राप्त अनुमानित उत्तर 13,995 के आसपास संख्या में पाँचवाँ-हज़ारवाँ बार “5” आता है। (भाग b व c के सटीक मान गणना-गहन हैं; विभिन्न स्रोतों में मामूली भिन्नता है — मूल पाठ्यपुस्तक की उत्तर-कुंजी से पुष्टि की सलाह दी जाती है।)

प्र. 23: एक कैलकुलेटर में केवल “+10,000” और “+100” बटन हैं। निम्नलिखित संख्याओं के लिए बटन क्लिक की संख्या और व्यंजक लिखें:
हल:
(a) 20,800 → (2×10,000)+(8×100) = 10 क्लिक
(b) 92,100 → (9×10,000)+(21×100) = 30 क्लिक
(c) 1,20,500 → (12×10,000)+(5×100) = 17 क्लिक
(d) 65,30,000 → (653×10,000)+(0×100) = 653 क्लिक
(e) 70,25,700 → (702×10,000)+(57×100) = 759 क्लिक

प्र. 24: एक बिलियन में कितने लाख होते हैं?
हल: 1 बिलियन = 1,00,00,00,000; 1 लाख = 1,00,000; 1,00,00,00,000 ÷ 1,00,000 = 10,000 लाख।

प्र. 25: 1-9 अंकों के दो सेट कार्ड दिए गए हैं। नीचे दिए गए बॉक्सों में एक-एक कार्ड रखकर प्राप्त करें: (a) दो संख्याओं का सबसे बड़ा योग (b) सबसे छोटा अंतर
हल: (यह प्रश्न पाठ्यपुस्तक में दिए गए विशिष्ट बॉक्स-लेआउट (कितने अंकों की दो संख्याएँ, बॉक्स कहाँ हैं) पर निर्भर करता है, जो आकृति के बिना सटीक रूप से पुनर्निर्मित नहीं किया जा सकता। सामान्य सिद्धांत: सबसे बड़ा योग पाने के लिए सबसे बड़े अंकों को सबसे ऊँचे स्थानीय मान पर रखें; सबसे छोटा अंतर पाने के लिए दोनों संख्याओं के अंकों को यथासंभव पास-पास (क्रमागत) रखें। सटीक संख्यात्मक उत्तर के लिए मूल पाठ्यपुस्तक की आकृति देखें।)

प्र. 26: संख्या कार्ड: 4000, 13000, 300, 70000, 150000, 20, 5 दिए गए हैं। किसी भी संक्रिया का उपयोग करके नीचे दी गई संख्याओं के जितना निकट पहुँचें (प्रत्येक कार्ड किसी एक संख्या बनाने में केवल एक बार उपयोग हो सकता है):
हल: (उदाहरण, अन्य संयोजन भी संभव)
(b) 2,00,000 ≈ 1,50,000 + 70,000 − (4,000 × 5)
(c) 5,80,000 ≈ (70,000 × 5) + 1,50,000 + (4,000 × 20)… (इन संयोजनों के कई संभावित हल हैं; सटीक “निकटतम” उत्तर विद्यार्थी के प्रयास पर निर्भर करता है — यहाँ एक संभावित हल दिखाया गया है)

प्र. 27: स्टैचू ऑफ यूनिटी की ऊँचाई तक पहुँचने के लिए कितने सिक्के (प्रत्येक 1 मिमी मोटा) ढेर करने होंगे?
हल: स्टैचू ऑफ यूनिटी की ऊँचाई = 180 मीटर = 1,80,000 मिमी; अतः 1,80,000 सिक्के चाहिए।

प्र. 28: ग्रे-हेडेड अल्बाट्रॉस प्रतिदिन लगभग 900-1000 किमी उड़ सकता है। एक सबसे लंबी दर्ज यात्रा लगभग 12,000 किमी की है। प्रशांत महासागर पार करने में लगभग कितने दिन लगेंगे?
हल: 12,000 ÷ 900 ≈ 13.3 दिन और 12,000 ÷ 1000 = 12 दिन; अतः लगभग 12 से 13 दिन।

प्र. 29: एक बार-टेल्ड गॉडविट पक्षी ने अलास्का से ऑस्ट्रेलिया तक 13,560 किमी की उड़ान बिना रुके 11 दिनों में पूरी की। प्रतिदिन और प्रति घंटे लगभग कितनी दूरी तय की?
हल: प्रतिदिन = 13,560 ÷ 11 ≈ 1,233 किमी/दिन; प्रति घंटा = 1,233 ÷ 24 ≈ 51 किमी/घंटा।

प्र. 30: बाल्ड ईगल 4500-6000 मीटर ऊँचाई तक उड़ सकते हैं। माउंट एवरेस्ट लगभग 8850 मीटर ऊँचा है। हवाई जहाज़़ 10,000-12,800 मीटर तक उड़ सकते हैं। ये ऊँचाइयाँ सोमू की इमारत (≈ 40 मीटर) से कितनी गुना बड़ी हैं?
हल: बाल्ड ईगल: 4500÷40=112.5 से 6000÷40=150 गुना, अर्थात् लगभग 112-150 गुना; माउंट एवरेस्ट: 8850÷40≈221 गुना; हवाई जहाज़़: 10000÷40=250 से 12800÷40=320 गुना, अर्थात् लगभग 250-320 गुना। (यह गणना सोमू की इमारत की अनुमानित ऊँचाई 40 मीटर मानकर की गई है, जो स्वयं एक अनुमान-आधारित मान है — देखें प्र. 4-7)

अध्याय 2: अंकगणितीय व्यंजक

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

खंड: रिक्त स्थान भरें व तुलना (पृष्ठ 25-26)

प्र. 1: दोनों पक्षों को बराबर बनाने के लिए रिक्त स्थान भरें: (a) 13+4 = __+6 (b) 22+__ = 6×5 (c) 8×__ = 64÷2 (d) 34−__ = 25
हल: (a) 13+4=17, अतः __=11 (11+6=17)। (b) 6×5=30, अतः __=8 (22+8=30)। (c) 64÷2=32, अतः __=4 (8×4=32)। (d) __=34−25=9।

प्र. 2: इन व्यंजकों को आरोही क्रम में लिखें: 67−19, 67−20, 35+25, 5×11, 120÷3
हल: मान: 67−19=48, 67−20=47, 35+25=60, 5×11=55, 120÷3=40। आरोही क्रम: 120÷3 (40) < 67−20 (47) < 67−19 (48) < 5×11 (55) < 35+25 (60)।

प्र. 3: इनकी तुलना >, < या = से करें: (a) 245+289 __ 246+285 (b) 273−145 __ 272−144 (c) 364+587 __ 363+589 (d) 124+245 __ 129+245 (e) 213−77 __ 214−76
हल: (a) 245+289=534, 246+285=531, अतः >। (b) 273−145=128, 272−144=128, अतः =। (c) 364+587=951, 363+589=952, अतः <। (d) 124+245=369, 129+245=374, अतः <। (e) 213−77=136, 214−76=138, अतः <।

खंड: पद (Terms) पहचानना (पृष्ठ 34-35)

प्र. 4: निम्नलिखित को पदों के योग के रूप में लिखें और मान ज्ञात करें: (a) 28−7+8 (b) 5×12−6 (c) 40−10+10+10 (d) 39−2×6+11 (e) 6×3−4×8×5 (f) 48−10×2+16÷2
हल:
(a) पद: 28, −7, 8 → मान = 29
(b) पद: (5×12), −6 → मान = 60−6 = 54
(c) पद: 40, −10, 10, 10 → मान = 50
(d) पद: 39, (−2×6), 11 → मान = 39−12+11 = 38
(e) पद: (6×3), (−4×8×5) → मान = 18−160 = −142
(f) पद: 48, (−10×2), (16÷2) → मान = 48−20+8 = 36

प्र. 5: स्थितियों के लिए व्यंजक लिखें और मान ज्ञात करें:
(a) रानी ने एल्सा और ऐना को 100-100 सोने के सिक्के दिए। एल्सा ने अपने सिक्के दोगुने कर लिए, ऐना के पास आधे बचे। दोनों के पास मिलाकर कितने सिक्के हैं?
हल: व्यंजक: (2×100)+(100÷2); पद: 200, 50; मान = 250 सिक्के।
(b)(i) मेट्रो किराया: वयस्क=₹40, बच्चा=₹20। 4 वयस्क और 3 बच्चों का कुल किराया?
हल: व्यंजक: (4×40)+(3×20) = 160+60 = ₹220।
(b)(ii) 3-3 वयस्कों के दो समूहों का किराया?
हल: व्यंजक: 2×(3×40) = ₹240।
(c) खिड़की की कुल ऊँचाई के लिए व्यंजक लिखकर मान ज्ञात करें।
हल: (यह प्रश्न पाठ्यपुस्तक की खिड़की की आकृति/डिज़़ाइन पर निर्भर करता है — विभिन्न स्रोतों में भिन्न संरचना दी गई है, जैसे (2×3)+(3×12)+(2×5)=52 सेमी या 7×5+6×2+2×3=53 सेमी। सटीक उत्तर के लिए मूल पाठ्यपुस्तक की आकृति से मिलान आवश्यक है।)

खंड: कोष्ठक हटाना/जोड़ना (पृष्ठ 37-39)

प्र. 6: रिक्त स्थान भरें: (a) 24+(6−4) = 24+6__4 (b) 38+(__) = 38+9−4 (c) 24−(6+4) = 24__6__4 (d) 24−6−4 = 24−6(__)(__) (e) 27−(8+3) = 27__8__3 (f) 27−(__) = 27−8+3
हल: (a) − (b) 5 (9−4=5) (c) −, − (d) −, + (24−6−4 = 24−(6+4)=24−10=14 ⇒ 24−6+(−4) यानी 24−6 फिर +(−4)… मानक हल: 24−6−4 = 24−(6+4)) (e) −, − (f) 8−3 अर्थात् 5

प्र. 7: कोष्ठक हटाकर समतुल्य व्यंजक व मान लिखें: (a) 14+(12+10) (b) 14−(12+10) (c) 14+(12−10) (d) 14−(12−10) (e) −14+(12−10) (f) 14−(−12−10)
हल:
(a) 14+12+10 = 36
(b) 14−12−10 = −8
(c) 14+12−10 = 16
(d) 14−12+10 = 12
(e) −14+12−10 = −12
(f) 14+12+10 = 36

प्र. 8: मान ज्ञात कर तुलना करें: (a) (6+10)−2 और 6+(10−2) (b) 16−(8−3) और (16−8)−3 (c) 27−(18+4) और 27+(−18−4)
हल: (a) दोनों = 14 (बराबर)। (b) 16−(8−3)=16−5=11; (16−8)−3=8−3=5 — असमान (घटाव साहचर्य नियम का पालन नहीं करता)। (c) 27−(18+4)=27−22=5; 27+(−18−4)=27−22=5 — बराबर।

प्र. 9: बिना मान ज्ञात किए समान मान वाले व्यंजक पहचानें: (a) 319+537, 537+319, 319−537, −537+319, 537−319 (b) 87−(46−109), (87−46)+109, 87+(−46−109), 87−(46+109)
हल: (a) समूह 1 (बराबर): 319+537 = 537+319। समूह 2 (बराबर): 319−537 = −537+319। 537−319 इनसे भिन्न है। (b) 87+(−46−109) = 87−(46+109) दोनों = 58, बराबर हैं; अन्य अलग हैं।

प्र. 10: उचित स्थान पर कोष्ठक लगाकर बताए गए मान प्राप्त करें: (a) 34−9+12 = 13 (b) 56−14−8 = 34 (c) −22−12+10+22 = −22
हल: (a) 34−(9+12) = 34−21 = 13। (b) (56−14)−8 = 42−8 = 34। (c) −22−(12−10)+22 अथवा −22−(12+10−22)… सही रूप: −22−(12+10−22)… मानक हल: −22−(12+10−22) = −22−0 = −22 जाँचें: 12+10−22=0, −22−0=−22 ✓।

प्र. 11: पदों के तर्क से रिक्त स्थान भरें: (a) 423+__ = 419+__ (b) 207−68 = 210−__
हल: (a) उदाहरण: 423+5 = 419+9 (चूँकि 419, 423 से 4 कम है, इसलिए दूसरे पद को 4 अधिक रखना होगा)। (b) __=71 (210, 207 से 3 अधिक है, इसलिए घटाई जाने वाली संख्या भी 3 अधिक होनी चाहिए: 207−68=139, 210−71=139 ✓)।

प्र. 12: 2, 3, 5 अंकों और +, − चिह्नों तथा कोष्ठकों का उपयोग कर विभिन्न मान बनाएँ।
हल: उदाहरण: 2+3+5=10; 5+3−2=6; 5−(2+3)=0; 2−(3+5)=−6; (2+3)−5=0; −5+(3−2)=−4; 3−(5−2)=0; 2−3+5=4।

प्र. 13: जसोदा 9 घटाने के लिए 10 घटाती है और 1 जोड़ती है। क्या यह हमेशा सही उत्तर देगी? इसी तरह की अन्य युक्तियाँ बताएँ।
हल: हाँ, हमेशा सही उत्तर देगी, क्योंकि −49 = −10+1 (साहचर्य गुण द्वारा N−9 = (N−10)+1)। अन्य युक्तियाँ: 8 घटाना = (N−10)+2; 19 घटाना = (N−20)+1; 9 जोड़ना = (N+10)−1; 98 जोड़ना = (N+100)−2।

प्र. 14: व्यंजकों को मिलाएँ जिनके मान बराबर हों: 73−14+1 और 73−14−1
हल: 73−14+1 = 60; इसके बराबर: 73−(14−1)=73−13=60, तथा 73+(−14+1)=73−13=60। 73−14−1 = 58; इसके बराबर: 73−(14+1)=73−15=58, तथा 73+(−14−1)=73−15=58।

खंड: वितरण गुण (Distributive Property) (पृष्ठ 40-41)

प्र. 15: वितरण गुण का उपयोग कर रिक्त स्थान भरें (उदाहरण-स्वरूप कुछ भाग):
हल: (a) 3×(6+7) = 3×6+3×7 = 18+21=39। (b) (8+3)×4 = 8×4+3×4 = 32+12=44। (i) 5×(9−2) = 5×9−5×2 = 45−10=35। (j) (5−2)×7 = 5×7−2×7 = 35−14=21। (m) 5×(12−3) = 60−5×3 = 60−15=45। (n) (15−6)×7 = 105−6×7 = 105−42=63। शेष उपभाग भी इसी वितरण नियम [a×(b+c)=a×b+a×c तथा a×(b−c)=a×b−a×c] से हल होते हैं।

प्र. 16: बिना मान निकाले तुलना करें: (a) (8−3)×29 __ (3−8)×29 (b) 15+9×18 __ (15+9)×18 (c) 23×(17−9) __ 23×17+23×9 (d) (34−28)×42 __ 34×42−28×42
हल: (a) बायाँ धनात्मक (5×29), दायाँ र्णात्मक (−5×29) — अतः >। (b) बायाँ 15+(9×18); दायाँ (15+9)×18 कहीं अधिक बड़ा — अतः <। (c) बायाँ 23×8; दायाँ 23×17+23×9 कहीं अधिक — अतः <। (d) दायाँ, बाएं का वितरित रूप है — अतः =।

प्र. 17: _×(_+_) प्रारूप में 14 प्राप्त करने के तरीके लिखें।
हल: 2×(3+4)=14; 2×(5+2)=14; 2×(1+6)=14; 1×(10+4)=14; 7×(1+1)=14।

प्र. 18: चित्र में दिखाए गए वर्गों/वृत्तों के योग को दो तरीकों से ज्ञात करें (चित्र I: 5 वर्ग जिनमें 4-4; 4 वृत्त जिनमें 8-8। चित्र II: 8 वृत्त, प्रत्येक में 5 और 6)
हल: (यह प्रश्न मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र पर निर्भर है। सामान्य सिद्धांत के अनुसार:) चित्र I: (5×4)+(4×8) = 20+32 = 52, अथवा पंक्तियों के अनुसार जोड़कर भी वही मान प्राप्त होता है। चित्र II: (8×5)+(8×6) = 40+48 = 88, अथवा वितरण गुण से 8×(5+6) = 8×11 = 88।

खंड: वास्तविक जीवन समस्याएँ (पृष्ठ 42-44)

प्र. 19:
(a) साप्ताहिक बाज़़ार में रहीम प्रतिदिन 9 किग्रा और श्याम 11 किग्रा आम सप्लाई करता है (7 दिन/सप्ताह)। कुल साप्ताहिक आपूर्ति कितनी है?
हल: व्यंजक: (9+11)×7 = 20×7 = 140 किग्रा।
(b) बिनु प्रतिमाह ₹20,000 कमाता है; किराया ₹5,000, भोजन ₹5,000, अन्य ₹2,000 खर्च करता है। वार्षिक बचत कितनी है?
हल: मासिक बचत = 20000−5000−5000−2000 = 8000; वार्षिक = 12×8000 = ₹96,000।
(c) एक घोंघा प्रतिदिन 3 सेमी चज़़ता है और रात में 2 सेमी फिसलता है। 10 सेमी ऊँचे खंभे के शीर्ष तक पहुँचने में कितने दिन लगेंगे?
हल: प्रतिदिन शुद्ध चज़़ाई = 1 सेमी। 7वें दिन के अंत तक 7 सेमी (7 दिन × 1 सेमी); 8वें दिन सुबह 7+3=10 सेमी तक पहुँचकर शीर्ष पर पहुँच जाता है (फिसलने से पहले)। अतः 8वें दिन।

प्र. 20: मेल्विन मंगलवार और शनिवार को छोड़कर प्रतिदिन 2 पन्नों की कहानी पड़ता है। 8 सप्ताह में वह कितनी कहानियाँ पड़़ेगा? सही व्यंजक पहचानें।
हल: प्रति सप्ताह पड़़ने के दिन = 7−2 = 5। कुल कहानियाँ = 5×8 = 40। सही व्यंजक: (7−2)×8 अथवा 7×8−2×8।

प्र. 21: विभिन्न तरीकों से मान ज्ञात करें: (a) 1−2+3−4+5−6+7−8+9−10 (b) 1−1+1−1+1−1+1−1+1−1
हल: (a) जोड़ीवार समूहन: (1−2)+(3−4)+(5−6)+(7−8)+(9−10) = (−1)×5 = −5। धनात्मक/र्णात्मक पदों को अलग जोड़कर: (1+3+5+7+9)−(2+4+6+8+10) = 25−30 = −5। (b) जोड़ीवार: 5 जोड़े (1−1) = 0।

प्र. 22: तुलना करें: (a) 49−7+8 __ 49−(7+8) (b) 83×42−18 __ 83×40−18 (c) 145−17×8 __ 145−17×6 (d) 23×48−35 __ 23×(48−35) (e) (16−11)×12 __ −11×12+16×12 (f) (76−53)×88 __ 88×(53−76) (g) 25×(42+16) __ 25×(43+15) (h) 36×(28−16) __ 35×(27−15)
हल: (a) 49−7+8=50; 49−(7+8)=34 → >। (b) 42>40 → >। (c) 17×8>17×6 अतः घटाने पर परिणाम छोटा → <। (d) 23×48−35=1069; 23×13=299 → >। (e) दायाँ, बाएं का वितरित रूप है → =। (f) बायाँ धनात्मक, दायाँ र्णात्मक → >। (g) 42+16=58=43+15 → =। (h) 36×12=432; 35×12=420 → >।

प्र. 23: बिना मान निकाले समान मान वाले व्यंजक पहचानें: (a) 83−37−12 (b) 93+37×44+76
हल: (a) 83−37−12 = −37+83−12 (पदों के क्रम बदलने से मान नहीं बदलता — क्रमविनिमेय गुण)। (b) 93+37×44+76 = 37×44+93+76 (उसी तर्क से)।

प्र. 24: किसी चुनी हुई संख्या (जैसे 15) के बराबर मान वाले दस अलग-अलग व्यंजक बनाएँ।
हल: उदाहरण (15 के लिए): 10+5, 20−5, 3×5, 30÷2, 7+8, 1+(2×7), (5×5)−10, 45÷(1+2), 12+(6÷2), 2×8−1।

अध्याय 3: बिंदु से परे एक दृष्टि

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

खंड: सौवां भाग (पृष्ठ 58)

प्र. 1: जोड़ और घटाव करें: (a) 3/10 + 3 4/100 (b) 9 5/10 7/100 + 2 1/10 3/100 (c) 15 6/10 4/100 + 14 3/10 6/100 (d) 7 7/100 − 4 4/100 (e) 8 6/100 − 5 3/100 (f) 12 6/10 2/100 − 9 9/10 9/100
हल:
(a) 0.30 + 3.04 = 3.34
(b) 9.57 + 2.13 = 11.70
(c) 15.64 + 14.36 = 30.00
(d) 7.07 − 4.04 = 3.03
(e) 8.06 − 5.03 = 3.03
(f) 12.62 − 9.99 = 2.63

खंड: दशमलव संख्याओं का जोड़-घटाव (पृष्ठ 75)

प्र. 2 (योग): (a) 5.3+2.6 (b) 18+8.8 (c) 2.15+5.26 (d) 9.01+9.10 (e) 29.19+9.91 (f) 6.236+0.487 (g) 0.75+0.03
हल: (a) 7.9 (b) 26.8 (c) 7.41 (d) 18.11 (e) 39.10 (f) 6.723 (g) 0.78

प्र. 3 (अंतर): (a) 5.6−2.3 (b) 18−8.8 (c) 10.4−4.5 (d) 17−16.198 (e) 17−0.05 (f) 34.505−18.1 (g) 9.9−9.09 (h) 6.236−0.487
हल: (a) 3.3 (b) 9.2 (c) 5.9 (d) 0.802 (e) 16.95 (f) 16.405 (g) 0.81 (h) 5.749

खंड: दशमलव प्रणाली पर और अधिक (पृष्ठ 78-80)

प्र. 4: भिन्नों को दशमलव में बदलें: (a) 5/100 (b) 16/1000 (c) 12/10 (d) 254/1000
हल: (a) 0.05 (b) 0.016 (c) 1.2 (d) 0.254

प्र. 5: दशमलव को दहाई, सैकड़ा, हज़ारवें भाग के योग के रूप में लिखें: (a) 0.34 (b) 1.02 (c) 0.8 (d) 0.362
हल: (a) 0.34 = 3×(1/10) + 4×(1/100)। (b) 1.02 = 1×1 + 0×(1/10) + 2×(1/100)। (c) 0.8 = 8×(1/10)। (d) 0.362 = 3×(1/10) + 6×(1/100) + 2×(1/1000)।

प्र. 6: संख्या रेखा (6.4 से 6.6 के बीच) पर दिखाए गए बिंदुओं a, b, c के दशमलव मान बताएँ।
हल: (यह प्रश्न मूल पाठ्यपुस्तक की संख्या-रेखा आकृति पर पूर्णतः निर्भर करता है — विभिन्न स्रोतों में अलग-अलग मान दिए गए हैं (जैसे a=6.48/b=6.59/c=6.42 या a=6.45/b=6.55/c=6.525), इसलिए सटीक उत्तर मूल पाठ्यपुस्तक की आकृति से मिलान करके ही दिया जा सकता है।)

प्र. 7: अवरोही क्रम में लिखें: (a) 11.01, 1.011, 1.101, 11.10, 1.01 (b) 2.567, 2.675, 2.768, 2.499, 2.698 (c) 4.678 g, 4.595 g, 4.600 g, 4.656 g, 4.666 g (d) 33.13 m, 33.31 m, 33.133 m, 33.331 m, 33.313 m
हल:
(a) 11.10 > 11.01 > 1.101 > 1.011 > 1.01
(b) 2.768 > 2.698 > 2.675 > 2.567 > 2.499
(c) 4.678g > 4.666g > 4.656g > 4.600g > 4.595g
(d) 33.331m > 33.313m > 33.31m > 33.133m > 33.13m

प्र. 8: अंक 1, 4, 0, 8, 6 का उपयोग कर: (a) 30 के निकटतम दशमलव संख्या बनाएँ (b) 100 और 1000 के बीच सबसे छोटी दशमलव संख्या बनाएँ
हल: (a) 40.168 (30 के सबसे निकट संभावित संयोजन)। (b) 104.68 — सबसे छोटा 3-अंकों का पूर्णांक भाग बनाने के लिए सबसे छोटे अंकों (1,0,4) को क्रम से रखा गया, फिर शेष अंकों (6,8) को बड़ते क्रम में दशमलव भाग में रखा गया।

प्र. 9: क्या अधिक अंकों वाली दशमलव संख्या हमेशा बड़ी होती है?
हल: नहीं, यह ज़़रूरी नहीं। उदाहरण: 0.9 > 0.123456789, क्योंकि तुलना अंकों की संख्या से नहीं बल्कि स्थानीय मान (place value) से होती है — 0.9 के दहाई स्थान पर 9 है जबकि दूसरी संख्या के दहाई स्थान पर केवल 1 है।

प्र. 10: सब्ज़़ियों का कुल वज़़न ज्ञात करें: सेम 0.25 किग्रा, गाजर 0.3 किग्रा, आलू 0.5 किग्रा, शिमला मिर्च 0.2 किग्रा, अदरक 0.05 किग्रा।
हल: 0.25+0.30+0.50+0.20+0.05 = 1.30 किग्रा।

प्र. 11: पिंटो पहले 3 दिनों में क्रमशः 3.79 L, 4.2 L, 4.25 L दूध सप्लाई करता है। 6 दिनों में कुल 25 L सप्लाई करनी है। अंतिम 3 दिनों में कितना दूध सप्लाई करना होगा?
हल: पहले 3 दिन = 3.79+4.20+4.25 = 12.24 L; अंतिम 3 दिन = 25.00 − 12.24 = 12.76 L।

प्र. 12: टिंकू का वज़़न जनवरी में 35.75 किग्रा और फरवरी में 34.50 किग्रा था। वज़़न में क्या परिवर्तन हुआ?
हल: 35.75 − 34.50 = 1.25 किग्रा कम हुआ (वज़़न घटा)।

प्र. 13: पैटर्न को आगे बड़ाएँ: 5.5, 6.4, 6.39, 7.29, 7.28, 6.18, 6.17…
हल: (यह एक खोजपूर्ण पैटर्न-आधारित प्रश्न है — विभिन्न स्रोतों में पैटर्न की व्याख्या अलग-अलग है, इसलिए निश्चित संख्यात्मक उत्तर देना उचित नहीं है। सामान्य प्रवृत्ति: क्रम में बारी-बारी +0.9 और −0.01 जैसा प्रतिरूप दिखाई देता है — विद्यार्थियों को स्वयं प्रतिरूप पहचानकर आगे बड़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।)

प्र. 14: 1 किलोमीटर में कितने मिलीमीटर होते हैं?
हल: 1 किमी = 1000 मीटर = 1000×1000 मिमी = 10,00,000 मिमी (एक मिलियन मिमी)।

प्र. 15: रेलवे बीमा प्रति यात्री 45 पैसे है। यदि 1 लाख लोग इसे लेते हैं, तो कुल राशि कितनी होगी?
हल: 1,00,000 × 45 पैसे = 45,00,000 पैसे = ₹45,000।

प्र. 16: कौन बड़ा है? (a) 10/1000 या 1/10 (b) एक-सौवाँ भाग या 90 हज़ारवाँ भाग (c) एक-हज़ारवाँ भाग या 90 सौवाँ भाग
हल: (a) 1/10 = 0.1, 10/1000 = 0.01, अतः 1/10 बड़ा है। (b) 90 हज़ारवाँ = 0.090, एक-सौवाँ = 0.010, अतः 90 हज़ारवाँ भाग बड़ा है। (c) 90 सौवाँ = 0.90, एक-हज़ारवाँ = 0.001, अतः 90 सौवाँ भाग बड़ा है।

प्र. 17: दशमलव रूप में लिखें: (b) 12 दहाई और 12 दहाई-अंश (tenths) (c) 10 दहाई, 10 इकाई, 10 दहाई-अंश, 10 सौवाँ-अंश (d) 25 दहाई, 25 इकाई, 25 दहाई-अंश, 25 सौवाँ-अंश
हल:
(b) (12×10) + (12×0.1) = 120 + 1.2 = 121.2
(c) (10×10) + (10×1) + (10×0.1) + (10×0.01) = 100+10+1+0.1 = 111.1
(d) (25×10) + (25×1) + (25×0.1) + (25×0.01) = 250+25+2.5+0.25 = 277.75

प्र. 18: 0-9 तक के अंकों का उपयोग करके 10.5 के निकटतम योग प्राप्त करें।
हल: (यह प्रश्न पाठ्यपुस्तक में दिए गए विशिष्ट बॉक्स-प्रारूप पर निर्भर करता है, जो आकृति के बिना स्पष्ट नहीं है। सामान्य रणनीति: दो दशमलव संख्याएँ इस प्रकार बनाएँ कि उनका योग 10.5 के यथासंभव निकट हो, प्रत्येक अंक का उपयोग केवल एक बार करते हुए। एक उदाहरण संभावित हल: 6.92 + 3.58 = 10.50।)

प्र. 19: भिन्नों को दशमलव में बदलें: (a) 1/2 (b) 3/2 (c) 1/4 (d) 3/4 (e) 1/5 (f) 3/5 अथवा 4/5
हल: (a) 0.5 (b) 1.5 (c) 0.25 (d) 0.75 (e) 0.2 (f) 3/5 = 0.6; (यदि प्रश्न 4/5 है तो) 4/5 = 0.8

अध्याय 4: अक्षर-संख्याओं के उपयोगी व्यंजक

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

खंड: सूत्र और व्यंजक (पृष्ठ 84-85)

प्र. 1: परिमाप के सूत्र लिखें: (a) समबाहु त्रिभुज (b) सम पंचभुज (c) सम षट्भुज
हल: (a) यदि भुजा = s, तो परिमाप = 3s। (b) यदि भुजा = p, तो परिमाप = 5p। (c) यदि भुजा = h, तो परिमाप = 6h।

प्र. 2: मुनिरत्न के पास 20 मीटर लंबा पाइप है। वह k मीटर लंबा एक और पाइप जोड़ता है। कुल लंबाई का व्यंजक लिखें।
हल: कुल लंबाई = (20 + k) मीटर।

प्र. 3: कृतिका के पास ₹100, ₹20 और ₹5 के नोटों की कुछ संख्या है — कुल राशि के लिए तालिका पूर्ण करें।
हल: यदि ₹100 के a नोट, ₹20 के b नोट और ₹5 के c नोट हों, तो कुल राशि = 100a + 20b + 5c रुपये।

प्र. 4: वेंकटलक्ष्मी की चक्की को शुरू होने में 10 सेकंड लगते हैं; फिर प्रति किग्रा अनाज पीसने में 8 सेकंड लगते हैं। y किग्रा अनाज पीसने में लगने वाले समय का सही व्यंजक कौन-सा है?
हल: कुल समय = आरंभिक समय + पिसाई समय = 10 + 8y सेकंड।

प्र. 5: व्यंजक लिखें: (a) किसी संख्या से 5 अधिक (b) किसी संख्या से 4 कम (c) किसी संख्या के 13 गुने से 2 कम (d) किसी संख्या के 2 गुने से 13 कम
हल: मान लीजिए संख्या = n। (a) n + 5 (b) n − 4 (c) 13n − 2 (d) 2n − 13

प्र. 6: व्यंजक 8x + 3y और 15j − 2k के अनुरूप वास्तविक स्थितियाँ बताएँ।
हल: (a) 8x+3y: ₹8 प्रति नोटबुक की दर से x नोटबुक और ₹3 प्रति पेन की दर से y पेन खरीदने की कुल लागत। (b) 15j−2k: j लीटर वाले 15 जग जूस में से k लीटर वाली 2 केतली जूस निकाल लेने पर शेष जूस की मात्रा।

प्र. 7: कैलेंडर में किसी भी महीने के 2×3 ग्रिड (दो पंक्ति, तीन स्तंभ) की तारीखों में, यदि नीचे की मध्य कोशिका में तारीख w है, तो शेष कोशिकाओं के लिए व्यंजक लिखें।
हल: चूँकि कैलेंडर में एक स्तंभ का अगला सप्ताह (ऊपर/नीचे) 7 दिन के अंतर पर होता है: नीचे की पंक्ति: w−1, w, w+1; ऊपर की पंक्ति (7 कम): w−8, w−7, w−6।

खंड: पदों को सरल करना (पृष्ठ 93-94)

प्र. 8: चित्रों में दी गई संख्याओं को जोड़ें, उनके व्यंजक लिखें और सरल करें (पंक्तिवार और स्तंभवार दोनों तरीकों से जोड़ने पर परिणाम समान आता है, जो जोड़ के क्रमविनिमेय व साहचर्य गुण को दर्शाता है)।
हल: (यह प्रश्न मूल पाठ्यपुस्तक के विशिष्ट चित्रों पर निर्भर करता है — सिद्धांत यह प्रदर्शित करना है कि जोड़ का क्रम बदलने पर भी योग नहीं बदलता।)

प्र. 9: सरल करें: (a) p+p+p+p, p+p+p+q, p+q+p−q (b) p−q+p−q, p+q−p+q (c) p+q−(p+q), p−q−p−q (d) 2d−d−d−d, 2d−d−d−c (e) 2d−d−(d−c), 2d−(d−d)−c (f) 2d−d−c−c
हल:
(a) 4p; 3p+q; 2p
(b) 2p−2q; 2q
(c) 0; −2q
(d) −d; −c
(e) c; 2d−c
(f) d−2c

खंड: वास्तविक स्थितियों में व्यंजक (पृष्ठ 102-105)

प्र. 10: ज्वार रोटी की एक प्लेट ₹30 और पुलाव की एक प्लेट ₹20 की है। यदि एक दिन में x प्लेट रोटी और y प्लेट पुलाव ऑर्डर हुए, तो कुल कमाई का सही व्यंजक चुनें।
हल: सही व्यंजक: 30x + 20y।

प्र. 11: पुष्पिता स्वतंत्रता दिवस पर दो प्रकार के फूल बेचती है: p ग्राहकों ने केवल चंपक, q ने केवल गेंदा और r ने दोनों खरीदे। हर ग्राहक को एक छोटा राष्ट्रीय ज़़ंडा दिया गया। कुल कितने ज़़ंडे बाँटे गए?
हल: सही व्यंजक: p + q + r (क्योंकि हर ग्राहक — चाहे उसने कुछ भी खरीदा हो — को केवल एक ज़़ंडा मिला)।

प्र. 12: एक घोंगा एक गहरे कुएँ की दीवार पर चज़़ने की कोशिश करता है। दिन में वह u सेमी चज़़ता है और रात में d सेमी फिसल जाता है। यह 10 दिन-रात तक चलता है।
(a) घोंघे की आरंभिक स्थिति से दूरी का व्यंजक लिखें।
(b) यदि d > u हो तो क्या होगा?
हल: (a) 10(u − d) सेमी। (b) यदि d > u, तो व्यंजक का मान र्णात्मक हो जाएगा — अर्थात् घोंघा वास्तव में हर दिन-रात चक्र में शुद्ध रूप से नीचे की ओर खिसक रहा है और वह कभी ऊपर (कुएँ के मुहाने तक) नहीं पहुँच पाएगा।

प्र. 13: राधा साइकिल दौड़ की तैयारी कर रही है। पहले सप्ताह वह प्रतिदिन 5 किमी चलाती है। हर अगले सप्ताह वह प्रतिदिन की दूरी z किमी बड़ा देती है। 3 सप्ताह बाद उसने कुल कितनी दूरी तय की होगी?
हल: सप्ताह 1: 5×7=35 किमी। सप्ताह 2: (5+z)×7=35+7z। सप्ताह 3: (5+2z)×7=35+14z। कुल = 35+(35+7z)+(35+14z) = 105 + 21z किमी।

प्र. 14: चित्र में दिखाया गया है कि व्यंजक w+2, एक मार्ग पर चलते हुए 4w+20 कैसे बनता है। शेष मार्गों की रिक्त जगहें भरें।
हल: (यह प्रश्न मूल पाठ्यपुस्तक की विशिष्ट फ्लो-चार्ट आकृति पर निर्भर करता है, जिसमें प्रत्येक चरण पर एक निश्चित संक्रिया (जैसे ×2, +6 आदि) लागू होती है। सिद्धांत: प्रत्येक चरण के परिणाम में पिछले चरण के व्यंजक पर संक्रिया लागू करते हुए सरल करें — जैसे w+2 पर ×2 करने से 2w+4, फिर ×2 करने से 4w+8, फिर +12 करने से 4w+20 प्राप्त हो सकता है, यह मूल आकृति के अनुसार भिन्न हो सकता है।)

प्र. 15: याहापुर से वाहापुर तक एक लोकल ट्रेन बराबर दूरी पर तीन स्टेशनों पर रुकती है। एक स्टेशन से अगले तक जाने में t मिनट लगते हैं, और हर स्टेशन पर 2 मिनट रुकती है।
(a) यदि t=4 हो तो याहापुर से वाहापुर तक कुल समय कितना लगेगा?
(b) सामान्य व्यंजक क्या होगा?
हल: कुल यात्रा में 4 खंड (segments) हैं (आरंभ से स्टेशव1, स्टेशव1 से 2, स्टेशव2 से 3, स्टेशव3 से अंत) और 3 पड़ाव। सामान्य व्यंजक = 4t + 6। (a) t=4 पर: 4(4)+6 = 22 मिनट।

प्र. 16: निम्नलिखित व्यंजकों को सरल करें (छह उप-प्रश्न):
हल: (a) 4a + 5b + 10 (b) a − 13b − 16 (c) 12x + 6 (d) 6x + 15 (e) h + 4 (f) 21m − 20n + 5

प्र. 17: निम्नलिखित व्यंजकों को जोड़ें (छह उप-प्रश्न):
हल: (a) 13d + c − 2 (b) 7f + 4s − 4 (c) 2c − d − 2 (d) −7f − 4s + 3 (e) 0 (f) 0

प्र. 18: निम्नलिखित व्यंजकों को घटाएं (छह उप-प्रश्न):
हल: (a) −3a + 15b − 32 (b) 18x + 16y − 23 (c) −27g + 10h + 2 (d) −3a − 3b − 32 (e) −13x − 13y + 6 (f) −16g + 3h + 30

प्र. 19: व्यंजक 8x+3y और 15x−2x के अनुरूप स्थितियाँ बताएँ।
हल: (a) 8x+3y: ₹8 प्रति वस्तु की दर से x वस्तुएँ और ₹3 प्रति वस्तु की दर से y वस्तुएँ खरीदने की कुल लागत। (b) 15x−2x=13x: 15 थैलों में प्रत्येक में x सेब हों, उनमें से 2 थैले खराब होकर हटा दिए जाएं, तो शेष सेबों की संख्या।

प्र. 20: एक सीधी रस्सी को एक बार काटने पर 2 टुकड़े मिलते हैं। एक बार मोड़कर काटने पर 3 टुकड़े मिलते हैं। यदि रस्सी को 10 बार मोड़कर काटा जाए तो कितने टुकड़े मिलेंगे? r बार मोड़ने पर सामान्य व्यंजक क्या होगा?
हल: प्रतिरूप: मोड़ों की संख्या + 2 = टुकड़ों की संख्या। 10 मोड़ों पर = 12 टुकड़े। सामान्य व्यंजक: (r + 2) टुकड़े।

प्र. 21: दी गई माचिस की तीलियों के पैटर्न में 10 वर्ग बनाने के लिए कितनी तीलियाँ चाहिए? w वर्गों के लिए सामान्य व्यंजक क्या होगा?
हल: पहले वर्ग के लिए 4 तीलियाँ, प्रत्येक अगले वर्ग के लिए 3 अतिरिक्त तीलियाँ (एक भुजा साझा होने से): कुल = 4+3(w−1) = 3w+1। 10 वर्गों के लिए: 3(10)+1 = 31 तीलियाँ।

प्र. 22: ट्रैज़़िक सिग्नल में रंगों का क्रम (लाल, पीला, हरा दोहराते हुए) दिया गया है। स्थिति 90, 190 और 343 पर कौन-सा रंग होगा? प्रत्येक रंग की स्थिति के लिए व्यंजक लिखें।
हल: यदि क्रम लाल(1)→पीला(2)→हरा(3)→लाल(4)… इस प्रकार दोहराता है, तो लाल की स्थिति = 3n−2, पीले की स्थिति = 3n−1, हरे की स्थिति = 3n (n=1,2,3…)। जाँच: 90÷3=30 शेष 0 → स्थिति 90, हरे रंग (3n रूप, n=30) से मेल खाती है — हरा। 190: 190=3(63)+1 → 3n−2 रूप (n=64: 3×64−2=190) से मेल खाती है — लाल। 343: 343=3(114)+1 → 3n−2 रूप (n=115: 3×115−2=343) से मेल खाती है — लाल।

प्र. 23: दिए गए वर्ग-पैटर्न में चरण 4, 10 और 50 पर कितने वर्ग होंगे? सामान्य सूत्र लिखें। यदि सभी वर्गों के शीर्ष बिंदुओं (vertices) की संख्या गिननी हो तो सूत्र कैसे बदलेगा?
हल: सामान्य सूत्र: 4n + 1 (जहाँ n = चरण संख्या)। जाँच: n=4 → 4(4)+1=17 वर्ग; n=10 → 4(10)+1=41 वर्ग; n=50 → 4(50)+1=201 वर्ग। शीर्ष बिंदुओं की संख्या (प्रत्येक वर्ग के 4 शीर्ष मानकर, ओवरलैप अनदेखा करते हुए सरल गणना): 4(4n+1) = 16n+4।

प्र. 24: दिए गए 4-स्तंभ वाले ग्रिड में संख्याएँ क्रमिक रूप से भरी गई हैं (पंक्ति r, स्तंभ c)।
(a) प्रत्येक स्तंभ (1,2,3,4) में आने वाली सभी संख्याओं के लिए व्यंजक लिखें।
(b) 124, 147, 201 किस पंक्ति और स्तंभ में आएंगी?
(c) पंक्ति r और स्तंभ c में कौन-सी संख्या आएगी, इसका सामान्य सूत्र लिखें।
(d) 3 के गुणजों की स्थिति में कोई प्रतिरूप दिखता है क्या? अन्य कौन-से प्रतिरूप दिखते हैं?
हल:
(a) स्तंभ 1: 4r−3; स्तंभ 2: 4r−2; स्तंभ 3: 4r−1; स्तंभ 4: 4r (r = पंक्ति संख्या)
(b) 124=4×31 → स्तंभ 4, पंक्ति 31। 147: 4r−1=147⇒r=37 → स्तंभ 3, पंक्ति 37। 201: 4r−3=201⇒r=51 → स्तंभ 1, पंक्ति 51।
(c) सामान्य सूत्र: 4(r−1) + c
(d) 3 के गुणज स्तंभों में एक चक्रीय प्रतिरूप (हर 4 पंक्तियों के बाद दोहराव) में दिखाई देते हैं। अन्य प्रतिरूप: स्तंभ 4 में सभी संख्याएँ 4 के गुणज हैं; स्तंभ 1 और 3 में विषम संख्याएँ हैं; स्तंभ 2 और 4 में सम संख्याएँ हैं।

अध्याय 5: समांतर और प्रतिच्छेदी रेखाएँ

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

खंड: रैखिक युग्म और शीर्षाभिमुख कोण (पृष्ठ 108)

प्र. 1: दी गई आकृति (Fig. 5.3) में सभी रैखिक युग्मों (linear pairs) और शीर्षाभिमुख कोणों (vertically opposite angles) को सूचीबद्ध करें।
हल: यदि दो रेखाएँ एक बिंदु पर प्रतिच्छेद करके चार कोण ∠a, ∠b, ∠c, ∠d (क्रम में) बनाती हैं, तो: रैखिक युग्म (योग 180°): ∠a व ∠b; ∠b व ∠c; ∠c व ∠d; ∠d व ∠a। शीर्षाभिमुख कोण (आपस में बराबर): ∠a व ∠c; ∠b व ∠d। (सटीक अक्षर-नामकरण मूल पाठ्यपुस्तक की आकृति 5.3 पर निर्भर करता है — यहाँ सामान्य सिद्धांत के अनुसार हल दिया गया है।)

खंड: लंब और समांतर रेखाएँ पहचानना (पृष्ठ 112-114)

प्र. 2: डॉट पेपर पर दी गई रेखाओं पर लंब रेखाएँ खींचें (Fig. 5.10)।
हल: (यह एक व्यावहारिक चित्रकारी क्रियाकलाप है — विद्यार्थी को डॉट पेपर पर दी गई रेखा से 90° का कोण बनाने वाली रेखा खींचनी है। सेट-स्क्वायर या समकोण त्रिभुज का उपयोग कर यह सत्यापित किया जा सकता है कि दोनों रेखाएँ ठीक 90° पर मिलती हैं।)

प्र. 3: Fig. 5.11 में समांतर रेखाओं को उपयुक्त संकेतन (एक/दो तीर के निशान) से चिह्नित करें और लंब रेखाओं के बीच के कोण को वर्ग-चिह्न (□) से दिखाएँ। (a) लंब रेखाओं को कैसे पहचाना? (b) समांतर रेखाओं को कैसे पहचाना?
हल: (a) लंब रेखाएँ वे हैं जो एक-दूसरे को ठीक 90° के कोण पर काटती हैं — इसे सेट-स्क्वायर/प्रोट्रैक्टर से जाँचा जा सकता है। (b) समांतर रेखाएँ वे हैं जो कभी नहीं मिलतीं और दोनों के बीच की लंबवत दूरी हर बिंदु पर समान रहती है (दिशा हमेशा एक समान रहती है)।

प्र. 4: डॉट पेपर पर बिंदुओं को अंत-बिंदु मानते हुए समांतर रेखाओं के विभिन्न समुच्चय खींचें।
हल: (व्यावहारिक क्रियाकलाप — विद्यार्थी स्वयं करें, ध्यान रखें कि प्रत्येक समुच्चय की रेखाएँ आपस में समान दिशा और समान दूरी बनाए रखें।)

प्र. 5: दी गई रेखाखंडों के समांतर रेखाएँ खींचने का प्रयास करें, यह पहचानते हुए कि कौन-सी अधिक कठिन लगीं।
हल: (व्यावहारिक/अनुभव-आधारित प्रश्न — सामान्यतः तिरछी (oblique) दिशा वाली रेखाओं के समांतर खींचना, ऊर्ध्वाधर/क्षैतिज रेखाओं की तुलना में अधिक कठिन लगता है, क्योंकि डॉट-पेपर पर दिशा का अनुमान लगाना कठिन होता है।)

प्र. 6: Fig. 5.13 में रेखा a किसके समांतर है — रेखा b या रेखा c? आपने यह कैसे तय किया?
हल: रेखा a, रेखा c के समांतर है, क्योंकि रेखा a और रेखा c के बीच की लंबवत दूरी हर जगह समान रहती है और वे कभी नहीं मिलतीं, जबकि रेखा b, रेखा a की दिशा से भिन्न दिशा में है (या मिलती/करीब आती दिखती है)।

खंड: ज्यामिति उपकरणों से समांतर रेखा खींचना (पृष्ठ 118-119)

प्र. 7: क्या आप रेखा l के समांतर, बिंदु A से गुज़रने वाली एक रेखा खींच सकते हैं? ज्यामिति बॉक्स के उपकरणों से यह कैसे करेंगे?
हल: विधि: सेट-स्क्वायर का एक किनारा रेखा l के साथ मिलाएँ; एक रूलर (या दूसरा सेट-स्क्वायर) को सेट-स्क्वायर के दूसरे किनारे पर सटाकर रखें; अब रूलर को स्थिर रखते हुए सेट-स्क्वायर को तब तक खिसकाएँ जब तक उसका किनारा बिंदु A से न गुज़रे; इस स्थिति में सेट-स्क्वायर के सहारे रेखा खींचें — यह रेखा l के समांतर होगी और बिंदु A से गुज़रेगी (क्योंकि रेखा l और नई रेखा दोनों रूलर से समान कोण बनाती हैं)।

खंड: तिर्यक रेखा (Transversal) और कोण ज्ञात करना (पृष्ठ 122-125)

प्र. 8: दी गई आकृतियों में समांतर रेखाओं और तिर्यक रेखा (transversal) की सहायता से अंकित कोणों (a से j तक) के मान ज्ञात करें, तथा बताएँ कि कौन-सा गुण (संगत कोण/एकांतर कोण/सह-अंतः कोण/रैखिक युग्म/शीर्षाभिमुख कोण) प्रयुक्त हुआ।
हल: (ये सभी उपप्रश्न मूल पाठ्यपुस्तक की विशिष्ट आकृतियों पर आधारित हैं, जिनमें अलग-अलग कोण दिए गए हैं। सामान्य नियम: एकांतर कोण (alternate angles) और संगत कोण (corresponding angles) हमेशा बराबर होते हैं; सह-अंतः कोण (co-interior/allied angles) का योग सदैव 180° होता है; रैखिक युग्म का योग भी 180° होता है; शीर्षाभिमुख कोण बराबर होते हैं। इन्हीं नियमों को लागू कर नीचे द्वितीयक स्रोतों में मिलान की गई तालिका दी गई है — सटीक मान मूल पाठ्यपुस्तक की आकृति से पुष्टि करके ही अंतिम माने जाने चाहिएं:)

a: दिया गया कोण 48° (एकांतर कोण) → a = 48°
b: दिया गया कोण 52° (एकांतर कोण) → b = 52°
c: दिया गया कोण 99° (सह-अंतः कोण, 180°−99°) → c = 81°
d: दिया गया कोण 81° (सह-अंतः कोण, 180°−81°) → d = 99°
e: दिया गया कोण 69° (एकांतर कोण) → e = 69°
f: दिया गया कोण 132° (सह-अंतः कोण, 180°−132°) → f = 48°
g: दिया गया कोण 122° (संगत कोण) → g = 122°
h: दिया गया कोण 15° (एकांतर कोण) → h = 15°
i: दिया गया कोण 54° (एकांतर कोण) → i = 54°
j: दिया गया कोण 97° (एकांतर कोण) → j = 97°

(चेतावनी: उपरोक्त कोण-मान द्वितीयक स्रोतों के बीच सुसंगत पाए गए, परंतु चूँकि यह प्रश्न पूर्ण रूप से आकृति पर आधारित है और मूल NCERT आकृति सीधे उपलब्ध नहीं हो सकी, विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक की मूल आकृति से इन मानों का मिलान अवश्य करना चाहिए। प्रयुक्त नियम — एकांतर कोण बराबर, संगत कोण बराबर, सह-अंतः कोण का योग 180°, रैखिक युग्म का योग 180°, शीर्षाभिमुख कोण बराबर — पूर्णतः सत्यापित और मानक ज्यामितीय सिद्धांत हैं।)

अध्याय 6: संख्याओं का खेल

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

खंड: ऊँचाई और संख्या-क्रम (पृष्ठ 128)

प्र. 1: दी गई स्टिक-फिगर कटआउट को इस प्रकार व्यवस्थित करें कि ऊँचाई-क्रम कुछ विशेष अनुक्रमों (जैसे 0,1,1,2,4,1,5) को दर्शाए।
हल: (यह पूर्णतः मूल पाठ्यपुस्तक में दी गई कटआउट आकृतियों पर निर्भर एक व्यावहारिक क्रियाकलाप है — प्रत्येक व्यक्ति अपने से पहले खड़े लोगों में से कितनों से लंबा है, यह गिनकर संख्या बताता है। सही व्यवस्था मूल आकृतियों के बिना पुनर्निर्मित नहीं की जा सकती।)

प्र. 2: निम्नलिखित कथनों के लिए बताएँ कि वे हमेशा सत्य, कभी-कभी सत्य, या कभी सत्य नहीं हैं:
हल:
— “यदि कोई व्यक्ति ‘0’ कहता है, तो वह सबसे लंबा है” → कभी-कभी सत्य (केवल तभी सत्य जब वह पहला व्यक्ति हो; अन्यथा ‘0’ का अर्थ है कि उससे पहले खड़े किसी से भी वह लंबा नहीं है)।
— “यदि कोई व्यक्ति सबसे लंबा है, तो वह ‘0’ कहेगा” → यह कथन तभी सत्य है जब सबसे लंबा व्यक्ति सबसे पहले खड़ा हो; सामान्यतः सबसे लंबा व्यक्ति अपने से पहले वालों में से सबसे लंबा होगा इसलिए वह अपने से पहले के लोगों की तुलना में सबसे ऊँचा गिनेगा — हमेशा सत्य नहीं (केवल जब क्रम में पहला भी सबसे लंबा हो)। (ध्यान दें: द्वितीयक स्रोतों में इस बिंदु पर हल्की असंगति है — मूल पाठ्यपुस्तक के प्रसंग से पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।)
— “पहले व्यक्ति की संख्या ‘0’ होती है” → हमेशा सत्य (उससे पहले कोई नहीं है, इसलिए 0 लोग उससे लंबे)।
— 8 व्यक्तियों के समूह में अधिकतम संख्या कितनी हो सकती है? → 7 (अंतिम व्यक्ति अपने से पहले सभी 7 लोगों से लंबा हो सकता है)।

खंड: सम-विषम (parity) के नियम (पृष्ठ 131)

प्र. 3: सम और विषम संख्याओं के चित्रीय निरूपण का उपयोग कर इनकी जोड़ की समता (parity) ज्ञात करें: (a) सम+सम+विषम+विषम (b) विषम+विषम+सम+सम+सम (c) पाँच सम संख्याओं का योग (d) आठ विषम संख्याओं का योग
हल: (a) सम+सम=सम, विषम+विषम=सम, सम+सम=सम। (b) विषम+विषम=सम, फिर सम+सम+सम=सम। (c) पाँच सम संख्याओं का योग सदैव सम होता है (सम+सम सदैव सम रहता है)। (d) आठ (सम संख्या में) विषम संख्याओं का योग: प्रत्येक जोड़ी विषम+विषम=सम; 4 जोड़ियाँ मिलकर सम।

प्र. 4: किसी व्यक्ति के पास विषम संख्या में ₹1 के सिक्के, विषम संख्या में ₹5 के सिक्के, और सम संख्या में ₹10 के सिक्के हैं। उसने कुल ₹205 होने का दावा किया। क्या यह संभव है?
हल: नहीं, यह असंभव है। ₹1 के सिक्कों की राशि विषम होगी (विषम संख्या × 1), ₹5 वाली राशि भी विषम होगी (विषम × 5 = विषम), और ₹10 वाली राशि सम होगी। विषम+विषम+सम = सम होना चाहिए, जबकि ₹205 एक विषम संख्या है — अतः विरोधाभास, दावा गलत है।

प्र. 5: घटाव के लिए समता (parity) नियम बताएँ: सम−सम, विषम−विषम, सम−विषम, विषम−सम
हल: सम−सम = सम; विषम−विषम = सम; सम−विषम = विषम; विषम−सम = विषम।

खंड: जादुई वर्ग (Magic Squares) (पृष्ठ 136-137)

प्र. 6: संख्या 1-9 का उपयोग करके कितने भिन्न जादुई वर्ग (magic squares) बनाए जा सकते हैं?
हल: घूर्णन (rotation) और परावर्तन (reflection) को छोड़कर मूलतः केवल एक ही अनूठा जादुई वर्ग है (जादुई योग = 15); इसके 4 घूर्णन और 4 परावर्तन मिलाकर कुल 8 रूपांतर (variations) बनते हैं।

प्र. 7: संख्या 2 से 10 का उपयोग करके एक जादुई वर्ग बनाएँ। इसके लिए क्या रणनीति अपनाएँगे?
हल: मानक 1-9 वाले जादुई वर्ग की प्रत्येक संख्या में 1 जोड़ दें। नया जादुई योग = 15+3 = 18 होगा (क्योंकि प्रत्येक पंक्ति/स्तंभ में 3 संख्याएँ हैं, प्रत्येक में 1 जुड़ने से योग में 3 की वृद्धि होती है)।

प्र. 8: किसी जादुई वर्ग की (a) प्रत्येक संख्या में 1 जोड़ें (b) प्रत्येक संख्या को दोगुना करें — क्या परिणाम अभी भी जादुई वर्ग रहेगा? जादुई योग कैसे बदलेगा?
हल: (a) हाँ, जादुई वर्ग बना रहता है; योग में 3 की वृद्धि होती है। (b) हाँ, जादुई वर्ग बना रहता है; योग दोगुना हो जाता है।

प्र. 9: जादुई वर्ग से दूसरा जादुई वर्ग बनाने के लिए और कौन-सी संक्रियाएँ की जा सकती हैं?
हल: प्रत्येक संख्या में समान अचर (constant) जोड़ना/घटाना; प्रत्येक संख्या को समान अचर से गुणा करना; पूरे वर्ग को घुमाना (rotate) या दर्पण-प्रतिबिंब (reflect) करना — इन सभी क्रियाओं से जादुई गुण बना रहता है।

प्र. 10: किन्हीं भी 9 क्रमागत संख्याओं का उपयोग करके जादुई वर्ग बनाने के तरीके पर चर्चा करें।
हल: मानक 1-9 वाले जादुई वर्ग में, नई शृंखला के प्रथम पद और 1 के बीच का अंतर प्रत्येक कोष्ठक में जोड़ दें। उदाहरण: 2-10 के लिए हर कोष्ठक में 1 जोड़ें; 9-17 के लिए हर कोष्ठक में 8 जोड़ें (क्योंकि 9−1=8)।

खंड: समता (Parity) के अनुप्रयोग (पृष्ठ 143-144)

प्र. 11: एक बल्ब चालू (ON) है। दोरजी उसका स्विच 77 बार दबाता (टॉगल करता) है। क्या बल्ब अंत में जलेगा या बुझा रहेगा?
हल: प्रत्येक टॉगल स्थिति बदलता है; 77 (विषम संख्या) बार टॉगल करने पर स्थिति पलट जाएगी — अतः बल्ब बंद (OFF) रहेगा।

प्र. 12: लिस्विनी के पास एक पुराना विश्वकोश है, जिसमें से 50 ढीले पन्ने (प्रत्येक दोनों तरफ छपा हुआ) गिर गए। क्या इन पन्नों के पृष्ठ-क्रमांकों का कुल योग 6000 हो सकता है?
हल: नहीं। एक पन्ने के दोनों पृष्ठ-क्रमांक हमेशा क्रमागत होते हैं जिनमें एक सम और एक विषम होता है (जैसे 2,3 या 50,51), जिनका योग सदैव विषम होता है, लेकिन एसे विशेष रूप में कि कुल 50 पन्नों का योग हमेशा 4 से विभाज्य नहीं हो सकता, जबकि 6000, 4 से विभाज्य है (6000÷4=1500) — गणितीय विश्लेषण से यह असंगति सिद्ध होती है, इसलिए योग 6000 संभव नहीं है।

प्र. 13: एक 2×3 ग्रिड में, प्रत्येक पंक्ति और स्तंभ के योग की समता (o=विषम, e=सम) वृत्त में दी गई है। 6 खानों को 3 विषम और 3 सम संख्याओं से इस प्रकार भरें कि यह शर्तें पूरी हों।
हल: (यह प्रश्न मूल पाठ्यपुस्तक में दी गई विशिष्ट समता-बाधाओं (grid constraints) पर निर्भर करता है — सटीक स्थान-विशेष हल के लिए मूल आकृति देखना आवश्यक है। सामान्य सिद्धांत: प्रत्येक पंक्ति/स्तंभ में विषम संख्याओं की गिनती की समता जाँचकर वहाँ ‘o’ या ‘e’ के अनुरूप संख्याएँ भरी जाती हैं।)

प्र. 14: 0 जादुई योग वाला एक 3×3 जादुई वर्ग बनाएँ (सभी संख्याएँ शून्य नहीं हो सकतीं)।
हल: ऋणात्मक संख्याओं का उपयोग करते हुए, उदाहरण के लिए ∞4 से 4 तक की संख्याओं को इस प्रकार व्यवस्थित करें कि हर पंक्ति, स्तंभ और विकर्ण का योग 0 हो — जैसे मानक 1-9 वाले जादुई वर्ग से हर संख्या में से 5 घटाकर (चूँकि 1-9 का औसत 5 है): परिणामी वर्ग की हर पंक्ति/स्तंभ/विकर्ण का योग = 15−(5×3) = 0।

प्र. 15: रिक्त स्थान ‘सम’ या ‘विषम’ से भरें: (a) सम संख्याओं की विषम गिनती का योग (b) विषम संख्याओं की सम गिनती का योग (c) सम संख्याओं की सम गिनती का योग (d) विषम संख्याओं की विषम गिनती का योग
हल: (a) सम (b) सम (c) सम (d) विषम

प्र. 16: 1 से 100 तक की संख्याओं के योग की समता क्या है?
हल: योग = 100×101/2 = 5050, जो एक सम संख्या है।

प्र. 17: विरहांक अनुक्रम (फिबोनाची शैली) में दो क्रमागत संख्याएँ 987 और 1597 हैं। अगली 2 संख्याएँ और पिछली 2 संख्याएँ बताएँ।
हल: अगली: 987+1597=2584; 1597+2584=4181। पिछली: 1597−987=610; 987−610=377।

प्र. 18: अंगान को 8 सीढ़ियाँ चढ़नी हैं। वह एक बार में 1 या 2 सीढ़ियाँ चढ़ सकता है। वह शीर्ष तक कितने अलग-अलग तरीकों से पहुँच सकता है?
हल: यह विरहांक (फिबोनाची)-शैली गणना है: तरीकों की संख्या का अनुक्रम 1,2,3,5,8,13,21,34 (8वें पद तक) बनता है — अतः 34 अलग-अलग तरीके।

प्र. 19: विरहांक अनुक्रम के 20वें पद की समता क्या है?
हल: अनुक्रम को 0,1,1,2,3,5,8,13,21,34,55,89,144,233,377,610,987,1597,2584,4181 के रूप में लिखने पर (प्रथम पद=0), 20वाँ पद = 4181, जो विषम है। (ध्यान दें: कुछ द्वितीयक स्रोतों ने इसे “सम” बताया है, परंतु प्रत्यक्ष गणना — विशेषकर प्र. 17 में दिए गए 987 (17वाँ पद) और 1597 (18वाँ पद) के आधार पर आगे बढ़ाने पर — 20वाँ पद 4181 विषम संख्या है। यह उत्तर स्वयं पुनर्गणना करके सत्यापित किया गया है।)

प्र. 20: निम्नलिखित व्यंजकों (जैसे 4m−1, 6j−4 आदि) के बारे में दिए गए कथनों में से कौन-से सत्य हैं, पहचानें।
हल: “व्यंजक 4m−1 हमेशा विषम संख्या देता है” — सत्य (चूँकि 4m सदैव सम है, और सम−1 सदैव विषम होता है, चाहे m का मान कुछ भी हो)। शेष कथन सामान्यतः असत्य पाए जाते हैं (उन्हें प्रतिउदाहरण देकर खंडित किया जा सकता है)।

प्र. 21: दिए गए क्रिप्टएरिथ्म (अक्षरों को अंकों से बदलने वाली पहेली) को हल करें।
हल: (यह पहेली मूल पाठ्यपुस्तक में दिए गए विशिष्ट समीकरण पर निर्भर करती है, जो द्वितीयक स्रोतों में स्पष्ट रूप से पुनर्निर्मित नहीं हो सकी। एक सुझाया गया हल: U=9, T=1, A=0 — परंतु इसकी पुष्टि मूल समीकरण देखे बिना नहीं की जा सकती; विद्यार्थियों को पाठ्यपुस्तक की मूल पहेली से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)

अध्याय 7: तीन प्रतिच्छेदी रेखाओं की एक कथा

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)

खंड: समद्विबाहु व समबाहु त्रिभुज बनाना (पृष्ठ 150-151)

प्र. 1: वृत्त पर स्थित बिंदुओं और/या केंद्र का उपयोग करके समद्विबाहु त्रिभुज बनाएँ।
हल: वृत्त पर किन्हीं भी दो बिंदुओं को चुनें और उन्हें केंद्र से जोड़ें, फिर दोनों बिंदुओं को आपस में जोड़ें। चूँकि दोनों त्रिज्याएँ (radii) बराबर होती हैं, यह त्रिभुज समद्विबाहु होगा।

प्र. 2: समान आकार के वृत्तों पर स्थित बिंदुओं और/या केंद्रों का उपयोग करके समद्विबाहु और समबाहु त्रिभुज बनाएँ।
हल: दो समान वृत्तों के प्रतिच्छेदन बिंदुओं (X, Y) और किसी एक केंद्र (A या B) को जोड़ने पर समद्विबाहु त्रिभुज (AXY या BXY) बनता है। दोनों केंद्रों (A, B) और किसी एक प्रतिच्छेदन बिंदु (X या Y) को जोड़ने पर समबाहु त्रिभुज (AXB या AYB) बनता है, क्योंकि तीनों भुजाएँ त्रिज्या के बराबर होती हैं। तीन वृत्तों के मामले में, तीनों केंद्रों को आपस में जोड़ने पर भी समबाहु त्रिभुज ABC बनता है।

खंड: त्रिभुज असमिका (Triangle Inequality) (पृष्ठ 154, 159)

प्र. 3: बताएँ कि निम्नलिखित लंबाइयाँ त्रिभुज की भुजाएँ बन सकती हैं या नहीं: (a) 2,2,5 (b) 3,4,6 (c) 2,4,8 (d) 5,5,8 (e) 10,20,25 (f) 10,20,35 (g) 24,26,28
हल: त्रिभुज असमिका नियम: किन्हीं भी दो भुजाओं का योग तीसरी भुजा से अधिक होना चाहिए।
(a) 2+2=4 < 5 → त्रिभुज संभव नहीं
(b) 3+4=7 > 6 → त्रिभुज संभव है
(c) 2+4=6 < 8 → त्रिभुज संभव नहीं
(d) 5+5=10 > 8 → त्रिभुज संभव है
(e) 10+20=30 > 25 → त्रिभुज संभव है
(f) 10+20=30 < 35 → त्रिभुज संभव नहीं
(g) 24+26=50 > 28 → त्रिभुज संभव है

प्र. 4: प्रत्येक समुच्चय के लिए त्रिभुज के अस्तित्व के बारे में बताएँ: (a) 10 किमी, 10 किमी, 25 किमी (b) 5 मिमी, 10 मिमी, 20 मिमी (c) 12 सेमी, 20 सेमी, 40 सेमी
हल: तीनों ही मामलों में सबसे बड़ी भुजा, शेष दो भुजाओं के योग से अधिक है (10+10=20<25; 5+10=15<20; 12+20=32<40) — अतः तीनों में से किसी भी समुच्चय से त्रिभुज नहीं बन सकता।

प्र. 5: जाँचें कि निम्नलिखित समुच्चयों से त्रिभुज बनता है या नहीं: (a) 1,100,100 (b) 3,6,9 (c) 1,1,5 (d) 5,10,12
हल: (a) 1+100=101>100 → त्रिभुज संभव है। (b) 3+6=9, जो 9 से बड़ा नहीं (बराबर) है → त्रिभुज संभव नहीं (यह एक सीधी रेखा बनेगी, त्रिभुज नहीं)। (c) 1+1=2<5 → त्रिभुज संभव नहीं। (d) 5+10=15>12 → त्रिभुज संभव है।

प्र. 6: क्या 50, 50, 50 भुजाओं वाला एक समबाहु त्रिभुज संभव है?
हल: हाँ, संभव है, क्योंकि किन्हीं भी दो भुजाओं का योग (50+50=100) तीसरी भुजा (50) से अधिक है — यह शर्त किसी भी धनात्मक भुजा-लंबाई वाले समबाहु त्रिभुज के लिए स्वतः पूर्ण होती है।

प्र. 7: प्रत्येक युग्म के लिए तीसरी भुजा के 5 संभावित मान बताएँ: (a) 1, 100 (b) 5, 5 (c) 3, 7
हल: तीसरी भुजा, दी गई दोनों भुजाओं के अंतर से अधिक और योग से कम होनी चाहिए।
(a) 1 और 100: अंतर=99, योग=101 → तीसरी भुजा 99 से 101 के बीच हो, जैसे 99.5, 100, 100.2, 100.5, 100.9 (कोई भी मान 99 से अधिक और 101 से कम)
(b) 5 और 5: अंतर=0, योग=10 → तीसरी भुजा 0 से 10 के बीच हो, जैसे 2, 4, 6, 8, 9
(c) 3 और 7: अंतर=4, योग=10 → तीसरी भुजा 4 से 10 के बीच हो, जैसे 5, 6, 7, 8, 9

खंड: त्रिभुज की रचना (पृष्ठ 161-163)

प्र. 8: दी गई मापों (भुजा-कोण-भुजा) से त्रिभुज बनाएँ: (a) 3 सेमी, 75°, 7 सेमी (b) 6 सेमी, 25°, 3 सेमी (c) 3 सेमी, 120°, 8 सेमी
हल: विधि (भुजा-कोण-भुजा रचना): पहले दी गई पहली भुजा खींचें; उसके एक सिरे पर निर्दिष्ट कोण बनाएँ; कोण की भुजा पर दूसरी दी गई लंबाई नापकर बिंदु अंकित करें; अंत में दोनों बिंदुओं को मिलाकर त्रिभुज पूर्ण करें। तीनों ही मामलों में त्रिभुज की रचना संभव है।

प्र. 9: दी गई मापों (कोण-भुजा-कोण) से त्रिभुज बनाएँ: (a) 75°, 5 सेमी, 75° (b) 25°, 3 सेमी, 60° (c) 120°, 6 सेमी, 30°
हल: विधि: पहले आधार भुजा खींचें; आधार के दोनों सिरों पर दिए गए कोण बनाएँ; दोनों कोण-भुजाओं के प्रतिच्छेदन बिंदु को तीसरा शीर्ष मानें। तीनों मामलों में त्रिभुज बनना संभव है (क्योंकि प्रत्येक स्थिति में दोनों कोणों का योग 180° से कम है)।

खंड: कोण-योग गुण (Angle Sum Property) (पृष्ठ 163-165)

प्र. 10: प्रत्येक कोण के लिए बताएँ कि त्रिभुज बनने हेतु दूसरा कोण किन शर्तों को पूरा करना चाहिए: (a) 30° (b) 70° (c) 54° (d) 144°
हल: त्रिभुज के किन्हीं भी दो कोणों का योग 180° से कम होना चाहिए (तीसरा कोण धनात्मक रहे)। (a) 30° के साथ दूसरा कोण 150° से कम कोई भी हो सकता है। (b) 70° के साथ दूसरा 110° से कम। (c) 54° के साथ दूसरा 126° से कम। (d) 144° के साथ दूसरा 36° से कम (क्योंकि 144° स्वयं ही काफी बड़ा है)।

प्र. 11: बताएँ कि निम्नलिखित कोण-युग्म त्रिभुज के दो कोण हो सकते हैं या नहीं: (a) 35°, 150° (b) 70°, 30° (c) 90°, 85° (d) 50°, 150°
हल: (a) 35+150=185°>180° → संभव नहीं। (b) 70+30=100°<180°, तीसरा कोण=80° → संभव है। (c) 90+85=175°<180°, तीसरा कोण=5° → संभव है। (d) 50+150=200°>180° → संभव नहीं।

प्र. 12: समांतर रेखा विधि का उपयोग कर तीसरा कोण ज्ञात करें: (a) 36°, 72° (b) 150°, 15° (c) 90°, 30° (d) 75°, 45°
हल: त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है (तीसरे शीर्ष से विपरीत भुजा के समांतर रेखा खींचकर एकांतर कोणों की सहायता से सिद्ध किया जा सकता है)।
(a) 180−(36+72) = 72°
(b) 180−(150+15) = 15°
(c) 180−(90+30) = 60°
(d) 180−(75+45) = 60°

प्र. 13: क्या सभी कोण 70° वाला त्रिभुज बनाया जा सकता है?
हल: नहीं, क्योंकि 70°+70°+70°=210°≠180°। यदि दो कोण 70°-70° हों, तो तीसरा कोण = 180−140 = 40° होगा, 70° नहीं। तीनों कोण बराबर होने के लिए प्रत्येक कोण 60° होना आवश्यक है (समबाहु त्रिभुज)।

प्र. 14: यदि ∠A=50° और ∠B=∠C हो, तो ∠B और ∠C ज्ञात करें।
हल: ∠B+∠C = 180−50 = 130°; चूँकि ∠B=∠C, इसलिए ∠B=∠C = 130/2 = 65° प्रत्येक।

खंड: त्रिभुज की ऊँचाई (Altitude) की रचना (पृष्ठ 170)

प्र. 15: त्रिभुज ABC बनाएँ जहाँ BC=5 सेमी, AB=6 सेमी, CA=5 सेमी हो। शीर्ष A से BC पर ऊँचाई (altitude) खींचें।
हल: कंपास से दी गई भुजाओं के चाप खींचकर त्रिभुज बनाएँ; फिर सेट-स्क्वायर की सहायता से शीर्ष A से आधार BC पर लंबवत रेखा (ऊँचाई) खींचें।

प्र. 16: त्रिभुज TRY बनाएँ जहाँ RY=4 सेमी, TR=7 सेमी, ∠R=140° हो। शीर्ष T से RY पर ऊँचाई खींचें।
हल: दिए गए कोण और भुजाओं से त्रिभुज बनाएँ; चूँकि ∠R अधिक कोण (obtuse) है, ऊँचाई भुजा RY को (आवश्यकता अनुसार) बढ़ाकर उस पर लंबवत खींचनी होगी, सेट-स्क्वायर का उपयोग करते हुए।

प्र. 17: एक समकोण त्रिभुज ABC बनाएँ जहाँ ∠B=90°, AC=5 सेमी हो। ऐसे कितने भिन्न त्रिभुज संभव हैं?
हल: अनंत त्रिभुज संभव हैं, क्योंकि ∠A और ∠C का योग 90° रहते हुए इनके अलग-अलग मान (जैसे 30°-60°, 45°-45°, 20°-70° आदि) रखे जा सकते हैं, जबकि कर्ण AC=5 सेमी स्थिर रहता है — इस प्रकार अनगिनत भिन्न त्रिभुज बनाए जा सकते हैं।

प्र. 18: क्या समबाहु त्रिभुज समकोण या अधिककोण त्रिभुज हो सकता है?
हल: नहीं, क्योंकि समबाहु त्रिभुज का प्रत्येक कोण सदैव ठीक 60° होता है — यह न तो 90° (समकोण) हो सकता है, न ही 90° से अधिक (अधिककोण)। हालाँकि, समद्विबाहु त्रिभुज समकोण या अधिककोण दोनों प्रकार का हो सकता है।

अध्याय 8: भिन्नों के साथ कार्य करना

अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित, गणनाएँ स्वयं पुनः जाँची गईं)

खंड: भिन्न और पूर्णांक का गुणा (पृष्ठ 176-177)

प्र. 1: तेनज़िन प्रतिदिन ½ गिलास दूध पीता है। एक सप्ताह में और जनवरी महीने में वह कितने गिलास दूध पिएगा?
हल: एक सप्ताह: 7×½ = 3½ गिलास। जनवरी (31 दिन): 31×½ = 15½ गिलास।

प्र. 2: एक टीम 8 दिनों में 1 किमी नहर बनाती है। एक दिन में कितनी नहर बनेगी? यदि टीम सप्ताह में 5 दिन काम करे, तो साप्ताहिक कितनी नहर बनेगी?
हल: एक दिन: ⅛ किमी। 5 दिन: 5×⅛ = ⅝ किमी प्रति सप्ताह।

प्र. 3: मंजू और उसके दो पड़ोसी 5 लीटर तेल आपस में बराबर बाँटते हैं। प्रत्येक परिवार को साप्ताहिक और 4 सप्ताह में कितना तेल मिलेगा?
हल: प्रति सप्ताह: 5÷3 = 5/3 (1⅔) लीटर। 4 सप्ताह में: 4×5/3 = 20/3 = 6⅔ लीटर।

प्र. 4: चंद्रमा प्रतिदिन ⅚ घंटे देर से अस्त होता है। सोमवार रात 10 बजे के बाद, गुरुवार को यह कितने बजे अस्त होगा?
हल: सोमवार से गुरुवार तक 3 दिनों का अंतर है: 3×⅚ = 15/6 = 2½ घंटे देरी, अर्थात् रात 10 बजे के 2 घंटे 30 मिनट बाद।

प्र. 5: गुणा करें और मिश्र भिन्न में बदलें: (a) 7×⅗ (b) 4×⅓ (c) 9/7×6 (d) 13/11×6
हल: (a) 21/5 = 4⅕ (b) 4/3 = 1⅓ (c) 54/7 = 7 5/7 (d) 78/11 = 7 1/11

खंड: भिन्न × भिन्न (पृष्ठ 180-181)

प्र. 6: इकाई वर्ग निरूपण का उपयोग कर गुणनफल ज्ञात करें: (a) ⅓×⅕ (b) ¼×⅓ (c) ⅕×½ (d) ⅙×⅕
हल: (a) 1/15 (b) 1/12 (c) 1/10 (d) 1/30

प्र. 7: गुणनफल ज्ञात करें: (a) ⅔×⅘ (b) ¼×⅔ (c) ⅗×½ (d) 4/6×⅗
हल: (a) 8/15 (b) 2/12=1/6 (c) 3/10 (d) 12/30=2/5

खंड: वास्तविक जीवन समस्याएँ (पृष्ठ 183-184)

प्र. 8: एक टंकी 1 घंटे में 7/10 भाग भरती है। इतने समय में कितना भाग भरेगा: (a) ⅓ घंटा (b) ¾ घंटा (c) ⅔ घंटा (d) 7/10 घंटा (e) टंकी पूरी भरने में कितना समय लगेगा?
हल: (a) 7/10×⅓ = 7/30 (b) 7/10×¾ = 21/40 (c) 7/10×⅔ = 14/30 = 7/15 (d) 7/10×7/10 = 49/100 (e) 1÷(7/10) = 10/7 = 1 3/7 घंटे

प्र. 9: सरकार सोमू की ज़मीन का 1/6 भाग ले लेती है। शेष का आधा भाग वह कृष्णा को और ⅓ भाग बोरा को दे देती है। (a) कृष्णा का हिस्सा (b) बोरा का हिस्सा (c) सोमू के पास बचा हिस्सा — ज्ञात करें।
हल: शेष ज़मीन = 1−1/6 = 5/6। (a) कृष्णा: ½×5/6 = 5/12 (b) बोरा: ⅓×5/6 = 5/18 (c) सोमू के पास: 5/6−5/12−5/18 = 30/36−15/36−10/36 = 5/36

प्र. 10: एक आयत की भुजाएँ 3¾ फुट और 9⅗ फुट हैं। इसका क्षेत्रफल ज्ञात करें।
हल: 3¾ = 15/4; 9⅗ = 48/5। क्षेत्रफल = (15/4)×(48/5) = 720/20 = 36 वर्ग फुट।

प्र. 11: चार पौधे इस प्रकार लगाए गए हैं कि क्रमागत पौधों के बीच ¾ मीटर की दूरी है। पहले से अंतिम पौधे तक कुल दूरी कितनी है?
हल: 4 पौधों के बीच 3 अंतराल होते हैं। कुल दूरी = 3×¾ = 9/4 = 2¼ मीटर।

प्र. 12: कौन भारी है: 500 ग्राम का 12/15 भाग, या 4 किग्रा का 3/20 भाग?
हल: 12/15 का 500 ग्राम = (12×500)/15 = 400 ग्राम। 3/20 का 4 किग्रा(4000 ग्राम) = (3×4000)/20 = 600 ग्राम। चूँकि 600>400, अतः 4 किग्रा का 3/20 भाग भारी है।

खंड: भिन्न से भाग (Division) (पृष्ठ 196-198)

प्र. 13: दिए गए भाग-व्यंजकों का मान ज्ञात करें (विभिन्न भिन्न-भाग गणनाएँ)।
हल: (यह प्रश्न पाठ्यपुस्तक में दी गई विशिष्ट संख्याओं पर आधारित है — सामान्य नियम: a÷(p/q) = a×(q/p), अर्थात् भाजक भिन्न को उलटकर गुणा करें।)

प्र. 14: सही व्यंजक चुनें: (a) मारिया के पास फीता है, बैग बनाने के लिए (b) रिबन से बैज बनाना (c) बेकर का आटा-रोटी अनुपात
हल: (a) मारिया के पास 8 मीटर फीता है, प्रत्येक बैग के लिए ¼ मीटर चाहिए: 8÷(¼) = 8×4 = 32 बैग। (b) ½ मीटर रिबन को 8 बैज में बराबर बाँटा जाए: (½)÷8 = 1/16 मीटर प्रति बैज। (c) बेकर के पास 5 किग्रा आटा है, प्रत्येक रोटी के लिए 1/6 किग्रा चाहिए: 5÷(1/6) = 5×6 = 30 रोटियाँ।

प्र. 15: यदि ¼ किग्रा आटे से 12 रोटियाँ बनती हैं, तो 6 रोटियों के लिए कितना आटा चाहिए?
हल: प्रति रोटी आटा = (¼)÷12 = 1/48 किग्रा। 6 रोटियों के लिए: 6×(1/48) = 6/48 = ⅛ किग्रा।

प्र. 16: जोड़ें: 1÷⅙ + 1÷1/10 + 1÷1/13 + 1÷⅑ + 1÷½
हल: 1÷⅙=6; 1÷1/10=10; 1÷1/13=13; 1÷⅑=9; 1÷½=2। योग = 6+10+13+9+2 = 40। (ध्यान दें: एक द्वितीयक स्रोत ने गलती से 60 बताया था; स्वयं पुनर्गणना करने पर सही उत्तर 40 है।)

प्र. 17: मीरा 400 पन्नों का एक उपन्यास पढ़ रही है — कल उसने 1/5 भाग और आज 3/10 भाग पढ़ा। कितने पन्ने शेष हैं?
हल: कल पढ़ा = 1/5×400 = 80 पन्ने। आज पढ़ा = 3/10×400 = 120 पन्ने। कुल पढ़ा = 200 पन्ने। शेष = 400−200 = 200 पन्ने।

प्र. 18: एक कार प्रति लीटर 16 किमी चलती है। 2¾ लीटर में वह कितनी दूरी तय करेगी?
हल: 16×2¾ = 16×11/4 = 44 किमी।

प्र. 19: ट्रेन से यात्रा में 5⅙ घंटे लगते हैं, जबकि हवाई जहाज़ से केवल ½ घंटा। हवाई जहाज़ से कितना समय बचता है?
हल: 5⅙ = 31/6 घंटे। बचत = 31/6 − ½ = 31/6 − 3/6 = 28/6 = 14/3 = 4⅔ घंटे।

प्र. 20: एक केक का ¾ भाग खा लिया गया। शेष भाग 3 दोस्तों में बराबर बाँटा गया। प्रत्येक दोस्त को केक का कितना भाग मिलेगा?
हल: शेष केक = 1−¾ = ¼। 3 दोस्तों में बराबर बाँटने पर प्रत्येक को: (¼)÷3 = 1/12 भाग। (ध्यान दें: एक द्वितीयक स्रोत ने गलती से 1/15 बताया था; स्वयं पुनर्गणना करने पर सही उत्तर 1/12 है — ¼÷3 = 1/12।)

प्र. 21: (565/465 × 707/676) के बारे में सही विकल्प चुनें।
हल: चूँकि 565/465 > 1 और 707/676 > 1 (दोनों भिन्नों में अंश, हर से बड़ा है), इसलिए उनका गुणनफल दोनों मूल भिन्नों से बड़ा होगा और 1 से भी बड़ा होगा।

प्र. 22: पूरे वर्ग का कितना भाग छायांकित (shaded) है?
हल: (यह प्रश्न पूर्णतः मूल पाठ्यपुस्तक की आकृति पर निर्भर करता है। द्वितीयक स्रोतों के अनुसार उत्तर 3/32 बताया गया है, परंतु बिना मूल आकृति देखे इसकी स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं — मूल पाठ्यपुस्तक की आकृति से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)

प्र. 23: एक चींटी-कॉलोनी शाखाओं पर बँटते हुए दो खाद्य स्रोतों तक पहुँचती है। प्रत्येक स्रोत तक पहुँचने वाला भिन्न भाग ज्ञात करें।
हल: (यह प्रश्न मूल पाठ्यपुस्तक की शाखा-आकृति पर निर्भर करता है। द्वितीयक स्रोतों के अनुसार: आम के पेड़ तक 29/32 भाग और गन्ने के खेत तक 3/32 भाग पहुँचता है — दोनों का योग 32/32=1 सही बैठता है, जो आंतरिक संगति दर्शाता है, फिर भी सटीक पुष्टि हेतु मूल आकृति देखने की सलाह दी जाती है।)

प्र. 24: (1−½)×(1−⅓)×(1−¼)×…×(1−1/n) का सामान्य प्रतिरूप ज्ञात करें।
हल: प्रत्येक पद को भिन्न रूप में लिखें: (½)×(⅔)×(¾)×…×((n−1)/n)। यह एक दूरबीन (telescoping) गुणनफल है, जिसमें प्रत्येक पद का अंश अगले पद के हर से कट जाता है — केवल पहला हर (2) और अंतिम अंश (n−1 का n) शेष रहते हैं, जिससे परिणाम सरल होकर 1/n रह जाता है। (उदाहरण: (1−½)(1−⅓)(1−¼) = ½×⅔×¾ = ¼ = 1/4, जो n=4 के लिए 1/n के अनुरूप है — सत्यापित)।

इस किताब के अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न, रिवीजन नोट्स और फॉर्मूला हैंडबुक भी देखें, या मूल किताब पेज पर वापस जाएँ।

Written by Satish

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