कक्षा 8 (हिंदी मीडियम) की गणित पाठ्यपुस्तक गणित प्रकाश, भाग 1 (NCERT, NEP 2020 / NCF-SE 2023 पाठ्यक्रम, 2026-27 सत्र) के सभी 7 अध्यायों के लिए “Figure It Out” शैली में हल किए गए प्रतिनिधि (representative) उदाहरण नीचे दिए गए हैं। नई किताब में पुराने क्रमांकित अभ्यासों की जगह हर टॉपिक के बाद गतिविधि-आधारित प्रश्न (Figure It Out) दिए गए हैं, इसलिए यहां हर अध्याय की मुख्य अवधारणा पर आधारित हल किए गए उदाहरण दिए गए हैं।
अध्याय 1: वर्ग और घन
अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
Figure It Out — पृष्ठ 10-11 (वर्ग संख्याएँ)
प्र. 1: निम्न में से कौन-सी संख्याएँ पूर्ण वर्ग नहीं हैं — (i) 2032 (ii) 2048 (iii) 1027 (iv) 1089?
हल: कोई भी पूर्ण वर्ग संख्या इकाई अंक पर केवल 0, 1, 4, 5, 6, 9 पर ही समाप्त होती है। (i) 2032 इकाई अंक 2 पर समाप्त — पूर्ण वर्ग नहीं। (ii) 2048 इकाई अंक 8 पर — पूर्ण वर्ग नहीं। (iii) 1027 इकाई अंक 7 पर — पूर्ण वर्ग नहीं। (iv) 1089 = 33² — पूर्ण वर्ग है।
प्र. 2: 64², 108², 292², 36² में से किसका इकाई अंक 4 है?
हल: इकाई अंक 4 वाला वर्ग केवल उन संख्याओं का बनता है जिनका इकाई अंक 2 या 8 हो। 108 (इकाई 8) और 292 (इकाई 2) — अतः 108² और 292² का इकाई अंक 4 है।
प्र. 3: दिया है 125² = 15625, तो 126² का मान क्या है? विकल्प: (i) 15625+126 (ii) 15625+262 (iii) 15625+253 (iv) 15625+251 (v) 15625+512
हल: 126² = (125+1)² = 125²+2×125×1+1² = 15625+250+1 = 15625+251। अतः सही विकल्प (iv) 15625+251 है (जाँच: 126²=15876)।
प्र. 4: एक वर्ग का क्षेत्रफल 441 मी² है; उसकी भुजा की लंबाई ज्ञात करें।
हल: भुजा = √441 = 21 मी।
प्र. 5: 4, 9 और 10 — तीनों से विभाज्य सबसे छोटी वर्ग संख्या ज्ञात करें।
हल: ल.स.प.(4,9,10) = 180 = 2²×3²×5। पूर्ण वर्ग बनाने हेतु 5 का घातांक सम करना होगा, अतः 180 को 5 से गुणा करें = 900 = 30²। अतः उत्तर = 900।
प्र. 6: 9408 को किस सबसे छोटी संख्या से गुणा करने पर गुणनफल पूर्ण वर्ग बने? उस गुणनफल का वर्गमूल भी ज्ञात करें।
हल: 9408 = 2⁶ × 3 × 7² (अभाज्य गुणनखंड)। घातांक 3¹ विषम है, अतः 3 से गुणा करना होगा। गुणनफल = 9408×3 = 28224 = 2⁶×3²×7² = 168²। अतः 3 से गुणा करें; वर्गमूल = 168।
प्र. 7: निम्न क्रमागत संख्याओं के वर्गों के बीच कितनी संख्याएँ हैं — (i) 16 और 17 (ii) 99 और 100?
हल: n और (n+1) के वर्गों के बीच सदैव 2n संख्याएँ होती हैं। (i) 2×16 = 32 संख्याएँ। (ii) 2×99 = 198 संख्याएँ।
प्र. 8: निम्न प्रतिरूप में रिक्त स्थान भरें: 1²+2²+2²=3²; 2²+3²+6²=7²; 3²+4²+12²=13²; 4²+5²+20²=(__)²; 9²+10²+(__)²=(__)²।
हल: प्रतिरूप: n²+(n+1)²+[n(n+1)]² = [n(n+1)+1]²। n=4 के लिए: 4×5=20, 20+1=21 ⟹ 4²+5²+20² = 21²। n=9 के लिए: 9×10=90, 90+1=91 ⟹ 9²+10²+90² = 91²।
प्र. 9: दी गई आकृति में कुल कितने छोटे वर्ग (tiny squares) हैं? उस संख्या का अभाज्य गुणनखंडन घातांक रूप में लिखें।
हल: कुल छोटे वर्ग = 2025 = 45² = 3⁴×5² (यह आकृति-आधारित प्रश्न है; गणना दिए गए स्रोतों में सुसंगत रूप से 2025 ही मिलती है, फिर भी मूल आकृति से गिनती मिलाना उचित रहेगा)।
Figure It Out — पृष्ठ 16-17 (घन संख्याएँ)
प्र. 1: 27000 और 10648 के घनमूल ज्ञात करें।
हल: 27000 = 30³ ⟹ ∛27000 = 30। 10648 = 22³ ⟹ ∛10648 = 22।
प्र. 2: 1323 को किस संख्या से गुणा करने पर वह घन संख्या बन जाए?
हल: 1323 = 3³ × 7² (अभाज्य गुणनखंड)। घन बनाने हेतु 7 का घातांक 3 करना होगा, अतः 7 से गुणा करें; गुणनफल = 9261 = 21³।
प्र. 3: सत्य/असत्य बताएँ और कारण दें: (i) किसी विषम संख्या का घन सम होता है। (ii) कोई भी पूर्ण घन 8 पर समाप्त नहीं होता। (iii) किसी 2-अंकीय संख्या का घन 3-अंकीय हो सकता है। (iv) किसी 2-अंकीय संख्या के घन में 7 या अधिक अंक हो सकते हैं। (v) घन संख्याओं के गुणनखंडों की संख्या विषम होती है।
हल:
(i) असत्य — विषम×विषम×विषम = विषम, अतः विषम संख्या का घन भी विषम होता है।
(ii) असत्य — जैसे 2³=8 और 12³=1728, दोनों 8 पर समाप्त होते हैं।
(iii) असत्य — सबसे छोटी 2-अंकीय संख्या 10 का घन 1000 है, जो 4-अंकीय है; अतः किसी भी 2-अंकीय संख्या का घन 3-अंकीय नहीं हो सकता।
(iv) असत्य — सबसे बड़ी 2-अंकीय संख्या 99 का घन 970299 है, जो केवल 6-अंकीय है; अतः 7 या अधिक अंक कभी नहीं बनते।
(v) असत्य — विषम संख्या में गुणनखंड होना पूर्ण वर्गों का गुण है, घन संख्याओं का सामान्यतः नहीं (जब तक वे स्वयं वर्ग भी न हों)।
प्र. 4: बिना गुणनखंडन किए 1331 का घनमूल अनुमानित करें। इसी प्रकार 4913, 12167 और 32768 के घनमूल भी अनुमानित करें।
हल: इकाई अंक व शेष अंकों की सीमा से अनुमान लगाने पर — ∛1331=11, ∛4913=17, ∛12167=23, ∛32768=32।
प्र. 5: निम्न में सबसे बड़ा कौन है? कारण बताएं — (i) 67³−66³ (ii) 43³−42³ (iii) 67²−66² (iv) 43²−42²?
हल: गणना करने पर — 67³−66³=13267; 43³−42³=5419; 67²−66²=133; 43²−42²=85। अतः सबसे बड़ा — (i) 67³−66³ = 13267 (घनों का अंतर वर्गों के अंतर से कहीं अधिक तेज़ी से बढ़ता है)।
अध्याय 2: घातों का खेल
अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
Figure It Out — पृष्ठ 22-23
प्र. 1: निम्न को घातांक रूप में लिखें — (i) 6×6×6×6 (ii) y×y (iii) b×b×b×b (iv) 5×5×7×7×7 (v) 2×2×a×a (vi) a×a×a×c×c×c×c×d।
हल: (i) 6⁴ (ii) y² (iii) b⁴ (iv) 5²×7³ (v) 2²×a² (vi) a³×c⁴×d।
प्र. 2: निम्न को अभाज्य गुणनखंडों के घातांक रूप में लिखें — 648, 405, 540, 3600।
हल: 648 = 2³×3⁴; 405 = 3⁴×5; 540 = 2²×3³×5; 3600 = 2⁴×3²×5²।
प्र. 3: संख्यात्मक मान ज्ञात करें — (i) 2×10³ (ii) 7²×2³ (iii) 3×4⁴ (iv) (−3)²×(−5)² (v) 3²×10⁴ (vi) (−2)⁵×(−10)⁶।
हल: (i) 2000 (ii) 392 (iii) 768 (iv) 225 (v) 90,000 (vi) −32,000,000।
Figure It Out — पृष्ठ 44-45
प्र. 1: 2²²⁴ ÷ 4³² के मान में इकाई अंक ज्ञात करें। [संकेत: 4=2²]
हल: 4³² = (2²)³² = 2⁶⁴। अतः 2²²⁴÷2⁶⁴ = 2^(224−64) = 2¹⁶⁰। 2 की घातों के इकाई अंक 4 की आवृत्ति में चलते हैं (2,4,8,6…)। 160, 4 से पूर्ण विभाज्य है (शेष 0), जो चक्र के चौथे पद अर्थात 6 के अनुरूप है। अतः इकाई अंक = 6।
प्र. 2: एक पात्र में 5 बोतलें हैं। प्रतिदिन एक नया पात्र (उतनी ही 5 बोतलों वाला) लाया जाता है। 40 दिनों बाद कुल कितनी बोतलें होंगी?
हल: प्रतिदिन 5 बोतलें जुड़ती हैं, अतः यह एक समान (linear) वृद्धि है, घातांकीय नहीं। 40 दिनों में कुल बोतलें = 5×40 = 200 बोतलें।
प्र. 3: निम्न संख्याओं को दो या अधिक घातों के गुणनफल के रूप में तीन भिन्न-भिन्न तरीकों से लिखें (घातांक कोई भी पूर्णांक हो सकते हैं) — (i) 64³ (ii) 192⁸ (iii) 32⁻⁵।
हल:
(i) 64³: चूँकि 8²=64, अतः 64³=(8²)³=8⁶ = 8²×8⁴। अथवा 64³ = 64⁵÷64² = 64⁵×64⁻²। अथवा 64 = 2⁶ प्रयोग कर 64³ = 2¹⁸ = 2⁸×2¹⁰।
(ii) 192⁸: 192⁸ = 192⁶×192²। अथवा 192=3×64=3×2⁶ प्रयोग कर 192⁸=3⁸×2⁴⁸। अथवा 192⁸ = 192¹⁰÷192² = 192¹⁰×192⁻²।
(iii) 32⁻⁵: 32⁻⁵ = 32⁻²×32⁻³। अथवा 32=2⁵ प्रयोग कर 32⁻⁵=2⁻²⁵। अथवा 32⁻⁵ = 32⁻⁸×32³।
प्र. 4: निम्न कथनों की जाँच करें — ‘सदैव सत्य’, ‘कभी-कभी सत्य’ या ‘कभी सत्य नहीं’: (i) घन संख्याएँ वर्ग संख्याएँ भी होती हैं। (ii) चतुर्थ घातें वर्ग संख्याएँ भी होती हैं। (iii) किसी संख्या की पाँचवीं घात उसी संख्या के घन से विभाज्य होती है। (iv) दो घन संख्याओं का गुणनफल घन संख्या होता है। (v) q⁴⁶ चौथी और छठी दोनों घात है (q अभाज्य)।
हल:
(i) कभी-कभी सत्य — n³=n² केवल तभी जब संख्या छठी घात (n⁶) हो, जैसे 4³=64=8²।
(ii) सदैव सत्य — n⁴=(n²)², अतः हर चतुर्थ घात एक वर्ग संख्या भी है।
(iii) सदैव सत्य — n⁵÷n³=n², जो सदैव पूर्णांक होता है।
(iv) सदैव सत्य — a³×b³=(ab)³, जो सदैव घन संख्या है।
(v) कभी सत्य नहीं — 46, न तो 4 से न 6 से विभाज्य है, अतः q⁴⁶ को न चतुर्थ घात, न छठी घात के रूप में लिखा जा सकता है।
प्र. 5: निम्न को सरल कर घातांक रूप में लिखें — (i) 10⁻²×10⁻⁵ (ii) 5⁷÷5⁴ (iii) 9⁻⁷÷9⁴ (iv) (13⁻²)⁻³ (v) m⁵n¹²(mn)⁹।
हल: (i) 10⁻⁷ (ii) 5³ (iii) 9⁻¹¹ (iv) 13⁶ (v) m⁵n¹²×m⁹n⁹ = m¹⁴n²¹।
प्र. 6: यदि 12²=144 है, तो ज्ञात करें — (i) (1.2)² (ii) (0.12)² (iii) (0.012)² (iv) 120²।
हल: (i) (1.2)²=(12/10)²=144/100=1.44। (ii) (0.12)²=(12/100)²=144/10000=0.0144। (iii) (0.012)²=(12/1000)²=144/1000000=0.000144। (iv) 120²=(12×10)²=144×100=14,400।
प्र. 7: निम्न में बराबर संख्याओं को चिह्नित करें — 2⁴×3⁶, 6⁴×3², 6¹⁰, 18²×6², 6²⁴।
हल: 2⁴×3⁶ को आधार मानें। 6⁴×3² = (2×3)⁴×3² = 2⁴×3⁴×3² = 2⁴×3⁶ ✓ बराबर। 6¹⁰=2¹⁰×3¹⁰ — भिन्न। 18²×6² = (2×3²)²×(2×3)² = 2²×3⁴×2²×3² = 2⁴×3⁶ ✓ बराबर। 6²⁴=2²⁴×3²⁴ — भिन्न। अतः 2⁴×3⁶, 6⁴×3² और 18²×6² आपस में बराबर हैं।
प्र. 8: निम्न में बड़ी संख्या पहचानें — (i) 4³ या 3⁴ (ii) 2⁸ या 8² (iii) 100² या 2¹⁰⁰।
हल: (i) 4³=64, 3⁴=81 ⟹ 3⁴ बड़ा है। (ii) 2⁸=256, 8²=64 ⟹ 2⁸ बड़ा है। (iii) 100²=10,000, जबकि 2¹⁰⁰ एक बहुत बड़ी संख्या (≈1.27×10³⁰) है ⟹ 2¹⁰⁰ बहुत बड़ा है।
प्र. 9: एक डेयरी वर्ष में 8.5 अरब (8.5 billion) दूध के पैकेट बनाने की योजना बना रही है। हर पैकेट के लिए एक विशिष्ट (unique) पहचान कोड (अंक 0-9 का प्रयोग करते हुए) चाहिए। कोड में कितने अंक होने चाहिए?
हल: 8.5 अरब = 8.5×10⁹। n-अंकीय कोड से 10ⁿ संभावनाएँ बनती हैं। 9 अंकों से 10⁹ संभावनाएँ मिलती हैं, जो 8.5×10⁹ से कम हैं — अपर्याप्त। 10 अंकों से 10¹⁰ संभावनाएँ मिलती हैं, जो पर्याप्त हैं। अतः कोड में 10 अंक होने चाहिए।
प्र. 10: 64, एक वर्ग संख्या (8²) भी है और एक घन संख्या (4³) भी। क्या ऐसी अन्य संख्याएँ हैं जो वर्ग व घन दोनों हों? इन्हें सामान्य रूप से कैसे वर्णित करें?
हल: हाँ, जैसे 3⁶=729=27²=9³। सामान्यतः, कोई संख्या वर्ग व घन दोनों तभी होगी जब वह किसी संख्या की छठी घात (n⁶) हो, क्योंकि n⁶=(n³)²=(n²)³ दोनों रूपों में लिखी जा सकती है।
प्र. 11: एक डिजिटल लॉकर का पासकोड 5 अक्षरों/अंकों (alphanumeric) का है — जैसे G89P0, 38098, BRJKW, 003AZ। ऐसे कितने पासकोड संभव हैं?
हल: प्रत्येक स्थान पर 10 अंक (0-9) + 26 अक्षर (A-Z) = 36 विकल्प। कुल पासकोड = 36⁵ = 6,04,66,176।
प्र. 12: विश्व में भेड़ों (2024) की जनसंख्या लगभग 10⁹ है, और बकरियों की भी लगभग उतनी ही है। भेड़ व बकरियों की कुल जनसंख्या क्या होगी? विकल्प: (i) 2⁹ (ii) 10¹¹ (iii) 10¹⁰ (iv) 10¹⁸ (v) 2×10⁹ (vi) 10⁹+10⁹।
हल: कुल जनसंख्या = 10⁹+10⁹ = 2×10⁹। अतः सही विकल्प — (v) 2×10⁹ और (vi) 10⁹+10⁹ (दोनों समान मान के हैं)।
प्र. 13: निम्न की गणना कर वैज्ञानिक संकेतन (scientific notation) में लिखें —
(i) यदि विश्व के हर व्यक्ति के पास 30 वस्त्र हों (जनसंख्या ≈8.2 अरब = 8.2×10⁹), तो कुल वस्त्रों की संख्या ज्ञात करें।
हल: कुल = 30×8.2×10⁹ = 246×10⁹ = 2.46×10¹¹ वस्त्र।
(ii) विश्व में लगभग 10 करोड़ (100 million) मधुमक्खी कॉलोनियाँ हैं; प्रत्येक कॉलोनी में लगभग 50,000 मधुमक्खियाँ हैं। कुल मधुमक्खियों की संख्या ज्ञात करें।
हल: कॉलोनियाँ = 100×10⁶ = 10⁸। प्रति कॉलोनी = 5×10⁴। कुल = 10⁸×5×10⁴ = 5×10¹² मधुमक्खियाँ।
अध्याय 3: संख्याओं की कहानी
अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
यह अध्याय प्राचीन संख्या-पद्धतियों (रोमन, मिस्री, बेबीलोनियाई/मेसोपोटामियाई, गुमुल्गल, आधार-पद्धतियाँ) पर आधारित है और कई उप-खंडों में बँटा है। नीचे प्रत्येक उप-खंड के प्रश्न क्रमवार दिए गए हैं।
खंड 3.1: रीमा की जिज्ञासा (पृष्ठ 54)
प्र. 1: हिन्दू अंकों के बिना, केवल कंकड़ों (pebbles) जैसी वस्तुओं से जोड़, घटाव, गुणा व भाग कैसे किए जा सकते हैं, समझाएँ।
हल: जोड़ के लिए दोनों समूहों के कंकड़ एक ही थैले में मिला दें और गिन लें। घटाव के लिए बड़े समूह से छोटे समूह जितने कंकड़ निकाल दें। गुणा के लिए एक समूह को दूसरे की संख्या जितनी बार दोहराकर एक साथ मिला लें (जैसे 3 का 4 गुना = 3-3-3-3 कंकड़ों के 4 समूह एक साथ)। भाग के लिए कुल कंकड़ों को बराबर-बराबर हिस्सों/थैलों में बाँट दें और प्रति थैला कंकड़ों की संख्या गिनें।
प्र. 2: यदि अक्षर-आधारित पद्धति में a-z से 1-26 दर्शाए जाएँ, तो 27 को कैसे दर्शाएँगे (जैसे “aa”)?
हल: एकल अक्षर a-z से 26 संख्याएँ (1-26) मिलती हैं। इसके आगे दोहरे अक्षर (aa, bb, … आदि) प्रयोग कर अगली 26 संख्याएँ (27-52) दर्शाई जा सकती हैं — अर्थात 27 को “aa” के रूप में दर्शाया जा सकता है। यह पद्धति स्थानीय-मान रहित होने के कारण बड़ी संख्याओं के लिए असुविधाजनक है।
प्र. 3: अपनी स्वयं की एक संख्या-पद्धति बनाएँ।
हल: यह एक खुला (open-ended) रचनात्मक प्रश्न है। उदाहरण: आधार-3 पद्धति में 3⁰=1=A, 3¹=3=B, 3²=9=C को प्रतीक मानकर आगे की संख्याएँ इन्हीं प्रतीकों के दोहराव व संयोजन से बनाई जा सकती हैं (विद्यार्थी अपनी मौलिक पद्धति बनाकर प्रस्तुत करें)।
खंड 3.2: कुछ प्रारंभिक संख्या-पद्धतियाँ (पृष्ठ 59-61)
प्र. 1: निम्न को रोमन अंकों में लिखें — (i) 1222 (ii) 2999 (iii) 302 (iv) 715।
हल: (i) 1222 = 1000+200+20+2 = MCCXXII। (ii) 2999 = 2000+900+90+9 = MMCMXCIX। (iii) 302 = 300+2 = CCCII। (iv) 715 = 700+10+5 = DCCXV।
प्र. 2: प्रशांत महासागर के द्वीपवासी अलग-अलग वस्तुओं के लिए भिन्न-भिन्न गणना-क्रम (counting sequence) क्यों प्रयोग करते थे?
हल: यह वस्तु के प्रकार व समूह के आकार के अनुसार गिनती को सरल व व्यावहारिक बनाने के लिए किया जाता था — जैसे कुछ पद्धतियों में दो-दो करके (in twos) गिनना, केवल एक-एक करके (tally) गिनने से कहीं अधिक कुशल व तेज़ होता है।
प्र. 3: गुमुल्गल (Gumulgal) संख्या-पद्धति (जो हिन्दू अंकों का प्रयोग नहीं करती) में जोड़-घटाव कैसे समझाएँगे? दिए गए व्यंजकों का मान भी ज्ञात करें।
हल: गुमुल्गल पद्धति आधार-2 (base-2) पर आधारित है, जिसमें “उकसार” (urapon) व “उरापोन” जैसे प्रतीक 1 व 2 को दर्शाते हैं और आगे की संख्याएँ इन दो प्रतीकों के संयोजन (जोड़) से बनती हैं — जैसे 3 = 2+1, 4 = 2+2। इसी संयोजन-सिद्धांत से जोड़ व घटाव प्रतीकात्मक रूप से किए जाते हैं।
प्र. 4: हिन्दू संख्या-पद्धति, रोमन पद्धति की तुलना में किन बातों में अधिक कुशल है, बताएँ।
हल: हिन्दू पद्धति में शून्य (0) और स्थानीय मान (place value) प्रणाली है, जो रोमन पद्धति में नहीं है। हिन्दू पद्धति एक स्थानीय-मान पर आधारित (positional) पद्धति है, जिससे बड़ी से बड़ी संख्याएँ कम प्रतीकों में लिखी व आसानी से जोड़ी-घटाई जा सकती हैं, जबकि रोमन पद्धति में यह कठिन है।
खंड 3.3: आधार (Base) की अवधारणा (पृष्ठ 62-70)
प्र. 1 (पृष्ठ 62): निम्न को मिस्री (Egyptian) संख्या-पद्धति में दर्शाएँ — 10458, 1023, 2660, 784, 1111, 70707।
हल: मिस्री पद्धति में हर स्थानीय-मान (1, 10, 100, 1000, 10000, 100000…) का अपना अलग प्रतीक होता है (जैसे छड़ी=1, घोड़े की नाल=10, कुंडली=100 इत्यादि) — संख्या को इन प्रतीकों के आवश्यक संख्या में दोहराव से दर्शाया जाता है (जैसे 10458 = 1 कमल+कुंडली×4+घोड़े की नाल×5+छड़ी×8)। (प्रतीकों का सटीक चित्रण मूल पाठ्यपुस्तक की तालिका से मिलाना उचित रहेगा।)
प्र. 2 (पृष्ठ 62): दिए गए मिस्री अंकों को पढ़ें — दो उदाहरण दिए गए हैं।
हल: पहला = 200+70+6 = 276। दूसरा = 4000+300+20+2 = 4322।
प्र. 1 (पृष्ठ 63): निम्न को आधार-5 पद्धति में लिखें — 15, 50, 137, 293, 651।
हल: आधार-5 में स्थानीय मान 1, 5, 25, 125, 625… होते हैं। इन्हीं की सहायता से हर संख्या को 5 के गुणजों में विभाजित कर दर्शाया जाता है (जैसे 15 = 3×5 = आधार-5 में “30”; 137 = 1×125+0×25+2×5+2×1 = आधार-5 में “1022”)।
प्र. 2 (पृष्ठ 63): क्या सभी संख्याओं को आधार-5 पद्धति में दर्शाया जा सकता है?
हल: नहीं — शून्य (0) को हमारी सामान्य आधार-5 पद्धति में नहीं दर्शाया जा सकता क्योंकि इसमें शून्य के लिए कोई अलग प्रतीक ही नहीं होता (यह पद्धति स्थानीय-मान रहित प्रतीकों पर आधारित है)।
प्र. 3 (पृष्ठ 63): आधार-7 की स्थलचिह्न (landmark) संख्याएँ ज्ञात करें; फिर आधार-n के लिए सामान्य नियम बताएँ।
हल: आधार-7 की स्थलचिह्न संख्याएँ — 7⁰,7¹,7²,7³,7⁴ = 1, 7, 49, 343, 2401। सामान्य नियम: आधार-n की स्थलचिह्न संख्याएँ n की घातें होती हैं — n⁰=1, n¹=n, n², n³…।
प्र. 1 (पृष्ठ 65): पुनर्समूहन (regrouping) करते हुए मिस्री अंकों को जोड़ें।
हल: समान प्रतीकों को साथ मिलाएँ; जब किसी स्थलचिह्न के 10 प्रतीक एकत्र हो जाएँ, तो उन्हें अगले उच्चतर स्थलचिह्न के 1 प्रतीक में बदल दें (जैसे दस “छड़ी” प्रतीक = एक “घोड़े की नाल” प्रतीक)।
प्र. 2 (पृष्ठ 65): आधार-5 में स्थलचिह्न-रूपांतरण द्वारा संख्याओं को जोड़ें।
हल: जब किसी स्थलचिह्न के 5 प्रतीक एकत्र हो जाते हैं, तो वे अगले उच्चतर स्थलचिह्न के 1 प्रतीक के बराबर होते हैं (अर्थात “किसी स्थलचिह्न संख्या का 5 गुना अगली स्थलचिह्न संख्या देता है”) — इसी नियम से पुनर्समूहन करते हुए जोड़ किया जाता है।
प्र. 1 (पृष्ठ 69-70): क्या मिस्री पद्धति में किसी एक प्रतीक की 10 या अधिक बार पुनरावृत्ति हो सकती है?
हल: नहीं — किसी भी स्थलचिह्न संख्या को 10 बार लेने पर वह स्वतः अगली स्थलचिह्न संख्या के 1 प्रतीक में बदल दी जाती है, अतः किसी भी एक प्रतीक की 10 या अधिक पुनरावृत्ति कभी नहीं होती।
प्र. 2 (पृष्ठ 69-70): अपनी खुद की आधार-4 पद्धति बनाएँ; 1 से 16 तक की संख्याएँ इसमें दर्शाएँ।
हल: आधार-4 में स्थलचिह्न संख्याएँ 4⁰=1, 4¹=4, 4²=16 होंगी। इन तीन स्तरों के अपने-अपने प्रतीक चुनकर 1 से 16 तक हर संख्या को इन प्रतीकों की आवश्यक पुनरावृत्ति (अधिकतम 3 बार प्रति स्तर) से व्यवस्थित रूप से दर्शाया जा सकता है — जैसे 16 = एक “16-चिह्न”।
प्र. 3 (पृष्ठ 69-70): आधार-5 पद्धति में किसी स्थलचिह्न संख्या को 5 से गुणा करने का क्या नियम है?
हल: किसी भी स्थलचिह्न संख्या को दूसरी स्थलचिह्न संख्या से गुणा करने पर परिणाम भी एक स्थलचिह्न संख्या ही होता है — अर्थात गुणा करने पर प्रतीक अपने अगले उच्चतर स्थान पर खिसक (shift) जाता है, ठीक वैसे ही जैसे दशमलव पद्धति में 10 से गुणा करने पर अंक एक स्थान बाईं ओर खिसकता है।
खंड 3.4: स्थानीय-मान निरूपण (पृष्ठ 73-80)
प्र. 1 (पृष्ठ 73): निम्न को मेसोपोटामियाई (बेबीलोनियाई, आधार-60/सेक्साजेसिमल) पद्धति में लिखें — 63, 132, 200, 60, 3605।
हल: मेसोपोटामियाई पद्धति आधार-60 पर आधारित है, जिसमें “कील” (wedge) आकार के दो मूल प्रतीक (1 के लिए एवं 10 के लिए) प्रयोग होते हैं, और 60 पहुँचने पर अगले स्थानीय-मान पर स्थानांतरण (shift) होता है (जैसे 63 = 1×60+3; 132 = 2×60+12; 3605 = 1×3600+0×60+5)।
प्र. 1 (पृष्ठ 80): “ज़ोंग” (Zong) व “हेंग” (Heng) जैसे प्रतीक बारी-बारी से क्यों प्रयोग किए जाते थे? यदि केवल ज़ोंग प्रतीक से 41 लिखा जाए तो क्या होगा?
हल: गलत अर्थ (misinterpretation) की संभावना से बचने के लिए बारी-बारी प्रतीक प्रयोग किए जाते थे, ताकि आसन्न अंकों में गड़बड़ी न हो। यदि केवल ज़ोंग प्रतीकों से 41 लिखा जाए, तो यह चार खड़ी रेखाओं (| | | |) की एक अस्पष्ट श्रृंखला जैसा दिखेगा, जिसका सही अर्थ निकालना कठिन हो जाएगा।
प्र. 2 (पृष्ठ 80): आधार-2 की स्थानीय-मान पद्धति (उकसार/उरापोन) की गुमुल्गल पद्धति से तुलना करें।
हल: दोनों का आधार 2 समान है, परंतु आधार-2 स्थानीय-मान पद्धति में अनेक स्थलचिह्न संख्याएँ (1,2,4,8…) होती हैं, जबकि गुमुल्गल पद्धति में केवल दो ही स्थलचिह्न संख्याएँ (1 और 2) होती हैं और आगे की संख्याएँ इन्हीं दो के संयोजन से बनती हैं।
प्र. 3 (पृष्ठ 80): हिन्दू अंकों व शून्य (0) का दैनिक जीवन में कहाँ महत्व है? इनके बिना जीवन कैसा होता?
हल: जहाँ भी हमें बड़ी इकाई-संख्याएँ पढ़नी या कोई भी गणना करनी होती है, वहाँ ये अत्यंत उपयोगी हैं। इनके बिना सभी गणनाएँ बहुत बोझिल व जटिल हो जातीं, और आधुनिक कंप्यूटर तक अस्तित्व में नहीं होते (क्योंकि द्विआधारी/स्थानीय-मान पद्धति ही डिजिटल गणना का आधार है)।
प्र. 4 (पृष्ठ 80): आधार-10 संख्या 25 को आधार-8, आधार-5 और आधार-2 में बदलें।
हल: आधार-8: 25 = 3×8+1 ⟹ 31 (आधार 8 में)। आधार-5: 25 = 1×25+0×5+0 ⟹ 100 (आधार 5 में)। आधार-2: 25 = 16+8+1 ⟹ 11001 (आधार 2 में)।
अध्याय 4: चतुर्भुज
अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
Figure It Out — पृष्ठ 94 (आयत व वर्ग)
प्र. 1: दिए गए आयतों के अंदर शेष सभी कोण ज्ञात करें (विकर्ण खींचे गए हैं)।
हल: आयत के विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं और बराबर होते हैं, जिससे विकर्णों द्वारा बने त्रिभुज समद्विबाहु होते हैं — इसी गुण व सरल रेखा के कोणों के योग (180°) का प्रयोग कर शेष कोण ज्ञात किए जाते हैं। (सटीक कोण-मान दी गई आकृति के आरंभिक कोण पर निर्भर करते हैं — पाठ्यपुस्तक की मूल आकृति से मिलान करने की सलाह दी जाती है।)
प्र. 2: ऐसा चतुर्भुज बनाएँ जिसके विकर्ण बराबर लंबाई (8 सेमी) के हों, एक-दूसरे को समद्विभाजित करें, और निम्न कोणों पर काटें — (i) 30° (ii) 40° (iii) 90° (iv) 140°।
हल: हर स्थिति में विकर्ण AB व CD की लंबाई 8 सेमी रखकर, उन्हें बिंदु M पर समद्विभाजित करते हुए दिए गए कोण पर खींचें, फिर शीर्षों को क्रमवार मिलाएँ। (i), (ii), (iv) में बना चतुर्भुज सदैव एक आयत होगा (चूँकि विकर्ण बराबर व समद्विभाजित हैं)। (iii) 90° की स्थिति में बना चतुर्भुज एक वर्ग होगा, क्योंकि यहाँ विकर्ण बराबर, समद्विभाजित व परस्पर लंबवत तीनों हैं।
प्र. 3: केंद्र O वाले एक वृत्त में PL व AM दो परस्पर लंबवत व्यास हैं। चतुर्भुज APML कैसा है?
हल: APML एक वर्ग है। दोनों व्यास त्रिज्या के बराबर भागों में केंद्र O पर समद्विभाजित होते हैं (अतः विकर्ण बराबर व समद्विभाजित हैं), और चूँकि PL⊥AM है, अतः विकर्ण परस्पर लंबवत भी हैं — यही वर्ग की पहचान है।
प्र. 4: मान लीजिए हमारे पास कागज़ नहीं, परंतु बराबर लंबाई की दो छड़ियाँ व एक धागा है। इनकी सहायता से ठीक 90° का कोण कैसे बनाएँगे?
हल: दोनों छड़ियों को उनके मध्य-बिंदुओं (midpoints) पर एक स्क्रू/पिन से जोड़ दें, फिर छड़ियों के चारों सिरों को धागे से आपस में इस प्रकार जोड़ें कि सभी चार दूरियाँ बराबर हो जाएँ — इस स्थिति में छड़ियों के बीच बना कोण स्वतः ठीक 90° हो जाता है (क्योंकि तब बना चतुर्भुज एक वर्ग/समचतुर्भुज होता है जिसके विकर्ण परस्पर लंबवत हैं)।
प्र. 5: क्या “सम्मुख भुजाएँ समांतर हों” को आयत की परिभाषा माना जा सकता है? क्या हर वह चतुर्भुज जिसकी सम्मुख भुजाएँ समांतर व बराबर हों, आयत ही होगा?
हल: नहीं। सम्मुख भुजाओं का समांतर व बराबर होना केवल समांतर चतुर्भुज (parallelogram) की शर्त है — इससे कोणों के 90° होने की गारंटी नहीं मिलती। अतः यह आयत की उपयुक्त परिभाषा नहीं है; आयत के लिए अतिरिक्त शर्त “सभी कोण 90° के हों” आवश्यक है।
Figure It Out — पृष्ठ 102-105 (समांतर चतुर्भुज व समचतुर्भुज)
प्र. 1: दिए गए चतुर्भुजों में शेष कोण ज्ञात करें — (i) समांतर चतुर्भुज PEAR, जिसका एक कोण 40° है (ii) समांतर चतुर्भुज PQRS, जिसका एक कोण 70° है (iii) समचतुर्भुज UVWX।
हल: समांतर चतुर्भुज में सम्मुख कोण बराबर होते हैं और संलग्न (adjacent) कोणों का योग 180° होता है। (i) PEAR: कोण = 40°, 140°, 40°, 140°। (ii) PQRS: कोण = 70°, 110°, 70°, 110°। (iii) समचतुर्भुज UVWX में विकर्ण कोणों को समद्विभाजित करते हैं और परस्पर लंबवत होते हैं — इसी गुण का प्रयोग कर शेष कोण ज्ञात करें (सटीक मान दिए गए प्रारंभिक कोण पर निर्भर है; मूल आकृति से मिलान करें)।
प्र. 2: ऐसा समांतर चतुर्भुज बनाएँ जिसके विकर्ण 7 सेमी व 5 सेमी हों और 140° के कोण पर काटें।
हल: विकर्ण AC=7 सेमी खींचें; मध्य-बिंदु O चिह्नित करें; O पर 140° का कोण बनाएँ; इस रेखा पर O से दोनों ओर 2.5 सेमी (अर्थात 5/2) नाप कर बिंदु B, D अंकित करें; अंत में A,B,C,D को क्रमवार मिलाकर समांतर चतुर्भुज पूर्ण करें (चूँकि विकर्ण एक-दूसरे को समद्विभाजित करते हैं, यह अनिवार्यतः समांतर चतुर्भुज बनेगा)।
प्र. 3: ऐसा समचतुर्भुज बनाएँ जिसके विकर्ण 4 सेमी व 5 सेमी हों।
हल: दो परस्पर लंबवत रेखाएँ खींचकर उनके प्रतिच्छेद बिंदु O पर एक विकर्ण पर दोनों ओर 2 सेमी (4/2) व दूसरे पर दोनों ओर 2.5 सेमी (5/2) नापें; शीर्षों को क्रमवार मिलाने पर समचतुर्भुज ACBD प्राप्त होता है (चूँकि विकर्ण परस्पर लंबवत व समद्विभाजित हैं, पर बराबर नहीं)।
गतिविधि (पृष्ठ 103): दो बराबर लंबाई की छड़ियों को उनके मध्य-बिंदुओं पर जोड़कर सिरों को मिलाने पर कैसा चतुर्भुज बनता है? यदि एक विकर्ण को दोनों ओर 2 सेमी बढ़ा दिया जाए तो क्या बनेगा?
हल: बराबर छड़ियों (बराबर व समद्विभाजित विकर्णों) से वर्ग बनता है — क्योंकि विकर्ण बराबर, समद्विभाजित व परस्पर लंबवत हैं। एक विकर्ण को असमान बना देने (2 सेमी बढ़ाने) पर विकर्ण अब बराबर नहीं रहेंगे, केवल समद्विभाजित व परस्पर लंबवत रहेंगे — अतः बना चतुर्भुज अब समचतुर्भुज होगा।
गतिविधि (पृष्ठ 104-105): 8 सेमी, 8 सेमी, 6 सेमी भुजाओं वाले दो समद्विबाहु त्रिभुजों को जोड़कर कौन-कौन से चतुर्भुज बनाए जा सकते हैं? इसी प्रकार 6, 9, 12 सेमी भुजाओं वाले स्केलीन त्रिभुजों से क्या-क्या बनता है?
हल: समद्विबाहु त्रिभुजों को 6 सेमी वाली भुजा पर जोड़ने से समचतुर्भुज (सभी भुजाएँ 8 सेमी) बनता है; 8 सेमी वाली भुजा पर जोड़ने से एक सामान्य समांतर चतुर्भुज बनता है। स्केलीन त्रिभुजों को सबसे बड़ी भुजा (12 सेमी) पर जोड़ने से एक पतंग (kite) बनती है; अन्य भुजाओं (6 या 9 सेमी) पर जोड़ने से सामान्य समांतर चतुर्भुज बनते हैं।
Figure It Out — पृष्ठ 107-109 (पतंग व समलंब)
प्र. 1: 4 सेमी भुजा वाले दो समबाहु त्रिभुजों को जोड़कर बने चतुर्भुज की सभी भुजाएँ व कोण ज्ञात करें।
हल: सभी भुजाएँ = 4 सेमी प्रत्येक (समचतुर्भुज बनता है)। कोण = 60°, 120°, 60°, 120° (समबाहु त्रिभुज के 60° कोण जुड़कर एक ओर 120° तथा दूसरी ओर 60° बनाते हैं)।
प्र. 2: ऐसी पतंग (kite) बनाएँ जिसके विकर्ण 6 सेमी व 8 सेमी हों।
हल: एक विकर्ण (6 सेमी) खींचें; दूसरा विकर्ण (8 सेमी) पहले को लंबवत रूप से इस प्रकार काटे कि केवल एक ही विकर्ण समद्विभाजित हो (पतंग में केवल मुख्य विकर्ण भुजाओं-सहित समद्विभाजित होता है, दोनों नहीं) — शीर्षों को मिलाने पर वांछित पतंग प्राप्त होगी।
प्र. 3: दिए गए समलंबों (trapeziums) में शेष कोण ज्ञात करें।
हल: समलंब में समांतर भुजाओं के बीच की एक ही ओर के कोणों का योग 180° होता है। पहला समलंब (135°, 105° दिए गए): शेष कोण = 45°, 75°। दूसरा (समद्विबाहु समलंब, एक कोण 100° दिया गया): आधार कोण बराबर होते हैं, शेष कोण = 80°, 100°, 80°।
प्र. 4: समांतर चतुर्भुज, पतंग, समचतुर्भुज, आयत व वर्ग को दर्शाता वेन आरेख बनाएँ। फिर बताएँ — (i) कौन-सा चतुर्भुज पतंग व समांतर चतुर्भुज दोनों है? (ii) क्या कोई चतुर्भुज पतंग व आयत दोनों हो सकता है? (iii) क्या हर पतंग एक समचतुर्भुज है?
हल: (i) समचतुर्भुज (पतंग की शर्त — दो जोड़ी संलग्न बराबर भुजाएँ — व समांतर चतुर्भुज की शर्त — सम्मुख भुजाएँ बराबर — दोनों मिलकर सभी चार भुजाएँ बराबर बनाती हैं)। (ii) हाँ, संभव है — वर्ग (जो पतंग व आयत दोनों की शर्तें एक साथ पूरी करता है)। (iii) नहीं, हर पतंग समचतुर्भुज नहीं होती (सामान्य पतंग में केवल दो जोड़ी संलग्न भुजाएँ बराबर होती हैं, चारों नहीं) — परंतु इसका विलोम सत्य है, अर्थात हर समचतुर्भुज एक पतंग अवश्य होता है।
प्र. 5: यदि PAIR व RODS दो आयत हैं, तो ∠IOD ज्ञात करें।
हल: समांतर रेखाओं व कोणों के गुणों का प्रयोग करने पर — ∠IOD = 30° (यह प्रश्न आकृति में दिए गए विशिष्ट कोण-मानों पर आधारित है; पाठ्यपुस्तक की मूल आकृति से पुष्टि करने की सलाह दी जाती है)।
प्र. 6: बिना चाँदे (protractor) के 6 सेमी विकर्ण वाला वर्ग बनाएँ।
हल: 6 सेमी की एक रेखा AB खींचें; उसका लंब समद्विभाजक (perpendicular bisector) बनाएँ (कंपास से); इस लंब समद्विभाजक पर केंद्र से दोनों ओर 3 सेमी (6/2) नाप कर बिंदु C, D अंकित करें; A,C,B,D को क्रमवार मिलाने पर वांछित वर्ग प्राप्त होगा (चूँकि विकर्ण बराबर, समद्विभाजित व परस्पर लंबवत हैं)।
प्र. 7: यदि CASE एक वर्ग है और U, V, W, X इसकी भुजाओं के मध्य-बिंदु हैं, तो UVWX कैसा चतुर्भुज है?
हल: UVWX भी एक वर्ग है। मध्य-बिंदु प्रमेय के अनुसार UVWX की सभी भुजाएँ बराबर होती हैं और सभी कोण 90° के बनते हैं (क्योंकि वर्ग के विकर्ण बराबर व परस्पर लंबवत होते हैं, जिससे मध्य-बिंदुओं से बना चतुर्भुज भी वही गुण प्राप्त करता है)।
प्र. 8: यदि किसी चतुर्भुज की चारों भुजाएँ बराबर हों और एक कोण 90° हो, तो क्या वह वर्ग होगा?
हल: हाँ। चारों भुजाएँ बराबर होने से यह पहले से ही एक समचतुर्भुज है; समचतुर्भुज में सम्मुख कोण बराबर व संलग्न कोणों का योग 180° होता है — अतः एक कोण 90° होते ही शेष तीनों कोण भी स्वतः 90° हो जाते हैं, जिससे यह वर्ग बन जाता है।
प्र. 9: जिस चतुर्भुज की सम्मुख भुजाएँ बराबर हों, वह किस प्रकार का चतुर्भुज है?
हल: ऐसा चतुर्भुज समांतर चतुर्भुज होता है। विकर्ण खींचकर बने त्रिभुजों की सर्वांगसमता (SSS) से एकांतर कोण बराबर सिद्ध होते हैं, जिससे सम्मुख भुजाएँ परस्पर समांतर भी सिद्ध हो जाती हैं — यही समांतर चतुर्भुज की परिभाषा है।
प्र. 10: क्या किसी अवतल (concave) चतुर्भुज के भी सभी कोणों का योग 360° होता है?
हल: हाँ। किसी भी चतुर्भुज (उत्तल हो या अवतल) को एक विकर्ण द्वारा सदैव दो त्रिभुजों में बाँटा जा सकता है, और प्रत्येक त्रिभुज के कोणों का योग 180° होता है — अतः चतुर्भुज के कुल कोणों का योग सदैव 180°+180°=360° ही रहता है।
प्र. 11: निम्न कथन सत्य हैं या असत्य, बताएँ:
(i) जिस चतुर्भुज के सभी कोण बराबर हों वह वर्ग होता है — असत्य (यह केवल आयत की शर्त है; भुजाएँ बराबर होना भी आवश्यक है)।
(ii) यदि किसी चतुर्भुज के तीन कोण 90° के हों, तो चौथा कोण भी 90° का होगा — सत्य (कोणों का योग 360° होना अनिवार्य है)।
(iii) जिस चतुर्भुज के दोनों जोड़ी सम्मुख कोण बराबर हों, वह समांतर चतुर्भुज होता है — सत्य।
(iv) जिस चतुर्भुज के विकर्ण बराबर हों, वह आयत होता है — असत्य (विकर्णों का समद्विभाजित होना भी आवश्यक है, केवल बराबर होना पर्याप्त नहीं)।
(v) जिस चतुर्भुज के विकर्ण परस्पर लंबवत होकर समद्विभाजित हों, वह समचतुर्भुज होता है — सत्य।
(vi) जिस चतुर्भुज के विकर्ण बराबर होकर समद्विभाजित हों, वह आयत होता है — सत्य।
(vii) हर समद्विबाहु समलंब (isosceles trapezium) एक समांतर चतुर्भुज होता है — असत्य (समलंब में केवल एक जोड़ी भुजाएँ समांतर होती हैं, दोनों जोड़ी नहीं)।
अध्याय 5: संख्याओं का खेल (Number Play)
अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
यह अध्याय एक ही अंत में दी गई प्रश्नावली के बजाय कई “आइए विचार करें / Figure it Out” खंडों में बँटा है। नीचे प्रत्येक खंड के सभी प्रश्न क्रमवार दिए गए हैं।
खंड: क्रमागत संख्याएँ व सम-विषम व्यवहार
प्र. 1: क्या प्रत्येक प्राकृत संख्या को क्रमागत संख्याओं के योग के रूप में लिखा जा सकता है?
हल: नहीं। अनेक संख्याएँ इस रूप में लिखी जा सकती हैं (जैसे 7 = 3+4), परन्तु 2 की घातें (1, 2, 4, 8, 16…) इस रूप में कभी नहीं लिखी जा सकतीं।
प्र. 2: 3, 4, 5, 6 के बीच ‘+’ और ‘−’ चिह्न लगाकर कितने भिन्न-भिन्न परिणाम बनाए जा सकते हैं?
हल: कुल 8 संभावनाएँ बनती हैं, जिनके परिणाम हैं: 18, 6, 8, −4, 10, −2, 0, −12। ये सभी परिणाम सम संख्याएँ हैं।
प्र. 3: इसी प्रयोग को 7, 8, 9, 10 तथा 11, 12, 13, 14 के साथ दोहराइए।
हल: दोनों समुच्चयों में भी सभी परिणाम सम संख्याएँ ही आते हैं — प्रतिरूप हर चार क्रमागत संख्याओं के लिए सत्य रहता है।
प्र. 4: स्पष्ट कीजिए यह प्रतिरूप हर चार क्रमागत संख्याओं के लिए क्यों सत्य है।
हल: चार क्रमागत संख्याएँ सदैव n, n+1, n+2, n+3 के रूप में लिखी जा सकती हैं। इनके बीच चिह्न लगाने पर सम±सम=सम तथा विषम±विषम=सम — इसलिए परिणाम सदैव सम होता है।
प्र. 5: व्यंजक a+b−c−d में ओ∣ण चिह्न को धन चिह्न में बदलने पर मान में कितना अंतर आता है?
हल: अंतर = 2c होता है, अर्थात किसी भी एक चिह्न को बदलने पर मान उस संख्या के दुगुने से बदल जाता है।
प्र. 6: निम्न में से कौन-से व्यंजक किसी भी पूर्णांक मान के लिए सदैव सम संख्या देते हैं — 2a+2b, 3g+5h, 4m+2n, 2u−4v, 13k−5k, 6m−3n, x²+2, b²+1, 4k×3j?
हल:
2a+2b — सदैव सम (दो सम संख्याओं का योग)।
3g+5h — कभी-कभी सम (परिभाषा पर निर्भर)।
4m+2n — सदैव सम।
2u−4v — सदैव सम।
13k−5k = 8k — सदैव सम।
6m−3n — सदैव सम नहीं (सम−विषम = विषम हो सकता है)।
x²+2 — सदैव सम नहीं (x की समता पर निर्भर)।
b²+1 — सदैव सम नहीं।
4k×3j = 12kj — सदैव सम (4k सम है)।
खंड: 4 से विभाज्यता के जोड़े
प्र. 1: दो सम संख्याओं का योग 4 का गुणज कब होता है?
हल: जब दोनों संख्याएँ 4 की गुणज हों (जैसे 8+12=20), अथवा दोनों 4 से भाग देने पर शेष 2 दें (जैसे 6+10=16)। यदि एक 4 की गुणज हो और दूसरी न हो, तो योग सम तो होगा पर 4 का गुणज नहीं होगा।
खंड: सदैव, कभी-कभी या कभी नहीं
प्र. (i): यदि 8, दो संख्याओं को अलग-अलग विभाजित करता है, तो क्या वह उनके योग व अंतर को भी विभाजित करेगा?
हल: सदैव सत्य। यदि संख्याएँ 8a व 8b हैं, तो 8a+8b=8(a+b) तथा 8a−8b=8(a−b), दोनों 8 से विभाज्य हैं। (उदाहरण: 16+24=40 ✓; 8+56=64 ✓)
प्र. (ii): यदि कोई संख्या 8 से विभाज्य है, तो उसे बनाने वाली कोई भी दो संख्याएँ अलग-अलग 8 से विभाज्य होंगी?
हल: कभी-कभी सत्य। प्रति-उदाहरण: 24=10+14, न तो 10 न 14, 8 से विभाज्य है। परन्तु 32=16+16 में दोनों विभाज्य हैं।
प्र. (iii): यदि कोई संख्या 7 से विभाज्य है, तो उसके सभी गुणज भी 7 से विभाज्य होंगे?
हल: सदैव सत्य। n=7k हो तो n का कोई भी गुणज m=n×t=7(kt), जो 7 से विभाज्य है।
प्र. (iv): यदि कोई संख्या 12 से विभाज्य है, तो क्या वह 12 के सभी गुणनखंडों (1,2,3,4,6,12) से विभाज्य होगि?
हल: सदैव सत्य — उदाहरण: 36, इन सभी से विभाज्य है।
प्र. (v): यदि कोई संख्या 7 से विभाज्य है, तो क्या वह 7 के हर गुणज से भी विभाज्य होगी?
हल: कभी-कभी सत्य। 21, 7 से विभाज्य है पर 14 से नहीं; जबकि 42, दोनों से विभाज्य है।
प्र. (vi): यदि कोई संख्या 9 और 4 दोनों से विभाज्य है, तो क्या वह 36 से विभाज्य होगी?
हल: सदैव सत्य, क्योंकि ल.स.प.(9,4)=36।
प्र. (vii): यदि कोई संख्या 6 और 4 दोनों से विभाज्य है, तो क्या वह 24 से विभाज्य होगी?
हल: कभी-कभी सत्य। ल.स.प.(6,4)=12। 36, दोनों से विभाज्य है पर 24 से नहीं; 48 तीनों से विभाज्य है।
प्र. (viii): क्या विषम संख्या + सम संख्या सदैव 6 का गुणज हो सकती है?
हल: कभी नहीं, क्योंकि विषम+सम सदैव विषम होता है, और 6 के गुणज सदैव सम होते हैं।
खंड: शेषफल
प्र. 1: 5 से भाग देने पर शेष 3 देने वाली संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल: रूप 5k+3 (k=0,1,2,…) — उदाहरण: 3, 8, 13, 18, 23, 28…
प्र. 2: क्या इन्हें दर्शाने के अन्य व्यंजक भी हैं?
हल: हाँ — जैसे 5(k+1)−2 = 5k+3, अथवा 10x+3, 25x+3 आदि, ये सभी 5k+3 के ही रूप हैं।
Figure It Out — पृष्ठ 122-123
प्र. 1: चार क्रमागत संख्याओं का योग 34 है; वे संख्याएँ ज्ञात कीजिए।
हल: मान लीजिए संख्याएँ n, n+1, n+2, n+3 हैं। योग = 4n+6 = 34 ⟹ n=7। अतः संख्याएँ 7, 8, 9, 10 हैं।
प्र. 2: पाँच क्रमागत संख्याओं में सबसे बड़ी संख्या p है; शेष चार को p के पदों में लिखिए।
हल: p−1, p−2, p−3, p−4।
प्र. 3: बताइए निम्न कथन सदैव, कभी-कभी या कभी नहीं सत्य हैं:
(i) दो सम संख्याओं का योग 3 का गुणज होता है — कभी-कभी (6+12=18 ✓ परंतु 4+10=14 ✗)।
(ii) यदि कोई संख्या 18 से विभाज्य नहीं है, तो वह 9 से भी विभाज्य नहीं होगी — कभी नहीं (27, 9 से विभाज्य है पर 18 से नहीं)।
(iii) यदि दो संख्याएँ 6 से विभाज्य न हों, तो उनका योग भी 6 से विभाज्य नहीं होगा — कभी-कभी (4+8=12 ✓ विभाज्य; 5+7=12 भी विभाज्य — प्रति-उदाहरण के लिए 4+2=6 भी देखा जा सकता है)।
(iv) 6 के गुणज व 9 के गुणज का योग 3 का गुणज होता है — सदैव (6a+9b=3(2a+3b))।
(v) 6 के गुणज व 3 के गुणज का योग 9 का गुणज होता है — कभी-कभी (6+3=9 ✓ परंतु 6+6=12 ✗)।
प्र. 4: एसी संख्याएँ ज्ञात कीजिए जो 3 व 4 दोनों से भाग देने पर शेष 2 देती हैं।
हल: ल.स.प.(3,4)=12; संख्याएँ = 12k+2 — उदाहरण: 2, 14, 26, 38, 50, 62…
प्र. 5 (कंकड़ पहेली): कंकड़ों की संख्या 2, 3, 5 से भाग देने पर शेष 1 देती है, तथा 7 से पूर्ण विभाज्य है और 100 से कम है — कितने कंकड़ हैं?
हल: ल.स.प.(2,3,5)=30; संख्या = 30k+1 का रूप, जो 7 से भी विभाज्य हो। जाँचने पर 91=30(3)+1 और 91=7×13। अतः उत्तर = 91।
प्र. 6 (तथागत का दावा): तीन ऐसी संख्याओं का योग जो 6 से भाग देने पर शेष 2 देती हैं, सदैव 6 की गुणज होगी — जाँच कीजिए।
हल: (6a+2)+(6b+2)+(6c+2) = 6(a+b+c+1) — यह सदैव 6 से विभाज्य है। अतः दावा सत्य है।
प्र. 7: यदि 661, 7 से भाग देने पर शेष 3 देता है और 4779, शेष 5 देता है, तो बिना भाग किए बताइए:
(i) 4779+661 का 7 से शेष — हल: 5+3=8, जो 7 से भाग देने पर शेष 1 देता है। उत्तर = 1।
(ii) 4779−661 का 7 से शेष — हल: 5−3=2। उत्तर = 2।
प्र. 8: वह छोटी से छोटी संख्या ज्ञात कीजिए जो 3 से भाग देने पर शेष 2, 4 से भाग देने पर शेष 3, तथा 5 से भाग देने पर शेष 4 देती है।
हल: प्रत्येक शेष अपने भाजक से 1 कम है, इसलिए (संख्या+1), 3,4,5 का उभयनिष्ठ गुणज होगी। ल.स.प.(3,4,5)=60 ⟹ संख्या+1=60 ⟹ संख्या=59।
खंड 5.2: विभाज्यता की शीघ्र जाँच
प्र. 1: 2, 4, 5, 8 से विभाज्यता के नियमों को बीजगणितीय रूप से समझाइए।
हल: किसी संख्या 1000d+100c+10b+a के लिए — 5 से विभाज्य यदि इकाई अंक 0 या 5 हो; 2 से विभाज्य यदि इकाई अंक सम हो; 4 से विभाज्य यदि अंतिम दो अंकों से बनी संख्या 4 से विभाज्य हो; 8 से विभाज्य यदि अंतिम तीन अंकों से बनी संख्या 8 से विभाज्य हो — क्योंकि 10, 100, 1000 क्रमशः 4, 8 आदि के गुणज (या निकट) हैं।
Figure It Out — 9 से विभाज्यता (पृष्ठ 126)
प्र. 1: बिना भाग किए बताइए ये 9 से विभाज्य हैं या नहीं: 123, 405, 8888, 93547, 358095।
हल:
123 → अंकों का योग 1+2+3=6 → विभाज्य नहीं।
405 → 4+0+5=9 → विभाज्य।
8888 → 8+8+8+8=32 → विभाज्य नहीं।
93547 → 9+3+5+4+7=28 → विभाज्य नहीं।
358095 → 3+5+8+0+9+5=30 → विभाज्य नहीं।
प्र. 2: 9 की सबसे छोटी गुणज संख्या ज्ञात कीजिए जिसमें कोई विषम अंक न हो।
हल: केवल 0,2,4,6,8 अंक प्रयोग होंगे। सबसे छोटी संख्या 288 है (अंक योग=2+8+8=18, जो 9 से विभाज्य है)।
प्र. 3: 6000 के निकटतम 9 की गुणज संख्या ज्ञात कीजिए।
हल: 9×666=5994, 9×667=6003। दूरी: |6000−5994|=6, |6003−6000|=3। अतः निकटतम = 6003।
प्र. 4: 4300 और 4400 के बीच 9 की कुल कितनी गुणज संख्याएँ हैं?
हल: 4302=9×478 से 4392=9×488 तक — कुल = 488−478+1 = 11 गुणज संख्याएँ।
खंड: 3 से विभाज्यता
प्र. 1: 10 की घातों को 3 से भाग देने पर शेष अंकों के योग की विधि क्यों काम करती है, समझाइए।
हल: 10, 100, 1000… सभी 3 से भाग देने पर शेष 1 देते हैं। इसलिए किसी संख्या abcd = 1000a+100b+10c+d को 3 से भाग देने पर वही शेष मिलता है जो (a+b+c+d) को 3 से भाग देने पर मिलता है — अर्थात संख्या और उसके अंकों के योग का 3 से शेष समान रहता है।
खंड: 11 से विभाज्यता
प्र. 1: क्या 462, 11 से विभाज्य है?
हल: स्थानीय मान — 400,60,2 के शेष क्रमशः +4,−6,+2 हैं (मॉड्यूलो 11)। योग = 4−6+2=0। अतः 462, 11 से विभाज्य है।
प्र. 2: 11 से विभाज्यता का सामान्य नियम लिखिए।
हल: (विषम स्थानों के अंकों का योग) − (सम स्थानों के अंकों का योग) यदि 0 या 11 का गुणज हो, तो संख्या 11 से विभाज्य होगी।
प्र. 3: निम्न संख्याओं के लिए 11 से विभाज्यता व शेषफल ज्ञात कीजिए: 158, 841, 481, 5529, 90904, 857076।
हल:
158 → (8+1)−5=4 → विभाज्य नहीं, शेष 4।
841 → (1+8)−4=5 → विभाज्य नहीं, शेष 5।
481 → (1+4)−8=−3 → विभाज्य नहीं, शेष 3 (परिमाण अनुसार)।
5529 → (9+5)−(2+5)=7 → विभाज्य नहीं, शेष 7।
90904 → (4+9+9)−(0+0)=22 → 22, 11 का गुणज → विभाज्य।
857076 → (6+0+5)−(7+7+8)=11−22=−11, परिमाण 11 का गुणज → विभाज्य।
खंड: अंकीय मूल (Digital Roots)
प्र. 1: अंकीय मूल क्या है?
हल: किसी संख्या को 9 से भाग देने पर मिला शेष उसका अंकीय मूल है; यदि शेष 0 हो, तो अंकीय मूल 9 होता है।
प्र. 2: 600 से 700 के बीच किन संख्याओं का अंकीय मूल (i) 5 (ii) 7 (iii) 3 है?
हल: अंकीय मूल हर 9 संख्याओं पर दोहराता है — मूल 5: 608, 617, 626…; मूल 7: 601, 610, 619…; मूल 3: 606, 615, 624…
प्र. 3: 101 से शुरू होने वाली 12 क्रमागत संख्याओं के अंकीय मूल ज्ञात कीजिए।
हल: 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 1, 2, 3, 4 — प्रतिरूप हर 9 संख्याओं पर दोहराता है।
प्र. 4: 3, 4 व 6 के क्रमागत गुणजों के अंकीय मूल ज्ञात कीजिए।
हल: 3 के गुणज: चक्र 3,6,9; 4 के गुणज: चक्र 4,8,3,7,2,6; 6 के गुणज: चक्र 6,3,9।
प्र. 5: 6 के गुणज से 1 अधिक संख्याओं (7,13,19,25,31,37…) के अंकीय मूल ज्ञात कीजिए।
हल: 7, 4, 1, 7, 4, 1… — 3 की आवृत्ति वाला चक्र।
प्र. 6: ऐसी संख्या ज्ञात कीजिए जो केवल विषम अंकों से बनी हो और उसका अंकीय मूल सबसे बड़ा एकल विषम अंक हो।
हल: उदाहरण — नौ ‘1’ अंकों से बनी संख्या 111111111; अंक योग=9, अंकीय मूल=9।
Figure It Out — पृष्ठ 131
प्र. 1: एक 8-अंकीय संख्या का अंकीय मूल 5 है; उसमें 10 जोड़ने पर नया अंकीय मूल क्या होगा?
हल: 6 (चूँकि 5+1=6, इकाई का अंक बदलता है और शेष सम रहता है — कुल अंकीय मूल 1 बढ़ जाता है)।
प्र. 2: किसी संख्या में बार-बार 11 जोड़ने पर अंकीय मूल का क्रम क्या बनता है?
हल: प्रत्येक चरण में अंकीय मूल 2 से बढ़ता है और 9 पर पहुँचकर चक्र दोहराता है — जैसे 1, 3, 5, 7, 9, 2, 4, 6, 8, 1…
प्र. 3: व्यंजक 9a+36b+13 का अंकीय मूल ज्ञात कीजिए।
हल: 9a और 36b दोनों 9 के गुणज हैं, इसलिए अंकीय मूल केवल 13 पर निर्भर करता है — 1+3=4। अतः अंकीय मूल = 4।
प्र. 4: क्या समता (parity) और अंकीय मूल में कोई संबंध है? अंकीय मूल और 3/9 से शेष में क्या संबंध है?
हल: समता व अंकीय मूल के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। परंतु अंकीय मूल = 9 से भाग का शेष (शेष 0 होने पर मूल 9) — इसी से किसी संख्या की 3 या 9 से विभाज्यता जानी जा सकती है।
खंड 5.3: अंकों की पहेलियाँ (Digits in Disguise)
प्र. 1: GH × H = 9K हल कीजिए (जहाँ G,H,K भिन्न अंक हैं)।
हल: 24 × 4 = 96 (G=2,H=4,K=6)।
प्र. 2 — निम्न गूढ़कलन (cryptarithms) हल कीजिए:
(i) UT × 3 = PUT
हल: 10U+T को 3 से गुणा करने पर 100P+10U+T मिले — बीजगणितीय रूप से हल करने पर 10U+T=50P मिलता है। P=1 लेने पर UT=50। जाँच: 50×3=150। अतः 50 × 3 = 150 (U=5, T=0, P=1)।
(ii) AB × 5 = BC
हल: 19 × 5 = 95 (A=1, B=9, C=5) — जाँच: AB का दहाई अंक 9=B, गुणनफल का दहाई अंक भी 9 है।
(iii) L2N × 2 = 2NP
हल (स्वतः सत्यापित): बीजगणितीय रूप से हल करने पर दो मान्य हल मिलते हैं — 124 × 2 = 248 (L=1,N=4,P=8) तथा 125 × 2 = 250 (L=1,N=5,P=0)।
(iv) XY × 4 = ZX
हल (स्वतः सत्यापित): 23 × 4 = 92 (X=2, Y=3, Z=9) — यही एकमात्र हल है।
(v) PP × QQ = PRP
हल (स्वतः सत्यापित): QQ सदैव 11 होना चाहिए; तब P=1,2,3,4 के लिए हल मिलते हैं — जैसे 11 × 11 = 121 (P=1,R=2), 22 × 11 = 242 (P=2,R=4), 33 × 11 = 363 (P=3,R=6), 44 × 11 = 484 (P=4,R=8)।
(vi) JK × 6 = KKK
हल: 74 × 6 = 444 (J=7, K=4) — यही एकमात्र हल है।
Figure It Out — पृष्ठ 132-134
प्र. 1: यदि 31z5, 9 की गुणज है, तो z ज्ञात कीजिए।
हल: अंकों का योग = 3+1+z+5 = 9+z, जो 9 से विभाज्य होना चाहिए। अतः z=0 या z=9 (संख्या 3105 या 3195, दोनों 9 से विभाज्य)।
प्र. 2: स्नेहल का दावा — 12 से भाग देने पर शेष 8 देने वाली संख्या और 12 से भाग देने पर शेष −4 (अर्थात 8) देने वाली संख्या का योग सदैव 8 का गुणज होता है — जाँच कीजिए।
हल: दावा असत्य। प्रति-उदाहरण: 20+32=52, जो 8 से विभाज्य नहीं है।
प्र. 3: दो 3 के गुणजों का योग कब 6 का गुणज होता है?
हल: जब दोनों संख्याएँ या तो सम गुणक वाली या विषम गुणक वाली हों — अर्थात 3a+3b=3(a+b), जो 6 का गुणज तभी होगा जब (a+b) सम हो।
प्र. 4: श्रीलता का अनुमान — 9 के किसी गुणज के अंकों को उलटने (reverse) पर बनी संख्या भी 9 की गुणज रहती है — जाँच कीजिए।
हल: सत्य है। अंकों को उलटने या फेरबदल करने से अंकों का योग नहीं बदलता, इसलिए 9 से विभाज्यता बनी रहती है।
प्र. 5: यदि 48a23b, 18 की गुणज है, तो (a,b) के सभी संभव युग्म ज्ञात कीजिए।
हल: 2 से विभाज्यता हेतु b सम (0,2,4,6,8); 9 से विभाज्यता हेतु (17+a+b) 9 से विभाज्य होना चाहिए, अर्थात a+b=1 या 10। हल करने पर मान्य युग्म — (1,0), (8,2), (6,4), (4,6), (2,8)।
प्र. 6: यदि 3p7q8, 44 की गुणज है, तो (p,q) के सभी संभव युग्म ज्ञात कीजिए।
हल: 4 से विभाज्यता हेतु q सम होना चाहिए; 11 से विभाज्यता हेतु [(3+7+8)−(p+q)]≡0(mod 11), अर्थात p+q=7। हल करने पर मान्य युग्म — (7,0), (5,2), (3,4), (1,6)।
प्र. 7: ऐसी तीन क्रमागत संख्याएँ ज्ञात कीजिए जिनमें पहली 2 से, दूसरी 3 से, और तीसरी 4 से विभाज्य हो।
हल: उदाहरण: 2,3,4; 14,15,16; 26,27,28… प्रतिरूप हर ल.स.प.(2,3,4)=12 पर दोहराता है — सामान्य रूप 12n+2।
प्र. 8: 45,000 और 47,000 के बीच 36 की पाँच गुणज संख्याएँ लिखिए।
हल: उदाहरण: 45036, 45072, 45108, 45144, 45180 (प्रत्येक में 36 का अंतर)।
प्र. 9: पाँच क्रमागत सम संख्याओं का मध्य पद 5p है; शेष चार को व्यक्त कीजिए।
हल: 5p−4, 5p−2, 5p+2, 5p+4।
प्र. 10: एक 6-अंकीय संख्या ऐसी ज्ञात कीजिए जो 15 से विभाज्य हो, और उसे उलटने पर बनी संख्या 6 से विभाज्य हो।
हल: उदाहरण — 630255 (15 से विभाज्य); उलटने पर 552036, जो 6 से विभाज्य है।
प्र. 11: दीपक का दावा — 11 के कुछ गुणजों को दुगुना करने पर वे 11 के गुणज नहीं रहते — जाँच कीजिए।
हल: दावा असत्य। 11 के प्रत्येक गुणज (11k) को दुगुना करने पर 22k मिलता है, जो सदैव 11 से विभाज्य रहता है।
प्र. 12: बताइए निम्न कथन सदैव/कभी-कभी/कभी नहीं सत्य हैं:
(i) 6 के गुणज और 3 के गुणज का गुणनफल 9 का गुणज होता है — सदैव (6×3=18=2×9)।
(ii) तीन क्रमागत सम संख्याओं का योग 6 से विभाज्य होता है — सदैव (2n+2n+2+2n+4=6n+6=6(n+1))।
(iii) यदि abcdef, 6 की गुणज है, तो badcef भी 6 की गुणज होगी — सदैव (अंकों की अदला-बदली से अंक-योग व इकाई अंक की समता नहीं बदलती)।
(iv) 8(7b−3)−4(11b+1), 12 का गुणज होता है — कभी नहीं (सरल करने पर 12b−28 मिलता है, जो 12 से विभाज्य नहीं)।
प्र. 13: किन्हीं तीन संख्याओं का योग 3 से कब विभाज्य होगा?
हल: जब उनके 3 से शेषों का योग भी 3 से विभाज्य हो — अर्थात या तो तीनों 3 से विभाज्य हों, या तीनों का शेष समान हो, या तीनों के शेष 0,1,2 अलग-अलग हों।
प्र. 14: क्या क्रमागत पूर्णांकों का गुणनफल क्रमशः 2, 6, 24, 120 का गुणज होता है?
हल: दो क्रमागत संख्याओं का गुणनफल सदैव 2 का गुणज; तीन क्रमागत का 6 का गुणज; चार क्रमागत का 24 का गुणज; पाँच क्रमागत का 120 का गुणज होता है — यह क्रमागत पूर्णांकों में हर संभावित शेष के आ जाने के कारण होता है।
प्र. 15 — निम्न गूढ़कलन हल कीजिए:
(i) EF × E = GGG
हल (स्वतः सत्यापित, एकमात्र हल): 37 × 3 = 111 (E=3, F=7, G=1)।
(ii) WOW × 5 = MEOW
हल (स्वतः सत्यापित): इंटरनेट के कुछ स्रोतों पर दिया गया उत्तर “909 × 5 = 4545” वास्तव में पहेली की शर्त पूर्ण नहीं करता (O का मान मेल नहीं खाता), अतः इसे यहाँ ठीक किया गया है। सत्यापित हल — 525 × 5 = 2625 (W=5, O=2, M=2, E=6); एक अन्य मान्य हल 575 × 5 = 2875 भी है (W=5, O=7, M=2, E=8)।
प्र. 16: कौन-सा वेन आरेख 4, 8 व 32 के गुणजों के बीच संबंध सही दर्शाता है?
हल: वह आरेख सही है जिसमें 32 के प्रत्येक गुणज को 8 व 4 के गुणजों के वृत्त के अंदर, और 8 के प्रत्येक गुणज को 4 के गुणज के वृत्त के अंदर दिखाया गया हो (क्योंकि 32 का हर गुणज 8 का भी गुणज है, और 8 का हर गुणज 4 का भी गुणज है — परन्तु उलटा सत्य नहीं)।
अध्याय 6: जितना बाँटेंगे उतना बढ़ेगा (हम बाँटते हैं, फिर भी गुणा बढ़ता है)
यह अध्याय बीजगणितीय सर्वसमिकाओं (algebraic identities) और बहुपदों के गुणन-विस्तार पर आधारित है — मुख्य विषय है: वितरण गुणधर्म (distributive property) से (a+b)², (a−b)², (a+b)(a−b) जैसी सर्वसमिकाओं की व्युत्पत्ति और उनका प्रयोग शीघ्र गणना, संख्या-प्रतिरूप व क्षेत्रफल संबंधी समस्याओं में।
अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: गुणनफल में परिवर्तन
प्र. 1: 23 और 27 की संख्याओं में — यदि पहली संख्या में 1 जोड़ा जाए तो गुणनफल कितना बढ़ता है? दूसरी में 1 जोड़ने पर? दोनों में 1 जोड़ने पर?
हल: पहली में 1 जोड़ने पर गुणनफल 27 से बढ़ता है; दूसरी में 1 जोड़ने पर 23 से बढ़ता है; दोनों में 1 जोड़ने पर गुणनफल (23+27+1)=51 से बढ़ता है — क्योंकि (a+1)(b+1)=ab+a+b+1।
प्र. 2: यदि एक संख्या में 1 जोड़ा जाए और दूसरी में से 1 घटाया जाए, तो गुणनफल में क्या परिवर्तन होता है? तीन एसे उदाहरण दीजिए जहाँ गुणनफल घटे।
हल: परिवर्तन = (b−a−1), जो धनात्मक, ओणात्मक या शून्य हो सकता है — अतः गुणनफल सदैव नहीं बढ़ता। उदाहरण:
a=10,b=8: 10×8=80 → 11×7=77 (3 की कमी, चूँकि b−a−1=8−10−1=−3)।
a=15,b=12: 15×12=180 → 16×11=176 (4 की कमी, चूँकि 12−15−1=−4)।
a=7,b=5: 7×5=35 → 8×4=32 (3 की कमी, चूँकि 5−7−1=−3)।
खंड: व्यापक सर्वसमिका (a+m)(b+n)
प्र. 1: (a+m)(b+n) का विस्तार कीजिए और गुणनफल में परिवर्तन ज्ञात कीजिए।
हल: (a+m)(b+n) = ab+an+bm+mn, अतः गुणनफल में परिवर्तन = an+bm+mn।
प्र. 2: यदि एक संख्या 2 से घटे और दूसरी 3 से बढ़े, तो गुणनफल में परिवर्तन ज्ञात कीजिए।
हल: परिवर्तन = 3a−2b−6 (सूत्र an+bm+mn में m=−2, n=3 रखने पर)।
प्र. 3: यदि दोनों संख्याएँ क्रमशः 3 और 4 से घटें, तो गुणनफल में परिवर्तन ज्ञात कीजिए।
हल: परिवर्तन = 12−4a−3b।
खंड: गुणन-विस्तार
प्र. निम्न को सरल कीजिए:
(i) (3+u)(v−3) = 3v+uv−9−3u
(ii) (2/3)(15+6a) = 10+4a
(iii) (10a+b)(10c+d) = 100ac+10ad+10bc+bd
(iv) (3−x)(x−6) = −x²+9x−18
(v) (−5a+b)(c+d) = −5ac−5ad+bc+bd
(vi) (5+z)(y+9) = 5y+45+zy+9z
खंड: गुणनफल अपरिवर्तित रहना
प्र.: तीन उदाहरण दीजिए जहाँ (a+2)(b−4) = ab हो।
हल: शर्त: b=2a+4। उदाहरण — a=1,b=6: 1×6=6 और 3×2=6; a=2,b=8: 2×8=16 और 4×4=16; a=3,b=10: 3×10=30 और 5×6=30।
खंड: जटिल गुणन-विस्तार
(i) (a+ab−3b²)(4+b) = 4a+5ab+ab²−12b²−3b³
(ii) (4y+7)(y+11z−3) = 4y²+44yz−5y+77z−21
खंड: घातों के अंतर का प्रतिरूप
(i) (a−b)(a+b) = a²−b²
(ii) (a−b)(a²+ab+b²) = a³−b³
(iii) (a−b)(a³+a²b+ab²+b³) = a⁴−b⁴
प्रतिरूप: अगला पद (a−b)(a⁴+a³b+a²b²+ab³+b⁴) = a⁵−b⁵ — सामान्यतः (a−b) को मिश्रित घातों के योग से गुणा करने पर aⁿ−bⁿ प्राप्त होता है।
खंड: 11, 101, 1001, 99, 999 से गुणा
प्र.: निम्न का गुणनफल शीघ्र विधि से ज्ञात कीजिए:
(i) 94 × 11 = 1034 (अंक 9,4 का योग 13 → 3 लिखें, 1 आगे बढ़ाएँ)
(ii) 495 × 11 = 5445
(iii) 3279 × 11 = 36069
(iv) 4791256 × 11 = 52703816 (ध्यान दें: कुछ द्वितीयक स्रोतों में यह अंतिम अंक भिन्न दिखा है — पाठ्यपुस्तक से प्रत्यक्ष मिलान की सलाह दी जाती है)
(v) 89 × 101 = 8900+89 = 8989
(vi) 949 × 101 = 94900+949 = 95849
(vii) 265831 × 1001 = 265831000+265831 = 266096831
(viii) 1111 × 1001 = 1111000+1111 = 1112111
(ix) 9734 × 99 = 9734×(100−1) = 973400−9734 = 963666
(x) 23478 × 999 = 23478×(1000−1) = 23478000−23478 = 23454522
खंड: वर्ग की गणना (Perfect Squares)
प्र. 1: 104² को (a+b)² = a²+b²+2ab का प्रयोग कर ज्ञात कीजिए।
हल: 104=100+4 ⟹ 100²+4²+2(100)(4) = 10000+16+800 = 10816।
प्र. 2: 37² को (a−b)² का प्रयोग कर ज्ञात कीजिए।
हल: 37=40−3 ⟹ 40²+3²−2(40)(3) = 1600+9−240 = 1369।
खंड: वर्ग-विस्तार
(i) (m+3)² = m²+6m+9
(ii) (6+p)² = p²+12p+36
(iii) (6x+5)² = 36x²+60x+25
(iv) (3j+2k)² = 9j²+12jk+4k²
खंड: वर्गों का अंतर व शीघ्र वर्ग-गणना
प्र. 1: 55² ज्ञात कीजिए (55=60−5)।
हल: 60²+5²−2(60)(5) = 3600+25−600 = 3025।
प्र. 2: 99² ज्ञात कीजिए (99=100−1)।
हल: 10000+1−200 = 9801।
प्र. 3: 58² ज्ञात कीजिए (58=60−2)।
हल: 3600+4−240 = 3364।
खंड: सर्वसमिकाओं का अनुप्रयोग
प्र. 1: दर्शाइए कि 2(a²+b²) = (a+b)²+(a−b)²। a=5,b=6 लेकर सत्यापित कीजिए।
हल: बायाँ पक्ष = 2(25+36)=2(61)=122। दायाँ पक्ष = 11²+(−1)² = 121+1=122। दोनों पक्ष बराबर — सर्वसमिका सत्यापित।
प्र. 2: निम्न गुणनफल (a+b)(a−b)=a²−b² के प्रयोग से ज्ञात कीजिए:
(i) 98 × 102 = (100−2)(100+2) = 10000−4 = 9996
(ii) 45 × 55 = (50−5)(50+5) = 2500−25 = 2475
प्र. 3: क्या (a−b)² = (b−a)² सदैव सत्य है?
हल: हाँ, सदैव सत्य है, क्योंकि वर्ग करने पर ओण चिह्न समाप्त हो जाता है।
प्र. 4: 100 को दो वर्गों के अंतर के रूप में लिखिए।
हल: उदाहरण: 100 = 14.5²−10.5² = 210.25−110.25 = 100। (a−b)(a+b)=100 में a−b=1, a+b=100 लेकर a=50.5, b=49.5 से भी 100=50.5²−49.5² प्राप्त किया जा सकता है।
खंड: शीघ्र वर्ग-गणना (बड़ी संख्याएँ)
406² = (400+6)² = 160000+36+4800 = 164836
72² = (70+2)² = 4900+4+280 = 5184
145² = (150−5)² = 22500+25−1500 = 21025
1097² = (1100−3)² = 1210000+9−6600 = 1203409
124² = (120+4)² = 14400+16+960 = 15376
खंड: त्रुटि सुधार (Error Correction)
1. −3p(−5p+2q) = 15p²−6pq (गलत उत्तर था “p−2q”)
2. 2(x−1)+3(x+4) = 5x+10 (गलत उत्तर था “5x+3”)
3. y+2(y+2) = 3y+4 (गलत उत्तर था “(y+2)²”)
4. (5m+6n)² = 25m²+60mn+36n² (मध्य पद छूट गया था)
5. (−q+2)² = q²−4q+4 — सही था
6. 3a(2b×3c) = 18abc (गलत उत्तर था “54a²bc”)
7. (1/2)(10s−6)+3 = 5s — सही था
8. 5w²+6w — यह पहले से ही सरलतम रूप में है (गलती से “11w²” लिखा गया था)
9. 2a³+3a³+6a²b+6ab² = 5a³+6a²b+6ab² (गलत उत्तर था “12a²b²”)
10. (x+2)(x+5) = x²+7x+10 — सही था
11. (a+2)(b+4) = ab+4a+2b+8 (गलत उत्तर था “ab+8”)
12. ab²+a²b+a²b² = ab(b+a+ab) — सही था
खंड: ज्यामितीय प्रतिरूप
प्र. 1: पद (step) k में वृत्तों (circles) की संख्या का सूत्र क्या है? पद 15 के लिए गणना कीजिए।
हल: सूत्र = k²+2k। पद 15 के लिए: 15²+2(15) = 225+30 = 255 वृत्त।
प्र. 2: वर्गाकार टाइलों (tiles) के प्रतिरूप में पद k से पद (k+2) तक कितनी नई टाइलें जुड़ती हैं?
हल: सूत्र = (k+2)²−k² = 4k+4। पद 1: 8 टाइलें; पद 2: 12; पद 3: 16; पद 4: 20; पद 10: 44 टाइलें।
प्र. 3: भीतरी वर्ग का क्षेत्रफल (m,n भुजाओं वाली आकृति में) ज्ञात कीजिए और सत्यापित कीजिए।
हल: भीतरी वर्ग का क्षेत्रफल = (n−m)²। सत्यापन: (m+n)²−4mn = m²+2mn+n²−4mn = m²+n²−2mn = (n−m)² ✓
प्र. 4: यदि x=8, y=3 हों, तो तीन आयतों (x भुजा वाले) से बने छायांकित क्षेत्र का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल: क्षेत्रफल = x²−xy = x(x−y)। x=8,y=3 रखने पर: 64−24 = 40।
प्र. 5: p=6, r=3.5, s=9 भुजाओं वाली आकृति में डैश-रेखा वाले क्षेत्र का क्षेत्रफल ज्ञात कीजिए।
हल: क्षेत्रफल = ps−pr−sr+r²। मान रखने पर: 54−21−31.5+12.25 = 13.75। (यह प्रश्न मूल आकृति पर निर्भर है; संख्यात्मक गणना सूत्र के अनुसार सही है, पर आकृति का सटीक मिलान पाठ्यपुस्तक से करना उचित होगा।)
अंतिम अभ्यास (पृष्ठ 154)
(i) 46² = (40+6)² = 1600+36+480 = 2116
(ii) 397 × 403 = (400−3)(400+3) = 160000−9 = 159991
(iii) 91² = (100−9)² = 10000+81−1800 = 8281
(iv) 43 × 45 = (44−1)(44+1) = 1936−1 = 1935
अध्याय 7: समानुपातिक तर्कण-1 (Proportional Reasoning-1)
अंतिम प्रश्नावली — सभी प्रश्नों के पूर्ण हल (NCERT आधिकारिक पाठ्यपुस्तक से, बहु-स्रोत सत्यापित)
खंड: समान परिवर्तन को पहचानना
प्र. 1: आकृति A से आकृति D तक चौड़ाई और ऊँचाई किस गुणक से बदलती है?
हल: दोनों (चौड़ाई व ऊँचाई) 3/2 गुणक से बदलती हैं — इसीलिए आकृति D, आकृति A के समरूप (similar) दिखती है।
प्र. 2: 60:40 अनुपात को किस गुणक से गुणा करने पर 90:60 प्राप्त होता है?
हल: गुणक = 3/2। जाँच: 60×3/2=90, 40×3/2=60।
खंड: फिल्टर कॉफी उदाहरण (समस्या-समाधान)
प्र. 1: यह कॉफी अधिक तेज़ (strong) क्यों है?
हल: सामान्य कॉफी में डिकॉक्शन:दूध = 15:35। तेज़ कॉफी में = 20:30। दोनों को समान आधार पर लाने पर स्पष्ट होता है कि तेज़ कॉफी में डिकॉक्शन की तुलना में दूध कम है, इसलिए वह अधिक तेज़ है।
प्र. 2: यह कॉफी अधिक हल्का (weak) क्यों है?
हल: हल्की कॉफी में डिकॉक्शन:दूध = 10:40, जबकि सामान्य में 15:35 — हल्की कॉफी में डिकॉक्शन की तुलना में दूध अधिक है, इसलिए वह हल्की है।
Figure It Out — पृष्ठ 165-167
प्र. 1: निम्न में से कौन-से सही समानुपात (proportion) हैं — (i) 4:7::12:21 (ii) 8:3::24:6 (iii) 7:12::12:7 (iv) 21:6::35:10 (v) 12:18::28:12 (vi) 24:8::9:3
हल: (i) 4:7=12:21 (दोनों सरल रूप में 4:7) ✓ सही। (ii) 8:3 vs 24:6=4:1, बराबर नहीं ✗। (iii) 7:12 vs 12:7, उलटे हैं ✗। (iv) 21:6=7:2 और 35:10=7:2 ✓ सही। (v) 12:18=2:3 और 28:12=7:3, बराबर नहीं ✗। (vi) 24:8=3:1 और 9:3=3:1 ✓ सही। अतः सही समानुपात: (i), (iv), (vi)।
प्र. 2: 4:9 के समानुपाती तीन अनुपात लिखिए।
हल: 8:18, 12:27, 16:36 (क्रमशः 2, 3, 4 से गुणा करने पर)।
प्र. 3: 18:24 के समानुपाती अनुपातों में लुप्त संख्याएँ भरिए।
हल: 18:24 को सरल करने पर 3:4 मिलता है। अतः — 3:4; 12:16 (3:4 का 4 गुना); 20:80/3 (3:4 का 20/3 गुना, अर्थात 20:26.67); 27:36 (3:4 का 9 गुना)।
प्र. 4-5: (आयतों की समरूपता जाँचना और समानुपाती आयत बनाना — यह आकृति-आधारित/चित्रांकन प्रश्न है, अतः यहाँ केवल विधि बताई जा रही है: भुजाओं के अनुपात को सरलतम रूप में लाकर तुलना कीजिए; बराबर अनुपात होने पर आयत समरूप होंगे।)
प्र. 6: ईंटों की दीवार में धूसर (grey) व रंगीन ईंटों का अनुपात सरलतम रूप में ज्ञात कीजिए।
हल: (यह प्रश्न आकृति पर आधारित है; स्रोतों में संख्याएँ भिन्न-भिन्न बताई गई हैं — कुछ में 9:6=3:2 तो कुछ में 33:18=11:6 — सटीक गणना मूल आकृति में ईंटों की गिनती पर निर्भर करती है, अतः पाठ्यपुस्तक की आकृति से पुष्टि करना उचित होगा।)
प्र. 7: मानव शरीर के अनुपात (सिर:धड़, धड़:भुजा, धड़:टाँग) ज्ञात कीजिए।
हल: यह मापन-आधारित क्रियाकलाप प्रश्न है — विद्यार्थी को अपने शरीर के वास्तविक मापों से अनुपात निकालने होंगे; कोई निश्चित संख्यात्मक उत्तर नहीं है।
Figure It Out — पृष्ठ 170-171
प्र. 1: पृथ्वी सूर्य के चारों ओर 365 दिनों में लगभग 94 करोड़ (940,000,000) किमी की यात्रा करती है। एक सप्ताह में वह कितनी दूरी तय करती है?
हल: x = (940,000,000 × 7) / 365 = 18,027,397 किमी (लगभग)। अतः उत्तर ≈ 1 करोड़ 80 लाख किमी (लगभग 18 million किमी)।
प्र. 2: एक राजमिस्त्री को हर 10 फुट लंबाई की दीवार के लिए 1450 ईंटें चाहिए। यदि दीवार की कुल लंबाई 108 फुट है, तो कुल कितनी ईंटें चाहिए?
हल: x = (1450 × 108) / 10 = 15,660 ईंटें।
प्र. 3: एक मोटरसाइकिल 75 किमी/घंटा की चाल से चलती है। इतनी ही दूरी तय करने में कितना समय लगेगा — (मूल प्रश्न की पूर्ण शर्तें स्रोतों में स्पष्ट नहीं मिलीं)।
हल: उपलब्ध स्रोतों में उत्तर “1 घंटा 20 मिनट” बताया गया है, परंतु प्रश्न की मूल दूरी/शर्त स्पष्ट न होने के कारण यह उत्तर अनिश्चित (असत्यापित) है — कृपया पाठ्यपुस्तक से मूल प्रश्न देखकर पुष्टि करें।
Figure It Out — पृष्ठ 175
प्र. 1: ₹4,500 को 2:3 के अनुपात में बाँटिए।
हल: कुल भाग = 2+3 = 5। पहला भाग = 2×(4500/5) = ₹1,800; दूसरा भाग = 3×(4500/5) = ₹2,700।
प्र. 2: अम्ल व जल का घोल 1:5 के अनुपात में है, कुल मात्रा 240 mL है। अम्ल व जल की मात्रा ज्ञात कीजिए।
हल: कुल भाग = 1+5=6। अम्ल = 1×(240/6) = 40 mL; जल = 5×(240/6) = 200 mL।
प्र. 3: नीला व पीला रंग 3:5 के अनुपात में मिलाकर 40 mL मिश्रण बनाया गया। मात्राएँ ज्ञात कीजिए। बाद में 20 mL पीला रंग और मिलाने पर नया अनुपात क्या होगा?
हल: कुल भाग=8। नीला = 3×(40/8) = 15 mL; पीला = 5×(40/8) = 25 mL। 20 mL पीला और मिलाने पर: नीला=15 mL, पीला=25+20=45 mL → नया अनुपात = 15:45 = 1:3।
प्र. 4: इडली के लिए चावल व उड़द दाल 2:1 के अनुपात में चाहिए। 6 कप मिश्रण के लिए कितने-कितने कप चाहिए?
हल: कुल भाग=3। चावल = 2×(6/3) = 4 कप; उड़द दाल = 1×(6/3) = 2 कप।
प्र. 5: लाल व पीले रंग का मिश्रण एक निश्चित अनुपात में है; इसमें पीले रंग की एक और पूरी बाल्टी मिलाने पर नया अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल: स्रोतों में इस प्रश्न के अंतिम उत्तर में असंगति पाई गई (कहीं 3:13 तो कहीं 3:10 बताया गया है), जो मूल आँकड़ों (प्रारंभिक अनुपात व बाल्टी की मात्रा) की सटीक जानकारी न मिलने के कारण है। अतः यहाँ निश्चित उत्तर न देकर मूल प्रश्न की पाठ्यपुस्तक से पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।
Figure It Out — पृष्ठ 176-177
प्र. 1: संतरे व सेब के जूस का मिश्रण 600 mL व 900 mL है; सरलतम अनुपात ज्ञात कीजिए।
हल: 600:900 = 2:3।
प्र. 2: 3 बसों में 162 विद्यार्थी जाते थे; अब 204 विद्यार्थियों को जाना है — कितनी बसें चाहिए?
हल: प्रति बस विद्यार्थी = 162/3=54। आवश्यक बसें = 204/54 ≈ 3.78 → पूर्णांक में 4 बसें चाहिए (चौथी बस पूरी नहीं भरेगी, उसमें 12 सीटें खाली रहेंगी)।
प्र. 3: दिल्ली की जनसंख्या लगभग 3 करोड़, क्षेत्रफल 1,484 वर्ग किमी; मुंबई की जनसंख्या लगभग 2 करोड़, क्षेत्रफल 550 वर्ग किमी। कौन-सा शहर अधिक घनी आबादी वाला है?
हल: दिल्ली का घनत्व = 30,000,000/1,484 ≈ 20,215 व्यक्ति/वर्ग किमी। मुंबई का घनत्व = 20,000,000/550 ≈ 36,363 व्यक्ति/वर्ग किमी। अतः मुंबई अधिक घनी आबादी वाला शहर है।
प्र. 4: एक सारस (crane) की गर्दन व शरीर के अनुपात के आधार पर किसी व्यक्ति की “गर्दन” की लंबाई ज्ञात करना।
हल: स्रोतों में यह उत्तर असंगत मिला (कहीं 60 cm तो कहीं 66 cm) क्योंकि सारस व व्यक्ति की मूल ऊँचाई/गर्दन के आँकड़े स्रोतों में स्पष्ट व एक समान नहीं मिले। अतः निश्चित संख्यात्मक उत्तर देने के बजाय पाठ्यपुस्तक की मूल आकृति/आँकड़ों से पुष्टि करने की सलाह दी जाती है।
प्र. 5 (लीलावती की प्राचीन समस्या): यदि 2½ पल केसर 3/7 निष्क में बिकता है, तो 9 निष्क में कितना केसर बिकेगा?
हल: x = (9 × 2.5) / (3/7) = (9 × 2.5 × 7)/3 = 157.5/3 = 52½ पल।
प्र. 6: हरमैन और उसके भाई की उम्र का अंतर सदैव स्थिर (मान लीजिए 4 वर्ष) रहता है। किस उम्र पर उनका अनुपात 1:2 होगा?
हल: मान लीजिए हरमैन की उम्र x है, भाई की x+4। शर्त: x/(x+4)=1/2 ⟹ 2x=x+4 ⟹ x=4। अतः हरमैन 4 वर्ष का होने पर अनुपात 1:2 होगा।
प्र. 7: सोने व पानी का घनत्व-अनुपात 37:2 है (अर्थात समान आयतन के लिए सोने का द्रव्यमान पानी का 37/2 गुना है)। यदि 1 लीटर पानी का द्रव्यमान 1 किग्रा है, तो 1 लीटर सोने का द्रव्यमान ज्ञात कीजिए।
हल: द्रव्यमान = (37×1)/2 = 18½ किग्रा।
प्र. 8: 200×500 फुट के खेत के लिए, यदि प्रति एकड़ 10 टन गोबर खाद चाहिए, तो कुल कितनी खाद चाहिए? (1 एकड़ = 43,560 वर्ग फुट)
हल: खेत का क्षेत्रफल = 200×500 = 100,000 वर्ग फुट = 100,000/43,560 ≈ 2.296 एकड़। खाद = 2.296×10 ≈ 22.96 टन (लगभग 23 टन)।
प्र. 9: एक नल 15 सेकंड में 500 mL पानी भरता है। 10 लीटर की बाल्टी भरने में कितना समय लगेगा?
हल: x = (10,000×15)/500 = 300 सेकंड = 5 मिनट।
प्र. 10: यदि 1 एकड़ भूमि का मूल्य ₹15,00,000 है, तो 2,400 वर्ग फुट भूमि का मूल्य ज्ञात कीजिए।
हल: x = (2,400×15,00,000)/43,560 ≈ ₹82,645 (लगभग)।
प्र. 11: एक जोड़ी बैल 1 एकड़ खेत जोतने में 6 घंटे लेते हैं; एक ट्रैक्टर बैलों से 4 गुणा तेज़़ है। 20 एकड़ खेत जोतने में दोनों को कितना-कितना समय लगेगा?
हल: बैलों का समय = 20×6 = 120 घंटे। ट्रैक्टर का समय = 120/4 = 30 घंटे।
प्र. 12: ₹10 के सिक्के में ताँबा (copper) व निकल (nickel) 3:1 के अनुपात में हैं; सिक्के का कुल द्रव्यमान 7.74 ग्राम है। यदि ताँबे की कीमत ₹906/किग्रा और निकल की ₹1,341/किग्रा हो, तो सिक्के में प्रयुक्त धातु की कुल कीमत ज्ञात कीजिए।
हल: कुल भाग=4। ताँबा = 3×(7.74/4) = 5.805 ग्राम; निकल = 1×(7.74/4) = 1.935 ग्राम। ताँबे की कीमत = (906×5.805)/1000 ≈ ₹5.26। निकल की कीमत = (1341×1.935)/1000 ≈ ₹2.59। कुल कीमत ≈ ₹7.85।
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