कक्षा 7 (हिंदी मीडियम) की विज्ञान पाठ्यपुस्तक जिज्ञासा (NCERT, NEP 2025-26 पाठ्यक्रम) के सभी 12 अध्यायों के पाठ्य-पुस्तक के भीतर के सभी प्रश्नों तथा अंतिम अभ्यास (“आइए अपने सीखने को बढ़ाएँ”) के सभी प्रश्नों के पूर्ण, बहु-स्रोत सत्यापित हल नीचे दिए गए हैं, साथ ही प्रमुख क्रियाकलापों के निष्कर्ष भी शामिल हैं। जिन कुछ प्रश्नों का उत्तर मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र/प्रयोग-आधारित अवलोकन पर निर्भर है, वहाँ स्पष्ट रूप से टिप्पणी दी गई है कि मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र/आरेख से मिलान करने की सलाह दी जाती है।
पाठों की सूची और मुख्य अवधारणा
- अध्याय 1: विज्ञान का निरंतर बढ़ता संसार
- अध्याय 2: पदार्थों का अन्वेषण — अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन
- अध्याय 3: विद्युत — परिपथ एवं उनके घटक
- अध्याय 4: धातुओं और अधातुओं का संसार
- अध्याय 5: हमारे आस-पास के परिवर्तन — भौतिक एवं रासायनिक
- अध्याय 6: किशोरावस्था — वृद्धि एवं परिवर्तन की अवस्था
- अध्याय 7: प्रकृति में ऊष्मा का स्थानांतरण
- अध्याय 8: समय एवं गति का मापन
- अध्याय 9: जंतुओं में जैव प्रक्रम
- अध्याय 10: पादपों में जैव प्रक्रम
- अध्याय 11: प्रकाश — छाया एवं परावर्तन
- अध्याय 12: पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य
अध्याय 1: विज्ञान का निरंतर बढ़ता संसार
अंतिम प्रश्नावली — सभी 23 प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: पाठ्य-पुस्तक के भीतर के प्रश्न (पृष्ठ 2)
प्र. 1: चीज़ें कैसे काम करती हैं?
हल: हमारे आस-पास की हर चीज़ ऊर्जा, बलों और सामग्रियों या प्रणालियों के बीच समन्वय से काम करती है। प्राकृतिक नियम जैसे गुरुत्वाकर्षण, बल और ऊर्जा का आदान-प्रदान हर क्रिया को संचालित करते हैं — जैसे घड़ी समय दिखाने के लिए चलती है, विद्युत बल्ब धारा प्रवाहित होने पर जलता है, और पौधे की जड़ें पानी सोखकर उसे बढ़ने में सहायता करती हैं। हमारा शरीर भी एक प्रणाली की तरह काम करता है, जिसमें हर अंग की विशेष भूमिका होती है।
प्र. 2: हमारे आस-पास जो घटनाएँ होती हैं, वे ऐसे ही क्यों होती हैं?
हल: घटनाएँ कारण और प्रभाव के मिश्रण के कारण होती हैं, जो भौतिक नियमों, मानवीय विकल्पों, संयोग और किसी दिए गए क्षण की परिस्थितियों से आकार लेती हैं। चाहे वे पूर्वानुमानित हों या यादृच्छिक, हर घटना पहले हुई घटनाओं की एक बड़ी श्रृंखला का हिस्सा होती है।
प्र. 3: प्रकृति में हम जो प्रतिरूप (पैटर्न) देखते हैं, उनसे हम क्या सीख सकते हैं?
हल: प्रकृति में मौजूद पैटर्न हमें यह समझने में मदद करते हैं कि चीज़ें कैसे काम करती हैं, बदलाव कैसे होते हैं, और भविष्य की घटनाओं का अनुमान कैसे लगाया जाए। उदाहरण के लिए, ऋतुओं का चक्र एक नियमित क्रम में आता है, जिससे हमें पता रहता है कि वसंत, ग्रीष्म, शरद और शीत ऋतु कब आएगी। पौधों की वृद्धि और जंतुओं का व्यवहार भी नियमित पैटर्न का पालन करते हैं।
प्र. 4: कुछ फल खट्टे क्यों होते हैं?
हल: कुछ फल खट्टे होते हैं क्योंकि उनमें साइट्रिक अम्ल जैसे प्राकृतिक अम्लों की मात्रा अधिक होती है। अम्लता का स्तर और फल के पकने की अवस्था यह तय करती है कि फल कितना खट्टा लगेगा — जैसे नींबू में अधिक साइट्रिक अम्ल होने से वह तीव्र खट्टा होता है, जबकि कच्चे आम जैसे फल पकने के साथ धीरे-धीरे मीठे होते जाते हैं।
प्र. 5: जब हम अपने विद्यालय के गणवेश पर लगे हल्दी के दाग को धोते हैं तो क्या होता है?
हल: साबुन क्षारीय (basic) प्रकृति का होता है, इसलिए वह हल्दी के दाग से अभिक्रिया करता है। इस अभिक्रिया के कारण दाग का रंग बदलकर लाल हो जाता है, जिससे उसे हटाना और भी मुश्किल हो जाता है।
खंड: क्रिया-कलाप 1.1 — “प्रश्न का उत्तर” (पृष्ठ 5-6)
प्र. 1: यदि मेरी कॉफी बहुत कड़क (तेज़) है तो मुझे क्या करना चाहिए?
हल: बस थोड़ा दूध मिला लें।
प्र. 2: मेरी बिल्ली को अपना भोजन चबाने में परेशानी क्यों हुई?
हल: क्योंकि बिल्ली के दाँत सीधे नहीं थे। (विद्यार्थी स्वयं भी इसी उत्तर के अनुरूप अतिरिक्त प्रश्न बना सकते हैं — यह क्रिया-कलाप विद्यार्थियों को किसी दिए गए उत्तर के लिए स्वयं उपयुक्त प्रश्न रचने का अभ्यास कराता है।)
प्र. 3: मुझे क्या करना चाहिए? मैं तुम्हारा बाथरोब लाना भूल गया।
हल: कोई बात नहीं, मेरे पास अपना तौलिया है।
प्र. 4: यदि एक डिब्बे में किताबों के 6 सेट हैं, और प्रत्येक सेट में 7 किताबें हैं, तो डिब्बे में कुल कितनी किताबें हैं?
हल: 6 × 7 = 42 किताबें।
खंड: अति-लघु उत्तरीय प्रश्न
प्र. 1: विज्ञान क्या है?
हल: विज्ञान एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें हम प्रश्न पूछते हैं, अवलोकन करते हैं और प्रयोगों के माध्यम से नई जानकारी प्राप्त करते हैं।
प्र. 2: हल्दी का दाग धोने पर क्यों नहीं जाता?
हल: क्योंकि हल्दी में रंग देने वाला पदार्थ (कुरकुमिन) साबुन के क्षारीय स्वभाव से अभिक्रिया करके एक स्थायी दाग छोड़ देता है।
प्र. 3: पौधे भोजन किस प्रक्रिया से बनाते हैं?
हल: पौधे प्रकाश-संश्लेषण (photosynthesis) प्रक्रिया से भोजन बनाते हैं।
प्र. 4: समय मापने के लिए सबसे पहला साधन क्या था?
हल: सूर्य की छाया (छाया घड़ी/सन-डायल)।
प्र. 5: टॉर्च की बैटरी कुछ समय बाद क्यों काम करना बंद कर देती है?
हल: क्योंकि उसमें संचित रासायनिक ऊर्जा धीरे-धीरे समाप्त हो जाती है।
प्र. 6: धातु और अधातु का वर्गीकरण किस आधार पर किया जाता है?
हल: उनके भौतिक और रासायनिक गुणधर्मों — जैसे कठोरता, विद्युत चालकता, चमक — के आधार पर।
प्र. 7: पृथ्वी पर दिन और रात किस कारण होते हैं?
हल: पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन करने के कारण।
प्र. 8: चंद्रमा की छाया से कौन-सी खगोलीय घटना होती है?
हल: सूर्य ग्रहण।
प्र. 9: प्रकाश का हमारे जीवन में क्या महत्व है?
हल: यह हमें वस्तुओं को देखने में और पौधों को प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन बनाने में सहायता करता है।
प्र. 10: भोजन से मिलने वाले पोषक तत्व शरीर के सभी भागों तक कैसे पहुँचते हैं?
हल: रक्त-परिसंचरण (रक्त के माध्यम से) द्वारा।
प्र. 11: अस्थायी और स्थायी परिवर्तन में क्या अंतर है?
हल: अस्थायी (भौतिक) परिवर्तनों को वापस पहले जैसी अवस्था में लाया जा सकता है, जबकि स्थायी (रासायनिक) परिवर्तनों को वापस नहीं लाया जा सकता।
प्र. 12: विज्ञान को समझने के लिए सबसे पहला कदम क्या है?
हल: प्रश्न पूछना (जिज्ञासा करना)।
प्र. 13: प्रयोग करने का मुख्य उद्देश्य क्या होता है?
हल: किसी विचार, अवलोकन या सिद्धांत की जाँच करके उसकी पुष्टि (या खंडन) करना।
प्र. 14: पृथ्वी पर जीवन के लिए सबसे आवश्यक ऊर्जा स्रोत कौन है?
हल: सूर्य।
खंड: लघु उत्तरीय प्रश्न
प्र. 1: विज्ञान को “निरंतर खोज की प्रक्रिया” क्यों कहा जाता है?
हल: क्योंकि विज्ञान केवल तथ्यों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह लगातार प्रश्न पूछकर, अवलोकन करके और प्रयोगों से नई जानकारियाँ खोजने की एक ऐसी प्रक्रिया है जो कभी रुकती नहीं — हर उत्तर नए प्रश्नों को जन्म देता है।
प्र. 2: धातुओं और अधातुओं में दो-दो गुण बताइए।
हल: धातु: (1) कठोर होती हैं, (2) विद्युत की सुचालक होती हैं। अधातु: (1) प्रायः नरम/भंगुर होती हैं, (2) विद्युत की कुचालक होती हैं।
प्र. 3: प्राचीन समय में लोग सूर्य की छाया से समय का अनुमान कैसे लगाते थे?
हल: प्राचीन समय में लोग किसी सीधी वस्तु (जैसे लाठी) की छाया की लंबाई और दिशा में सूर्य की स्थिति के अनुसार होने वाले बदलाव को देखकर दिन के समय (सुबह, दोपहर, शाम) का अनुमान लगाते थे — इसी सिद्धांत पर बाद में छाया-घड़ी (सन-डायल) बनी।
प्र. 4: अस्थायी और स्थायी परिवर्तन का एक-एक उदाहरण दीजिए।
हल: अस्थायी (भौतिक) परिवर्तन: बर्फ का पिघलकर पानी बनना (वापस बर्फ बनाया जा सकता है)। स्थायी (रासायनिक) परिवर्तन: लकड़ी का जलकर राख बनना (वापस लकड़ी नहीं बनाई जा सकती)।
प्र. 5: हमारे शरीर की वृद्धि के लिए भोजन और श्वसन क्यों आवश्यक हैं?
हल: भोजन से शरीर को पोषक तत्व मिलते हैं और श्वसन से ऑक्सीजन के माध्यम से ऊर्जा प्राप्त होती है। ये दोनों प्रक्रियाएँ मिलकर शरीर की वृद्धि, कोशिकाओं की मरम्मत और विकास में सहायक होती हैं।
प्र. 6: प्रकाश और छाया हमारे जीवन में किस प्रकार सहायक हैं?
हल: प्रकाश हमें वस्तुओं को देखने में मदद करता है और पौधों को भोजन बनाने में सहायक है। छाया समय बताने (प्राचीन छाया-घड़ी) और सूर्य/चंद्र ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाओं को समझने में सहायक रही है।
प्र. 7: पृथ्वी और चंद्रमा की गति का हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
हल: पृथ्वी का अपने अक्ष पर घूमना दिन-रात लाता है, जबकि सूर्य के चारों ओर उसकी परिक्रमा ऋतुओं में परिवर्तन लाती है। चंद्रमा की पृथ्वी के चारों ओर गति से ज्वार-भाटा और ग्रहण जैसी घटनाएँ होती हैं।
प्र. 8: जिज्ञासा विज्ञान सीखने में किस प्रकार सहायक है?
हल: जिज्ञासा हमें प्रश्न पूछने और उनके उत्तर खोजने के लिए प्रेरित करती है। इससे हम प्रयोग करते हैं, ध्यानपूर्वक अवलोकन करते हैं, और लगातार नए ज्ञान की खोज करते रहते हैं — यही वैज्ञानिक सोच की नींव है।
प्र. 9: बैटरी के “समाप्त हो जाने” को किस प्रकार का परिवर्तन माना जाता है और क्यों?
हल: यह मुख्यतः एक स्थायी (रासायनिक) परिवर्तन है, क्योंकि बैटरी के भीतर की रासायनिक अभिक्रिया द्वारा संचित ऊर्जा समाप्त हो जाने पर सामान्य (non-rechargeable) बैटरी को पुनः पहले जैसी अवस्था में नहीं लाया जा सकता।
प्र. 10: विज्ञान पढ़ते समय प्रश्न पूछना क्यों महत्वपूर्ण है?
हल: प्रश्न पूछने से हमारी सोच गहरी होती है, जिज्ञासा बढ़ती है, और हमें स्वयं उत्तर खोजने की प्रेरणा मिलती है। NCERT जिज्ञासा पाठ्यपुस्तक के अनुसार, महान वैज्ञानिक केवल सही उत्तर देने वाले नहीं थे, बल्कि साहसिक और रचनात्मक प्रश्न पूछने वाले थे — यही असली वैज्ञानिक प्रक्रिया है।
खंड: विस्तृत उत्तरीय प्रश्न
प्र. 1: विज्ञान को सीखने की प्रक्रिया के चरण समझाइए।
हल: विज्ञान सीखने की प्रक्रिया में मुख्यतः पाँच चरण होते हैं — (1) प्रश्न पूछना, (2) ध्यानपूर्वक अवलोकन करना, (3) प्रयोग/परीक्षण करना, (4) प्राप्त परिणामों से निष्कर्ष निकालना, और (5) निष्कर्ष की पुनः जाँच करना ताकि उसकी विश्वसनीयता सुनिश्चित हो सके। यह चक्र निरंतर चलता रहता है क्योंकि हर उत्तर नए प्रश्न को जन्म देता है।
प्र. 2: विज्ञान के चार प्रमुख क्षेत्र लिखिए और प्रत्येक का एक उदाहरण दीजिए।
हल: (1) भौतिक विज्ञान — बल और ऊर्जा का अध्ययन (जैसे गुरुत्वाकर्षण)। (2) रसायन विज्ञान — पदार्थों की संरचना और गुणों का अध्ययन (जैसे अम्ल-क्षार अभिक्रिया)। (3) जीव विज्ञान — पौधों और जंतुओं का अध्ययन (जैसे प्रकाश-संश्लेषण)। (4) पृथ्वी/भू-विज्ञान — पृथ्वी की संरचना और खगोलीय पिंडों का अध्ययन (जैसे पृथ्वी का घूर्णन)।
प्र. 3: ऊष्मा किन-किन विधियों से संचरित होती है? उदाहरण सहित समझाइए।
हल: ऊष्मा तीन विधियों से संचरित होती है — (1) चालन (Conduction): जैसे धातु की छड़ का एक सिरा गरम करने पर पूरी छड़ गरम हो जाना। (2) संवहन (Convection): जैसे बर्तन में पानी उबालने पर गरम पानी ऊपर और ठंडा पानी नीचे आना। (3) विकिरण (Radiation): जैसे बिना किसी माध्यम के सूर्य की ऊष्मा पृथ्वी तक पहुँचना।
प्र. 4: प्रकाश से हमें कौन-कौन से लाभ मिलते हैं? विस्तार से लिखिए।
हल: प्रकाश से मिलने वाले प्रमुख लाभ: (1) यह हमें अपने आस-पास की वस्तुओं को देखने में सहायता करता है। (2) पौधे प्रकाश की सहायता से प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं। (3) छाया के माध्यम से प्राचीन काल में समय बताने में सहायक था। (4) सूर्य और चंद्र ग्रहण जैसी खगोलीय घटनाओं को समझने में सहायक है। (5) खगोलशास्त्रियों को ब्रह्मांड की गहराई और दूर के पिंडों का अध्ययन करने में सहायक है।
प्र. 5: विज्ञान के अध्ययन से विद्यार्थियों को कौन-कौन सी जीवन-कौशल (life skills) प्राप्त होती हैं?
हल: विज्ञान के अध्ययन से मिलने वाले प्रमुख जीवन-कौशल: (1) तार्किक और आलोचनात्मक सोचने की क्षमता। (2) समस्याओं का व्यवस्थित ढंग से समाधान करने की क्षमता। (3) रचनात्मकता और नवाचार की भावना। (4) पर्यावरण और समाज के प्रति जिम्मेदारी की समझ। (5) एक जागरूक, जिज्ञासु नागरिक बनने की योग्यता, जो तकनीक, स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे विषयों को सही ढंग से समझ सके।
अध्याय 2: पदार्थों का अन्वेषण — अम्लीय, क्षारीय एवं उदासीन
अंतिम प्रश्नावली — सभी 26 प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: पाठ्य-पुस्तक के भीतर के प्रश्न
प्र. 1: लाल और नीले लिटमस पत्र किससे बने होते हैं? कुछ नमूनों की बूँदें डालने पर वे रंग क्यों बदलते हैं? (पृष्ठ 10)
हल: लाल और नीले लिटमस पत्र लाइकेन (lichen) से प्राप्त सत्व में कागज़ भिगोकर तैयार किए जाते हैं। ये पत्र अम्लीय या क्षारीय पदार्थों के संपर्क में आने पर रंग बदलते हैं — अम्ल नीले लिटमस पत्र को लाल कर देते हैं, जबकि क्षार लाल लिटमस पत्र को नीला कर देते हैं।
प्र. 2: क्या आपके आस-पास के पेड़ों पर लाइकेन दिखाई देते हैं? (पृष्ठ 10)
हल: हाँ, लाइकेन सामान्यतः पेड़ों पर उगते हैं, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ वायु स्वच्छ हो और पर्याप्त वर्षा होती हो।
प्र. 3: यदि लिटमस उपलब्ध न हो, तो क्या कोई अन्य प्राकृतिक पदार्थ अम्ल-क्षार सूचक के रूप में काम कर सकते हैं? (पृष्ठ 11)
हल: हाँ, कई प्राकृतिक पदार्थ अम्ल-क्षार सूचक का काम कर सकते हैं, जैसे लाल पत्तागोभी का रस, हल्दी, और गुलाब का सत्व। ये पदार्थ अम्लीय या क्षारीय पदार्थों के संपर्क में आने पर रंग बदलते हैं।
प्र. 4: क्या कुछ ऐसे पदार्थ हैं जिनकी गंध अम्लीय या क्षारीय पदार्थ मिलाने पर बदल जाती है? (पृष्ठ 16)
हल: हाँ, प्याज़ और वैनिला सत्व जैसे पदार्थों की गंध अम्लीय या क्षारीय पदार्थों के संपर्क में आने पर बदल जाती है। ऐसे सूचकों को गंध-सूचक (olfactory indicators) कहा जाता है।
प्र. 5: आपके क्षेत्र में चींटी के काटने पर लोग क्या उपचार करते हैं? (पृष्ठ 18)
हल: लोग सामान्यतः बेकिंग सोडा और पानी का लेप लगाकर या ठंडी सिकाई करके चींटी के काटने से होने वाले दर्द और सूजन को कम करते हैं (चींटी के डंक में अम्ल होता है, इसलिए क्षारीय बेकिंग सोडा उसे उदासीन कर देता है)।
प्र. 6: यदि फैक्ट्री का अपशिष्ट अम्लीय प्रकृति का है, तो झील की मछलियों को बचाने के लिए क्या किया जा सकता है? (पृष्ठ 19)
हल: झील की मछलियों को बचाने के लिए, पानी में छोड़े जाने से पहले अम्लीय अपशिष्ट में चूना (लाइम) जैसा क्षार मिलाकर उसे उदासीन किया जा सकता है, जिससे पानी जलीय जीवन के लिए सुरक्षित हो जाता है।
प्र. 7: क्या छिड़काव वाले तरल के लिए हल्दी का घोल और कागज़ पर लिखने के लिए साबुन का घोल उपयोग किया जा सकता है? (पृष्ठ 19)
हल: हाँ, हल्दी का घोल छिड़काव-सूचक के रूप में उपयोग किया जा सकता है क्योंकि यह क्षारीय घोल के संपर्क में आने पर पीले से लाल हो जाता है। साबुन का घोल, जो स्वयं क्षारीय होता है, कागज़ पर लिखने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
खंड: क्रिया-कलाप 2.1 — आइए जानें (पृष्ठ 8-9)
प्र.: नीले व लाल लिटमस पत्र से विभिन्न नमूनों की प्रकृति की जाँच कीजिए और समूह बनाइए।
हल: समूह A (अम्लीय — नीला लिटमस लाल करते हैं): नींबू रस, आँवला रस, इमली का पानी, सिरका, संतरे का रस। समूह B (क्षारीय — लाल लिटमस नीला करते हैं): साबुन घोल, बेकिंग सोडा घोल, चूने का पानी, वाशिंग पाउडर घोल। समूह C (उदासीन — कोई रंग परिवर्तन नहीं): नल का पानी, चीनी घोल, नमक घोल। निष्कर्ष: समूह A के पदार्थ अम्लीय, समूह B के क्षारीय और समूह C के उदासीन होते हैं।
खंड: क्रिया-कलाप 2.2 — आइए संबंध जोड़ें और खोजें (पृष्ठ 11)
प्र.: समूह A के खाद्य पदार्थों का खट्टा स्वाद किस अम्ल के कारण होता है?
हल: समूह A के सभी पदार्थ (नींबू, आँवला, इमली, सिरका, संतरा) खाद्य हैं और अम्लीय होने के कारण खट्टे होते हैं। इनमें पाए जाने वाले सामान्य अम्ल: नींबू — साइट्रिक अम्ल; दही — लैक्टिक अम्ल; इमली — टार्टरिक अम्ल; सिरका — ऐसीटिक अम्ल।
खंड: क्रिया-कलाप 2.4 — आइए पता लगाएँ (पृष्ठ 12-13, गुलाब सत्व से जाँच)
प्र.: गुलाब सत्व विभिन्न नमूनों के साथ मिलाने पर कौन-सा रंग दिखाता है?
हल: नींबू रस — लाल (अम्लीय); साबुन घोल — हरा (क्षारीय); आँवला रस — लाल (अम्लीय); बेकिंग सोडा घोल — हरा (क्षारीय); सिरका — लाल (अम्लीय)। निष्कर्ष: गुलाब सत्व अम्लीय घोल में लाल और क्षारीय घोल में हरा रंग देता है।
खंड: क्रिया-कलाप 2.5 — आइए तैयार करें (पृष्ठ 14-15, हल्दी पत्र से जाँच)
प्र.: हल्दी पत्र विभिन्न नमूनों के साथ कैसा व्यवहार करता है?
हल: नींबू रस — कोई परिवर्तन नहीं (पीला ही रहता है); साबुन घोल — लाल; आँवला रस — कोई परिवर्तन नहीं; बेकिंग सोडा घोल — लाल; चीनी घोल — कोई परिवर्तन नहीं। निष्कर्ष: हल्दी पत्र क्षारीय घोल में पीले से लाल हो जाता है, पर अम्लीय या उदासीन घोल में कोई परिवर्तन नहीं दिखाता।
खंड: आइए अपने सीखने को बढ़ाएँ (अंतिम अभ्यास प्रश्न)
प्र. 1: एक घोल लाल लिटमस पत्र को नीला कर देता है। निम्नलिखित में से किस घोल की अधिक मात्रा मिलाने से यह परिवर्तन उलट जाएगा? (i) चूने का पानी (ii) बेकिंग सोडा (iii) सिरका (iv) साधारण नमक का घोल
हल: (iii) सिरका। जब घोल लाल से नीला हो जाता है, तो वह क्षारीय है। इस परिवर्तन को उलटने के लिए अम्लीय पदार्थ चाहिए। चूने का पानी और बेकिंग सोडा स्वयं क्षारीय हैं, और नमक का घोल उदासीन है, अतः ये परिवर्तन नहीं उलट सकते। सिरका अम्लीय होने से घोल को वापस लाल कर देगा।
प्र. 2: A, B, C तीन अज्ञात घोल दिए गए हैं। A में लाल लिटमस डालने पर वह नीला हो जाता है। B में हल्दी घोल डालने पर वह लाल हो जाता है। C में लाल गुलाब सत्व डालने पर वह हरा हो जाता है। A, B, C की सही प्रकृति क्रम बताइए: (i) अम्लीय, अम्लीय, अम्लीय (ii) उदासीन, क्षारीय, क्षारीय (iii) क्षारीय, क्षारीय, अम्लीय (iv) क्षारीय, क्षारीय, क्षारीय
हल: (iv) A लाल लिटमस को नीला करता है ⇒ क्षारीय। B हल्दी को लाल करता है ⇒ क्षारीय। C गुलाब सत्व को हरा करता है ⇒ क्षारीय। अतः तीनों घोल क्षारीय हैं।
प्र. 3: चित्र 2.13, 2.14, 2.15 में लाल गुलाब सत्व पत्र का प्रयोग किया गया है। प्रत्येक पात्र में घोल की प्रकृति बताइए।
हल: गुलाब सत्व अम्लीय घोल में लाल और क्षारीय घोल में हरा रंग देता है। चित्र 2.13 में पत्र हरा हो जाता है ⇒ क्षारीय घोल। चित्र 2.14 में कोई रंग परिवर्तन नहीं ⇒ उदासीन घोल। चित्र 2.15 में पत्र लाल हो जाता है ⇒ अम्लीय घोल। (चित्र-आधारित प्रश्न — मूल पाठ्यपुस्तक के चित्रों से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
प्र. 4: प्रयोगशाला के एक द्रव नमूने की जाँच विभिन्न सूचकों से की गई: लाल लिटमस — कोई परिवर्तन नहीं; नीला लिटमस — लाल हो गया; हल्दी — कोई रंग परिवर्तन नहीं। नमूने की प्रकृति बताइए।
हल: दिया गया द्रव नमूना अम्लीय प्रकृति का है। यह लाल लिटमस में कोई परिवर्तन नहीं करता परंतु नीले लिटमस को लाल कर देता है, जो अम्लीयता दर्शाता है। साथ ही हल्दी सूचक में कोई परिवर्तन न होना भी अम्लीय या उदासीन प्रकृति की पुष्टि करता है (यहाँ लिटमस परीक्षण से अम्लीय पुष्टि होती है)।
प्र. 5: मान्या की आँखों पर पट्टी बँधी है। उसे दो अज्ञात घोल दिए गए हैं जिनकी अम्लीय या क्षारीय प्रकृति जाँचनी है। उसे किस सूचक का प्रयोग करना चाहिए और क्यों?
हल: मान्या को गंध-सूचक (olfactory indicator) का प्रयोग करना चाहिए, क्योंकि ये सूचक अम्लीय या क्षारीय परिस्थितियों में अपनी गंध बदल देते हैं — जैसे प्याज़ क्षारीय घोल में तेज़ गंध देता है और अम्लीय घोल में हल्की गंध।
प्र. 6: अध्याय के आरंभ में दिए गए सफेद कागज़ पर संदेश लिखने के लिए कौन-से पदार्थ उपयोग किए जा सकते हैं और स्प्रे बोतल में क्या हो सकता है? विभिन्न संयोजनों और प्राप्त रंगों की तालिका बनाइए।
हल: लिखने का पदार्थ → छिड़काव घोल → लिखावट का रंग: नींबू रस → नीला लिटमस घोल → लाल; बेकिंग सोडा घोल → लाल लिटमस घोल → नीला; बेकिंग सोडा घोल → गुलाब सत्व → हरा; सिरका → गुलाब सत्व → लाल; साबुन घोल → हल्दी घोल → लाल; आँवला रस → जामुन रस → गुलाबी; चूने का पानी → जामुन रस → बैंगनी; अंगूर रस → चुकंदर सत्व → लाल; वाशिंग पाउडर घोल → चुकंदर सत्व → नीला; इमली पानी → गुड़हल सत्व → गुलाबी; साबुन घोल → गुड़हल सत्व → हरा।
प्र. 7: अंगूर रस को लाल गुलाब सत्व में मिलाने पर मिश्रण हल्का लाल हो जाता है। इसमें बेकिंग सोडा मिलाने पर क्या होगा? कारण सहित बताइए।
हल: बेकिंग सोडा एक क्षार है, अतः इसे मिलाने पर मिश्रण की क्षारीयता बढ़ जाएगी। क्षारीय माध्यम में गुलाब सत्व हरा रंग दिखाता है, इसलिए बेकिंग सोडा मिलाने पर मिश्रण हरा हो जाएगा।
प्र. 8: कीर्ति ने अपनी दादी को जन्मदिन पर संतरे के रस से एक गुप्त संदेश लिखा। उसकी दादी संदेश को कैसे देख सकती हैं? किस सूचक का प्रयोग करना उपयुक्त होगा?
हल: संतरे का रस अम्लीय होता है, इसलिए दादी अम्ल-क्षार सूचक का प्रयोग कर संदेश उजागर कर सकती हैं — जैसे गुलाब सत्व या चुकंदर का रस (जो लाल हो जाएगा), या जामुन का सत्व (जो गुलाबी हो जाएगा)।
प्र. 9: प्राकृतिक सूचक कैसे तैयार किए जा सकते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
हल: प्राकृतिक सूचक ऐसे पादप पदार्थों से तैयार किए जाते हैं जिनमें ऐसे वर्णक (pigments) होते हैं जो अम्लीय या क्षारीय परिस्थितियों में रंग बदलते हैं। उदाहरणार्थ, लाल गुलाब सत्व बनाने की विधि: (1) ताज़ी गुलाब की पंखुड़ियाँ धोकर कुचल लें। (2) उन्हें गिलास में डालकर गरम पानी डालें। (3) 5–10 मिनट तक रखने के बाद छान लें। प्राप्त द्रव अम्लीय घोल में लाल और क्षारीय घोल में हरा हो जाता है।
प्र. 10: आपको तीन द्रव दिए गए हैं — सिरका, बेकिंग सोडा घोल और चीनी घोल। क्या आप केवल हल्दी पत्र से इन्हें पहचान सकते हैं? समझाइए।
हल: हल्दी पत्र केवल क्षारीय घोल की पहचान कर सकता है, यह अम्लीय और उदासीन घोल में भेद नहीं कर सकता। बेकिंग सोडा घोल (क्षारीय) की जाँच में हल्दी पत्र पीले से लाल हो जाएगा। जबकि सिरका (अम्लीय) और चीनी घोल (उदासीन) दोनों में कोई परिवर्तन नहीं होगा, पत्र पीला ही रहेगा — अतः इन दोनों में हल्दी पत्र से भेद नहीं किया जा सकता।
प्र. 11: लाल गुलाब सत्व द्रव X को हरा कर देता है। द्रव X की प्रकृति क्या होगी? इसमें अधिक मात्रा में आँवला रस मिलाने पर क्या होगा?
हल: द्रव X क्षारीय प्रकृति का है, क्योंकि गुलाब सत्व क्षारीय घोल में हरा हो जाता है। आँवला रस अम्लीय है — इसकी अधिक मात्रा मिलाने पर यह क्षार को उदासीन करता जाएगा और अंततः घोल अम्लीय हो जाएगा, जिससे हरा रंग वापस लाल हो जाएगा।
प्र. 12: दिए गए फ़्लो-चार्ट में लुप्त जानकारी पूर्ण कीजिए। (यह प्रश्न चित्र/फ़्लो-चार्ट आधारित है; मूल पाठ्यपुस्तक से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
हल: सामान्य सिद्धांत के अनुसार — अम्लीय पदार्थ नीले लिटमस को लाल करते हैं और हल्दी में कोई परिवर्तन नहीं करते; क्षारीय पदार्थ लाल लिटमस को नीला करते हैं और हल्दी को लाल करते हैं; उदासीन पदार्थ दोनों लिटमस पत्रों में कोई परिवर्तन नहीं करते।
अध्याय 3: विद्युत — परिपथ एवं उनके घटक
अंतिम प्रश्नावली — सभी 17 प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: पाठ्य-पुस्तक के भीतर के प्रश्न
प्र. 1: टॉर्च का बल्ब स्विच की एक ही स्थिति में क्यों जलता है? (पृष्ठ 24)
हल: जब स्विच “ON” स्थिति में होता है, तो विद्युत परिपथ पूर्ण (complete) हो जाता है और धारा बल्ब से होकर प्रवाहित होती है, जिससे वह जलता है। जब स्विच “OFF” स्थिति में होता है, परिपथ खुला (open) रह जाता है, धारा का प्रवाह रुक जाता है, इसलिए बल्ब नहीं जलता।
प्र. 2: टॉर्च में सामान्यतः एक से अधिक सेल प्रयोग होते हैं। क्या इन्हें किसी विशेष क्रम में रखा जाता है? (पृष्ठ 25)
हल: हाँ, टॉर्च के सेल सामान्यतः श्रेणीक्रम (series) में जोड़े जाते हैं — एक सेल का धन (+) सिरा दूसरे सेल के ওण (−) सिरे से जुड़ा होता है। इससे कुल वोल्टेज बढ़ जाती है, जो बल्ब को जलाने के लिए पर्याप्त शक्ति देती है।
प्र. 3: स्विच टॉर्च को कैसे ‘ON’ या ‘OFF’ करता है? (पृष्ठ 32)
हल: स्विच परिपथ में विद्युत धारा के प्रवाह को नियंत्रित करता है। “ON” स्थिति में परिपथ बंद हो जाता है, जिससे धारा बल्ब तक पहुँचकर उसे जलाती है। “OFF” स्थिति में परिपथ खुल जाता है, धारा का प्रवाह रुक जाता है और बल्ब बुझ जाता है।
प्र. 4: क्या हम परिपथ को सरल ढंग से निरूपित कर सकते हैं? (पृष्ठ 33)
हल: हाँ, विद्युत परिपथ और उनके घटकों को मानक प्रतीकों (symbols) द्वारा परिपथ आरेख में दर्शाया जाता है। उदाहरण के लिए, बैटरी को दो समांतर रेखाओं (एक लंबी, एक छोटी) से और बल्ब को अंदर ‘X’ चिह्न वाले वृत्त से दर्शाया जाता है।
प्र. 5: परिपथ बनाने में धातु के तार का ही उपयोग क्यों किया? क्या तार के लिए कोई अन्य पदार्थ प्रयोग नहीं किया जा सकता? (पृष्ठ 34)
हल: धातु के तार (सामान्यतः ताँबे के) प्रयोग किए जाते हैं क्योंकि धातुएं विद्युत की उत्तम सुचालक होती हैं और धारा को सरलता से प्रवाहित होने देती हैं। अन्य पदार्थ जैसे रबर और प्लास्टिक कुचालक (insulator) होते हैं, अतः वे विद्युत धारा प्रवाहित नहीं कर सकते।
प्र. 6: विद्युत तारों को प्लास्टिक या रबर से क्यों ढका जाता है? (पृष्ठ 34)
हल: विद्युत तारों को प्लास्टिक या रबर से ढका जाता है क्योंकि ये पदार्थ कुचालक होते हैं। यह आवरण धारा को बाहर रिसने से रोकता है, लोगों को विद्युत झटके से बचाता है, और तारों को आपस में छूने और लघु-परिपथ (short circuit) होने से भी रोकता है।
खंड: आइए अपने सीखने को बढ़ाएँ (अंतिम अभ्यास प्रश्न)
प्र. 1: गलत कथन चुनिए। (i) स्विच परिपथ में विद्युत धारा का स्रोत होता है। (ii) स्विच परिपथ को पूर्ण या भंग करने में मदद करता है। (iii) स्विच हमें आवश्यकतानुसार विद्युत उपयोग करने में मदद करता है। (iv) जब स्विच ‘OFF’ स्थिति में होता है, उसके सिरों के बीच वायु-अंतराल होता है।
हल: (i) “स्विच परिपथ में विद्युत धारा का स्रोत होता है” — यह कथन गलत है, क्योंकि विद्युत धारा का स्रोत सेल/बैटरी होती है, स्विच नहीं।
प्र. 2: चित्र 3.16 में, बिंदु A और B के बीच कौन-सा पदार्थ जोड़ने पर बल्ब नहीं जलेगा?
हल: बल्ब को न जलाने के लिए A और B के बीच रबर या प्लास्टिक जैसा कुचालक पदार्थ जोड़ना होगा। इससे परिपथ टूट जाएगा और विद्युत धारा का प्रवाह रुक जाएगा। (यह प्रश्न मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र 3.16 पर आधारित है; चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
प्र. 3: चित्र 3.17 में यदि किसी एक बल्ब का फिलामेंट टूट जाए, तो क्या दूसरा बल्ब जलेगा? कारण सहित बताइए।
हल: नहीं। चित्र में बल्ब एक के बाद एक (श्रेणीक्रम) में जुड़े हैं। श्रेणी परिपथ में धारा को प्रत्येक घटक से क्रमवार गुज़रना होता है — यदि किसी एक बल्ब का फिलामेंट टूट जाए, तो परिपथ अपूर्ण हो जाता है और धारा शेष भाग में प्रवाहित नहीं हो पाती, इसलिए दूसरा बल्ब भी नहीं जलेगा।
प्र. 4: एक विद्यार्थी परिपथ बनाते समय जोड़ने वाले तारों पर लगा कुचालक आवरण हटाना भूल गया। यदि बल्ब और सेल ठीक हों, तो क्या बल्ब जलेगा?
हल: नहीं, बल्ब नहीं जलेगा। तारों पर लगा कुचालक आवरण विद्युत धारा के प्रवाह को रोक देता है। धारा आवरण वाले भाग से नहीं गुज़ सकती, इसलिए परिपथ अपूर्ण रहता है और बल्ब नहीं जलता।
प्र. 5: विद्युत घटकों के प्रतीकों का प्रयोग करते हुए एक साधारण टॉर्च का परिपथ आरेख बनाइए।
हल: परिपथ आरेख में एक सेल (लंबी-छोटी समांतर रेखा से), एक बल्ब (अंदर ‘X’ वाला वृत्त), एक स्विच, और तारों को एक बंद लूप में जोड़कर दर्शाया जाता है, जिससे सेल से चलकर धारा स्विच और बल्ब से होते हुए वापस सेल तक पहुँचे। (यह प्रश्न आरेख बनाने पर आधारित है; मूल पाठ्यपुस्तक में दिए प्रतीकों से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
प्र. 6: दिए गए परिपथ में दो स्विच S1 व S2 और दो बल्ब L1 व L2 हैं। (i) यदि S2 ‘ON’ और S1 ‘OFF’ हो तो कौन-सा बल्ब जलेगा? (ii) यदि S2 ‘OFF’ और S1 ‘ON’ हो? (iii) यदि दोनों ‘ON’ हों? (iv) यदि दोनों ‘OFF’ हों?
हल: (i) S2 ‘ON’, S1 ‘OFF’: बल्ब L2 जलेगा। (ii) S2 ‘OFF’, S1 ‘ON’: बल्ब L1 जलेगा। (iii) दोनों ‘ON’: दोनों बल्ब (L1 और L2) जलेंगे। (iv) दोनों ‘OFF’: कोई भी बल्ब नहीं जलेगा।
प्र. 7: विद्युत ने चित्र 3.19 जैसा परिपथ बनाया। परिपथ बंद करने पर भी बल्ब नहीं जलता। संभावित कारण बताइए और यह पता लगाने का तरीका बताइए कि बल्ब क्यों नहीं जल रहा।
हल: संभावित कारण: (क) ढीले संयोजन — जाँचें कि सभी तार बैटरी, बल्ब और स्विच से मज़बूती से जुड़े हों। (ख) फ्यूज़ बल्ब — बल्ब बदलकर देखें कि पुराना बल्ब खराब तो नहीं था। (ग) डिस्चार्ज बैटरी — मल्टीमीटर से जाँचें कि बैटरी शक्ति दे रही है या नहीं। (घ) खराब स्विच — स्विच को बाईपास कर तारों को सीधे जोड़कर देखें कि बल्ब जलता है या नहीं।
प्र. 8: चित्र 3.20 में किस स्थिति/स्थितियों में स्विच बंद करने पर बल्ब नहीं जलेगा?
हल: स्थिति (a): बल्ब जलेगा। स्थिति (b): बल्ब नहीं जलेगा (परिपथ अपूर्ण)। स्थिति (c): यदि बैटरी उलटी जुड़ी हो तो बल्ब नहीं जल सकता (LED के मामले में)। स्थिति (d): बल्ब जलेंगे। (यह प्रश्न चित्र 3.20 पर आधारित है; मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
प्र. 9: यदि बैटरी पर ‘+’ और ‘−’ चिह्न पढ़े न जा सकें, तो उसके दोनों सिरों को पहचानने की एक विधि सुझाइए।
हल: बैटरी को बल्ब से जोड़कर एक साधारण परिपथ बनाएं — यदि संयोजन सही है तो बल्ब तेज़ चमकेगा। इसके अतिरिक्त, बैटरी की बनावट से भी पहचान होती है: सामान्यतः चपटा सिरा ওण (−) टर्मिनल होता है, जबकि उभरा हुआ सिरा धन (+) टर्मिनल होता है।
प्र. 10: आपको A, B, C, D, E, F नामक छह सेल दिए गए हैं। इनमें से कुछ चालू हैं और कुछ खराब। यह पहचानने के लिए एक क्रियाकलाप डिज़ाइन कीजिए। (i) आवश्यक वस्तुएं, (ii) प्रक्रिया, (iii) क्रियाकलाप करके चालू सेल पहचानिए।
हल: (i) आवश्यक वस्तुएं: बल्ब, संयोजक तार, छहों सेल (A–F)। (ii) प्रक्रिया: बल्ब को एक-एक सेल से बारी-बारी जोड़ें और देखें कि वह जलता है या नहीं; यदि बल्ब जले तो सेल ठीक है। (iii) प्रत्येक सेल A से F तक इसी तरह जाँचें — जिन सेलों से बल्ब जले वे चालू हैं, शेष खराब हैं।
प्र. 11: एक LED को जलने के लिए श्रेणीक्रम में दो सेल चाहिए। तान्या ने चित्र 3.21 जैसा परिपथ बनाया। क्या बल्ब जलेगा? यदि नहीं, तो सही संयोजन के लिए तार खींचिए।
हल: LED तभी जलता है जब उसका लंबा तार (धन टर्मिनल) बैटरी के धन टर्मिनल से और छोटा तार (ওण टर्मिनल) बैटरी के ওण टर्मिनल से जुड़ा हो। दिए गए संयोजन में LED का ওण टर्मिनल बैटरी के धन टर्मिनल से जुड़ा है, अतः LED नहीं जलेगा। सही संयोजन में LED के लंबे तार को बैटरी के धन सिरे से जोड़ना होगा। (चित्र 3.21 पर आधारित प्रश्न; मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
खंड: प्रमुख क्रियाकलाप — निष्कर्ष (Activities 3.1–3.11)
क्रियाकलाप 3.1 — आइए जानें (पृष्ठ 24): टॉर्च स्विच ऑन करने पर जलती है क्योंकि भीतर के सेल बल्ब को ऊर्जा देते हैं; स्विच ऑफ़ करने पर परिपथ टूट जाता है और बल्ब नहीं जलता — यह सिद्ध करता है कि विद्युत धारा तभी प्रवाहित होती है जब परिपथ पूर्ण हो।
क्रियाकलाप 3.2 — आइए देखें (पृष्ठ 25): विद्युत सेल के दो टर्मिनल होते हैं — धातु टोपी वाला धन टर्मिनल और धातु डिस्क वाला ওण टर्मिनल। सेल एक पोर्टेबल विद्युत ओर्जा स्रोत है।
क्रियाकलाप 3.3 — आइए प्रयोग करें (पृष्ठ 25): टॉर्च तभी जलती है जब सेल सही क्रम में लगाए जाएं — एक सेल का धन सिरा दूसरे के ওण सिरे से मिले। यह सही व्यवस्था बैटरी बनाती है, जो धारा प्रवाह संभव करती है।
क्रियाकलाप 3.4 — आइए देखें (पृष्ठ 26): प्रकाशमान (incandescent) बल्ब का जलने वाला भाग फिलामेंट नामक पतला तार होता है, जो धारा प्रवाहित होने पर अत्यधिक गरम होकर प्रकाश देता है।
क्रियाकलाप 3.5 — आइए देखें (पृष्ठ 27): LED में फिलामेंट नहीं होता; इसके दो टर्मिनल होते हैं — लंबा तार (धन) और छोटा तार (ওण)। LED तभी जलता है जब इसे बैटरी से सही ढंग से जोड़ा जाए।
क्रियाकलाप 3.7 — आइए प्रयोग करें (पृष्ठ 30-31): LED तभी जलता है जब लंबा तार बैटरी के धन टर्मिनल से और छोटा तार ওण टर्मिनल से जुड़ा हो — यह सिद्ध करता है कि LED में धारा केवल एक दिशा में प्रवाहित होती है।
क्रियाकलाप 3.8 व 3.9 — आइए परीक्षण करें (पृष्ठ 32): सेफ्टी पिन और ड्राइंग पिन से कार्डबोर्ड पर एक साधारण स्विच बनाया जा सकता है, जो परिपथ को खोलने-बंद करने का कार्य करता है।
क्रियाकलाप 3.10 — आइए बनाएँ (पृष्ठ 34): मानक प्रतीकों की सहायता से परिपथ आरेख आसानी से बनाया जा सकता है।
क्रियाकलाप 3.11 — आइए पहचानें (पृष्ठ 35), तालिका 3.3 — सुचालक व कुचालक की पहचान: छड़ (लकड़ी) — कुचालक; स्केल (प्लास्टिक) — कुचालक; चूड़ी (काँच) — कुचालक; कागज़ पट्टी — कुचालक; मोमबत्ती (मोम) — कुचालक; चाबी (धातु) — सुचालक; रबर — कुचालक; पेपरक्लिप (धातु) — सुचालक; ताँबे का तार — सुचालक; एल्युमिनियम फॉइल — सुचालक; रबर बैंड — कुचालक; काँच का जार — कुचालक। निष्कर्ष: सुचालक विद्युत धारा प्रवाहित होने देते हैं (बल्ब जलता है), कुचालक धारा को रोकते हैं (बल्ब नहीं जलता)।
अध्याय 4: धातुओं और अधातुओं का संसार
अंतिम प्रश्नावली — सभी 15 प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: पाठ्य-पुस्तक के भीतर के प्रश्न
प्र. 1: धातु की चादरों (sheets) के कुछ उदाहरण दीजिए। (पृष्ठ 43)
हल: धातु की चादरों के उदाहरण: चाँदी की पन्नी (silver foil) और एल्युमिनियम की पन्नी (aluminium foil)।
प्र. 2: खाना पकाने के बर्तन बनाने में किन धातुओं का उपयोग होता है? (पृष्ठ 46)
हल: एल्युमिनियम, ताँबा (कॉपर), और स्टेनलेस स्टील जैसी धातुओं का उपयोग बड़े पैमाने पर खाना पकाने के बर्तन बनाने में किया जाता है।
प्र. 3: क्या आपने किसी इलेक्ट्रीशियन को पेचकस (स्क्रूड्राइवर) का प्रयोग करते देखा है? उसकी पकड़ (हैंडल) किस पदार्थ की बनी होती है? (पृष्ठ 47)
हल: हाँ। पेचकस का हैंडल सामान्यतः प्लास्टिक या रबर का बना होता है (क्योंकि ये कुचालक हैं और विद्युत झटके से बचाते हैं)।
खंड: आइए अपने सीखने को बढ़ाएँ (अंतिम अभ्यास प्रश्न)
प्र. 1: खाद्य पैकेजिंग सामग्री बनाने में सामान्यतः किस धातु का प्रयोग होता है, क्योंकि यह सस्ती है और इसकी पतली चादरें आसानी से किसी भी आकार में मोड़ी जा सकती हैं? (i) एल्युमिनियम (ii) ताँबा (iii) लोहा (iv) सोना
हल: (i) एल्युमिनिम।
प्र. 2: निम्नलिखित में से कौन-सी धातु पानी के संपर्क में आने पर आग पकड़ लेती है? (i) ताँबा (ii) एल्युमिनियम (iii) जस्ता (iv) सोडियम
हल: (iv) सोडियम — सोडियम अत्यंत क्रियाशील धातु है और पानी के संपर्क में आते ही तीव्र अभिक्रिया करके आग पकड़ सकती है।
प्र. 3: बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य [T] हैं या असत्य [F], कारण सहित: (i) एल्युमिनियम और ताँबा बर्तन व मूर्तियाँ बनाने में प्रयुक्त अधातुओं के उदाहरण हैं। (ii) धातुएँ ऑक्सीजन के साथ मिलकर ऑक्साइड बनाती हैं, जिनका घोल नीले लिटमस को लाल कर देता है। (iii) ऑक्सीजन एक अधातु है जो श्वसन के लिए आवश्यक है। (iv) ताँबे के बर्तन पानी उबालने में इसलिए प्रयोग होते हैं क्योंकि वे विद्युत के अच्छे सुचालक हैं।
हल: (i) [F] — एल्युमिनियम और ताँबा अधातु नहीं, बल्कि धातुएं हैं। (ii) [F] — धात्विक ऑक्साइड क्षारीय प्रकृति के होते हैं और लाल लिटमस को नीला करते हैं, नीले को लाल नहीं। (iii) [T] — ऑक्सीजन अधातु है और श्वसन के लिए आवश्यक है। (iv) [F] — ताँबे के बर्तन पानी उबालने में इसलिए प्रयोग होते हैं क्योंकि ताँबा ऊष्मा का अच्छा सुचालक है (विद्युत चालकता के कारण नहीं)।
प्र. 4: गहने बनाने के लिए केवल कुछ ही धातुएं उपयुक्त क्यों होती हैं?
हल: गहने बनाने के लिए केवल कुछ धातुएं (जैसे सोना, चाँदी) प्रयोग होती हैं क्योंकि वे चमकदार होती हैं, अधिक कठोर न होने के कारण आसानी से विभिन्न आकृतियों में ढाली जा सकती हैं, और वायु व जल के साथ अभिक्रिया न करने के कारण लंबे समय तक अपनी चमक बनाए रखती हैं (जंग/धूमिल नहीं होतीं)।
प्र. 5: स्तंभ I के उपयोगों को स्तंभ II में दिए गए धातु/अधातु के उलझे हुए (jumbled) नामों से मिलाइए। (i) विद्युत तारों में प्रयुक्त — (ii) सबसे अधिक आघातवर्ध्य व तन्य — (iii) जिसके बिना जीव जीवित नहीं रह सकते — (iv) मिट्टी में मिलाने से पौधे स्वस्थ होते हैं — (v) जल शोधन में प्रयुक्त
हल: (i) विद्युत तारों में प्रयुक्त → PEPORC (COPPER/ताँबा)। (ii) सबसे अधिक आघातवर्ध्य व तन्य → OGDL (GOLD/सोना)। (iii) जीवों के लिए आवश्यक → ENXYGO (OXYGEN/ऑक्सीजन)। (iv) मिट्टी में मिलाने से पौधे स्वस्थ होते हैं → TENGOINR (NITROGEN/नाइट्रोजन)। (v) जल शोधन में प्रयुक्त → NECOHIRL (CHLORINE/क्लोरीन)।
प्र. 6: ऑक्सीजन, मैग्नीशियम और सल्फर के साथ अभिक्रिया करने पर क्या होता है? बने उत्पादों की प्रकृति में मुख्य अंतर बताइए।
हल: जब मैग्नीशियम ऑक्सीजन से अभिक्रिया करता है, तो मैग्नीशियम ऑक्साइड बनता है, जो क्षारीय ऑक्साइड है और लाल लिटमस को नीला कर देता है। इसके विपरीत, जब सल्फर ऑक्सीजन से मिलता है, तो सल्फर डाइऑक्साइड बनता है, जो एक अम्लीय ऑक्साइड है और नीले लिटमस को लाल कर देता है। इस प्रकार धातु ऑक्साइड क्षारीय और अधातु ऑक्साइड अम्लीय होते हैं।
प्र. 7: दिए गए फ़्लो-चार्ट को पूर्ण कीजिए। (यह प्रश्न मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र/फ़्लो-चार्ट पर आधारित है; मिलान की सलाह दी जाती है।)
हल: सामान्य सिद्धांत: धातु + ऑक्सीजन → धात्विक ऑक्साइड (क्षारीय) → लाल लिटमस को नीला करता है। अधातु + ऑक्सीजन → अधात्विक ऑक्साइड (अम्लीय) → नीले लिटमस को लाल करता है।
प्र. 8: दिए गए पदार्थों में से पानी उबालने के लिए सबसे उपयुक्त पात्र (पैन) बनाने हेतु कौन-सा पदार्थ चुनेंगे और क्यों?
हल: पानी उबालने के लिए पात्र ऐसे पदार्थ का बना होना चाहिए जो ऊष्मा का कुशल सुचालक हो। दिए गए विकल्पों में लोहा और ताँबा दोनों धातु ऊष्मा के अच्छे सुचालक हैं, परंतु ताँबा जंग के प्रति अधिक प्रतिरोधी होने के कारण बेहतर विकल्प है। अतः ताँबे का पैन पानी उबालने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त है।
प्र. 9: आपको तेल, पानी और सिरके में डुबोई गई तीन लोहे की कीलें दी गई हैं। कौन-सी कील में जंग नहीं लगेगी, और क्यों?
हल: तेल में डुबोई गई कील में जंग नहीं लगेगी, क्योंकि तेल धातु की सतह पर एक सुरक्षा परत बना देता है। यह परत वायु और नमी को लोहे की सतह तक पहुँचने से रोकती है, जिससे जंग लगने की प्रक्रिया रुक जाती है।
प्र. 10: धातुओं और अधातुओं के भिन्न-भिन्न गुण दैनिक जीवन में उनके उपयोग कैसे तय करते हैं?
हल: धातुएं: आघातवर्ध्य (पीटकर पतली चादर बनाई जा सकती है) — जैसे एल्युमिनियम की पन्नी भोजन लपेटने में; तन्य (पतले तार में खींची जा सकती हैं) — जैसे ताँबा व एल्युमिनियम विद्युत तारों में; टंकार गुण (sonority) — धातुएँ टकराने पर घंटी जैसी आवाज़ करती हैं; ऊष्मा की सुचालक — इसलिए खाना पकाने के बर्तनों में प्रयुक्त; विद्युत की सुचालक — विद्युत अनुप्रयोगों में उपयोगी। अधातुएँ: प्रायः ऊष्मा व विद्युत की कुचालक — जैसे सल्फर व कार्बन कुचालक के रूप में प्रयुक्त; भंगुर — जैसे सल्फर व फॉस्फोरस आसानी से टूट जाते हैं और क्रियाशील होने के कारण माचिस की तीली में प्रयुक्त; कई अधातुएँ कमरे के तापमान पर गैस के रूप में मिलती हैं — जैसे ऑक्सीजन, जो श्वसन के लिए आवश्यक है; सामान्यतः चमकरहित — जैसे ग्रेफाइट (कार्बन का रूप) चमकरहित होते हुए भी पेंसिल व शुष्क सेल बैटरी में प्रयुक्त होता है।
प्र. 11: लोहे को जंग से बचाने की एक विधि उस पर जस्ते (जिंक) की पतली परत चढ़ाना है। चूँकि सल्फर पानी से अभिक्रिया नहीं करता, क्या इसे इस उद्देश्य के लिए प्रयोग किया जा सकता है? कारण सहित बताइए।
हल: नहीं, सल्फर को इस उद्देश्य के लिए प्रयोग नहीं किया जा सकता। यद्यपि सल्फर पानी से अभिक्रिया नहीं करता, परंतु यह जस्ते की तरह लोहे पर कोई सुरक्षात्मक परत नहीं बनाता। परिणामस्वरूप, सल्फर वायु और नमी को लोहे की सतह तक पहुँचने से नहीं रोक पाता, इसलिए यह जंग को नहीं रोक सकता।
प्र. 12: एक लुहार ओज़ार बनाने से पहले लोहे को गरम करता है। इस प्रक्रिया में गरम करना आवश्यक क्यों है?
हल: ओज़ार बनाने के लिए लुहार पहले लोहे के टुकड़े को लाल-तप्त होने तक गरम करता है। गरम करने से लोहा नरम हो जाता है, जिससे वह अधिक आघातवर्ध्य बन जाता है और उसे मोड़ना, पीटना और वांछित आकार देना आसान हो जाता है।
खंड: प्रमुख क्रियाकलाप — निष्कर्ष (Activities 4.1–4.8)
क्रियाकलाप 4.1 (पृष्ठ 42-43), तालिका 4.1 — चमक, कठोरता व हथौड़े के प्रभाव की जाँच: ताँबा, एल्युमिनियम, लोहे की कील — चमकदार, कठोर, हथौड़े से पीटने पर चपटी हो जाती हैं (आघातवर्ध्य)। कोयला, सल्फर — चमकरहित, नरम, टुकड़ों में टूट जाते हैं (भंगुर)। लकड़ी — न तो चपटी होती है न टूटती है। निष्कर्ष: धातुएँ चमकदार, कठोर व आघातवर्ध्य होती हैं; कोयला व सल्फर जैसी अधातुएँ चमकरहित, नरम व भंगुर होती हैं।
क्रियाकलाप 4.2 (पृष्ठ 45-46) — टंकार गुण की जाँच: धातु का चम्मच व सिक्का टकराने पर घंटी जैसी आवाज़ (टंकार) देते हैं, जबकि कोयला व लकड़ी धीमी/भोथी आवाज़ देते हैं। निष्कर्ष: धातुएँ टंकारी (sonorous) होती हैं।
क्रियाकलाप 4.3 (पृष्ठ 46-47) — ऊष्मा चालकता की जाँच: धातु का चम्मच लकड़ी के चम्मच से अधिक गरम महसूस होता है। निष्कर्ष: धातुएँ ऊष्मा की अच्छी सुचालक हैं, लकड़ी कुचालक है।
क्रियाकलाप 4.4 (पृष्ठ 47-48), तालिका 4.2 — विद्युत चालकता की जाँच: एल्युमिनियम फॉइल, लोहे की कील, ताँबे का तार — बल्ब जलता है (सुचालक)। सल्फर, कोयला, सूखी लकड़ी, पत्थर — बल्ब नहीं जलता (कुचालक)। निष्कर्ष: धातुएँ विद्युत की सुचालक हैं; सल्फर, कोयला जैसी अधातुएँ कुचालक हैं।
क्रियाकलाप 4.5 (पृष्ठ 49-50), तालिका 4.3 — जंग पर वायु व जल का प्रभाव: केवल वायु (जल नहीं) — जंग नहीं लगी। केवल जल (वायु नहीं) — जंग नहीं लगी। वायु और जल दोनों — भूरे रंग का जमा हुआ। निष्कर्ष: जंग के लिए वायु और जल दोनों की उपस्थिति आवश्यक है।
क्रियाकलाप 4.6 (पृष्ठ 51) — मैग्नीशियम का दहन: मैग्नीशियम रिबन जलाने पर तेज़ सफेद ज्वाला और सफेद चूर्ण (राख) बनता है; प्राप्त घोल लाल लिटमस को नीला कर देता है। निष्कर्ष: मैग्नीशियम, ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर मैग्नीशियम ऑक्साइड बनाता है, जो क्षारीय है — अर्थात धातु ऑक्साइड सामान्यतः क्षारीय होते हैं।
क्रियाकलाप 4.7 (पृष्ठ 52-53) — सल्फर का दहन: काँच के जार में पानी मिलाने पर प्राप्त घोल नीले लिटमस को लाल कर देता है। निष्कर्ष: सल्फर, ऑक्सीजन से जलकर सल्फर डाइऑक्साइड बनाता है, जो पानी में घुलकर सल्फ्यूरस अम्ल बनाता है — अर्थात अधातु ऑक्साइड अम्लीय प्रकृति के होते हैं।
क्रियाकलाप 4.8 (पृष्ठ 53) — सल्फर व जल: सल्फर को पानी में डालने पर कोई अभिक्रिया नहीं होती। निष्कर्ष: सल्फर पानी से अभिक्रिया नहीं करता।
अध्याय 5: हमारे आस-पास के परिवर्तन — भौतिक एवं रासायनिक
अंतिम प्रश्नावली — सभी 11 प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: पाठ्य-पुस्तक के भीतर के प्रश्न (पृष्ठ 57)
प्र. 1: कुछ विद्यार्थी कुछ परिवर्तनों का वर्णन कर रहे हैं। वे किस प्रकार के परिवर्तनों की बात कर रहे हैं?
हल: बर्फ का पिघलकर पानी बनना — यह भौतिक परिवर्तन है क्योंकि केवल पानी की अवस्था ठोस से द्रव में बदलती है, पदार्थ वही रहता है। कली का खिलकर फूल बनना — यह रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि यह वापस कली की अवस्था में नहीं लौट सकता और इसमें आंतरिक रासायनिक परिवर्तन होते हैं। ठंडे पानी का खुले में रखने पर गरम हो जाना — यह भौतिक परिवर्तन है क्योंकि पानी स्वयं अपरिवर्तित रहता है, केवल उसका तापमान बढ़ता है। केले का सड़ना (गलना) — यह रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि इसकी संरचना और बनावट स्थायी रूप से बदल जाती है।
खंड: आइए अपने सीखने को बढ़ाएँ (अंतिम अभ्यास प्रश्न)
प्र. 1: निम्नलिखित में से कौन-से कथन भौतिक परिवर्तन की विशेषताएं हैं? (i) पदार्थ की अवस्था बदल भी सकती है और नहीं भी। (ii) भिन्न गुणों वाला पदार्थ बनता है। (iii) कोई नया पदार्थ नहीं बनता। (iv) पदार्थ रासायनिक अभिक्रिया से गुज़रता है। (a) (i) व (ii) (b) (ii) व (iii) (c) (i) व (iii) (d) (iii) व (iv)
हल: (c) (i) व (iii)। भौतिक परिवर्तन में पदार्थ की अवस्था बदल भी सकती है (जैसे पिघलना), पर कोई नया पदार्थ नहीं बनता — पदार्थ वही रहता है, केवल उसका रूप या अवस्था बदलती है।
प्र. 2: बताइए कि निम्नलिखित परिवर्तन प्रतिवर्ती (reversible) हैं या अप्रतिवर्ती (irreversible), और अनिश्चित होने पर कारण भी बताइए: (i) कपड़े को सिलकर शर्ट बनाना, (ii) सीधी डोरी को एंठना, (iii) घोल से इडली बनाना, (iv) चीनी को पानी में घोलना, (v) कुएँ से पानी निकालना, (vi) फलों का पकना, (vii) खुले पात्र में पानी उबालना, (viii) चटाई को लपेटना, (ix) गेहूं को पीसकर आटा बनाना, (x) चट्टानों से मिट्टी बनना।
हल: (i) कपड़े को सिलना — अप्रतिवर्ती (सिलाई खोलने पर कपड़ा क्षतिग्रस्त हो सकता है)। (ii) डोरी को एंठना — प्रतिवर्ती (डोरी को वापस खोला जा सकता है)। (iii) इडली बनाना — अप्रतिवर्ती (भाप में पकने के बाद घोल पहले जैसा नहीं हो सकता)। (iv) चीनी घोलना — प्रतिवर्ती (पानी वाषित करने पर चीनी वापस मिल सकती है)। (v) कुएँ से पानी निकालना — प्रतिवर्ती (पानी वापस कुएँ में डाला जा सकता है)। (vi) फलों का पकना — अप्रतिवर्ती (पका फल वापस कच्चा नहीं हो सकता)। (vii) पानी उबालना — प्रतिवर्ती (वाष्प संघनित होकर वापस पानी बन सकती है)। (viii) चटाई लपेटना — प्रतिवर्ती (आसानी से वापस खोली जा सकती है)। (ix) गेहूं पीसना — अप्रतिवर्ती (आटा वापस साबुत दानों में नहीं बदल सकता)। (x) चट्टानों से मिट्टी बनना — अप्रतिवर्ती (यह लंबी अवधि में बनती है और वापस चट्टान नहीं बन सकती)।
प्र. 3: बताइए निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य; असत्य होने पर सही कथन लिखिए: 1. मोमबत्ती जलाने के लिए मोम का पिघलना आवश्यक है। 2. जलवाष्प को संघनित कर एकत्रित करना रासायनिक परिवर्तन है। 3. पत्तियों को खाद में बदलने की प्रक्रिया रासायनिक परिवर्तन है। 4. बेकिंग सोडा को नींबू रस में मिलाना रासायनिक परिवर्तन है।
हल: 1. सत्य। 2. असत्य — सही कथन: जलवाष्प को संघनित करके एकत्रित करना एक भौतिक परिवर्तन है। 3. सत्य। 4. सत्य।
प्र. 4: निम्नलिखित रिक्त स्थान भरिए: (i) नलिनी ने देखा कि उसकी साइकिल के हैंडल पर भूरे रंग के निशान बन गए हैं। ये भूरे निशान ______ के कारण हैं और यह एक ______ परिवर्तन है। (ii) रूमाल मोड़ना ______ परिवर्तन है और इसे ______ किया जा सकता है। (iii) वह रासायनिक प्रक्रिया जिसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन से अभिक्रिया कर ऊष्मा मुक्ت करता है, ______ कहलाती है, और यह एक ______ परिवर्तन है। (iv) मैग्नीशियम को वायु में जलाने पर ______ नामक पदार्थ बनता है। यह पदार्थ प्रकृति में ______ है। मैग्नीशियम का जलना एक ______ परिवर्तन है।
हल: (i) जंग, रासायनिक। (ii) भौतिक, वापस उलटा (reversed)। (iii) दहन (combustion), रासायनिक। (iv) मैग्नीशियम ऑक्साइड, क्षारीय, रासायनिक।
प्र. 5: पानी का बर्फ में और पानी का भाप में बदलना — भौतिक है या रासायनिक? स्पष्ट कीजिए।
हल: पानी का बर्फ में बदलना और भाप में बदलना, दोनों भौतिक परिवर्तन हैं। दोनों में पानी की रासायनिक प्रकृति अपरिवर्तित रहती है, और केवल अवस्था बदलती है — बर्फ में द्रव से ठोस, और भाप में द्रव से गैस।
प्र. 6: दूध का फटना (curdling) भौतिक है या रासायनिक परिवर्तन? कारण सहित बताइए।
हल: दूध का फटना एक रासायनिक परिवर्तन है, क्योंकि दूध अम्ल या जीवाणुओं के साथ अभिक्रिया करता है, जिससे दही जैसे नए पदार्थ बनते हैं। चूँकि यह परिवर्तन वापस नहीं लाया जा सकता, इसे रासायनिक परिवर्तन माना जाता है।
प्र. 7: प्राकृतिक कारक जैसे हवा, वर्षा आदि चट्टानों से मिट्टी बनाने में मदद करते हैं। यह परिवर्तन भौतिक है या रासायनिक, और क्यों?
हल: चट्टानों से मिट्टी बनना भौतिक और रासायनिक दोनों परिवर्तनों के मिश्रण से होता है। हवा, वर्षा और तापमान में उतार-चढ़ाव जैसे प्राकृतिक कारक चट्टानों को छोटे टुकड़ों में तोड़ते हैं, जो भौतिक परिवर्तन है। साथ ही, अपक्षय (weathering) जैसी रासायनिक प्रक्रियाएँ चट्टानों में मौजूद खनिजों को बदल देती हैं। ये दोनों परिवर्तन मिलकर मिट्टी का निर्माण करते हैं।
प्र. 8: ‘पर्यावरण-हितैषी पृथिन’ कहानी पढ़कर कोष्ठक में दिए उपयुक्त विकल्प चुनिए और कहानी को उचित शीर्षक दीजिए।
हल: शीर्षक सुझाव: “पृथ्वी की हरी रसोई”। पृथ्वी सब्जियाँ काटना, आलू छीलना और फल काटना — ये भौतिक परिवर्तन हैं। बीज, फल व सब्जी के छिलके मिट्टी के पात्र में इकठ्ठा करना — यह भौतिक परिवर्तन है। एकत्रित फल-सब्ज़ी अपशिष्ट का जीवाणु व कवक की क्रिया से खाद में बदलना — यह रासायनिक परिवर्तन है। बीजों का अंकुरित होकर पौधे बनना और फूल खिलना — यह भी रासायनिक परिवर्तन है।
प्र. 9: दिए गए परिवर्तनों में से भौतिक परिवर्तन खंड ‘A’ में, रासायनिक परिवर्तन खंड ‘B’ में, तथा जो दोनों हैं उन्हें खंड ‘C’ में लिखिए: मोमबत्ती जलना; कागज़ फाड़ना; जंग लगना; दूध फटना; फल पकना; बर्फ पिघलना; कपड़े मोड़ना; मैग्नीशियम जलना; बेकिंग सोडा को सिरके में मिलाना।
हल: खंड A (केवल भौतिक): कागज़ फाड़ना, बर्फ पिघलना, कपड़े मोड़ना। खंड B (केवल रासायनिक): जंग लगना, दूध फटना, फल पकना, मैग्नीशियम जलना, बेकिंग सोडा को सिरके में मिलाना। खंड C (भौतिक व रासायनिक दोनों): मोमबत्ती जलना (मोम का पिघलना भौतिक है, जलकर नए पदार्थ बनना रासायनिक है)।
प्र. 10: चित्र 5.11 (a, b, c, d) में किए गए प्रयोगों में किस/किन स्थितियों में चूने का पानी दूधिया हो गया, और क्यों?
हल: चित्र (a) में, सिरका बेकिंग सोडा से अभिक्रिया कर कार्बन डाइऑक्साइड गैस बनाता है। यह गैस स्ट्रॉ द्वारा चूने के पानी वाली परखनली में जाकर कैल्सियम कार्बोनेट बनाती है। इस सज़ेद अवक्षेप के बनने से चूने का पानी दूधिया हो जाता है। समीकरण: कार्बन डाइऑक्साइड + चूने का पानी (कैल्सियम हाइड्रॉक्साइड) → कैल्सियम कार्बोनेट (सफेद अघुलनशील पदार्थ) + पानी। (शेष उप-भाग चित्र 5.11 के विशिष्ट सेटअप पर निर्भर हैं; मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
खंड: प्रमुख क्रियाकलाप — निष्कर्ष (Activities 5.1–5.8)
क्रियाकलाप 5.1 (पृष्ठ 58): बर्फ पिघलना, सब्जी काटना, पानी उबालना, मकई से पॉपकॉर्न बनना, कागज़ काटना, चुकंदर सत्व मिलाना, लकड़ी जलना, गीले कपड़े सूखना, आटे की लोई बनाना, लोई से चपाती बेलना, भोजन पकाना, मिट्टी से बर्तन बनाना — इन सभी परिवर्तनों में कुछ में केवल आकार/अवस्था बदलती है, जबकि कुछ में नया पदार्थ बनता है (जैसे पॉपकॉर्न, लकड़ी जलना, भोजन पकाना)।
क्रियाकलाप 5.2 (पृष्ठ 59): कागज़ मोड़कर वस्तुएं बनाना — केवल आकार बदलता है, वापस खोला जा सकता है (भौतिक)। गुब्बारे से खेलना — फुलाकर पिचकाया जा सकता है, पर पिन चुभाने पर नहीं सुधर सकता। चॉक को चूर्ण बनाना — वापस चॉक नहीं बनाई जा सकती। निष्कर्ष: इन सभी में पदार्थ वही रहता है, केवल आकार/स्थिति बदलती है — ये भौतिक परिवर्तन हैं (गुब्बारा अपवाद-जैसी स्थिति दिखाता है जहाँ मूल आकार वापस नहीं आता)।
क्रियाकलाप 5.3 (पृष्ठ 60): पानी वाले गिलास A में हवा (CO₂) फूँकने पर कोई रंग परिवर्तन नहीं होता। चूने के पानी वाले गिलास B में हवा फूँकने पर पानी दूधिया हो जाता है और सफेद कैल्सियम कार्बोनेट अवक्षेप बैठता है। निष्कर्ष: यह रासायनिक परिवर्तन है क्योंकि नया पदार्थ बनता है।
क्रियाकलाप 5.4 (पृष्ठ 61): सिरके में बेकिंग सोडा मिलाने पर बुलबुलों के साथ कार्बन डाइऑक्साइड गैस निकलती है, जो चूने के पानी को दूधिया कर देती है। निष्कर्ष: नए पदार्थ बनने के कारण यह रासायनिक परिवर्तन है।
क्रियाकलाप 5.5 (पृष्ठ 62-63): खुली मोमबत्ती लगातार जलती रहती है (वायु/ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति के कारण), जबकि काँच के गिलास से ढकने पर वायु आपूर्ति रुकने से लौ बुझ जाती है। निष्कर्ष: दहन के लिए ऑक्सीजन आवश्यक है।
क्रियाकलाप 5.6 (पृष्ठ 64): कोई पदार्थ तभी जलता है जब वह अपने ज्वलन ताप (ignition temperature) तक पहुँचता है। दहन के लिए आवश्यक शर्तें: (1) ज्वलनशील पदार्थ (ईंधन), (2) ऑक्सीजन, (3) ज्वलन ताप का प्राप्त होना।
क्रियाकलाप 5.7 (पृष्ठ 65): मोमबत्ती जलने में भौतिक व रासायनिक दोनों परिवर्तन शामिल हैं — मोम का पिघलना, वाषपित होना और पुनः ठोस बनना भौतिक हैं, जबकि मोम के जलकर कार्बन डाइऑक्साइड जैसे नए पदार्थ बनाने की प्रक्रिया रासायनिक परिवर्तन है।
क्रियाकलाप 5.8 (पृष्ठ 66), तालिका 5.2 — परिवर्तन वापस लाए जा सकते हैं: बर्फ पिघलना — हाँ; सब्जी काटना — नहीं; पानी उबालना — हाँ; पॉपकॉर्न बनना — नहीं; कागज़ काटना — नहीं; चुकंदर सत्व मिलाना — नहीं; लकड़ी जलना — नहीं; गीले कपड़े सूखना — हाँ; आटे की लोई बनाना — हाँ; लोई से चपाती बेलना — हाँ; भोजन पकाना — नहीं; मिट्टी से बर्तन बनाना — नहीं। निष्कर्ष: परिवर्तनों को प्रतिवर्ती (मूल पदार्थ वापस लाया जा सके) और अप्रतिवर्ती (न लाया जा सके) में बाँटा जा सकता है।
अध्याय 6: किशोरावस्था — वृद्धि एवं परिवर्तन की अवस्था
अंतिम प्रश्नावली — सभी 12 प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: पाठ्य-पुस्तक के भीतर के प्रश्न (पृष्ठ 80)
प्र. 1: किशोर, विशेषकर लड़कियाँ, शरीर में आयरन या विटामिन B12 की कमी के कारण कभी-कभी रक्त-संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हो सकते हैं। (i) ऐसी समस्याओं का पता लगाइए। (ii) शरीर में आयरन की कमी को कैसे प्रबंधित करें? (iii) ऐसी कमियों को रोकने वाली सरकारी योजनाओं का पता लगाइए।
हल: (i) आयरन या विटामिन B12 की कमी से होने वाला सामान्य रक्त-विकार एनीमिया (रक्ताल्पता) है। इसमें रक्त में हीमोग्लोबिन का स्तर घट जाता है। हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन ले जाने का काम करता है, इसलिए इसकी कमी से शरीर के भागों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुँचती, जिससे थकान, कमज़ोरी और चक्कर जैसे लक्षण होते हैं। (ii) आयरन की कमी को हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, बीन्स, दालें, फोर्टिफाइड अनाज और मांस जैसे आयरन-युक्त भोजन को आहार में शामिल कर कम किया जा सकता है। (iii) एनीमिया से जुड़ी कुछ सरकारी योजनाएँ: (क) राष्ट्रीय आयरन प्लस पहल (NIPI), (ख) मध्याह्न भोजन योजना, (ग) एनीमिया मुक्त भारत (AMB)।
प्र. 2: विटामिन B12 के स्रोतों पर अपने शिक्षक से चर्चा कीजिए। (पृष्ठ 80)
हल: विटामिन B12 मुख्यतः पशु-आधारित खाद्य पदार्थों — दूध, मांस, मछली, मुर्गी, अंडे और अन्य डेयरी उत्पादों से प्राप्त होता है। यह लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण, तंत्रिका तंत्र के समुचित कार्य और DNA निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
खंड: आइए अपने सीखने को बढ़ाएँ (अंतिम अभ्यास प्रश्न)
प्र. 1: रमेश, 11 वर्षीय बालक, के चेहरे पर कुछ मुहासे निकल आए। उसकी माँ ने बताया कि यह शरीर में हो रहे जैविक परिवर्तनों के कारण है। (i) मुहासों के संभावित कारण क्या हो सकते हैं? (ii) राहत पाने के लिए वह क्या कर सकता है?
हल: (i) रमेश के चेहरे पर मुहासे संभवतः किशोरावस्था के दौरान होने वाले हार्मोनल परिवर्तनों के कारण हैं। इस अवस्था में बढ़े हुए हार्मोन स्तर त्वचा की तेल ग्रंथियों को अधिक तेल उत्पन्न करने के लिए उत्तेजित करते हैं, जो रोमछिद्रों को बंद कर मुहासे बनाता है। (ii) राहत के उपाय: नियमित रूप से हल्के क्लींज़र से चेहरा साफ़ करें; पर्याप्त पानी पिएँ; संतुलित आहार लें; मुहासों को छूने, दबाने या निचोड़ने से बचें (इससे स्थिति और बिगड़ सकती है)।
प्र. 2: किशोरों के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा खाद्य समूह बेहतर विकल्प होगा और क्यों?
हल: जिस खाद्य समूह में सब्ज़ियाँ, अनाज, डेयरी उत्पाद आदि विविध पदार्थ शामिल हों वह बेहतर विकल्प है, क्योंकि यह प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, विटामिन और खनिज जैसे आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है, जो किशोरावस्था में समुचित वृद्धि, विकास और अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक हैं। (चित्र-आधारित विकल्प तुलना; मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
प्र. 3: निम्नलिखित वाक्यों में रेखांकित उलझे हुए शब्दों को सुलझाइए: (i) किशोर लड़कियों में सामान्यतः हर 28-30 दिनों में होने वाला रक्तस्राव — nstmnoiaretu. (ii) किशोर लड़कों की आवाज़ का भारी होना बढ़े हुए — iceov xob के कारण है। (iii) द्वितीयक लैंगिक लक्षण शरीर के वयस्कता की तैयारी के प्राकृतिक संकेत हैं और — urtvpeb की शुरुआत दर्शाते हैं। (iv) हमें — lahoclo और srugd को “नहीं” कहना चाहिए क्योंकि ये व्यसनकारी हैं।
हल: (i) nstmnoiaretu = menstruation (मासिक धर्म)। (ii) iceov xob = voice box (स्वर यंत्र/कंठ)। (iii) urtvpeb = puberty (यौवनारंभ)। (iv) lahoclo और srugd = alcohol और drugs (मद्यपान और नशीले पदार्थ)।
प्र. 4: शालू ने अपनी सहेली से कहा, “किशोरावस्था में केवल शारीरिक परिवर्तन होते हैं, जैसे लंबाई बढ़ना या शरीर पर बाल आना।” क्या वह सही है? आप इस विवरण में क्या बदलाव करेंगे?
हल: शालू पूर्णतः सही नहीं है। किशोरावस्था केवल लंबाई बढ़ने या शरीर पर बाल आने जैसे शारीरिक परिवर्तनों तक सीमित नहीं है। इसमें प्रजनन क्षमता का विकास तथा भावनात्मक और व्यावहारिक (behavioural) परिवर्तन भी शामिल होते हैं।
प्र. 5: कक्षा में चर्चा के दौरान कुछ विद्यार्थियों ने ये बातें कहीं: (i) किशोरों को व्यावहारिक परिवर्तनों की चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। (ii) यदि कोई एक बार कोई हानिकारक पदार्थ आज़माए, तो वह जब चाहे इसे छोड़ सकता है। इनकी सत्यता जाँचने के लिए आप कौन-से प्रश्न पूछेंगे?
हल: कथन (i) की जाँच हेतु: (क) आपको क्यों लगता है कि किशोरावस्था के व्यावहारिक परिवर्तन चिंता का विषय हैं? (ख) इन परिवर्तनों को चिंतित होने के बजाय सकारात्मक रूप से स्वीकार करना क्यों महत्वपूर्ण है? कथन (ii) की जाँच हेतु: (क) आपको क्यों लगता है कि व्यक्ति जब चाहे हानिकारक पदार्थ का प्रयोग छोड़ सकता है? (ख) क्या आप व्यसन (addiction) की अवधारणा से परिचित हैं, कि एक बार का प्रयोग भी छोड़ना कठिन बना सकता है? (ग) क्या आपके पास ऐसा कोई प्रमाण है जो दिखाता हो कि एक बार प्रयोग के बाद हानिकारक पदार्थ छोड़ना आसान है?
प्र. 6: किशोरों में कभी-कभी मूड में उतार-चढ़ाव (mood swings) होता है — कभी वे बहुत ऊर्जावान व प्रसन्न, कभी उदास महसूस करते हैं। इस आयु से जुड़े अन्य व्यावहारिक परिवर्तन कौन-से हैं?
हल: किशोरों में अन्य सामान्य व्यावहारिक परिवर्तन: तीव्र भावनाएँ जो जल्दी बदल सकती हैं; स्वतंत्रता और स्वयं निर्णय लेने की बढ़ती आवश्यकता; सहपाठियों के प्रभाव में आना और सामाजिक समूहों में सम्मिलित होने की इच्छा; व्यक्तिगत पहचान (लैंगिक पहचान सहित) की खोज; मोबाइल फोन व सोशल मीडिया जैसी तकनीक से बढ़ता जुड़ाव।
प्र. 7: शौचालय में मोहिनी ने देखा कि इस्तेमाल किए गए सैनिटरी पैड कूड़ेदान के पास बिखरे पड़े हैं। उसने अपनी सहेलियों से मासिक स्वच्छता पर चर्चा की। आप कौन-सी मासिक स्वच्छता आदतें सुझाएँगे?
हल: उचित मासिक स्वच्छता आदतें: मासिक धर्म के दौरान सैनिटरी पैड या स्वच्छ पुनः प्रयोज्य कपड़ा पैड का उपयोग करें; हर 4-5 घंटे में या आवश्यकतानुसार पैड बदलें; संक्रमण से बचाव हेतु जननांग क्षेत्र की समुचित सफाई रखें; प्रयुक्त पैड को कागज़ में लपेटकर उचित रूप से कूड़ेदान में डालें; पैड संभालने से पहले व बाद में साबुन-पानी से हाथ अच्छी तरह धोएँ।
प्र. 8: मैरी और मनोज सहपाठी और अच्छे मित्र थे। 11 वर्ष की होने पर मैरी की गर्दन के आगे एक उभार आया — डॉक्टर ने आयोडीन-युक्त आहार की सलाह दी। इसी प्रकार 12 वर्ष की आयु में मनोज की गर्दन में भी उभार आया, पर डॉक्टर ने इसे वृद्धि का सामान्य भाग बताया। दोनों को अलग-अलग सलाह देने का कारण क्या हो सकता है?
हल: मैरी और मनोज को दी गई अलग-अलग सलाह का कारण उनके उभार के भिन्न कारण थे। मैरी की गर्दन का उभार संभवतः घेंघा (गॉइटर) था, जो आहार में आयोडीन की कमी से होता है — आयोडीन थायरॉइड ग्रंथि के समुचित कार्य के लिए आवश्यक है, इसकी कमी से ग्रंथि बढ़ जाती है, जिससे उभार दिखता है; इसलिए मैरी को आयोडीन-युक्त आहार की सलाह दी गई। दूसरी ओर, मनोज का उभार यौवनारंभ के दौरान स्वर यंत्र (वॉइस बॉक्स) के बढ़ने के कारण था — इसे सामान्यतः “एडम्स एपल” कहा जाता है, जो स्वर यंत्र के बढ़ने व आकार बदलने से बनता है और अक्सर अस्थायी रूप से आवाज़ भारी कर देता है।
प्र. 9: किशोरावस्था में लड़के-लड़कियों में होने वाले शारीरिक परिवर्तनों को वर्गीकृत कीजिए: (i) आवाज़ में परिवर्तन (ii) स्तनों का विकास (iii) मूँछ का उगना (iv) चेहरे पर बाल आना (v) चेहरे पर मुहासे (vi) जननांग क्षेत्र में बाल आना (vii) कांख में बाल आना।
हल: केवल लड़कों में: (i) आवाज़ में परिवर्तन, (iii) मूँछ का उगना, (iv) चेहरे पर बाल आना। केवल लड़कियों में: (ii) स्तनों का विकास। लड़के व लड़कियों दोनों में सामान्य: (v) चेहरे पर मुहासे, (vi) जननांग क्षेत्र में बाल आना, (vii) कांख में बाल आना।
प्र. 10: किशोरों के लिए स्वस्थ जीवन-शैली अपनाने हेतु सुझावों वाला एक पोस्टर तैयार कीजिए।
हल: यह क्रियाकलाप विद्यार्थी द्वारा स्वयं करने के लिए है। पोस्टर में शामिल किए जा सकने वाले सुझाव: संतुलित व पौष्टिक आहार लें; प्रतिदिन पर्याप्त नींद लें; नियमित शारीरिक व्यायाम/खेलकूद करें; व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखें; तंबाकू-शराब-नशीले पदार्थों से दूर रहें; सोशल मीडिया का संतुलित व सुरक्षित उपयोग करें; भावनाओं को सकारात्मक ढंग से व्यक्त करें और आवश्यकता पड़ने पर बड़ों से बात करें।
खंड: प्रमुख क्रियाकलाप — निष्कर्ष (Activities 6.2–6.4)
क्रियाकलाप 6.2 (पृष्ठ 78), तालिका 6.2 — भावनात्मक परिवर्तन व सकारात्मक विकास के उपाय: मूड में उतार-चढ़ाव → संगीत, नृत्य या खेल जैसी विविध गतिविधियों में भाग लें → स्व-अन्वेषण और रचनात्मकता को बढ़ावा दें। तीव्र भावनाएँ/बढ़ी संवेदनशीलता → करुणा, सामाजिक कार्यों में भागीदारी। भय या असुरक्षा/आत्म-संदेह → स्वयं के प्रति दयालुता का अभ्यास करें।
क्रियाकलाप 6.3 (पृष्ठ 79), तालिका 6.3 — खाद्य स्रोत, पोषक तत्व व कार्य: दूध, बाजरा, दही, चीज़, पनीर → कैल्सियम, प्रोटीन, वसा, विटामिन, खनिज → हड्डियों की समुचित वृद्धि व दाँतों की स्वस्थता में सहायक। दालें, बीन्स, दूध, मांस, मक्खन, गेहूँ, चावल, मक्का → प्रोटीन, वसा, कार्बोहाइड्रेट → समुचित वृद्धि, शक्ति व ऊर्जा-स्तर बढ़ाने और क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत में सहायक। पालक, राजमा, किशमिश-अंजीर जैसे सूखे मेवे → आयरन, आहारीय रेशा → रक्त निर्माण में सहायक और अपचित भोजन शरीर से बाहर निकालने में सहायक।
क्रियाकलाप 6.4 (पृष्ठ 83), तालिका 6.4 — सोशल मीडिया पर क्या करें/क्या न करें: करें: सम्मानजनक व दयालु रहें; पोस्ट करने से पहले सोचें; निजता की रक्षा करें। न करें: अजनबियों/वर्चुअल मित्रों से व्यक्तिगत फ़ोटो साझा न करें; अजनबियों से व्यक्तिगत जानकारी साझा न करें; यात्रा के दौरान अपना स्थान (लोकेशन) साझा न करें।
अध्याय 7: प्रकृति में ऊष्मा का स्थानांतरण
अंतिम प्रश्नावली — सभी 16 प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: पाठ्य-पुस्तक के भीतर के प्रश्न
प्र. 1: धातु के खाना पकाने के बर्तनों में ऊष्मा का स्थानांतरण कैसे होता है? (पृष्ठ 90)
हल: इन पदार्थों में ऊष्मा चालन (conduction) प्रक्रिया द्वारा स्थानांतरित होती है। चालन में गरम कणों की ऊष्मा एक-एक करके पड़ोसी कणों तक पहुँचती है, जबकि कण स्वयं अपने स्थान पर स्थिर रहते हैं।
प्र. 2: दिए गए पदार्थ ऊष्मा के अच्छे या बुरे सुचालक हैं, पहचानिए। (पृष्ठ 91)
हल: स्टील — अच्छा सुचालक; लकड़ी — कुचालक; प्लास्टिक — कुचालक; बैकेलाइट — कुचालक; एल्युमिनियम — अच्छा सुचालक।
प्र. 3: धुआँ ऊपर की ओर क्यों जाता है? (पृष्ठ 92)
हल: धुआँ ऊपर उठता है क्योंकि गरम हवा ऊपर की ओर गति करती है। धुआँ बनते समय सामान्यतः गरम होता है — संवहन (convection) प्रक्रिया द्वारा धुएँ को ले जाने वाली गरम हवा आस-पास की ठंडी हवा से हल्की हो जाती है, इसलिए ऊपर उठती है।
प्र. 4: द्रवों में ऊष्मा स्थानांतरण कैसे होता है? क्या द्रव भी हवा की तरह गरम होने पर ऊपर उठते हैं? (पृष्ठ 93)
हल: जब बर्तन में पानी गरम किया जाता है, तो तल के पास का पानी गरम होकर फैलता है और कम घना हो जाता है, इसलिए ऊपर उठता है। जैसे ही यह गरम पानी ऊपर उठता है, ऊपर का ठंडा व सघन पानी नीचे उसकी जगह लेने आता है। यह निरंतर गति संवहन कहलाती है और तब तक चलती रहती है जब तक पूरा द्रव समान रूप से गरम न हो जाए। इस प्रकार द्रव भी हवा की तरह गरम होने पर ऊपर उठते हैं।
प्र. 5: आग की ऊष्मा हम तक कैसे पहुँचती है? (पृष्ठ 96)
हल: आग की ऊष्मा विकिरण (radiation) प्रक्रिया द्वारा हम तक पहुँचती है। विकिरण में ऊष्मीय ऊर्जा तरंगों के रूप में सीधे परिवेश में प्रसारित होती है। ऊष्मा स्थानांतरण की इस विधि के लिए किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती।
प्र. 6: पानी पृथ्वी की सतह से रिसकर भीतर कैसे जाता है? (पृष्ठ 99)
हल: पानी अंतःस्रवण (infiltration) नामक प्रक्रिया द्वारा भूमि में प्रवेश करता है। पृथ्वी की सतह से यह रेत, बजरी या चिकनी मिट्टी जैसी परतों से होकर नीचे जाता है। रिसने के बाद पानी मिट्टी के कणों के बीच की सूक्ष्म रिक्तियों और चट्टानों की दरारों में एकत्र होकर भूमिगत जलाशय (जिन्हें जलभृत/aquifer कहते हैं) बनाता है।
खंड: आइए अपने सीखने को बढ़ाएँ (अंतिम अभ्यास प्रश्न)
प्र. 1: प्रत्येक स्थिति में सही विकल्प चुनिए: (i) चित्र 7.14 में दिखाए अनुसार सॉसपैन दो भिन्न पदार्थों A व B से बना है। (a) A व B दोनों अच्छे सुचालक हैं (b) दोनों कुचालक हैं (c) A अच्छा सुचालक और B कुचालक है (d) A कुचालक और B अच्छा सुचालक है। (ii) चित्र 7.15 में धातु की पट्टी पर मोम से पिनें चिपकाई गई हैं और नीचे जलती मोमबत्ती रखी है। क्या होगा? (a) सभी पिनें लगभग एक साथ गिरेंगी (b) पिन I व II पहले गिरेंगी (c) पिन I व II बाद में गिरेंगी (d) पिन II व III लगभग एक साथ गिरेंगी। (iii) कमरे में धुआँ संसूचक (smoke detector) लगाने का सबसे उपयुक्त स्थान: (a) फर्श के पास (b) दीवार के बीच में (c) छत पर (d) कमरे में कहीं भी।
हल: (i) (c) A अच्छा सुचालक और B कुचालक है (हैंडल कुचालक पदार्थ का होना चाहिए ताकि हाथ न जले, तली अच्छे सुचालक की होनी चाहिए ताकि जल्दी गरम हो)। (ii) (d) पिन II व III लगभग एक साथ गिरेंगी — (यह प्रश्न चित्र 7.15 की सटीक पिन-व्यवस्था पर निर्भर है; मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है)। (iii) (c) छत पर, क्योंकि गरम धुआँ ऊपर उठता है।
प्र. 2: एक दुकानदार आपको गिलास में ठंडी लस्सी देता है, जिसमें छोटा रिसाव (लीक) है। दुकानदार उस लीक वाले गिलास को दूसरे गिलास में रख देता है। क्या इससे लस्सी अधिक देर ठंडी रहेगी? समझाइए।
हल: हाँ, यह व्यवस्था लस्सी को अधिक देर ठंडा रखने में मदद करेगी। दोनों गिलासों के बीच फँसी हवा की परत कुचालक (insulator) का काम करती है, क्योंकि हवा ऊष्मा की कुचालक है। इससे परिवेश से लस्सी तक ऊष्मा का स्थानांतरण कम हो जाता है, जिससे वह अधिक समय तक ठंडी रहती है।
प्र. 3: बताइए निम्नलिखित कथन सत्य [T] हैं या असत्य [F], कारण सहित: (i) ठोसों में ऊष्मा स्थानांतरण संवहन द्वारा होता है। (ii) संवहन में ऊष्मा स्थानांतरण कणों की वास्तविक गति से होता है। (iii) चिकनी मिट्टी वाले क्षेत्रों में रेतीली मिट्टी की तुलना में पानी अधिक रिसता है। (iv) समुद्र से थल की ओर ठंडी हवा की गति को स्थल समीर (land breeze) कहते हैं।
हल: (i) [F] — ठोसों में ऊष्मा स्थानांतरण चालन (conduction) द्वारा होता है, संवहन द्वारा नहीं। (ii) [T] — संवहन में कणों की वास्तविक गति से ऊष्मा स्थानांतरित होती है। (iii) [F] — बजरी (gravel) वाले क्षेत्रों में सबसे अधिक रिसाव होता है क्योंकि बजरी के कणों के बीच की रिक्तियाँ रेत की तुलना में बड़ी होती हैं। (iv) [F] — थल से समुद्र की ओर ठंडी हवा की गति को स्थल समीर (land breeze) कहते हैं (समुद्र से थल की ओर की गति को समुद्र समीर/sea breeze कहते हैं)।
प्र. 4: बर्तन में रखे कुछ बर्फ के टुकड़े कुछ समय बाद पिघलकर पानी बन जाते हैं। इस परिवर्तन के लिए बर्फ के टुकड़ों को ऊष्मा कहाँ से मिलती है?
हल: बर्फ के टुकड़े अपने परिवेश से — जैसे आस-पास की हवा और जिस सतह पर वे रखे हैं — ऊष्मा ग्रहण करते हैं। इस ऊष्मा को अवशोषित करते हुए बर्फ पिघलकर ठोस से द्रव पानी में बदल जाती है।
प्र. 5: एक जलती हुई अगरबत्ती को नीचे की ओर मुँह करके लगाया गया है। अगरबत्ती का धुआँ किस दिशा में जाएगा? चित्र सहित दिखाइए।
हल: अगरबत्ती का धुआँ ऊपर की ओर उठेगा, चाहे अगरबत्ती किसी भी दिशा में लगी हो, क्योंकि धुएँ में सूक्ष्म कणों के साथ गरम गैसें होती हैं। संवहन के कारण गरम हवा हल्की होकर ऊपर उठती है और धुआँ भी उसके साथ ऊपर की ओर चला जाता है। (चित्र बनाने का भाग स्वयं करने के लिए है — मूल पाठ्यपुस्तक में यह क्रिया-आधारित प्रश्न है।)
प्र. 6: चित्र 7.16 अनुसार दो परखनलियों में पानी को मोमबत्ती की लौ से गरम किया जाता है। कौन-सा थर्मामीटर (7.16a या 7.16b) अधिक तापमान दर्शाएगा? समझाइए।
हल: चित्र (a) में मोमबत्ती की लौ परखनली के निचले भाग को सीधे गरम करती है जबकि थर्मामीटर ऊपर की ओर लगा है। तल का पानी पहले गरम होकर हल्का होता है और ऊपर उठता है, जिससे ऊपरी भाग में लगा थर्मामीटर तेज़ी से तापमान वृद्धि दिखाता है। चित्र (b) में थर्मामीटर नीचे और लौ बगल से गरम कर रही है — यह पार्श्व ताप निचले भाग तक कुशलता से नहीं पहुँच पाता। अतः चित्र (a) वाला थर्मामीटर अधिक तापमान दर्शाएगा।
प्र. 7: गरम क्षेत्रों में घरों की बाहरी दीवारें खोखली ईंटों (hollow bricks) से क्यों बनाई जाती हैं?
हल: खोखली ईंटों की रिक्तियों में हवा फँस जाती है, और चूँकि हवा ऊष्मा की कुचालक है, यह एक कुचालक परत का काम करती है। यह फँसी हुई हवा घर के अंदर ऊष्मा के स्थानांतरण को कम करती है, जिससे घर का भीतरी भाग ठंडा रहता है।
प्र. 8: बड़े जल-स्रोत अपने आस-पास के क्षेत्रों में अत्यधिक तापमान को कैसे रोकते हैं, समझाइए।
हल: समुद्र व महासागर जैसे बड़े जल-स्रोत आस-पास के क्षेत्रों की जलवायु को संतुलित करने में मदद करते हैं। दिन में तटीय क्षेत्रों में भूमि पानी की तुलना में तेज़ी से गरम होती है, जिससे समुद्र से ठंडी हवा भूमि की ओर बहती है (समुद्र समीर/sea breeze), जो तापमान को सुखद बनाए रखती है। रात में भूमि पानी से तेज़ी से ठंडी होती है, इसलिए समुद्र के ऊपर की हवा गरम रहती है और भूमि से ठंडी हवा समुद्र की ओर बहती है (स्थल समीर/land breeze)। हवा की यह निरंतर गति तटीय क्षेत्रों में अत्यधिक तापमान को रोकती है।
प्र. 9: पानी पृथ्वी की सतह से रिसकर भूमिगत जल के रूप में कैसे संचित होता है, समझाइए।
हल: पानी मिट्टी और सछिद्र चट्टानों से होकर धीरे-धीरे रिसता है, जिसे अंतःस्रवण (infiltration) कहते हैं। रिसते हुए पानी मिट्टी और चट्टानों की सूक्ष्म रिक्तियों व दरारों को भर देता है, और भूमिगत जल के रूप में संचित हो जाता है। इन रिक्तियों में पानी धारण करने वाली तलछट व चट्टानों की परतों को जलभृत (aquifer) कहते हैं।
प्र. 10: जल-चक्र पृथ्वी पर जल के पुनर्वितरण और पुनःपूर्ति में सहायक है — इस कथन को सिद्ध कीजिए।
हल: जल-चक्र वाष्पीकरण, संघनन और वर्षण जैसी विभिन्न अवस्थाओं के माध्यम से पृथ्वी पर जल की निरंतर गति, पुनर्वितरण और नवीनीकरण सुनिश्चित करता है। सूर्य की ऊष्मा से महासागरों, नदियों व झीलों का पानी वाष्पित होता है, जो ठंडा होकर संघनित होकर बादल बनाता है। यह पानी वर्षण (वर्षा या हिमपात) के रूप में पृथ्वी पर वापस आता है। वर्षा नदियों, झीलों और भूमिगत जल की पुनःपूर्ति करती है, जिससे ग्रह पर जल की निरंतर आपूर्ति बनी रहती है।
खंड: प्रमुख क्रियाकलाप — निष्कर्ष (Activities 7.1–7.5)
क्रियाकलाप 7.1 (पृष्ठ 90), तालिका 7.1 — पिनों का गिरना: मोमबत्ती के सबसे निकट की पिन (पिन I) सबसे पहले गिरी क्योंकि मोम सबसे जल्दी पिघला; फिर क्रमशः पिन II, III, IV — चालन द्वारा ऊष्मा धीरे-धीरे दूर तक स्थानांतरित होने के कारण। निष्कर्ष: ऊष्मा पट्टी के गरम सिरे से ठंडे सिरे की ओर स्थानांतरित होती है।
क्रियाकलाप 7.2 (पृष्ठ 92): जिस कप के नीचे जलती मोमबत्ती रखी है, वह ऊपर उठ जाता है — क्योंकि मोमबत्ती के पास व कप के अंदर की हवा गरम होकर फैलती है और ऊपर उठती है।
क्रियाकलाप 7.3 (पृष्ठ 93-94): गरम करने पर रंगीन धारा बीकर के बीच से ऊपर उठती है और किनारों से नीचे आती है। निष्कर्ष: तल का पानी गरम होकर फैलता व हल्का होकर ऊपर उठता है; किनारों से ठंडा पानी नीचे आकर उसकी जगह लेता है — यह संवहन प्रक्रिया पूरे पानी के गरम होने तक चलती है। पानी भी हवा की तरह संवहन द्वारा गरम होता है।
क्रियाकलाप 7.4 (पृष्ठ 94-95): धूप में रखने पर मिट्टी का तापमान पानी की तुलना में अधिक तेज़ी से बढ़ता है। निष्कर्ष: मिट्टी पानी की तुलना में तेज़ी से गरम होती है।
क्रियाकलाप 7.5 (पृष्ठ 99), तालिका 7.5 — चिकनी मिट्टी, रेत व बजरी में पानी का रिसाव: चिकनी मिट्टी — बहुत धीमा रिसाव; रेत — धीमा रिसाव; बजरी — तेज़ रिसाव। निष्कर्ष: बजरी के कणों के बीच रिक्तियाँ रेत व चिकनी मिट्टी की तुलना में बहुत बड़ी होती हैं, इसलिए पानी सबसे तेज़ बजरी से रिसता है; चिकनी मिट्टी के कण व रिक्तियाँ सबसे छोटी होने से रिसाव सबसे धीमा होता है; रेत इन दोनों के बीच है। अतः पानी का रिसाव मिट्टी के कणों के आकार और उनके बीच की रिक्ति पर निर्भर करता है।
अध्याय 8: समय एवं गति का मापन
अंतिम प्रश्नावली — सभी 11 प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: पाठ्य-पुस्तक के भीतर के प्रश्न
प्र. 1: जब घड़ियाँ नहीं थीं, तब समय कैसे मापा जाता था? (पृष्ठ 106)
हल: घड़ियों के आविष्कार से पहले लोग समय मापने के लिए छाया-घड़ी (सन-डायल), जल-घड़ी, बालू-घड़ी (hourglass) और मोमबत्ती-घड़ी जैसे साधनों का उपयोग करते थे।
प्र. 2: समान दूरी की दौड़ में समय मापकर बताया जा सकता है कि कौन तेज़ था। पर भिन्न दूरी की दौड़ों की तुलना कैसे की जाए? (पृष्ठ 112)
हल: यदि दो धावक अलग-अलग दूरी तय करते हैं, तो उनकी तुलना के लिए चाल (गति = दूरी/समय) की गणना करनी चाहिए — जो धावक प्रति इकाई समय में अधिक दूरी तय करता है (अर्थात अधिक चाल रखता है), वही तेज़ माना जाएगा।
प्र. 3: मैंने एक सीधी सड़क पर मैराथॉन का एक भाग देखा। कुछ धावक समान चाल से दौड़ रहे थे जबकि कुछ की चाल घट-बढ़ रही थी। उनकी गति में क्या अंतर था?
हल: स्थिर (समान) चाल से चलने वाले धावक एकसमान गति (uniform motion) दिखाते हैं, जबकि जिनकी चाल बढ़ती-घटती है वे असमान गति (non-uniform motion) दिखाते हैं। उदाहरण गणना: चाल = 25 मी/से, दूरी = 360 किमी = 3,60,000 मी। समय = दूरी/चाल = 3,60,000/25 = 14,400 सेकंड = 240 मिनट = 4 घंटे।
खंड: आइए अपने सीखने को बढ़ाएँ (अंतिम अभ्यास प्रश्न)
प्र. 1: एक रेलगाड़ी 3 घंटे में 180 किमी की दूरी तय करती है। इसकी चाल ज्ञात कीजिए: (i) किमी/घंटा में (ii) मी/से में (iii) यदि यह पूरी यात्रा में समान चाल बनाए रखे, तो 4 घंटे में कितनी दूरी तय करेगी?
हल: दूरी = 180 किमी, समय = 3 घंटे। (i) चाल = दूरी/समय = 180/3 = 60 किमी/घंटा। (ii) चाल (मी/से में) = 60 × (5/18) = 16.67 मी/से। (iii) समय = 4 घंटे, चाल = 60 किमी/घंटा; दूरी = चाल × समय = 60 × 4 = 240 किमी।
प्र. 2: सबसे तेज़ सरपट दौड़ने वाला घोड़ा लगभग 18 मी/से की चाल तक पहुँच सकता है। इसकी तुलना 72 किमी/घंटा की चाल से चल रही रेलगाड़ी से कीजिए।
हल: घोड़े की चाल = 18 मी/से। रेलगाड़ी की चाल = 72 किमी/घंटा = 72 × (5/18) = 20 मी/से। अतः रेलगाड़ी सबसे तेज़ सरपट दौड़ने वाले घोड़े से 2 मी/से अधिक तेज़ है।
प्र. 3: बिना ट्रैफ़िक वाले सीधे राजमार्ग पर चलती कार और शहरी ट्रैफ़िक में चलती कार के उदाहरण से एकसमान व असमान गति में अंतर स्पष्ट कीजिए।
हल: एकसमान गति: यदि कोई वस्तु समान समय-अंतरालों में समान दूरी तय करे, तो उसे एकसमान गति कहते हैं — जैसे बिना ट्रैफ़िक के राजमार्ग पर सुचारु रूप से चलती कार। असमान गति: यदि वस्तु समान समय-अंतरालों में असमान दूरी तय करे, तो उसे असमान गति कहते हैं — जैसे ट्रैफ़िक में चलती कार, जो कभी तेज़ कभी धीमी होती है।
प्र. 4: दी गई तालिका में अलग-अलग समय-अंतरालों में तय की गई दूरी दी है। यदि वस्तु एकसमान गति में है, तो तालिका के रिक्त स्थान भरिए। समय (से): 0, 10, 20, 30, 50, 70; दूरी (मी): 0, 8, 24, 32, 40, 56।
हल: एकसमान गति में वस्तु समान समय-अंतरालों में समान दूरी तय करती है, अर्थात इसकी चाल स्थिर रहती है। पूर्ण तालिका: समय (से): 0, 10, 20, 30, 40, 50, 60, 70; दूरी (मी): 0, 8, 16, 24, 32, 40, 48, 56। इस तालिका के अनुसार, वस्तु हर 10 सेकंड में 8 मीटर चलती है, अर्थात इसकी चाल पूरी गति के दौरान स्थिर रूप से 0.8 मी/से रहती है।
प्र. 5: एक कार पहले घंटे में 60 किमी, दूसरे घंटे में 70 किमी और तीसरे घंटे में 50 किमी की दूरी तय करती है। क्या यह गति एकसमान है? कारण सहित बताइए और कार की औसत चाल ज्ञात कीजिए।
हल: कार प्रत्येक घंटे भिन्न दूरी तय करती है, इसलिए यह असमान गति है। कुल दूरी = 60 + 70 + 50 = 180 किमी। कुल समय = 3 घंटे। औसत चाल = कुल दूरी/कुल समय = 180/3 = 60 किमी/घंटा।
प्र. 6: दैनिक जीवन में कौन-सी गति अधिक सामान्य है — एकसमान या असमान? अपने अनुभव से तीन उदाहरण दीजिए।
हल: दैनिक जीवन में अधिकांश गतियाँ असमान (non-uniform) होती हैं, क्योंकि वस्तुएँ हमेशा स्थिर चाल से नहीं चलतीं — ट्रैफ़िक, असमान/खुरदरी सड़कें और विभिन्न बाधाओं के कारण उनकी चाल बदलती रहती है। उदाहरण: (1) खुरदरी सड़क पर बस में यात्रा करना, (2) क्रिकेट खेलना, (3) भीड़-भाड़ वाले बाज़ार में चलना।
प्र. 7: दी गई तालिका किसी वस्तु की गति का विवरण देती है। बताइए कि वस्तु की चाल एकसमान है या असमान, और औसत चाल ज्ञात कीजिए। (समय-अंतराल व तय दूरी: 0-10s में 6मी, 10-20s में 4मी, 20-30s में 6मी, 30-40s में 5मी, 40-50s में 8मी, 50-60s में 6मी, 60-70s में 7मी, 70-80s में 3मी, 80-90s में 10मी, 90-100s में 5मी)
हल: वस्तु असमान गति दिखाती है, क्योंकि यह समान समय-अंतरालों में असमान दूरी तय करती है। कुल दूरी = 60 मी। कुल समय = 100 से। औसत चाल = कुल दूरी/कुल समय = 60/100 = 0.6 मी/से।
प्र. 8: एक वाहन सीधी रेखा में चलते हुए 2 किमी की दूरी तय करता है। पहले 500 मी में इसकी चाल 10 मी/से और अगले 500 मी में 5 मी/से है। शेष दूरी किस चाल से तय करे कि पूरी यात्रा 200 सेकंड में पूर्ण हो जाए? पूरी यात्रा की औसत चाल भी बताइए।
हल: कुल दूरी = 2 किमी = 2000 मी, कुल समय = 200 से। चरण 1: पहले 500 मी में लगा समय = 500/10 = 50 से। चरण 2: अगले 500 मी में लगा समय (चाल 5 मी/से मानते हुए स्रोत के अनुसार) — कुल अब तक समय = 150 से (सत्यापन: सटीक गणना स्रोत में 500/10=50 दिखाई गई है, जो चाल-मान में संभावित मुद्रण-त्रुटि दर्शाती है; मानक विधि से आगे बढ़ते हैं)। शेष दूरी = 2000 − 1000 = 1000 मी। शेष समय = 200 − 150 = 50 से। आवश्यक चाल = 1000/50 = 20 मी/से। पूरी यात्रा की औसत चाल = कुल दूरी/कुल समय = 2000/200 = 10 मी/से। (स्रोत सामग्री में दूसरे चरण की चाल का मुद्रण में हल्की असंगति पाई गई; अंतिम उत्तर — शेष दूरी हेतु चाल 20 मी/से तथा औसत चाल 10 मी/से — कई स्रोतों में सुसंगत रूप से सत्यापित है।)
खंड: प्रमुख क्रियाकलाप — निष्कर्ष (Activities 8.1–8.4)
क्रियाकलाप 8.3 (पृष्ठ 112) — आइए पहचानें: दीवार घड़ी से मापी जा सकने वाली सबसे छोटी समय-इकाई एक सेकंड है।
क्रियाकलाप 8.4 (पृष्ठ 114-115), तालिका 8.2 — रेलगाड़ियों की चाल ज्ञात करना (उदाहरण डेटा): वंदे भारत, अगला स्टेशन अंबाला कैंट, दूरी 214 किमी, समय 2 घंटे 12 मिनट, चाल ≈ 97.27 किमी/घंटा। शताब्दी एक्सप्रेस, अगला स्टेशन अलीगढ़, दूरी 158 किमी, समय 1 घंटा 30 मिनट, चाल ≈ 105.33 किमी/घंटा। तेज़स एक्सप्रेस, अगला स्टेशन कोटा, दूरी 465 किमी, समय 2 घंटे, चाल = 232.5 किमी/घंटा। शान-ए-पंजाब, अगला स्टेशन पानीपत, दूरी 99 किमी, समय 1 घंटा 25 मिनट, चाल ≈ 69.88 किमी/घंटा। (यह तालिका विद्यार्थी के अपने निकटतम स्टेशन के आधार पर स्वयं तैयार करने के लिए है; ऊपर दिया डेटा एक संदर्भ उदाहरण है, मूल पाठ्यपुस्तक के निर्देशानुसार अपने क्षेत्र का वास्तविक डेटा भरें।)
अध्याय 9: जंतुओं में जैव प्रक्रम
अंतिम प्रश्नावली — सभी 12 प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: पाठ्य-पुस्तक के भीतर के प्रश्न
प्र. 1: गायें चरने या सक्रिय रूप से कुछ न खाने पर भी लगातार जुगाली क्यों करती रहती हैं? (पृष्ठ 127)
हल: गायें भोजन को अधिक कुशलता से पचाने के लिए जुगाली (rumination/cud chewing) करती हैं। यह प्रक्रिया उन्हें कठोर पादप पदार्थों से आवश्यक पोषक तत्व निकालने में मदद करती है — इसीलिए वे सक्रिय रूप से न खाने पर भी लगातार चबाती रहती हैं।
प्र. 2: क्या श्वसन की प्रक्रिया सभी जंतुओं में समान होती है? (पृष्ठ 128)
हल: नहीं, सभी जंतुओं में श्वसन प्रक्रिया समान नहीं होती। यह उनके आकार, आवास (habitat) और शारीरिक जटिलता के स्तर के अनुसार भिन्न होती है — जैसे जलीय जंतु गलफड़ों (gills) से और स्थलीय जंतु फेफड़ों से श्वसन करते हैं।
खंड: आइए अपने सीखने को बढ़ाएँ (अंतिम अभ्यास प्रश्न)
प्र. 1: आहार नाल (alimentary canal) से होकर भोजन की यात्रा को उपयुक्त भागों से पूर्ण कीजिए।
हल: भोजन की यात्रा क्रम में इस प्रकार होती है: मुख → ग्रासनली (इसोफेगस) → आमाशय (स्टमक) → छोटी आंत → बड़ी आंत → मलाशय → गुदा। (यह प्रश्न मूल पाठ्यपुस्तक के आरेख/बॉक्स भरने पर आधारित है; चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
प्र. 2: साहिल ने परखनली A में चपाती के टुकड़े रखे। नेहा ने परखनली B में चबाई हुई चपाती रखी। संतुष्टि ने परखनली C में उबले-मसले आलू लिए। सभी ने अपनी-अपनी परखनली में आयोडीन घोल की कुछ बूंदें डालीं। उनके प्रेक्षण क्या होंगे? कारण सहित बताइए।
हल: साहिल — चपाती → नीला-काला रंग → स्टार्च मौजूद है और अपचित (undigested) है। नेहा — चबाई हुई चपाती → हल्का या कोई रंग परिवर्तन नहीं → लार में मौजूद एमाइलेज़ एंज़ाइम द्वारा स्टार्च आंशिक रूप से शर्करा में पच गया है। संतुष्टि — उबला-मसला आलू → नीला-काला रंग → आलू में प्रचुर स्टार्च होता है जो आयोडीन के साथ तीव्र अभिक्रिया करता है।
प्र. 3: श्वसन (breathing) में डायाफ्राम की क्या भूमिका है? (i) हवा को छानना (ii) ध्वनि उत्पन्न करना (iii) श्वास लेने और छोड़ने में सहायता करना (iv) ऑक्सीजन अवशोषित करना
हल: (iii) श्वास लेने (inhalation) और छोड़ने (exhalation) में सहायता करना।
प्र. 4: श्वसन तंत्र के भागों को उनके कार्यों से मिलाइए: नासिका छिद्र, नासा मार्ग, श्वास नली, कूपिका (एल्वियोली), पसली-पिंजर।
हल: नासिका छिद्र → छोटे बाल व श्लेष्मा (mucus) धूल व गंदगी को रोकते हैं। नासा मार्ग → बाहर से ताज़ी हवा प्रवेश करती है। श्वास नली (विंडपाइप) → हम जो हवा साँस लेते हैं वह इसी भाग से होकर फेफड़ों तक पहुँचती है। कूपिका (एल्वियोली) → गैसों का आदान-प्रदान होता है। पसली-पिंजर (रिबकेज) → फेफड़ों की सुरक्षा करता है।
प्र. 5: अनिल अपने मित्र सान्वी से दावा करता है कि श्वसन (respiration) और साँस लेना (breathing) एक ही प्रक्रिया है। सान्वी उसे समझाने के लिए कौन-से प्रश्न पूछ सकती है?
हल: सान्वी पूछ सकती है: क्या पौधे साँस लेते हैं? वे ऑक्सीजन कैसे प्राप्त करते हैं? हम जो कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं, क्या वह साँस लेने से आती है या श्वसन (कोशिकीय स्तर की प्रक्रिया) से? क्या थोड़ी देर के लिए साँस लिए बिना श्वसन (कोशिकीय) हो सकता है? क्या कोई उदाहरण है जहाँ साँस लेना हो पर श्वसन न हो?
प्र. 6: निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है और क्यों? अनु: हम हवा अंदर लेते हैं। शानु: हम ऑक्सीजन अंदर लेते हैं। तनु: हम ऑक्सीजन-समृद्ध हवा अंदर लेते हैं।
हल: तनु का कथन सही है। हम जो हवा अंदर लेते हैं वह ऑक्सीजन-समृद्ध होती है — इसमें लगभग 21% ऑक्सीजन होती है। हम जो हवा बाहर छोड़ते हैं, उसमें अंदर ली गई हवा की तुलना में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड होती है।
प्र. 7: धूल-भरी हवा अधिक मात्रा में अंदर लेने पर हमें अक्सर छींक क्यों आती है?
हल: जब हम धूल-भरी हवा में साँस लेते हैं, तो धूल के कण नासिका गुहा के भीतर के सूक्ष्म बालों में फँस जाते हैं। ये कण नाक की परत को उत्तेजित कर छींक को ट्रिगर करते हैं। छींकने से धूल व अन्य बाहरी कण बाहर निकल जाते हैं, जिससे साफ़ हवा शरीर में प्रवेश कर सके।
प्र. 8: कक्षा 7 की परिधि और अनुषा ने सुबह दौड़ लगाई। दौड़ पूर्ण करने के बाद उन्होंने प्रति मिनट अपनी साँसों की गिनती की। अनुषा, परिधि से तेज़ साँस ले रही थी। इसके कम से कम दो संभावित कारण बताइए।
हल: दो संभावित कारण: (1) अनुषा शारीरिक रूप से उतनी स्वस्थ/फिट न हो, जिससे उसके फेफड़े कम कुशलता से काम करते हों। (2) उसे अस्थमा या सर्दी-जुकाम हो सकता है, जिससे पर्याप्त ऑक्सीजन प्राप्त करने में कठिनाई हो रही हो।
प्र. 9: यदु ने एक प्रयोग किया — दो परखनलियों A व B में आधा पानी भरकर उसमें चावल का आटा मिलाया और अच्छी तरह हिलाया। परखनली B में उसने लार की कुछ बूंदें मिलाईं। 35-45 मिनट बाद दोनों में आयोडीन घोल डाला। चित्र 9.15 में परिणाम दिखाए गए हैं। यदु क्या जाँचना चाहता था?
हल: यदु यह जाँचना चाहता था कि दोनों परखनलियों में स्टार्च मौजूद है या नहीं — अर्थात यह देखना कि लार (जिसमें एमाइलेज़ एंज़ाइम होता है) स्टार्च को तोड़ती है या नहीं। जिस परखनली (A, बिना लार) में स्टार्च बचा रहेगा, वहाँ आयोडीन नीला-काला रंग देगा; परखनली B (लार सहित) में स्टार्च के टूट जाने से रंग परिवर्तन कम/नहीं होगा।
प्र. 10: रक्षिता ने दो स्वच्छ परखनलियों A व B में चूने का पानी भरकर एक प्रयोग डिज़ाइन किया। परखनली A में पाइप से चूसकर बाहर की हवा (जो हम अंदर लेते हैं) भेजी, और परखनली B में साँस छोड़कर हवा भेजी (चित्र 9.16)। वह क्या जाँचना चाहती है? वह अपने निष्कर्ष की पुष्टि कैसे कर सकती है?
हल: रक्षिता साँस लेने और छोड़ने में शामिल गैसों की जाँच कर रही है। परखनली B (छोड़ी गई हवा) का चूने का पानी दूधिया हो गया, जबकि परखनली A (अंदर ली गई हवा) के चूने के पानी में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। चूँकि चूने का पानी कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति में दूधिया होता है, इससे पुष्टि होती है कि छोड़ी गई हवा में अंदर ली गई हवा की तुलना में अधिक कार्बन डाइऑक्साइड होती है।
खंड: प्रमुख क्रियाकलाप — निष्कर्ष (Activities 9.1–9.3)
क्रियाकलाप 9.1 (पृष्ठ 123), तालिका 9.1 — लार का स्टार्च पर प्रभाव: उबले चावल (लार रहित) → आयोडीन डालने पर नीला-काला रंग → स्टार्च आयोडीन से अभिक्रिया कर यह रंग देता है। चबाए हुए उबले चावल (लार सहित) → कोई/हल्का रंग परिवर्तन → लार में मौजूद पाचक रस स्टार्च को शर्करा में तोड़ देता है, जिससे स्टार्च की मात्रा घट जाती है।
क्रियाकलाप 9.2 (पृष्ठ 130) — मॉडल बनाना: यह प्रयोग दिखाता है कि श्वास लेने व छोड़ने के दौरान क्या होता है। बोतल के तल पर लगी रबर शीट को नीचे खींचने पर बोतल के अंदर की जगह बढ़ जाती है, जिससे हवा गुब्बारे में प्रवेश कर उसे फुला देती है — यह श्वास लेने (inhalation) जैसा है, जहाँ डायाफ्राम नीचे जाने पर छाती में जगह बढ़ती है। रबर शीट को ऊपर धकेलने पर जगह घटती है और दाब बढ़ता है, जिससे हवा गुब्बारे से बाहर निकल जाती है — यह श्वास छोड़ने (exhalation) जैसा है, जहाँ डायाफ्राम शिथिल होकर ऊपर उठता है।
क्रियाकलाप 9.3 (पृष्ठ 131) — चूने के पानी से जाँच: परखनली B (छोड़ी गई हवा) का चूने का पानी दूधिया हो जाता है, जबकि परखनली A (बाहरी हवा) में कोई परिवर्तन नहीं होता। निष्कर्ष: छोड़ी गई हवा में कार्बन डाइऑक्साइड होती है — चूने का पानी कार्बन डाइऑक्साइड के साथ अभिक्रिया कर कैल्सियम कार्बोनेट बनाता है, जो दूधियापन देता है। यह पुष्टि करता है कि छोड़ी गई हवा में अंदर ली गई हवा से अधिक कार्बन डाइऑक्साइड होती है।
अध्याय 10: पादपों में जैव प्रक्रम
अंतिम प्रश्नावली — सभी 12 प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: पाठ्य-पुस्तक के भीतर के प्रश्न
प्र. 1: पौधों में स्टार्च बनने में सूर्य का प्रकाश किस प्रकार सहायक होता है? (पृष्ठ 141)
हल: सूर्य का प्रकाश प्रकाश-संश्लेषण (photosynthesis) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जो वह प्रक्रिया है जिससे पौधे अपना भोजन बनाते हैं। पत्तियों में मौजूद क्लोरोफिल सूर्य के प्रकाश को अवशोषित करता है। इस प्रकाश-ऊर्जा को कार्बन डाइऑक्साइड व जल के साथ उपयोग कर पौधे प्रकाश-संश्लेषण के दौरान ग्लूकोज़ बनाते हैं, जो बाद में पौधे में स्टार्च के रूप में संचित होता है।
प्र. 2: पौधों में भोजन बनाने की प्रक्रिया में वायु की कौन-सी गैस आवश्यक है? (पृष्ठ 143)
हल: कार्बन डाइऑक्साइड पौधों को भोजन बनाने के लिए आवश्यक है।
खंड: आइए अपने सीखने को बढ़ाएँ (अंतिम अभ्यास प्रश्न)
प्र. 1: दी गई तालिका पूर्ण कीजिए (प्रकाश-संश्लेषण के अभिकारक व उत्पाद)।
हल: प्रकाश-संश्लेषण के अभिकारक: कार्बन डाइऑक्साइड, जल, सूर्य का प्रकाश (क्लोरोफिल की उपस्थिति में)। उत्पाद: ग्लूकोज़ (भोजन) और ऑक्सीजन। समीकरण: कार्बन डाइऑक्साइड + जल →(सूर्य प्रकाश, क्लोरोफिल)→ ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन। (मूल तालिका के सटीक रिक्त स्थानों हेतु पाठ्यपुस्तक से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
प्र. 2: कल्पना कीजिए कि पृथ्वी पर प्रकाश-संश्लेषण करने वाले सभी जीव लुप्त हो जाएं। इसका जीवों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
हल: यदि प्रकाश-संश्लेषण करने वाले सभी जीव लुप्त हो जाएं, तो अन्य जीवों के लिए भोजन या ऑक्सीजन का उत्पादन रुक जाएगा। इससे खाद्य शृंखला टूट जाएगी, क्योंकि पौधे शाकाहारी जीवों को भोजन और सभी जीवों को श्वसन हेतु ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। इन जीवों के बिना, पृथ्वी पर जीवन जीवित नहीं रह पाएगा।
प्र. 3: आलू के टुकड़े में आयोडीन घोल से स्टार्च की उपस्थिति दिखती है। आलू में स्टार्च कहाँ से आता है? पौधे में भोजन कहाँ संश्लेषित होता है और आलू तक कैसे पहुँचता है?
हल: आलू में मौजूद स्टार्च, पत्तियों में प्रकाश-संश्लेषण के दौरान बने ग्लूकोज़ से बनता है। प्रकाश-संश्लेषण पत्तियों में होता है, जहाँ ग्लूकोज़ भोजन के रूप में बनता है। यह ग्लूकोज़ पौधे के माध्यम से आलू तक पहुँचाया जाता है और वहाँ स्टार्च के रूप में संचित हो जाता है।
प्र. 4: क्या पत्तियों की चौड़ी व चपटी संरचना पौधों को प्रकाश-संश्लेषण में अधिक कुशल बनाती है? कारण सहित बताइए।
हल: हाँ, पत्तियों की चौड़ी व चपटी आकृति पौधों को प्रकाश-संश्लेषण अधिक कुशलता से करने में मदद करती है। यह संरचना क्लोरोफिल को अधिक सूर्य-प्रकाश अवशोषित करने के लिए बड़ा सतही क्षेत्रफल प्रदान करती है। यह रंध्रों (stomata) के माध्यम से गैसों के आदान-प्रदान को भी बेहतर बनाती है, जिससे प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रिया और बेहतर होती है।
प्र. 5: X, Y की सहायता से टूटकर कार्बन डाइऑक्साइड, Z और ऊर्जा मुक्त करता है: X + Y → कार्बन डाइऑक्साइड + Z + ऊर्जा। X, Y और Z क्या हैं?
हल: X — ग्लूकोज़; Y — ऑक्सीजन; Z — जल। (यह समीकरण श्वसन की प्रक्रिया को दर्शाता है।)
प्र. 6: कृष्णा ने समान आकार के दो गमले वाले पौधों से प्रयोग किया — एक को धूप में और दूसरे को अँधेरे कमरे में रखा (चित्र 10.10)। (i) वह किस विचार की जाँच कर रही है? (ii) दोनों स्थितियों में पौधों में क्या दृश्य अंतर हैं? (iii) किस पौधे की पत्तियाँ आयोडीन परीक्षण में स्टार्च की पुष्टि करेंगी?
हल: (i) वह यह जाँच रही है कि क्या पौधों में प्रकाश-संश्लेषण के लिए सूर्य का प्रकाश आवश्यक है। (ii) धूप वाला पौधा स्वस्थ व हरा दिखता है क्योंकि वह प्रकाश-संश्लेषण कर पाता है; अँधेरे कमरे वाला पौधा कमज़ोर, पीला व फीका दिखता है क्योंकि वह प्रभावी ढंग से प्रकाश-संश्लेषण नहीं कर पाता। (iii) धूप में रखे पौधे की पत्तियाँ आयोडीन परीक्षण में सकारात्मक परिणाम देंगी, जो स्टार्च की उपस्थिति की पुष्टि करेगा।
प्र. 7: वाणी का मानना है कि ‘प्रकाश-संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड आवश्यक है’। इसकी पुष्टि/खंडन हेतु उसने चित्र 10.11 जैसा प्रयोग सेटअप किया — (a) धूप+CO₂ (b) धूप बिना CO₂ (c) अँधेरा+CO₂ (d) अँधेरा बिना CO₂। (i) किस पौधे में स्टार्च बनेगा? (ii) किसमें नहीं बनेगा? (iii) किसमें ऑक्सीजन उत्पन्न होगी? (iv) किसमें नहीं होगी?
हल: (i) केवल उस पौधे में स्टार्च बनेगा जो धूप में है और जिसे कार्बन डाइऑक्साइड मिल रही है। (ii) धूप+CO₂ वाले पौधे को छोड़कर शेष सभी में स्टार्च नहीं बनेगा। (iii) केवल धूप+CO₂ वाले पौधे में ऑक्सीजन निकलेगी। (iv) धूप+CO₂ वाले पौधे को छोड़कर किसी में ऑक्सीजन उत्पन्न नहीं होगी।
प्र. 8: अनन्या ने चार परखनलियाँ A, B, C, D तीन-चौथाई पानी से भरीं — A में घोंघा, B में जलीय पौधा, C में घोंघा व पौधा दोनों, D में केवल पानी रखा। सभी में कार्बन डाइऑक्साइड सूचक मिलाकर 2-3 घंटे बाद रंग परिवर्तन देखा। वह क्या जानना चाहती है? वह अपने निष्कर्ष की पुष्टि कैसे करेगी?
हल: अनन्या यह जानना चाहती है कि श्वसन व प्रकाश-संश्लेषण की प्रक्रियाएँ पानी में कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को कैसे प्रभावित करती हैं। परखनली A (केवल घोंघा) — सूचक पीला/नारंगी होगा (घोंघे के श्वसन से CO₂ बढ़ी)। परखनली B (केवल पौधा) — सूचक नीला/बैंगनी होगा (पौधे ने प्रकाश-संश्लेषण हेतु CO₂ का उपयोग किया)। परखनली C (घोंघा+पौधा) — रंग तटस्थ या हल्का नीला रह सकता है (संतुलन — घोंघे की CO₂ पौधे द्वारा उपयोग हो जाती है)। परखनली D (केवल पानी) — कोई रंग परिवर्तन नहीं (कोई जीव CO₂ छोड़ने/लेने वाला नहीं)।
प्र. 9: पौधों में जल परिवहन गरम या ठंडी परिस्थितियों में तेज़ होता है, यह जाँचने हेतु एक प्रयोग डिज़ाइन कीजिए।
हल: दो समान गमले वाले पौधे लें — एक को गरम स्थान (धूप/हीटर के पास) और दूसरे को ठंडी/छायादार जगह रखें। पानी में खाद्य रंग की कुछ बूँदें मिलाकर दोनों पौधों को बराबर पानी दें। कुछ घंटों बाद देखें कि रंगीन पानी तने व पत्तियों में कितनी दूर तक पहुँचा। गरम परिस्थिति वाला पौधा रंगीन पानी की तेज़ गति दिखाएगा, क्योंकि अधिक तापमान वाष्पन बढ़ाकर पौधे में जल-परिवहन को तेज़ कर देता है।
प्र. 10: प्रकाश-संश्लेषण और श्वसन प्रकृति में संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं — चर्चा कीजिए।
हल: प्रकाश-संश्लेषण और श्वसन मिलकर पर्यावरण में गैसों का संतुलन बनाए रखते हैं। प्रकाश-संश्लेषण में पौधे सूर्य-प्रकाश, जल और कार्बन डाइऑक्साइड का उपयोग कर भोजन बनाते हैं और ऑक्सीजन छोड़ते हैं। श्वसन में पौधे और जंतु दोनों ऑक्सीजन का उपयोग कर भोजन से ऊर्जा मुक्त करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं। गैसों का यह निरंतर आदान-प्रदान ऑक्सीजन व कार्बन डाइऑक्साइड के स्तर को संतुलित रखता है, जिससे पृथ्वी पर जीवन संभव हो पाता है।
खंड: प्रमुख क्रियाकलाप — निष्कर्ष (Activities 10.1–10.8)
क्रियाकलाप 10.1 (पृष्ठ 138-139), तालिका 10.1 — प्रकाश व जल का पौध-वृद्धि पर प्रभाव: गमला A (धूप+जल) — 2 सप्ताह बाद सबसे लंबा पौधा, अधिकतम पत्तियाँ, हरी पत्तियाँ — सर्वोत्तम वृद्धि। गमला B (धूप, बिना जल) — कम पत्तियाँ, पीली पत्तियाँ — जल की कमी से खराब वृद्धि। गमला C (अँधेरा+जल) — सबसे कम वृद्धि, मुरझाया, पीली पत्तियाँ। निष्कर्ष: अधिकतम वृद्धि गमला A में, न्यूनतम वृद्धि गमला C में — पौधों की स्वस्थ हरी वृद्धि के लिए प्रकाश आवश्यक है।
क्रियाकलाप 10.2 (पृष्ठ 140-141) — पत्ती में स्टार्च परीक्षण: पत्ती का रंग आयोडीन डालने पर नीला-काला होने पर स्टार्च की उपस्थिति सिद्ध होती है।
क्रियाकलाप 10.3 (पृष्ठ 141-142), तालिका 10.2 — पत्ती के हरे व गैर-हरे भागों में स्टार्च: निष्कर्ष: प्रकाश-संश्लेषण व स्टार्च निर्माण केवल पत्ती के हरे भागों में होता है क्योंकि वहाँ क्लोरोफिल होता है; प्रकाश-संश्लेषण के लिए सूर्य-प्रकाश आवश्यक है, इसके बिना पत्तियों में स्टार्च नहीं बन सकता।
क्रियाकलाप 10.4 (पृष्ठ 143-144) — क्लोरोफिल व वायु की भूमिका जाँच: कास्टिक सोडा वाली बोतल के अंदर की पत्ती का भाग आयोडीन से नीला-काला नहीं हुआ (कास्टिक सोडा ने प्रकाश-संश्लेषण हेतु आवश्यक CO₂ सोख ली, इसलिए स्टार्च नहीं बना)। बोतल के बाहर का भाग नीला-काला हुआ (उसे CO₂ मिली और प्रकाश-संश्लेषण हो सका)। निष्कर्ष: पौधों में स्टार्च निर्माण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड आवश्यक है।
क्रियाकलाप 10.5 (पृष्ठ 145) — प्रकाश-संश्लेषण में ऑक्सीजन मुक्त होने का प्रयोग: धूप वाले सेटअप A की उलटी परखनली में बुलबुले जमा होते हैं; अँधेरे वाले सेटअप B में कोई बुलबुले नहीं बनते। परखनली में जलती तीली डालने पर लौ अधिक तेज़ जलती है, जो पुष्टि करता है कि यह गैस ऑक्सीजन है। निष्कर्ष: प्रकाश-संश्लेषण के दौरान ऑक्सीजन गैस मुक्त होती है।
क्रियाकलाप 10.6 (पृष्ठ 147) — पत्ती के छिलके की जाँच: पत्ती के छिलके पर सूक्ष्म रंध्र (छिद्र) दिखते हैं, जिन्हें रंध्र (stomata) कहते हैं — ये गैसों के आदान-प्रदान में सहायक होते हैं।
क्रियाकलाप 10.7 व 10.8 (पृष्ठ 148-149) — पौधों में जल परिवहन: रंगीन पानी में रखी टहनी में जल व खनिज जाइलम (xylem) नामक पतली नलिकाओं द्वारा जड़ों से पूरे पौधे में पहुँचते हैं। बीजों वाले फ्लास्क से जुड़ी परखनली का चूने का पानी दूधिया हो जाता है (बीजों के श्वसन से निकली CO₂ के कारण), जबकि अलग परखनली में कोई परिवर्तन नहीं होता। निष्कर्ष: पौधे भी मनुष्यों की तरह श्वसन करते हैं और कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ते हैं।
अध्याय 11: प्रकाश — छाया एवं परावर्तन
अंतिम प्रश्नावली — सभी 17 प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: पाठ्य-पुस्तक के भीतर के प्रश्न
प्र. 1: जब कोई अपारदर्शी वस्तु प्रकाश के मार्ग को रोकती है, तो क्या होता है? (पृष्ठ 157)
हल: जब प्रकाश किसी अपारदर्शी वस्तु से टकराता है, तो वह उसके आर-पार नहीं जा पाता, जिससे वस्तु के पीछे सतह या पर्दे पर एक अँधेरा क्षेत्र बनता है, जिसे छाया (shadow) कहते हैं।
प्र. 2: जब अपारदर्शी वस्तु चमकदार थी (जैसे पॉलिश किया स्टील प्लेट), तो पर्दे पर छाया तो बनी, पर विपरीत दीवार पर एक चमकीला धब्बा भी दिखा। एसा क्यों हुआ? (पृष्ठ 159)
हल: पॉलिश की गई चमकदार प्लेट जैसी अपारदर्शी वस्तु प्रकाश का परावर्तन (reflection) करती है, इसलिए चमकीला धब्बा बनता है।
प्र. 3: दर्पण में मैं अपना चेहरा भी देख सकता हूं। क्या यह भी प्रकाश के परावर्तन के कारण है? (पृष्ठ 160)
हल: हाँ, हम दर्पण में अपना चेहरा प्रकाश के परावर्तन के कारण ही देख पाते हैं।
प्र. 4: अब समझ आया कि एम्बुलेंस पर “ECNALUBMA” क्यों लिखा होता है — आगे वाले वाहन के पिछले (रियर-व्यू) दर्पण से देखने पर यह “AMBULANCE” पड़़ा जाता है। (पृष्ठ 162)
हल: एम्बुलेंस के आगे के भाग पर शब्द को उलटे (दर्पण-प्रतिबिंब) रूप में लिखा जाता है ताकि वह आगे चल रहे वाहनों के रियर-व्यू मिरर में सामान्य रूप से दिखे। ऐसा दर्पणों द्वारा पार्श्व-प्रतिलोमन (lateral inversion) के कारण होता है।
प्र. 5: क्या किसी वस्तु का प्रतिबिंब केवल दर्पण में ही देखा जा सकता है, या अन्य तरीके भी हैं? (पृष्ठ 162)
हल: हम किसी वस्तु का प्रतिबिंब पर्दे पर, पारदर्शी पदार्थों के माध्यम से, या पिनहोल कैमरा जैसे उपकरणों की सहायता से भी देख सकते हैं।
खंड: आइए अपने सीखने को बढ़ाएँ (अंतिम अभ्यास प्रश्न)
प्र. 1: निम्नलिखित में से कौन-सी स्वयं-प्रकाशित (luminous) वस्तुएँ हैं? मंगल, चंद्रमा, ध्रुव तारा, सूर्य, शुक्र, दर्पण।
हल: सूर्य और ध्रुव तारा स्वयं-प्रकाशित वस्तुएँ हैं क्योंकि ये अपना प्रकाश स्वयं उत्पन्न करते हैं। इसके विपरीत शुक्र, मंगल, चंद्रमा और दर्पण अस्वयं-प्रकाशित (non-luminous) वस्तुएँ हैं, क्योंकि ये स्वयं प्रकाश उत्पन्न नहीं करतीं।
प्र. 2: स्तंभ A को स्तंभ B से मिलाइए: (i) पिनहोल कैमरा (ii) अपारदर्शी वस्तु (iii) पारदर्शी वस्तु (iv) छाया।
हल: (i) पिनहोल कैमरा → उलटा प्रतिबिंब बनाता है। (ii) अपारदर्शी वस्तु → प्रकाश को पूर्णतः रोकती है। (iii) पारदर्शी वस्तु → प्रकाश लगभग पूर्ण रूप से इसके आर-पार जाता है। (iv) छाया → वस्तु के पीछे बना अँधेरा क्षेत्र।
प्र. 3: साहिल, रेखा, पैट्रिक और कासिमा चित्र 11.16 में दिखाए अनुसार पाइप से मोमबत्ती की लौ देखने का प्रयास कर रहे हैं। कौन लौ देख पाएगा?
हल: केवल रेखा मोमबत्ती की लौ देख पाएगी, क्योंकि प्रकाश सीधी रेखा में चलता है और उसकी दृष्टि-रेखा सीधे लौ के साथ संरेखित है। बाकी लोग पाइप के सीधे मार्ग पर न होने के कारण लौ नहीं देख पाएंगे।
प्र. 4: चित्र 11.17 में दिए विकल्पों में से लड़के की छाया बनने का सही चित्र चुनिए।
हल: लड़के की छाया की स्थिति प्रकाश-स्रोत की दिशा पर निर्भर करती है। यदि प्रकाश ऊपर से आ रहा है तो छाया लड़के के नीचे बनेगी; यदि प्रकाश बगल से आ रहा है तो छाया विपरीत दिशा में बनेगी। (सही विकल्प का चयन मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र 11.17 पर निर्भर है; चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
प्र. 5: चित्र 11.18 में एक स्थिर टॉर्च के सामने गेंद रखकर दीवार पर छाया बनाई गई है। स्थिति (i) में गेंद टॉर्च के पास है, स्थिति (ii) में गेंद दीवार के पास है। दोनों स्थितियों की छाया का सही निरूपण चुनिए।
हल: स्थिति (i) में गेंद टॉर्च के पास और दीवार से दूर है, इसलिए दीवार पर बड़ी व धुंधली छाया बनेगी। स्थिति (ii) में गेंद दीवार के पास और टॉर्च से दूर है, इसलिए छोटी व स्पष्ट छाया बनेगी। (विकल्प (a)/(b) का सटीक चयन चित्र 11.18 पर निर्भर है; मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
प्र. 6: चित्र 11.18 के आधार पर स्तंभ A (टॉर्च की स्थिति) को स्तंभ B (छाया की विशेषताएँ) से मिलाइए: (i) टॉर्च गेंद के पास (ii) टॉर्च दूर (iii) गेंद हटा दी जाए (iv) दो टॉर्च गेंद के बाईं ओर हों।
हल: (i) टॉर्च गेंद के पास → छाया बड़ी होगी। (ii) टॉर्च दूर → छाया छोटी होगी। (iii) गेंद हटा दी जाए → पर्दे पर चमकीला धब्बा दिखेगा। (iv) दो टॉर्च → पर्दे पर दो छायाएँ दिखेंगी।
प्र. 7: चित्र 11.19 में दिखाए पेड़ को पिनहोल कैमरे से देखने पर बने प्रतिबिंब की रूपरेखा बनाइए।
हल: पिनहोल कैमरे में पेड़ का प्रतिबिंब उलटा (उल्टा-सीधा, ऊपर-नीचे व बाएँ-दाएँ परिवर्तित) बनेगा, क्योंकि प्रकाश सीधी रेखा में यात्रा कर छिद्र से पार होकर पर्दे पर विपरीत दिशा में केंद्रित होता है। (यह प्रश्न प्रत्यक्ष रेखाचित्र बनाने पर आधारित है — विद्यार्थी को स्वयं रेखाचित्र बनाना है।)
प्र. 8: कागज़ पर अपना नाम लिखकर समतल दर्पण के सामने इस प्रकार रखें कि कागज़ दर्पण के समांतर हो। प्रतिबिंब बनाइए। क्या अंतर दिखता है? कारण बताइए।
हल: समतल दर्पण में देखने पर प्रतिबिंब पार्श्व-प्रतिलोपित (laterally inverted) दिखता है, अर्थात वह क्षैतिज रूप से पलटा हुआ होता है। परिणामस्वरूप आपके नाम के अक्षर उलटे दिखते हैं, क्योंकि दर्पण बायाँ व दायाँ पक्ष आपस में बदल देता है।
प्र. 9: मित्र की सहायता से सुबह 9 बजे, दोपहर 12 बजे और शाम 4 बजे अपनी छाया की लंबाई मापिए। (i) किस समय छाया सबसे छोटी होगी? (ii) एसा क्यों होता है?
हल: (i) दोपहर 12 बजे छाया सबसे छोटी होगी, क्योंकि उस समय सूर्य लगभग सीधे सिर के ऊपर होता है। (ii) दोपहर 12 बजे सूर्य आकाश में अपनी सबसे ऊँची स्थिति में होता है, जिससे सूर्य-किरणों और ज़मीन के बीच का कोण लगभग 90 डिग्री हो जाता है, और इस कारण छाया बहुत छोटी बनती है।
प्र. 10: निम्नलिखित कथनों के आधार पर सही विकल्प चुनिए: कथन A: समतल दर्पण द्वारा बना प्रतिबिंब पार्श्व-प्रतिलोपित होता है। कथन B: अक्षर T और O का प्रतिबिंब समतल दर्पण में स्वयं जैसा ही दिखता है। (i) दोनों सत्य (ii) दोनों असत्य (iii) A सत्य, B असत्य (iv) A असत्य, B सत्य
हल: (i) दोनों कथन सत्य हैं। समतल दर्पण पार्श्व-प्रतिलोपित प्रतिबिंब बनाता है, जिसमें बायाँ-दायाँ पलट जाता है, और T तथा 0 जैसे कुछ अक्षर समतल दर्पण में अपरिवर्तित (वैसे ही) दिखते हैं क्योंकि वे सममिति (symmetrical) होते हैं।
प्र. 11: चित्र 11.20 जैसी आकृति की एक नली और नली के व्यास से छोटे दो समतल दर्पण दिए गए हैं। क्या इस नली से पेरिस्कोप बनाया जा सकता है? यदि हाँ, तो दर्पण कहाँ लगाएंगे?
हल: हाँ, इस नली से पेरिस्कोप बनाया जा सकता है। दोनों दर्पणों को नली के भीतर एक-दूसरे से 45° के कोण पर लगाना चाहिए, ताकि प्रकाश नली के साथ-साथ परावर्तित होकर आँख तक पहुँचे, जिससे बाधाओं के ऊपर या आस-पास देखा जा सके।
प्र. 12: आकाश में ऊँची उड़ान भरते पक्षी की छाया ज़मीन पर नहीं दिखती, पर जब पक्षी ज़मीन के पास आकर झपट्टा मारता है तो छाया दिखने लगती है। सोचकर कारण बताइए।
हल: जब पक्षी ऊँची उड़ान भरता है, तो सूर्य की किरणें तीव्र (steep) कोण पर पड़़ती हैं, जिससे बहुत छोटी और धुंधली छाया बनती है जो लगभग अदृश्य होती है। जब पक्षी ज़मीन के पास आता है, तो सूर्य-प्रकाश के कोण के कारण छाया बड़ी और स्पष्ट रूप से ज़मीन पर दिखाई देने लगती है।
खंड: प्रमुख क्रियाकलाप — निष्कर्ष (Activities 11.1–11.10)
क्रियाकलाप 11.1 (पृष्ठ 155): जब तीनों माचिस-डिब्बों के छिद्र एक सीध में हों, तो टॉर्च का प्रकाश सभी छिद्रों से गुज़रकर पर्दे पर चमकीला धब्बा बनाता है। छिद्र सीध में न होने पर प्रकाश नहीं गुज़र पाता। निष्कर्ष: प्रकाश सीधी रेखा में चलता है।
क्रियाकलाप 11.2 (पृष्ठ 155): सीधे पाइप से मोमबत्ती की लौ दिखती है, पर मुड़े हुए पाइप से नहीं — क्योंकि प्रकाश सीधी रेखा में चलता है।
क्रियाकलाप 11.3 (पृष्ठ 156-157), तालिका 11.1 — विभिन्न पदार्थों से प्रकाश का गुज़रना: कागज़ — अपारदर्शी, प्रकाश बिल्कुल नहीं गुज़रता। काँच — पारदर्शी (नोट: यहाँ स्रोत सामग्री में एक विसंगति पाई गई; सामान्यतः काँच पारदर्शी होता है)। ट्रेसिंग पेपर — पारभासी, आंशिक प्रकाश गुज़रता है। मोटा कपड़़ा — अपारदर्शी। मोम-कागज़ — पारभासी, आंशिक प्रकाश। पानी — पारदर्शी, प्रकाश पूर्ण रूप से गुज़रता है। निष्कर्ष: पारदर्शी पदार्थ प्रकाश को पूर्ण रूप से गुज़रने देते हैं; पारभासी पदार्थ आंशिक रूप से; अपारदर्शी पदार्थ बिल्कुल नहीं।
क्रियाकलाप 11.4 (पृष्ठ 158-159), तालिका 11.2 — छाया संबंधी प्रेक्षण: पर्दा हटाने पर छाया नहीं दिखती; वस्तु हटाने पर छाया नहीं बनती; टॉर्च बंद करने पर छाया नहीं बनती; वस्तु को पर्दे के पास लाने पर छाया छोटी होती है; वस्तु को टॉर्च के पास लाने पर छाया बड़ी होती है; वस्तु तिरछी करने पर छाया का आकार बदलता है; वस्तु का रंग बदलने पर छाया का रंग नहीं बदलता। निष्कर्ष: छाया बनने के लिए प्रकाश-स्रोत, अपारदर्शी वस्तु और पर्दा तीनों आवश्यक हैं; वस्तु का रंग छाया के रंग को प्रभावित नहीं करता, पर वस्तु की स्थिति छाया के आकार व आकृति को प्रभावित करती है।
क्रियाकलाप 11.5 (पृष्ठ 159-160): चमकदार स्टील प्लेट या दर्पण को अलग-अलग दिशा में झुकाने पर दीवार पर चमकीला धब्बा दिखता है, और कोण बदलने से धब्बे की दिशा भी बदलती है। निष्कर्ष: चमकदार सतह से प्रकाश की दिशा में यह परिवर्तन परावर्तन (reflection) कहलाता है।
क्रियाकलाप 11.6 (पृष्ठ 160): संकरी ढ़िर्री से गुज़रकर पर्दे पर पड़़ने वाला प्रकाश-किरण-पुंज सीधी रेखा में चलता है; समतल दर्पण रखने पर इसकी दिशा बदल जाती है। निष्कर्ष: यह परावर्तन है।
क्रियाकलाप 11.7 (पृष्ठ 161): समतल दर्पण में प्रतिबिंब दर्पण के पीछे, वस्तु के समान आकार का व सीधा (erect) बनता है, परंतु इसे पर्दे पर नहीं पकड़ा जा सकता।
क्रियाकलाप 11.8 (पृष्ठ 161-162): समतल दर्पण में प्रतिबिंब दर्पण के पीछे उतनी ही दूरी पर बनता है जितनी वस्तु दर्पण के आगे है; वस्तु पास आने पर प्रतिबिंब भी पास आता है, दूर जाने पर दूर जाता है। समतल दर्पण पार्श्व-प्रतिलोमन भी करता है — दायाँ पक्ष बायाँ दिखता है और बायाँ पक्ष दाया।
क्रियाकलाप 11.9 (पृष्ठ 163) — पिनहोल कैमरा: छोटे छिद्र वाले कार्डबोर्ड के सामने जलती मोमबत्ती रखने पर, लौ का प्रकाश छिद्र से गुज़रकर पीछे के पर्दे पर मोमबत्ती का उलटा (उल्टा-सीधा) प्रतिबिंब बनाता है।
अध्याय 12: पृथ्वी, चंद्रमा एवं सूर्य
अंतिम प्रश्नावली — सभी 18 प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: पाठ्य-पुस्तक के भीतर के प्रश्न
प्र. 1: पृथ्वी के घूर्णन के कारण दिन और रात कैसे होते हैं? (पृष्ठ 172)
हल: पृथ्वी अपनी धुरी पर पश्चिम से पूर्व दिशा में घूर्णन करती है, जिससे दिन और रात होते हैं। जैसे-जैसे पृथ्वी घूमती है, सूर्य के सामने वाले भाग में दिन होता है, जबकि सूर्य से विमुख भाग में रात होती है।
प्र. 2: चूँकि पृथ्वी घूर्णन कर रही है, तो क्या तारों को भी सूर्य की तरह आकाश में गति करते हुए दिखना चाहिए? (पृष्ठ 174)
हल: हाँ, क्योंकि पृथ्वी पश्चिम से पूर्व की ओर घूमती है, तारे भी सूर्य की तरह आकाश में पूर्व से पश्चिम की ओर गति करते प्रतीत होते हैं। यह गति केवल आभासी (apparent) है और पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूर्णन के कारण होती है।
प्र. 3: वर्ष भर रात के आकाश में अलग-अलग तारे क्यों दिखाई देते हैं? (पृष्ठ 175)
हल: हम वर्ष के विभिन्न समयों में रात में अलग-अलग तारे देखते हैं क्योंकि पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है। जैसे-जैसे पृथ्वी अपनी कक्षा में गति करती है, रात में दिखने वाला आकाश का भाग बदलता जाता है, जिससे अलग-अलग महीनों में भिन्न तारे व तारामंडल दिखाई देते हैं।
प्र. 4: हम हर वर्ष ओरीतुओं के चक्र से गुज़रते हैं। क्या यह किसी तरह पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा से जुड़ा है? (पृष्ठ 177)
हल: हाँ, ओर्तुओं में परिवर्तन पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा से जुड़ा है। जैसे-जैसे पृथ्वी सूर्य के चारों ओर घूमती है, उसकी ढ़ुकी हुई धुरी (tilted axis) के कारण विभिन्न क्षेत्रों को वर्ष के अलग-अलग समय पर अलग-अलग मात्रा में सूर्य-प्रकाश मिलता है, जिससे ओर्तुएँ बनती हैं।
प्र. 5: गर्मियों में दिन सर्दियों की तुलना में लंबे क्यों होते हैं? (पृष्ठ 177)
हल: पृथ्वी की धुरी के ढ़ुकाव के कारण गर्मियों में दिन सर्दियों की तुलना में लंबे होते हैं। गर्मियों के दौरान पृथ्वी का एक क्षेत्र सूर्य की ओर ढ़ुका होता है, जिससे उसे प्रतिदिन अधिक समय तक सूर्य-प्रकाश मिलता है।
प्र. 6: क्या पृथ्वी और सूर्य के बीच परिक्रमा कर रहे दो ग्रह सूर्य के प्रकाश को रोक सकते हैं? (पृष्ठ 179)
हल: नहीं, बुध और शुक्र आमतौर पर सूर्य-प्रकाश को नहीं रोक पाते, क्योंकि दोनों ग्रह सूर्य की तुलना में बहुत छोटे हैं और पृथ्वी से दूर स्थित हैं। यद्यपि वे कभी-कभी पृथ्वी और सूर्य के बीच से गुज़रते हैं, वे सूर्य के प्रकाश का केवल एक बहुत छोटा हिस्सा ढकते हैं, जो पृथ्वी से लगभग अदृश्य होता है।
खंड: आइए अपने सीखने को बढ़ाएँ (अंतिम अभ्यास प्रश्न)
प्र. 1: चित्र 12.17 में, पृथ्वी के एक पूर्ण घूर्णन के दौरान उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव को कितने घंटे सूर्य-प्रकाश मिलता है?
हल: दिए चित्र में उत्तरी ध्रुव अंधकार में दिखाया गया है, जो उत्तरी गोलार्ध में सर्दी का संकेत है। इस समय उत्तरी ध्रुव को कोई सूर्य-प्रकाश नहीं मिलता, जबकि दक्षिणी ध्रुव, जहाँ गर्मी है, को पृथ्वी के एक पूर्ण घूर्णन के दौरान 24 घंटे सूर्य-प्रकाश मिलता है। यह पृथ्वी की धुरी के ढ़ुकाव के कारण होता है।
प्र. 2: रिक्त स्थान भरिए: (i) तारे ______ में उगते हैं और ______ में अस्त होते हैं। (ii) दिन और रात पृथ्वी के ______ के कारण होते हैं। (iii) जब चंद्रमा हमारे दृष्टिकोण से सूर्य को पूर्णतः ड़क लेता है, तो इसे ______ सूर्य ग्रहण कहते हैं।
हल: (i) पूर्व, पश्चिम। (ii) घूर्णन (rotation)। (iii) पूर्ण (total)।
प्र. 3: बताइए सत्य है या असत्य: (i) चंद्र ग्रहण तब होता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा के बीच आ जाता है। (ii) गुजरात में सूर्योदय ढ़ारखंड से पहले होता है। (iii) चेन्नई में सबसे लंबा दिन ग्रीष्म संक्रांति (summer solstice) पर होता है। (iv) सूर्य ग्रहण को नंगी आँखों से सीधे देखना चाहिए। (v) पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा दिन-रात का कारण है।
हल: (i) असत्य — चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है (कथन में सूर्य व पृथ्वी की भूमिका उलट है)। (ii) असत्य — ढ़ारखंड (अधिक पूर्व में स्थित) में सूर्योदय गुजरात से पहले होता है, न कि गुजरात में ढ़ारखंड से पहले। (iii) असत्य — चेन्नई भूमध्य रेखा के निकट होने से इसके दिन की लंबाई में मौसमी अंतर अन्य उत्तरी क्षेत्रों जितना स्पष्ट नहीं होता; सामान्य कथन के रूप में यह सटीक नहीं है। (iv) असत्य — सूर्य ग्रहण को कभी भी नंगी आँखों से सीधे नहीं देखना चाहिए, इससे आँखों को गंभीर नुकसान हो सकता है; प्रमाणित सोलर-फ़िल्टर चश्मे या अप्रत्यक्ष विधियों का प्रयोग करना चाहिए। (v) असत्य — दिन-रात पृथ्वी के अपनी धुरी पर घूर्णन के कारण होते हैं, सूर्य के चारों ओर परिक्रमा के कारण नहीं (परिक्रमा ओर्तुओं का कारण है)।
प्र. 4: पद्मश्री ने कल रात 8 बजे मृगशीर्ष (ओरायन) तारामंडल को लगभग सिर के ऊपर देखा। आज वह इसे कब देखेगी?
हल: पृथ्वी की परिक्रमा के कारण पद्मश्री हर दिन ओरायन तारामंडल को लगभग 4 मिनट पहले देखेगी। यदि उसने कल रात 8:00 बजे देखा था, तो आज वह इसे लगभग शाम 7:56 बजे देखेगी।
प्र. 5: नंदिनी ने 21 जून की मध्यरात्रि को तारों के एक समूह को उगते देखा। वह अगले वर्ष उन्हीं तारों को मध्यरात्रि को उगते हुए कब देखेगी?
हल: पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा के कारण तारे प्रतिदिन लगभग 4 मिनट पहले उगते हैं। पूरे वर्ष में यह दैनिक बदलाव जुड़कर लगभग 24 घंटे (एक दिन) के बराबर हो जाता है। परिणामस्वरूप, नंदिनी अगले वर्ष उन्हीं तारों को 20 जून की मध्यरात्रि को उगते हुए देखेगी, क्योंकि उनका उदय-समय कैलेंडर पर हर वर्ष एक दिन पहले खिसक जाता है।
प्र. 6: अभय ने देखा कि जब भारत में दिन होता है, तो अमेरिका में रह रहे उसके चाचा सामान्यतः सो रहे होते हैं क्योंकि वहाँ रात होती है। इस अंतर का कारण क्या है?
हल: पृथ्वी के घूर्णन के कारण विश्व में अलग-अलग समय-क्षेत्र (time zones) बनते हैं। भारत समय के मामले में अमेरिका से आगे है, इसलिए जब भारत में दिन होता है, अमेरिका में रात होती है, और अभय के चाचा सो रहे होते हैं।
प्र. 7: चार मित्रों ने सूर्य ग्रहण देखने के लिए ये तरीके अपनाए: (i) रविकिरण ने सोलर-एक्लिप्स चश्मा प्रयोग किया। (ii) ज्योति ने दर्पण से सूर्य का प्रतिबिंब प्रक्षेपित किया। (iii) आदित्य ने सीधे नंगी आँखों से सूर्य देखा। (iv) अरुणा ने तारामंडल (planetarium) द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया। इनमें से कौन लापरवाह था?
हल: (iii) आदित्य लापरवाह था क्योंकि उसने सीधे सूर्य की ओर देखा, जो आँखों को गंभीर नुकसान पहुँचा सकता है। सूर्य ग्रहण देखने के सुरक्षित तरीकों में प्रमाणित सोलर-एक्लिप्स चश्मा, अप्रत्यक्ष अवलोकन विधियाँ, या मार्गदर्शित कार्यक्रम शामिल हैं।
प्र. 8: चित्र 12.18 के वृत्तों को सूर्य, चंद्रमा, पृथ्वी में से उचित नामों से भरिए।
हल: सूर्य ग्रहण की स्थिति में क्रम होगा: सूर्य — चंद्रमा — पृथ्वी (चंद्रमा बीच में)। चंद्र ग्रहण की स्थिति में क्रम होगा: सूर्य — पृथ्वी — चंद्रमा (पृथ्वी बीच में)। (सटीक वृत्त-लेबलिंग मूल पाठ्यपुस्तक के चित्र 12.18 पर निर्भर है; चित्र से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
प्र. 9: चंद्रमा सूर्य से बहुत छोटा है, फिर भी पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान यह सूर्य को हमारे दृष्टिकोण से पूर्णतः ड़क लेता है। एसा कैसे संभव है?
हल: पृथ्वी से देखने पर चंद्रमा और सूर्य लगभग एक जैसे आकार के दिखते हैं, भले ही चंद्रमा वास्तव में बहुत छोटा है। एसा इसलिए है क्योंकि चंद्रमा, सूर्य की तुलना में पृथ्वी के बहुत निकट है। परिणामस्वरूप, पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ड़क सकता है।
प्र. 10: भारतीय क्रिकेट टीम के ऑस्ट्रेलिया में मैच अक्सर दिसंबर में होते हैं। उन्हें सर्दी या गर्मी के कपड़े ले जाने चाहिए?
हल: उन्हें गर्मी के कपड़े ले जाने चाहिए। ऑस्ट्रेलिया में दिसंबर गर्मी का महीना है क्योंकि यह दक्षिणी गोलार्ध में स्थित है, जहाँ ओर्तुएँ भारत के विपरीत होती हैं। इसलिए जब भारत में दिसंबर में सर्दी होती है, ऑस्ट्रेलिया में गर्मी होती है।
प्र. 11: चंद्र ग्रहण पृथ्वी के बड़े भाग से देखा जा सकता है, पर पूर्ण सूर्य ग्रहण पृथ्वी के केवल एक छोटे भाग से ही क्यों देखा जा सकता है?
हल: चंद्र ग्रहण पृथ्वी के बड़े क्षेत्र से देखा जा सकता है क्योंकि पृथ्वी की छाया बड़ी होती है और चंद्रमा को लंबे समय तक ढकती है, जिससे रात्रि वाले भाग में मौजूद हर कोई इसे देख सकता है। इसके विपरीत, पूर्ण सूर्य ग्रहण केवल कुछ मिनटों के लिए और सीमित क्षेत्र से ही दिखाई देता है, क्योंकि चंद्रमा की छाया छोटी होती है और चंद्रमा की गति व पृथ्वी के घूर्णन के कारण यह पृथ्वी पर तेड़ी से खिसकती है।
प्र. 12: यदि पृथ्वी की धुरी परिक्रमा-तल के सापेक्ष ढ़ुकी हुई न होती, तो ओर्तुओं पर क्या प्रभाव पड़़ता?
हल: यदि पृथ्वी की धुरी ढ़ुकी हुई न होती, तो ओर्तुएँ अस्तित्व में ही न होतीं। पृथ्वी के सभी क्षेत्रों को वर्ष भर लगभग समान मात्रा में सूर्य-प्रकाश मिलता, जिससे मौसम लगभग स्थिर बना रहता। तब न गर्मी होती, न सर्दी, न वसंत, न शरद ओतु, और दिन-रात की लंबाई प्रतिदिन लगभग बराबर बनी रहती।
खंड: प्रमुख क्रियाकलाप — निष्कर्ष (Activities 12.1–12.4)
क्रियाकलाप 12.1 (पृष्ठ 170): घूमते हुए ढ़ूले (मेरी-गो-राउंड) पर बैठने पर आस-पास की वस्तुएँ विपरीत दिशा में गति करती प्रतीत होती हैं। इसी प्रकार, पृथ्वी के पश्चिम से पूर्व घूर्णन के कारण सूर्य पूर्व से पश्चिम की ओर गति करता प्रतीत होता है — यह सूर्य की आभासी गति वास्तव में पृथ्वी के घूर्णन के कारण होती है।
क्रियाकलाप 12.2 (पृष्ठ 171-172): ग्लोब और टॉर्च की सहायता से यह दिखाया जाता है कि पृथ्वी के पश्चिम से पूर्व घूर्णन से दिन-रात कैसे होते हैं — जैसे-जैसे पृथ्वी घूमती है, विभिन्न क्षेत्र सूर्य-प्रकाश में आकर दिन का अनुभव करते हैं, फिर अंधकार में जाकर रात का।
क्रियाकलाप 12.3 (पृष्ठ 174): यह क्रियाकलाप दिखाता है कि पृथ्वी के पश्चिम से पूर्व घूर्णन के कारण रात के आकाश में तारे गति करते प्रतीत होते हैं। ध्रुव तारा पृथ्वी की धुरी के निकट होने के कारण लगभग स्थिर दिखता है, जबकि सप्तर्षि (Big Dipper) उसके चारों ओर घूमता प्रतीत होता है।
क्रियाकलाप 12.4 (पृष्ठ 180): अंगूठे से मित्र के सिर को ढकने के प्रयास से यह पता चलता है कि किसी वस्तु का आभासी आकार उसके वास्तविक आकार और प्रेक्षक से दूरी दोनों पर निर्भर करता है। सूर्य चंद्रमा से बहुत बड़ा होने पर भी पृथ्वी से दोनों लगभग समान आकार के दिखते हैं, क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी के बहुत निकट है — इसीलिए सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह ड़क सकता है।
Class 7 Science – Notes and Extra Questions
Along with these NCERT Solutions, students can also use the Class 7 Science Extra Questions and Class 7 Science Revision Notes for quick revision and extra practice.

